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फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता है, लेकिन कीमत काफी कम होती है। रीडर्स व निवेशकों के लिए टिप्स फार्मा निवेशकों के लिए: अगले 2 साल तक भारतीय कंपनियों पर सीधा वित्तीय असर नहीं पड़ेगा क्योंकि 0% टैरिफ लागू रहेगा। हालांकि, लॉन्ग टर्म में कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सेटअप करने की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। स्टॉक मार्केट वॉच: सिप्ला, डॉ. रेड्डीज और सन फार्मा जैसी US एक्सपोजर वाली कंपनियों की अगली तिमाही की कमेंट्री पर नजर रखें।

चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया:ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे; 1 साल पहले केरल के पास जहाज में आग लगी थी

भारत में चीन के नए मिलिट्री डिप्लोमैट यू जियान ने भारतीय सेना का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने केरल तट के पास आग लगने वाले मालवाहक जहाज से 12 चीनी नागरिकों को बचाया था। चीन यह एहसान कभी नहीं भूलेगा। यू जियान ने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की कोशिशों से भारत-चीन संबंध फिर से सुधार की राह पर लौटे हैं। दरअसल, 9 जून 2025 को सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी वान हाई 503 केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर आग लगने के बाद विस्फोट का शिकार हो गया था। यह जहाज कोलंबो से न्हावा शेवा जा रहा था और उस पर 22 चालक दल के सदस्य सवार थे। जहाज में आग लगने और बचाव से जुड़ी 5 तस्वीरें कोलंबो से मुंबई जा रहा था जहाज जहाज श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से मुंबई जा रहा था। रास्ते में जहाज के एक कंटेनर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर्स सवार थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 18 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। बचाए गए लोगों में से 5 लोग घायल हुए थे, जिनमें 2 गंभीर रूप से झुलसे थे। 4 लोग लापता हो गए थे, जिन्हें मृत मान लिया गया। जहाज पर चीन और ताइवान के कुल 14 लोग सवार थे। इनमें 8 चीन के और 6 ताइवान के थे। बचाव कार्य के लिए कोस्ट गार्ड के 5 जहाज, 2 विमान और 1 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए थे। चीन ने भारतीय कोस्ट गार्ड को शुक्रिया कहा था उस समय भारत की मदद के लिए चीन के दूतावास ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल का धन्यवाद किया था। सिंगापुर के उच्चायुक्त ने भी भारत की तारीफ की थी। बचाव अभियान के बाद भी भारतीय एजेंसियों ने कई दिनों तक जहाज में लगी आग बुझाने और उसे सुरक्षित स्थान तक ले जाने का अभियान चलाया। 13 जून को भारतीय नौसेना ने हेलिकॉप्टर से बचाव दल को जहाज पर उतारा था। तटरक्षक बल, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि जहाज बहकर केरल तट तक न पहुंचे। 2020 के बाद बिगड़े थे भारत-चीन के रिश्ते भारत और चीन के रिश्तों में 2020 में उस समय बड़ी खटास आ गई, जब पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया। उसी साल जून में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय और 4 चीनी सैनिकों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद भारत ने साफ कहा था कि जब तक सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल नहीं होगी, तब तक दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हो सकते। अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं रिश्ते करीब चार साल तक जारी तनाव के बाद अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच देपसांग और डेमचोक में गश्त को लेकर समझौता हुआ। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं ने पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की। इसी के बाद रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हुई। इसके बाद अगस्त 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में दोनों नेताओं की फिर मुलाकात हुई। यह प्रधानमंत्री मोदी की सात साल बाद चीन की पहली यात्रा थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच पांच साल से बंद सीधी उड़ानें दोबारा शुरू हुईं। साथ ही कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर से बहाल कर दी गई। —————————– चीन से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… चीन में डिलीवरी बॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने, खाना पहुंचाते हुए कई कविताएं लिखीं चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। वे खाना पहुंचाने के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर कविताएं लिखते थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत के स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर वर्ल्ड मीडिया:NYT ने लिखा- प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन झुके नहीं; गार्डियन बोला- छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन की गूंज विदेशी मीडिया तक पहुंची है। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इसे प्रमुखता से कवर किया है। सोमवार को CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पथराव भी हुआ। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। पढ़िए, किस विदेशी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में क्या लिखा… न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे डटे रहे अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि खून बहा, लाठियां चलीं, आंसू गैस के गोले दागे गए, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। संसद मार्च के अगले ही दिन हजारों छात्र फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाब मांगने लगे। अखबार के मुताबिक, छात्र शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार अब भी उनकी मांगों पर चुप है। रिपोर्ट में आंदोलनकारी संगठनों के हवाले से 150 प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं ब्रिटेन के अखबार गार्डियन ने लिखा कि पुलिस की कार्रवाई भी छात्र आंदोलन को रोक नहीं सकी। सोमवार की झड़प के अगले दिन हजारों प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और साफ कर दिया कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। अखबार ने लिखा कि आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने हालात को काबू में रखने के लिए कार्रवाई की। फाइनेंशियल टाइम्स: मोदी के विरोध में उतरे राहुल-प्रियंका हिरासत में ब्रिटेन के अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी लीड रिपोर्ट में लिखा कि छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास तक मार्च कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को