उदयपुर में 'भास्कर समाधान' का असर:जनता की शिकायतों पर जागा प्रशासन; कहीं 11 दिन का अंधेरा दूर हुआ, तो कहीं कचरे और जाम से मुक्ति की गुहार

उदयपुर। आम जनता की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और उनका सटीक निवारण कराने के संकल्प के साथ दैनिक भास्कर का ‘भास्कर समाधान’ लगातार शहरवासियों की मजबूत आवाज बना हुआ है। इस मुहिम के तहत जहां एक ओर शहर के जागरूक नागरिक अपनी मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन भी इन शिकायतों पर त्वरित एक्शन मोड में नजर आ रहा है। इस बार ‘भास्कर समाधान’ पर उदयपुर के अलग-अलग कोनों से जनहित के गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। हिरण मगरी के व्यस्त चौराहे पर खाली प्लॉट में फैले कचरे के ढेर और विश्वप्रसिद्ध पिछोला झील और दूधतलाई क्षेत्र में मानसून से पहले जमा गंदगी ने स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़े किए हैं, तो वहीं रेलवे स्टेशन मार्ग पर रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से राहगीर बेहाल हैं। हालांकि, सकारात्मक पहलू यह है कि समस्या पोस्ट होने के बाद संबंधित विभागों ने तत्परता दिखाई है। बाड़ी रोड (देवाली) में पिछले कई दिनों से बंद पड़ी रोड लाइटों को शिकायत के बाद तुरंत दुरुस्त कर दिया गया है। वहीं, सेक्टर 9 (सी-ब्लॉक) में पिछले 11 दिनों से पसरे अंधेरे को नगर निगम की टीम ने दूर कर जनता को बड़ी राहत दी है। इस त्वरित समाधान में निगम के लाइनमैन जालम सिंह ने अहम भूमिका निभाई है। जिसके चलते उन्हें आज ‘पब्लिक का स्टार’ चुना गया है। (आमजन से जुड़ी जनसमस्या और शहर की जमीनी हकीकत को पोस्ट करने के लिए यहां क्लिक करें।) ‘भास्कर समाधान’ का बड़ा असर
उदयपुर के सेक्टर 9 स्थित सी-ब्लॉक से एक बार फिर ‘भास्कर समाधान’ की मुहिम का बड़ा और सकारात्मक असर देखने को मिला है। यहां के स्थानीय निवासी कुशल चौबीसा ने पिछले 11 दिनों से इलाके की रोड लाइटें खराब होने और गलियों में अंधेरा पसरे रहने की गंभीर समस्या को दैनिक भास्कर ऐप के ‘भास्कर समाधान’ प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से पोस्ट किया था। इस शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए नगर निगम प्रशासन हरकत में आया। निगम के लाइनमैन और तकनीकी टीम ने बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर तकनीकी खराबी को दूर किया और बंद पड़ी लाइटों को पूरी तरह दुरुस्त करवा दिया। पिछले 11 दिनों से अंधेरे और असुरक्षा का सामना कर रहे वार्ड वासियों ने अब राहत की सांस ली है। समस्या का त्वरित निवारण होने पर जागरूक नागरिक कुशल चौबीसा और सी-ब्लॉक के अन्य निवासियों ने नगर निगम की टीम और त्वरित कार्रवाई के लिए ‘भास्कर समाधान’ का आभार व्यक्त किया है।
जालम सिंह बने आज ‘पब्लिक के स्टार’
दैनिक भास्कर ऐप के ‘भास्कर समाधान’ पर जनता के जरिए उठाई गई समस्याओं पर त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई करते हुए जालम सिंह आज ‘पब्लिक के स्टार’ बनकर उभरे हैं। आम नागरिकों ने जब अपने क्षेत्र की खराब रोड लाइट की समस्या पोस्ट की तो जालम सिंह ने बिना किसी देरी के मामले को संज्ञान में लिया और मौके पर काम को पूरा करवाया। उनकी इस त्वरित कार्यशैली के कारण क्षेत्रवासियों को लंबे समय से हो रही परेशानी से तुरंत राहत मिल गई।
स्ट्रीट लाइट की समस्या का समाधान
उदयपुर शहर के बाड़ी रोड स्थित देवाली क्षेत्र से स्थानीय निवासी संजय ने इलाके में पिछले कई दिनों से रोड लाइटें बंद होने की गंभीर समस्या को ‘भास्कर समाधान’ पर पोस्ट किया था। इस शिकायत में बताया गया था कि कई दिनों से लगातार लाइटें बंद होने के कारण पूरी सड़क पर रात को अंधेरा छा जाता था, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को दुर्घटनाओं का डर सता रहा था। इस शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग ने मुस्तैदी दिखाई और कार्रवाई करते हुए बंद पड़ी सभी रोड लाइटों को पूरी तरह ठीक करवा दिया है। अब क्षेत्र में रात के समय अंधेरे की समस्या दूर हो गई है। समस्या का त्वरित और स्थाई समाधान होने पर संजय और देवाली क्षेत्र के अन्य निवासियों ने ‘भास्कर समाधान’ और संबंधित विभाग के इस त्वरित एक्शन का आभार व्यक्त किया है।
कुछ समस्या के समाधान की अभी भी आस… खाली प्लॉट बना कचरे का ‘डंपिंग ग्राउंड’
उदयपुर शहर के व्यस्त इलाकों में से एक, हिरण मगरी क्षेत्र के मेन चौराहे से स्थानीय निवासी मुकेश कुमार ने ‘भास्कर समाधान’ के जरिए एक गंभीर समस्या उठाई है। उन्होंने बताया कि इस मुख्य चौराहे के पास एक खाली प्लॉट में लंबे समय से भारी मात्रा में कचरा और गंदगी फैली हुई है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में दुर्गंध और गंदगी का माहौल बना हुआ है। ‘डंपिंग ग्राउंड’ बन चुके इस प्लॉट के कारण मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आस-पास के रहवासियों और राहगीरों में गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस ‘डंपिंग यार्ड’ के ठीक आस-पास खाने-पीने के कई ठेले और थड़ियां लगती हैं, जहां रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं। इस अत्यधिक गंदगी और बदबू के चलते न केवल इन छोटे दुकानदारों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, बल्कि यहां आने वाले ग्राहकों के स्वास्थ्य पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है।
समय रहते सफाई न हुई तो दूषित होगा झील का पानी
उदयपुर शहर की विश्वप्रसिद्ध और लाइफलाइन मानी जाने वाली पिछोला झील के आस-पास इन दिनों कचरे और गंदगी की एक बेहद चिंताजनक समस्या सामने आई है। स्थानीय निवासी विकास ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए बताया कि पिछोला के पास स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दूधतलाई और झील के किनारों पर लगातार भारी मात्रा में कचरा जमा हो रहा है। सबसे बड़ा संकट यह है कि मानसून बिल्कुल नजदीक है। ऐसे में अगर इस जमा कचरे को तुरंत नहीं हटाया गया, तो तेज बारिश के पानी के साथ यह सारा प्लास्टिक, सॉलिड वेस्ट और गंदगी बहकर सीधे पिछोला झील के मुख्य जलस्रोत में मिल जाएगी। इससे न केवल झील का पानी दूषित होगा, बल्कि पानी के जीवों पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगेगा। पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होने के कारण यहां रोजाना भारी फुटफॉल रहता है, लेकिन इस गंदगी से शहर की छवि पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने नगर निगम, यूआईटी और झील संरक्षण विभाग से मांग की है कि बारिश शुरू होने से पहले युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर इस पूरे इलाके की सघन सफाई करवाई जाए, ताकि धरोहर को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
वृंदावन नगर में रोड लाइटें बंद होने से पसरा अंधेरा
उदयपुर शहर के गणेशपुरा स्थित वृंदावन नगर क्षेत्र से महेश व्यास ने ‘भास्कर समाधान’ पर कॉलोनी की एक प्रमुख समस्या को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि इस पूरे क्षेत्र की गलियों में लंबे समय से रोड लाइट की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शाम ढलते ही चारों तरफ घना अंधेरा पसर जाता है। स्ट्रीट लाइटें न होने की वजह से स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रात के समय आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की सक्रियता और दुर्घटनाओं का अंदेशा भी लगातार बना रहता है।
रेलवे स्टेशन के पास लग रहा है जाम
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, रेलवे स्टेशन रोड पर इन दिनों आम जनता को रोजाना ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी अख्तर खान ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए बताया कि स्टेशन के पास लगने वाला यह जाम अब एक स्थाई मुसीबत बन चुका है, जिसके चलते यहां से गुजरने वाले राहगीरों, यात्रियों और स्थानीय लोगों का समय बर्बाद हो रहा हैं। स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि कई बार ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों की ट्रेन छूटने का अंदेशा बना रहता है और पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर और रोज-रोज की समस्या पर ट्रैफिक पुलिस या संबंधित प्रशासन के जरिए लंबे समय से कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अव्यवस्थित पार्किंग और अतिक्रमण के कारण लगातार बिगड़ते इन हालातों को देखते हुए नागरिकों ने मांग की है कि यहां तुरंत ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की स्थाई तैनाती की जाए और जाम के कारणों का स्थाई समाधान निकाला जाए ताकि लोगों को इस मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से निजात मिल सके।

