दौसा में एक्सप्रेस-वे पर बस-ट्रेलर अग्निकांड,DNA से मृतकों की पहचान:6 शव परिजनों को सौंपे, दो बॉडी पहले सुपुर्द कर दी थी, 8 लोगों की हुई थी मौत

दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस और ट्रेलर की भिड़ंत के बाद हुए भीषण अग्निकांड में जिंदा जलकर जान गंवाने वाले छह लोगों के शवों की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद गुरुवार शाम पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए गए। हादसे में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें छह यात्री आग में जिंदा जल गए थे, जबकि दो अन्य की सिर में चोट लगने से मौत हुई थी। इन मृतकों के लिए भेजे गए थे DNA सैंपल हादसे में भूमि भौर निवासी बजरंग नगर (इंदौर), प्रियंका पांडे निवासी बड़वाह, दीपक तंवर निवासी बड़वाह (जिला खरगौन, मध्य प्रदेश) और निर्मला गुप्ता निवासी अन्नपूर्णा नगर (इंदौर) के शवों के डीएनए सैंपल बुधवार शाम जांच के लिए भेजे गए थे। जयपुर से रिपोर्ट आने के बाद शवों की पहचान हुई और पोस्टमॉर्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। ड्राइवर और एक अन्य मृतक की रिपोर्ट भी आई देवेंद्र सिंह निवासी रामपुरा कलां, सिद्धगंज (मध्य प्रदेश) तथा बस चालक रामअवतार के डीएनए सैंपल गुरुवार सुबह जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों शवों का भी पोस्टमॉर्टम कराया गया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। दो शव पहले ही परिजनों को सौंप दिए गए थे सिर में चोट लगने से जान गंवाने वाले बस परिचालक कुलदीप का पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं धर्मसिंह निवासी भूतेड़ी, जिला झाबुआ (मध्य प्रदेश) का शव बुधवार शाम को ही परिजनों के हवाले कर दिया गया था। 22 घायलों को भी पहुंचाया गया था अस्पताल मंगलवार देर रात हुए इस भीषण हादसे के बाद पुलिस ने आठों मृतकों के शव और 22 घायलों को एंबुलेंस के जरिए दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया था। आग में शव बुरी तरह झुलस जाने से उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी थी, जिसके बाद डीएनए जांच कराई गई। रिपोर्ट आने के बाद सभी शवों की शिनाख्त कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। — ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे दौसा बस-अग्निकांड: ‘मेरी आंखों के सामने पत्नी जल गई साहब’:किसी ने मदद नहीं की; पैसेंजर बोलीं- मालूम नहीं पति कहां गिरे, लोग सीटों में फंसे थे बस में लोगों का मांस तक जल गया, हड्डियां बची:पैर पकड़कर पति को ढूंढने की गुहार लगाती रही पत्नी; देखिए दौसा बस अग्निकांड की तस्वीरें

पेंशन के लिए तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर पहुंचीं माताजी:जलदाय मंत्री ने 'अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया'; किसान से 'आतंकी' जैसा सुलूक

नमस्कार, जालोर में पेंशन के लिए 82 साल की माताजी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। टोंक में शिक्षा मंत्री ने जलदाय मंत्री की तारीफ अनोखे शब्दों में की और बाड़मेर में किसान को उसी की जमीन से बाहर निकलने की हुक्म दे दिया गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पेंशन के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी जी ने जो बात इश्क के लिए कही थी, वही बात सरकारी स्कीम से जोड़कर भी कही जा सकती है। जैसे- ये पेंशन नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे, एक आग का रस्ता है और रेंग कर जाना है। बात मजाक की नहीं, जालोर की कोकू देवी पर बीती है। उनकी उम्र 80 पार। आंखों से दिखता नहीं। हालत ये कि खड़े होकर चल नहीं सकतीं। बैठकर रेंग सकती हैं। 5 साल पहले उनकी 1000 रुपए की पेंशन बंद हो गई। फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे थे। जमीन पर हाथ रखकर सरकने की स्थिति के कारण रेखाएं घिस गई। कई बार गुहार लगाई, लेकिन काम नहीं बना। थक-हार कर कोकू देवी भीषण गर्मी में दोपहर को तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर रेंगती हुईं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। प्रेमचंद वाली ‘बूढी काकी’ भी यह दृश्य देखती तो उनकी भूख मर जाती। कलेक्टर साहब को पता चला तो चेंबर से बाहर आए और खड़े रहकर कोकू देवी का काम कराया। 2. जलदाय मंत्री ने अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया जलदाय मंत्री कन्हैया लाल ने दो महीने पहले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था- हालात इतने नाजुक हैं कि भ्रष्ट अफसरों की जांच करने लगे तो मेरा पूरा विभाग ही खाली हो जाएगा। जलदाय मंत्री होने के नाते उन्हें पता है कि कौन कितने पानी में है। उन्होंने भ्रष्ट अफसरों को सख्त चेतावनी भी दी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी ने जलदाय मंत्री की तारीफ कुछ अलग अंदाज में की। टोंक में समाज की एक सभा के दौरान दिलावर बोले- ये कन्हैया लाल कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। इन्होंने अच्छे अच्छों को पानी पिलाया है। चाहे कोई दादा हो, परदादा हो। या कोई नेता हो। सबको अच्छा पानी पिलाया है। इनके सामने कोई टिकता नहीं। अब मंत्रीजी का तो काम ही है पानी पिलाना। पानी पिलाते रहना चाहिए और अपनी ही आस्तीनों को झाड़ते रहना चाहिए। इससे इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार नहीं पनपता। 3. चलते-चलते.. पूर्व मंत्रीजी ने एक सभा में कहा था- एक दिन आएगा जब कलेक्टर का बेटा कहेगा कि बड़ा होकर मैं किसान बनूंगा। 100 प्रतिशत सही बात है। संभव है कि आने वाले समय में कलेक्टर का बेटा ही किसान बने। मंत्री का बेटा किसान बने। विधायक का बेटा किसान बने। अफसर का बेटा किसान बने। किसान बनकर सब्सिडी लेने में आसानी रहती है। बड़े प्रोजेक्ट मिल जाते हैं। खेत पैसा उगाने के कारखाने बन जाते हैं। सरकारी स्कीम में जल्दी नंबर आ जाता है। और भी हजार फायदे हैं। किसान का बेटा अगर किसान बनेगा तो उसे यूरिया के कट्‌टे के लिए लाठी खानी पड़ेगी। कृषि कनेक्शन के लिए चप्पल घिसनी पड़ेगी। फसल के मुआवजे के लिए गिरदावरों-पटवारियों को घूस खिलानी पड़ेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। बाड़मेर के बीसूकलां गांव में सीताराम की ढाणी है। किसान गोरख दान अपने खेत पर पहुंचा तो खाकी वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों ने दूर से ही उसे हड़काया। बोले- अरे ओ, बाहर निकलो यहां से। कई सुरक्षाकर्मी गोरख दान को घेरने पहुंच गए। जैसे वह बॉर्डर लांघ कर घुस आया हो। प्राइवेट कंपनी गोरख दान के खेत को काम में ले रही थी लेकिन मुआवजा नहीं दे रही थी। गोरख दान खेत का मालिक होने के बावजूद हाथ जोड़कर बोला- साहब, मैं आपसे यही निवेदन करने आया हूं कि आप मेरे खेत में काम मत करवाओ। इनपुट सहयोग- भरत सांखला (जालोर), महावीर बैरवा (टोंक), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल है विक्रम-1, जल्द लॉन्चिंग संभव:स्काईरूट फाउंडर पवन बोले- अंतरिक्ष तक तेजी से पहुंचने वाला AI-6जी, स्पेस इकोनॉमी में आगे होगा

