डोटासरा बोले- कांग्रेस UCC जनसुनवाई का करेगी बहिष्कार:कहा- बिना ड्राफ्ट जारी किए जनसुनवाई सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कदम
सरकार ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून बनाने के संबंध में आयोजित जनसुनवाई में विभिन्न राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि वे इस जनसुनवाई के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लें। डोटासरा ने पत्र में कहा- सरकार ने अभी तक न तो इस कानून का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया है। न ही सुझाव और आपत्ति के लिए किसी पोर्टल या अन्य माध्यम से सार्वजनिक किया है। मसौदा सार्वजनिक किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा होता है। सरकार बिना किसी मसौदे या ड्राफ्ट को सार्वजनिक किए समाज में जनसुनवाई के बहाने अनुचित बहस शुरू करना चाहती है, जो प्रदेश के सामाजिक समरसता के ताने-बाने पर सीधा प्रहार है और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला कदम है। डोटासरा ने कहा- इस प्रकार की बहस से विभिन्न धर्मों, जातियों एवं जनजातियों के मध्य अपने अधिकारों, परंपराओं एवं रीति-रिवाजों को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। इस प्रकार की जनसुनवाई से समाज के विभित्र वर्गों के मध्य वैमनस्यता की भावना उत्पन्न होने की आशंका है। कांग्रेस पार्टी ऐसी किसी भी बहस का स्पष्ट रूप से विरोध करती है, जिससे प्रदेशा की सामाजिक समरसता एवं सौहार्द प्रभावित होता हो। जनसुनवाई का कोई कानूनी अधिकार नहीं डोटासरा ने कहा- इस प्रकार की बहस से अलग-अलग धर्मों, जातियों और जनजातियों के बीच अपने अधिकारों, परंपराओं और रीति-रिवाजों को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं। इस प्रकार की जनसुनवाई से समाज के विभित्र वर्गों के मध्य वैमनस्यता की भावना उत्पन्न होने की आशंका है। कांग्रेस पार्टी ऐसी किसी भी बहस का स्पष्ट रूप से विरोध करती है, जिससे प्रदेश की सामाजिक समरसता एवं सौहार्द प्रभावित होता हो। सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली और बिना किसी मसौदे के आयोजित की जा रही, इस अर्थहीन जनसुनवाई का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सरकार आमजन के हर मुद्दे पर फेल पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- वर्तमान में प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। आमजन को न समय पर इलाज मिल रहा है और न ही आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हो रही है। इसी प्रकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी रसातल में पहुंच चुकी है। स्कूल भवन जर्जर हो रहे हैं, शिक्षकों के पद रिक्त हैं और विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। महिलाओं और बच्चियों के साथ दुराचार की घटनाएं प्रदेश को शर्मसार कर रही है।

