पंजाब में 3 बच्चों की हत्या कर मां का सुसाइड:पहले खाने में जहर दिया, फिर गला घोंटा, उसके बाद खुद पंखे से लटक गई

पंजाब के मानसा में मां ने 3 बच्चों की हत्या कर खुद भी सुसाइड कर लिया। उसने पहले 2 बेटियों और एक बेटे को जहर दिया। वह जिंदा न बच सकें, इसके लिए उनका गला भी घोट दिया। इसके बाद खुद भी घर के कमरे में लगे फंदे से लटक गई। बच्चों के पिता की पहले मौत हो चुकी है। जिस वक्त उसने यह वारदात की, वह घर पर अकेली थी। उसकी सास रिश्तेदारी में गई हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत वहां पहुंची। जिसके बाद चारों डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाईं। पुलिस इसकी वजह की जांच के लिए परिजनों के बयान दर्ज कर रही है। किराए के कमरे में रहती, पति की मौत हो चुकी
पुलिस के मुताबिक संदीप कौर (35) मानसा के वार्ड नंबर 3 में गुरुद्वारे के पास किराए के कमरे में रहती थी। उसके 3 बच्चे कालो (12), मोटो (7) और विश्वास (2) थे। 4 साल पहले बीमारी की वजह से संदीप के पति निक्का सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद घर में वह सास और बच्चों के साथ रहती थी। पति की मौत के बाद मजदूरी करने लगी
पुलिस के मुताबिक पति की मौत के बाद 3 बच्चों और सास की जिम्मेदारी संदीप कौर पर आ गई। वह मजदूरी करने लगी लेकिन उससे इतनी कमाई नहीं होती थी कि पूरे परिवार का पेट पाल सके। तीनों बच्चे बड़े हो रहे थे और उनकी पढ़ाई के खर्च का भी इंतजाम करना था। मजदूरी से यह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो पा रही थी। सास रिश्तेदारी में गई, कुंडी लगा बच्चों को खाने में जहर दिया
पुलिस के मुताबिक गुरूवार दोपहर संदीप अपने तीनों बच्चों के साथ घर पर थी। उसकी सास कहीं रिश्तेदारी में थी। संदीप कौर ने घर का दरवाजा बंद कर अंदर से कुंडी लगा दी। इसके बाद पहले तीनों बच्चों को खाने में जहर दे दिया। जब जहर का असर हुआ तो बच्चे नींद आने की बात कहकर बिस्तर पर लेट गए। बच्चे बेसुध हुए तो एक-एक कर गला घोंट दिया
जहर के असर से बच्चे बेसुध हो गए। संदीप कौर ने खौफनाक तैयारी कर रखी थी। उसने खुद भी सुसाइड करना था लेकिन उसे डर था कि अगर तीनों में से कोई भी बच्चा जिंदा बच गया तो उसकी देखभाल कौन करेगा। इसलिए उसने पहले तीनों बच्चों का एक-एक कर गला घोंट दिया। जिससे तीनों ने दम तोड़ दिया। बच्चों की मौत के बाद खुद भी फंदा लगाया
बच्चों की मौत कन्फर्म होने के बाद संदीप कौर ने चुन्नी से फंदा बनाया। इसे कमरे में लगे पंखे पर टांग दिया। इसके बाद उसे गले में फंसाकर उस पर लटक गई। जिससे उसकी भी मौत हो गई। गुरूवार दोपहर में पूरी वारदात हुई लेकिन आसपड़ोस में किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। रिश्तेदार घर पहुंचा तो कुंडी बंद मिली
इसके बाद गुरूवार शाम को एक रिश्तेदार उनके घर आया। वह घर पहुंचा तो दरवाजे को अंदर से कुंडी लगी हुई थी। उसने काफी देर तक कुंडी खटखटाई लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को इकट्‌ठा किया। जिसके बाद दरवाजे को धक्का देकर खोला गया। बिस्तर पर बच्चों की लाश, मां फंदे पर लटक रही थी
जब रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग अंदर गए तो वहां तीनों बच्चों की लाश बिस्तर पर पड़ी थी। वहीं संदीप कौर की लाश फंदे से लटक रही थी। उन्होंने तुरंत बच्चों की सांस चेक की तो तीनों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद संदीप कौर को तुरंत फंदे से नीचे उतारा लेकिन तब तक वह भी दम तोड़ चुकी थी। पुलिस बोली- बच्चों के गले पर निशान मिले
पुलिस के मुताबिक मृतक बच्चों के गले पर निशान मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि उसने पहले बच्चों को कोई जहरीली चीज खिलाकर बेहोश किया। इसके बाद तीनों का गला घोंट दिया। थाना सिटी-2 के जांच अधिकारी कुलवंत सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में आर्थिक तंगी की बात सामने आ रही है, जिससे संदीप कौर मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। आर्थिक तंगी से मानसिक परेशान रहती थी
थाना प्रभारी कुलवंत सिंह ने ये भी कहा कि रिश्तेदारों का कहना है कि संदीप कौर के लिए दिन-रात मजदूरी करके भी घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। 3 बच्चों के साथ बूढ़ी सास की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। इसी वजह से वह काफी परेशान रहती थी।

सांवली थी, इसलिए 10 लड़कों ने रिजेक्ट कर दिया:गोरी-पतली लड़की क्यों चाहते हैं लड़के, खूबसूरती क्या है; मुजफ्फरपुर में लड़की ने किया सुसाइड

