स्थाई लोक अदालत ने हाउसिंग-बोर्ड पर लगाया 42हजार का जुर्माना:सफल बोलीदाता को 2 महीने में दुकानों का पट्टा देने के निर्देश, बोली के बाद हाउसिंग बोर्ड ने नीलामी कर दी थी रद्द

जयपुर महानगर प्रथम की स्थाई लोक अदालत ने नीलामी में सफल बोलीदाता के पक्ष में दुकानों की सेल डीड (विक्रय पत्र) निष्पादित नहीं करने पर हाउसिंग बोर्ड पर 42 हजार रुपए का जुर्माना लगाया हैं। साथ ही हाउसिंग बोर्ड को 2 महीने में दोनों दुकानों को परिवादी के नाम ट्रांसफर करने का निर्देश भी दिया है। यह आदेश अध्यक्ष मनोज कुमार सहारिया और सदस्य बलदेवराज बेनीवाल की बैंच ने अलवर निवासी प्रवीण कुमार शर्मा के परिवाद को निस्तारित करते हुए दिए। परिवाद में कहा गया था कि हाउसिंग बोर्ड ने जयपुर के मानसरोवर में दो कॉमर्शियल दुकानों की नीलामी की सूचना 7 जनवरी 2025 जारी की थी। तय समय पर परिवादी नीलामी प्रक्रिया में शामिल हुआ, उसने बेस प्राइस से ज्यादा की बोली लगाई, नीलामी में उसके अलावा कोई ओर बोलीदाता नहीं होने से उसके पक्ष में बोली स्वीकार हुई। नीलामी की शर्तों की पालना में परिवादी ने पोस्ट इवेन्ट राशि 11.79 लाख रुपए जमा भी करवा दिए। लेकिन उसके पक्ष में दुकानों की सेल डीड नहीं करवाई गई। परिवादी को करीब 5 महीने बाद 20 मई 2025 को सूचना दी गई कि नीलामी में एक मात्र बोलीदाता होने के चलते नीलामी को ही रद्द कर दिया गया है। बोर्ड को रेवेन्यू का नुकसान से बचाया
जवाब में हाउसिंग बोर्ड की ओर से कहा गया कि नीलामी प्रक्रिया में एक ही बोलीदाता होने से प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकी। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड के 28 जनवरी 2014 के आदेश के बिंदू संख्या-13 में नीलामी समिति को मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए नियमानुसार नीलामी को निरस्त किया गया। इसमें हाउसिंग बोर्ड ने कोई गैर कानूनी और नियम विरूद्ध कार्य नहीं किया हैं, बल्कि बोर्ड को राजस्व हानि से बचाने के लिए नियमानुसार नीलामी को निरस्त किया हैं। नीलामी निरस्त करना अवैध-मनमाना
आदेश में स्थाई लोक अदालत ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की 16 सितंबर 2019 की अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान है कि एकल बोलीदाता होने के आधार पर नीलामी निरस्त नहीं की जाएगी। वहीं बोर्ड के 13 और 17 जनवरी 2025 के आदेश भी इस अधिसूचना की पुष्टि करते हैं। ऐसे में बोर्ड का यह फैसला अपने ही आदेशों व अधिसूचना के विरूद्ध हैं। बोर्ड ने 28 जनवरी 2014 के आदेशों के तहत नीलामी रद्द की। जबकि उसके बाद की अधिसूचना और आदेश इसके खिलाफ हैं। ऐसे में पहले के आदेश को बाद के आदेशों पर वरीयता नहीं दी जा सकती हैं। इसलिए हाउसिंग बोर्ड का नीलामी को निरस्त करना अवैध, अनुचित और मनमाना कृत्य हैं।

स्कूल हॉल में फंदे पर लटका मिला युवक:रिकॉर्ड रूम में लगी आग, डीवीआर जला; धुंआ उठता देख किया फायर बिग्रेड को कॉल

