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क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत कर सकता है 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन कर सकता है

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। क्या अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

अंग्रेजों ने गुलाम देशों के लिए शुरू किया कॉमनवेल्थ गेम्स:पादरी ने आइडिया दिया था, भारत को पहला गोल्ड जीतने में 24 साल लगे

14 अक्टूबर 2010… दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम ‘भारत…भारत…’ के नारों से गूंज रहा था। बैडमिंटन कोर्ट पर सायना नेहवाल थीं। सामने सिर्फ एक फाइनल नहीं था, बल्कि पदक तालिका में भारत का भविष्य भी था। अगर सायना हार जातीं, तो मेजबान भारत तीसरे स्थान पर खिसक जाता, लेकिन उन्होंने जीत दर्ज की। भारत का 38वां स्वर्ण पदक आया। कुल पदक 101 हुए और पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरे स्थान पर पहुंच गया। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत की यह कहानी 2010 में शुरू नहीं हुई थी, इसकी शुरुआत 76 साल पहले हुई थी, जब 1934 में सिर्फ छह भारतीय खिलाड़ी पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरे थे। उस वक्त भारत पर अंग्रेजों का शासन था, लेकिन पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स की कहानी इससे भी 43 साल पहले की है। आइए, 135 साल पुराने इस सफर के बारे में जानते हैं…. न सरकार, न राजा… एक पादरी का आइडिया कॉमनवेल्थ की कहानी शुरू होती है 1891 में। ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था। दुनिया की करीब एक-चौथाई आबादी और विशाल भूभाग पर ब्रिटेन का शासन था। तब एक ब्रिटिश पादरी जॉन एस्टली कूपर ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने बाद में दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि साम्राज्य की ताकत सिर्फ सेना से नहीं, बल्कि लोगों के रिश्तों से भी बढ़ती है। अगर ब्रिटिश साम्राज्य के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक मैदान पर उतरेंगे तो आपसी भरोसा और भाईचारा मजबूत होगा। उन्होंने इसका नाम दिया- ‘पैन-ब्रिटेनिक फेस्टिवल’, लेकिन विचार देना आसान था, उसे सच करना मुश्किल। करीब 20 साल तक यह सपना कागजों में ही पड़ा रहा। राजा के राज्याभिषेक ने दिखाया भविष्य 1911 में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम का राज्याभिषेक हुआ। इसी मौके पर लंदन में फेस्टिवल ऑफ एम्पायर आयोजित किया गया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के खिलाड़ी पहली बार एक ही आयोजन में उतरे। यह आधिकारिक कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं थे, लेकिन इतिहासकार इसे कॉमनवेल्थ गेम्स की पहली झलक मानते हैं। यहीं लोगों को एहसास हुआ कि ऐसा आयोजन सफल हो सकता है। ओलिंपिक में हुई एक बैठक… जिसने इतिहास बदल दिया 1928 के एम्स्टर्डम ओलिंपिक के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के खेल प्रशासक मिले। यहीं फैसला हुआ कि ओलिंपिक से अलग, हर चार साल में ब्रिटिश साम्राज्य के देशों के लिए अपना एक खेल आयोजन होगा। यही वह फैसला था जिसने कॉमनवेल्थ गेम्स को जन्म दिया। पहले गेम्स लगभग रद्द होने की कगार पर थे 16 अगस्त 1930… कनाडा के छोटे से शहर हैमिल्टन में पहले ब्रिटिश एम्पायर गेम्स शुरू होने वाले थे। लेकिन एक बड़ी समस्या सामने थी। उस समय हवाई यात्रा आम नहीं थी। ज्यादातर खिलाड़ी समुद्री जहाजों से कनाडा पहुंचते थे। कई देशों ने साफ कह दिया कि उनके पास यात्रा का खर्च नहीं है। आयोजकों ने कई टीमों की आर्थिक मदद की। तब जाकर पहला आयोजन हो सका। अगर उस समय कनाडा पीछे हट जाता, तो शायद कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास