सड़कों पर उतरे टीचर, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन:थर्ड ग्रेड शिक्षकों के ट्रांसफर से रोक हटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों से रोक हटाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को राजस्थान शिक्षक संघ के प्रांतीय आह्वान पर जिलेभर के शिक्षकों ने चेतावनी रैली निकाली। टोंक में शिक्षक मुख्य बाजार से रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और यहां प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं झंडे, बैनर और मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर रैली में शामिल हुए। जिलेभर से आए शिक्षक पहले डाक बंगले पर एकत्रित हुए, जहां सभा आयोजित की गई। सभा में शिक्षकों ने अपनी समस्याएं रखते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की। टीईटी और पे-प्रोटेक्शन मुद्दे पर जताया विरोध सभा को संबोधित करते हुए संगठन संरक्षक ज्ञान सिंह ने राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को टीईटी और पे-प्रोटेक्शन जैसे मुद्दों पर परेशान किया जा रहा है। शिक्षक वर्ग अब अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। जिलाध्यक्ष प्रकाश चौधरी ने कहा कि शिक्षकों की न्यायोचित मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। सभा को तहसील अध्यक्ष शिशुपाल चौधरी, कैलाश शर्मा, भंवर भारी, शिवराज गुर्जर, प्रमोद चौधरी, देवकिशन गुर्जर, मोहनलाल बैरवा, श्रीराम जाट, रामकल्याण चौधरी और ओमप्रकाश सैनी सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। नारों के साथ बाजार से निकली रैली सभा के बाद जिलाध्यक्ष प्रकाश चौधरी और जिला मंत्री रामप्रसाद धाकड़ के नेतृत्व में रैली डाक बंगले से रवाना हुई। शिक्षकों के नारों से बाजार गूंज उठा। शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। जिला मंत्री रामप्रसाद धाकड़ ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों में बढ़ते असंतोष का संकेत है। 15 मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन रैली के बाद शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें वर्ष 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों से रोक हटाने, स्थानांतरण और पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने, स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने और पे-प्रोटेक्शन के नाम पर हो रही वसूली रोकने की मांग की गई। इसके अलावा ग्रीष्मकालीन अवकाश पूर्ववत रखने, ट्रांसपोर्ट वाउचर का बकाया भुगतान जारी करने, विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ व आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, सफाई कर्मियों की नियुक्ति, लंबित डीपीसी पूरी करने, नवक्रमोन्नत विद्यालयों में पद सृजित करने, पीटीआई के स्थायीकरण, आरजीएचएस योजना जारी रखने, संविदा भर्ती पर रोक और ओपीएस में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने सहित 15 मांगें रखी गईं। मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी शिक्षक संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संघ ने इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होने की बात कही। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश सदस्य कमलेश शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष भंवरलाल जाट, जिला संरक्षण लादूलाल चौधरी सहित शिक्षक संघ के पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे।

भर्ती की मांग को लेकर खून से लिखा ज्ञापन:भूख हड़ताल और झाड़ू डाउन की चेतावनी, सफाई कामगारों ने दिया अल्टीमेटम

चूरू में लंबे समय से लंबित सफाई कर्मचारी भर्ती-2023 को लेकर सफाई कामगार समुदाय का आक्रोश गुरुवार को खुलकर सामने आया। निवर्तमान मनोनीत पार्षद एवं राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अनुसूचित जाति विभाग) के प्रदेश सचिव अशोक पंवार के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को खून से लिखा ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई गई। भर्ती शुरू करने और नियुक्तियां देने की मांग ज्ञापन में सफाई कर्मचारी भर्ती-2023 को जल्द शुरू करने के साथ भर्ती में शत-प्रतिशत परंपरागत सफाई कामगार समाज के लोगों को नियुक्ति देने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय में लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण कर पात्र अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द सफाई कर्मचारी पद पर नियुक्त करने की भी मांग उठाई। 2018 में नियुक्त कर्मचारियों को मूल पदों पर लगाने की मांग अशोक पंवार ने कहा कि वर्ष 2018 में नियुक्त सफाई कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर कार्य करवाया जाए। उन्होंने बताया कि वाल्मीकि समाज लंबे समय से स्वायत्त शासन विभाग में सफाई कार्य करता आ रहा है, लेकिन रोजगार के अवसरों में समाज के लोगों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है। जयपुर में भूख हड़ताल जारी, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी पंवार ने बताया कि भर्ती संबंधी मांगों को लेकर जयपुर में पहले से ही भूख हड़ताल चल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं करती और मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी एवं सफाई कामगार समाज भूख हड़ताल और ‘झाड़ू डाउन’ आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। कई समाजजन रहे मौजूद प्रदर्शन के दौरान राहुल पंवार, किशन हटवाल, राकेश पंवार, प्रीत चांवरिया, अभिषेक पंवार, आकाश चंदेलिया, सोनू वाल्मीकि, संदीप कांगड़ा, नंदू चांवरिया, किशन पंवार, कृष पंवार, शनि धवल, अरुण हटवाल, मनीष चांवरिया, सौरव चंदेलिया और अंकित सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा:नॉर्मल कैटेगरी पासपोर्ट ₹2,500 और तत्काल ₹5,000 में बनेगा, खोने या डैमेज होने पर ₹8,500 तक फीस