मुजफ्फरपुर की 22 साल की अंशु ने सिर्फ इसलिए फंदे पर लटककर जान दे दी, क्योंकि वह सांवली थी। लड़के वाले बार-बार देखने के बाद उससे शादी करने से मना कर दे रहे थे। खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है, सुंदरता आखिर है क्या, कैसे बदलते रहते हैं खूबसूरती के पैमाने; जानेंगे बूझे की नाही में… सवाल-1ः मुजफ्फरपुर में लड़की के सुसाइड करने का पूरा मामला क्या है? जवाबः मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के मकरंदपुर गांव की रहने वाली 22 साल की अंशु कुमारी बीते तीन साल से अंदर ही अंदर परेशान थी। परिवार वाले उसकी शादी के लिए लगातार कोशिशें कर रहे थे। पिछले तीन सालों में 10 से अधिक लड़के वाले अंशु को देखने आए, लेकिन हर बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती या रिश्ता तय ही नहीं हो पाता था। परिवार वालों का कहना है कि लगातार टूटते रिश्तों ने अंशु के मन में यह गहरा विश्वास पैदा कर दिया कि उसके सांवले रंग की वजह से उसे बार-बार ठुकराया जा रहा है। समाज के इस नजरिए ने उसके भीतर एक गहरी हीन भावना पैदा कर दी थी, जिसे वह चुपचाप सह रही थी। परिजनों के मुताबिक, 1 जुलाई को एक बार फिर अंशु को देखने के लिए एक नया परिवार आने वाला था। शायद बार-बार रिजेक्ट होने का डर और समाज के सामने फिर से खुद को साबित करने का दबाव उस पर हावी हो चुका था। अंशु मानसिक रूप से इतनी परेशान थी कि उसने 30 जून की रात का खाना भी नहीं खाया और चुपचाप अपने कमरे में सोने चली गई। सुबह यानी 1 जुलाई को काफी देर तक अंशु के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। परिजनों ने खिड़की से झांककर देखा तो अंशु का शव पंखे से लटका मिला। फिलहाल, पुलिस इस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को दर्ज कर गहराई से जांच कर रही है। सवाल-2ः भारत में खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है? जवाब: हिंदू परंपरा में पुरुषों की सुंदरता का प्रतीक भगवान ‘कृष्ण’ को माना जाता है। वो श्याम वर्ण के थे। वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान राम का रंग भी सांवला था और वो बेहद सुंदर माने जाते हैं। मध्यकाल में भारत आए कई यात्रियों ने भी इस बात को लिखा है। 1292 में भारत आए इतालवी व्यापारी मार्को पोलो ने अपनी किताब ‘द ट्रैवल्स’ में लिखा है- ‘यहां सबसे काले इंसान को सबसे ज्यादा सम्मान मिलता है। ये लोग अपने देवताओं और मूर्तियों को काला और शैतानों को बर्फ की तरह सफेद दिखाते हैं।’ 16वीं शताब्दी के बाद मुगल शासन के दौरान भारत के लोगों में गोरे रंग की ओर आकर्षण बढ़ा। मुगल शासक और उनके दरबार में सेंट्रल एशिया और फारसी मूल के लोग थे, जिनकी त्वचा अपेक्षाकृत गोरी थी। उनकी कला, साहित्य और जीवनशैली ने गोरेपन को शाही और अमीर वर्ग से जोड़ा। यह प्रभाव धीरे-धीरे समाज में फैलने लगा। भारत में ब्रिटिश हुकूमत आई तो उसने काले-गोरे में भयंकर विभाजन शुरू कर दिया। क्योंकि सभी अंग्रेज गोरे थे, इसलिए उन्होंने गोरे रंग को बेहतर बताया और काले रंग को गुलामी, अज्ञानता और हीनता से जोड़ दिया। उनकी देखा-देखी भारत के उच्च वर्ग ने भी इस विचार को अपना लिया, क्योंकि वो अंग्रेजी शासकों के करीब रहना चाहते थे। इस दौरान गोरे रंग को लेकर एक मानसिकता बनी, जो आज भी कायम है। आजादी के बाद यह धारणा और मजबूत हुई। खासकर फिल्म उद्योग और विज्ञापनों के जरिए। 1978 में ‘फेयर एंड लवली’ जैसी क्रीम की शुरुआत ने गोरेपन को बड़ा बिजनेस बना दिया। बॉलीवुड ने भी गोरे कलाकारों को खूबसूरत बताया, जिससे आम लोगों में यह चाहत बढ़ी। ‘द इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंडियन साइकोलॉजी’ ने दिल्ली-NCR में 18 से 30 साल के 100 युवाओं पर स्टडी की। इस रिसर्च में पता चला कि लोग अपने रंग के हिसाब से ही सुंदरता की पसंद तय करते हैं। हालांकि, इसमें गोरे रंग की ओर झुकाव ज्यादा दिखा। सवाल-3: सुंदरता आखिर होती क्या है? जवाबः कहा जाता है कि ‘Beauty lies in the eyes of the beholder’ यानी सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है। सुंदरता की कोई एक परिभाषा नहीं है। दुनिया में सुंदरता से जुड़ी अलग-अलग थ्योरीज हैं। इसमें एक थ्योरी रिप्रोडक्शन यानी प्रजनन की बायोलॉजी से जुड़ी है। विकासवादी जीवविज्ञानी मानते हैं कि कोई महिला या पुरुष बच्चे पैदा करने के लिए प्राकृतिक रूप से जितना सक्षम और उपयोगी है, वो उतनी ही आकर्षक और सुंदर लग सकती है। इसी वजह से महिलाओं में सुंदरता के लिए सुडौल स्तन, लंबे बाल, सुराही जैसी गर्दन, चेहरे की सिमेट्री, बड़ा पेल्विक जैसे पैरामीटर इवॉल्व हुए हैं। इसी तरह पुरुषों में लंबा कद, गठीला शरीर, भारी आवाज, घने काले बाल और चेहरे की सिमेट्री जैसे पैमाने इवॉल्व हुए। इस थ्योरी के मुताबिक… सवाल-4: समय के साथ खूबसूरती के पैमाने कैसे बदलते रहते हैं? जवाब: खूबसूरती के कुछ पैमाने और मानक लगातार बदलते रहते हैं। यह बदलाव समाज के सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के साथ होता रहा है… सवाल-5ः क्या गोरा दिखना ही असल खूबसूरती है। अगर नहीं, तो इस पर बात क्यों नहीं होती? जबावः मगध महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर निधि सिंह का कहना है, ‘हमें ब्यूटी की परिभाषा को बदल देने की जरूरत है। हमें ब्यूटी यानी खूबसूरती की विविधता को समझना चाहिए। उसको उभारना चाहिए। भारत में खूबसूरती का पैमाना कभी भी किसी का कलर नहीं रहा है। यह वेस्टर्न कल्चर का दिया हुआ है। आज इसको बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान ब्यूटी प्रोडक्ट्स का है। वे खूबसूरती के झूठे स्टैंडर्ड सेट करते हैं, ताकि उनका प्रोडक्ट आसानी से बिक सके। इसके अलावा इसे बढ़ाने में सोशल मीडिया का योगदान भी है।’ निधि सिंह का मानना है कि गोरी त्वचा को खूबसूरत समझने की सोच इतनी मजबूत और विकसित हो गई है कि इस पर बात या बहस होती ही नहीं। अगर कोई जन्म से गोरा है तो वो पैदाइशी खूबसूरत है, लेकिन अगर कोई जन्म से काला होता है तो उसे खूबसूरत बोलने की बजाय गोरा करने के नुस्खों पर काम शुरू कर दिया जाता है।

स्टूडेंट बनकर पहुंचा रिपोर्टर-₹1 में दरोगा बनाने वाली कोचिंग एक्सपोज:टीचर बोले- ये मार्केटिंग, खान सर की कोचिंग में ₹100 का ऑफर, 10 हजार तक फीस