छात्र आंदोलन पर हुई लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने X पर लिखा, “मोदी जी, जितना दबाव बनाना है बना लीजिए, लेकिन छात्रों के न्याय की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।” फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए पहुंचे एक मंत्री ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग खारिज कर दी। उनका कहना था कि राहुल गांधी का यह रुख लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। अल जजीरा: आंदोलन पर मोदी की चुप्पी, राहुल का समर्थन कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा ने लिखा कि छात्र आंदोलन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए। अल जजीरा ने एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा कि यह आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार का मुद्दा नहीं रह गया है। इसने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। BBC: ‘पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा’ ब्रिटेन के टीवी BBC ने लिखा कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। कई प्रदर्शनकारियों ने BBC को बताया कि लाठीचार्ज के दौरान महिलाओं के साथ भी सख्ती की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन जारी रखा। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बना मंच और अस्थायी टेंट भी हटा दिए। BBC ने राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन किया, सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला। डॉन: छात्र आंदोलन से विपक्ष को मोदी सरकार को घेरने का मौका मिला पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा कि छात्र आंदोलन ने विपक्ष को मोदी सरकार पर हमला बोलने का नया मौका दे दिया है। पुलिस कार्रवाई के बाद लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए। रिपोर्ट में कहा गया कि बड़ी संख्या में युवाओं के सड़कों पर उतरने और पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें सामने आने के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने लगा। विश्लेषकों के हवाले से अखबार ने लिखा कि इससे विपक्ष को युवा वोटरों तक पहुंच बनाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, इससे छात्रों के मूल मुद्दे राजनीतिक बहस में पीछे छूटने का खतरा भी है। डॉन ने राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।

वर्ल्ड अपडेट्स:भारत-US ट्रेड डील पर जयशंकर-रुबियो की बातचीत; ट्रम्प की फार्मा टैरिफ धमकी के बीच अंतरिम समझौते पर जोर

भारत और अमेरिका ने अंतरिम ट्रेड डील को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मनीला में हुई मुलाकात के दौरान इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत समेत दूसरे देशों से आने वाली दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इसमें जेनेरिक दवाएं भी शामिल हैं। इससे भारत के फार्मा एक्सपोर्ट पर असर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ASEAN समिट के दौरान रक्षा सहयोग पर भी चर्चा की। इसमें एंटी-टैंक मिसाइल, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और निगरानी विमान जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर बात हुई। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया था, हम इसे कभी नहीं भूलेंगे चीन ने पिछले साल केरल तट के पास आग लगने और विस्फोट का शिकार हुए एक मालवाहक जहाज से 12 चीनी क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए भारतीय सेना का धन्यवाद किया है। साथ ही दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। भारत में चीन के रक्षा अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने मंगलवार को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। यू जियान ने कहा, “हम यह कभी नहीं भूलेंगे कि पिछले जून में केरल तट के पास आग लगने और विस्फोट का शिकार हुए एक मालवाहक जहाज से भारतीय सेना ने 12 चीनी नाविकों को सुरक्षित बचाया था।” उन्होंने कहा, “चीन और भारत अहम पड़ोसी देश हैं। हमें खुशी है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधर रहे हैं। हमारा हमेशा से मानना रहा है कि दोनों देशों के साझा हित, आपसी मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकातों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार सुधार देखने को मिला है। इसके बाद दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच भी कई बैठकें हुई हैं। फ्रांस की पर्यावरण मंत्री ने इस्तीफा दिया: प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले कृषि कानून का विरोध
फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारब्यू ने विवादित कृषि कानून के विरोध में इस्तीफा देने का फैसला किया है। कानून के तहत कुछ संकटग्रस्त कृषि क्षेत्रों में एसीटामिप्रिड और फ्लुपाइराडिफ्यूरोन के असाधारण इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों के लिए नुकसानदायक हैं। बारब्यू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस के सांसदों ने मंगलवार को यह विवादित आपात कृषि कानून पारित किया। इसके तहत फ्रांस की खाद्य, पर्यावरण और व्यावसायिक स्वास्थ्य एजेंसी को कुछ कृषि क्षेत्रों के लिए इन दोनों कीटनाशकों के इस्तेमाल की असाधारण अनुमति देने का अधिकार मिलेगा। अक्टूबर 2025 में पर्यावरण मंत्री नियुक्त की गईं मोनिक बारब्यू ने सोशल मीडिया पर कहा कि पिछले 9 महीनों में उन्होंने जंगलों, पानी की गुणवत्ता, हवा की शुद्धता, मिट्टी की समृद्धि और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों का विरोध करने वाली ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि अब उनके पास अपनी इस महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने के साधन नहीं बचे हैं। ट्रम्प ने अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया; 2 साल तक जीरो, 2028 से 100% और फिर 200% लगेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के आयात पर नई टैरिफ नीति की घोषणा की है। ट्रम्प ने कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बाद 2028 से एक साल के लिए 100% और फिर 200% आयात शुल्क लगाया जाएगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस नीति का मकसद दवा कंपनियों को अमेरिका में ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। जो कंपनियां तय समय में अमेरिका में उत्पादन शुरू नहीं करेंगी, उन्हें ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा और देश में दवा निर्माण बढ़ाने के लिए लिया गया है। हालांकि पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं पर लागू मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भारत पर क्या असर होगा?