भारत में पासपोर्ट बनवाना 1 जुलाई से महंगा हो जाएगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट नियमों में बदलाव करते हुए अलग-अलग कैटेगरीज की फीस बढ़ाई है। मंत्रालय ने पासपोर्ट रूल्स, 1980 में संशोधन के बाद नई दरों को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। ये बढ़ोतरी 14 साल बाद की गई है। इससे पहले 2012 में फीस में बदलाव हुआ था। सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब आवेदकों को नॉर्मल कैटेगरी में पासपोर्ट बनवाने के लिए 1,000 रुपए ज्यादा देने होंगे। 36 पन्नों के नॉर्मल कैटेगरी पासपोर्ट की फीस 1,500 से बढ़कर 2,500 रुपए हो गई है। तत्काल सेवा या कैटेगरी की फीस जो पहले 3,500 रुपए थी, अब 5,000 रुपए कर दी गई है। तत्काल प्रोसेसिंग के लिए 6,000 रुपए देने होंगे इसके अलावा, जो लोग ज्यादा यात्रा करते हैं और 60 पन्नों का पासपोर्ट बुकलेट चाहते हैं, उन्हें नॉर्मल कैटेगरी में 3,500 रुपए और तत्काल प्रोसेसिंग के लिए 6,000 रुपए का भुगतान करना होगा। नॉर्मल कैटेगरी में पासपोर्ट बनवाने की फीस ₹2,500 हुई पासपोर्ट खोने या डैमेज होने पर लगेगा सबसे बड़ा चार्ज, नई दरें तय इस बदलाव में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पासपोर्ट खो जाने या खराब (डैमेज) होने पर उसके रिप्लेसमेंट चार्ज में की गई है। अगर आपका 36 पन्नों का पासपोर्ट खो जाता है, तो नॉर्मल प्रोसेसिंग के तहत उसे दोबारा बनवाने के लिए 5,000 रुपए देने होंगे, जबकि तत्काल में यह खर्च 7,500 तक पहुंच जाएगा। इसी तरह, 60 पन्नों वाले रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 6,000 रुपए और तत्काल के लिए 8,500 रुपए की फीस तय की गई है। माइनर यानी बच्चों के रिप्लेसमेंट के लिए भी अलग नियम नाबालिग आवेदकों के मामले में भी यदि 36 पन्नों का पासपोर्ट खो जाता है या डैमेज हो जाता है, तो उसे बदलवाने के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 4,250 रुपए खर्च करने होंगे। वहीं, अगर कोई पेरेंट्स अपने बच्चे का खोया हुआ पासपोर्ट तत्काल सर्विस के जरिए जल्द से जल्द बनवाना चाहते हैं, तो उन्हें 6,750 रुपए की फीस चुकानी होगी। पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं, पहले जैसे ही रहेंगे नियम फीस बढ़ाने के साथ ही सरकार ने नियमों में वैलिडिटी की स्थिति को भी स्पष्ट किया है। वयस्क आवेदकों के लिए जारी किए गए पासपोर्ट की वैधता पहले की तरह ही अधिकतम 10 साल तक रहेगी। वहीं, नाबालिगों को जारी किए जाने वाले पासपोर्ट की वैलिडिटी 5 साल या उनके 18 साल की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

जयपुर के SMS हॉस्पिटल में सांस नली का दुर्लभ ऑपरेशन:सिकुड़े 7 छल्लों को हटाकर नली वापस जोड़ी; प्रदेश में ऐसा पहला ऑपरेशन