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ अब लॉन्च के लिए तैयार है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त तक की लॉन्च विंडो घोषित की है। यह भारत की प्राइवेट स्पेस क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा है। इसकी सफलता से छोटे उपग्रहों को जरूरत के मुताबिक और ज्यादा तेजी से अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा। इससे खेती, संचार, नेविगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी सेवाएं और मजबूत होंगी। अगर विक्रम-1 सफल रहता है तो भारत निजी क्षेत्र के दम पर ऑर्बिट तक पहुंचने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। विक्रम-1 की लॉन्चिंग से पहले स्काईरूट एयरोस्पेस के फाउंडर पवन कुमार चंदाना ने भास्कर से बातचीत की। उन्हीं के शब्दों में पढ़ें पूरा इंटरव्यू… लेकिन उससे पहले देखें विक्रम-1 की झलक… स्पेस से पूरी हो रहीं रोजमर्रा की जरूरतें अगर आप फोन पर मैप्स चलाते हैं या डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो उसके पीछे भी अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट काम कर रहे होते हैं। मैप्स आपकी सटीक लोकेशन सैटेलाइट से मिले नेविगेशन सिग्नल के आधार पर बताते हैं, जबकि यूपीआई जैसी सेवाएं इंटरनेट और संचार नेटवर्क पर चलती हैं, जिन्हें दूरदराज के इलाकों में सैटेलाइट भी मजबूती देते हैं। सैटेलाइट बढ़ेंगे तो हर क्षेत्र में सुविधाएं भी बढ़ेंगी अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट नेटवर्क के साथ लॉन्च की मांग भी कई गुना बढ़ेगी। अभी भारत में ज्यादातर सैटेलाइट इसरो लॉन्च करता है। लेकिन आने वाले सालों में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ध्यान देगा। स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां छोटे सैटेलाइट को बार-बार और जरूरत के मुताबिक कक्षा में पहुंचाने का काम करेंगी। इससे मौसम, इंटरनेट, खेती, आपदा प्रबंधन और संचार जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा तेज और सटीक हो सकेंगी। स्पेसएक्स से अलग, ‘कैब मॉडल’ पर स्काईरूट स्काईरूट की तुलना स्पेसएक्स से होती है, लेकिन दोनों का मॉडल अलग है। इसे ट्रेन और कैब से समझ सकते हैं। ट्रेन तय समय पर तय स्टेशन तक ही ले जाती है। लेकिन अगर आपको किसी खास समय पर किसी खास जगह पहुंचना हो, तो कैब बेहतर विकल्प है। स्पेस में भी यही फर्क है। स्पेसएक्स का रॉकेट ट्रेन की तरह तय कक्षा में सैटेलाइट छोड़ता है, जबकि विक्रम-1 ‘कैब’ की तरह जरूरत के मुताबिक मनचाही कक्षा में सैटेलाइट पहुंचा सकेगा। अब ऐसे ‘ऑन-डिमांड लॉन्च’ की मांग तेजी से बढ़ेगी। भारत स्पेसएक्स वाले मोड पर, अब तेजी से सीखने की जरूरत भारत आज उसी दौर में है, जहां करीब 15-20 साल पहले अमेरिका था। उस समय स्पेसएक्स और रॉकेट लैब जैसी कंपनियों ने लगातार परीक्षण कर अपनी लॉन्च क्षमता विकसित की थी। रॉकेट साइंस में सबसे बड़ा सबक है कि तकनीक सिर्फ जमीन पर नहीं, उड़ान के दौरान सीखने से विकसित होती है। इसलिए बार-बार टेस्ट, तेजी से सुधार और फिर लॉन्च का सिलसिला ही आगे बढ़ने का रास्ता है। इसरो बड़े मिशन करेगा, निजी कंपनियां बढ़ाएंगी लॉन्च की रफ्तार भारत का स्पेस मॉडल अब बदल रहा है। इसरो ने छह दशक में जो तकनीकी आधार तैयार किया है, अब वही निजी कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। आने वाले समय में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ज्यादा ध्यान देगा, जबकि स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां लगातार और कम लागत में सैटेलाइट लॉन्च करने का काम संभालेंगी। यही मॉडल दुनिया के विकसित स्पेस देशों में अपनाया जाता है। समस्या सैटेलाइट बनाने की नहीं, समय पर लॉन्च कराने की है दुनिया में छोटे सैटेलाइट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचाने की क्षमता उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। यही वजह है कि कई ऑपरेटरों को लॉन्च के लिए महीनों, कई बार सालों तक इंतजार करना पड़ता है। स्काईरूट का फोकस इसी समस्या को हल करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तय समय में लॉन्च उपलब्ध कराया जा सके। आने वाले समय में स्पेस सामान्य सुविधा बन जाएगा अगले 10-15 साल में अंतरिक्ष लोगों को किसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सामान्य सुविधा के रूप में दिखाई देगा। समुद्र में मछुआरों की कनेक्टिविटी, बाढ़ की समय रहते चेतावनी, बेहतर मौसम पूर्वानुमान, एआई के लिए डेटा और गांवों तक इंटरनेट (6जी) जैसी कई सेवाएं सामान्य होंगी, लेकिन इनके पीछे अंतरिक्ष में काम कर रहे सैटेलाइट होंगे। बदलती स्पेस टेक्नोलॉजी का नया चेहरा हैं छोटे सैटेलाइट स्काईरूट और फाउंडर से जुड़ी खास बातें… स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट स्पेस कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट बना रही है। यह भारत की पहली निजी कंपनी है जिसने सफलतापूर्वक एक रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किया। स्काईरूट की स्थापना 2018 में हैदराबाद में हुई थी। फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नगा भारत डाका हैं। दोनों पहले ISRO में वैज्ञानिक और इंजीनियर रह चुके हैं। 18 नवंबर 2022 को स्काईरूट ने विक्रम-S का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन का नाम ‘प्रारंभ’ था। यह भारत के प्राइवेट स्पेस जोन के इतिहास का पहला सफल रॉकेट लॉन्च था। कंपनी विक्रम-1 के अलावा विक्रम-2 और विक्रम-3 ऑर्बिटल बना रही है। इनका नाम विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। भास्कर नॉलेज… दुनिया में प्राइवेट स्पेस क्षेत्र की शुरुआत को नई ऊंचाई स्पेस X जैसी कंपनियों ने दी। भारत में 2020 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला गया, जिसके बाद स्काईरूट, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल और बेलास्ट्रिक्स एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप तेजी से उभरे। इससे भारत ग्लोबल न्यू स्पेस इकोनॉमी में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा में भारी बारिश, सड़कें जाम, गाड़ियां फंसीं:डूंगरपुर में बिजली गिरने से बच्चे की मौत, बीसलपुर बांध में 2CM बढ़ा पानी