दो साल पहले दरोगा की तैयारी करने संजय पूर्णिया से पटना आया था। एक रुपए में दरोगा बनाने वाली फैक्ट्री का नाम बहुत सुना था। पटना आते ही वहां एडमिशन ले लिया। 7 दिन पढ़ाई की तो पता चला कि यह तो ट्रायल था, आगे की तैयारी के लिए पैकेज चुनना होगा। 1 रुपए में बस मैप ही पढ़ाया जाएगा। बाद में घर वालों को पूरी कहानी बताई और पैसे मंगाकर स्पेशल पैकेज भी चुन लिया। 2 साल बाद भी संजय दरोगा नहीं बन पाया। संजय कोचिंग के जाल में ऐसा फंसा कि 2 साल बाद भी नहीं निकल पाया..। संजय के साथ बिहार के लाखों स्टूडेंट्स की यही कहानी है। वह हर साल कोचिंग के नाम पर ऑनलाइन और ऑफलाइन पैकेज के जाल में फंसते हैं। एक रुपए से लेकर 200 रुपए फीस में नौकरी का दावा करने वाले कोचिंग सेंटर्स की ये ट्रिक स्टूडेंट्स को फंसाने की है। बिहार में करीब 12 हजार करोड़ रुपए सालाना की कोचिंग इंडस्ट्री है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए 1 रुपए में दरोगा बनाने वाले दावों का काला सच..। पैकेज के नाम पर कोचिंग का धोखा.. खान सर और रौशन आनंद के बीच हुई कोचिंग वर्चस्व की लड़ाई के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पड़ताल के लिए पटना के मुसल्लहपुर हाट पहुंची। ये इलाका बिहार की कोचिंग का हब कहलाता है। हमारी नजर यहां लगे बड़े-बड़े पोस्टर्स पर पड़ी। यहां हर कोई एक रुपए में दरोगा बनाने का दावा कर रहा है। एक रुपए से लेकर 200 रुपए की फीस में सरकारी नौकरी का पैकेज देने वाले रेलवे, SSC, बिहार पुलिस और BPSC जैसी परीक्षाओं को क्वालीफाई कराने का दावा करते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले मुसल्लहपुर हाट के किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस पहुंची। यहां हम खान ग्लोबल स्टडीज में स्टूडेंट बनकर दाखिल हुए। यहां हमें फाउंडेशन और टारगेट 2 तरह के बैच के बारे में बताया गया। फाउंडेशन में बेसिक से हायर लेवल तक की पढ़ाई होती है, जिसका टाइम ड्यूरेशन 18 महीने का है। टारगेट बैच में सिर्फ रिवीजन करवाया जाता है, जिसकी क्लास 6 महीने तक होती है। इसके अलावा फिजिकल और पॉलिटिकल मैप की भी पढ़ाई कराई जाती है। इसकी फीस 200 रुपए से लेकर 300 रुपए तक है। खान सर की कोचिंग के ऑफिस में बैठे निरंजन से हमारी बातचीत हुई। रिपोर्टर – मुझे क्लास जॉइन करनी है। निरंजन -एक क्लास चल रही है, ये टारगेट बैच है। इसका टाइम ड्यूरेशन 6 महीने का है। इसमें पीटी-मेंस का रिवीजन कराया जाएगा। इसकी फीस 2 हजार रुपए है। रिपोर्टर – मुझे फाउंडेशन बैच जॉइन करनी है। निरंजन – इसमें बेसिक से पढ़ाई कराई जाएगी, इसमें जीके-जीएस खान सर खुद पढ़ाएंगे। इसके साथ साइंस, आर्ट्स, इंटरनेशनल रिलेशन, कंप्यूटर भी खान सर पढ़ाएंगे। बाकी सब्जेक्ट दूसरे टीचर पढ़ाएंगे। क्लास सुबह के 7 बजे से शुरू होगी। शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच की फीस कितनी है? निरंजन – फाउंडेशन बैच के लिए 6 हजार रुपए फीस है, लेकिन अभी ऑफर चल रहा है। ऑफर में एडमिशन लेते हैं तो वन टाइम पेमेंट पर 3 हजार रुपए देने होंगे। इसमें 50% की छूट है। रिपोर्टर – बाकी सब्जेक्ट के लिए जो टीचर हैं, उनकी फीस अलग से जमा करनी होगी या इसी फीस में पढ़ाएंगे। निरंजन -उसके लिए अलग से देना होगा। शाम के समय में संतोष सर मैथ पढ़ाते हैं, उसके लिए 1500 रुपए फीस है लेकिन अभी ऑफर में 750 रुपए जमा करना होगा। इसी तरह इंग्लिश और रीजनिंग के लिए भी अलग-अलग टीचर हैं, सभी की फीस 1500 रुपए हर सब्जेक्ट की है। लेकिन ऑफर में 750 रुपए देने होंगे। अगर आप मैथ्स, रीजनिंग और इंग्लिश तीनों को एक साथ लेते हैं तो 2 हजार रुपए में हो जाएगा। खान सर और इन सभी की एक साथ क्लास जॉइन करने पर टोटल 5 हजार में हो जाएगा। ऑफर खत्म होने पर इसकी फीस हो जाएगी 10,500 रुपए। रिपोर्टर – कब तक ऑफर चलेगा? निरंजन – अभी ऑफर चल रहा है, जल्दी ही खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर – यह क्लास ऑनलाइन चलेगी या ऑफलाइन? निरंजन – यह सारी क्लास ऑफलाइन चलेगी। रिपोर्टर – इस बैच में किसकी तैयारी कराई जाएगी? निरंजन – इसमें रेलवे, SSC, बिहार पुलिस की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर – हमने तो सुना है कि खान सर 100 रुपए फीस लेकर पढ़ाते हैं? निरंजन – वह सब कुछ ऑनलाइन क्लास में होता है, ऑफलाइन क्लास की फीस 100 रुपए नहीं है। आपको ऑनलाइन में यह सब कुछ मिलेगा, जिसमे खान सर की लाइव क्लास मिलेगी। रिकॉर्डिंग वीडियो मिलेगा। लोग 100 रुपए का ऑफर देखकर आते हैं, लेकिन यहां उन्हें पूरा फीस स्ट्रक्चर बताया जाता है। रिपोर्टर – वह कैसे मिलता है? निरंजन – वह आपको मोबाइल में एप्प डाउनलोड करना होगा, वहां से आपको मिल जाएगा। खान सर के कोचिंग में जो फैसिलिटी दी जाती है, उसके हिसाब से यहां फीस बाकी कोचिंग की अपेक्षा कम है। रिपोर्टर- बीपीएससी और यूपीएससी की फीस कितनी है? निरंजन- बीपीएससी के लिए 20 हजार फीस है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लास चलती है। इसमें प्री, मेंस और इंटरव्यू तक की तैयारी कराई जाती है। उसी फीस में किताब भी साथ में मिलेगी। अगर आप 6 हजार वाली क्लास लेते हैं तो उसमें किताब अलग से लेनी होगी। रिपोर्टर – आपने तो मुझे पहले बताया था कि 5 हजार रुपए लगेंगे। निरंजन – वह फाउंडेशन क्लास की है। वहां बेसिक पढ़ाई कराई जाती है। 100-200 वाली क्लास लेकर बीपीएससी, यूपीएससी या रेलवे, एसएससी की क्लास नहीं होती है। वह सब ऑनलाइन या कम दिन की टारगेट क्लास होती है। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग से निकलकर हम कैंपस में ही अंकुश मैथमेटिक्स कोचिंग सेंटर पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात दीपक से हुई, जिन्होंने फीस से लेकर कोर्स की पूरी जानकारी दी। रिपोर्टर – सर की क्लास जॉइन करनी थी। दीपक – सर सिर्फ मैथ्स पढ़ाते हैं, वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 4250 रुपए जमा करना होगा। अगर इंस्टॉलमेंट में करना चाहते हैं तो पहली बार 3 हजार और क्लास स्टार्ट होने के एक महीने के भीतर 2 हजार जमा करने होंगे। रिपोर्टर – कितने दिनों तक क्लास चलेगी। दीपक – क्लास 10 से 12 महीने तक ही चलेगी। रिपोर्टर – आपके यहां पैसा ज्यादा लिया जा रहा है, कई जगहों पर पोस्टर देखा है कि 100 से 200 रुपए में पढ़ाया जाता है। दीपक – अरे, उसकी सच्चाई कुछ और ही है। 100 से 200 रुपए में फाउंडेशन की क्लास नहीं होती है। वह मैप पढ़ाने की फीस होती है। कई लोग टारगेट क्लास कराते हैं। इसकी 8 से 10 दिन तक की ही क्लास चलती है। उस सब की फीस 100 से 200 रुपए है। जिसकी परीक्षा होती है, उसी की स्पेशल क्लास चलती है, जैसे रेलवे या बिहार पुलिस तो उसी की पढ़ाई कराई जाएगी। रिपोर्टर – यहां 100 रुपए वाली क्लास नहीं चलती है क्या? दीपक – चलती है न, यहां 99 रुपए में रेलवे की स्पेशल क्लास चलती है। सर को बेटा हुआ था तो 11 रुपए में एडमिशन हो रहा था, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 99 रुपए कर दिया गया हैंं। यह बैच 2 महीने में खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर – तो इतने कम दिन में क्या पढ़ाते होंगे? क्या सिलेबस कंप्लीट हो जाता है? दीपक – यह सब टारगेट बैच होता है। इस बैच में ऊपर-ऊपर पढ़ाया जाता है, जिसका एग्जाम है, उसी की स्पेशल पढ़ाई होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर हाट में स्थित कौटिल्य जीएस पहुंची तो यहां हमारी मुलाकात संतोष से हुई। संताेष ने कोचिंग का पूरा सच बताया और कहा अगर प्रचार में 1 रुपए या चौंकाने वाली कम फीस नहीं रखी जाए तो स्टूडेंट्स कैसे आएंगे। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच में एडमिशन लेना है, कितनी फीस लगेगी? संतोष – फाउंडेशन जीएस के लिए वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 6500 रुपए लगेगा। अगर इंस्टॉलमेंट में देते हैं तो 7100 रुपए देने होंगे। अगर इंस्टॉलमेंट में पैसा देना चाहते हैं तो एडमिशन के समय 2000 रुपए जमा करने होंगे। बाकी बचे पैसे तीन टर्म में देने होंगे। रिपोर्टर – इस बैच में किस परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी? संतोष – बैंकिंग, SSC, बिहार पुलिस, रेलवे की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर – 100 से 200 रुपए में जो क्लास चल रही है। उस बैच में कैसे एडमिशन होगा? हमने कई जगहों पर देखा कि 100 रुपए में क्लास करने का पोस्टर लगा है? संतोष – यह सब 10 से 15 दिन की क्लास होती है। हमारे यहां भी एक टेस्ट के 15 रुपए लिए जाते हैं। 200 रुपए में एक महीने तक टेस्ट दीजिए। यहां अभी हाल में ही 100 रुपए वाला बैच खत्म हुआ है। वह 10 दिन तक चला। इसमें सिर्फ किसी एक खास एग्जाम को लेकर तैयारी कराई जाती है। रिपोर्टर – प्रचार तो ऐसे किया जाता है कि 100 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाएगी। इसकी सच्चाई क्या है? संतोष – पूरे पटना में, 100 रुपए में कोई टीचर नहीं पढ़ाएगा। मेरे पास पूरी तैयारी करने के लिए 6500 रुपये लगेंगे। 100 रुपए वाली क्लास में सिर्फ टॉपिक वाइज डिस्कशन होगा। अगर आपने फाउंडेशन की पढाई नहीं की है, तो 100 रुपए वाली क्लास में आपको कुछ समझ में ही नहीं आएगा। रिपोर्टर – 6500 रुपए के बाद अलग से कोई पैसा नहीं देना होगा क्या? संतोष – बुक के लिए आपको अलग से पैसे देने होंगे। पड़ताल के दौरान भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम आशा मैथमेटिक्स क्लासेस पहुंची। वहां हमारी मुलाकात शुभम से हुई। शुभम ने कोर्स से लेकर फीस तक की पूरी डील की। शुभम ने कोचिंग मार्केट की पूरी गणित समझाई। रिपोर्टर – मैथ्स-रीजनिंग के लिए एडमिशन लेना है। शुभम – इसके लिए शाम में क्लास चलती है, 6 महीने तक रीजनिंग की और 1 साल तक मैथ्स की क्लास चलेगी। मैथ्स के लिए 4500 फीस है, लेकिन ऑफर में 2500 रुपए में एडमिशन हो जाएगा। रीजनिंग के लिए 1550 रुपए है, लेकिन ऑफर में 750 रुपए ही लगेंगे। रिपोर्टर – लेकिन यहां तो हर जगह 100 रुपए वाली क्लास का पोस्टर लगा है। शुभम – मेरे यहां 100 रुपए में क्लास नहीं चलती है, जितनी कम फीस वाली बैच है, वह फाउंडेशन बैच नहीं होता है। वह ज्यादा से ज्यादा एक महीने का होता है। रिपोर्टर – इसमें टीचर्स को क्या फायदा होता होगा? शुभम – यह बहुत बड़ा बिजनेस है। एक 1 हजार रुपए बोलकर क्लास शुरू करते हैं। अगर 1000 स्टूडेंट्स ने 1000 – 1000 देकर एडमिशन लिया तो 1 से 2 महीने में टीचर ने करोड़ों रुपए कमा लिए। बच्चों को लगता है कि 1000 रुपए ही लग रहा है। लेकिन उसी 1000 हजार से टीचर लाखों-करोड़ो बना लेते हैं। क्योंकि हजारों लड़के एडमिशन लेते हैं। इसमें किसी भी तरह से टीचर को 1 महीना बिताना होता है। रिपोर्टर – एक महीने में बच्चों को क्या ही पढ़ा पाते होंगे? शुभम- यह चालाक लड़के समझ पाते हैं, लेकिन बाकी लड़के बड़े नाम पर जाते हैं। 1 महीने में कोई क्या ही पढ़ा पाएगा। अगर बच्चे बेसिक पढ़ाई नहीं किए होते हैं, तो एक महीने की क्लास में बच्चों को कुछ समझ में नहीं आता है। जब तक हम ए टू जेड पढ़े नहीं रहेंगे, तब तक कुछ नहीं समझ पाएंगे। बच्चों को लगता है कि एक ही हजार तो लग रहा है। ऐसे में टीचर अच्छे-खासे पैसे बना लेते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर के ही सिलेक्शन तक कोचिंग सेंटर पहुंची। यहां हमारी मुलाकात टीचर पी के (प्रभु कुमार) और प्रेमजीत सिंह से हुई। दोनों टीचर्स ने फीस के साथ कोचिंग से जुड़ी जानकारी दी। दोनों टीचर ने कोचिंग में चल रहे मार्केटिंग के तरीके का भी खुलासा किया। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच के लिए एडमिशन लेना है। प्रेमजीत – पूरे फाउंडेशन बैच के लिए फीस 8500 रुपए है। रिपोर्टर – चारों तरफ 100 रुपए में तैयारी कराने और 1 रुपए में दरोगा की पूरी तैयारी के पोस्टर-बैनर लगे हैं। प्रेमजीत – यह सब मार्केटिंग का तरीका है। आपको 1 रुपए के बहाने ऑफिस बुलाया जाएगा। वहां एक रुपए में एडमिशन लेकर क्लास रूम तक बुलाया जाएगा। फिर अलग-अलग सिलेबस के नाम पर आपसे पैसे वसूल लिए जाएंगे। रिपोर्टर – यह पूरा खेल कैसे होता है? प्रेमजीत – एक रुपए तो दिखावा है। एक रुपए के नाम पर जब स्टूडेंट पहुंच जाते हैं, तो 10 दिन तक पढ़ाया जाता है। स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि 1 रुपए की क्लास 10 दिन की है। आगे बताया जाता है कि 10 दिन में क्या होगा? क्लास कंटिन्यू करने लिए किसी फाउंडेशन क्लास में एडमिशन ले लीजिए। कोई भी टीचर क्वालिटी एजुकेशन देगा तो वह पैसा तो लगेगा। अगर कोई 1 रुपए में या 10 रुपए में पढ़ा रहा है तो वह क्या क्वालिटी एजुकेशन देगा। रिपोर्टर – खान सर का प्रचार है कि वह 200 रुपए लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं? प्रेमजीत – हां, 200 रुपए में पढ़ाते हैं लेकिन उस 200 रुपए में क्या पढ़ाया जाता है, यह किसी को नहीं बताया जाता है। 200 में मैप की क्लास चलती है, जो 10 से 15 दिन की होती है। कम पैसे में बच्चों को क्लास रूम तक बुलाया जाता है। फिर उनसे पैसे वसूले जाते हैं। खान सर 9 से 10 रुपए का भी बैच लेकर आए हैं। एक बार बच्चे आ जाते हैं फिर उनसे अलग-अलग एग्जाम की तैयारी के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। क्या कोई 9 से 10 रुपए में अधिकारी बन पाएगा? यह सब मार्केटिंग है। रिजल्ट हो या न हो, कोचिंग वाले रिजल्ट खरीद लेते हैं। फिर उन्ही को दिखाया जाता है कि इतने सारे लड़के हमारे पास पढ़कर नौकरी पाए हैं। ऐसे में और भी लड़के एडमिशन लेने चले आते हैं। रिपोर्टर – ये लोग कैसे मार्केटिंग करते हैं? प्रेमजीत – कोचिंग वाले बड़े-बड़े लोगों के पॉडकास्ट और शो में जाते हैं। वहां अपने कोचिंग का प्रचार करते हैं। वह कहते हैं कि हम 200 रुपए में ही पढ़ाते हैं। वहां यह नहीं बताते कि इस 200 रुपए में क्या पढ़ाते हैं। 75 हजार रुपए भी फीस लेते हैं, यह नहीं बताते हैं। बच्चे यही सुनकर क्लास में आ जाते हैं कि 200 रुपए में पढ़ाई हो रही है। क्लास में आने के बाद 10 दिन क्लास होती है और फिर बोला जाता है कि आप फाउंडेशन बैच में एडमिशन लीजिए। इन्वेस्टिगेशन में 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा फर्जी निकला भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सोशल मीडिया और बैनर पोस्टर पर 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा पूरी तरह से फर्जी है। ये स्टूडेंट्स को बुलाने का एक ट्रेंड है। इसी तरह से 99, 199 और 200 का भी कोचिंग प्लान है। भास्कर की इन्वेस्टिगेश्न में साफ हो गया कि 200 रुपए सरकारी नौकरी की तैयारी का दावा स्टूडेंट्स को बुलाकर उन्हें बड़े पैकेज वाले कोर्स में पढ़ाने का ट्रेंड है। सामने आया कि 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी सिलेबस की पढ़ाई नहीं होती है, बल्कि वह किसी टॉपिक या मैप पढ़ाने के बहाने टीचर बच्चों को अपने क्लासरूम तक बुलाते हैं। 7-10 दिन की क्लास कराते हैं और इस दौरान बच्चों से नौकरी के लिए सिलेबस की पूरी तैयारी के नाम पर 6500-8500 रुपए तक लेकर एडमिशन कराते हैं। पूरे पटना में कोई ऐसा टीचर या कोचिंग नहीं मिला जहां 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाती हो। बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री की ताकत समझिए… एक्सपर्ट बोले- इस तरह की मार्केटिंग से बच्चों को क्लासरूम तक लाया जाता है इसके बाद हमने एक्पर्ट्स से बात की हमने पूछा, कोचिंग का धंधा बिहार में इतना तेजी से कैसे फैल रहा है? इस पर बिहार के पूर्व DGP और शिक्षाविद अभ्यानंद ने बताया कि 1 रुपए में नौकरी की तैयारी कराने का दावा सिर्फ मार्केटिंग का तरीका है। बच्चों को पहले क्लासरूम तक बुलाया जाता है फिर उनसे महंगे कोर्स बेचे जाते हैं। सम्राट सरकार कर रही कोचिंग बिल लाने की तैयारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं नए नियमों के अनुसार, अब राज्य का कोई भी कोचिंग संस्थान स्कूल और कॉलेज के तय समय के दौरान अपनी कक्षाएं नहीं चला सकेगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी मुख्य स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं। दरअसल, पटना में दो बड़े कोचिंग संस्थानों को चलाने वालों (खान सर और रौशन आनंद) के बीच विवाद के चलते सरकार को इस बारे में फैसला लेना पड़ा। क्यों लिया जा रहा कोचिंग के लिए ये फैसला ? 27 मई को बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद बिहार की कई कोचिंग ने अपने – अपने छात्रों की सफलता का दावा किया। खान सर द्वारा जारी खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद ने बड़ी संख्या में परीक्षा में सफल छात्रों के लिए प्रचार अभियान शुरू किया। दोनों कोचिंग सेंटर ने सफल उम्मीदवारों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किए। शहर में पोस्टर, होर्डिंग और बैनर लगाए गए। इसी दौरान आरोप लगा कि खान ग्लोबल स्टडीज के कुछ कर्मचारियों ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड के ऊपर अपना प्रचार बैनर लगा दिया। यह तनाव धीरे-धीरे बढ़ा। जिसके चलते तोड़फोड़, पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामाने आईं। क्या है डमी स्कूल : ये ऐसे स्कूल हैं जहां छात्रों के लिए नियमित रूप से जाना जरूरी नहीं है। इसके लिए कोचिंग संस्थान छात्रों पर स्कूल के लोड को कम करने के लिए रेग्यूलर स्कूलों के साथ गठजोड़ करते हैं। इस तरह उन्हें अपनी एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी पर ध्यान देने के लिए अधिक समय मिलता है। डमी स्कूलों में एडमिशन जेईई और नीट के लिए सबसे ज्यादा है।