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में एक युवती की सांस की नली का दुर्लभ ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों का दावा है कि इस तरह का प्रदेश में ये पहला ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन में युवती की सांस नली के 7 छल्ले (जो सिकुड़ गए थे) हटाए गए और वापस सांस नली को जोड़ा गया। डॉक्टरों का कहना है कि भारत में अक्सर सांस नली के 3 या 4 ही छल्ले हटाने के ऑपरेशन होने के बारे में सुनते है, लेकिन 7 छल्ले हटाने का मामला बहुत दुर्लभ है। सीटीवीएस डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. संजीव देवगढ़ा की यूनिट की टीम ने इस ऑपरेशन को किया। ऑपरेशन के बाद युवती ठीक है और उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी है। डॉक्टर संजीव देवगढ़ा ने बताया- अजमेर की रहने वाली 29 साल की सुप्यार देवी का जनवरी 2024 में एक्सीडेंट हो गया था, जिसका अजमेर के हॉस्पिटल में सिर का ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के बाद युवती करीब एक माह कोमा में चली गई। कोमा में जाने के बाद डॉक्टरों ने मरीज के गले में ट्रेकियोस्टोमी (गले में छेद करके सांस लेने के लिए ट्यूब डाली गई) की गई, ताकि कोमा में रहने के दौरान मरीज को सांस लेने में तकलीफ न हो। कोमा से बाहर आने के बाद लगातार सांस लेने में तकलीफ करीब एक माह बाद जब युवती कोमा से बाहर आई, तो उसके गले में डाली गई टयूब को बाहर निकाला। इस टयूब के बाहर आने के बाद भी युवती को सांस लेने में तकलीफ रहने लगी। उसे कई दूसरे हॉस्पिटल में दिखाया और इलाज करवाया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। इसके बाद वह जब पिछले महीने मई में SMS हॉस्पिटल पहुंची। यहां जब युवती की सीटी स्कैन और वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी जांच करवाई तो पता चला मुख्य श्वासनली में गंभीर ट्रेकीयल स्टेनोसिस है। इस बीमारी में सांस नली में बने छल्ले सुकड़ जाते है, जिससे सांस लेने में तकलीफ आती है। ऑपरेशन करके 7 छल्ले हटाए, फिर जोड़ी नली डॉक्टर देवगढ़ा ने बताया- 29 मई को भर्ती करने के बाद युवती का 4 जून को ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन में डॉ. अनुला सिसोदिया, डॉ. ध्रुव शर्मा, डॉ. के. के. मावर, डॉ. उत्सव नंदवाना, डॉ. मोहित सिंघल, डॉ. स्वप्निल पंचाल के अलावा एनेस्थीसिया टीम से डॉ. प्रतिभा राठौर, डॉ. अंशुल गुप्ता और डॉ. दीपिका गहलोत का सहयोग रहा। करीब साढ़े चार घंटे चली इस सर्जरी में युवती की सांस नली में मौजूद 7 छल्ले जो सिकुड़ गए थे उनको काटकर हटाया और सांस नली को वापस सफलतापूर्वक जोड़ा गया। ऑपरेशन के दौरान के मरीज को 4 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। साथ ही सांस और ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए मरीज को हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया। ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती यह ऑपरेशन इसलिए भी बहुत जटिल था, क्योंकि सांस नली को ऑपरेशन के दौरान हटाते समय आसपास स्थित महत्वपूर्ण नसों और ब्लड आर्टरी (वाहिनियों) को बचाना। ऐसी स्थिति में अगर कोई नस या आर्टरी कट जाए तो मरीज को बोलने, निगलने या सांस लेने में स्थायी कठिनाई हो सकती है तथा फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनियों को नुकसान होने पर जान का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मोहर्रम पर प्रशासन अलर्ट, शांति व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम:अफवाहों से दूर रहने, भ्रामक सामग्री साझा न करने के निर्देश

मोहर्रम (ताजिया) पर्व के मद्देनजर ब्यावर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कमल राम मीना ने जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी उपखंड अधिकारियों, पुलिस और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती तथा ताजिया जुलूसों के दौरान यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य और बिजली व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। 25 जून की रात से 26 जून तक रहेगा पर्व प्रशासन के अनुसार मोहर्रम (ताजिया) पर्व 25 जून की रात्रि से 26 जून की रात्रि तक मनाया जाएगा। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजियों के जुलूस निकाले जाएंगे। पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। शांति समितियों की बैठकों पर जोर जिला कलेक्टर ने सभी उपखंड मजिस्ट्रेटों को जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक उपखंड में शांति समिति की बैठकें आयोजित कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने को कहा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात पुलिस विभाग को संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने तथा असामाजिक तत्वों और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। थाना अधिकारियों को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
यातायात और नागरिक सुविधाओं के विशेष इंतजाम मोहर्रम जुलूसों के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे। संबंधित विभागों को जुलूस मार्गों पर साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पेयजल, स्वास्थ्य और बिजली सेवाओं पर फोकस जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को दवाइयों, चिकित्सा दलों एवं एम्बुलेंस की उपलब्धता बनाए रखने तथा विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। अफवाहों से बचने और भाईचारा बनाए रखने की अपील जिला कलेक्टर कमल राम मीना ने जिलेवासियों से मोहर्रम पर्व आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांति के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने, सोशल मीडिया पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री साझा नहीं करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को देने का आग्रह किया। शांतिपूर्ण आयोजन का जताया विश्वास जिला कलेक्टर ने विश्वास व्यक्त किया कि सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सौहार्द की अपनी समृद्ध परंपरा के अनुरूप ब्यावर जिले में मोहर्रम पर्व शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होगा।