आमजन की आवाज बना ‘भास्कर समाधान’ ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट देशभर में इकलौता ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी सीधे अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू खुद पोस्ट कर सकते हैं। ये सेगमेंट जनता को अपने गली-मोहल्ले की परेशानियां सीधे विभाग के उच्चाधिकारियों के सामने रखने की सुविधा देता है। लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब इसे और अधिक प्रभावी, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। अब सीधे अधिकारियों तक पहुंच रहीं समस्याएं दैनिक भास्कर के इस सेगमेंट में अधिकारी भी अपने एक्शन के बारे में बता सकेंगे। शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, वह अब सीधे उन्हीं अधिकारियों तक पहुंचेगी। इसके बाद अधिकारी उस लोकेशन को मैप पर देख सकेंगे। यदि उन्होंने समाधान कर दिया है तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी एप के जरिए ही दे सकेंगे या बता सकेंगे कि अभी काम जारी है। अधिकारी चाहें तो जिस यूजर ने शिकायत की है, उसे कॉल भी कर सकते हैं। भास्कर एप से समस्याओं के समाधान की ये खबरें भी पढ़िए… 1.शोभागपुरा और मादड़ी मार्ग की खुली पोल:उदयपुर के मीरा नगर और हिरण मगरी में शिकायतों के बाद जागा विभाग, नाली दुरुस्त और गंदगी साफ 2.उदयपुर में बुनियादी सुविधाओं पर सवाल:पानी, सड़क, बिजली और स्ट्रीट लाइट की समस्याएं बनीं बड़ी चुनौती, एक क्लिक पर हो रहा समाधान 3.उदयपुर में प्रशासन से गुहार भी बेअसर:एयरपोर्ट रोड इलाके में सालों से अटका सड़क का काम, ड्रेनेज सिस्टम न होने से जनता परेशान 4.उदयपुर में ‘भास्कर समाधान’ का असर:कचरे और रोड लाइट की समस्या का हुआ समाधान, तो कहीं हाई-टेंशन तारों का खतरा अभी भी बरकरार 5.सुलझीं स्ट्रीट लाइट की गंभीर समस्याएं:उदयपुर में कई जगह बुनियादी सुविधाओं की कमी, खंडर क्वार्टर्स और खुले तारों से मंडराया बड़ा खतरा 6.उदयपुर में टूटी सड़कें, गंदे पानी की समस्या:पांच साल से अंधेरे में डूबी गली; वार्ड 44 के सुपरवाइजर कमल मूलचंद बने ‘पब्लिक के स्टार’ 7.उदयपुर में गंदगी और जलभराव से जनता परेशान:फतेहसागर झील के पास कचरा, रेलवे पुलिया के नीचे भरा पानी; हिरण मगरी में बंद रोड लाइटें सुधरी 8.भास्कर समाधान: पांच दिन से बंद रोड लाइट हुई ठीक:खुले बिजली तार, कचरा और सड़क सुरक्षा की समस्याओं से लोग परेशान; गिरीश मारीवाला बने ‘स्टार ऑफिसर’ 9.भास्कर समाधान का असर, लाइट की समस्या का हुआ समाधान:खुले ट्रांसफार्मर, बंद स्ट्रीट लाइट और नाले में अतिक्रमण से लोग परेशान 10.सेक्टर 11 में 33 KV लाइन का गड्ढा रिपेयर:कचरा साफ करवाकर मोहम्मद यासीन बने ‘पब्लिक के स्टार’, ‘भास्कर समाधान’ जनता ने उठाई आवाज

जयपुर के जयसिंहपुरा खोर में उफनता सीवर:जवाहर नगर में 10 साल से भरा कीचड़, लाल डूंगरी के पास जर्जर श्मशान घाट और गांधी नगर की टूटी सड़क बनी आफत