पाली शहर के टैगोर नगर स्थित एक निजी स्कूल में गुरुवार सुबह स्कूल परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंची ब्रिगेड टीम ने रिकॉर्ड रूम में लगी आग बुझाई, लेकिन इसी दौरान स्कूल के हॉल में एक युवक फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने शव को बांगड़ हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाकर जांच शुरू कर दी है। धुआं उठता देख लोगों ने बुलाया फायर ब्रिगेड जानकारी के अनुसार, स्कूल से धुआं उठता देख आसपास के लोगों ने फायर ब्रिगेड और डिस्कॉम को सूचना दी। जिसके बाद एहतियात के तौर पर स्कूल की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। सूचना मिलते ही दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। जांच करने पर पता चला कि स्कूल के रिकॉर्ड रूम में आग लगी हुई है। इसके बाद टीम ने तुरंत आग बुझाने का काम शुरू किया और कुछ देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। लेकिन तब तक रिकॉर्ड रूम में रखा सामान और वहां लगा डीवीआर जल चुका था। आग बुझाने के दौरान जब दमकलकर्मी स्कूल के हॉल की तरफ पहुंचे, तो उनकी नजर हॉल में लगी लोहे की रैली पर पड़ी। वहां एक युवक फंदे से लटका हुआ मिला। युवक को इस हालत में देखकर दमकलकर्मियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर कोतवाली थाने के एएसआई जगदीश कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। मृतक की पहचान टैगोर नगर स्थित सरस्वती स्कूल के पास रहने वाले राघवेन्द्र (30) पुत्र एसएन शर्मा के रूप में हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर बांगड़ हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया और मामले की जांच शुरू कर दी। रात को स्कूल में रुकने की कही थी बात प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राघवेंद्र पहले इसी स्कूल में शिक्षक था। बाद में उसे ऑफिस कार्य में लगाया गया था। वह पिछले छह-सात साल से स्कूल में काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, बुधवार रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच राघवेंद्र दोबारा स्कूल पहुंचा था। उसने स्कूल स्टाफ से कहा था कि वह रात में स्कूल में ही रुकेगा और वहीं सोएगा। गुरुवार सुबह जब पत्नी ने कई बार फोन किया तो राघवेंद्र ने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद पत्नी स्कूल पहुंची। वहां पहुंचने पर उसने स्कूल परिसर से धुआं उठता देखा और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। 4 बहनों का इकलौता भाई, पिता का पहले हो चुका निधन राघवेंद्र 4 बहनों का इकलौता भाई था। उसके दो छोटे बच्चे हैं। परिवार टैगोर नगर क्षेत्र में ही रहता है। परिजनों के अनुसार, राघवेंद्र के पिता बैंक से रिटायर थे और उनका पहले ही निधन हो चुका है। घटना की सूचना मिलने पर मृतक की मां और पत्नी मौके पर पहुंचीं। बेटे और पति का शव देखकर दोनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला। पुलिस कई पहलुओं से कर रही जांच पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि राघवेंद्र ने फंदा क्यों लगाया। साथ ही रिकॉर्ड रूम में आग कैसे लगी, यह हादसा था या किसी ने जानबूझकर आग लगाई, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

भागवत कथा के दौरान लाठी-डंडों से हमला, VIDEO:धारदार हथियारों से वार किए, ढाई साल की बच्ची समेत 16 लोग घायल हुए