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है और अमेरिका उसका सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में दो साल की राहत के बाद 2028 से 100% और फिर 200% टैरिफ लागू होने पर भारतीय दवा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इससे कंपनियों पर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का दबाव भी बढ़ेगा और भारतीय जेनेरिक दवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रभावित हो सकती है। मैक्सिकन कैदी ने किया ट्रम्प पर केस: 75 मिलियन डॉलर और अमेरिकी नागरिकता मांगी
अमेरिका में 27 साल के मैक्सिकन नागरिक ब्रैंडन ऑर्टिज-वाइट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ संघीय अदालत में केस किया है। उसने 75 मिलियन डॉलर (करीब 620 करोड़ रुपए) हर्जाने, सार्वजनिक माफी और अमेरिकी नागरिकता की मांग की है। ऑर्टिज-वाइट पर मिशिगन की महिला रूबी गार्सिया की हत्या का दोष है। वह 2024 में हत्या के मामले में दोषी पाए जाने के बाद 39 से 102 साल की सजा काट रहा है। उसका आरोप है कि ट्रम्प ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उसके केस का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया। ऑर्टिज-वाइट ने हाथ से लिखी शिकायत में ट्रम्प और व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन च्युंग को आरोपी बनाया है। उसने दावा किया कि ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान उसके केस को बार-बार उठाकर उसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतीक बना दिया। मिशिगन के ग्रैंड रैपिड्स में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने ऑर्टिज-वाइट को “अमेरिका की समस्या” बताया था। इसके बाद उनके चुनावी विज्ञापनों में ऑर्टिज-वाइट की मगशॉट तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इन विज्ञापनों में अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों को “हत्यारे, रेपिस्ट और ड्रग तस्कर” बताया गया था। ऑर्टिज-वाइट पहले अमेरिका से निर्वासित किया जा चुका था, लेकिन बाद में वह अवैध तरीके से दोबारा देश में दाखिल हुआ। पुलिस कार्रवाई में मोरक्को मूल के शख्स की मौत पर इटली में प्रदर्शन:64 पुलिसकर्मी घायल इटली के उत्तरी शहर बोलोन्या में मोरक्को मूल के एक व्यक्ति की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत के बाद हिंसा भड़क गई। सोमवार रात हजारों लोगों ने अब्देररहीम फकीर की मौत को लेकर प्रदर्शन किया और “फकीर को न्याय और सच्चाई” की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से पटाखे फेंके जाने के बाद पुलिस से झड़प हुई। अभियोजकों के मुताबिक, बाद में एक छोटे समूह की पुलिस से देर रात तक झड़प होती रही। इसमें 64 पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अब्देररहीम फकीर मोरक्को मूल था और सामान शिफ्ट करने और सफाई का छोटा कारोबार चलाता था। पुलिस को एक व्यक्ति के आक्रामक व्यवहार करने और एक गाड़ी को नुकसान पहुंचाने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान फकीर की मौत हो गई। घटना का वीडियो पड़ोसी ने रिकॉर्ड किया था। इसमें फकीर जमीन पर पेट के बल लेटा नजर आ रहा है। दो पुलिसकर्मी उसे पकड़कर रोक रहे हैं। वीडियो में फकीर बार-बार “आइउतो, आइउतो, बस्ता” यानी “मदद, मदद, बस करो” कहते सुनाई दे रहा है। बोलोन्या के अभियोजकों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने घटना के दौरान पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी मांगी है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि फकीर की मौत की पूरी जांच होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के खिलाफ हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। जेलेंस्की ने सेना प्रमुख बदला: 6 दिन के प्रदर्शनों के बाद मिखाइलो ड्रापात्यी को बनाया कमांडर
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने देश के सेना प्रमुख ओलेक्सांद्र सिरस्की को पद से हटा दिया है। उनकी जगह 43 साल के लोकप्रिय और युद्ध का अनुभव रखने वाले जनरल मिखाइलो ड्रापात्यी को नया कमांडर बनाया गया है। यह फैसला पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेडोरोव को हटाए जाने के कुछ दिन बाद आया है। फेडोरोव को हटाने के बाद यूक्रेन के कई शहरों में 6 दिन तक प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों का दबाव था कि सिरस्की को भी पद से हटाया जाए। सिरस्की को हटाने की शुरुआती खबरों के मुताबिक, फेडोरोव और उनके बीच मतभेद थे। बाद में दोनों के बीच तनाव की खबरों की पुष्टि हुई। 60 साल के सिरस्की ने विदाई संदेश में अपने कार्यकाल का बचाव किया। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, “दो साल पहले मुश्किल रक्षात्मक अभियान लड़ रही सेना अब हमले की स्थिति में है।” नए सेना प्रमुख मिखाइलो ड्रापात्यी ने सिरस्की को यूक्रेनी सेना को मजबूत करने के लिए किए गए लगातार काम के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं इसी सेना में बड़ा हुआ हूं।” मिचलिन स्टार रेस्टोरेंट में मिठाई पर चींटियां परोसने पर मालिक को 1 साल जेल और जुर्माने की मांग