जयपुर की जनता की समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने और उनका समाधान करवाने में दैनिक भास्कर का ‘भास्कर समाधान’ लगातार सबसे बड़ा सहारा साबित हो रहा है। हाल ही में शहर के अलग-अलग इलाकों से जन-समस्याएं सामने आईं, जिनमें जयसिंहपुरा खोर में कचरे के ढेरों के बीच सड़क पर बहता सीवर का पानी और गांधी नगर के गौतम नगर रोड पर पाइपलाइन डालने के बाद 1 साल से लावारिस छोड़ी गई बदहाल सड़क शामिल है। वहीं, जवाहर नगर सेक्टर-7 में ऑर्किड स्कूल के सामने पिछले 10 सालों से जमा बरसाती पानी अब जानलेवा दलदल और बीमारियों का केंद्र बन चुका है, तो दूसरी तरफ लाल डूंगरी मंदिर के पास श्मशान घाट का जर्जर टीन शेड जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता बयां कर रहा है। इन विकट जन-समस्याओं के बीच ‘भास्कर समाधान’ के असर से राहत की सुखद तस्वीरें भी आईं। सीताबारी के सूर्या नगर में मुख्य पाइपलाइन का लीकेज दुरुस्त होने से सड़कों पर व्यर्थ बहता हजारों लीटर पानी और जनता की परेशानी रुक गई। इसी कड़ी में, ढेहर के बालाजी क्षेत्र से उठाई गई बंद स्ट्रीट लाइटों की शिकायत पर विभाग तुरंत एक्शन में आया। बिजली विभाग के एक्सईएन (XEN) रूपाराम ने ऑन-स्पॉट तकनीकी टीम भेजी और समाधान करवा दिया है। अपनी इसी शानदार कार्यप्रणाली के बदौलत XEN रूपाराम को आज का ‘स्टार ऑफिसर’ चुना गया है। (आमजन से जुड़ी जनसमस्या और शहर की जमीनी हकीकत को पोस्ट करने के लिए यहां क्लिक करें।) कचरे का ढेर और बहता सीवर
जयपुर के जयसिंहपुरा खोर इलाके के रहने वाले सुनील शर्मा ने दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ के माध्यम से प्रशासन की घोर लापरवाही और इलाके की बदहाली का कच्चा चिट्ठा खोला है। सुनील शर्मा ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि जयसिंहपुरा खोर क्षेत्र में इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। पूरे इलाके में जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। साथ ही क्षेत्र की सीवर लाइन भी पूरी तरह चोक और बदहाल हो चुकी है, जिसके कारण सीवर का बदबूदार और दूषित पानी उफनकर मुख्य सड़कों पर बह रहा है। इस गंदगी और कचरे की वजह से स्थानीय निवासियों और राहगीरों का पैदल निकलना तक दूभर हो गया है, साथ ही वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कीचड़ और बीमारी के बीच रह रहे क्षेत्रवासी
जवाहर नगर (सेक्टर-7) के निवासी अमित माथुर ने ‘भास्कर समाधान’ पर सिस्टम की पोल खोल दी है। अमित माथुर ने लिखा है कि क्षेत्र के ऑर्किड स्कूल के ठीक सामने पिछले 10 सालों से बरसाती पानी के भराव की विकट समस्या बनी हुई है, लेकिन आज तक इसका कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया। एक दशक से जमा हो रहे इस पानी के कारण पूरी सड़क अब गहरे दलदल और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि स्कूल आने-जाने वाले मासूम बच्चों सहित अन्य वाहन चालक आए दिन इस कीचड़ में फिसलकर घायल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि लंबे समय से जमा इस सड़े हुए पानी में खतरनाक कीड़े-मकोड़े पनप रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में जानलेवा बीमारियों और संक्रमण का खतरा हर वक्त सिर पर मंडरा रहा है। क्षेत्रवासियों ने आक्रोश जताते हुए पूछा है कि प्रशासन आखिर किस बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? उन्होंने ड्रेनेज सिस्टम को तुरंत दुरुस्त कर इस 10 साल पुराने नरक से निजात दिलाने की मांग की है।
लाल डूंगरी मंदिर के पास श्मशान घाट बदहाल
जयपुर शहर के बीच में स्थित प्रसिद्ध लाल डूंगरी मंदिर के पास रहने वाले जागरूक नागरिक गुलशन ने दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ के माध्यम से व्यवस्था को झकझोरने वाली एक गंभीर समस्या उजागर की है। गुलशन ने बताया कि इलाके के श्मशान घाट की स्थिति इस वक्त बेहद दयनीय और जर्जर हो चुकी है। अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट के अंदर जो टीन शेड बने हुए हैं, वे पूरी तरह टूट चुके हैं और कभी भी भरभराकर गिरने की हालत में हैं, जिससे वहां आने वाले लोगों पर हर वक्त जान का खतरा मंडराता रहता है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्थानीय विधायक से लेकर नगर निगम के आला अधिकारियों तक को इस बदहाली से कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन सभी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस श्मशान घाट को ठीक कराया जाए और जर्जर टीन शेड को तुरंत बदला जाए।
पाइपलाइन के नाम पर 1 साल पहले खोदी सड़क
गांधी नगर स्थित गौतम नगर रोड के रहने वाले जसपाल तंवर ने विकास के नाम पर किए जा रहे प्रशासनिक खिलवाड़ को उजागर किया है। जसपाल ने बताया कि करीब 1 साल पहले इलाके में पाइपलाइन डालने के उद्देश्य से मुख्य सड़कों को तोड़ दिया गया था, लेकिन पाइपलाइन का काम पूरा होने के बाद आज तक इस सड़क की सुध नहीं ली गई और इसे इसके हाल पर ही छोड़ दिया गया। पिछले एक साल से यह सड़क पूरी तरह मलबे और गड्ढों में तबदील हो चुकी है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों का घरों से निकलना दूभर हो गया है और आए दिन वाहन चालक इन गड्ढों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। धूल के गुबार और बदहाली से जूझ रहे क्षेत्रवासियों ने आक्रोश जताते हुए मांग की है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग की इस लापरवाही पर सख्त एक्शन लिया जाए और सड़क की मरम्मत का कार्य तुरंत शुरू करवाया जाए।
सूर्या नगर में पाइपलाइन का लीकेज दुरुस्त
जयपुर के सीताबारी स्थित सूर्या नगर के बाल कृष्ण शर्मा की सतर्कता और दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ की मुहिम एक बार फिर रंग लाई है। दरअसल, बाल कृष्ण शर्मा ने क्षेत्र की एक गंभीर समस्या को पोस्ट करते हुए बताया था कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में बड़ा लीकेज होने के कारण रोजाना हजारों लीटर साफ पानी सड़कों पर बहकर व्यर्थ हो रहा था, जिससे न सिर्फ सड़क खराब हो रही थी बल्कि कॉलोनी में पानी का प्रेशर भी कम हो गया था। इस समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया और मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम को मौके पर भेजा। विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ पाइपलाइन के लीकेज को पूरी तरह दुरुस्त किया, बल्कि पानी की बर्बादी को भी रोक दिया। समस्या का सफल समाधान होने के बाद खुद बाल कृष्ण शर्मा ने दोबारा पोस्ट के माध्यम से समाधान होने की पुष्टि की और इस कार्रवाई के लिए ‘भास्कर समाधान’ और जलदाय विभाग का आभार जताया है।
ढेहर के बालाजी इलाके में चालू हुईं बंद स्ट्रीट लाइटें
जयपुर के ढेहर के बालाजी क्षेत्र की रहने वालीं अनीता की शिकायत पर दैनिक भास्कर के ‘भास्कर समाधान’ का बड़ा असर देखने को मिला है। अनीता ने अपने इलाके की समस्या को पोस्ट करते हुए बताया था कि उनकी गली की रोड लाइटें (स्ट्रीट लाइट्स) लंबे समय से खराब पड़ी हैं और काम नहीं कर रही हैं। लाइटें बंद होने की वजह से पूरी गली रात के वक्त घने अंधेरे में डूब जाती थी, जिससे स्थानीय निवासियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था और असामाजिक तत्वों का डर भी बना हुआ था। इस समस्या के पोस्ट होने के बाद बिजली विभाग के एक्सईएन (XEN) ने मामले पर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर गली की सभी बंद पड़ी रोड लाइटों को तुरंत दुरुस्त करवाया।
रूपाराम बने आज ‘स्टार ऑफिसर’
ढेहर के बालाजी क्षेत्र में रहने वालीं अनीता ने बंद रोड लाइट की समस्या पोस्ट की थी। जिसके बाद समस्या का त्वरित निस्तारण हो गया है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए बिजली विभाग के XEN रूपाराम ने तत्परता दिखाई। उन्होंने मौके पर तकनीकी टीम को भेजकर गली की सभी बंद लाइटों को तुरंत ठीक करवाया है। जनता को अंधेरे की समस्या से निजात दिलाने वाले XEN रूपाराम को आज का ‘स्टार ऑफिसर’ बनायाा गया हैं।
पब्लिक की आवाज बना ‘भास्कर समाधान’ ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट देशभर में इकलौता ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी सीधे अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू खुद पोस्ट कर सकते हैं। ये सेगमेंट जनता को अपने गली-मोहल्ले की परेशानियां सीधे विभाग के उच्चाधिकारियों के सामने रखने की सुविधा देता है। लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब इसे और अधिक प्रभावी, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। अब सीधे अधिकारियों तक पहुंच रहीं समस्याएं दैनिक भास्कर के इस सेगमेंट में अधिकारी भी अपने एक्शन के बारे में बता सकेंगे। शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, वह अब सीधे उन्हीं अधिकारियों तक पहुंचेगी। इसके बाद अधिकारी उस लोकेशन को मैप पर देख सकेंगे। यदि उन्होंने समाधान कर दिया है तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी एप के जरिए ही दे सकेंगे या बता सकेंगे कि अभी काम जारी है। अधिकारी चाहें तो जिस यूजर ने शिकायत की है, उसे कॉल भी कर सकते हैं। ये खबरें भी पढ़िए… भास्कर एप से समस्याओं के समाधान की ये खबरें भी पढ़िए… 1.जनसमस्याओं की सुनवाई से समाधान तक:जयपुर में ‘भास्कर समाधान’ बना जनता की आवाज, मनोज मुदगल को मिला ‘पब्लिक का स्टार’ का सम्मान 2.जयपुर में माविका चौराहे पर चमकी सड़कें:खातीपुरा में बेसहारा पशुओं का जमावड़ा, सांगानेर की कॉलोनी में मुख्य रोड ऊंची और गलियां नीची होने से जलभराव 3.हनुमान वाटिका में 1 साल से टूटी रोड:मानसरोवर में बीच सड़क पर गैस पाइपलाइन का टैंक, पानी के संकट पर पार्षद शिव सोनी ने लिया एक्शन 4.कचरा, जलभराव और टूटी सड़कें बनी बड़ी समस्या:‘भास्कर समाधान’ पर उठी नागरिकों की आवाज, बनी पार्क और सांगानेर में हुआ समाधान 5.जयपुर में ‘भास्कर समाधान’ का असर:हरमाड़ा और विद्याधर नगर में चमकीं बंद पड़ी रोड लाइटें, शिकायत के महज 24 घंटे के अंदर जागा प्रशासन 6.जयपुर में कीचड़, धूल और अंधेरे से जनता परेशान:भास्कर समाधान से जनता को मिली राहत, शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन 7.जयपुर में एक क्लिक पर खुली प्रशासन की नींद:टूटी पाइप लाइन ठीक, सुधरी स्ट्रीट लाइट; शहर के कई इलाकों में अब भी हाल बेहाल 8.‘भास्कर समाधान’: बुनियादी समस्याओं का मिल रहा हल:सड़क, पानी और सीवरेज जयपुर की बड़ी समस्या, यूजर बोले दो महीने से न गड्‌ढा भरा, न सड़क, कॉलोनी में पीने का पानी नहीं 9.‘भास्कर समाधान’: एक पोस्ट से हो रहा समस्याओं का हल:जयपुर में कहीं 14 साल से सड़क बनने का इंतजार, तो कहीं चूहों ने पूरा पार्क खोखला कर दिया 10. जयपुर में विकास के दावों की खुली पोल:जनता ने नगर निगम पर लगाया अनदेखी का आरोप, हरमाड़ा और गोविंदपुरी में सीवर समस्या का हुआ समाधान