वहीं खत्म हो जाता। आज हजारों खिलाड़ी आते हैं… तब सिर्फ 400 थे पहले संस्करण में केवल 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ी। इसमें सिर्फ 6 खेल- एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, स्विमिंग, डाइविंग, कुश्ती और लॉन बॉल्स शामिल थे। आज इन खेलों में हजारों खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और दर्जनों खेल खेले जाते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला स्वर्ण पदक ऑस्ट्रेलिया के रोवर बॉबी पियर्स ने जीता। वे बाद में ओलिंपिक चैंपियन भी बने। 1934 में भारत गुलाम था, लेकिन इतिहास लिखा भारत पहली बार इन खेलों में उतरा। आजाद भारत नहीं… ब्रिटिश भारत। पूरे दल में सिर्फ छह खिलाड़ी थे। उनमें से पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला। यानी भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक उस समय आया, जब देश का अपना तिरंगा भी आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। फिर आया ऐसा युद्ध, जिसने खेल ही रोक दिए 1942 और 1946… इन दोनों सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स होने थे, लेकिन दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध में जल रही थी। लाखों लोग मारे जा रहे थे। ऐसे में खेलों की कोई जगह नहीं थी। इतिहास में केवल यही दो संस्करण हैं, जो विश्व युद्ध की वजह से रद्द हुए। 1950 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड से खेलों की वापसी हुई। जब साम्राज्य टूट गया, तो खेलों का नाम भी बदल गया 1930 में इन खेलों का नाम था- ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, लेकिन अगले तीन दशकों में दुनिया बदल गई। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, घाना, नाइजीरिया, मलेशिया जैसे कई देश आजाद हो गए। ब्रिटिश साम्राज्य सिकुड़ने लगा और नाम बदलने लगे। भारत 24 साल बाद जीता पहला गोल्ड 1958… कार्डिफ। एक दुबला-पतला धावक ट्रैक पर उतरा। नाम था मिल्खा सिंह। उन्होंने 440 यार्ड दौड़ जीतकर इतिहास रच दिया। वे कॉमनवेल्थ गेम्स की एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस जीत के बाद उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ कहा जाने लगा। उसी संस्करण में पहलवान लीला राम ने भी स्वर्ण पदक जीता। भारत 76 साल बाद बना मेजबान भारत 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल हुआ और 2010 में उसने मेजबानी की, यानी 76 साल बाद। नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला दक्षिण एशिया का पहला शहर बना। 71 कॉमनवेल्थ देशों और क्षेत्रों के करीब 6,000 खिलाड़ी 17 खेलों की 272 स्पर्धाओं में उतरे। मेजबान होने का दबाव कम नहीं था, लेकिन भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य समेत 101 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर पहुंचा। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 126 भारतीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होंगे। इस बार सिर्फ 10 खेल शामिल हैं। भारत 126 खिलाड़ियों का दल भेज रहा है, जो एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, वेटलिफ्टिंग, जूडो, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, जिम्नास्टिक, लॉन बॉल्स, 3×3 बास्केटबॉल और पैरा कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेगा। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहैन भारत की ध्वजवाहक होंगी। वहीं, 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स एक बार फिर भारत लौटेंगे। मेजबानी अहमदाबाद करेगा। 2030 में ही कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए इसे खास माना जा रहा है। ——————–