दक्षिण कोरिया में दो मिशचलिन स्टार वाले रेस्टोरेंट के मालिक के खिलाफ अभियोजन पक्ष ने 1 साल जेल की सजा की मांग की है। आरोप है कि रेस्टोरेंट में मिठाई परोसते समय चींटियों को गार्निश के तौर पर इस्तेमाल किया गया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने सोमवार को रेस्टोरेंट पर 20 मिलियन कोरियन वॉन (करीब 13,510 डॉलर) जुर्माना लगाने की भी मांग की। कोर्ट इस मामले में 2 सितंबर को फैसला सुनाएगा। रेस्टोरेंट के मालिक ने चींटियां परोसने की बात स्वीकार की है। हालांकि, उनका कहना है कि 15-कोर्स के मेन्यू के एक छोटे हिस्से में ही इनका इस्तेमाल किया गया था। चींटियों को शर्बत पर टॉपिंग के तौर पर दिया जाता था। उनका दावा है कि ग्राहकों को चींटियों की जगह दूसरी टॉपिंग चुनने का विकल्प भी दिया गया था। दक्षिण कोरिया के कानून के तहत इंसानों के खाने के लिए मंजूर 10 कीट प्रजातियों में चींटियां शामिल नहीं हैं। मामला तब सामने आया, जब खाद्य एवं औषधि सुरक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को ऑनलाइन पोस्ट किए गए ग्राहकों के रिव्यू और व्यंजनों की तस्वीरें मिलीं। इन तस्वीरों में खाने पर चींटियां छिड़की हुई दिखाई दे रही थीं। जांचकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, 4 साल में कई व्यंजनों में अमेरिका और थाईलैंड से आयात की गई करीब 49 हजार चींटियों का इस्तेमाल किया गया। मालिक ने अपने बचाव में कहा कि सिर्फ 60% ग्राहकों ने चींटियां खाने का विकल्प चुना था। बाकी ग्राहकों को फर्मेंटेड सिरका और खाने योग्य फूल जैसी वैकल्पिक टॉपिंग दी गई थीं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और UK जैसे अन्य देशों के रेस्टोरेंट में भी चींटियों का इस्तेमाल सामग्री के तौर पर किया जाता है। कोर्ट के दस्तावेजों में रेस्टोरेंट या उसके मालिक का नाम नहीं बताया गया है। दक्षिण कोरिया में 10 रेस्टोरेंट ऐसे हैं जिन्हें दो मिचलिन स्टार मिले हैं। ये सभी राजधानी सियोल में स्थित हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की कई संस्कृतियों में चींटियां खाई जाती हैं और कुछ जगहों पर इन्हें खास व्यंजन माना जाता है। थाईलैंड और कंबोडिया के व्यंजनों में वीवर चींटियों और उनके अंडों का इस्तेमाल होता है। वहीं, कोलंबिया में रानी चींटियों को कैवियार जितना खास माना जाता है। टोक्यो में ऑफिस में शॉर्ट्स पहनने की छूट:कुछ महिलाओं ने कहा- पुरुषों के पैर के बाल दिखना ‘लेग हेयर हैरेसमेंट’
जापान में गर्मी बढ़ने के साथ ऑफिस में पुरुषों के शॉर्ट्स पहनने को लेकर बहस शुरू हो गई है। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन सरकार कर्मचारियों को सूट-टाई छोड़कर T-shirt, स्पोर्ट्स शूज और शॉर्ट्स जैसे कैजुअल कपड़े पहनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। टोक्यो की गवर्नर युरिको कोइके ने अप्रैल में ‘ टोक्यो कूल बिज’ पहल शुरू की थी। इसका मकसद भीषण गर्मी में लोगों को ऑफिस में ज्यादा आरामदायक कपड़े पहनने का विकल्प देना है। करीब 4 महीने बाद ऑफिस में शॉर्ट्स पहनने की नई छूट को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ महिलाओं ने पुरुष सहकर्मियों के पैर के बाल देखने को लेकर असहजता जताई है। ऑनलाइन इसे ‘सनेहारा’ कहा जा रहा है, जो ‘लेग हेयर हैरेसमेंट’ से जुड़ा शब्द है। दुनिया के दूसरे हिस्सों की तरह जापान भी हाल के महीनों में रिकॉर्ड गर्मी का सामना कर रहा है। वहीं, मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की चुनौती भी बनी हुई है। मौसम विभाग ने इस गर्मी में भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी लोगों को जागरूक करने के लिए ‘कुक्शो-बी’ शब्द का इस्तेमाल कर रही है। इसका मतलब ‘बेहद गर्म दिन’ है और इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब तापमान 40°C से ज्यादा हो।

अमेरिका ने ईरान के 5 शहरों पर बम बरसाए:लगातार 11वीं रात हमला; जंग में US ₹3.6 लाख करोड़ खर्च कर चुका

