खेती में पानी का संकट बढ़ा तो शुरू की नर्सरी:सालाना 20 लाख रुपए की कमाई, ताऊ से काम सीखकर बनाई पहचान

सरकारी बागवान रहे ताऊ से पेड़-पौधों और गार्डनिंग का हुनर सीखा। कम जमीन और पानी के संकट के कारण खेती के बजाय नर्सरी का रास्ता चुना। करीब 10 साल पहले दो बीघा जमीन से शुरू की गई नर्सरी आज 30 से ज्यादा वैरायटी के पौधों तक पहुंच गई है। अब सालभर में एक लाख से ज्यादा पौधे बेचकर नर्सरी और गार्डन डेवलपमेंट के काम से 20 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। खुद ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन बेटे को एग्रीकल्चर के क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं। किसान का मानना है कि आने वाला समय खेती और इससे जुड़े व्यवसायों का है, जिसमें युवाओं के लिए बेहतर अवसर हैं। म्हारे देस की खेती में आज बात नागौर के किसान की… नागौर के रियांबड़ी के किसान घनश्याम माली (45) ने परंपरागत खेती से अलग रास्ता चुनकर अपनी पहचान बनाई है। घनश्याम 8वीं तक पढ़े हैं, लेकिन खेती और पौधों के क्षेत्र में वर्षों का अनुभव उन्हें सफल उद्यमी बना चुका है। उनके पिता रतनालाल (70) किसान हैं। घनश्याम का एक भाई है। घनश्याम के एक बेटा और चार बेटियां हैं, जिनमें दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटे लक्की ने एग्रीकल्चर सब्जेक्ट से 12वीं पास की है और अब एग्रीकल्चर में बीएससी कर रहा है। घनश्याम का मानना है कि आने वाला समय कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों का है, इसलिए वे अपने बच्चों को भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़ा रहे हैं। अजमेर में ताऊ से सीखा बागवानी का काम घनश्याम माली के ताऊ सत्यनारायण अजमेर नगर परिषद में बागवान के पद पर कार्यरत थे। बचपन से ही पेड़-पौधों के बीच पले-बढ़े घनश्याम कुछ नया करना चाहते थे। इलाके में पानी की कमी के कारण खेती लगातार मुश्किल होती जा रही थी। ऐसे में वे साल 2006 में अजमेर चले गए और ताऊ के साथ रहकर बागवानी का काम सीखना शुरू किया। वहां सात साल तक उन्होंने घास लगाने, पौधों की देखभाल, गार्डन डिजाइनिंग, पेड़ों की कटिंग-छंटाई और रखरखाव जैसे काम सीखे। गार्डन डेवलप करने से शुरुआत, फिर शुरू की अपनी नर्सरी घनश्याम ने विभिन्न शहरों में गार्डन डेवलपमेंट का काम किया। इसका उन्हें 20 साल का अनुभव है। अनुभव बढ़ने के बाद करीब 10 साल पहले उन्होंने अपनी नर्सरी शुरू की। आज उनकी दो बीघा में फैली नर्सरी में 30 से ज्यादा किस्मों के फलदार, फूलदार, सजावटी और छायादार पौधे तैयार किए जाते हैं। वे कई पौधे खुद बीज और ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार करते हैं, जबकि कुछ विशेष किस्मों के पौधे उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पुणे (महाराष्ट्र) से मंगवाते हैं। सालभर में 1 लाख से ज्यादा पौधे बेचते हैं घनश्याम माली के अनुसार, नर्सरी से हर साल एक लाख से ज्यादा पौधे बिकते हैं। वे केवल पौधे ही नहीं बेचते, बल्कि घर, फार्म हाउस, होटल, स्कूल और सरकारी परिसरों के लिए गार्डन डेवलपमेंट का काम भी करते हैं। इसके लिए क्षेत्रफल और डिजाइन के अनुसार अलग-अलग कमाई होती है। नागौर के अलावा अजमेर, पाली, सीकर, कुचामन, बीकानेर और आसपास के कई जिलों में वे गार्डन तैयार कर चुके हैं। छोटा पौधा, बड़ी कमाई का फॉर्मूला घनश्याम बताते हैं कि नर्सरी का व्यवसाय कम जमीन में अधिक आय देने वाला काम है। उदाहरण के तौर पर पांच फीट का पौधा करीब 50 रुपए में बिक जाता है। यदि एक साथ 1000 पौधे भी बिक जाएं तो अच्छी आय हो जाती है। उनके अनुसार, फसलों की खेती में मौसम, कीट और रोगों का जोखिम बना रहता है, जबकि नर्सरी व्यवसाय में सही देखभाल के साथ नुकसान की आशंका कम रहती है। नौकरी से बेहतर है हुनर को कारोबार बनाना घनश्याम का मानना है कि जिस काम की जानकारी हो, उसे नौकरी की बजाय व्यवसाय के रूप में किया जाए तो ज्यादा सफलता मिल सकती है। वे कहते हैं कि शुरुआत से खेती और पौधों के बीच रहने के कारण यह काम उन्हें सहज लगा। इसी अनुभव को उन्होंने रोजगार में बदला और आज सालाना करीब 20 लाख रुपए तक की आय कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवा यदि आधुनिक खेती, नर्सरी और बागवानी को अपनाएं तो कम जमीन में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इनपुट सहयोग : विशनाराम सैनी, रियांबड़ी, नागौर — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जीएसटी अधिकारी कर रहे ऑर्गेनिक खेती, 10 लाख की कमाई:घर की छत पर उगाई सब्जियां; डार्क जोन में बनवाया 70 लाख लीटर क्षमता का तालाब बाजार में मिलने वाली ज्यादातर सब्जियां केमिकल खाद से उगाई जा रही हैं। ऐसे में आपकी थाली में शुद्ध खाना अब जरूरत भी है और चुनौती भी। पूरी खबर पढ़िए

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