पूर्व CM चन्नी का शक्ति प्रदर्शन:पूर्व मंत्री आशू पहुंचे, पूर्व MLA बराड़ बोले- चन्नी प्रधान न बने तो पंजाब में कांग्रेस सरकार नहीं बनेगी

पंजाब में 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस में फिर बगावत शुरू हो गई है। प्रदेश प्रधान न बनाए जाने से पूर्व CM चरणजीत चन्नी बेहद नाराज हैं। इसी वजह से कैंपेंनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने पर चन्नी ने हाईकमान का धन्यवाद तक नहीं किया। उन्होंने आज, शुक्रवार को मोरिंडा स्थित घर में मीटिंग बुलाई है। जिसमें सांसदों, विधायकों और हलका इंचार्जों को बुलाया गया है। चन्नी के बुलावे पर लुधियाना से पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़, नाजर सिंह मानशाहिया, दविंदर घुबाया, लखबीर लक्खा, तरसेम डीसी और बाघापुराना से पूर्व MLA दर्शन बराड़ चन्नी के घर पहुंच चुके हैं। बराड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर चन्नी को प्रधान न बनाया गया तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती। चन्नी के इस रुख से लग रहा है कि पंजाब कांग्रेस में आज कोई बड़ा धमाका हो सकता है। चन्नी के एक करीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया- प्रधान न बनाए जाने से चन्नी बहुत खफा हैं और अब उन्होंने आर-पार की लड़ाई का फैसला कर दिया है। वह शक्ति प्रदर्शन कर हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं। चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के 2 मकसद, एक्सपर्ट से जानिए:- 1. वड़िंग हटाओ, कैप्टन की तरह प्रधान बनाओ
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में एक प्रचलन रहा है कि जो पार्टी प्रधान होता है, वही सीएम बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता तो उन्हें ही सीएम बनाया गया। इसी कुर्सी पर नजर रखते हुए चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के विरोध में रहा है, यह किसी से छुपा नहीं है। पार्टी की इंटरनल मीटिंग हो या फिर हाईकमान के सामने सब जगह चन्नी राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रधान पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं। 2017 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाया था कि उन्हें प्रधान बनाएं। जब प्रताप बाजवा को प्रधान पद से हटाया गया था। प्रधान बनने का मकसद साफ होता है कि टिकट बंटवारे में उनकी ही चले और जब विधायक जीतकर आएं तो ज्यादातर विधायक उनके समर्थक हों और उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ रहे। कैप्टन ने इसके लिए जाट महासभा तक को एक्टिव कर दिया था। चन्नी भी कैप्टन के रास्ते पर हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधान बनाए ताकि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो राजा वड़िंग ये क्रेडिट न ले सकें कि प्रधान होने के नाते यह जीत उनकी अगुआई में हुई है। फिर वह सीएम कुर्सी पर भी दावा ठोक सकते हैं। 2. प्रधान नहीं तो मुझे ‘सीएम चेहरा’ घोषित करो
2022 में नवजोत सिद्धू प्रधान थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रधान सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रधानगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है। इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रधानगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रधान रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस जट्‌टसिखों को नाराज नहीं करना चाहती थी। इसलिए वड़िंग को नहीं हटाया। इसीलिए चन्नी अब पार्टी हाईकमान पर उन्हें सीएम फेस घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। चन्नी के पास समर्थक नेताओं की लंबी फौज है। ऐसे में समर्थकों और 31% दलित वोट बैंक के जरिए वह हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। चन्नी की दोनों मांगें दरकिनार तो क्या रास्ता बचा?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत चन्नी पहले तो कांग्रेस पर पूरा दबाव बनाएंगे कि या तो उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। अगर दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ तो उनके पास प्लान बी है। प्लान बी के तहत वो अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जाएगा। उनका कहनना है कि चन्नी के साथ एक बड़ा दलित वर्ग जुड़ा है। 2021 में उनके 111 दिन के कार्यकाल से भी अच्छी छवि बनी है। अगर चन्नी बगावत करते हैं या अलग पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और गरीब तबके में मैसेज जाएगा कि उनके नेता की सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह वोट बैंक पूरी तरह से खिसक जाएगा, जिसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा। चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं का इस फैसले पर क्या रवैया