अलवर जिले में श्रीश्री 1008 महाराज हरचंददास आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं पर हमले का मामला सामने आया है। कथा सुन रहे लोगों पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से वार किए। घटना में 16 लोग घायल हुए हैं। घटना बुधवार शाम करीब साढ़े 5 बजे लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के तिलकपुर गांव की है। लक्ष्मणगढ़ थाना एसएचओ नेकी राम ने बताया कि तिलकपुर गांव के श्रीश्री 1008 महाराज हरचंददास आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। काफी लोग कथा सुन रहे थे। इस दौरान 12-14 लोग लाठी-डंडे लेकर पहुंचे। उन्होंने आते ही कथा सुन रहे लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। लाठी-डंडों के हमले में 16 लोग घायल हुए हैं। जिनका लक्ष्मणगढ़ के अस्पताल में इलाज कराया गया। वहीं पीड़ित पक्ष ने पुलिस को काडू पुत्र भिक्कन, रोहिताश पुत्र भिक्कन, राजेश पुत्र भिदरमल, योगेश पुत्र गुजरमल, रविता पत्नी गुजरमल, ममता, रेशम बाई पत्नी गुजरमल, कमली देवी, रामपति, जगदीश मुंशी, देवी सिंह मुंशी, लक्की पुत्र हुकम गुर्जर, सतीश पुत्र धारा के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़ित पक्ष ने रिपोर्ट में मारपीट, जातिसूचक शब्दों से अपमानित, गाली-गलौज और धार्मिक आयोजन आयोजन में बाधा पहुंचाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं आरोप लगाया कि आरोप है कि कथा स्थल पर लगे माइक, मंडप और मंदिर के सामान को भी नुकसान पहुंचाया गया है। पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है। देखें घटना से जुड़ी PHOTOS… घटना के वीडियो भी सामने आए धार्मिक आयोजन में हमले के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें 12-14 महिला-पुरुष लाठी-डंडों के साथ कथा स्थल पर मौजूद लोगों पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पथराव भी नजर आ रहा है। घटना से वहां अफरा-तफरी मच गई। हमले में विनोद कुमार पुत्र पांचाराम, बीरबल पुत्र गोवर्धन को ज्यादा चोट आई है। वहीं नरेश, रोहिता, रमेश, सीताराम, जयसिंह, रामकिशन, मनोहर, मधु (ढाई साल की बच्ची), मिथलेश, रंजिता, हरिसिंह, मनीषा तथा अन्य श्रद्धालु शामिल घायल हुए हैं। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है और वायरल वीडियो सहित सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।

जैसलमेर रेलखंड पर ब्लॉक, आज चार ट्रेनें रहेंगी प्रभावित:दो ट्रेनें री-शड्यूल और दो मार्ग में रेगुलेट होंगी, साढ़े चार घंटे की देरी से खुलेगी जैसलमेर-लालगढ़

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के राईका बाग-जैसलमेर रेलखंड पर गुरुवार को होने वाले तकनीकी कार्य के कारण चार प्रमुख रेलसेवाएं प्रभावित रहेंगी। फलौदी-मारवाड़ बीठड़ी स्टेशनों के बीच ट्रैक और सिग्नलिंग से जुड़े जरूरी कार्य के लिए 25 जून को विशेष ब्लॉक लिया जा रहा है। इसके चलते दो ट्रेनों को रीशड्यूल किया गया है, जबकि दो अन्य ट्रेनों को रास्ते में रोककर संचालित किया जाएगा। इससे जैसलमेर से आने-जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फलौदी-मारवाड़ बीठड़ी के बीच होगा तकनीकी कार्य उत्तर पश्चिम रेलवे, जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने बताया कि राईका बाग-जैसलमेर रेलखंड पर फलौदी-मारवाड़ बीठड़ी स्टेशनों के बीच ट्रैक और सिग्नलिंग से जुड़े जरूरी तकनीकी कार्य किए जाएंगे। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने गुरुवार को ट्रैफिक ब्लॉक लिया है। ब्लॉक के कारण इस रूट पर चलने वाली चार प्रमुख ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ेगा। जैसलमेर-लालगढ़ ट्रेन साढ़े चार घंटे देरी से चलेगी रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 14703 जैसलमेर-लालगढ़ रेलसेवा गुरुवार को अपने निर्धारित समय पर रवाना नहीं होगी। इस ट्रेन को करीब 4 घंटे 30 मिनट की देरी से रीशड्यूल किया गया है। वहीं गाड़ी संख्या 74844 भगत की कोठी-जैसलमेर रेलसेवा भी अपने निर्धारित समय से 2 घंटे देरी से रवाना होगी। इसके कारण यह ट्रेन जैसलमेर स्टेशन पर भी तय समय से देर से पहुंचेगी। दो एक्सप्रेस ट्रेनों को रास्ते में रोका जाएगा गाड़ी संख्या 20491 जैसलमेर-साबरमती रेलसेवा को जैसलमेर से मारवाड़ बीठड़ी खंड के बीच विभिन्न स्टेशनों पर करीब 30 मिनट तक रोककर चलाया जाएगा। इसी तरह गाड़ी संख्या 20486 साबरमती-जैसलमेर रेलसेवा को जोधपुर से फलौदी खंड के बीच करीब 1 घंटे तक नियंत्रित गति से संचालित किया जाएगा। इसके चलते यह ट्रेन भी जैसलमेर स्टेशन पर देरी से पहुंचेगी। यात्रियों और पर्यटकों को हो सकती है परेशानी रेलवे प्रशासन का कहना है कि तकनीकी कार्य यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। हालांकि ट्रेनों के समय में बदलाव के कारण जैसलमेर से यात्रा करने वाले स्थानीय यात्रियों और स्वर्ण नगरी आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे ने यात्रियों से स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का अपडेट जांचने की अपील की है।