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 आज से:125 भारतीय खिलाड़ी 8 खेलों में उतरेंगे; 1,168 मेडल्स के लिए 3,000+ एथलीट्स में होगा मुकाबला

स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में आज 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत होगी। 2 अगस्त तक चलने वाले इस इवेंट में 74 देशों के 3,000 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। 10 खेलों में 215 गोल्ड सहित कुल 1,168 मेडल दांव पर होंगे। भारत के 125 खिलाड़ी 8 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। स्टोरी में जानिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी… कॉमनवेल्थ गेम्स कब और कैसे शुरू हुआ? कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में हुई थी। तब इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था। पहले एडिशन में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े 11 देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसमें एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, लॉन बॉल्स, रोइंग, स्विमिंग और रेसलिंग जैसे खेल शामिल थे। 1930 से 1950 तक इस टूर्नामेंट को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा गया। 1954 में इसका नाम बदलकर ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स किया गया। 1970 में यह ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स बना और 1978 से इसे कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता है। इसका आयोजन हर चार साल में होता है। इसका मकसद कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों को बड़े इंटरनेशनल मंच पर कम्पटीशन का अवसर देना है। भारत ने पहली बार 1934 में हिस्सा लिया था। हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे बड़े खेल गायब इस बार कुल 10 खेलों में 215 मेडल इवेंट्स होंगे। इनमें 47 पैरा-स्पोर्ट्स मेडल इवेंट्स शामिल हैं। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसे खेल ग्लासगो 2026 का हिस्सा नहीं हैं। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा मेडल शूटिंग में ही जीते हैं। भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? भारत ने 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू किया था।भारत ने 1930, 1950, 1962 और 1986 को छोड़कर बाकी सभी एडिशन में हिस्सा लिया है। लंदन 1934 गेम्स में भारत की ओर से छह एथलीटों ने हिस्सा लिया था। भारतीय दल ने 10 ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स और एक कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया। इसी एडिशन में भारत ने अपना पहला मेडल जीता था। पहलवान राशिद अनवर ने पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल हासिल किया था। 1934 में डेब्यू के बाद से भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 564 मेडल जीते हैं। इनमें 203 गोल्ड, 189 सिल्वर और 172 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नया क्या होगा?
कॉमनवेल्थ माइल की वापसी: एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ माइल की वापसी होगी। यह इवेंट आखिरी बार 1966 में हुआ था। यानी करीब 60 साल बाद इसकी वापसी हो रही है। 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 1500 मीटर की जगह 1 मील यानी 1.609 किलोमीटर की रेस कराई जाएगी। इस बार मेंस के साथ विमेंस की माइल रेस भी होगी।
सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम: 2026 में छह खेलों में पैरा-स्पोर्ट्स को पूरी तरह शामिल किया गया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम है। कितने वेन्यू पर होंगे इवेंट्स? कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन ग्लासगो के चार अलग-अलग वेन्यू पर किया जाएगा। ग्लासगो दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2014 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया था। ओपनिंग सेरेमनी में चानू-लवलीना फ्लैग बियरर होंगी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की ओपनिंग सेरेमनी 23 जुलाई 2026 को होगी। समारोह ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरीना में भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे से 2:30 बजे तक होगी। भारत की ओर से मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन फ्लैग बियरर होंगी। इसमें मशहूर ब्रिटिश सिंगर टॉम वॉकर परफॉर्म करेंगे। मेडल में दिखेगा शहर की पहचान और इतिहास ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल्स में मेजबान शहर की पहचान, इतिहास और समावेशिता की झलक दिखेगी। पुरस्कार विजेता आर्टिस्ट और डिजाइनर मिलित्सा मिलेनकोवा ने मेडल डिजाइन किए गए हैं। ये मेडल ग्लासगो के लैंडमार्क्स, कोट ऑफ आर्म्स, औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार मेडल्स में ब्रेल और टैक्टाइल एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं। कहां देख सकते हैं इवेंट्स? भारत में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनल पर किया जाएगा। इसके अलावा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। आप इन खेलों का लुत्फ डीडी स्पोर्ट्स पर भी मुफ्त में उठा सकते हैं। इसके अलावा दैनिक भास्कर एप पर भी लाइव अपडेट्स पढ़े जा सकेंगे। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

श्रेयस की कप्तानी में पहली जीत का इंतजार:भारत Vs जिम्बाब्वे पहला टी-20 आज हरारे में; सूर्यवंशी ने यहीं बनाए थे 175 रन

भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में शामल 4:30 बजे से शुरु होगा। भारत श्रेयस अय्यर की कप्तानी में एक भी मुकाबला नहीं जीता है। टीम ने इंग्लैंड और आयरलैंड में 7 में से 6 टी-20 मैच हारे, एक मैच बेनतीजा रहा। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड दौरे पर फ्लॉप रहे। वे 3 मैचों में सिर्फ 42 रन बना सके। हालांकि हरारे के मैदान पर उनका रिकॉर्ड अच्छा रहा है। सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में यहां 80 गेंद पर 175 रन की पारी खेली थी। भारत को जिम्बाब्वे तीन बार हरा चुका भारत और जिम्बाब्वे के बीच 14 टी-20 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें भारत को 11 मैचों में जीत मिली है। वहीं जिम्बाब्वे भी भारत को 3 बार हरा चुका है। आखिरी बार जुलाई 2024 में जिम्बाब्वे ने हरारे में भारत को 3 रन से शिकस्त दी थी। दोनों के बीच आखिरी मुकाबला इसी साल टी-20 वर्ल्ड कप में खेला गया था। तब भारत ने चेन्नई में खेले गए मुकाबले में 72 रन से जीत दर्ज की थी। ईशान किशन इस साल टीम के टॉप स्कोरर भारत के लिए ईशान किशन ने इस साल सबसे ज्यादा रन बनाए हैं। उन्होंने 20 मैचों में 182.73 की स्ट्राइक रेट से 667 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट स्कोर 103 रन रहा है। उनके अलावा अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी से भी बड़ी पारी की उम्मीद होगी। स्क्वाड में शामिल गेंदबाजो में शिवम दुबे ने इस साल सबसे ज्यादा 13 विकेट चटकाए हैं। हालांकि प्रिंस यादव युवा गेंदबाजी अटैक का नेतृत्व करेंगे। मुजरबानी जिम्बाब्वे के पेस अटैक का नेतृत्व करेंगे जिम्बाब्वे की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेज गेंदबाजी है। टीम में ब्लेंसिंग मुजरबानी, रिचर्ड नगारवा और ब्रैड इवांस की पेस तिकड़ी है। इस साल मुजरबानी टीम के टॉप विकेट टेकर रहे। उन्होंने 9 मैचों में 7.17 की इकोनॉमी से 17 विकेट लिए हैं। ओपनर ब्रायन बेनेट ने 2026 में टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए। उन्होंने 9 मैचों में 135.86 की स्ट्राइक रेट से 394 रन बनाए। नाबाद 97 रन उनका बेस्ट स्कोर रहा। पिच रिपोर्ट और वेदर हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मुफीद मानी जाती है। हालांकि नई गेंद से तेज गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिल सकती है। टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकती है। गुरुवार को हरारे में धूप खिली रहेगी और बारिश की कोई संभावना नहीं है। मैच के दौरान तापमान 25°C के आसपास रहने का अनुमान है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे/रवि बिश्नोई, अशोक शर्मा/मयंक यादव, यश ठाकुर, प्रिंस यादव। जिम्बाब्वे: ब्रायन बेनेट, वेस्ली मधेवेरे, तादिवानाशे मारुमानी/तफद्जवा त्सिगा (विकेटकीपर), डिओन मायर्स, सिकंदर रजा (कप्तान), रयान बर्ल, मिल्टन शुम्बा, ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामहुरी, रिचर्ड नगारवा, ब्लेसिंग मुजरबानी।

ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटेंगे:ED का जुर्माना रद्द; IPL का पैसा विदेश भेजने का केस; बोले- मैं लीग की भलाई चाहता था