लेट आया मानसून राजस्थान में जमकर बरस रहा। राजधानी जयपुर में गुरुवार रात तेज बारिश हुई। चित्तौड़गढ़ जिले 12 घंटे में ढाई इंच तक पानी बरसा है। जिले के निंबाहेड़ा और कपासन में भारी बारिश से हालत बिगड़ गए हैं। बांसवाड़ा शहर में शुक्रवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश के बाद कई इलाकों में पानी भर गया है। टोंक में भी बारिश हुई। यहां चांदसेन रेन गेज सेंटर पर 24 घंटे में 64 MM बारिश दर्ज की गई। बीसलपुर बांध के कैचमेंट एरिया में बारिश से बांध में 24 घंटे में 2 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। सुबह 6 बजे तक बांध का जलस्तर 313.57 आरएल मीटर पहुंच गया। मौसम विभाग ने कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, जैसलमेर को छोड़कर पूरे राजस्थान में यलो अलर्ट है। राज्य में अगले दो सप्ताह बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण दिन के तापमान में 4 डिग्री तक की गिरावट हुई है। इससे पहले गुरुवार को 16 से ज्यादा जिलों में 2 इंच तक बरसात हुई। तेज बारिश के बीच डूंगरपुर में बिजली गिरने से दो नाबालिग भाई झुलस गए। इनमें एक भाई की इलाज के दौरान मौत हो गई। बारिश से जुड़े बड़े अपडेट्स शहरी इलाकों में पानी भरा, रास्ते जाम, बिजली गिरी: तेज बारिश के कारण चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद के शहर इलाकों में सड़कों पर पानी जमा हो गया है। इन जिलों के कई गांव भी पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हो रही है। चित्तौड़गढ़ की कपासन और निंबाहेड़ा तहसील में रातभर हुई बारिश के कारण कई रास्ते जाम हो गए हैं। गाड़ियां फंसने से लोग परेशान हो रहे हैं। वहीं, डूंगरपुर में गुरुवार शाम को बिजली गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। पहले ही दिन 2 इंच से ज्यादा बरसात: गुरुवार को एंट्री करने के बाद मानसून का असर जोरदार रहा। पहले दिन ही अलवर, झुंझुनूं, सीकर, उदयपुर, भरतपुर, करौली, अजमेर के कई इलाकों में दो इंच से ज्यादा बरसात हुई है। झालावाड़, बारां में तेज बारिश हुई। वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है तथा अगले चार दिन में यह पूरे राजस्थान को कवर कर लेगा। लगातार बारिश से तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट हुई है। मानसून की एंट्री तेज बारिश के साथ: दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, कोटा, बारां समेत 13 जिलों के कुछ हिस्सों तक पहुंचा है। पिछले 13 वर्षों में यह तीसरी बार है, जब मानसून ने जुलाई में प्रदेश में प्रवेश किया है। इससे पहले वर्ष 2014 और 2019 में भी मानसून ने जुलाई में प्रदेश में प्रवेश किया था। हालांकि, जुलाई में एंट्री के बावजूद वर्ष 2014 में 518.6 मिमी और वर्ष 2019 में 747.24 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। अब देखिए- राजस्थान में बारिश की PHOTOS… मानसून की पल-पल की अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

पंजाब में 3 बच्चों की हत्या कर मां का सुसाइड:पहले खाने में जहर दिया, फिर गला घोंटा, उसके बाद खुद पंखे से लटक गई

पंजाब के मानसा में मां ने 3 बच्चों की हत्या कर खुद भी सुसाइड कर लिया। उसने पहले 2 बेटियों और एक बेटे को जहर दिया। वह जिंदा न बच सकें, इसके लिए उनका गला भी घोट दिया। इसके बाद खुद भी घर के कमरे में लगे फंदे से लटक गई। बच्चों के पिता की पहले मौत हो चुकी है। जिस वक्त उसने यह वारदात की, वह घर पर अकेली थी। उसकी सास रिश्तेदारी में गई हुई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत वहां पहुंची। जिसके बाद चारों डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भिजवाईं। पुलिस इसकी वजह की जांच के लिए परिजनों के बयान दर्ज कर रही है। किराए के कमरे में रहती, पति की मौत हो चुकी
पुलिस के मुताबिक संदीप कौर (35) मानसा के वार्ड नंबर 3 में गुरुद्वारे के पास किराए के कमरे में रहती थी। उसके 3 बच्चे कालो (12), मोटो (7) और विश्वास (2) थे। 4 साल पहले बीमारी की वजह से संदीप के पति निक्का सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद घर में वह सास और बच्चों के साथ रहती थी। पति की मौत के बाद मजदूरी करने लगी
पुलिस के मुताबिक पति की मौत के बाद 3 बच्चों और सास की जिम्मेदारी संदीप कौर पर आ गई। वह मजदूरी करने लगी लेकिन उससे इतनी कमाई नहीं होती थी कि पूरे परिवार का पेट पाल सके। तीनों बच्चे बड़े हो रहे थे और उनकी पढ़ाई के खर्च का भी इंतजाम करना था। मजदूरी से यह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो पा रही थी। सास रिश्तेदारी में गई, कुंडी लगा बच्चों को खाने में जहर दिया
पुलिस के मुताबिक गुरूवार दोपहर संदीप अपने तीनों बच्चों के साथ घर पर थी। उसकी सास कहीं रिश्तेदारी में थी। संदीप कौर ने घर का दरवाजा बंद कर अंदर से कुंडी लगा दी। इसके बाद पहले तीनों बच्चों को खाने में जहर दे दिया। जब जहर का असर हुआ तो बच्चे नींद आने की बात कहकर बिस्तर पर लेट गए। बच्चे बेसुध हुए तो एक-एक कर गला घोंट दिया
जहर के असर से बच्चे बेसुध हो गए। संदीप कौर ने खौफनाक तैयारी कर रखी थी। उसने खुद भी सुसाइड करना था लेकिन उसे डर था कि अगर तीनों में से कोई भी बच्चा जिंदा बच गया तो उसकी देखभाल कौन करेगा। इसलिए उसने पहले तीनों बच्चों का एक-एक कर गला घोंट दिया। जिससे तीनों ने दम तोड़ दिया। बच्चों की मौत के बाद खुद भी फंदा लगाया
बच्चों की मौत कन्फर्म होने के बाद संदीप कौर ने चुन्नी से फंदा बनाया। इसे कमरे में लगे पंखे पर टांग दिया। इसके बाद उसे गले में फंसाकर उस पर लटक गई। जिससे उसकी भी मौत हो गई। गुरूवार दोपहर में पूरी वारदात हुई लेकिन आसपड़ोस में किसी को इसके बारे में पता नहीं चला। रिश्तेदार घर पहुंचा तो कुंडी बंद मिली
इसके बाद गुरूवार शाम को एक रिश्तेदार उनके घर आया। वह घर पहुंचा तो दरवाजे को अंदर से कुंडी लगी हुई थी। उसने काफी देर तक कुंडी खटखटाई लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को इकट्‌ठा किया। जिसके बाद दरवाजे को धक्का देकर खोला गया। बिस्तर पर बच्चों की लाश, मां फंदे पर लटक रही थी
जब रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग अंदर गए तो वहां तीनों बच्चों की लाश बिस्तर पर पड़ी थी। वहीं संदीप कौर की लाश फंदे से लटक रही थी। उन्होंने तुरंत बच्चों की सांस चेक की तो तीनों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद संदीप कौर को तुरंत फंदे से नीचे उतारा लेकिन तब तक वह भी दम तोड़ चुकी थी। पुलिस बोली- बच्चों के गले पर निशान मिले
पुलिस के मुताबिक मृतक बच्चों के गले पर निशान मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि उसने पहले बच्चों को कोई जहरीली चीज खिलाकर बेहोश किया। इसके बाद तीनों का गला घोंट दिया। थाना सिटी-2 के जांच अधिकारी कुलवंत सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में आर्थिक तंगी की बात सामने आ रही है, जिससे संदीप कौर मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। आर्थिक तंगी से मानसिक परेशान रहती थी
थाना प्रभारी कुलवंत सिंह ने ये भी कहा कि रिश्तेदारों का कहना है कि संदीप कौर के लिए दिन-रात मजदूरी करके भी घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। 3 बच्चों के साथ बूढ़ी सास की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। इसी वजह से वह काफी परेशान रहती थी।

सांवली थी, इसलिए 10 लड़कों ने रिजेक्ट कर दिया:गोरी-पतली लड़की क्यों चाहते हैं लड़के, खूबसूरती क्या है; मुजफ्फरपुर में लड़की ने किया सुसाइड