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के पांच शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। सीजफायर टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर ‘बहुत जल्द और बहुत भारी’ हमला कर सकता है। ट्रम्प की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ा सकता है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया है कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। अमेरिकी स्ट्राइक का वीडियो… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. भारत-चीन के टैंकरों ने रास्ता बदला: सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो टैंकर हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद रेड सी में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए। 2. अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल: पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं। 3. कतर ने ईरान से मुआवजा मांगा: कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरान को हालिया हमलों और उनसे हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और पूरा मुआवजा देने की मांग की। 4. ट्रम्प ने माना- जॉर्डन में एक ईरानी हमला सफल रहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माना कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा। हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी। 5. ईरानी गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी बातचीत की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

जापान में राजा अब दूर के रिश्तेदारों को गोद लेंगे:सिर्फ 3 उत्तराधिकारी बचे तो नियम बदला, महिला को सम्राट बनने का अधिकार नहीं मिला

जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है।

शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।

11 पूर्व शाही शाखाएं क्या हैं, जिनके बच्चे गोद लिए जाएंगे

सम्राट को उत्तराधिकारी चुनने के लिए गोद लेने का अधिकार मिला है। लेकिन वे किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकते। वे केवल 11 पूर्व शाही शाखाओं के वंशज के पुरुषों को ही गोद ले सकेंगे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध से पहले जापान के शाही परिवार में सिर्फ मुख्य राजपरिवार ही नहीं था, बल्कि उससे जुड़ी 11 अलग-अलग शाही शाखाएं भी थीं। इन शाखाओं के सदस्य भी सम्राट के पुरुष वंशज थे और जरूरत पड़ने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी बन सकते थे। साल 1947 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी कब्जे वाली प्रशासनिक व्यवस्था और जापानी सरकार ने शाही परिवार का आकार छोटा करने का फैसला किया। इसके तहत इन 11 शाखाओं के 51 सदस्यों से शाही दर्जा वापस ले लिया गया। वे आम नागरिक बन गए और उनके परिवारों का शाही परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया। नियम बदलने के बाद शाही परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। दूसरी ओर, शाही परिवार की महिलाएं जब आम नागरिकों से शादी करती थीं, तो कानून के मुताबिक उन्हें भी शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। इससे शाही परिवार छोटा होता चला गया और उत्तराधिकार का संकट गहराने लगा। इसी वजह से जापानी सरकार ने करीब 79 साल बाद नियमों में बदलाव किया है। अब इन 11 पूर्व शाही शाखाओं के 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष वंशजों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लेकर फिर से शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। महिलाओं का आम नागरिक से शादी करने पर शाही दर्जा नहीं छिनेगा नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक सेना, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था विकसित करना चाहता था। इसी प्रक्रिया में 1889 में मेइजी संविधान लागू किया गया, जिसने जापान में संवैधानिक राजतंत्र की नींव रखी और सम्राट की शक्तियों तथा शाही परिवार से जुड़े नियम तय किए। इसमें यह व्यवस्था की गई कि सिंहासन पर केवल पुरुष वंशज ही बैठेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में नया शाही परिवार कानून बनाया गया। इसमें भी पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को बरकरार रखा गया। यही कानून आज भी लागू है। इसलिए आज भी जापान में महिला सम्राट बनने या महिला की संतान के उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं है। ——————————
यह खबर भी पढ़ें… चीन में डिलीवरी बॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान मिला:ग्राहक की फटकार के बाद लेखक बने, खाना पहुंचाते हुए कई कविताएं लिखीं चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। वे खाना पहुंचाने के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर कविताएं लिखते थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा:इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया; नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया

नेपाल सरकार ने एक रुपए के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने पहले प्रस्ताव रखा था कि एक रुपए के सिक्के पर छपे नेपाल के विवादित नक्शे की जगह मुस्तांग के ऐतिहासिक मठ की तस्वीर लगाई जाए। इस नक्शे को सिक्के से हटाने की खबर जैसे ही बाहर आई, इसका विरोध होने लगा। इसके बाद मंत्रालय ने नेपाल राष्ट्र बैंक को निर्देश दिया कि डिजाइन में बौद्ध मठ के साथ नेपाल का राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाए। मौजूदा सरकार बनने से पहले ही प्रस्ताव तैयार हुआ अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। इसका मकसद नेपाल की मुद्रा पर देश की अलग-अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को जगह देना था। नेपाल राष्ट्र बैंक के एक अधिकारी ने कहा, नेपाल के कई नोटों और सिक्कों पर पहले से ही पशुपतिनाथ मंदिर और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की तस्वीरें हैं। यह महसूस किया गया कि बौद्ध विरासत को पर्याप्त जगह नहीं मिली है। इसलिए घर मठ को चुना गया क्योंकि इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। साथ ही इससे मुस्तांग में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। लो घेकर मठ नेपाल के अपर मुस्तांग में स्थित है। माना जाता है कि इसकी स्थापना आठवीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने की थी। इतिहासकार इसे नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में से एक ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में भी गिनते हैं। 1 रुपए को बनाने में 2 रुपए से ज्यादा खर्च नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपए के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस समय एक रुपए का एक सिक्का बनाने में दो रुपए से भी ज्यादा खर्च आता है। इसलिए इसका उत्पादन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है। नए डिजाइन में सिक्के का वजन भी कम किया जाएगा, जिससे निर्माण लागत घटेगी। 10 रुपए के सिक्के का डिजाइन भी बदलेगा इसके अलावा 10 रुपए के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचार चल रहा है। नेपाल राष्ट्र बैंक 10 रुपये के सिक्के का डिजाइन भी बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार इस सिक्के पर दैलेख जिले के भुर्ति देवल मंदिर समूह की तस्वीर हो सकती है। यह 22 मंदिरों का समूह है, जिसका निर्माण 14वीं और 15वीं शताब्दी में खास मल्ल शासकों के समय हुआ था। नेपाल में मुद्रा के डिजाइन बदलने का इतिहास भी पुराना है। राजशाही के दौर में नोटों और सिक्कों पर राजा महेंद्र, राजा बीरेन्द्र और राजा ज्ञानेन्द्र की तस्वीरें छपी होती थीं। लेकिन वर्ष 2006 के राजनीतिक बदलाव के बाद इनकी जगह माउंट एवरेस्ट, वन्यजीव, राष्ट्रीय स्मारक और सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल किया गया। नेपाल में सिक्के को अपनाने की मंजूरी कैसे मिलती है 2020 के नक्शे के बाद उठा विवाद भारत-नेपाल सीमा विवाद 2020 में हुई थी। भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इसका विरोध करते हुए मई 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा दिखाया। इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन कर इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी। तब से यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों, पासपोर्ट, 100 रुपए के नोट और 1 व 2 रुपए के सिक्कों पर इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद सरकार ने नए 1 रुपए के सिक्के की डिजाइन में भी इसी आधिकारिक नक्शे को बनाए रखने का फैसला किया। भारत ने नेपाल के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत का कहना है कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा भारतीय क्षेत्र हैं और सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए, न कि एकतरफा नक्शा बदलकर। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल में फिर जेन-जी प्रदर्शन; 3 दिन में 3 आत्मदाह:बेरोजगारी के खिलाफ गुस्सा; पीएम बालेन शाह का इस्तीफा मांगा नेपाल में युवाओं की बढ़ती नाराजगी फिर से सड़कों पर दिखाई देने लगी है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजधानी काठमांडू में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं में उम्मीद और भरोसा जगाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तान में पेट्रोल 35 पैसे सस्ता, डीजल 5.71 रुपया महंगा:पेट्रोल 315.80 और डीजल 360.06 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 21 जुलाई से लागू

पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 35 पैसे प्रति लीटर की कटौती की है, जबकि हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 5.71 रुपया लीटर बढ़ा दी है। नई दरें 21 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 315.80 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 360.06 रुपया प्रति लीटर हो गई है। भारत और पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: ₹- भारतीय रुपया, पाकिस्तान में भारतीय रुपए की वेल्यू 2.89 पाकिस्तानी रुपया के बराबर है। अप्रैल के रिकॉर्ड हाई से कम हैं मौजूदा दरें ईंधन की मौजूदा कीमतें इस साल अप्रैल में बने अपने ऑल-टाइम हाई से अब भी काफी नीचे हैं: अब हफ्ते की जगह रोजाना तय हो रहे पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए सरकार ने बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब देश में फ्यूल रेट्स हफ्ते के बजाय रोजाना आधार पर तय किए जाएंगे। डीलर्स एसोसिएशन ने फैसले का विरोध किया सरकार के रोजाना रेट तय करने के फैसले का ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ इसी हफ्ते विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:ब्रिटेन में 2 भारतवंशियों को मंत्री पद: कनिष्क नारायण को AI, लीजा नंदी को संस्कृति मंत्रालय की जिम्मेदारी