ऑपरेशन में लापरवाही, हॉस्पिटल-डॉक्टर पर 20 लाख का जुर्माना:पेट दर्द के बाद कराया था भर्ती, 1 लाख मानसिक पीड़ा के देने होंगे

जालोर उपभोक्ता आयोग ने भीनमाल के एक निजी हॉस्पिटल और संबंधित डॉक्टर को चिकित्सा लापरवाही का दोषी मानते हुए मृतका के पति को 20 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने हॉस्पिटल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने मामले में सेवा में कमी और मेडिकल नेग्लिजेंस मानते हुए यह फैसला सुनाया। पेट दर्द के बाद कराया था भर्ती कलापुरा निवासी दूजाराम ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी लीलूदेवी को पेट दर्द की शिकायत होने पर 14 अगस्त 2023 को भीनमाल स्थित नाहर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टर ने आंतों में सूजन होने की बात कही और महिला का ऑपरेशन किया। दूसरी सर्जरी के बाद बिगड़ती गई हालत शिकायत के अनुसार ऑपरेशन के कुछ दिन बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके चलते 21 अगस्त को महिला की दोबारा सर्जरी करनी पड़ी। परिजनों ने आरोप लगाया कि दूसरी सर्जरी के बाद महिला के शरीर में संक्रमण फैल गया और उसकी आंतें पेट से बाहर आने लगीं। महिला को करीब 10 दिन तक आईसीयू में रखा गया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उदयपुर और अहमदाबाद में भी चला इलाज महिला की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे आगे के इलाज के लिए पहले उदयपुर और बाद में अहमदाबाद लेकर गए। इलाज के दौरान 17 सितंबर 2023 को महिला की मौत हो गई। आयोग ने माना मेडिकल नेग्लिजेंस उपभोक्ता आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध डाक्यूमेंट्स, उपचार संबंधी अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि हॉस्पिटल और डॉक्टर की ओर से चिकित्सा सेवा में गंभीर लापरवाही बरती गई। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी और मेडिकल नेग्लिजेंस माना। 1 लाख मानसिक पीड़ा के लिए देने के आदेश आयोग ने हॉस्पिटल, संबंधित डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मृतका के पति को 20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 1 लाख रुपए मानसिक पीड़ा के लिए और 10 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आयोग ने उपभोक्ता कल्याण कोष में 1.50 लाख रुपए जमा कराने के भी निर्देश दिए हैं।

उदयपुर के फतहपुरा एरिया में बीती देर नहीं आई बिजली:डेढ़ घंटे तक लाइट नहीं आने पर लोगों ने किया हंगामा, शिकायत केन्द्र पहुंचे तो ताला लगा मिला