मुजफ्फरपुर की 22 साल की अंशु ने सिर्फ इसलिए फंदे पर लटककर जान दे दी, क्योंकि वह सांवली थी। लड़के वाले बार-बार देखने के बाद उससे शादी करने से मना कर दे रहे थे। खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है, सुंदरता आखिर है क्या, कैसे बदलते रहते हैं खूबसूरती के पैमाने; जानेंगे बूझे की नाही में… सवाल-1ः मुजफ्फरपुर में लड़की के सुसाइड करने का पूरा मामला क्या है? जवाबः मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के मकरंदपुर गांव की रहने वाली 22 साल की अंशु कुमारी बीते तीन साल से अंदर ही अंदर परेशान थी। परिवार वाले उसकी शादी के लिए लगातार कोशिशें कर रहे थे। पिछले तीन सालों में 10 से अधिक लड़के वाले अंशु को देखने आए, लेकिन हर बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती या रिश्ता तय ही नहीं हो पाता था। परिवार वालों का कहना है कि लगातार टूटते रिश्तों ने अंशु के मन में यह गहरा विश्वास पैदा कर दिया कि उसके सांवले रंग की वजह से उसे बार-बार ठुकराया जा रहा है। समाज के इस नजरिए ने उसके भीतर एक गहरी हीन भावना पैदा कर दी थी, जिसे वह चुपचाप सह रही थी। परिजनों के मुताबिक, 1 जुलाई को एक बार फिर अंशु को देखने के लिए एक नया परिवार आने वाला था। शायद बार-बार रिजेक्ट होने का डर और समाज के सामने फिर से खुद को साबित करने का दबाव उस पर हावी हो चुका था। अंशु मानसिक रूप से इतनी परेशान थी कि उसने 30 जून की रात का खाना भी नहीं खाया और चुपचाप अपने कमरे में सोने चली गई। सुबह यानी 1 जुलाई को काफी देर तक अंशु के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। परिजनों ने खिड़की से झांककर देखा तो अंशु का शव पंखे से लटका मिला। फिलहाल, पुलिस इस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को दर्ज कर गहराई से जांच कर रही है। सवाल-2ः भारत में खूबसूरती को काले और गोरे से जोड़कर क्यों देखा जाता है? जवाब: हिंदू परंपरा में पुरुषों की सुंदरता का प्रतीक भगवान ‘कृष्ण’ को माना जाता है। वो श्याम वर्ण के थे। वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान राम का रंग भी सांवला था और वो बेहद सुंदर माने जाते हैं। मध्यकाल में भारत आए कई यात्रियों ने भी इस बात को लिखा है। 1292 में भारत आए इतालवी व्यापारी मार्को पोलो ने अपनी किताब ‘द ट्रैवल्स’ में लिखा है- ‘यहां सबसे काले इंसान को सबसे ज्यादा सम्मान मिलता है। ये लोग अपने देवताओं और मूर्तियों को काला और शैतानों को बर्फ की तरह सफेद दिखाते हैं।’ 16वीं शताब्दी के बाद मुगल शासन के दौरान भारत के लोगों में गोरे रंग की ओर आकर्षण बढ़ा। मुगल शासक और उनके दरबार में सेंट्रल एशिया और फारसी मूल के लोग थे, जिनकी त्वचा अपेक्षाकृत गोरी थी। उनकी कला, साहित्य और जीवनशैली ने गोरेपन को शाही और अमीर वर्ग से जोड़ा। यह प्रभाव धीरे-धीरे समाज में फैलने लगा। भारत में ब्रिटिश हुकूमत आई तो उसने काले-गोरे में भयंकर विभाजन शुरू कर दिया। क्योंकि सभी अंग्रेज गोरे थे, इसलिए उन्होंने गोरे रंग को बेहतर बताया और काले रंग को गुलामी, अज्ञानता और हीनता से जोड़ दिया। उनकी देखा-देखी भारत के उच्च वर्ग ने भी इस विचार को अपना लिया, क्योंकि वो अंग्रेजी शासकों के करीब रहना चाहते थे। इस दौरान गोरे रंग को लेकर एक मानसिकता बनी, जो आज भी कायम है। आजादी के बाद यह धारणा और मजबूत हुई। खासकर फिल्म उद्योग और विज्ञापनों के जरिए। 1978 में ‘फेयर एंड लवली’ जैसी क्रीम की शुरुआत ने गोरेपन को बड़ा बिजनेस बना दिया। बॉलीवुड ने भी गोरे कलाकारों को खूबसूरत बताया, जिससे आम लोगों में यह चाहत बढ़ी। ‘द इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंडियन साइकोलॉजी’ ने दिल्ली-NCR में 18 से 30 साल के 100 युवाओं पर स्टडी की। इस रिसर्च में पता चला कि लोग अपने रंग के हिसाब से ही सुंदरता की पसंद तय करते हैं। हालांकि, इसमें गोरे रंग की ओर झुकाव ज्यादा दिखा। सवाल-3: सुंदरता आखिर होती क्या है? जवाबः कहा जाता है कि ‘Beauty lies in the eyes of the beholder’ यानी सुंदरता देखने वाले की आंखों में होती है। सुंदरता की कोई एक परिभाषा नहीं है। दुनिया में सुंदरता से जुड़ी अलग-अलग थ्योरीज हैं। इसमें एक थ्योरी रिप्रोडक्शन यानी प्रजनन की बायोलॉजी से जुड़ी है। विकासवादी जीवविज्ञानी मानते हैं कि कोई महिला या पुरुष बच्चे पैदा करने के लिए प्राकृतिक रूप से जितना सक्षम और उपयोगी है, वो उतनी ही आकर्षक और सुंदर लग सकती है। इसी वजह से महिलाओं में सुंदरता के लिए सुडौल स्तन, लंबे बाल, सुराही जैसी गर्दन, चेहरे की सिमेट्री, बड़ा पेल्विक जैसे पैरामीटर इवॉल्व हुए हैं। इसी तरह पुरुषों में लंबा कद, गठीला शरीर, भारी आवाज, घने काले बाल और चेहरे की सिमेट्री जैसे पैमाने इवॉल्व हुए। इस थ्योरी के मुताबिक… सवाल-4: समय के साथ खूबसूरती के पैमाने कैसे बदलते रहते हैं? जवाब: खूबसूरती के कुछ पैमाने और मानक लगातार बदलते रहते हैं। यह बदलाव समाज के सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के साथ होता रहा है… सवाल-5ः क्या गोरा दिखना ही असल खूबसूरती है। अगर नहीं, तो इस पर बात क्यों नहीं होती? जबावः मगध महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर निधि सिंह का कहना है, ‘हमें ब्यूटी की परिभाषा को बदल देने की जरूरत है। हमें ब्यूटी यानी खूबसूरती की विविधता को समझना चाहिए। उसको उभारना चाहिए। भारत में खूबसूरती का पैमाना कभी भी किसी का कलर नहीं रहा है। यह वेस्टर्न कल्चर का दिया हुआ है। आज इसको बढ़ावा देने में सबसे बड़ा योगदान ब्यूटी प्रोडक्ट्स का है। वे खूबसूरती के झूठे स्टैंडर्ड सेट करते हैं, ताकि उनका प्रोडक्ट आसानी से बिक सके। इसके अलावा इसे बढ़ाने में सोशल मीडिया का योगदान भी है।’ निधि सिंह का मानना है कि गोरी त्वचा को खूबसूरत समझने की सोच इतनी मजबूत और विकसित हो गई है कि इस पर बात या बहस होती ही नहीं। अगर कोई जन्म से गोरा है तो वो पैदाइशी खूबसूरत है, लेकिन अगर कोई जन्म से काला होता है तो उसे खूबसूरत बोलने की बजाय गोरा करने के नुस्खों पर काम शुरू कर दिया जाता है।

स्टूडेंट बनकर पहुंचा रिपोर्टर-₹1 में दरोगा बनाने वाली कोचिंग एक्सपोज:टीचर बोले- ये मार्केटिंग, खान सर की कोचिंग में ₹100 का ऑफर, 10 हजार तक फीस