IPL के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में हैं। एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 16 जुलाई को IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका आयोजन से जुड़े FEMA मामले में फैसला सुनाया था। इसमें
मोदी को राहत देते हुए ED के लगाए गए जुर्माने को रद्द कर दिया था। फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि अब उनकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है और वह इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी अक्टूबर में बच्चे को जन्म देने वाली है, जिसके बाद वह भारत आने की योजना बना रहे हैं।
भारत से दक्षिण अफ्रीका पैसे भेजने का मामला था यह मामला 2009 में IPL को भारत से दक्षिण अफ्रीका ले जाने से जुड़ा है। उस समय लोकसभा चुनाव के कारण सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट भारत से दक्षिण अफ्रीका शिफ्ट किया गया था। इसके आयोजन के लिए BCCI ने दक्षिण अफ्रीका में करीब 243.45 करोड़ रुपए भेजे थे। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया कि यह रकम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व मंजूरी के बिना विदेश भेजी गई, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) का उल्लंघन हुआ। ED ने 2011 में नोटिस जारी किया और 2018 में ललित मोदी समेत BCCI के कुछ पूर्व अधिकारियों पर जुर्माना लगाया था। ट्रिब्यूनल बोली- ललित व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं ललित मोदी ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने ED की सबसे अहम दलील ही खारिज कर दी, जिससे पूरे मामले का आधार बदल गया। उनके मुताबिक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई रकम ‘करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन’ थी, न कि ‘कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन’। इसलिए इसके लिए RBI की पहले से मंजूरी लेना जरूरी नहीं था। ललित मोदी ने कहा, ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि वह BCCI की ओर से FEMA के तहत कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं थे और न ही उनके पास वह वित्तीय अधिकार थे, जिनका ED ने दावा किया था। इससे 2009 के दक्षिण अफ्रीका IPL से जुड़े सबसे बड़े कानूनी मामले का अंत हो गया। 2018 में लगा था 10.65 करोड़ रुपए का जुर्माना ED ने 2018 में ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके बाद उन्होंने इस आदेश के खिलाफ अलग-अलग अपील दायर की थीं। अब 16 जुलाई के फैसले में ट्रिब्यूनल ने उन आदेशों में बड़ा बदलाव करते हुए ललित मोदी समेत कई पक्षों को राहत दे दी। ट्रिब्यूनल के इस फैसले से 2010 में भारत छोड़ने के बाद ललित मोदी के सामने मौजूद सबसे बड़ी कानूनी बाधाओं में से एक खत्म हो गई है। हालांकि यह फैसला सिर्फ IPL 2009 के FEMA मामले तक सीमित है। ED ने ललित मोदी के खिलाफ कई दूसरी जांचें भी शुरू की थीं। ललित मोदी से जुड़े अन्य मामले 1. IPL ब्रॉडकास्ट राइट्स मामला जब 2008 में IPL शुरू हुआ, तब टीवी पर मैच दिखाने के अधिकार (ब्रॉडकास्ट राइट्स) वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (WSG) को दिए गए थे। WSG ने भारत में मैच दिखाने के अधिकार सोनी को दिए। 2009 में IPL के दूसरे सीजन से ठीक पहले ललित मोदी ने सोनी से करार रद्द कर दिया और बिना दोबारा टेंडर निकाले दोबारा WSG के साथ समझौता कर लिया। ED ने आरोप लगाया कि IPL के मीडिया और ब्रॉडकास्ट अधिकार देने की प्रक्रिया में FEMA और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ। इसमें WSG को 425 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचाया गया। इस मामले में बाद में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था। इस मामले में ललित मोदी को अभी कोई अंतिम कानूनी राहत नहीं मिली है। 2. BCCI की अनुशासनात्मक कार्रवाई 2010 में IPL से जुड़े कई विवाद सामने आने के बाद BCCI ने ललित मोदी को सस्पेंड कर दिया और उनके खिलाफ आंतरिक जांच शुरू की। जांच में BCCI ने आरोप लगाया कि ललित मोदी ने IPL चलाने के दौरान कई मामलों में नियमों का पालन नहीं किया। इनमें ब्रॉडकास्ट राइट्स, टीमों की बोली, टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय फैसलों से जुड़े आरोप शामिल थे। करीब तीन साल तक जांच और सुनवाई चलने के बाद 2013 में BCCI की अनुशासन समिति ने ललित मोदी को सभी क्रिकेट गतिविधियों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया। लंदन के सबसे महंगे इलाके में रह रहे ललित मोदी ललित मोदी 2010 से लंदन में रह रहे हैं। उनके साथ उनकी पत्नी मीनल मोदी और दोनों बच्चे आलिया और रुचिर भी थे। मीनल मोदी का 2018 में कैंसर से निधन हो गया। ललित मोदी का घर लंदन के बेलग्राविया-चेल्सी इलाके में है, जो शहर के सबसे महंगे इलाकों में गिना जाता है। यह इलाका विदेशी दूतावासों, लग्जरी ब्रांड्स और करोड़ों-करोड़ रुपये की संपत्तियों के लिए मशहूर है। ललित मोदी का जन्म दिल्ली के एक बड़े कारोबारी परिवार में हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 57 करोड़ डॉलर (करीब 4,555 करोड़ रुपए) है। वह अपने परिवार की कंपनी मोदी एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। इस कंपनी की स्थापना उनके दादा गुजर मल मोदी ने 1933 में की थी। मोदी एंटरप्राइजेज का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। इनमें फैशन, रसायन (केमिकल), हेल्थकेयर, रिटेल, सैलून, ट्रैवल, पर्सनल केयर, मनोरंजन और एफएमसीजी (रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान) शामिल हैं। समूह के प्रमुख ब्रांडों में केके मोदी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, मोदीकेयर, बीकन ट्रैवल्स, कलरबार, पान विलास पान मसाला, ईगो इटालियन रेस्तरां और गॉडफ्रे फिलिप्स शामिल हैं। ———————————-
यह खबर भी पढ़ें… पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख ठगी का आरोप:नवीन जिंदल से पहचान बताकर काम में पार्टनर बनाने ठेकेदार को फंसाया; FIR के आदेश
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर ठेकेदार से फ्रॉड किया गया। अब कोर्ट ने उन पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

शुभमन गिल वनडे में नंबर-1 बनने से एक अंक दूर:न्यूजीलैंड के मिचेल टॉप पर कायम, रूट 6 साल बाद टॉप-10 में शामिल

टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल वनडे के नंबर-1 बल्लेबाज बनने से एक अंक दूर है। वे ICC के वनडे बैटर्स की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं। गिल के 801 रेटिंग पॉइंट्स हैं, जबकि मौजूदा वर्ल्ड नंबर-1 डेरिल मिचेल के 802 अंक हैं। 19 जुलाई को लॉर्ड्स में 138 रनों की पारी खेलने वाले रोहित शर्मा ने विराट कोहली से रेटिंग पॉइंट्स का फासला कम कर लिया है। दोनों में 9 रेटिंग पॉइंट्स का अंतर है। रोहित चौथे और विराट तीसरे स्थान पर हैं। ICC ने बुधवार को ताजा रैंकिंग जारी की। जो रूट टॉप-10 में लौटे, डकेट 19वें नंबर पर आए वनडे की बैटिंग रैंकिंग में इंग्लैंड के जो रूट को चार स्थान का फायदा हुआ है। वे 8वें नंबर पर पहुंच गए हैं। रूट साल 2020 के बाद पहली बार उन्होंने वनडे रैंकिंग के टॉप-10 में जगह बनाई है। रूट ने भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में नाबाद रहे थे। उन्होंने 76, 99 और 74 रन की पारियां खेली थीं। लॉर्ड्स वनडे में 141 रन बनाने वाले बेन डकेट 11 स्थान की बढ़त के साथ संयुक्त 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं। अक्षर, अल्जारी और करन को 10-10 स्थान का फायदा वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में भारत के अक्षर पटेल, वेस्टइंडीज के अल्जारी जोसेफ और इंग्लैंड के सैम करन को 10-10 स्थान का फायदा हुआ है। अक्षर 32वें, जोसेफ 26वें और करन 70वें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के मिचेल सेंटनर चौथे और वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती संयुक्त नौवें स्थान पर पहुंच गए हैं। T20I में तांजिद, बेनेट और नगरवा ने लगाई छलांग ICC की ताजा T20I रैंकिंग में बांग्लादेश के तांजिद हसन करियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं। जिम्बाब्वे के ऑलराउंडर ब्रायन बेनेट नौवें स्थान पर पहुंचकर अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की, जबकि तेज गेंदबाज रिचर्ड नगरवा 37 स्थान की छलांग लगाकर करियर के सर्वश्रेष्ठ 32वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ——————————————- इंटरनेशनल क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… वेस्टइंडीज ने आखिरी वनडे 2 विकेट से जीता, न्यूजीलैंड के खिलाफ 2-3 से सीरीज गंवाई वेस्टइंडीज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी मैच में 2 विकेट की जीत हासिल की। हालांकि, बुधवार को मिली इस जीत के बावजूद टीम ने 5 मैचों की सीरीज 2-3 से गंवा दी। ब्रिजटाउन में कैरेबियाई टीम ने 269 रन का टारगेट 47.3 ओवर में 8 विकेट खोकर हासिल कर लिया। शिमरोन हेटमायर ने नाबाद 69 रनों की पारी खेली। वे प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। जॉयडन लेनिक्स को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। पढ़ें पूरी खबर

पॉजिटिव सेल्फ टॉक ने हालेंड को बनाया सुपर स्टार:अर्लिंग हालेंड ने बताया- थकान सिर्फ दिमाग में होती है; विज्ञान भी यही कहता है