उदयपुर के फतहपुरा एरिया में बीती देर रात बिजली गुल होने से क्षेत्रवासियों ने जोरदार हंगामा किया। गुस्साए लोग फतहपुरा चौराहा स्थित बिजली विभाग के शिकायत केन्द्र पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। इससे लोग और आक्रोशित हो गए। इसके बाद क्षेत्रवासी मधुबन स्थित एईएन आफिस पहुंचे तो वहां भी गार्ड के अलावा कोई नहीं मिला। क्षेत्रवासी लोकेश शर्मा ने बताया कि रात 11 बजे बिजली बंद हुई। हम शिकायत केन्द्र पर पहुंचे तो शिकायत लिखने वाला कोई नहीं था। इसके बाद एईएन और जेईएन को फोन लगाए गए लेकिन उन्होंने अटेंड नहीं किए। भीषण गर्मी में नींद के समय खासकर बच्चे और बुजुर्ग परेशान होते रहे लेकिन विभाग में सुनने वाला कोई था। बिजली रात करीब 12:30 बजे आई, तब लोगों ने राहत की सांस ली। बिजली गुल होने पर कोई सुनने वाला नहीं: वशिष्ट क्षेत्रवासी और जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता सौरभ वशिष्ट ने बताया कि बिना घोषणा के बिजली ​बंद करना बिजली विभाग की हरकतों में आ गया है। इनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। रोजाना कभी भी कटौती कर दी जाती है। बिजली गुल होने पर सुनने वाला कोई नहीं क्षेत्रवासी रामकिशन पालीवाल ने बताया कि अगर हमने बिजली का बिल समय पर नहीं भरा तो ये तुरंत कनेक्शन काटने आ जाते हैं और सबके सामने इज्जत उतारते हैं। अब इनकी इज्जत कौन उतारेगा। बिजली बंद होने पर इनके अधिकारी-कर्मचारी फोन नहीं उठाते और हम गमी में परेशान होते हैं।

NCERT ने सिलेबस में 1975-1977 इमरजेंसी सेक्शन शामिल:कक्षा 9वीं को पढ़ाया जाएगा; NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव

NCERT यानी नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 की इमरजेंसी को शामिल किया है। नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि कक्षा 9 की किताब में पहली बार इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब देश ने हाल ही में इमरजेंसी लागू होने के 50 साल पूरे होने को याद किया है। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर …………………… यह खबर भी पढ़ें… मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…

यूट्यूब विज्ञापन दिखाकर 72 लाख ठगे:फर्जी ट्रेडिंग-आईपीओ ऐप में पत्नी-पिता के खातों से कराया निवेश; रुपए लेकर नंबर किए बंद

चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी क्षेत्र के एक व्यक्ति के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां यूट्यूब पर दिखे एक निवेश विज्ञापन से शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे लाखों की ठगी में बदल गई। ठगों ने पहले नामी कंपनी का भरोसा दिया, फिर व्हाट्सऐप ग्रुप और मोबाइल ऐप के जरिए निवेश का ऐसा जाल बुना कि पीड़ित और उसके परिवार के खातों से करीब 72 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब तक उसे ठगी का अहसास हुआ, तब तक ऐप का बैलेंस शून्य हो चुका था और संपर्क में रहने वाले सभी नंबर बंद हो गए। पीड़ित ने साइबर थाने में मामला दर्ज करवाया है। यूट्यूब के विज्ञापन से शुरू हुई पूरी कहानी पीड़ित गोपाल लाल शर्मा निवासी पहुंना, तहसील राशमी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मार्च 2026 में वह मोबाइल पर यूट्यूब देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें शेयर ट्रेडिंग और नए आईपीओ में निवेश से अच्छा मुनाफा दिलाने का एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन आईआईएफएल कैपिटल सर्विस लिमिटेड के नाम से था। उस पर क्लिक करने के बाद वह व्हाट्सऐप पर पहुंच गए, जहां उनसे बातचीत करने वाले लोगों ने खुद को कंपनी से जुड़ा बताया। आरोपियों ने कहा कि उनकी कंपनी के जरिए ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश करने पर 5 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा फायदा मिल सकता है। भरोसा दिलाने के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म, कंपनी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और एक डायरेक्टर के साइन वाला कागज भी भेजा गया। इससे गोपाल लाल शर्मा को लगा कि वह किसी फर्जी गिरोह नहीं, बल्कि असली निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। व्हाट्सऐप ग्रुप, ऐप और स्क्रीनशॉट के सहारे बढ़ता गया भरोसा शिकायत के अनुसार 2 अप्रैल को उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप जॉइन करने का लिंक भेजा गया। ग्रुप में लगातार शेयर बाजार, ट्रेडिंग और आईपीओ से जुड़ी बातें डाली जाती थीं। इसी दौरान एक लिंक भेजकर मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड करवाया गया और उसमें रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके बाद कहा गया कि निवेश की रकम कुछ बैंक खातों में जमा करनी होगी और उसका स्क्रीनशॉट ग्रुप में भेजना होगा। गोपाल ने सबसे पहले 25 हजार रुपए जमा किए। उनके मुताबिक, रकम भेजने के कुछ ही समय बाद उतनी राशि ऐप में दिखाई देने लगी। इससे उन्हें भरोसा हो गया कि पैसा सुरक्षित है और निवेश सही जगह पर जा रहा है। यही भरोसा आगे चलकर सबसे बड़ा जाल बन गया। दो महीने में अपने, पत्नी और पिता के खातों से भेज दी 71.97 लाख की रकम रिपोर्ट में गोपाल लाल शर्मा ने बताया कि 2 अप्रैल से 3 जून के बीच उन्होंने कई बार अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। यह पैसा केवल उनके अपने खातों से ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी चंद्रकला शर्मा और पिता देवीलाल शर्मा के खातों से भी भेजा गया। शिकायत के अनुसार एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और फेडरल बैंक समेत कई खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए 55 पैसे आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में जमा कराए गए। हर बार रकम भेजने के बाद उसका स्क्रीनशॉट व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजा जाता था और उतनी राशि ऐप में दिखने लगती थी। इतना ही नहीं, ऐप में बाद में करीब 26.31 लाख रुपए का मुनाफा भी दिखाया गया, जिससे पीड़ित को लगा कि निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है। रकम निकालने की कोशिश की तो खुला खेल, बैलेंस हुआ शून्य मामला तब खुला जब गोपाल लाल शर्मा ने ऐप से अपनी रकम निकालने के लिए विदड्रॉल की रिक्वेस्ट डाली। उनके मुताबिक, रकम वापस नहीं आई। कुछ समय बाद ऐप खोलने पर संदिग्ध फिशिंग की चेतावनी दिखाई देने लगी और फिर ऐप में पूरा बैलेंस शून्य रुपए दिखने लगा। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सऐप पर संपर्क करने वाली टीना मल्होत्रा और ग्रुप एडमिन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके नंबर बंद मिले। शक होने पर जब उन्होंने आईआईएफएल कंपनी से संपर्क किया तो वहां से बताया गया कि कंपनी में इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। इसके बाद उन्हें साफ हो गया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। पुलिस से रकम वापसी और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पीड़ित ने इस मामले की शिकायत साइबर पोर्टल पर भी दर्ज कराई है और पुलिस से पूरे मामले की जांच कर रकम वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपियों ने नामी कंपनी का नाम, फर्जी ऐप, व्हाट्सऐप नंबर और निवेश ग्रुप का इस्तेमाल कर योजनाबद्ध तरीके से उन्हें झांसे में लिया। पहले छोटे निवेश से भरोसा जीता गया, फिर लगातार रकम जमा कराई गई और आखिर में पूरा नेटवर्क बंद कर दिया गया।