दो साल पहले दरोगा की तैयारी करने संजय पूर्णिया से पटना आया था। एक रुपए में दरोगा बनाने वाली फैक्ट्री का नाम बहुत सुना था। पटना आते ही वहां एडमिशन ले लिया। 7 दिन पढ़ाई की तो पता चला कि यह तो ट्रायल था, आगे की तैयारी के लिए पैकेज चुनना होगा। 1 रुपए में बस मैप ही पढ़ाया जाएगा। बाद में घर वालों को पूरी कहानी बताई और पैसे मंगाकर स्पेशल पैकेज भी चुन लिया। 2 साल बाद भी संजय दरोगा नहीं बन पाया। संजय कोचिंग के जाल में ऐसा फंसा कि 2 साल बाद भी नहीं निकल पाया..। संजय के साथ बिहार के लाखों स्टूडेंट्स की यही कहानी है। वह हर साल कोचिंग के नाम पर ऑनलाइन और ऑफलाइन पैकेज के जाल में फंसते हैं। एक रुपए से लेकर 200 रुपए फीस में नौकरी का दावा करने वाले कोचिंग सेंटर्स की ये ट्रिक स्टूडेंट्स को फंसाने की है। बिहार में करीब 12 हजार करोड़ रुपए सालाना की कोचिंग इंडस्ट्री है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए 1 रुपए में दरोगा बनाने वाले दावों का काला सच..। पैकेज के नाम पर कोचिंग का धोखा.. खान सर और रौशन आनंद के बीच हुई कोचिंग वर्चस्व की लड़ाई के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पड़ताल के लिए पटना के मुसल्लहपुर हाट पहुंची। ये इलाका बिहार की कोचिंग का हब कहलाता है। हमारी नजर यहां लगे बड़े-बड़े पोस्टर्स पर पड़ी। यहां हर कोई एक रुपए में दरोगा बनाने का दावा कर रहा है। एक रुपए से लेकर 200 रुपए की फीस में सरकारी नौकरी का पैकेज देने वाले रेलवे, SSC, बिहार पुलिस और BPSC जैसी परीक्षाओं को क्वालीफाई कराने का दावा करते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम सबसे पहले मुसल्लहपुर हाट के किसान कोल्ड स्टोरेज कैंपस पहुंची। यहां हम खान ग्लोबल स्टडीज में स्टूडेंट बनकर दाखिल हुए। यहां हमें फाउंडेशन और टारगेट 2 तरह के बैच के बारे में बताया गया। फाउंडेशन में बेसिक से हायर लेवल तक की पढ़ाई होती है, जिसका टाइम ड्यूरेशन 18 महीने का है। टारगेट बैच में सिर्फ रिवीजन करवाया जाता है, जिसकी क्लास 6 महीने तक होती है। इसके अलावा फिजिकल और पॉलिटिकल मैप की भी पढ़ाई कराई जाती है। इसकी फीस 200 रुपए से लेकर 300 रुपए तक है। खान सर की कोचिंग के ऑफिस में बैठे निरंजन से हमारी बातचीत हुई। रिपोर्टर – मुझे क्लास जॉइन करनी है। निरंजन -एक क्लास चल रही है, ये टारगेट बैच है। इसका टाइम ड्यूरेशन 6 महीने का है। इसमें पीटी-मेंस का रिवीजन कराया जाएगा। इसकी फीस 2 हजार रुपए है। रिपोर्टर – मुझे फाउंडेशन बैच जॉइन करनी है। निरंजन – इसमें बेसिक से पढ़ाई कराई जाएगी, इसमें जीके-जीएस खान सर खुद पढ़ाएंगे। इसके साथ साइंस, आर्ट्स, इंटरनेशनल रिलेशन, कंप्यूटर भी खान सर पढ़ाएंगे। बाकी सब्जेक्ट दूसरे टीचर पढ़ाएंगे। क्लास सुबह के 7 बजे से शुरू होगी। शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच की फीस कितनी है? निरंजन – फाउंडेशन बैच के लिए 6 हजार रुपए फीस है, लेकिन अभी ऑफर चल रहा है। ऑफर में एडमिशन लेते हैं तो वन टाइम पेमेंट पर 3 हजार रुपए देने होंगे। इसमें 50% की छूट है। रिपोर्टर – बाकी सब्जेक्ट के लिए जो टीचर हैं, उनकी फीस अलग से जमा करनी होगी या इसी फीस में पढ़ाएंगे। निरंजन -उसके लिए अलग से देना होगा। शाम के समय में संतोष सर मैथ पढ़ाते हैं, उसके लिए 1500 रुपए फीस है लेकिन अभी ऑफर में 750 रुपए जमा करना होगा। इसी तरह इंग्लिश और रीजनिंग के लिए भी अलग-अलग टीचर हैं, सभी की फीस 1500 रुपए हर सब्जेक्ट की है। लेकिन ऑफर में 750 रुपए देने होंगे। अगर आप मैथ्स, रीजनिंग और इंग्लिश तीनों को एक साथ लेते हैं तो 2 हजार रुपए में हो जाएगा। खान सर और इन सभी की एक साथ क्लास जॉइन करने पर टोटल 5 हजार में हो जाएगा। ऑफर खत्म होने पर इसकी फीस हो जाएगी 10,500 रुपए। रिपोर्टर – कब तक ऑफर चलेगा? निरंजन – अभी ऑफर चल रहा है, जल्दी ही खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर – यह क्लास ऑनलाइन चलेगी या ऑफलाइन? निरंजन – यह सारी क्लास ऑफलाइन चलेगी। रिपोर्टर – इस बैच में किसकी तैयारी कराई जाएगी? निरंजन – इसमें रेलवे, SSC, बिहार पुलिस की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर – हमने तो सुना है कि खान सर 100 रुपए फीस लेकर पढ़ाते हैं? निरंजन – वह सब कुछ ऑनलाइन क्लास में होता है, ऑफलाइन क्लास की फीस 100 रुपए नहीं है। आपको ऑनलाइन में यह सब कुछ मिलेगा, जिसमे खान सर की लाइव क्लास मिलेगी। रिकॉर्डिंग वीडियो मिलेगा। लोग 100 रुपए का ऑफर देखकर आते हैं, लेकिन यहां उन्हें पूरा फीस स्ट्रक्चर बताया जाता है। रिपोर्टर – वह कैसे मिलता है? निरंजन – वह आपको मोबाइल में एप्प डाउनलोड करना होगा, वहां से आपको मिल जाएगा। खान सर के कोचिंग में जो फैसिलिटी दी जाती है, उसके हिसाब से यहां फीस बाकी कोचिंग की अपेक्षा कम है। रिपोर्टर- बीपीएससी और यूपीएससी की फीस कितनी है? निरंजन- बीपीएससी के लिए 20 हजार फीस है। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लास चलती है। इसमें प्री, मेंस और इंटरव्यू तक की तैयारी कराई जाती है। उसी फीस में किताब भी साथ में मिलेगी। अगर आप 6 हजार वाली क्लास लेते हैं तो उसमें किताब अलग से लेनी होगी। रिपोर्टर – आपने तो मुझे पहले बताया था कि 5 हजार रुपए लगेंगे। निरंजन – वह फाउंडेशन क्लास की है। वहां बेसिक पढ़ाई कराई जाती है। 100-200 वाली क्लास लेकर बीपीएससी, यूपीएससी या रेलवे, एसएससी की क्लास नहीं होती है। वह सब ऑनलाइन या कम दिन की टारगेट क्लास होती है। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग से निकलकर हम कैंपस में ही अंकुश मैथमेटिक्स कोचिंग सेंटर पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात दीपक से हुई, जिन्होंने फीस से लेकर कोर्स की पूरी जानकारी दी। रिपोर्टर – सर की क्लास जॉइन करनी थी। दीपक – सर सिर्फ मैथ्स पढ़ाते हैं, वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 4250 रुपए जमा करना होगा। अगर इंस्टॉलमेंट में करना चाहते हैं तो पहली बार 3 हजार और क्लास स्टार्ट होने के एक महीने के भीतर 2 हजार जमा करने होंगे। रिपोर्टर – कितने दिनों तक क्लास चलेगी। दीपक – क्लास 10 से 12 महीने तक ही चलेगी। रिपोर्टर – आपके यहां पैसा ज्यादा लिया जा रहा है, कई जगहों पर पोस्टर देखा है कि 100 से 200 रुपए में पढ़ाया जाता है। दीपक – अरे, उसकी सच्चाई कुछ और ही है। 100 से 200 रुपए में फाउंडेशन की क्लास नहीं होती है। वह मैप पढ़ाने की फीस होती है। कई लोग टारगेट क्लास कराते हैं। इसकी 8 से 10 दिन तक की ही क्लास चलती है। उस सब की फीस 100 से 200 रुपए है। जिसकी परीक्षा होती है, उसी की स्पेशल क्लास चलती है, जैसे रेलवे या बिहार पुलिस तो उसी की पढ़ाई कराई जाएगी। रिपोर्टर – यहां 100 रुपए वाली क्लास नहीं चलती है क्या? दीपक – चलती है न, यहां 99 रुपए में रेलवे की स्पेशल क्लास चलती है। सर को बेटा हुआ था तो 11 रुपए में एडमिशन हो रहा था, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 99 रुपए कर दिया गया हैंं। यह बैच 2 महीने में खत्म हो जाएगा। रिपोर्टर – तो इतने कम दिन में क्या पढ़ाते होंगे? क्या सिलेबस कंप्लीट हो जाता है? दीपक – यह सब टारगेट बैच होता है। इस बैच में ऊपर-ऊपर पढ़ाया जाता है, जिसका एग्जाम है, उसी की स्पेशल पढ़ाई होती है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर हाट में स्थित कौटिल्य जीएस पहुंची तो यहां हमारी मुलाकात संतोष से हुई। संताेष ने कोचिंग का पूरा सच बताया और कहा अगर प्रचार में 1 रुपए या चौंकाने वाली कम फीस नहीं रखी जाए तो स्टूडेंट्स कैसे आएंगे। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच में एडमिशन लेना है, कितनी फीस लगेगी? संतोष – फाउंडेशन जीएस के लिए वन टाइम पेमेंट करेंगे तो 6500 रुपए लगेगा। अगर इंस्टॉलमेंट में देते हैं तो 7100 रुपए देने होंगे। अगर इंस्टॉलमेंट में पैसा देना चाहते हैं तो एडमिशन के समय 2000 रुपए जमा करने होंगे। बाकी बचे पैसे तीन टर्म में देने होंगे। रिपोर्टर – इस बैच में किस परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी? संतोष – बैंकिंग, SSC, बिहार पुलिस, रेलवे की तैयारी कराई जाएगी। रिपोर्टर – 100 से 200 रुपए में जो क्लास चल रही है। उस बैच में कैसे एडमिशन होगा? हमने कई जगहों पर देखा कि 100 रुपए में क्लास करने का पोस्टर लगा है? संतोष – यह सब 10 से 15 दिन की क्लास होती है। हमारे यहां भी एक टेस्ट के 15 रुपए लिए जाते हैं। 200 रुपए में एक महीने तक टेस्ट दीजिए। यहां अभी हाल में ही 100 रुपए वाला बैच खत्म हुआ है। वह 10 दिन तक चला। इसमें सिर्फ किसी एक खास एग्जाम को लेकर तैयारी कराई जाती है। रिपोर्टर – प्रचार तो ऐसे किया जाता है कि 100 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाएगी। इसकी सच्चाई क्या है? संतोष – पूरे पटना में, 100 रुपए में कोई टीचर नहीं पढ़ाएगा। मेरे पास पूरी तैयारी करने के लिए 6500 रुपये लगेंगे। 