राजस्थान में 76 नई नगरपालिकाओं का गठन:15 साल का सबसे बड़ा विस्तार, 684 नए पद मंजूर; जयपुर-झुंझुनूं में सबसे ज्यादा 7-7 निकाय

राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे कस्बोंं और शहरी क्षेत्रों के लिए राज्य सरकार ने नगरीय विकास को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी दे दी गई। साथ ही राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो गई है। नई नगरपालिकाओं के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्वायत्त शासन विभाग में 684 नए पद भी बनाए गए हैं। पिछले तीन सालों में विभाग में पहली बार भर्ती की मंजूरी मिली है। जबकि इतनी बड़ी संख्या में पदों का सृजन पिछले 15 सालों में पहली बार हुआ है। नई नगरपालिकाओं में सबसे अधिक 7-7 निकाय जयपुर और झुंझुनूं जिलों में बनाए गए हैं। राज्य सरकार का यह फैसला भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल में स्थानीय निकायों के विस्तार का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों में तेजी आएगी। जयपुर जिले में ये बनी नगर पालिकाएं जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं गठित की गई हैं। वहीं बालोतरा, बाड़मेर और अजमेर में तीन-तीन नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। इसके अलावा अन्य कई जिलों में भी नए नगरीय निकाय बनाए गए हैं। 684 नए पदों पर होगी भर्ती नई नगरपालिकाओं के गठन के साथ सरकार ने इनके प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। स्वायत्त शासन विभाग में 684 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इन पदों पर भर्ती होने से नई नगरपालिकाओं में प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। झुंझुनूं में ये बनी नगर पालिकाएं इन जिलोंं में भी बनीं 76 नगर पालिकाओं में ये पद किए स्वीकृत सरकार ने प्रदेश की 76 नवगठित नगर पालिकाओं में प्रशासनिक कामकाज के लिए 684 नए पदों के सृजन को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दी है। प्रत्येक नगर पालिका में एक-एक अधिशासी अधिकारी (चतुर्थ), सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार और वरिष्ठ सहायक का पद स्वीकृत किया गया है। वहीं दो-दो कनिष्ठ सहायकों के पद सृजित किए गए हैं। सरकार ने इसके साथ ही पहले से गठित 6 नगर पालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों के कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराने की पहले स्वीकृति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। इन छह निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से संबंधित व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है।