हिमाचल में भारी बारिश का कहर, किन्नौर में गाड़ियां दबी:रिब्बा में फ्लैश-फ्लड, 49 सड़कें और 127 बिजली ट्रांसफॉर्मर बंद, आज ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला में बीती रात भारी बारिश हुई। किन्नौर के चोलिंग में तेज बारिश के बाद मलबा नेशनल हाईवे पर आ गया। इसमें दो गाड़ियां दब गईं। इससे हाईवे वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया। PWD की मशीनरी सड़क बहाली में जुटी है। किन्नौर के ही रिब्बा गांव में भी सुबह तीन बजे फ्लैश फ्लड से लोग घबरा गए। कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और कुछ गाड़ियां निकालने लगे। राज्य में बीते दो दिनों के दौरान नॉर्मल से 211 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले छह दिन भी बारिश से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज कांगड़ा और मंडी जिलों में कुछेक स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कुल्लू, शिमला, सिरमौर और ऊना जिलों के लिए यलो अलर्ट दिया गया है। 5 और 6 जुलाई को भी भारी बारिश की चेतावनी पांच और छह जुलाई को राज्य के मध्यम ऊंचे व निचले इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। कल यानी 4 जुलाई को कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिला में हल्की से मध्यम बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। 5 जुलाई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस दोबारा स्ट्रांग होकर बरसेगा। इससे अगले 48 घंटे तक कुछेक भागों में भारी बारिश की संभावना है। नदी-नालों से दूर रहने की एडवाइजरी IMD ने लोगों को भारी बारिश के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और मौसम की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी है। प्रदेश में 49 सड़कें, 42 बिजली ट्रांसफॉर्मर बंद राज्य में तीन दिन से हो रही बारिश के बाद प्रदेश में 49 सड़कें, 42 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 27 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट राज्य में बीते तीन दिन से हो रही बारिश के बाद कई शहरों के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। चंबा का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 27.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। केलांग का पारा नॉर्मल से 6.3 डिग्री कम होने के बाद 19.7 डिग्री, मनाली का 4.3 डिग्री लुढ़कने के बाद 21.7 डिग्री और कांगड़ा का 4.1 डिग्री कम होने के बाद 32.0 डिग्री सेल्सियस रह गया है।