100 रुपए वाली क्लास में सिर्फ टॉपिक वाइज डिस्कशन होगा। अगर आपने फाउंडेशन की पढाई नहीं की है, तो 100 रुपए वाली क्लास में आपको कुछ समझ में ही नहीं आएगा। रिपोर्टर – 6500 रुपए के बाद अलग से कोई पैसा नहीं देना होगा क्या? संतोष – बुक के लिए आपको अलग से पैसे देने होंगे। पड़ताल के दौरान भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम आशा मैथमेटिक्स क्लासेस पहुंची। वहां हमारी मुलाकात शुभम से हुई। शुभम ने कोर्स से लेकर फीस तक की पूरी डील की। शुभम ने कोचिंग मार्केट की पूरी गणित समझाई। रिपोर्टर – मैथ्स-रीजनिंग के लिए एडमिशन लेना है। शुभम – इसके लिए शाम में क्लास चलती है, 6 महीने तक रीजनिंग की और 1 साल तक मैथ्स की क्लास चलेगी। मैथ्स के लिए 4500 फीस है, लेकिन ऑफर में 2500 रुपए में एडमिशन हो जाएगा। रीजनिंग के लिए 1550 रुपए है, लेकिन ऑफर में 750 रुपए ही लगेंगे। रिपोर्टर – लेकिन यहां तो हर जगह 100 रुपए वाली क्लास का पोस्टर लगा है। शुभम – मेरे यहां 100 रुपए में क्लास नहीं चलती है, जितनी कम फीस वाली बैच है, वह फाउंडेशन बैच नहीं होता है। वह ज्यादा से ज्यादा एक महीने का होता है। रिपोर्टर – इसमें टीचर्स को क्या फायदा होता होगा? शुभम – यह बहुत बड़ा बिजनेस है। एक 1 हजार रुपए बोलकर क्लास शुरू करते हैं। अगर 1000 स्टूडेंट्स ने 1000 – 1000 देकर एडमिशन लिया तो 1 से 2 महीने में टीचर ने करोड़ों रुपए कमा लिए। बच्चों को लगता है कि 1000 रुपए ही लग रहा है। लेकिन उसी 1000 हजार से टीचर लाखों-करोड़ो बना लेते हैं। क्योंकि हजारों लड़के एडमिशन लेते हैं। इसमें किसी भी तरह से टीचर को 1 महीना बिताना होता है। रिपोर्टर – एक महीने में बच्चों को क्या ही पढ़ा पाते होंगे? शुभम- यह चालाक लड़के समझ पाते हैं, लेकिन बाकी लड़के बड़े नाम पर जाते हैं। 1 महीने में कोई क्या ही पढ़ा पाएगा। अगर बच्चे बेसिक पढ़ाई नहीं किए होते हैं, तो एक महीने की क्लास में बच्चों को कुछ समझ में नहीं आता है। जब तक हम ए टू जेड पढ़े नहीं रहेंगे, तब तक कुछ नहीं समझ पाएंगे। बच्चों को लगता है कि एक ही हजार तो लग रहा है। ऐसे में टीचर अच्छे-खासे पैसे बना लेते हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मुसल्लहपुर के ही सिलेक्शन तक कोचिंग सेंटर पहुंची। यहां हमारी मुलाकात टीचर पी के (प्रभु कुमार) और प्रेमजीत सिंह से हुई। दोनों टीचर्स ने फीस के साथ कोचिंग से जुड़ी जानकारी दी। दोनों टीचर ने कोचिंग में चल रहे मार्केटिंग के तरीके का भी खुलासा किया। रिपोर्टर – फाउंडेशन बैच के लिए एडमिशन लेना है। प्रेमजीत – पूरे फाउंडेशन बैच के लिए फीस 8500 रुपए है। रिपोर्टर – चारों तरफ 100 रुपए में तैयारी कराने और 1 रुपए में दरोगा की पूरी तैयारी के पोस्टर-बैनर लगे हैं। प्रेमजीत – यह सब मार्केटिंग का तरीका है। आपको 1 रुपए के बहाने ऑफिस बुलाया जाएगा। वहां एक रुपए में एडमिशन लेकर क्लास रूम तक बुलाया जाएगा। फिर अलग-अलग सिलेबस के नाम पर आपसे पैसे वसूल लिए जाएंगे। रिपोर्टर – यह पूरा खेल कैसे होता है? प्रेमजीत – एक रुपए तो दिखावा है। एक रुपए के नाम पर जब स्टूडेंट पहुंच जाते हैं, तो 10 दिन तक पढ़ाया जाता है। स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि 1 रुपए की क्लास 10 दिन की है। आगे बताया जाता है कि 10 दिन में क्या होगा? क्लास कंटिन्यू करने लिए किसी फाउंडेशन क्लास में एडमिशन ले लीजिए। कोई भी टीचर क्वालिटी एजुकेशन देगा तो वह पैसा तो लगेगा। अगर कोई 1 रुपए में या 10 रुपए में पढ़ा रहा है तो वह क्या क्वालिटी एजुकेशन देगा। रिपोर्टर – खान सर का प्रचार है कि वह 200 रुपए लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं? प्रेमजीत – हां, 200 रुपए में पढ़ाते हैं लेकिन उस 200 रुपए में क्या पढ़ाया जाता है, यह किसी को नहीं बताया जाता है। 200 में मैप की क्लास चलती है, जो 10 से 15 दिन की होती है। कम पैसे में बच्चों को क्लास रूम तक बुलाया जाता है। फिर उनसे पैसे वसूले जाते हैं। खान सर 9 से 10 रुपए का भी बैच लेकर आए हैं। एक बार बच्चे आ जाते हैं फिर उनसे अलग-अलग एग्जाम की तैयारी के नाम पर पैसे लिए जाते हैं। क्या कोई 9 से 10 रुपए में अधिकारी बन पाएगा? यह सब मार्केटिंग है। रिजल्ट हो या न हो, कोचिंग वाले रिजल्ट खरीद लेते हैं। फिर उन्ही को दिखाया जाता है कि इतने सारे लड़के हमारे पास पढ़कर नौकरी पाए हैं। ऐसे में और भी लड़के एडमिशन लेने चले आते हैं। रिपोर्टर – ये लोग कैसे मार्केटिंग करते हैं? प्रेमजीत – कोचिंग वाले बड़े-बड़े लोगों के पॉडकास्ट और शो में जाते हैं। वहां अपने कोचिंग का प्रचार करते हैं। वह कहते हैं कि हम 200 रुपए में ही पढ़ाते हैं। वहां यह नहीं बताते कि इस 200 रुपए में क्या पढ़ाते हैं। 75 हजार रुपए भी फीस लेते हैं, यह नहीं बताते हैं। बच्चे यही सुनकर क्लास में आ जाते हैं कि 200 रुपए में पढ़ाई हो रही है। क्लास में आने के बाद 10 दिन क्लास होती है और फिर बोला जाता है कि आप फाउंडेशन बैच में एडमिशन लीजिए। इन्वेस्टिगेशन में 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा फर्जी निकला भास्कर इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि सोशल मीडिया और बैनर पोस्टर पर 1 रुपए में दरोगा बनाने का दावा पूरी तरह से फर्जी है। ये स्टूडेंट्स को बुलाने का एक ट्रेंड है। इसी तरह से 99, 199 और 200 का भी कोचिंग प्लान है। भास्कर की इन्वेस्टिगेश्न में साफ हो गया कि 200 रुपए सरकारी नौकरी की तैयारी का दावा स्टूडेंट्स को बुलाकर उन्हें बड़े पैकेज वाले कोर्स में पढ़ाने का ट्रेंड है। सामने आया कि 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी सिलेबस की पढ़ाई नहीं होती है, बल्कि वह किसी टॉपिक या मैप पढ़ाने के बहाने टीचर बच्चों को अपने क्लासरूम तक बुलाते हैं। 7-10 दिन की क्लास कराते हैं और इस दौरान बच्चों से नौकरी के लिए सिलेबस की पूरी तैयारी के नाम पर 6500-8500 रुपए तक लेकर एडमिशन कराते हैं। पूरे पटना में कोई ऐसा टीचर या कोचिंग नहीं मिला जहां 1 रुपए या 200 रुपए में पूरी तैयारी कराई जाती हो। बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री की ताकत समझिए… एक्सपर्ट बोले- इस तरह की मार्केटिंग से बच्चों को क्लासरूम तक लाया जाता है इसके बाद हमने एक्पर्ट्स से बात की हमने पूछा, कोचिंग का धंधा बिहार में इतना तेजी से कैसे फैल रहा है? इस पर बिहार के पूर्व DGP और शिक्षाविद अभ्यानंद ने बताया कि 1 रुपए में नौकरी की तैयारी कराने का दावा सिर्फ मार्केटिंग का तरीका है। बच्चों को पहले क्लासरूम तक बुलाया जाता है फिर उनसे महंगे कोर्स बेचे जाते हैं। सम्राट सरकार कर रही कोचिंग बिल लाने की तैयारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं नए नियमों के अनुसार, अब राज्य का कोई भी कोचिंग संस्थान स्कूल और कॉलेज के तय समय के दौरान अपनी कक्षाएं नहीं चला सकेगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी मुख्य स्कूली या कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर कोचिंग न जाएं। दरअसल, पटना में दो बड़े कोचिंग संस्थानों को चलाने वालों (खान सर और रौशन आनंद) के बीच विवाद के चलते सरकार को इस बारे में फैसला लेना पड़ा। क्यों लिया जा रहा कोचिंग के लिए ये फैसला ? 27 मई को बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद बिहार की कई कोचिंग ने अपने – अपने छात्रों की सफलता का दावा किया। खान सर द्वारा जारी खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद ने बड़ी संख्या में परीक्षा में सफल छात्रों के लिए प्रचार अभियान शुरू किया। दोनों कोचिंग सेंटर ने सफल उम्मीदवारों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किए। शहर में पोस्टर, होर्डिंग और बैनर लगाए गए। इसी दौरान आरोप लगा कि खान ग्लोबल स्टडीज के कुछ कर्मचारियों ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के बोर्ड के ऊपर अपना प्रचार बैनर लगा दिया। यह तनाव धीरे-धीरे बढ़ा। जिसके चलते तोड़फोड़, पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामाने आईं। क्या है डमी स्कूल : ये ऐसे स्कूल हैं जहां छात्रों के लिए नियमित रूप से जाना जरूरी नहीं है। इसके लिए कोचिंग संस्थान छात्रों पर स्कूल के लोड को कम करने के लिए रेग्यूलर स्कूलों के साथ गठजोड़ करते हैं। इस तरह उन्हें अपनी एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी पर ध्यान देने के लिए अधिक समय मिलता है। डमी स्कूलों में एडमिशन जेईई और नीट के लिए सबसे ज्यादा है।

