ये क्रांतिकारी 'भगत सिंह' कौन है भाई:दीया कुमारी को किसने कहा 'उप-प्रधानमंत्री'; मरीज तड़पता रहा, धक्का देकर स्टार्ट हुई एंबुलेंस

नमस्कार नरेश मीणा के लिए कांग्रेस सांसद हरीश चंद्र मीणा ने समाज के लोगों को कहा- नया ‘बाप’ मत बनाओ। जयपुर में डिप्टी सीएम दीया कुमारी को MLA गोपाल शर्मा ने ‘उप-प्रधानमंत्री’ कह दिया। बूंदी में एंबुलेंस को धक्का लगाना पड़ा और पेड़ काटा तो महिला बोली- बर्बाद हो जाओगे। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘नरेश मीणा को नया बाप मत बनाओ’ पानी वाला आंदोलन चल रहा है। बांध से पानी निकले या न निकले, किस्से जरूर निकल रहे हैं। कांग्रेस सांसद हरीश चंद्र मीणा समाज को संबोधित करने पहुंच गए। मंच से बोले- दो-चार क्रांतिकारी भगत सिंह घूम रहे हैं। ये पानी के लिए नहीं आते। ये किसी और के दूत हैं। हर जगह जिताने-हराने का ठेका लेते हैं। आपको बरगलाते हैं। आपकी खाते हैं, किसी और की बजाते हैं। आपके गांव आपके बाप-दादाओं के हैं। अब तो गांव-गांव में बोर्ड लगा दिए। नया ‘बाप’ मत बनाओ। हरीश चंद्र मीणा जी के बयान का असर हुआ। कुछ उत्साही युवा नरेश मीणा के नाम लिखे बोर्ड ढूंढने निकल पड़े। रात के अंधेरे में ही बोर्ड को हिला-हिलाकर आड़ा पटक दिया। उधर, नरेश मीणा ने बारां में खाद की जंग जीती है। झोली फैलाकर किसानों के लिए खाद मांगा था। सुना है खाद की रैक रवाना करने का एलान हो गया है। मौका मिलते ही नरेश मीणा ने समाज के नेताओं पर भी भड़ास निकाली। पलटवार करते बोले- उनको पानी नहीं चाहिए। वे राजनीति कर रहे हैं। राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। 2. धक्का-स्टार्ट ‘एंबुलेंस’ एक तस्वीर हजार शब्द बयान कर देती है। बूंदी में एक एंबुलेंस ने पूरे हेल्थ सिस्टम को मजाक बना दिया। बूंदी से मरीज को कोटा के लिए रेफर किया गया। मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर एंबुलेंस के हवाले कर दिया गया। अटेंडेंट चढ़ गए। टायरों का हवा-पानी चेक किया गया। टंकी के तेल की माप जोख ले ली गई। ड्राइवर एंबुलेंस पर चढ़ा और चाबी घुमाई। घर्र-घर्र करके एंबुलेंस बंद। खूब मशक्कत के बाद भी टस से मस नहीं हुई। अब आप हाल के बारे में सोचिए। मरीज तड़प रहा है। जो लोग अब तक मरीज के लिए दुआ कर रहे थे, वे अब एंबुलेंस स्टार्ट होने की मन्नत मांगने लगे। मंत्रीजी का वो बयान याद आ गया- बीमार आई थी या नाचती हुई आई थी? एंबुलेंस भी बीमार नहीं है। इसे नचाने के लिए अटेंडेंट समेत 5 लोगों को लगना पड़ा। मशक्कत के बाद एंबुलेंस नाचने लगी। मन्नत पूरी हुई। मरीज के अटेंडेंट ने पसीना पोंछते हुए कहा- सरकारी एंबुलेंस फ्री है, लेकिन भरोसे की नहीं। अगली बार प्राइवेट गाड़ी ही करेंगे। धक्का तो नहीं लगाना पड़ेगा। 3. डिप्टी CM को बोल गए उप-प्रधानमंत्री कभी-कभी जुबान फिसल जाती है। इधर डिप्टी सीएम साहिबा पर जुबान मेहरबान है। जिसकी भी फिसलती है बड़े ओहदे की सौगात दे जाती है। जयपुर में सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा मंच पर थे। डिप्टी सीएम साहिबा कार्यक्रम में मौजूद थीं। हड़बड़ी में शर्मा जी डिप्टी सीएम दीया कुमारी को ‘उप प्रधानमंत्री’ कह गए। फिर तुरंत करेक्शन कर लिया। फिसली जुबान का बचाव करने के लिए बोले- अभी तक मुंह से जो बोला वो गलत नहीं गया। बाकी कोई भरोसा नहीं, भगवान कब किस पर कृपा बरसा दे। इसे कहते हैं जबरदस्त डैमेज कंट्रोल। भगवान की तो कृपा है ही। लेकिन बड़े मुखियाजी चाहें तो सब कुछ मुमकिन है। 