राजस्थान में 76 नई नगरपालिकाओं का गठन:15 साल का सबसे बड़ा विस्तार, 684 नए पद मंजूर, जयपुर-झुंझुनूं में सबसे ज्यादा 7-7 निकाय

राजस्थान में नगरीय विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में नगरीय निकायों की संख्या 309 से बढ़कर 385 हो गई है। नई नगरपालिकाओं के संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्वायत्त शासन विभाग में 684 नए पद भी सृजित किए गए हैं। पिछले तीन सालों में विभाग में पहली बार भर्ती की मंजूरी मिली है, जबकि इतनी बड़ी संख्या में पदों का सृजन पिछले 15 सालों में पहली बार हुआ है। राज्य सरकार का यह फैसला बीजेपी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में स्थानीय निकायों के विस्तार का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि तेजी से विकसित हो रहे कस्बों और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने से नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों में तेजी आएगी। नई नगरपालिकाओं में सबसे अधिक 7-7 निकाय जयपुर और झुंझुनूं जिलों में बनाए गए हैं। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, कानोता, खेजरोली और कालाडेरा को नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा दौसा, अलवर और टोंक में चार-चार नई नगरपालिकाएं गठित की गई हैं। वहीं बालोतरा, बाड़मेर और अजमेर में तीन-तीन नई नगरपालिकाओं का गठन किया गया है। इसके अलावा अन्य कई जिलों में भी नए नगरीय निकाय बनाए गए हैं। नई नगरपालिकाओं के गठन के साथ सरकार ने इनके प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसी उद्देश्य से स्वायत्त शासन विभाग में 684 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इन पदों पर भर्ती होने से नई नगरपालिकाओं में प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारु रूप से हो सकेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। राजस्थान में 76 नई नगरपालिकाओं के गठन के बाद प्रदेश में नगरीय निकायों की कुल संख्या 385 हो गई है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से तेजी से शहरीकरण वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बेहतर प्रशासन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। प्रदेश में गठित 76 नई नगर पालिकाओं में सबसे अधिक 7-7 नगर पालिकाएं जयपुर और झुंझुनूं जिलों में बनाई गई हैं। जयपुर जिले में वाटिका, जमवारामगढ़, फागी, दूदू, खेजरोली, कालाडेरा और कानोता, जबकि झुंझुनूं जिले में सिंघाना, डूंडलोद, जाखल, सुलताना, बुहाना, मलसीसर और मण्ड्रेला को नगर पालिका का दर्जा मिला है। दौसा जिले में रामगढ़-पचवारा, बसवा, लवाण और भाण्डारेज, अलवर में मुण्डावर, कठूमर, मालाखेड़ा और नौगांव, टोंक में दूनी, लाम्बाहरिसिंह, डिग्गी और पीपलू और बाड़मेर में जसोल, चौहटन, गुड़ामालानी और धोरीमन्ना नई नगर पालिकाएं बनाई गई हैं। वहीं झालावाड़ में मनोहर थाना, डग और खानपुर, जोधपुर में मथानिया, तिवरी और बाप, अजमेर में सावर, टांटोटी और पीसांगन और भीलवाड़ा में बनेड़ा, बीगोद और बिजौलिया को नगर पालिका बनाया गया है। इसके अलावा कोटपूतली-बहरोड़ जिले में नारायणपुर और मांढण, सीकर में पलसाना और धोद, सवाई माधोपुर में वजीरपुर और खण्डार, बूंदी में देई और हिण्डोली, ब्यावर में रायपुर और मसूदा, जालौर में आहोर और सायला, नागौर में मेडतारोड़ और रियाबड़ी, बीकानेर में लूणकरनसर और नापासर, बालोतरा में सिणधरी और समदड़ी, धौलपुर में मनिया और सेपऊ और करौली में सूरीठ और मण्डरायल को नगर पालिका का दर्जा दिया गया है। वहीं डीग में पहाड़ी, उदयपुर में वल्लभनगर, हनुमानगढ़ में गोलूवाला, राजसमंद में भीम, श्रीगंगानगर में घड़साना, डीडवाना-कुचामन में खाटू खुर्द, कोटा में सुकेत, बारां में सीसवाली, पाली में सोजत रोड, चूरू में साहवा, प्रतापगढ़ में अरनोद और सिरोही में मण्डार को नई नगर पालिका घोषित किया गया है। 76 नगर पालिकाओं के लिए 684 पद सृजित सरकार ने प्रदेश की 76 नवगठित नगर पालिकाओं में प्रशासनिक कामकाज शुरू करने के लिए 684 नए पदों के सृजन को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी दे दी है। प्रत्येक नगर पालिका में एक-एक अधिशासी अधिकारी (चतुर्थ), सहायक राजस्व निरीक्षक, कनिष्ठ अभियंता (सिविल), कनिष्ठ लेखाकार, ठोस कचरा प्रबंधक (स्वास्थ्य निरीक्षक), वरिष्ठ प्रारूपकार और वरिष्ठ सहायक का पद स्वीकृत किया गया है। वहीं दो-दो कनिष्ठ सहायकों के पद सृजित किए गए हैं। इस प्रकार सभी 76 नगर पालिकाओं के लिए कुल 684 पद स्वीकृत हुए हैं। सरकार ने इसके साथ ही पहले से गठित 6 नगर पालिकाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चौकीदार, सफाई जमादार और सफाई कर्मचारियों के कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराने की पूर्व स्वीकृति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। इन छह निकायों के लिए पहले स्वीकृत 54 पदों से संबंधित व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है।

मोहर्रम पर जयपुर में हाई अलर्ट:3 हजार पुलिसकर्मी तैनात, ट्रैफिक डायवर्जन और परकोटे में कई मार्गों पर वाहनों की एंट्री बंद