हिमाचल में भारी बारिश का कहर, किन्नौर में गाड़ियां दबी:रिब्बा में फ्लैश-फ्लड, 49 सड़कें और 127 बिजली ट्रांसफॉर्मर बंद, आज ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला में बीती रात भारी बारिश हुई। किन्नौर के चोलिंग में तेज बारिश के बाद मलबा नेशनल हाईवे पर आ गया। इसमें दो गाड़ियां दब गईं। इससे हाईवे वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया। PWD की मशीनरी सड़क बहाली में जुटी है। किन्नौर के ही रिब्बा गांव में भी सुबह तीन बजे फ्लैश फ्लड से लोग घबरा गए। कुछ लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और कुछ गाड़ियां निकालने लगे। राज्य में बीते दो दिनों के दौरान नॉर्मल से 211 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले छह दिन भी बारिश से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज कांगड़ा और मंडी जिलों में कुछेक स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कुल्लू, शिमला, सिरमौर और ऊना जिलों के लिए यलो अलर्ट दिया गया है। 5 और 6 जुलाई को भी भारी बारिश की चेतावनी पांच और छह जुलाई को राज्य के मध्यम ऊंचे व निचले इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। कल यानी 4 जुलाई को कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिला में हल्की से मध्यम बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। 5 जुलाई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस दोबारा स्ट्रांग होकर बरसेगा। इससे अगले 48 घंटे तक कुछेक भागों में भारी बारिश की संभावना है। नदी-नालों से दूर रहने की एडवाइजरी IMD ने लोगों को भारी बारिश के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतने और मौसम की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी है। प्रदेश में 49 सड़कें, 42 बिजली ट्रांसफॉर्मर बंद राज्य में तीन दिन से हो रही बारिश के बाद प्रदेश में 49 सड़कें, 42 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 27 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट राज्य में बीते तीन दिन से हो रही बारिश के बाद कई शहरों के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। चंबा का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 27.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। केलांग का पारा नॉर्मल से 6.3 डिग्री कम होने के बाद 19.7 डिग्री, मनाली का 4.3 डिग्री लुढ़कने के बाद 21.7 डिग्री और कांगड़ा का 4.1 डिग्री कम होने के बाद 32.0 डिग्री सेल्सियस रह गया है।