4. चलते-चलते.. जयपुर के पॉश इलाके में कॉम्प्लैक्स बन रहा है। विकास की राह में पीपल का 80 बरस का पेड़ बाधा बन रहा था। पेड़ की न कोई जाति, न धर्म। वह न टोपी पहनता है और न पटका। वह न इस गुट का, न उस गुट का। तना छीलो तो भगवा निकलता है और पत्ते हरे। उसकी छाया के लिए अभी आरक्षण की व्यवस्था नहीं। चारों तरफ विकास का नारा लग रहा है। नारों के सामने टिकने की उसकी बिसात कहां? रामनिवास बाग में चंदन तक को काटने वालों ने औकात दिखा दी थी। पीपल किस खेत की मूली? लिहाजा रात के अंधेरे में गुपचुप तरीके से हरे-भरे पेड़ पर आरी चलाकर विकास की राह सुगम कर दी गई। किसी शहीद की तरह पेड़ का ‘शव’ सुबह ट्रक पर रखा गया। अंतिम यात्रा निकलने ही वाली थी कि एक महिला की आत्मा तड़प उठी। उसने संत की तरह श्राप देने के अंदाज में कहा- बिल्डिंग बनाकर दिखाना। इतना हरा-भरा पेड़ काटा, वो भी पीपल का। देखना बर्बाद हो जाओगे। इनपुट सहयोग- मुकेश नागर (बूंदी)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

लकवा-स्पाइनल इंजरी के मरीजों को रोबोट करा रहा एक्सरसाइज:जयपुर के SMS अस्पताल में शुरुआत, तय मानकों के अनुसार जितने चाहो, उतने मूवमेंट

बीमारी की वजह से खुद एक्सरसाइज न कर पाने वाले मरीजों को रोबोट एक्सरसाइज करा रहा है। इसके लिए सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल के रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से रोबोटिक फिजियोथेरेपी की शुरुआत हो चुकी है। दावा किया जा रहा है कि यह फिजियोथेरेपी पैरालाइसिस, स्पाइनल इंजरी, ब्रेन इंजरी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है। इसकी खास बात यह है कि एक बार तय एक्सरसाइज का कमांड देने के बाद जितने चाहो उतने मूवमेंट कराए जा सकते हैं। पढ़िए यह खास रिपोर्ट… एक्सपट्‌र्स का कहना है कि पैरालाइसिस, स्पाइनल इंजरी, ब्रेन इंजरी जैसी बीमारियों में फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा मरीजों को लगातार एक्सरसाइज कराना चुनौती भरा होता है। लकवा या स्पाइनल इंजरी के मरीजों को रोजाना एक्सरसाइज कराना जरूरी होता है, ताकि शरीर का मूवमेंट बना रहे। वे रिकवर कर सकें। इसके लिए रोबोटिक फिजियोथैरेपी गेम चेंजर साबित हो रही है। रोबोट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रोग्रामिंग क्षमता है। फिजियोथेरेपिस्ट को केवल एक बार मरीज की स्थिति और आवश्यकता के अनुसार डेटा सेट करनी पड़ती है। इसके बाद यह मशीन खुद-ब-खुद तय मानकों के अनुसार मरीज को एक्सरसाइज कराती है। मशीन यह सुनिश्चित करती है कि हर मूवमेंट बिल्कुल सटीक हो। इससे मरीज की रिकवरी तेज गति से होती है। रोबोट के जरिए एक्सरसाइज कर रहे मरीज मनोज ने बताया कि छत से नीचे गिरने के बाद हाथ और पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। अब रोबोट के जरिए एक्सरसाइज कराने से कुछ फायदा हो रहा है। हाथ–पैर में धीरे धीरे मूवमेंट होने लगी है। चुनौती : मरीजों के हिसाब से 1 रोबोट नाकाफी रीजनल रिहैबिलिटेशन सेंटर की ओपीडी में रोजाना 300-350 मरीज आते हैं, जबकि आईपीडी में 60 मरीज होते हैं। एक मरीज की थेरेपी में करीब 45 मिनट लगते हैं। जिस अनुपात में मरीज आते हैं, उस हिसाब से तो सिर्फ 1 रोबोट नाकाफी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ये शुरुआत है, भविष्य में और बढ़ाए जा सकते हैं। रोबोट से किस मरीज की थेरेपी होगी, यह डॉक्टर तय करते हैं। आसानी से कराई जा सकती है एक्सरसाइज : डॉ. जोशी SMS हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी बताते हैं- रोबोट से अपर और लोवर लिम्ब की एक्सरसाइज बड़ी आसानी से कराई जा सकती है। इससे उन मरीजों को फायदा होगा, जो