मोहर्रम के अवसर पर आज जयपुर शहर में निकलने वाले ताजिया जुलूसों को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था लागू की है। परकोटा क्षेत्र में कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी, जबकि भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर भी रोक रहेगी। वहीं, पूरे शहर में करीब 3 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। आमजन से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। संजय सर्किल, अजमेरी गेट, न्यू गेट, सांगानेरी गेट, घाट गेट, गलता गेट और रामगढ़ मोड़ से परकोटे में सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। अन्य क्षेत्रों से आने वाले यातायात को आवश्यकता अनुसार वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाएगा। भारी वाहनों की एंट्री पर रहेगी रोक आज रोड नंबर-14 वीकेआई, कालवाड़ पुलिया, सिरसी पुलिया, 200 फीट अजमेर रोड, न्यू सांगानेर मोड़, गोपालपुरा मोड़, ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा, धोबीघाट, रामगढ़ मोड़, गलता गेट चौराहा और आमेर तिराहे सहित कई प्रमुख प्रवेश मार्गों से शहर में भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन बाजारों में पार्किंग रहेगी प्रतिबंधित ताजिया जुलूस के दौरान चौड़ा रास्ता, बड़ी चौपड़, बापू बाजार, जौहरी बाजार, हवामहल बाजार, सुभाष चौक, माउंट रोड, रामगंज बाजार, घाट गेट बाजार, चार दरवाजा, चांदपोल बाजार, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार, गोपीनाथ मार्ग, इंदिरा बाजार, किशनपोल बाजार, खजाने वालों का रास्ता, एमआई रोड और एमडी रोड सहित कई प्रमुख बाजारों और मार्गों पर पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। कर्बला तक निकलेगा ताजिया जुलूस आज दोपहर बाद विभिन्न क्षेत्रों से ताजिए बड़ी चौपड़ पहुंचेंगे। यहां से जुलूस हवामहल बाजार, चांदी की टकसाल, सुभाष चौक, जोरावर सिंह गेट और रामगढ़ मोड़ होते हुए कर्बला जाएगा। इस दौरान दोपहर से देर रात तक परकोटे के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर वाहनों की एंट्री बंद रहेगी और ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा। 3 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी पुलिस मुख्यालय के निर्देशों पर राजधानी जयपुर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर राजीव पचार ने बताया कि शहर के भीतर और बाहरी क्षेत्रों में करीब 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इंटेलिजेंस के जवान सादा वर्दी में मौजूद रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) को भी तैनात किया गया है। लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस की अनुमति जिला प्रशासन और पुलिस ने शांति समिति तथा सीएलजी सदस्यों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस के रूप में निकाला जाएगा। जुलूस के मार्ग पर बिजली, पानी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई मोहर्रम के दौरान अभय कमांड सेंटर, शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से हर गतिविधि की निगरानी की जाएगी। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया पर विशेष नजर रखेगी और अफवाह फैलाने या भ्रामक सूचनाओं के जरिए कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आमजन से अपील यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मोहर्रम के दौरान जारी ट्रैफिक डायवर्जन का पालन करें, प्रतिबंधित मार्गों पर वाहन लेकर न जाएं और भीड़भाड़ से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।

मृत्युभोज में घी के मालपुए नहीं बनवाने पर हुक्का-पानी बंद:43 परिवारों को दुकानों से राशन नहीं मिल रहा, कुएं से पानी नहीं दे रहे

आर्थिक तंगी की मार झेल रहे परिवार ने मृत्युभोज में ‘घी के मालपुए’ नहीं बनवाए। सादा खाना खिलाया। इससे समाज के लोग इतने नाराज हुए कि इनका हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुना दिया। इस गरीब परिवार का समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों पर भी यही तुगलकी फरमान लागू किया गया। अब परिवारों को न दुकानदार राशन दे रहा है, न ही कुएं से पानी नहीं भरने दिया जा रहा है। पंचों की बंदिशें यहीं नहीं रुकीं। पीड़ित परिवारों के घरों में मेहमानों के आने और उनके किसी रिश्तेदारी में जाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पंचों के फरमान की अनदेखी करने पर 11 हजार रुपए और पूरे समाज को सामूहिक भोजन (जीमण) का दंड भुगतना होगा। यह पूरा मामला सिरोही के बरलूट थाना इलाके के मंडवारिया गांव का है। पीड़ित परिवारों ने अब जिला कलेक्टर से शिकायत की है। अब सिलसिलेवार समझते हैं पूरा मामला… सादा भोजन नागवार गुजरा, पंचों ने समाज से बाहर किया पीड़ित परिवारों ने बताया कि गांव में 5 जून को सदाराम पुत्र बलवाजी का निधन हो गया था। 17 जून को हुए मृत्युभोज में परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण घी के मालपुआ नहीं बनाए जा सके। बेहद सादा भोजन कराया गया। इस बात से समाज के एक दर्जन से अधिक पंच इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने अगले ही दिन 18 जून को फरमान सुनाकर इस परिवार सहित कुल 43 समर्थक परिवारों को समाज से बाहर कर दिया। जीना हुआ दूभर, बच्चे भूखे सोने को मजबूर बहिष्कार की मार झेल रहे परिवारों का जीना मुश्किल हो गया है। गांव के दुकानदार उन्हें राशन का सामान नहीं दे रहे हैं। खेत मालिक उन्हें मजदूरी पर नहीं रख रहे हैं। हद तो यह है कि इन परिवारों को गांव के सार्वजनिक कुएं से पानी तक भरने नहीं दिया जा रहा है। राशन न मिलने के कारण घरों में बच्चे भूखे सो रहे हैं। थाने में सुनवाई नहीं, अब कलेक्टर से गुहार पीड़ितों ने 20 जून को बरलूट थाने में नामजद रिपोर्ट दी थी। आरोप है कि पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे परेशान होकर गुरुवार को सभी 43 परिवारों के लोग सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई।
उधर, बरलूट थाने के जांच अधिकारी रमेश कुमार ने कहा- परिवाद हमारे पास आया है। जांच चल रही है। यह मामला कोई पुरानी रंजिश का लग रहा है। शादी-ब्याह और रिश्तों पर भी पहरा पीड़ित गोपाल बताते हैं- मेरी बुआ की लड़की की 20 जून को शादी थी। पंचों के डर से मैं शादी में नहीं गया। फरमान है कि यदि कोई जाएगा तो उसे 11 हजार रुपए और पूरे समाज को सामूहिक भोजन (जिम) का दंड देना होगा।
अन्य पीड़ित भोगीलाल ने बताया- मेरे भाई दिनेश की 24 जून को शादी थी। ननिहाल वालों ने दंड और मालपुए की मांग के डर से पीले चावल (निमंत्रण) लेने से ही इनकार कर दिया। इसके चलते शादी में कोई शामिल नहीं हुआ। पीड़ितों की जुबानी…. तेजाराम ने कहा- पंचों ने कहा कि हमने सादा भोजन खिलाकर समाज की नाक कटा दी। अब गांव में हमसे कोई बात नहीं करता। कुएं से पानी नहीं लेने दे रहे। गोपाल ने कहा- पंचों के फरमान का ऐसा डर है कि मैं बुआ की लड़की की शादी तक में नहीं गया। भोगीलाल कहते हैं- मेरे भाई की शादी में कोई रिश्तेदार नहीं आया। ननिहाल वालों ने डर से पीले चावल (निमंत्रण) लेने से ही इनकार कर दिया। कमला देवी ने कहा- हमारी बहू-बेटियों से गांव में कोई बोलता तक नहीं। घी के मालपुआ नहीं बनाए तो क्या हम इंसान नहीं रहे? ये कैसा इंसाफ है? राजस्थान में ‘पंच-पटेलों’ के कुछ ऐसे फैसले, जिनके आगे तालिबानी सजा भी कम पड़ जाए… —— राजस्थान में तुगलकी फरमान की ये खबरें भी पढ़िए…