भीलवाड़ा में धूप-छांव के बाद हल्की बरसात:उमस से नहीं मिली राहत; अगले दो दिन तेज हवा और बारिश का अलर्ट

भीलवाड़ा में गुरुवार को मौसम में बदलाव देखने को मिला। दिनभर धूप-छांव की स्थिति के बाद दोपहर बाद शहर के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग ने जिले में अगले दो दिन बारिश, बादल और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलने और हल्की से सामान्य बारिश होने की संभावना जताई गई है। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत मिली। दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक चली बूंदाबांदी से सड़कों पर पानी जमा हो गया, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। उमस से नहीं मिली पूरी राहत पिछले दो दिनों से हो रही हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन उमस का असर अभी भी बना हुआ है। मौसम में बदलाव के चलते दिन का तापमान भी सामान्य से कम रहा। गुरुवार को जिले में अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25 डिग्री तक रहने का अनुमान है। इससे पहले बुधवार को अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। दो दिन मौसम रहेगा बदला हुआ मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को जिले में बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान तेज हवाओं के साथ हल्की से सामान्य बारिश की संभावना है। लोगों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अलवर में प्रदर्शन:श्रद्धांजलि देकर जांच की मांग; कहा- सरेंडर करने के बाद एनकाउंटर किया

बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अलवर में युवाओं ने भगत सिंह चौराहे पर पहुंचकर सभा आयोजित की। युवाओं ने गुरुवार को भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बिहार सरकार और बिहार पुलिस के खिलाफ नारे लगाए। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने कहा- भरत तिवारी के साथ अन्याय हुआ है। युवाओं का आरोप है कि यदि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था तो उसके बाद गोली चलाने की आवश्यकता नहीं थी। युवाओं ने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। युवा यश जोशी ने कहा- भरत तिवारी गरीबों और मजदूरों की आवाज उठाने वाला समाजसेवी था। उनका आरोप है कि बिहार पुलिस ने भरत का एनकाउंटर कर दिया। उन्होंने बिहार सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा कार्रवाई में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। साथ ही भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने की भी मांग की। उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को मिले सजा दीपक शर्मा ने कहा- भरत तिवारी एससी-एसटी और गरीब तबके के लोगों की आवाज उठाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा किया गया एनकाउंटर संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने कहा- मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।

फायर सेफ्टी के लिए नगर निगम की सख्ती:12 संस्थाओं को नोटिस, 7 दिन में जवाब नहीं तो सीज होगी बिल्डिंग

बीकानेर शहर में अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। बुधवार को नगर निगम की ओर से फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद 12 संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इन संस्थानों को सात दिन का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में आवश्यक सुधार नहीं करने पर संबंधित संस्थानों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम की टीम ने बुधवार को शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों और कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर अग्नि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आईं। कम्प्यूटर सेंटर में मिली भारी लापरवाही एक कम्प्यूटर सेंटर के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई। यहां विद्युत तार खुले पाए गए, जबकि आपातकालीन स्थिति में निकासी के लिए केवल एक ही एग्जिट गेट उपलब्ध था। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के आने-जाने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं मिले। निरीक्षण टीम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संस्थान को सीज करने का नोटिस जारी किया है। निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं करने पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। एक लाइब्रेरी में भी इसी तरह की अनियमितता देखने को मिली। 12 संस्थाओं को दिए नोटिस सहायक अग्निशमन अधिकारी जगवीर सिंह कटारिया ने बताया कि बुधवार को शहर की 12 संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी संस्थानों को सात दिन के भीतर अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आते हैं। ऐसे में अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना अनिवार्य है। भविष्य में भी जांच अभियान जारी रहेगा और नियमों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फलोदी में एमडी फैक्ट्री-अवैध शराब की दुकान का निर्माण ध्वस्त:ऑपरेशन वज्र प्रहार के तहत कार्रवाई, 21 मई को पुलिस ने किया भंडाफोड़