बिल्कुल भी मूवमेंट नहीं कर सकते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि एक सामान्य इंसान जिसे कोई काम करना है तो सबसे पहले ब्रेन एक्टिव होता है। फिर बॉडी तय करती है कि कौन-कौन सी मांसपेशियां इसमें काम करेंगी। फिर पूरे कॉर्डिनेशन के साथ बॉडी रेस्पॉन्ड करती है। किसी को स्ट्रोक, ब्रेन इंजरी या कोई अन्य गंभीर बीमारी होती है तो ये कॉर्डिनेशन बिगड़ जाता है। ऐसे मामलों में लगातार मूवमेंट से ये कॉर्डिनेशन रोबोट के जरिए हो सकेगा। इससे न सिर्फ मांसपेशियों में सुधार हो सकता है बल्कि मांसपेशियों और ब्रेन का कॉर्डिनेशन भी बेहतर हो सकता है। रोबोट मरीज के मूवमेंट पर बारीकी से नजर रखता है और जरूरत के अनुसार उसे नियंत्रित करता है।

जयपुर में युवक ने की सुसाइड की कोशिश:भाई से नाराज होकर ब्लेड से कलाई काटी, लहूलुहान हालत में सड़क पर पड़ा मिला

जयपुर में एक युवक के सुसाइड करने की कोशिश करने का मामला सामने आया है। वह रोड पर लहूलुहान हालत में बुधवार दोपहर पड़ा मिला। हरमाड़ा थाना पुलिस ने SMS हॉस्पिटल के ट्रोमा में गंभीर हालत में एडमिट करवाया। पुलिस जांच में सामने आया है भाई से नाराज होकर उसने ब्लेड से अपनी कलाई काट ली थी। पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। SHO (हरमाड़ा) उदय सिंह यादव ने बताया- दोपहर करीब 2:15 बजे कंट्रोल रूम से सूचना मिली। लोहा मंडी रोड पर एक लड़का लहूलुहान हालत में पड़ा है। सूचना पर पहुंची पुलिस को युवक सड़क पर पड़ा मिला। जिसकी कलाई से खून बह रहा था। सवाई माधोपुर का रहने वाला है युवक पुलिस ने तुरंत उसे SMS हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में एडमिट करवाया। जांच में सामने आया कि घायल युवक सूरज बैरवा (30) पुत्र मोहन बैरवा निवासी खांडरा चितारा सवाई माधोपुर का रहने वाला है। वह वर्तमान में लोहा मंडी रोड पर रह रहा है। बेहोश होकर सड़क पर गिरा सूरज ने अपने भाई राजू को कुछ समय पहले 5 हजार रुपए उधार दिए थे। बुधवार दोपहर उधार दिए रुपए वापस लेने उसके कमरे पर गया था। भाई के रुपए देने से मना करने पर वह नाराज हो गया। आवेश में आकर उसने ब्लेड से अपने बाएं हाथ पर वार कर लिया, जिससे काफी खून बहने से वह बेहोश हो गया और रोड पर गिर गया। पुलिस जांच में पता चला है कि वह शराब के नशे में था। पुलिस को घटनास्थल पर कलाई काटने में यूज ब्लेड भी मिली है।

जयपुर से गायब चार मासूम उत्तर प्रदेश में मिले:बच्चों के पिता के साथ पुलिस कुशीनगर रवाना, बुधवार को बिना बताए निकले थे घर से

जयपुर के मुहाना इलाके से एक ही परिवार के लापता 4 बच्चे उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में मिले हैं। चारों बच्चे ट्रेन में बैठकर सुल्तानपुर पहुंच गए थे। बच्चे गुल्लक तोड़कर उसमें से 500-700 रुपए निकालकर ले गए थे। पुलिस को मिले इनपुट के अनुसार रोडवेज बस से अयोध्या जाने के दौरान पुलिस ने बस ड्राइवर से कॉन्टैक्ट किया और बच्चों को सुरक्षित वहीं के रहने वाले रिश्तेदार के सुपुर्द करवा दिया। पुलिस की एक टीम को पिता के साथ बच्चों को लेकर गुरुवार सुबह अयोध्या रवाना कर दिया गया है। दरअसल, जयपुर के मुहाना इलाके से एक ही परिवार के चार मासूम बुधवार दोपहर घर से गायब हो गए। चारों नाबालिग बहन-भाई ट्यूशन से लौटकर बिना बताए घर से निकल गए। शहर में लगे अलग-अलग CCTV फुटेजों के आधार पर पुलिस लापता बच्चों की तलाश की लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा। SHO (मुहाना) गुर भूपेंद्र ने बताया कि था मुहाना इलाके में रहने वाली 13 साल की लड़की, उसकी 9 साल की बहन और