चन्नी गुट के किसी भी नेता ने हाईकमान के फैसले पर कोई धन्यवाद नहीं किया। इनमें MLA राणा गुरजीत, MLA परगट सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA भारत भूषण आशू प्रमुख नेता हैं। कपूरथला से MLA राणा गुरजीत की एक रील भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने ‘पातशाही दा वा रखदे हां, खंडियां दी धार ते नचदे हां, सानू औंदा है बदला लैंणा’ सॉन्ग लगा रखा है। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी चन्नी की लड़ाई में उनके साथ हैं। राणा गुरजीत ने 2022 में AAP की आंधी के बावजूद न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने बेटे राणा इंदरप्रताप को भी सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय जिता दिया। ******************* ये खबरें भी पढ़ें… पंजाब कांग्रेस में बड़ी बगावत के आसार, चन्नी ने मीटिंग बुलाई, सवाल- क्या पार्टी छोड़ेंगे?; रंधावा भी चुप पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किए बदलाव को लेकर कांग्रेस में बगावत के आसार बन गए हैं। पूर्व CM चरणजीत चन्नी और सांसद सुखजिंदर रंधावा अमरिंदर राजा वड़िंग के प्रधान पद में बदलाव न होने से नाराज हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने अभी तक हाईकमान से पद मिलने के बाद धन्यवाद तक नहीं कहा। यहां तक कि सोशल मीडिया पोस्ट तक नहीं डाली (पढ़ें पूरी खबर) चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी कांग्रेस छोड़ सकते हैं, संगठन में बदलाव से नाराज पंजाब कांग्रेस को संगठनात्मक फेरबदल के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान की ओर से गठित की गईं चुनावी समितियों से चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद मनीष तिवारी को बाहर रखा गया है। इस पर मनीष तिवारी की नाराजगी खुलकर बाहर आई है। तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 45 साल इस पार्टी को दिए हैं, लेकिन आज कुछ लोगों की असुरक्षा की भावना के कारण ऐसा फैसला लिया गया है।(पढ़ें पूरी खबर)

देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना कानूनन अवैध:45,000 करोड़ के प्रोजेक्ट की सारी मंजूरियां खत्म; बिना फॉरेस्ट क्लीयरेंस के हो रहा निर्माण

देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत ‘केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट’ कानूनी और तकनीकी विवादों में घिर गया है। सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं हुआ। इनमें प्रभावित परिवारों के रिहेबिलिटेशन की सबसे अहम शर्त अब भी अधूरी है। नियमों के अनुसार, जरूरी शर्तें पूरी न होने पर प्रोजेक्ट के लिए दोबारा फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेना पड़ता है। जिला प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि प्रभावित परिवारों का अब तक पूरा पुनर्वास नहीं हुआ। वहीं, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की अहम सिफारिशों का भी पूरा पालन नहीं हुआ। इन हालातों में करीब 45 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रोजेक्ट के कानूनी और तकनीकी विवादों को समझने के लिए भास्कर ने सरकारी दस्तावेजों की जांच की और एक्सपर्ट्स से बातचीत की। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पन्ना टाइगर रिजर्व का 6,000 हेक्टेयर कोर क्षेत्र होगा जलमग्न केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के तहत बुंदेलखंड के जिलों तक पानी पहुंचाने के लिए दौधन बांध बनाया जा रहा है। इसके निर्माण से पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया का 6,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र जलमग्न होगा। इस पर्यावरणीय असर को देखते हुए प्रोजेक्ट को दो चरणों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस दी गई थी। मई 2017 में स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस तो अक्टूबर 2023 में स्टेज-2 की मंजूरी मिली। दोनों चरणों में पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास से जुड़ी कई जरूरी शर्तें रखी गईं, जिनमें कई समान थीं। सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया है कि इन अनिवार्य शर्तों का पूर्ण पालन नहीं हुआ। आइए समझते हैं कि किन शर्तों का उल्लंघन हुआ और इसका कानूनी और तकनीकी असर क्या है? फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कॉमन शर्तें शर्त-1: जमीन का भौतिक हस्तांतरण और आरक्षित वन घोषित करना 2017 और 2023 में मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कॉमन प्रमुख शर्त थी कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए चिह्नित गैर-वन भूमि पहले वन विभाग को भौतिक रूप से सौंपी जाए और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत उसे ‘आरक्षित वन’ घोषित किया जाए। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (मई 2017) की शर्त-4 के अनुसार, यह प्रक्रिया स्टेज-2 क्लीयरेंस से पहले पूरी होनी जरूरी थी। यही प्रावधान स्टेज-2 क्लीयरेंस (अक्टूबर 2023) में शर्त-2 के रूप में शामिल किया गया। इसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के पश्चिम में 6,809 हेक्टेयर गैर-वन भूमि को वन क्षेत्र में शामिल करना था, जिसमें 6,017 हेक्टेयर भूमि को टाइगर रिजर्व का हिस्सा बनाया जाना था। साथ ही, 3 अप्रैल 2024 तक प्रक्रिया पूरी कर इस भूमि को आरक्षित वन घोषित करना अनिवार्य था। जमीनी हकीकत: कागज में हस्तांतरण, लेकिन भौतिक कब्जा नहीं सरकार ने 29 मार्च से 14 जून 2024 के बीच संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी किए। 19 जुलाई 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई प्रोजेक्ट की छठी समीक्षा बैठक में पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि भूमि का रिकॉर्ड में हस्तांतरण और म्यूटेशन हो चुका है, लेकिन वन विभाग को अब तक उसका भौतिक कब्जा नहीं मिला। पुनर्वास अधूरा, इसलिए कब्जा नहीं मिल सका भौतिक कब्जा न मिलने की प्रमुख वजह यह है कि कई स्थानों पर प्रभावित परिवारों का पुनर्वास अब तक पूरा नहीं हुआ। इसके कारण लोग भूमि खाली नहीं कर सके और कई सरकारी जमीनों पर अब भी अतिक्रमण है। शर्त-2: जंगल में पावर प्लांट पर रोक, फिर भी निर्माण की तैयारी केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के फॉरेस्ट क्लीयरेंस की दूसरी कॉमन शर्त थी कि मुख्य वन क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार का पावर प्लांट या पावर हाउस नहीं बनाया जाएगा। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (मई 2017) की शर्त-13 में जंगल के भीतर पावर प्लांट के निर्माण पर साफ रोक लगाई गई थी। यही प्रावधान स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस (अक्टूबर 2023) में शर्त-11 के रूप में दोहराया गया। हकीकत: रोक के बावजूद 78 मेगावाट के पावर प्लांट का प्रस्ताव दस्तावेजों के अनुसार, स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट प्राधिकरण (KBLPA) पन्ना टाइगर रिजर्व के भीतर 78 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर के अनुसार, प्रोजेक्ट के आधिकारिक नक्शे में अब भी पावर प्लांट का प्रस्ताव दर्ज है। उनका कहना है कि 19 जुलाई 2024 की समीक्षा बैठक में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के विपरीत जंगल के भीतर पावर हाउस निर्माण की संभावना पर चर्चा हुई और इसके लिए अलग से स्टडी कराने का निर्णय लिया गया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की अधूरी शर्तें शर्त-11: पेड़ों की नई गणना अनिवार्य थी स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-11 के तहत प्रोजेक्ट क्षेत्र के सभी पेड़ों की नए सिरे से इंटेंसिव गणना कराना जरूरी था। इसका मकसद प्रोजेक्ट से होने वाले वास्तविक पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करना था। हालांकि, जमीनी स्थिति अलग है। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने माना कि प्रोजेक्ट एरिया में पेड़ों की कोई नई गिनती नहीं कराई गई। शर्त-23: राष्ट्रीय संस्थाओं की सिफारिशों का पालन अधूरा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-23 के तहत राज्य सरकार को नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की सिफारिशों, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की अनुशंसाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों व मंजूरियों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना था। उपलब्ध दस्तावेजों और प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति से संकेत मिलता है कि CEC और NTCA की कई महत्वपूर्ण सिफारिशों का पूर्ण पालन नहीं हुआ। इससे प्रोजेक्ट के वैधानिक अनुपालन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के पालन पर गंभीर