ऑपरेशन में लापरवाही, हॉस्पिटल-डॉक्टर पर 20 लाख का जुर्माना:पेट दर्द के बाद कराया था भर्ती, 1 लाख मानसिक पीड़ा के देने होंगे
जालोर उपभोक्ता आयोग ने भीनमाल के एक निजी हॉस्पिटल और संबंधित डॉक्टर को चिकित्सा लापरवाही का दोषी मानते हुए मृतका के पति को 20 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने हॉस्पिटल, डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 45 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने मामले में सेवा में कमी और मेडिकल नेग्लिजेंस मानते हुए यह फैसला सुनाया। पेट दर्द के बाद कराया था भर्ती कलापुरा निवासी दूजाराम ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी लीलूदेवी को पेट दर्द की शिकायत होने पर 14 अगस्त 2023 को भीनमाल स्थित नाहर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टर ने आंतों में सूजन होने की बात कही और महिला का ऑपरेशन किया। दूसरी सर्जरी के बाद बिगड़ती गई हालत शिकायत के अनुसार ऑपरेशन के कुछ दिन बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके चलते 21 अगस्त को महिला की दोबारा सर्जरी करनी पड़ी। परिजनों ने आरोप लगाया कि दूसरी सर्जरी के बाद महिला के शरीर में संक्रमण फैल गया और उसकी आंतें पेट से बाहर आने लगीं। महिला को करीब 10 दिन तक आईसीयू में रखा गया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उदयपुर और अहमदाबाद में भी चला इलाज महिला की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे आगे के इलाज के लिए पहले उदयपुर और बाद में अहमदाबाद लेकर गए। इलाज के दौरान 17 सितंबर 2023 को महिला की मौत हो गई। आयोग ने माना मेडिकल नेग्लिजेंस उपभोक्ता आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध डाक्यूमेंट्स, उपचार संबंधी अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि हॉस्पिटल और डॉक्टर की ओर से चिकित्सा सेवा में गंभीर लापरवाही बरती गई। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी और मेडिकल नेग्लिजेंस माना। 1 लाख मानसिक पीड़ा के लिए देने के आदेश आयोग ने हॉस्पिटल, संबंधित डॉक्टर और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मृतका के पति को 20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 1 लाख रुपए मानसिक पीड़ा के लिए और 10 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आयोग ने उपभोक्ता कल्याण कोष में 1.50 लाख रुपए जमा कराने के भी निर्देश दिए हैं।