हालिया फुटबॉल वर्ल्ड कप में नॉर्वे के अर्लिंग हालेंड 7 गोल दागकर टूर्नामेंट के चौथे सबसे सफल खिलाड़ी रहे। 6 फुट 5 इंच लंबे इस खिलाड़ी की फुर्ती और फिटनेस भी चर्चा में रही। उनकी इस शानदार परफॉरमेंस का राज केवल उनकी शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि उनकी गजब की मानसिक मजबूती है। पिछले साल की एक घटना है, जब मैनचेस्टर सिटी की ट्रेनिंग फैसिलिटी में हालेंड एक ‘हाइपोक्सिक चैंबर’ में एक्सरसाइज बाइक चला रहे थे। यह एक ऐसा कमरा होता है, जहां पहाड़ों जैसी ऊंचाई और तेज गर्मी का माहौल बनाकर हवा में ऑक्सीजन काफी कम कर दी जाती है। हालेंड को पूरी ताकत लगाकर अपना हार्ट रेट 150 बीट्स प्रति मिनट तक ले जाना था। उन्होंने कैमरे की तरफ देखते हुए कहा था कि वह यह बिल्कुल नहीं करना चाहते, लेकिन फिर भी करेंगे क्योंकि यह उनके शरीर और दिमाग दोनों के लिए अच्छा है। हालेंड का खुद को थकावट की लिमिट से आगे ले जाने का तरीका बेहद असरदार है। उनका मानना है कि अगर आप खुद से कहेंगे कि आप थक गए हैं, तो आप सच में थक जाएंगे। लेकिन अगर आप खुद से कहेंगे कि ‘मैं इतना भी नहीं थका हूं, सब ठीक है,’ तो आपको थकान महसूस नहीं होगी। उनका सीधा सा फंडा है कि हमारे शरीर में हमारी सोच से कहीं ज्यादा सहने की ताकत होती है और यह सब सिर्फ दिमाग का खेल है। बास्केटबॉल सुपरस्टार लेब्रोन जेम्स और अमेरिकी फुटबॉल के दिग्गज टॉम ब्रैडी जैसे चैम्पियन खिलाड़ी भी इसी सोच के साथ मैदान में उतरते रहे हैं। सालों से खेल मनोवैज्ञानिक भी मानते आए हैं कि खुद से सकारात्मक बातें करना (पॉजिटिव सेल्फ-टॉक) एक बेहतरीन टूल है, और अब विज्ञान भी यही मानता है। वेल्स की बांगोर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेम्स हार्डी और उनके साथियों द्वारा 2014 में की गई एक रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि एथलीट इसलिए हार नहीं मानते क्योंकि उनकी मांसपेशियों की ताकत खत्म हो जाती है, बल्कि वे इसलिए रुकते हैं क्योंकि उनका दिमाग मान लेता है कि अब दर्द या मेहनत बर्दाश्त से बाहर है। इस रिसर्च में कुछ युवाओं को साइकिल चलाने को कहा गया। जिस ग्रुप ने एक्सरसाइज के दौरान खुद से सकारात्मक बातें कीं, उनकी क्षमता में 18 प्रतिशत का सुधार देखा गया। दिलचस्प बात यह थी कि उनकी हार्ट रेट और शारीरिक मेहनत में कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन खुद से अच्छी बातें करने की वजह से उन्हें वह काम आसान लगा। हालेंड जब भी मैदान पर थकते हैं, तो खुद से बस यही कहते हैं कि ‘मैं थका नहीं हूं।’ खुद से ‘तुम’ कहकर बात करना भी देता है एनर्जी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के मनोवैज्ञानिक एथन क्रॉस की रिसर्च के अनुसार, खुद से बात करते समय किसी दूसरे व्यक्ति की तरह (जैसे ‘तुम’ कहकर) बात करना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। इसलिए, अगर आप भी चैम्पियन जैसी एनर्जी पाना चाहते हैं, तो अगली बार जब आप दौड़ते हुए, जिम में, या ऑफिस का काम करते हुए थकने लगें, तो खुद से बस यही कहें कि ‘तुम थके नहीं हो।’

विराट-अनुष्का हाथ थामकर प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे:कीचड़ भरे रास्ते पर नंगे पैर चले; वृंदावन आश्रम में एक घंटा रुके