हाईवे पर दो फॉर्च्यूनर सहित तीन कारें आमने-सामने भिड़ी:बड़ा हादसा टला; तीनों वाहनों में 8 जने सवार थे, सभी सुरक्षित

बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में नेशनल हाईवे पर कि​तासर के पास बुधवार रात को तीन वाहनों में जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में तीनों वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई है। तीनों वाहनों में आठ जने सवार थे और सभी सुरक्षित हैं। ए​क के बाद एक भिड़ती गई कारें हाईवे पर एक आई-20 कार और फॉर्च्यूनर की आमने-सामने टक्कर हो गई थी। टक्कर इतनी तेज थी कि फॉर्च्यूनर संभल पाती, उससे पहले पीछे से आ रही एक अन्य कार भी उससे जा टकराई। देखते ही देखते तीनों वाहन हादसे की चपेट में आ गए। फॉर्च्यूनर में सवार तीन जने सालासर में बालाजी के दर्शन करके वापस लौट रहे थे। हादसे के दौरान वाहनों में सवार लोगों को मामूली चोटें आईं, लेकिन कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। तीनों वाहनों में आठ जने सवार थे और सभी सुरक्षित हैं। कुछ देर प्रभावित रहा यातायात हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और हाईवे पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तथा क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क किनारे करवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू कराया। बड़ा हादसा टला प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर के बाद वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी सवार सुरक्षित बाहर निकल आए। इससे एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

किश्त बकाया बताकर युवकों ने हाईवे पर बस रोकी:कार लगाकर यात्रियों को बीच हाइवे उतारा, हाथापाई का आरोप

दौसा में जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे-21 पर गुरुवार को उस समय यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, जब कार सवार तीन युवकों ने बीच रास्ते एक प्राइवेट बस को रुकवा लिया। युवकों ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए बस की किश्तें बकाया होने की बात कही और बस को अपने कब्जे में ले लिया। घटना सदर थाना क्षेत्र के कांदोली गांव के पास हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। कार लगाकर बीच रास्ते रुकवाई बस जानकारी के अनुसार यूपी के फर्रुखाबाद से जयपुर जा रही एक प्राइवेट बस को कांदोली गांव के पास कार सवार तीन युवकों ने रोक लिया। आरोप है कि युवकों ने फिल्मी अंदाज में बस के आगे कार लगाकर उसे रुकवाया। तीनों युवकों ने खुद को बैंककर्मी बताते हुए कहा कि बस की ईएमआई की किश्तें बकाया हैं। इसके बाद उन्होंने बस को अपने कब्जे में ले लिया। ड्राइवर से चाबी छीनी, यात्रियों को उतारा आरोप है कि युवकों ने बस ड्राइवर से चाबी छीन ली और बस में सवार यात्रियों को जबरन नीचे उतार दिया। इस दौरान बस स्टॉफ और युवकों के बीच कहासुनी और हाथापाई भी हुई। घटना के दौरान यात्रियों ने विरोध जताते हुए हंगामा किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और बस को खड़ा करवा दिया गया। महिलाएं और बच्चे हुए परेशान बस रुकने के बाद यात्री सड़क किनारे खड़े रहे। इस दौरान कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ परेशान नजर आईं। यात्रियों ने पुलिस से उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने की मांग की। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस विवाद की सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ड्राइवर व कंडक्टर से मामले की जानकारी ली। इसके बाद पुलिस उस परिसर में भी पहुंची, जहां बस को खड़ा किया गया था। वहां पुलिस ने फाइनेंस रिकवरी से जुड़े लोगों से भी जानकारी ली। पुलिस कर रही कानूनी पहलुओं की जांच ड्यूटी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि रिकवरी करने वाले लोग बस की दो किश्तें बकाया होने का दावा कर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने बस को रोका है। उन्होंने बताया कि पुलिस दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले की जानकारी जुटा रही है और समझाइश के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बस में सवार यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। फिलहाल पुलिस मामले के कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है।