हिमाचल में लैंडस्लाइड, गाड़ियां मलबे में दबीं:उज्जैन में मंदिर डूबे, लखनऊ में घरों में पानी घुसा; गुजरात में सड़कें डूबीं, गाड़ियां चलते-चलते बंद

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला में गुरुवार रात भारी बारिश हुई। किन्नौर के चोलिंग में बारिश के बाद मलबा नेशनल हाईवे पर आ गया। दो गाड़ियां दब गई। राज्य में 49 सड़कें बंद हैं। इधर, यूपी में शुक्रवार सुबह 3 बजे लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, जालौन समेत 5 शहरों में बारिश हुई। पानी घरों में घुस गया। गुजरात के वलसाड में सड़कें पानी में डूब गईं, गाड़ियां चलते-चलते बंद हो गईं। मध्य प्रदेश में मानसून 9 दिन में ही पूरे प्रदेश में छा गया। धार, बड़वानी, खरगोन और देवास में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश का अनुमान है। उज्जैन में क्षिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से राम घाट के पास मंदिर डूब गए। राजस्थान के जयपुर में 2 दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग, चमोली समेत कई जिलों में लैंडस्लाइड से सड़कें बंद हो गई हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ हाईवे पर लगातार पत्थर गिर रहे हैं। सुरक्षा के चलते केदारनाथ यात्रा फिलहाल रोक दी गई है। मानसून 5 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर सकता है… देशभर से बारिश की 6 तस्वीरें… अगले 2 दिन मौसम का हाल 4 जुलाई: 5 जुलाई: राज्यों से मौसम की खबरें… राजस्थान: मानसून 13 जिलों में पहुंचा; जयपुर में रातभर बरसात, कई जिलों में 2 इंच तक पानी बरसा राजस्थान के पहले दिन मानसून 13 जिलों तक पहुंच गया है। जयपुर में भी 2 दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। बीते 24 घंटे में करौली, झुंझुनूं में 2 इंच तक बारिश रिकॉर्ड हुई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी कोटा, बारां और झालावाड़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूरी खबर पढ़ें… मध्य प्रदेश: 19 जिलों में भारी बारिश का अनुमान, 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। शुक्रवार को खंडवा और हरदा में भारी बारिश का रेड अलर्ट है जबकि धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक पानी गिरने का अनुमान है। प्रदेश के अब तक 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: आज 11 जिलों में बारिश हो सकती है, एक्सप्रेस-वे पर पहली बारिश में गड्‌ढे हुए यूपी में मानसून सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट है। 11 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं गुरुवार को लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, बलिया समेत 30 शहरों में रुक-रुककर बारिश हुई। वाराणसी में दोपहर में आंधी के साथ तेज बारिश हुई। शामली में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पहली बारिश में ही गड्‌ढे हो गए। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: पटना में धूप-उमस भरी गर्मी करेगी परेशान; 5-6 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी पटना समेत पूरे बिहार में मानसून एक्टिव है, लेकिन जुलाई महीने में राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इस बीच तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी भी हो सकती है। पटना और इसके आसपास के जिलों में हल्के बादल छाए रहेंगे। धूप और उमस भरी गर्मी एक बार फिर परेशान कर सकती है। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब-चंडीगढ़: 24 घंटे में लुधियाना-फरीदकोट में सबसे ज्यादा पानी गिरा, 5 दिन मौसम ऐसे ही रहेगा अगले पांच दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में बारिश का दौर जारी रहेगा। अगले 5 दिन मौसम ऐसा ही रहेगा। मानसून ने 1 जुलाई को पंजाब और चंडीगढ़, दोनों में दस्तक दी। यह पिछले साल के मुकाबले पंजाब में 9 दिन और चंडीगढ़ में 7 दिन देरी से पहुंचा। पूरी खबर पढ़ें… उत्तराखंड: सभी जिलों में बारिश, 5 जिलों के लिए चेतावनी; चारधाम के रास्तों पर गिर रहे पत्थर उत्तराखंड के सभी जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ हाईवे पर लगातार पत्थर और मलबा गिर रहा है। शुक्रवार को दो घंटे के लिए केदारनाथ यात्रा रोकनी पड़ी थी। पूरी खबर पढ़ें…

पानीपत में चपरासी की रिटायरमेंट पर 'शाही' विदाई,VIDEO:फूलों से सजे हाइड्रा क्रेन पर बैठे, थार-स्कॉर्पियो का काफिला चला; नोटों की माला पहन डांस किया

रिटायरमेंट के बाद लोग आमतौर पर कार या सरकारी गाड़ी से घर लौटते हैं, लेकिन हरियाणा के पानीपत में एक सरकारी कर्मचारी ने अपनी विदाई को अलग अंदाज में यादगार बना दिया। फूड एंड सप्लाई विभाग में 23 साल तक चपरासी के पद पर काम करने वाले 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ रिटायरमेंट के बाद करीब 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर अपने गांव पहुंचे। फूलों और रंग-बिरंगी चुन्नियों से सजी क्रेन को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट गई। महाबीर के आगे थार, स्कॉर्पियो समेत कई गाड़ियों का काफिला चल रहा था। वह हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर पूरे रास्ते डांस करते रहे। महाबीर बांगड़ ने बताया कि उन्होंने कई कर्मचारियों की रिटायरमेंट देखी थी। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि जब उनकी बारी आएगी तो वह कुछ अलग करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने कार या रथ की जगह हाइड्रा क्रेन चुनी और उसी पर सवार होकर अपने पैतृक गांव कवि में पहुंचे। इसी गांव के महिपाल ढांडा हरियाणा के शिक्षा मंत्री हैं। रिटायरमेंट के बाद की तस्वीरें… अब पढ़िए, रिटायरमेंट की पूरी प्लानिंग… अब पढ़िए, कैसे लघु सचिवालय से घर पहुंचे… 23 साल नौकरी की, परिवार में दो बेटे और एक बेटी महाबीर बांगड़ फूड एंड सप्लाई विभाग में सेवादार (चतुर्थ श्रेणी) के पद से रिटायर हुए हैं। उनके परिवार में दो बेटे हैं। बड़ा बेटा चानू अमेरिका (USA) में रहता है, जबकि दूसरे बेटे का नाम मोहित है। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है। पत्नी शीला देवी गृहिणी हैं।