जयपुर के SMS हॉस्पिटल में सांस नली का दुर्लभ ऑपरेशन:सिकुड़े 7 छल्लों को हटाकर नली वापस जोड़ी; प्रदेश में ऐसा पहला ऑपरेशन
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में एक युवती की सांस की नली का दुर्लभ ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों का दावा है कि इस तरह का प्रदेश में ये पहला ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन में युवती की सांस नली के 7 छल्ले (जो सिकुड़ गए थे) हटाए गए और वापस सांस नली को जोड़ा गया। डॉक्टरों का कहना है कि भारत में अक्सर सांस नली के 3 या 4 ही छल्ले हटाने के ऑपरेशन होने के बारे में सुनते है, लेकिन 7 छल्ले हटाने का मामला बहुत दुर्लभ है। सीटीवीएस डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. संजीव देवगढ़ा की यूनिट की टीम ने इस ऑपरेशन को किया। ऑपरेशन के बाद युवती ठीक है और उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी है। डॉक्टर संजीव देवगढ़ा ने बताया- अजमेर की रहने वाली 29 साल की सुप्यार देवी का जनवरी 2024 में एक्सीडेंट हो गया था, जिसका अजमेर के हॉस्पिटल में सिर का ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के बाद युवती करीब एक माह कोमा में चली गई। कोमा में जाने के बाद डॉक्टरों ने मरीज के गले में ट्रेकियोस्टोमी (गले में छेद करके सांस लेने के लिए ट्यूब डाली गई) की गई, ताकि कोमा में रहने के दौरान मरीज को सांस लेने में तकलीफ न हो। कोमा से बाहर आने के बाद लगातार सांस लेने में तकलीफ करीब एक माह बाद जब युवती कोमा से बाहर आई, तो उसके गले में डाली गई टयूब को बाहर निकाला। इस टयूब के बाहर आने के बाद भी युवती को सांस लेने में तकलीफ रहने लगी। उसे कई दूसरे हॉस्पिटल में दिखाया और इलाज करवाया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। इसके बाद वह जब पिछले महीने मई में SMS हॉस्पिटल पहुंची। यहां जब युवती की सीटी स्कैन और वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी जांच करवाई तो पता चला मुख्य श्वासनली में गंभीर ट्रेकीयल स्टेनोसिस है। इस बीमारी में सांस नली में बने छल्ले सुकड़ जाते है, जिससे सांस लेने में तकलीफ आती है। ऑपरेशन करके 7 छल्ले हटाए, फिर जोड़ी नली डॉक्टर देवगढ़ा ने बताया- 29 मई को भर्ती करने के बाद युवती का 4 जून को ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन में डॉ. अनुला सिसोदिया, डॉ. ध्रुव शर्मा, डॉ. के. के. मावर, डॉ. उत्सव नंदवाना, डॉ. मोहित सिंघल, डॉ. स्वप्निल पंचाल के अलावा एनेस्थीसिया टीम से डॉ. प्रतिभा राठौर, डॉ. अंशुल गुप्ता और डॉ. दीपिका गहलोत का सहयोग रहा। करीब साढ़े चार घंटे चली इस सर्जरी में युवती की सांस नली में मौजूद 7 छल्ले जो सिकुड़ गए थे उनको काटकर हटाया और सांस नली को वापस सफलतापूर्वक जोड़ा गया। ऑपरेशन के दौरान के मरीज को 4 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। साथ ही सांस और ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए मरीज को हार्ट-लंग मशीन पर रखा गया। ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती यह ऑपरेशन इसलिए भी बहुत जटिल था, क्योंकि सांस नली को ऑपरेशन के दौरान हटाते समय आसपास स्थित महत्वपूर्ण नसों और ब्लड आर्टरी (वाहिनियों) को बचाना। ऐसी स्थिति में अगर कोई नस या आर्टरी कट जाए तो मरीज को बोलने, निगलने या सांस लेने में स्थायी कठिनाई हो सकती है तथा फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनियों को नुकसान होने पर जान का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।