चचेरे भाई की 11 साल की बेटी व 8 साल का बेटा लापता हुए हैं। ट्यूशन से लौटने के बाद दोपहर करीब 2 बजे चारों नाबालिग भाई-बहन बिना बताए घर से निकले थे। देर शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने रिश्तेदारों के साथ मिलकर ढूंढ़ा। काफी तलाश के बाद भी चारों भाई-बहनों का पता नहीं चल सका। CCTV में नजर आए चारों पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेजों को खंगाला। फुटेजों में चारों बच्चे एक साथ मालपुरा गेट की ओर जाते दिखाई दिए। एक फुटेज में वे चूड़ी शॉप पर रुककर चूड़ियां देखते नजर आए, जबकि, दूसरी फुटेज में बच्चे एक ई-रिक्शा के पास खड़े दिखाई दिए। पुलिस उस क्षेत्र के ई-रिक्शा चालकों से पूछताछ की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल वहीं बच्चों के गायब होने से उनका रो-रोकर बुरा हाल गया। लेकिन जैसे ही बच्चों के उत्तर प्रदेश मिलने की जानकारी हुई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब परिवार के लोग बच्चों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

राजस्थान के 25 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी:जयपुर, सीकर, भरतपुर, नागौर में 1 इंच तक बरसात हुई; श्रीगंगानगर सबसे ज्यादा गर्म रहा

राजस्थान के 25 जिलों में आज (गुरुवार) भी आंधी और बारिश की चेतावनी (अलर्ट) जारी की गई है। उधर, देश में मानसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही प्री-मानसून की अच्छी बारिश हो रही है। बुधवार (24 जून) को भरतपुर, जयपुर, नागौर, सीकर और श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में 1 इंच या उससे ज्यादा बरसात हुई। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई, जहां का अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर संभाग के जिलों में हल्के बादल छाने के साथ ही उमस का भी असर रहा। राजस्थान के मौसम से जुड़ी PHOTOS.. ये जिले रहे सबसे ज्यादा गर्म गर्मी-बारिश के बड़े अपडेट्स श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा गर्मी रही पिछले 24 घंटों के दौरान जहां उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में उमस के साथ बारिश का दौर चला, वहीं पश्चिमी जिलों में तेज गर्मी रही। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई, जहां का अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा फलोदी में अधिकतम तापमान 42, जैसलमेर में 40.7, बीकानेर में 40.4, बाड़मेर में 40.3, चित्तौड़गढ़ में 40.2, पाली में 39.3, जोधपुर व दौसा में 39.2 और जालोर-हनुमानगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन जिलों में हुई बारिश भरतपुर के कामां में 40 एमएम, पहाड़ी में 15, डीग में 8 एमएम; बीकानेर के लूणकरणसर में 13, श्रीडूंगरगढ़ में 21, जसरासर में 9 एमएम; नागौर के लाडनूं में 47, परबतसर में 6 एमएम; अजमेर के केकड़ी में 11, सावर में 16 एमएम; हनुमानगढ़ के डबलीराठन में 36, गोलूवाला में 7, भादरा में 8 एमएम; सीकर के रींगस में 31, पलसाना में 5 एमएम और श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान में 26, पदमपुर में 20 व केसरीसिंहपुर में 11 एमएम बरसात हुई। इन जिलों के अलावा झुंझुनूं, अलवर, बारां, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ के कुछ इलाकों में भी देर शाम बादल छाने के बाद हल्की बारिश और बूंदाबांदी दर्ज की गई। आगे कैसा रहेगा मौसम… राजस्थान के बड़े शहरों में मौसम का हाल… जयपुर: राजधानी में बुधवार को दिनभर उमस भरा मौसम रहा। सुबह हल्की बारिश के बाद दोपहर में