पेंशन के लिए तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर पहुंचीं माताजी:जलदाय मंत्री ने 'अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया'; किसान से 'आतंकी' जैसा सुलूक

नमस्कार, जालोर में पेंशन के लिए 82 साल की माताजी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। टोंक में शिक्षा मंत्री ने जलदाय मंत्री की तारीफ अनोखे शब्दों में की और बाड़मेर में किसान को उसी की जमीन से बाहर निकलने की हुक्म दे दिया गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पेंशन के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी जी ने जो बात इश्क के लिए कही थी, वही बात सरकारी स्कीम से जोड़कर भी कही जा सकती है। जैसे- ये पेंशन नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे, एक आग का रस्ता है और रेंग कर जाना है। बात मजाक की नहीं, जालोर की कोकू देवी पर बीती है। उनकी उम्र 80 पार। आंखों से दिखता नहीं। हालत ये कि खड़े होकर चल नहीं सकतीं। बैठकर रेंग सकती हैं। 5 साल पहले उनकी 1000 रुपए की पेंशन बंद हो गई। फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे थे। जमीन पर हाथ रखकर सरकने की स्थिति के कारण रेखाएं घिस गई। कई बार गुहार लगाई, लेकिन काम नहीं बना। थक-हार कर कोकू देवी भीषण गर्मी में दोपहर को तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर रेंगती हुईं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। प्रेमचंद वाली ‘बूढी काकी’ भी यह दृश्य देखती तो उनकी भूख मर जाती। कलेक्टर साहब को पता चला तो चेंबर से बाहर आए और खड़े रहकर कोकू देवी का काम कराया। 2. जलदाय मंत्री ने अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया जलदाय मंत्री कन्हैया लाल ने दो महीने पहले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था- हालात इतने नाजुक हैं कि भ्रष्ट अफसरों की जांच करने लगे तो मेरा पूरा विभाग ही खाली हो जाएगा। जलदाय मंत्री होने के नाते उन्हें पता है कि कौन कितने पानी में है। उन्होंने भ्रष्ट अफसरों को सख्त चेतावनी भी दी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी ने जलदाय मंत्री की तारीफ कुछ अलग अंदाज में की। टोंक में समाज की एक सभा के दौरान दिलावर बोले- ये कन्हैया लाल कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। इन्होंने अच्छे अच्छों को पानी पिलाया है। चाहे कोई दादा हो, परदादा हो। या कोई नेता हो। सबको अच्छा पानी पिलाया है। इनके सामने कोई टिकता नहीं। अब मंत्रीजी का तो काम ही है पानी पिलाना। पानी पिलाते रहना चाहिए और अपनी ही आस्तीनों को झाड़ते रहना चाहिए। इससे इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार नहीं पनपता। 3. चलते-चलते.. पूर्व मंत्रीजी ने एक सभा में कहा था- एक दिन आएगा जब कलेक्टर का बेटा कहेगा कि बड़ा होकर मैं किसान बनूंगा। 100 प्रतिशत सही बात है। संभव है कि आने वाले समय में कलेक्टर का बेटा ही किसान बने। मंत्री का बेटा किसान बने। विधायक का बेटा किसान बने। अफसर का बेटा किसान बने। किसान बनकर सब्सिडी लेने में आसानी रहती है। बड़े प्रोजेक्ट मिल जाते हैं। खेत पैसा उगाने के कारखाने बन जाते हैं। सरकारी स्कीम में जल्दी नंबर आ जाता है। और भी हजार फायदे हैं। किसान का बेटा अगर किसान बनेगा तो उसे यूरिया के कट्‌टे के लिए लाठी खानी पड़ेगी। कृषि कनेक्शन के लिए चप्पल घिसनी पड़ेगी। फसल के मुआवजे के लिए गिरदावरों-पटवारियों को घूस खिलानी पड़ेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। बाड़मेर के बीसूकलां गांव में सीताराम की ढाणी है। किसान गोरख दान अपने खेत पर पहुंचा तो खाकी वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों ने दूर से ही उसे हड़काया। बोले- अरे ओ, बाहर निकलो यहां से। कई सुरक्षाकर्मी गोरख दान को घेरने पहुंच गए। जैसे वह बॉर्डर लांघ कर घुस आया हो। प्राइवेट कंपनी गोरख दान के खेत को काम में ले रही थी लेकिन मुआवजा नहीं दे रही थी। गोरख दान खेत का मालिक होने के बावजूद हाथ जोड़कर बोला- साहब, मैं आपसे यही निवेदन करने आया हूं कि आप मेरे खेत में काम मत करवाओ। इनपुट सहयोग- भरत सांखला (जालोर), महावीर बैरवा (टोंक), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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