हिमाचल में लैंडस्लाइड, गाड़ियां मलबे में दबीं:उज्जैन में मंदिर डूबे, लखनऊ में घरों में पानी घुसा; गुजरात में सड़कें डूबीं, गाड़ियां चलते-चलते बंद

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला में गुरुवार रात भारी बारिश हुई। किन्नौर के चोलिंग में बारिश के बाद मलबा नेशनल हाईवे पर आ गया। दो गाड़ियां दब गई। राज्य में 49 सड़कें बंद हैं। इधर, यूपी में शुक्रवार सुबह 3 बजे लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, जालौन समेत 5 शहरों में बारिश हुई। पानी घरों में घुस गया। गुजरात के वलसाड में सड़कें पानी में डूब गईं, गाड़ियां चलते-चलते बंद हो गईं। मध्य प्रदेश में मानसून 9 दिन में ही पूरे प्रदेश में छा गया। धार, बड़वानी, खरगोन और देवास में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश का अनुमान है। उज्जैन में क्षिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से राम घाट के पास मंदिर डूब गए। राजस्थान के जयपुर में 2 दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग, चमोली समेत कई जिलों में लैंडस्लाइड से सड़कें बंद हो गई हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ हाईवे पर लगातार पत्थर गिर रहे हैं। सुरक्षा के चलते केदारनाथ यात्रा फिलहाल रोक दी गई है। मानसून 5 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर सकता है… देशभर से बारिश की 6 तस्वीरें… अगले 2 दिन मौसम का हाल 4 जुलाई: 5 जुलाई: राज्यों से मौसम की खबरें… राजस्थान: मानसून 13 जिलों में पहुंचा; जयपुर में रातभर बरसात, कई जिलों में 2 इंच तक पानी बरसा राजस्थान के पहले दिन मानसून 13 जिलों तक पहुंच गया है। जयपुर में भी 2 दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। बीते 24 घंटे में करौली, झुंझुनूं में 2 इंच तक बारिश रिकॉर्ड हुई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूरी खबर पढ़ें… मध्य प्रदेश: 19 जिलों में भारी बारिश का अनुमान, 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। शुक्रवार को खंडवा और हरदा में भारी बारिश का रेड अलर्ट है जबकि धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है। प्रदेश के अब तक 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: आज 11 जिलों में बारिश हो सकती है, एक्सप्रेस-वे पर पहली बारिश में गड्‌ढे हुए यूपी में मानसून सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट है। 11 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं गुरुवार को लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, बलिया समेत 30 शहरों में रुक-रुककर बारिश हुई। वाराणसी में दोपहर में आंधी के साथ तेज बारिश हुई। शामली में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पहली बारिश में ही गड्‌ढे हो गए। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: पटना में धूप-उमस भरी गर्मी करेगी परेशान; 5-6 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी पटना समेत पूरे बिहार में मानसून एक्टिव है, लेकिन जुलाई महीने में राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इस बीच तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी भी हो सकती है। पटना और इसके आसपास के जिलों में हल्के बादल छाए रहेंगे। धूप और उमस भरी गर्मी एक बार फिर परेशान कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब-चंडीगढ़: 24 घंटे में लुधियाना-फरीदकोट में सबसे ज्यादा पानी गिरा, 5 दिन मौसम ऐसे ही रहेगा अगले पांच दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश का दौर जारी रहेगा। अगले 5 दिन मौसम ऐसा ही रहेगा। मानसून ने 1 जुलाई को पंजाब और चंडीगढ़, दोनों में दस्तक दी। यह पिछले साल के मुकाबले पंजाब में 9 दिन और चंडीगढ़ में 7 दिन देरी से पहुंचा। पूरी खबर पढ़ें… उत्तराखंड: सभी जिलों में बारिश, 5 जिलों के लिए चेतावनी; चारधाम के रास्तों पर गिर रहे पत्थर उत्तराखंड के सभी जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ हाईवे पर लगातार पत्थर और मलबा गिर रहा है। शुक्रवार को दो घंटे के लिए केदारनाथ यात्रा रोकनी पड़ी थी। पूरी खबर पढ़ें…

पानीपत में चपरासी की रिटायरमेंट पर 'शाही' विदाई,VIDEO:फूलों से सजे हाइड्रा क्रेन पर बैठे, थार-स्कॉर्पियो का काफिला चला; नोटों की माला पहन डांस किया

रिटायरमेंट के बाद लोग आमतौर पर कार या सरकारी गाड़ी से घर लौटते हैं, लेकिन हरियाणा के पानीपत में एक सरकारी कर्मचारी ने अपनी विदाई को अलग अंदाज में यादगार बना दिया। फूड एंड सप्लाई विभाग में 23 साल तक चपरासी के पद पर काम करने वाले 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ रिटायरमेंट के बाद करीब 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर अपने गांव पहुंचे। फूलों और रंग-बिरंगी चुन्नियों से सजी क्रेन को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट गई। महाबीर के आगे थार, स्कॉर्पियो समेत कई गाड़ियों का काफिला चल रहा था। वह हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर पूरे रास्ते डांस करते रहे। महाबीर बांगड़ ने बताया कि उन्होंने कई कर्मचारियों की रिटायरमेंट देखी थी। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि जब उनकी बारी आएगी तो वह कुछ अलग करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने कार या रथ की जगह हाइड्रा क्रेन चुनी और उसी पर सवार होकर अपने पैतृक गांव कवि में पहुंचे। इसी गांव के महिपाल ढांडा हरियाणा के शिक्षा मंत्री हैं। रिटायरमेंट के बाद की तस्वीरें… अब पढ़िए, रिटायरमेंट की पूरी प्लानिंग… अब पढ़िए, कैसे लघु सचिवालय से घर पहुंचे… 23 साल नौकरी की, परिवार में दो बेटे और एक बेटी महाबीर बांगड़ फूड एंड सप्लाई विभाग में सेवादार (चतुर्थ श्रेणी) के पद से रिटायर हुए हैं। उनके परिवार में दो बेटे हैं। बड़ा बेटा चानू अमेरिका (USA) में रहता है, जबकि दूसरे बेटे का नाम मोहित है। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है। पत्नी शीला देवी गृहिणी हैं।

पूर्व CM चन्नी का शक्ति प्रदर्शन:पूर्व मंत्री आशू पहुंचे, पूर्व MLA बराड़ बोले- चन्नी प्रधान न बने तो पंजाब में कांग्रेस सरकार नहीं बनेगी

पंजाब में 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर बगावत शुरू हो गई है। प्रदेश प्रधान न बनाए जाने से पूर्व CM चरणजीत चन्नी बेहद नाराज हैं। इसी वजह से कैंपेंनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने पर चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। उन्होंने आज, शुक्रवार को मोरिंडा स्थित घर में मीटिंग बुलाई है। जिसमें सांसदों, विधायकों और हलका इंचार्जों को बुलाया गया है। चन्नी के बुलावे पर लुधियाना से पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, दविंदर घुबाया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी और बाघापुराना से पूर्व MLA दर्शन बराड़ चन्नी के घर पहुंच चुके हैं। बराड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर चन्नी को प्रधान न बनाया गया तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती। चन्नी के इस रुख से लग रहा है कि पंजाब कांग्रेस में आज कोई बड़ा धमाका हो सकता है। चन्नी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- प्रधान न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं। चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के 2 मकसद, एक्सपर्ट से जानिए:- 1. वड़िंग हटाओ, कैप्टन की तरह प्रधान बनाओ
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में एक प्रचलन रहा है कि जो पार्टी प्रधान होता है, वही सीएम बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता तो उन्हें ही सीएम बनाया गया। इसी कुर्सी पर नजर रखते हुए चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के विरोध में रहा है, यह किसी से छुपा नहीं है। पार्टी की इंटरनल मीटिंग हो या फिर हाईकमान के सामने सब जगह चन्नी राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रधान पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं। 2017 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाया था कि उन्हें प्रधान बनाएं। जब प्रताप बाजवा को प्रधान पद से हटाया गया था। प्रधान बनने का मकसद साफ होता है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चले और जब विधायक जीतकर आएं तो ज्यादातर विधायक उनके समर्थक हों और उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ रहे। कैप्टन ने इसके लिए जाट महासभा तक को एक्टिव कर दिया था। चन्नी भी कैप्टन के रास्ते पर हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधान बनाए ताकि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो राजा वड़िंग ये क्रेडिट न ले सकें कि प्रधान होने के नाते यह जीत उनकी अगुआई में हुई है। फिर वह सीएम कुर्सी पर भी दावा ठोक सकते हैं। 2. प्रधान नहीं तो मुझे ‘सीएम चेहरा’ घोषित करो
2022 में नवजोत सिद्धू प्रधान थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रधान सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रधानगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है। इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधानगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रधान रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस जट्‌टसिखों को नाराज नहीं करना चाहती थी। इसलिए वड़िंग को नहीं हटाया। इसीलिए चन्नी अब पार्टी हाईकमान पर उन्हें सीएम फेस घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। चन्नी के पास समर्थक नेताओं की लंबी फौज है। ऐसे में समर्थकों और 31% दलित वोट बैंक के जरिए वह हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। चन्नी की दोनों मांगें दरकिनार तो क्या रास्ता बचा?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत चन्नी पहले तो कांग्रेस पर पूरा दबाव बनाएंगे कि या तो उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। अगर दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ तो उनके पास प्लान बी है। प्लान बी के तहत वो अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जाएगा। उनका कहनना है कि चन्नी के साथ एक बड़ा दलित वर्ग जुड़ा है। 2021 में उनके 111 दिन के कार्यकाल से भी अच्छी छवि बनी है। अगर चन्नी बगावत करते हैं या अलग पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और गरीब तबके में मैसेज जाएगा कि उनके नेता की सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह वोट बैंक पूरी तरह से खिसक जाएगा, जिसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा। चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं का इस फैसले पर क्या रवैया
चन्नी गुट के किसी भी नेता ने हाईकमान के फैसले पर कोई धन्यवाद नहीं किया। इनमें MLA राणा गुरजीत, MLA परगट सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA भारत भूषण आशू प्रमुख नेता हैं। कपूरथला से MLA राणा गुरजीत की एक रील भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने ‘पातशाही दा वा रखदे हां, खंडियां दी धार ते नचदे हां, सानू औंदा है बदला लैंणा’ सॉन्ग लगा रखा है। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी चन्नी की लड़ाई में उनके साथ हैं। राणा गुरजीत ने 2022 में AAP की आंधी के बावजूद न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने बेटे राणा इंदरप्रताप को भी सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय जिता दिया। ******************* ये खबरें भी पढ़ें… पंजाब कांग्रेस में बड़ी बगावत के आसार, चन्नी ने मीटिंग बुलाई, सवाल- क्या पार्टी छोड़ेंगे?; रंधावा भी चुप पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किए बदलाव को लेकर कांग्रेस में बगावत के आसार बन गए हैं। पूर्व CM चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा अमरिंदर राजा वड़िंग के प्रधान पद में बदलाव न होने से नाराज हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान से पद मिलने के बाद धन्यवाद तक नहीं कहा। यहां तक कि सोशल मीडिया पोस्ट तक नहीं डाली (पढ़ें पूरी खबर) चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस छोड़ सकते हैं, संगठन में बदलाव से नाराज पंजाब कांग्रेस को संगठनात्मक फेरबदल के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान की ओर से गठित की गईं चुनावी समितियों से चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद मनीष तिवारी को बाहर रखा गया है। इस पर मनीष तिवारी की नाराजगी खुलकर बाहर आई है। तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 45 साल इस पार्टी को दिए हैं, लेकिन आज कुछ लोगों की असुरक्षा की भावना के कारण ऐसा फैसला लिया गया है।(पढ़ें पूरी खबर)

देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना कानूनन अवैध:45,000 करोड़ के प्रोजेक्ट की सारी मंजूरियां खत्म; बिना फॉरेस्ट क्लीयरेंस के हो रहा निर्माण

देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत ‘केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट’ कानूनी और तकनीकी विवादों में घिर गया है। सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं हुआ। इनमें प्रभावित परिवारों के रिहेबिलिटेशन की सबसे अहम शर्त अब भी अधूरी है। नियमों के अनुसार, जरूरी शर्तें पूरी न होने पर प्रोजेक्ट के लिए दोबारा फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेना पड़ता है। जिला प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि प्रभावित परिवारों का अब तक पूरा पुनर्वास नहीं हुआ। वहीं, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की अहम सिफारिशों का भी पूरा पालन नहीं हुआ। इन हालातों में करीब 45 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रोजेक्ट के कानूनी और तकनीकी विवादों को समझने के लिए भास्कर ने सरकारी दस्तावेजों की जांच की और एक्सपर्ट्स से बातचीत की। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पन्ना टाइगर रिजर्व का 6,000 हेक्टेयर कोर क्षेत्र होगा जलमग्न केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के तहत बुंदेलखंड के जिलों तक पानी पहुंचाने के लिए दौधन बांध बनाया जा रहा है। इसके निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया का 6,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलमग्न होगा। इस पर्यावरणीय असर को देखते हुए प्रोजेक्ट को दो चरणों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस दी गई थी। मई 2017 में स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस तो अक्टूबर 2023 में स्टेज-2 की मंजूरी मिली। दोनों चरणों में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास से जुड़ी कई जरूरी शर्तें रखी गईं, जिनमें कई समान थीं। सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया है कि इन अनिवार्य शर्तों का पूर्ण पालन नहीं हुआ। आइए समझते हैं कि किन शर्तों का उल्लंघन हुआ और इसका कानूनी और तकनीकी असर क्या है? फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कॉमन शर्तें शर्त-1: जमीन का भौतिक हस्तांतरण और आरक्षित वन घोषित करना 2017 और 2023 में मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कॉमन प्रमुख शर्त थी कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए चिह्नित गैर-वन भूमि पहले वन विभाग को भौतिक रूप से सौंपी जाए और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत उसे ‘आरक्षित वन’ घोषित किया जाए। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (मई 2017) की शर्त-4 के अनुसार, यह प्रक्रिया स्टेज-2 क्लीयरेंस से पहले पूरी होनी जरूरी थी। यही प्रावधान स्टेज-2 क्लीयरेंस (अक्टूबर 2023) में शर्त-2 के रूप में शामिल किया गया। इसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के पश्चिम में 6,809 हेक्टेयर गैर-वन भूमि को वन क्षेत्र में शामिल करना था, जिसमें 6,017 हेक्टेयर भूमि को टाइगर रिजर्व का हिस्सा बनाया जाना था। साथ ही, 3 अप्रैल 2024 तक प्रक्रिया पूरी कर इस भूमि को आरक्षित वन घोषित करना अनिवार्य था। जमीनी हकीकत: कागज में हस्तांतरण, लेकिन भौतिक कब्जा नहीं सरकार ने 29 मार्च से 14 जून 2024 के बीच संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी किए। 19 जुलाई 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई प्रोजेक्ट की छठी समीक्षा बैठक में पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि भूमि का रिकॉर्ड में हस्तांतरण और म्यूटेशन हो चुका है, लेकिन वन विभाग को अब तक उसका भौतिक कब्जा नहीं मिला। पुनर्वास अधूरा, इसलिए कब्जा नहीं मिल सका भौतिक कब्जा न मिलने की प्रमुख वजह यह है कि कई स्थानों पर प्रभावित परिवारों का पुनर्वास अब तक पूरा नहीं हुआ। इसके कारण लोग भूमि खाली नहीं कर सके और कई सरकारी जमीनों पर अब भी अतिक्रमण है। शर्त-2: जंगल में पावर प्लांट पर रोक, फिर भी निर्माण की तैयारी केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के फॉरेस्ट क्लीयरेंस की दूसरी कॉमन शर्त थी कि मुख्य वन क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार का पावर प्लांट या पावर हाउस नहीं बनाया जाएगा। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (मई 2017) की शर्त-13 में जंगल के भीतर पावर प्लांट के निर्माण पर साफ रोक लगाई गई थी। यही प्रावधान स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (अक्टूबर 2023) में शर्त-11 के रूप में दोहराया गया। हकीकत: रोक के बावजूद 78 मेगावाट के पावर प्लांट का प्रस्ताव दस्तावेजों के अनुसार, स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट प्राधिकरण (KBLPA) पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर 78 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर के अनुसार, प्रोजेक्ट के आधिकारिक नक्शे में अब भी पावर प्लांट का प्रस्ताव दर्ज है। उनका कहना है कि 19 जुलाई 2024 की समीक्षा बैठक में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के विपरीत जंगल के भीतर पावर हाउस निर्माण की संभावना पर चर्चा हुई और इसके लिए अलग से स्टडी कराने का निर्णय लिया गया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की अधूरी शर्तें शर्त-11: पेड़ों की नई गणना अनिवार्य थी स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-11 के तहत प्रोजेक्ट क्षेत्र के सभी पेड़ों की नए सिरे से इंटेंसिव गणना कराना जरूरी था। इसका मकसद प्रोजेक्ट से होने वाले वास्तविक पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करना था। हालांकि, जमीनी स्थिति अलग है। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने माना कि प्रोजेक्ट एरिया में पेड़ों की कोई नई गिनती नहीं कराई गई। शर्त-23: राष्ट्रीय संस्थाओं की सिफारिशों का पालन अधूरा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-23 के तहत राज्य सरकार को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की सिफारिशों, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की अनुशंसाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों व मंजूरियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना था। उपलब्ध दस्तावेजों और प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति से संकेत मिलता है कि CEC और NTCA की कई महत्वपूर्ण सिफारिशों का पूर्ण पालन नहीं हुआ। इससे प्रोजेक्ट के वैधानिक अनुपालन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के पालन पर गंभीर सवाल उठते हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की टाइम बाउंड शर्तों के पालन पर सवाल शर्त-5: 12 महीने में राजस्व गांव वन विभाग को सौंपने थे स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-5 के अनुसार, मंजूरी मिलने के 12 महीने के भीतर प्रोजेक्ट एरिया के सभी राजस्व गांव वन विभाग को सौंपने जरूरी थे। इसके लिए प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और पुनर्स्थापना पूरा होना जरूरी था। यह प्रोसेस तय समयसीमा में पूरी नहीं हो सकी। पुनर्वास नीति और मुआवजे को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है और हाल के महीनों में कई गांवों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि शर्त के अनुरूप राजस्व गांवों को पूरी तरह से हैंडओवर नहीं किया जा सका है। शर्त-43: शर्तें पूरी न होने पर अनुमति स्वतः समाप्त होने का प्रावधान स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-43 में प्रावधान है कि मंजूरी मिलने के एक साल के अंदर तय की गई सभी शर्तों का पालन न होने पर मंजूरियां खत्म मानी जाएंगी। मौजूदा दस्तावेजों और प्रोजेक्ट की स्थिति से संकेत मिलता है कि कई जरूरी शर्तें तय समयसीमा में पूरी नहीं हो सकीं। पर्यावरणविद् का दावा- शर्तों के पालन पर कानूनी सवाल पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर के अनुसार, केन नदी का पानी आगे यमुना में मिलता है इसलिए नदी के प्राकृतिक प्रवाह और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र की न्यूनतम जल आवश्यकता का वैज्ञानिक आकलन होना चाहिए था। उनका कहना है कि ऐसा आकलन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक, प्रोजेक्ट में स्टेज-1 और स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई अनिवार्य शर्तों का पूरा पालन नहीं हुआ। एनवायरमेंटल क्लीयरेंस (अगस्त 2017): पहली शर्त के पालन पर भी सवाल प्रोजेक्ट को अगस्त 2017 में पर्यावरणीय स्वीकृति मिली थी। इसकी पार्ट-ए की पहली शर्त के मुताबिक, निर्माण शुरू होने से पहले सभी प्रभावित परिवारों का 100% पुनर्वास, पुनर्स्थापना और मुआवजा वितरण पूरा होना जरूरी था। छतरपुर जिले के पुनर्वास के आंकड़ों के मुताबिक, कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला और पुनर्वास प्रक्रिया भी अधूरी है। वन विभाग से जवाब मांगा, नहीं मिली प्रतिक्रिया इन सभी मुद्दों पर आधिकारिक पक्ष जानने के लिए वन विभाग से जानकारी और ईमेल के जरिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के अनुपालन तथा प्रोजेक्ट की वैधानिक स्थिति पर जवाब मांगा गया। विभाग से ये सवाल पूछे गए, जिनका जवाब नहीं मिला- मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… केन-बेतवा लिंक परियोजना- अर्थी पर लेटी महिलाएं पन्ना जिले में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की हिरासत को लेकर सियासी और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मामला केन-बेतवा लिंक परियोजना, टाइगर रिजर्व के कोर एरिया और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। भटनागर केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ डैम से प्रभावित आदिवासियों के मुआवजे और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…