हल्के बादल छाए रहे। ग्रामीण इलाकों में बादल छाने के साथ कुछ जगहों पर अच्छी बारिश दर्ज की गई। जयपुर के चौमूं में 25 एमएम (1 इंच) और जमवारामगढ़ में 20 एमएम बारिश हुई। जिले का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोधपुर: बुधवार सुबह हल्के बादल छाए रहे, लेकिन इससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत नहीं मिली। जिले का अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बादलों की आवाजाही के साथ तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। उदयपुर: लेकसिटी में बुधवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से ही तेज धूप रही, जिससे लोग गर्मी से परेशान नजर आए। तेज गर्मी के चलते शहर की प्रसिद्ध फतह सागर झील में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। अलवर: बुधवार सुबह से दोपहर करीब 1 बजे तक घने बादल छाए रहे, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। इस दौरान जिले में कहीं भी बारिश नहीं हुई। यहां अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताते हुए बादल छाने, तेज हवा चलने और कहीं-कहीं आंधी आने का येलो अलर्ट जारी किया है। कोटा: कोचिंग सिटी में बुधवार को अधिकतम तापमान 38.8, जबकि न्यूनतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस रहा। दिनभर तेज गर्मी और उमस का असर बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में जिले में बारिश की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिल सकेगी। अजमेर: बुधवार को गर्मी और उमस का मिला-जुला असर देखने को मिला। जिले का अधिकतम तापमान 37.9 और न्यूनतम तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और उमस के कारण लोग परेशान रहे। सुबह और देर शाम मौसम थोड़ा राहत भरा रहा। सीकर: बुधवार सुबह से ही जिलेभर में बादल छाए रहे और कई इलाकों में तेज बारिश भी हुई। इससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में भी जिलेभर में बारिश की संभावना बनी हुई है। सीकर का अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

लखनऊ अग्निकांड- एक-दूसरे का हाथ पकड़े मिलीं लाशें:अंदर विजिबिलिटी जीरो, टॉर्च काम नहीं कर रही थी; रेस्क्यू करने वालों की जुबानी

‘पूरी बिल्डिंग में धुआं भरा था। पिछली दीवार और खिड़कियां तोड़ी गईं। ब्रीदिंग ऑपरेटस (ऑक्सीजन मास्क) लगाकर रस्सी के सहारे सेकेंड फ्लोर पर पहुंचा गया। धुएं की वजह से विजिबिलिटी जीरो थी। टॉर्च की रोशनी भी काम नहीं कर रही थी। अंदाजे से आगे बढ़ा जा रहा था। भीतर जाकर शीशे तोड़े गए। इससे बिल्डिंग से धुआं बाहर निकलना शुरू हुआ। इसके बाद हेड हॉपर स्टूडियो के अंदर पहुंचे। कई बार ऐसा हुआ कि किसी व्यक्ति के शरीर से पैर टकराने के बाद पता चला कि वहां कोई पड़ा है। अंदर केबिन और वॉशरूम में एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए लाशें पड़ी थीं। किसी का सिर एक तरफ और शरीर दूसरी तरफ झुका था। एक युवक ने मुंह पर हाथ रखा था। शरीर दीवार के सहारे टिका था। इससे लग रहा था कि धुएं से बचने के लिए उसने नाक-मुंह ढंकने की कोशिश की, लेकिन बच नहीं सका।’ यह भयावह मंजर लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे अफसरों और फायरकर्मियों ने बयां किया। भास्कर रिपोर्टर ने रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे अफसरों, फायरकर्मियों और पुलिसकर्मियों से बातचीत की। पूरे रेस्क्यू के दौरान क्या चुनौतियां आईं? अंदर की क्या कहानियां हैं? इस बारे में उन्होंने जो कुछ बताया, उन्हीं की जुबानी जानिए… पहले रेस्क्यू करने वाले फायर फाइटर्स की 3 तस्वीरें… अब पढ़िए फायर फाइटर्स क्या बता रहे हैं… केस-1- सीढ़ियों के पास एसी की आउटडोर यूनिट लगी थीं, सामने से नहीं जा पाई टीम घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले मड़ियांव थाने में तैनात सिपाही ने बताया- सीढ़ियों के बगल में बने संकरे हिस्से में एसी की 8-10 आउटडोर यूनिट लगी थीं। वहीं पर बाइक और स्कूटी भी खड़ी थी, जो पूरी तरह जल गईं। इससे आग और धुआं तेजी से फैला। निकासी का रास्ता और संकरा हो गया। बिल्डिंग में अंदर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। सामने से आग बुझाई जा रही थी। बिल्डिंग के अन्य हिस्सों में न तो कोई खिड़की थी और न ही कोई ऐसी जगह, जहां से अंदर पहुंचा जा सके। ऐसे में कुछ फायरकर्मी पड़ोस की बिल्डिंग पर सीढ़ी लगाकर किसी तरह से छत पर पहुंचे। सोचा कि ऊपर से किसी तरह अंदर जाया जाए। लेकिन, छत की सीढ़ियों पर लगे गेट में मजबूत ताला लगा था। ऊपर से उसे तोड़ा नहीं जा सका। इसके बाद दीवार तोड़ने का फैसला लिया गया। केस 2- 9 इंच मोटी दीवार तोड़ने में समय लगा जिस रास्ते से डेड बॉडी निकाली गईं, उस दीवार को तोड़ने वाले फायरमैन से हमने बात की। उसने बताया- बिल्डिंग की पिछली दीवार तोड़कर अंदर जाना ज्यादा आसान लगा। इसी वजह से उसे तोड़ा गया। लेकिन, दीवार 9 इंच मोटी थी और उस पर प्लास्टर भी किया गया था। दीवार बेहद मजबूत थी। दीवार तोड़ने के लिए ड्रिल मशीन मंगाई गई। लेकिन बिजली नहीं आने से उसका इस्तेमाल नहीं हो सका। ऐसे में मड़ियांव थाने में तैनात सिपाही मयंक ने भारी हथौड़े से दीवार तोड़ने का फैसला लिया। मयंक बताते हैं- उस समय यही लग रहा था कि अब दीवार तोड़कर ही लोगों तक पहुंचा जा सकता है। मशीन का इंतजार करने का समय नहीं था। इसलिए मैंने हथौड़े से लगातार वार शुरू किए। आखिरकार दीवार टूट गई। दीवार टूटते ही फायरकर्मियों को अंदर जाने का रास्ता मिल गया। केस 3- पहली बार अंदर कदम रखा तो विजिबिलिटी जीरो थी सबसे पहले अंदर घुसने वाले फायरमैन ने बताया- हम जब पहली बार अंदर गए, तो सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। विजिबिलिटी जीरो थी। टॉर्च की रोशनी भी धुएं की वजह से बेअसर हो रही थी। हम अंदाजे से पैर रखते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई बार ऐसा हुआ कि हमें किसी व्यक्ति के शरीर से पैर टकराने के बाद पता चला कि वहां कोई पड़ा है। घने धुएं और जटिल संरचना के कारण फायरकर्मियों ने एक-दूसरे को रस्सियों से जोड़ा हुआ था। एक अधिकारी ने बताया कि हम लगातार संपर्क में थे। डर था कि कहीं कोई जवान रास्ता भटक न जाए। इसलिए रस्सियों के सहारे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। केस 4- पूरे हॉल को केबिन में बांटा, लोग अलग-अलग पॉकेट में मिले डेडबॉडी निकालने वाले एक फायरमैन ने बताया- दूसरी मंजिल को ब्लॉक और केबिन सिस्टम में बांटा गया था। कांच के पार्टीशन की वजह से धुआं अलग-अलग हिस्सों में भर गया था। जब हम लोग अंदर पहुंचे, तो हर केबिन में शव मिले। किसी का शव दरवाजे के पास पड़ा था, तो किसी का केबिन में था। कई बॉडी आपस में सटी थीं। उनके हाथ आपस में टच कर रहे थे। मानो हाथ पकड़े हों। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई फिल्मी सीन हो। एक युवक का शव दीवार के सहारे बैठी अवस्था में मिला। उसने अपने हाथ से मुंह ढक रखा था। वॉशरूम में भी युवक का शव मिला। केस 5- अगर खिड़कियां और एग्जॉस्ट होते, तो मौतें कम होतीं रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड करने वाले पुलिस अफसर ने बताते हैं- अगर बिल्डिंग में पर्याप्त खिड़कियां, एग्जॉस्ट सिस्टम या वेंटिलेशन की व्यवस्था होती, तो शायद धुआं बाहर निकल जाता। इतने लोगों की जान नहीं जाती। पूरी बिल्डिंग सामने के हिस्से को छोड़कर लगभग बंद थी। कहीं कोई खिड़की नहीं थी। इसी कारण अंदर धुआं भरता चला गया और हम लोग भी अंदर प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। अब रेस्क्यू टीम के बारे में जानिए 105 फायर फाइटर्स ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन ————————– ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में एलन-ग्रेविटी जैसी 16 बड़ी कोचिंग सील, छात्र बोले- मन में डर बैठा; सरकार ने PMO को भेजी अग्निकांड की रिपोर्ट लखनऊ की अवैध इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक हुई पूरे मामले की कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट PMO को भेजी गई। बुधवार को विकास प्राधिकरण (LDA) और फायर डिपार्टमेंट की टीम ने 16 कोचिंग और लाइब्रेरी सील कर दीं। पढ़िए पूरी खबर…

सिंधी समाज बोला-चंपत राय को दी थी 200 किलो चांदी:राम मंदिर में लगनी थीं शिलाएं, रसीद अब तक नहीं मिली; 'काकभुशुंडि' भी गायब

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में रोज नए आरोप लग रहे हैं। अब मुंबई के विश्व सिंधी सेवा संगम ने आरोप लगाया है कि 200 किलो चांदी दान करने की रसीद आज तक नहीं मिली। न ही ये बताया गया कि चांदी का इस्तेमाल कहां हुआ? इसके अलावा एक महिला ने काकभुशुंडि (कौवे के रूप में एक ऋषि) की चांदी की मूर्ति दान करने की रसीद नहीं देने के आरोप लगाए हैं। दोनों ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के हाथ में दान की चांदी सौंपी थी। उधर, परिसर में बने शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में 23 जून (मंगलवार) को चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव सक्रिय दिखाई दिए। इसके बाद चर्चा तेज हो गई है कि चढ़ावा चोरी मामले में तीनों को क्लीनचिट मिलने वाली है। पढ़िए ये रिपोर्ट… 15 देशों से 200 सिंधियों ने दान की थीं चांदी की शिलाएं विश्व सिंधी सेवा संगम के चेयरमैन डॉ. राजू मनवानी ने दैनिक भास्कर से बताया- मंदिर निर्माण के समय पूरी दुनिया चंदा दे रही थी। सिंधी समाज ने भी 20-25 किलो चांदी दान करने का तय किया। लेकिन, 15 से ज्यादा देशों में रह रहे सिंधी समाज के 200 लोग एक-एक किलो चांदी की शिला देने के लिए तैयार हो गए। 200 किलो चांदी की शिला इकट्ठी करने के बाद हमने चंपत राय से संपर्क किया। उन्होंने शिलाएं लेकर हमें अयोध्या बुलाया। समाज के 200 लोग 26 जनवरी, 2021 को शिलाओं के साथ अयोध्या पहुंचे। शिलाओं के पूजन के बाद उन्हें चंपत राय के हवाले किया गया। डॉ. राजू मनवानी ने बताया- सभी शिलाओं पर भगवान झूलेलाल और दूसरे देवताओं के चित्र थे। चंपत राय ने कहा कि शिलाओं की शुद्धता जांचने के बाद रसीद भिजवा दी जाएगी। यह भी आश्वासन दिया था कि शिलाओं का कहां उपयोग होगा, हमें बताया जाएगा। आज पांच साल हो चुके हैं, लेकिन ट्रस्ट की ओर से कोई रसीद नहीं दी गई। न कभी किसी का फोन आया और न ही हमारे फोन पर कोई रिस्पांस मिला। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद मेरे पास समाज के कई लोगों के फोन आ चुके हैं। वे जानना चाहते हैं कि दान की गई 200 किलो चांदी का इस्तेमाल कहां हुआ है। चांदी के काकभुशुंडि की मूर्ति भी गायब अनीता भारद्वाज नाम की एक महिला ने भी चांदी दान की रसीद न देने के आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि उसने काकभुशुंडि की चांदी की मूर्ति कारसेवकपुरम में चंपत राय को दी थी। उनसे आग्रह किया था कि राम दरबार में इसे जगह दी जाए। चंपत राय ने कहा था कि अंदर कैमरा मना है। फोटो और रसीद बाद में भेज देंगे। इसके बाद अनीता ने चंपत राय को कई बार चिट्ठी लिखकर रसीद मांगी, लेकिन आज तक नहीं मिली। उस मूर्ति के बारे में भी उन्हें कुछ नहीं बताया गया। राम मंदिर परिसर में कैद हैं 5 संदिग्ध चढ़ावा चोरी मामले में शुरुआती जांच ट्रस्ट की से ही की गई थी। दावा किया जा रहा है कि ट्रस्ट ने 13 जून तक कई कर्मियों के घर और बताए गए ठिकानों से करीब 2 करोड़ रुपए और जेवर आदि जब्त किए हैं। इसके बाद से ही संदिग्ध अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश, करुणेश और मनीष यादव को मंदिर परिसर में ही रखा गया है। इनके मोबाइल भी जब्त कर लिए गए हैं। SIT भी इनसे पूछताछ कर चुकी है। महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रह चुके रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को भी परिसर में रखा गया है। हालांकि, उसे परिसर में कहीं भी आने-जाने की छूट है। वह मोबाइल का भी इस्तेमाल कर रहा है। जबकि, अभी तक टिन्नू को चढ़ावा चोरी मामले का सबसे बड़ा चेहरा बताया जा रहा है। उसके घर से जेवर की बरामदगी की बात भी सामने आई है। मंदिर व्यवस्थापक पहले की तरह मंदिर परिसर में रह रहे हैं। चंपत राय भी मंदिर में ही रह रहे हैं। पहले वे कारसेवकपुरम स्थित विहिप कार्यालय में रहते थे। डॉ. अनिल मिश्रा अपने घर से आ-जा रहे हैं। तीनों ट्रस्टियों को क्लीन चिट मिलने के आसार चढ़ावा चोरी मामले में महासचिव चंपत राय, गणना प्रभारी व ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल और पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा दावा कर चुके हैं कि चढ़ावा चोरी और मंदिर निर्माण सामग्री की खरीद में 40% कमीशन की जानकारी चंपत राय को भी थी। दोनों पूर्व कर्मियों ने उन्हें इस बारे में बताया था। लेकिन, इस पर रोक लगाने के बजाय दोनों कर्मियों को मंदिर के काम से हटा दिया गया। मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा मंदिर को दान किए गए द्वादश ज्योर्तिलिंग हार और चरण पादुका की रसीद न देने का आरोप चंपत राय पर लगा चुके हैं। SIT अनिल विश्वकर्मा और गुरु आचार्य विनोद मिश्रा का बयान भी दर्ज कर चुकी है। इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन भी चंपत राय पर 60 किलो चांदी की शिलाओं को लेकर सवाल उठा चुका है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने हालिया अयोध्या दौरे में चंपत राय समेत तीनों लोगों को कार्यक्रम से दूर रखा था। हालांकि, तीनों लोग 23 जून (मंगलवार) को शेषावतार मंदिर के धर्मध्वजारोहण कार्यक्रम में सक्रिय दिखे। चंपत राय ने कार्यक्रम की अगुआई करते हुए संबोधन तक किया। इसके बाद से दावा किया जा रहा है कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट में तीनों को क्लीन चिट दे दी गई है। —————————————— राम मंदिर से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें-

राम मंदिर चढ़ावे की गिनती में 3 बड़े बदलाव:चंपत राय अब फैसले नहीं ले रहे; चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट PMO को भेजी अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में हुई हेर-फेर की जांच अब आखिरी मोड़ पर पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच पूरी कर ली है। SIT चीफ विजय विश्वास पंत की अगुआई में रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। पढ़ें पूरी खबर