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सोमवार को पद संभालते ही अपनी नई कैबिनेट का गठन किया। BBC के मुताबिक, बर्नहैम ने अपनी नई टीम में कई पुराने मंत्रियों को बनाए रखा है, जिनमें कनिष्क नारायण और लीजा नंदी भी शामिल हैं।
कनिष्क नारायण को कृत्रिम मेधा (AI) मंत्री बनाया गया है, जबकि लीजा नंदी को संस्कृति मंत्री के पद पर बरकरार रखा गया है। कनिष्क का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। 12 साल की उम्र में वह अपने परिवार के साथ ब्रिटेन के कार्डिफ चले गए।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने तकनीक और वित्त क्षेत्र में काम किया। इस दौरान उन्होंने AI, फिनटेक और जलवायु से जुड़े कारोबारों के साथ काम किया। 2025 में कीर स्टार्मर सरकार ने उन्हें AI और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री बनाया था।
भारतीय मूल की लीजा नंडी को एंडी बर्नहैम ने अपनी नई कैबिनेट में संस्कृति मंत्री के पद पर बनाए रखा है। लीजा का जन्म मैनचेस्टर में हुआ। उनके पिता दीपक नंदी कोलकाता के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां लुईस बायर्स ब्रिटेन की रहने वाली हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया; 30 दिन बाद लागू होगा फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% नया टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी शराब, ऑटोमोबाइल और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। नया टैरिफ 30 दिन बाद लागू होगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक एनर्जी, पोटाश और पहले से सेक्टर-विशेष टैरिफ के दायरे में आने वाले उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। सबसे अहम बात यह है कि USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता) के तहत आने वाले कई उत्पाद भी अब इस नए टैरिफ के दायरे में आएंगे। ट्रम्प ने इस फैसले के लिए 1930 के टैरिफ एक्ट की धारा-338 का इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार इस प्रावधान के तहत टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के साथ बातचीत तेज करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पहले भी USMCA का उल्लंघन करते हुए एकतरफा टैरिफ लगाता रहा है और कनाडा ने सिर्फ उसका जवाब दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अमेरिका-कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ा सकता है। अमेरिकी शराब उद्योग ने भी चिंता जताई है कि जवाबी कार्रवाई से दोनों देशों के कारोबार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर असर पड़ सकता है। श्रीलंका में डेंगू का कहर: 76 हजार संक्रमित, 53 मौतें; एयरफोर्स ड्रोन से छतों पर जमा पानी खोज रही
श्रीलंका में मच्छरों से फैलने वाली बीमारी डेंगू का करीब एक दशक में सबसे गंभीर प्रकोप सामने आया है। जनवरी से अब तक 76,044 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 53 मौतें हुई हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के साथ अब देश की सेना भी अभियान में जुट गई है। श्रीलंका की एयरफोर्स ड्रोन की मदद से मानसून की बारिश के बाद छतों पर जमा पानी की पहचान कर रही है। वहीं सेना और पुलिस के जवान घरों, निर्माण स्थलों और स्कूलों की जांच कर रहे हैं, ताकि मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म किया जा सके। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई के पहले दो हफ्तों में 18 हजार से ज्यादा मामले सामने आने के बाद अस्पतालों ने बेड बढ़ाने शुरू कर दिए। जून में डेंगू के 21,537 मामले दर्ज किए गए थे। नेशनल डेंगू कंट्रोल यूनिट के कार्यवाहक डायरेक्टर जनरल कपिला कन्नंगारा ने कहा कि मरीजों की संख्या ज्यादा है और गंभीर मामलों की संख्या भी बढ़ी है। करीब 75% मामले DENV-2 स्ट्रेन से जुड़े हैं, जो तेजी से फैल रहा है। डेंगू का बढ़ता प्रकोप चक्रवात डिटवाह के बाद सामने आया है। नवंबर के अंत में आए इस चक्रवात को श्रीलंका की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा बताया गया है। इससे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था। जापान ने चीन के लाइव-फायर ड्रिल पर जताया विरोध