विराट कोहली ने पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। दोनों बुधवार तड़के 4 बजे महाराजजी के नए आश्रम यमुना विहार कुंज पहुंचे। चेहरे पर मास्क लगाकर नंगे पांव आश्रम के अंदर गए। बारिश की वजह से रास्ते में कीचड़ था। विराट, अनुष्का का हाथ थामकर कीचड़ में चलते नजर आए। प्रेमानंदजी के शिष्यों ने उनकी अगवानी की। दोनों करीब 1 घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर आए तो विराट के माथे पर चंदन का टीका और हाथ में प्रसाद था। फिर कार से दोनों आश्रम से 15 किमी. दूर महाराजजी के गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे। उनके दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। विराट और अनुष्का ने इससे पहले IPL जीतने के बाद 2 जून को संत प्रेमानंद के दर्शन किए थे। दोनों 2 घंटे तक आश्रम में रहे थे। माथे पर चंदन, त्रिपुंड और हाथ में एक किताब लेकर बाहर आए थे। विराट-अनुष्का की 5 तस्वीरें… इंग्लैंड सीरीज में हार के बाद वृंदावन पहुंचे कोहली विराट इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मिली हार के बाद वृंदावन पहुंचे। इंग्लैंड ने 3 मैचों की सीरीज में भारत को 2-1 से हराया था। सीरीज में विराट ने 48 के औसत से कुल 144 रन बनाए थे। लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक मुकाबले में विराट ने 74 रन की पारी खेली थी। इससे पहले, एजबस्टन में पहले वनडे में 5 और कार्डिफ में दूसरे वनडे में 65 रन बनाए थे। गुरु पूर्णिमा महोत्सव से पहले प्रेमानंदजी के दर्शन किए प्रेमानंदजी के नए आश्रम यमुना विहार कुंज में कल यानी 23 जुलाई से 29 जुलाई तक गुरु पूर्णिमा महोत्सव होने जा रहा है। इसमें अलग-अलग राज्यों के शिष्यों के लिए अलग-अलग दिन तय किया गया है। यहां 28 जुलाई तक महाराज जी दर्शन देंगे। 29 जुलाई को वह केली कुंज आश्रम जाएंगे। जहां उनसे दीक्षा ले चुके संतों को दर्शन देंगे। 8वीं बार प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे विराट-अनुष्का विराट और अनुष्का ने अब तक 8 बार संत प्रेमानंद से मुलाकात की है। दोनों पहली बार 4 जनवरी 2023 को संत प्रेमानंद से मिले थे। 3 साल में दोनों की यह 8वीं और इस साल चौथी मुलाकात है। जून से पहले 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन महाराजजी के दर्शन किए थे। सत्संग सुना था। 16 फरवरी को बेटे अकाय के जन्मदिन के बाद भी दोनों यहां आए थे। 2025 में भी यह कपल तीन बार आश्रम पहुंचा था। जनवरी में बच्चों के साथ पहुंचे। इसके बाद मई और दिसंबर में प्रेमानंदजी के दर्शन किए थे। ———————- ये खबर भी पढ़िए- रोहित लॉर्ड्स पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय:इंग्लैंड में सबसे ज्यादा सेंचुरी लगाने वाले विदेशी बैटर; कोहली के साथ 21वीं शतकीय साझेदारी इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लॉर्ड्स में रोहित शर्मा ने 138 रन की पारी खेली। वे लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। रोहित ने विराट कोहली के साथ दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। दोनों ने वनडे क्रिकेट में 21वीं बार 100 या उससे ज्यादा रन की साझेदारी की। पढ़िए

कॉमनवेल्थ गेम्स- भारतीय बॉक्सिंग टीम का सामान आयरलैंड में छूटा:बेलफास्ट से ग्लासगो जाते वक्त एयरपोर्ट पर रह गया; ओपनिंग सेरेमनी की ड्रेस-किट भी नहीं पहुंची

कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मंगलवार को बेलफास्ट से ग्लासगो पहुंची टीम को परेशानी का सामना करना पड़ा। टीम का आधा सामान बेलफास्ट में ही छूट गया, जहां खिलाड़ी ट्रेनिंग कर रहे थे। इनमें बॉक्सिंग गियर, किट और ओपनिंग सेरेमनी की ड्रेस शामिल हैं। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, टीम के सदस्यों ने बताया कि आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट से ग्लासगो जाने वाला विमान काफी छोटा था। इस वजह से काफी सामान वहीं छोड़ना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से शुरू हो रहे हैं। पहले दिन ओपनिंग सेरेमनी होगी। बॉक्सिंग के मुकाबले 24 जुलाई से शुरू होने हैं। भाारत ने गेम्स में 22 बॉक्स उतारे हैं। ये सभी खिलाड़ी 12 जुलाई से बेलफास्ट में स्पेशल ट्रेनिंग कर रहे थे। 3 फोटो देखिए… वर्ल्ड चैंपियन जैस्मीन और हेड कोच का सामान गायब वर्ल्ड चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), परवीन हुड्डा (65 किग्रा), जादुमनी सिंह (55 किग्रा) और कपिल पोखारिया (90 किग्रा) का सामान मिसिंग है। प्लेयर्स के अलावा, मेंस टीम के हेड कोच सी. कुटप्पा का बैग भी ग्लासगो नहीं पहुंचा है। इसी महीने जब टीम दोहा से बेलफास्ट जा रही थी, तब भी लगेज को लेकर ऐसी ही समस्या आई थी। महिला कोच को अलग होटल में ठहराया, तैयारियों पर असर सामान छूटने के साथ-साथ टीम को रुकने की व्यवस्था में भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। महिला मुक्केबाजों की कोच को उस होटल में कमरा नहीं मिला है, जहां खिलाड़ी ठहरी हुई हैं। कोच को खिलाड़ियों से दूर दूसरे होटल में रखा गया है, जिससे टूर्नामेंट की तैयारियों और टीम के तालमेल में परेशानी आ रही है। ————————————– कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… चानू और लवलीना होंगी भारत की ध्वजवाहक, IOA ने घोषणा की ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारत की ध्वजवाहक होंगी। भारतीय ओलंपिक संघ ने शनिवार को इसकी घोषणा की। इस मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर