सिक्किम के राज्यपाल माथुर बोले-यूपी के अखबारों में मेरे कार्टून:सभी की मेहनत से 300 पार की; जनता दल तोड़ने की बात पर भैंरोसिंह शेखावत नाराज हुए
जोधपुर मारवाड़ इंटरनेशल कंनवेंशन सेंटर में सर प्रताप विधि महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव का आयोजन रविवार शाम करीब 6 बजे शुरू हुआ। समारोह में सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसमें राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए माथुर ने कहा- मैं जब 2016 में उत्तरप्रदेश के प्रभारी बनकर गया तो किसी ने विश्वास नहीं किया कि भाजपा इतनी सीटें जीत सकती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में सरकार बनाने के लिए जनता दल को भी तोड़ने का काम किया गया। माथुर ने कहा- साल 2016 में मैं उत्तर प्रदेश चला गया। जहां नेता बदलना हो, वहां मेरे जैसे हथियार को या मेरे जैसे औजार टूल को भेजा जाता था। वहां विधानसभा में हमारी पार्टी की 46 सीट थी। तब मेरे मित्र भी कहने लगे, आपने बहुत मजे ले लिए। राजस्थान कर दिया, गुजरात कर दिया, अब यूपी पता लगेगा। मैंने जब 245 का नारा दिया तो शुरू-शुरू में सारे अखबारों में मेरे कार्टून छपे। राजस्थान का कोई शेख चला आ रहा है, 46 से सीधा 245 टारगेट कर रहा है, लेकिन तब मैंने सभी कार्यकर्ताओं को समझाया, धमकाया। बाद में सबकी मेहनत से तीन सौ पांच सीटें जीत गए। जनता दल को तोड़ने की बात पर नाराज हुए थे भैंरोसिंह शेखावत ओमप्रकाश माथुर ने समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों को इच्छाशक्ति और संकल्प का महत्व बताते हुए कहा- मुझे आज आपके बीच में एक घटना बताने की याद आ गई। 1990 से पहले राजनीतिक में चला गया था, लेकिन हमारे पास राजस्थान में सभी 200 स्थान के कैंडिडेट नहीं थे। जब पहला चुनाव हुआ तो मुझे लगा कि 80 सीट ऐसी हैं, जिन पर हमारे पास लोग ही नहीं है। 1990 में मिलीजुली सरकार बनी। हमें 74 सीटें मिली और 56 सीटों पर जनता दल जीती। अब मेरे दिमाग आया, मैं नया-नया गया था। क्यों नहीं जनता दल को तोड़ा जाए। भैंरोसिंह शेखावत पहले तो बहुत नाराज हुए। अरे क्या तोड़ते हो, कैसे-कैसे लोगों को लाओगे। मैंने कहा- किसी न किसी को तो लाएंगे, तभी तो आगे बढ़ेंगे। फिर धीरे-धीरे तय हुआ कि जनता दल को तोड़ा जाए। फिर जनता दल-डी बनाया। 1992 में ढांचा तो गया तो हमारी सरकार भंग हुई। पांच सरकारें भंग हुई उस समय। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल। 1993 में वापस चुनाव आए। मुख्यमंत्री भैंरोसिंह ने श्रीगंगानगर और बाली दो जगह से चुनाव लड़ा। जब बाली में भैंरोसिंह प्रचार करने गए तो पीतापुर से धानमंडी आठ किलोमीटर जाने को दो घंटे लगे फोर व्हील गाड़ी में। मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था और पूरे रास्ते में पत्थर में मैंने गाड़ी कुदाई तो पूरे रास्ते उन्होंने गालियां बोलीं। कहां फंसा दिया पत्थरों में, कहां फंसा दिया भाट्टो में, क्योंकि वे उबड़-खाबड़ रास्ते थे। फिर बाली आते-आते सभा हुई। उन्होंने कहा कि भाट्टो (पत्थरों) में फंसा दिया। मैं सीट खाली करूंगा। जीत को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हमने उनको जिताने को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया है। चुनाव परिणाम आए तो गंगानगर में भैंरोसिंह तीसरे नंबर पर रहे, बाली से जीते और फिर 92 में मुख्यमंत्री बन गए। उस समय ना तो उत्तर प्रदेश में सरकार बनी, ना मध्य प्रदेश में बनी, ना हिमाचल में बनी, ना दिल्ली में बनी। सिर्फ राजस्थान की सरकार रिपीट हुई। उसमें चार कम पड़ गए। फिर हम 10 निर्दलीय ले आए तो काम करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए। हमको कुछ नहीं लेना कि संस्था का नाम हो गया, बहुत अच्छा। संस्था के पदाधइकारी तो कुछ नहीं लेना लेकिन संस्था आने वाले बच्चों को और कैसे अच्छा पढ़ा सके और कैसे गुणवत्ता पैदा हो। देखिए इच्छा शक्ति से कहीं कमी नहीं आने वाली। संस्था का विस्तार नहीं होने पर लगाई फटकार माथुर ने संस्था को लेकर कहा कि गिरीश आप तीन बार से अध्यक्ष हो, लेकिन संस्था का कैंपस से बाहर विस्तार नहीं हुआ। संस्था का सभी के सहयोग से विस्तार करना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि मदद के लिए लोगों के पास जाने पर वजन भी कुछ कम होगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 15 लाख रुपए संस्था को देने की घोषणा की। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल आदि शामिल हुए। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर ससम्मानित भी किया गया।