हाईकोर्ट ने जैसलमेर दरगाह मामले में सरकार से मांगा जवाब:ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ लगी थी याचिका, अब 29 जून को होगी अगली सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले के रामगढ़ स्थित पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। दरगाह के ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। सरकार ने जवाब पेश करने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा है। अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश जस्टिस बलजिंदरसिंह संधू ने मामले की अगली सुनवाई 29 जून को निर्धारित की है। पीठ ने याचिकाकर्ता को नोटिस का जवाब देने की स्वतंत्रता भी प्रदान की है। या​चिका में कहा-200 साल पुरानी दरगाह याचिका में बताया गया है कि यह दरगाह करीब 200 साल पुरानी है और लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रही है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और हर साल आयोजित होने वाले उर्स कार्यक्रम को भी स्थानीय प्रशासन अनुमति देता रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी जानकारी दी कि दरगाह के पास स्थित कब्रिस्तान को देखते हुए ग्राम पंचायत ने 2021 में तीन बीघा भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव पारित किया था, जो अब तक पेंडिंग है। सरकार ने जवाब के लिए समय मांगा दरगाह समिति का आरोप है कि जून 2026 में सीमा क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के बाद जारी किया गया। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरचनाओं के ध्वस्तीकरण संबंधी निर्धारित प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए न्यायालय से समय मांगा।

बांसवाड़ा में जुल्फिकार का जुलूस-निकला, मुकामी ताजियों को दी सलामी:अकीदतमंदों ने चांदी के ताजिए चढ़ाए, हैरतअंगेज करतब दिखाए

बांसवाड़ा में मोहर्रम के अवसर पर गुरुवार रात 9वीं के मौके पर शहर में पारंपरिक जुल्फिकार का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। नमाज-ए-इशा के बाद पृथ्वीगंज मस्जिद में सिंधीवाड़ा पंच की ओर से जुल्फिकार बांधने की रस्म अदा की गई। रस्म पूरी होने के बाद अकीदतमंदों ने मन्नतें पूरी होने पर जुल्फिकार पर चांदी से बने विभिन्न प्रतीक चढ़ाए। जुलूस में युवाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए, जबकि ढोल-ताशों की गूंज के बीच मातम करते हुए अकीदतमंद शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरे। जुल्फिकार पर चढ़ाए चांदी के ताजिए जुल्फिकार बांधने की रस्म गोरी परिवार और सिंधीवाड़ा पंच के सदस्यों की ओर से कराई गई। इसके बाद जुल्फिकार पर चांदी के ताजिए, नींबू, हाथ, जुबान, आंखें और गुलाब के फूलों के सेहरे चढ़ाए गए। सबसे पहले पृथ्वीगंज मस्जिद स्थित मुकामी ताजिए को सलामी दी गई, जिसके बाद अकीदतमंदों ने उसकी परिक्रमा की। शहर के प्रमुख मार्गों से निकला जुलूस जुल्फिकार का जुलूस पृथ्वीगंज मस्जिद से तेलीवाड़ा, कस्टम चौराहा, पुराना बस स्टैंड, गांधी मूर्ति और पीपली चौक होते हुए जामा मस्जिद पहुंचा, जहां मुकामी ताजिए को सलामी दी गई। इसके बाद कंधारवाड़ी, मकरानीवाड़ा और गोरख इमली पहुंचकर भी मुकामी ताजियों को सलामी अर्पित की गई। देर रात पृथ्वीगंज, गोरख इमली, कंधारवाड़ी और मकरानीवाड़ा के मुकामी एवं मन्नती ताजियों का मुकाम उठाया गया, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर पुनः अपने-अपने स्थानों पर पहुंचे। युवाओं ने दिखाए करतब, मस्जिदों में हुई इबादत जुलूस के दौरान मुस्लिम समाज के युवाओं ने हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया। वहीं शहर में कई स्थानों पर सबीलें लगाकर शर्बत और पानी का वितरण किया गया। रात में मस्जिदों में कलाम-ए-पाक की तिलावत, नमाज और हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर तकरीर हुई। गुरुवार को समाज के लोगों ने 9वीं का रोजा रखा और शाम को मगरिब की अजान के साथ रोजा इफ्तार किया। मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं चांदी के प्रतीक सिंधीवाड़ा पंच के रईस भाई ने बताया कि अकीदतमंद हर वर्ष मन्नत पूरी होने पर जुल्फिकार पर चांदी के नींबू, हाथ, पैर, ताजिए, मकान, गाड़ी, लड़का, लड़की और बच्चों के झूले जैसे प्रतीक चढ़ाते हैं। दसवीं के दिन इन चांदी के प्रतीकों को उतार लिया जाता है और अगले वर्ष कम हदिए में संबंधित श्रद्धालुओं को वापस दे दिया जाता है। हुसैनी चौक निवासी सादिक खान ने मन्नत पूरी होने पर चांदी से बना लड़का चढ़ाया, जबकि राजतालाब निवासी इकबाल खान ने चांदी से बनी आंखें अर्पित कीं। खास बात यह है कि वर्षों से हिंदू समाज के लोग भी अपनी मन्नत पूरी होने पर चांदी के नींबू सहित अन्य प्रतीक चढ़ाते आ रहे हैं, जो शहर में सर्वधर्म समभाव की मिसाल माना जाता है।

खेती में पानी का संकट बढ़ा तो शुरू की नर्सरी:सालाना 20 लाख रुपए की कमाई, ताऊ से काम सीखकर बनाई पहचान