खबर हटके- सांसद के घर रेड,सोने के अंडर गारमेंट्स मिले:1454 फीट ऊंची बिल्डिंग पर गर्लफ्रेंड को प्रपोज किया; हवा में उड़ने वाला छाता

इराक में सांसद के घर रेड के दौरान सोने के अंडर गारमेंट्स और बड़ी मात्रा में कैश मिला। वहीं, न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की 1454 फीट ऊंचे प्वाइंट पर एक शख्स ने अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज किया। उधर, एक इंजीनियर ने ऐसा छाता बनाया जो उड़कर लोगों को धूप और बारिश से बचाता है। गुजरात में एक व्यक्ति को शादी के बाद पता चला कि उसकी पत्नी पुरुष है इसलिए उसने उसकी हत्या कर दी। वहीं, ब्राजील में एक मादा सुअर ने एक ही बार में 46 बच्चों को जन्म देकर सबको हैरान कर दिया। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

अमरनाथ यात्रा आज से,4800 यात्रियों का पहला जत्था कश्मीर पहुंचा:हर 2km पर ऑक्सीजन बूथ, बालटाल रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए

अमरनाथ यात्रा आज से शुरू हो गई है। यह 28 अगस्त यानी 57 दिन तक चलेगी। अनुमान है कि इस दौरान 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बने बर्फ के शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। यह गुफा समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर है। इससे पहले गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को जम्मू के भगवती बेस कैंप से बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना किया। इसमें 4,822 तीर्थयात्री शामिल थे। इन्हें 259 वाहनों के सुरक्षा घेरे में रवाना किया गया। कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद तुरंत नीचे लौटने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। वहीं, दोमेल रूट पर चार जगह बड़ी स्क्रीन के जरिए मौसम की जानकारी दी जा रही है। बालटाल रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं। अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल रास्ते से है। दूसरा जत्था भी रवाना बारिश की वजह से गुरुवार को बालटाल मार्ग पर यात्रा कुछ समय के लिए रोकी गई थी। हालांकि, शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे 3,865 श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो गया। इनमें 1,735 श्रद्धालु 115 वाहनों से बालटाल बेस कैंप जा रहे हैं। जबकि 2,130 श्रद्धालु 86 वाहनों से पारंपरिक पहलगाम मार्ग की ओर रवाना हुए। बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ यात्रियों की 6 तस्वीरें… दोनों रूट पर 100-100 बेड के अस्पताल दोनों यात्रा मार्गों पर एक हजार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं। दोनों जगह 100-100 बेड के अत्याधुनिक अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं। अमरनाथ यात्रा से जुड़े 3 जरूरी फैक्टर 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा शुरू होने के साथ ही जम्मू में ऑन-द-स्पॉट (तुरंत) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से पंजीकरण नहीं कराया है, वे तय प्रक्रिया पूरी करके जम्मू में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने का मौका मिल रहा है। यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें… यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड, ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म अपने साथ रखें। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से हर रोज 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस करें। सांस वाला योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें। यात्रा में ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी बॉटल और जरूरी दवाओं का बैग अपने साथ रखें।
अमरनाथ यात्रा का इतिहास 1. राजतरंगिणी में अमरनाथ को अमरेश्वर कहा गया अमरनाथ यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई पक्का ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं मिलता। हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि यह यात्रा कई सदियों से चली आ रही है। 6वीं–8वीं शताब्दी के बीच लिखी गई नीलमत पुराण में ‘अमरनाथ गुफा’ नाम का सीधा उल्लेख नहीं है। इसमें कश्मीर के कई पवित्र तीर्थों, बर्फीले स्थानों और शिव पूजा से जुड़े स्थलों का वर्णन मिलता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि इनमें अमरनाथ से जुड़े संकेत हो सकते हैं, लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। वहीं, कल्हण द्वारा 1148–1150 ईस्वी में लिखी गई राजतरंगिणी में गुफा का उल्लेख ‘अमरेश्वर’ नाम से मिलता है। इसमें अमरनाथ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले शेषनाग का भी जिक्र है। इसी वजह से इतिहासकार राजतरंगिणी को अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना स्पष्ट ऐतिहासिक उल्लेख मानते हैं। इन ऐतिहासिक संदर्भों से माना जाता है कि 12वीं शताब्दी तक अमरनाथ एक प्रसिद्ध तीर्थ बन चुका था और यहां यात्रा की परंपरा स्थापित हो चुकी थी। कई इतिहासकारों का मानना है कि इसकी शुरुआत इससे भी पहले हुई होगी, लेकिन इसके स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 2. मुगल काल में भी मिलता है अमरनाथ का उल्लेख 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक आइने-अकबरी में अमरनाथ गुफा का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और इसका आकार समय के साथ बदलता रहता है। इसके बाद 17वीं शताब्दी में कश्मीर आए फ्रांसीसी यात्री फ़्रांस्वा बर्नियर ने भी अपनी यात्रा-वृत्तांत में इस गुफा और यहां बनने वाली बर्फ की संरचनाओं का वर्णन किया है। 3. बुटा मलिक की ‘पुनर्खोज’ की कथा लोकप्रिय 19वीं शताब्दी से जुड़ी एक लोकप्रिय लोककथा जरूर प्रचलित है। इसके अनुसार, बुटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले की पोटली दी। घर पहुंचने पर वह पोटली सोने में बदल गई। जब बुटा मलिक साधु को धन्यवाद देने लौटा, इतिहासकार मानते हैं कि यदि यह लोककथा सही मानी जाए, तो बुटा मलिक ने गुफा की ‘पुनर्खोज’ या उसे दोबारा लोगों के बीच प्रसिद्ध करने में भूमिका निभाई थी। 4. ब्रिटिश शासन में यात्रा संगठित हुई ब्रिटिश शासन के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत तक अमरनाथ यात्रा अधिक संगठित रूप लेने लगी। तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत ने यात्रियों के लिए रास्ते, पड़ाव और अन्य सुविधाएं विकसित करनी शुरू कीं। 1895 के प्रशासनिक विवरणों में यात्रा मार्ग, पड़ाव और व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। वर्ष 2000 में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) का गठन किया गया। इसके बाद यात्रा के पंजीकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया गया। 3888 मीटर की ऊंचाई पर है अमरनाथ गुफा ———————————- अमरनाथ यात्रा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 2029 से अमरनाथ के लिए केबल कार चलाने की तैयारी: अप्रैल 2027 से काम शुरू होगा; 5-8 घंटे का सफर 30 मिनट में पूरा होगा अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु 2029 से बालटाल रूट पर केबल कार से सफर कर सकेंगे। केंद्र सरकार अगले साल अप्रैल से 11.6 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने की तैयारी में है। परियोजना पूरी होने के बाद बालटाल से संगम टॉप तक पहुंचने में 5 से 8 घंटे की जगह 25 से 30 मिनट लगेंगे। पढ़ें पूरी खबर…