फलोदी में जिला प्रशासन और पुलिस ने बुधवार को ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार’ के तहत दो अलग-अलग मामलों में संयुक्त कार्रवाई की। इस दौरान एक एक महीने पहले पकड़ी गई, एमडी फैक्ट्री और अवैध शराब की दुकान के निर्माण को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी को किया था गिरफ्तार एसपी सतनाम सिंह ने बताया-बाप थाना क्षेत्र के मोडकिया गांव में 21 मई 2026 को जिला स्पेशल टीम और बाप पुलिस ने एक सुनसान खेत में चल रही एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इस कार्रवाई में खेत मालिक सुखराम को गिरफ्तार किया गया। साथ ही एमडी बनाने के उपकरण व रासायनिक पदार्थ जब्त किए गए थे। पुलिस ने फैक्ट्री संचालित करने वाले मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया था। जेसीबी से अवैध निर्माण को किया ध्वस्त पुलिस के अनुसार, एमडी फैक्ट्री का निर्माण अवैध पाया गया। इसके बाद 24 जून 2026 को बाप तहसीलदार, राजस्व विभाग की टीम और बाप पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। फलोदी के बाप थाना क्षेत्र में कार्रवाई ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार’ के तहत दूसरी कार्रवाई राजस्व विभाग और पुलिस ने बाप क्षेत्र की ग्राम पंचायत टेकरा में की। यहां पुलिस ने 23 मार्च 2026 को एक अवैध शराब की दुकान से विभिन्न प्रकार की शराब जब्त की थी। पुलिस ने शराब की दुकान के राजस्व रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि यह गोचर भूमि पर बनी हुई थी। इसके बाद बाप तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में अवैध शराब की दुकान के निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया।

मंडावर की फ्लोराइड समस्या पर शोध पहुंचा अमेरिका:MBBS छात्र कार्तिक लड्डा की रिसर्च को मिला वैश्विक मंच, टॉप 30 में शामिल

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र कार्तिक लड्डा ने अपनी शोध क्षमता के दम पर जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। मंडावर कस्बे की पेयजल गुणवत्ता और उसमें मौजूद फ्लोराइड की समस्या पर आधारित उनका शोध पत्र अमेरिका में आयोजित होने वाले वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स रिसर्च के लिए चयनित हुआ है। 11 और 12 जुलाई को होने वाले इस सम्मेलन में कार्तिक ऑनलाइन माध्यम से अपने शोध के निष्कर्ष दुनिया भर के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के सामने प्रस्तुत करेंगे। दुनियाभर के 30 शोध पत्रों में मिली जगह इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए विश्वभर से केवल 30 शोध पत्रों का चयन किया गया है। इनमें भारत से कार्तिक लड्डा का शोध पत्र भी शामिल है। इस उपलब्धि से मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों, शिक्षकों और जिलेवासियों में खुशी का माहौल है। 350 परिवारों और 1002 लोगों पर किया अध्ययन यह शोध वर्ष 2025 में शुरू किया गया था। अध्ययन के दौरान मंडावर कस्बे के 350 परिवारों के 1002 सदस्यों को शामिल किया गया। करीब छह माह तक चले सर्वेक्षण और अध्ययन में क्षेत्र की जल गुणवत्ता तथा उससे जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों का गहन विश्लेषण किया गया। फ्लोराइड युक्त पानी से स्वास्थ्य जोखिम उजागर शोध के दौरान सामने आया कि मंडावर क्षेत्र के अधिकांश परिवार भूजल का उपयोग करते हैं। लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से लोगों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है। शोध में फ्लोराइड की समस्या को कम करने के लिए कुछ सरल घरेलू उपाय भी सुझाए गए हैं। विशेषज्ञ मार्गदर्शन में हुआ शोध कार्य कार्तिक लड्डा ने यह शोध सामुदायिक चिकित्सा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शकीला मुल्ला के मार्गदर्शन में किया। मेडिकल कॉलेज झालावाड़ के डीन डॉ. संजय पोरवाल ने इसे कॉलेज में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध को दिए जा रहे प्रोत्साहन का परिणाम बताया। सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूकता का संदेश यह शोध केवल मंडावर क्षेत्र की जल समस्या को उजागर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल, जनस्वास्थ्य और फ्लोराइड के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे भविष्य में जल गुणवत्ता सुधार और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।