सरकारी बागवान रहे ताऊ से पेड़-पौधों और गार्डनिंग का हुनर सीखा। कम जमीन और पानी के संकट के कारण खेती के बजाय नर्सरी का रास्ता चुना। करीब 10 साल पहले दो बीघा जमीन से शुरू की गई नर्सरी आज 30 से ज्यादा वैरायटी के पौधों तक पहुंच गई है। अब सालभर में एक लाख से ज्यादा पौधे बेचकर नर्सरी और गार्डन डेवलपमेंट के काम से 20 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। खुद ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन बेटे को एग्रीकल्चर के क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं। किसान का मानना है कि आने वाला समय खेती और इससे जुड़े व्यवसायों का है, जिसमें युवाओं के लिए बेहतर अवसर हैं। म्हारे देस की खेती में आज बात नागौर के किसान की… नागौर के रियांबड़ी के किसान घनश्याम माली (45) ने परंपरागत खेती से अलग रास्ता चुनकर अपनी पहचान बनाई है। घनश्याम 8वीं तक पढ़े हैं, लेकिन खेती और पौधों के क्षेत्र में वर्षों का अनुभव उन्हें सफल उद्यमी बना चुका है। उनके पिता रतनालाल (70) किसान हैं। घनश्याम का एक भाई है। घनश्याम के एक बेटा और चार बेटियां हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटे लक्की ने एग्रीकल्चर सब्जेक्ट से 12वीं पास की है और अब एग्रीकल्चर में बीएससी कर रहा है। घनश्याम का मानना है कि आने वाला समय कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों का है, इसलिए वे अपने बच्चों को भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं। अजमेर में ताऊ से सीखा बागवानी का काम घनश्याम माली के ताऊ सत्यनारायण अजमेर नगर परिषद में बागवान के पद पर कार्यरत थे। बचपन से ही पेड़-पौधों के बीच पले-बढ़े घनश्याम कुछ नया करना चाहते थे। इलाके में पानी की कमी के कारण खेती लगातार मुश्किल होती जा रही थी। ऐसे में वे साल 2006 में अजमेर चले गए और ताऊ के साथ रहकर बागवानी का काम सीखना शुरू किया। वहां सात साल तक उन्होंने घास लगाने, पौधों की देखभाल, गार्डन डिजाइनिंग, पेड़ों की कटिंग-छंटाई और रखरखाव जैसे काम सीखे। गार्डन डेवलप करने से शुरुआत, फिर शुरू की अपनी नर्सरी घनश्याम ने विभिन्न शहरों में गार्डन डेवलपमेंट का काम किया। इसका उन्हें 20 साल का अनुभव है। अनुभव बढ़ने के बाद करीब 10 साल पहले उन्होंने अपनी नर्सरी शुरू की। आज उनकी दो बीघा में फैली नर्सरी में 30 से ज्यादा किस्मों के फलदार, फूलदार, सजावटी और छायादार पौधे तैयार किए जाते हैं। वे कई पौधे खुद बीज और ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार करते हैं, जबकि कुछ विशेष किस्मों के पौधे उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पुणे (महाराष्ट्र) से मंगवाते हैं। सालभर में 1 लाख से ज्यादा पौधे बेचते हैं घनश्याम माली के अनुसार, नर्सरी से हर साल एक लाख से ज्यादा पौधे बिकते हैं। वे केवल पौधे ही नहीं बेचते, बल्कि घर, फार्म हाउस, होटल, स्कूल और सरकारी परिसरों के लिए गार्डन डेवलपमेंट का काम भी करते हैं। इसके लिए क्षेत्रफल और डिजाइन के अनुसार अलग-अलग कमाई होती है। नागौर के अलावा अजमेर, पाली, सीकर, कुचामन, बीकानेर और आसपास के कई जिलों में वे गार्डन तैयार कर चुके हैं। छोटा पौधा, बड़ी कमाई का फॉर्मूला घनश्याम बताते हैं कि नर्सरी का व्यवसाय कम जमीन में अधिक आय देने वाला काम है। उदाहरण के तौर पर पांच फीट का पौधा करीब 50 रुपए में बिक जाता है। यदि एक साथ 1000 पौधे भी बिक जाएं तो अच्छी आय हो जाती है। उनके अनुसार, फसलों की खेती में मौसम, कीट और रोगों का जोखिम बना रहता है, जबकि नर्सरी व्यवसाय में सही देखभाल के साथ नुकसान की आशंका कम रहती है। नौकरी से बेहतर है हुनर को कारोबार बनाना घनश्याम का मानना है कि जिस काम की जानकारी हो, उसे नौकरी की बजाय व्यवसाय के रूप में किया जाए तो ज्यादा सफलता मिल सकती है। वे कहते हैं कि शुरुआत से खेती और पौधों के बीच रहने के कारण यह काम उन्हें सहज लगा। इसी अनुभव को उन्होंने रोजगार में बदला और आज सालाना करीब 20 लाख रुपए तक की आय कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवा यदि आधुनिक खेती, नर्सरी और बागवानी को अपनाएं तो कम जमीन में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इनपुट सहयोग : विशनाराम सैनी, रियांबड़ी, नागौर — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जीएसटी अधिकारी कर रहे ऑर्गेनिक खेती, 10 लाख की कमाई:घर की छत पर उगाई सब्जियां; डार्क जोन में बनवाया 70 लाख लीटर क्षमता का तालाब बाजार में मिलने वाली ज्यादातर सब्जियां केमिकल खाद से उगाई जा रही हैं। ऐसे में आपकी थाली में शुद्ध खाना अब जरूरत भी है और चुनौती भी। पूरी खबर पढ़िए

LPG टैंकर टोल से टकराया, धमाके के बाद आग लगी:कौशांबी में ड्राइवर जिंदा जला, सिर्फ हडि्डयां बचीं; 16 बाइकें और 2 कारें जलकर राख

यूपी के कौशांबी में शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे एक LPG टैंकर बेकाबू होकर टोल प्लाजा से टकरा गया। टक्कर के बाद तेज धमाका हुआ और टैंकर में आग लग गई। हादसे में टैंकर चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई। उसका शव पूरी तरह जल गया और कंकाल का कुछ हिस्सा ही बरामद हो सका। वहीं, पांच टोल कर्मचारी भी झुलस गए। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक टैंकर पूरी तरह जल चुका था। टोल प्लाजा के यार्ड में खड़ी 16 बाइकें और दो कारें भी आग की चपेट में आकर जल गईं। आग बुझने के बाद जब टीम टैंकर के अंदर पहुंची तो चालक की हड्डियां मिलीं। इससे पहले सूचना मिली थी कि चालक टैंकर से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल हो गया है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। आग की ऊंची लपटों को देखकर टोल प्लाजा के दोनों ओर बसों और कारों की लंबी कतारें लग गईं। करीब 2 किलोमीटर दूर से धुएं का गुबार और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। यह हादसा जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर कोखराज थाना क्षेत्र के सिहोरी टोल प्लाजा पर हुआ। हादसे की तस्वीरें देखिए- अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझ लीजिए- टोल प्लाजा के यार्ड में खड़ी 16 बाइकें और 2 कारें जलीं टोल कर्मचारी संजय निर्मल ने बताया- हादसे से 10 मिनट हल्की-फुल्की बारिश हुई थी। पता नहीं अचानक क्या हुआ कि पूरी गाड़ी एकदम धड़ाम से गिर गई। उसके बाद गैस लीक होने लगी। अचानक आग भड़क गई। आग प्लाजा सटे यार्ड और टॉयलेट तक फैल गई। यार्ड में खड़ी 16 से ज्यादा बाइकें और 2 कारें जलकर राख हो गईं। यार्ड में टोल कर्मचारी अपनी गाड़ियां पार्क करते हैं। इस दौरान पास में बने टॉयलेट में बैठे सुपरवाइजर आलोक पांडे भी बुरी तरह झुलस गए हैं। एसपी सत्यनारायण प्रजापत ने बताया- कोखराज टोल प्लाजा के पास आग की सूचना मिलते ही तुरंत जिले की सभी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और सिविल पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया। सुरक्षा को देखते हुए ट्रैफिक रुकवाया गया। उसके बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। ट्रैफिक को अब धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है। ———————- ये खबर भी पढ़िए-
यूपी में 48 घंटे में आएगा मानसून:32 शहरों में बारिश का अलर्ट, 38 जिलों में हीटवेव चलेगी, पारा 44°C पार यूपी में मानसून अगले 24 से 48 घंटों के अंदर एंट्री कर सकता है। मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि प्रदेश में मानसून के लिए अनुकूल मौसमी सिस्टम तैयार हो गया है। मानसून 1-2 दिनों में यानी 28 जून तक बिहार बॉर्डर से गोरखपुर-महराजगंज के रास्ते प्रदेश में एंट्री कर सकता है। 29 जून तक लखनऊ पहुंच सकता है। 1-2 जुलाई तक पूरे यूपी में छा सकता है। पूरी खबर पढ़िए