जापान ने मंगलवार को चीन के खिलाफ राजनयिक विरोध दर्ज कराया। जापान का कहना है कि चीन ने उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया। जापान की सेना के मुताबिक, यह अभ्यास रविवार सुबह ओकिनोटोरी द्वीप के दक्षिण-पश्चिम में करीब 180 किमी दूर किया गया। अभ्यास में रूसी नौसैनिक जहाज भी शामिल थे। जापान के शीर्ष सरकारी प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने राजनयिक माध्यमों से चीन के सामने विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से आसपास से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। चीन ओकिनोटोरी को द्वीप नहीं, बल्कि चट्टान मानता है। उसका कहना है कि इसलिए जापान को इसके आसपास के समुद्री क्षेत्र को अपना विशेष आर्थिक क्षेत्र घोषित करने का अधिकार नहीं है। जापानी सेना के मुताबिक, उसने चार जहाजों को अपने EEZ की ओर आते देखा था। इनमें चीन के रेनहाई-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, लुयांग III-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और फुची-क्लास रीप्लेनिशमेंट शिप के साथ रूस का स्टेरेगुश्चिय-क्लास फ्रिगेट शामिल था। रूस के जेट इंजन वाले शहीद ड्रोन बढ़े, अब तेज इंटरसेप्टर बनाने की होड़
रूस के जेट इंजन वाले शहीद अटैक ड्रोन की संख्या बढ़ने के बीच डिफेंस कंपनियां अब उन्हें रोकने के लिए तेज इंटरसेप्टर ड्रोन बनाने में जुट गई हैं। यूक्रेन की बड़ी ड्रोन निर्माता कंपनी स्काईफॉल ने सोमवार को ब्रिटेन के फार्नबोरो एयरशो में नया हाई-स्पीड इंटरसेप्टर पेश किया। दुनिया के बड़े एयरशो में शामिल फार्नबोरो एयरशो में इस साल ड्रोन पर खास फोकस है। स्काईफॉल का नया ड्रोन कंपनी के मौजूदा इंटरसेप्टर का तेज वर्जन है, जिसे पिछले साल के अंत से यूक्रेन में तैनात किया गया है। कंपनी के मुताबिक, नया ड्रोन अधिकतम 370 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। वहीं, इसके पुराने मॉडल की अधिकतम रफ्तार 310 किमी/घंटे तक है। शहीद कम कीमत वाले लंबी दूरी के अटैक ड्रोन हैं, जिन्हें ईरान ने डिजाइन किया था। रूस इन्हें गेरेन नाम से इस्तेमाल करता है और हर महीने यूक्रेन पर हजारों ड्रोन लॉन्च करता है। रूस ने शहीद के डिजाइन में कई बदलाव किए हैं। इनमें जेट इंजन भी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल के महीनों में रूस के जेट इंजन वाले शहीद ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ट्रम्प के करीबी FBI चीफ का रूस दौरा: 14-15 अक्टूबर को मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जाने की खबर
FBI डायरेक्टर काश पटेल इस साल रूस की यात्रा कर सकते हैं। पॉलिटिको ने सोमवार को एक अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के हवाले से बताया कि पटेल 14 और 15 अक्टूबर को मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। रूस की यात्रा करने वाले आखिरी FBI डायरेक्टर के तौर पर रॉबर्ट म्यूलर का नाम सामने आता है, जिन्होंने 2013 में रूस का दौरा किया था। काश पटेल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प कैंपेन के रूस के साथ मिलीभगत के डेमोक्रेट्स के आरोपों का विरोध किया है। पटेल ने इन आरोपों को “रशियागेट होक्स” बताया है। पॉलिटिको की रिपोर्ट में पटेल की रूस यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट नहीं बताया गया है। FBI डायरेक्टर की यात्रा की आधिकारिक पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। फ्रांस में विवादित कीटनाशकों की वापसी का रास्ता साफ: संसद ने कृषि बिल को दी मंजूरी
फ्रांस की संसद ने मंगलवार तड़के एक आपातकालीन कृषि बिल को मंजूरी दे दी। इसके तहत मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप वाले दो कीटनाशकों के सीमित और अस्थायी इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। इन कीटनाशकों पर फ्रांस में प्रतिबंध है, हालांकि यूरोपीय संघ में इनके इस्तेमाल की अनुमति है। फ्रांस की नेशनल असेंबली ने बिल को 296-224 वोट से मंजूर किया। इसके समर्थन में मुख्य रूप से दक्षिणपंथी और अति-दक्षिणपंथी सांसद रहे। अब बिल पर मंगलवार को सीनेट में अंतिम मतदान होना है। बिल को मंजूरी मिलने के बाद पर्यावरण समूहों ने इसका विरोध किया है। ग्रीनपीस ने इसे “शर्मनाक” बताया और कहा कि इसमें परागण करने वाले जीवों, पारिस्थितिकी तंत्र और स्वास्थ्य पर संभावित खतरों को लेकर वैज्ञानिक चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया है। इस फैसले से फ्रांस की पर्यावरण संक्रमण मंत्री मोनिक बारब्यूट के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, वह सीनेट में मतदान के बाद इस्तीफा दे सकती हैं। हालांकि, बारब्यूट ने नेशनल असेंबली में हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया। कृषि मंत्री एनी जेनेवार्ड और सरकार की प्रवक्ता मौद ब्रेजों ने मंगलवार को बारब्यूट के संभावित इस्तीफे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।