सवाल उठते हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की टाइम बाउंड शर्तों के पालन पर सवाल शर्त-5: 12 महीने में राजस्व गांव वन विभाग को सौंपने थे स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-5 के अनुसार, मंजूरी मिलने के 12 महीने के भीतर प्रोजेक्ट एरिया के सभी राजस्व गांव वन विभाग को सौंपने जरूरी थे। इसके लिए प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और पुनर्स्थापना पूरा होना जरूरी था। यह प्रोसेस तय समयसीमा में पूरी नहीं हो सकी। पुनर्वास नीति और मुआवजे को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में असंतोष बना हुआ है और हाल के महीनों में कई गांवों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि शर्त के अनुरूप राजस्व गांवों को पूरी तरह से हैंडओवर नहीं किया जा सका है। शर्त-43: शर्तें पूरी न होने पर अनुमति स्वतः समाप्त होने का प्रावधान स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्त-43 में प्रावधान है कि मंजूरी मिलने के एक साल के अंदर तय की गई सभी शर्तों का पालन न होने पर मंजूरियां खत्म मानी जाएंगी। मौजूदा दस्तावेजों और प्रोजेक्ट की स्थिति से संकेत मिलता है कि कई जरूरी शर्तें तय समयसीमा में पूरी नहीं हो सकीं। पर्यावरणविद् का दावा- शर्तों के पालन पर कानूनी सवाल पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर के अनुसार, केन नदी का पानी आगे यमुना में मिलता है इसलिए नदी के प्राकृतिक प्रवाह और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र की न्यूनतम जल आवश्यकता का वैज्ञानिक आकलन होना चाहिए था। उनका कहना है कि ऐसा आकलन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक, प्रोजेक्ट में स्टेज-1 और स्टेज-2 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की कई अनिवार्य शर्तों का पूरा पालन नहीं हुआ। एनवायरमेंटल क्लीयरेंस (अगस्त 2017): पहली शर्त के पालन पर भी सवाल प्रोजेक्ट को अगस्त 2017 में पर्यावरणीय स्वीकृति मिली थी। इसकी पार्ट-ए की पहली शर्त के मुताबिक, निर्माण शुरू होने से पहले सभी प्रभावित परिवारों का 100% पुनर्वास, पुनर्स्थापना और मुआवजा वितरण पूरा होना जरूरी था। छतरपुर जिले के पुनर्वास के आंकड़ों के मुताबिक, कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला और पुनर्वास प्रक्रिया भी अधूरी है। वन विभाग से जवाब मांगा, नहीं मिली प्रतिक्रिया इन सभी मुद्दों पर आधिकारिक पक्ष जानने के लिए वन विभाग से जानकारी और ईमेल के जरिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस की शर्तों के अनुपालन तथा प्रोजेक्ट की वैधानिक स्थिति पर जवाब मांगा गया। विभाग से ये सवाल पूछे गए, जिनका जवाब नहीं मिला- मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… केन-बेतवा लिंक परियोजना- अर्थी पर लेटी महिलाएं पन्ना जिले में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की हिरासत को लेकर सियासी और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मामला केन-बेतवा लिंक परियोजना, टाइगर रिजर्व के कोर एरिया और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। भटनागर केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ डैम से प्रभावित आदिवासियों के मुआवजे और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…

खबर हटके- सांसद के घर रेड,सोने के अंडर गारमेंट्स मिले:1454 फीट ऊंची बिल्डिंग पर गर्लफ्रेंड को प्रपोज किया; हवा में उड़ने वाला छाता

इराक में सांसद के घर रेड के दौरान सोने के अंडर गारमेंट्स और बड़ी मात्रा में कैश मिला। वहीं, न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की 1454 फीट ऊंचे प्वाइंट पर एक शख्स ने अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज किया। उधर, एक इंजीनियर ने ऐसा छाता बनाया जो उड़कर लोगों को धूप और बारिश से बचाता है। गुजरात में एक व्यक्ति को शादी के बाद पता चला कि उसकी पत्नी पुरुष है इसलिए उसने उसकी हत्या कर दी। वहीं, ब्राजील में एक मादा सुअर ने एक ही बार में 46 बच्चों को जन्म देकर सबको हैरान कर दिया। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

अमरनाथ यात्रा आज से,4800 यात्रियों का पहला जत्था कश्मीर पहुंचा:हर 2km पर ऑक्सीजन बूथ, बालटाल रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए

अमरनाथ यात्रा आज से शुरू हो गई है। यह 28 अगस्त यानी 57 दिन तक चलेगी। अनुमान है कि इस दौरान 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बने बर्फ के शिवलिंग के दर्शन कर सकेंगे। यह गुफा समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर है। इससे पहले गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को जम्मू के भगवती बेस कैंप से बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना किया। इसमें 4,822 तीर्थयात्री शामिल थे। इन्हें 259 वाहनों के सुरक्षा घेरे में रवाना किया गया। कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद तुरंत नीचे लौटने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। वहीं, दोमेल रूट पर चार जगह बड़ी स्क्रीन के जरिए मौसम की जानकारी दी जा रही है। बालटाल रूट पर 12 जगह वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं। अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल रास्ते से है। दूसरा जत्था भी रवाना बारिश की वजह से गुरुवार को बालटाल मार्ग पर यात्रा कुछ समय के लिए रोकी गई थी। हालांकि, शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे 3,865 श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो गया। इनमें 1,735 श्रद्धालु 115 वाहनों से बालटाल बेस कैंप जा रहे हैं। जबकि 2,130 श्रद्धालु 86 वाहनों से पारंपरिक पहलगाम मार्ग की ओर रवाना हुए। बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ यात्रियों की 6 तस्वीरें… दोनों रूट पर 100-100 बेड के अस्पताल दोनों यात्रा मार्गों पर एक हजार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं। दोनों जगह 100-100 बेड के अत्याधुनिक अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं। अमरनाथ यात्रा से जुड़े 3 जरूरी फैक्टर 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.90 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा शुरू होने के साथ ही जम्मू में ऑन-द-स्पॉट (तुरंत) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से पंजीकरण नहीं कराया है, वे तय प्रक्रिया पूरी करके जम्मू में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने का मौका मिल रहा है। यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें… यात्रा के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड, ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म अपने साथ रखें। फिजिकल फिटनेस के लिहाज से हर रोज 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने की प्रैक्टिस करें। सांस वाला योग जैसे प्राणायाम और एक्सरसाइज करें। यात्रा में ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी बॉटल और जरूरी दवाओं का बैग अपने साथ रखें।
अमरनाथ यात्रा का इतिहास 1. राजतरंगिणी में अमरनाथ को अमरेश्वर कहा गया अमरनाथ यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई पक्का ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं मिलता। हालांकि, इतिहासकार मानते हैं कि यह यात्रा कई सदियों से चली आ रही है। 6वीं–8वीं शताब्दी के बीच लिखी गई नीलमत पुराण में ‘अमरनाथ गुफा’ नाम का सीधा उल्लेख नहीं है। इसमें कश्मीर के कई पवित्र तीर्थों, बर्फीले स्थानों और शिव पूजा से जुड़े स्थलों का वर्णन मिलता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि इनमें अमरनाथ से जुड़े संकेत हो सकते हैं, लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। वहीं, कल्हण द्वारा 1148–1150 ईस्वी में लिखी गई राजतरंगिणी में गुफा का उल्लेख ‘अमरेश्वर’ नाम से मिलता है। इसमें अमरनाथ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले शेषनाग का भी जिक्र है। इसी वजह से इतिहासकार राजतरंगिणी को अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना स्पष्ट ऐतिहासिक उल्लेख मानते हैं। इन ऐतिहासिक संदर्भों से माना जाता है कि 12वीं शताब्दी तक अमरनाथ एक प्रसिद्ध तीर्थ बन चुका था और यहां यात्रा की परंपरा स्थापित हो चुकी थी। कई इतिहासकारों का मानना है कि इसकी शुरुआत इससे भी पहले हुई होगी, लेकिन इसके स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 2. मुगल काल में भी मिलता है अमरनाथ का उल्लेख 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक आइने-अकबरी में अमरनाथ गुफा का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और इसका आकार समय के साथ बदलता रहता है। इसके बाद 17वीं शताब्दी में कश्मीर आए फ्रांसीसी यात्री फ़्रांस्वा बर्नियर ने भी अपनी यात्रा-वृत्तांत में इस गुफा और यहां बनने वाली बर्फ की संरचनाओं का वर्णन किया है। 3. बुटा मलिक की ‘पुनर्खोज’ की कथा लोकप्रिय 19वीं शताब्दी से जुड़ी एक लोकप्रिय लोककथा जरूर प्रचलित है। इसके अनुसार, बुटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले की पोटली दी। घर पहुंचने पर वह पोटली सोने में बदल गई। जब बुटा मलिक साधु को धन्यवाद देने लौटा, इतिहासकार मानते हैं कि यदि यह लोककथा सही मानी जाए, तो बुटा मलिक ने गुफा की ‘पुनर्खोज’ या उसे दोबारा लोगों के बीच प्रसिद्ध करने में भूमिका निभाई थी। 4. ब्रिटिश शासन में यात्रा संगठित हुई ब्रिटिश शासन के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत तक अमरनाथ यात्रा अधिक संगठित रूप लेने लगी। तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत ने यात्रियों के लिए रास्ते, पड़ाव और अन्य सुविधाएं विकसित करनी शुरू कीं। 1895 के प्रशासनिक विवरणों में यात्रा मार्ग, पड़ाव और व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है। वर्ष 2000 में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) का गठन किया गया। इसके बाद यात्रा के पंजीकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया गया। 3888 मीटर की ऊंचाई पर है अमरनाथ गुफा ———————————- अमरनाथ यात्रा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 2029 से अमरनाथ के लिए केबल कार चलाने की तैयारी: अप्रैल 2027 से काम शुरू होगा; 5-8 घंटे का सफर 30 मिनट में पूरा होगा अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु 2029 से बालटाल रूट पर केबल कार से सफर कर सकेंगे। केंद्र सरकार अगले साल अप्रैल से 11.6 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने की तैयारी में है। परियोजना पूरी होने के बाद बालटाल से संगम टॉप तक पहुंचने में 5 से 8 घंटे की जगह 25 से 30 मिनट लगेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

भास्कर अपडेट्स:जम्मू-कश्मीर में CRPF की गाड़ी सड़क से फिसली, 6 जवान घायल

जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले में गगनगीर टनल के पास CRPF की एक गाड़ी सड़क से फिसल गई। जिसमें 6 जवान घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक हादसे की वजह के बारे में पता लगाया जा रहा है। आज की अन्य बड़ी खबरें… NEET-PG 2026 परीक्षा 30 अगस्त को, सवाल 200 से घटाकर 180 किए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) 30 अगस्त को NEET-PG 2026 परीक्षा आयोजित करेगा। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के चेयरपर्सन अभिजीत सेठ ने छात्रों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने की अपील की। सेठ ने कहा कि मैं छात्रों को भरोसा दिलाता हूं कि परीक्षा बहुत सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। चूंकि यह कंप्यूटर-आधारित परीक्षा है, इसलिए इसमें कई ऑब्जेक्टिव टूल्स का इस्तेमाल होता है। परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना बहुत कम है। सेठ ने परीक्षा में सवालों की संख्या कम करने की वजह भी बताई और कहा कि इससे छात्रों को पेपर सॉल्व करने के लिए एक्स्ट्रा टाइम मिलेगा। परीक्षा समिति का मानना ​​था कि 20 सवाल कम करने से छात्रों को कम से कम आधा घंटा ज्यादा मिलेगा। दिल्ली में ड्यूटी पर तैनात CRPF जवान ने सर्विस रिवॉल्वर से खुदकुशी की दिल्ली के मोती बाग इलाके में ड्यूटी पर तैनात CRPF के जवान ने गुरुवार को अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक जवान की पहचान नरसी लाल यादव के तौर पर हुई है। यादव ने ड्यूटी के दौरान खुद को गोली मारी। इससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है। दिल्ली SIR प्रक्रिया: 3 दिन में 21 लाख से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे, 63000 से ज्यादा डिजिटाइज वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के लिए घर-घर जाकर किए जा रहे सर्वे के तहत गुरुवार तक दिल्ली में 21 लाख से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे गए और 63,000 से ज्यादा भरे हुए फॉर्म डिजिटाइज किए गए।
SIR के तीसरे चरण के तहत एक महीने तक चलने वाला यह सर्वे 30 जून को शुरू हुआ और 29 जुलाई तक चलेगा। 7 अक्टूबर को पब्लिश होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए हर वोटर को यह फॉर्म भरना होगा। CEO ऑफिस के अनुसार, जो वोटर एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करेंगे, उनका नाम 5 अगस्त को पब्लिश होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं होगा। राजामौली का फ्रांस में सम्मान, लुमिएर म्यूजियम में नाम दर्ज भारतीय फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली को फ्रांस में सम्मान मिला है। लुमिएर म्यूजियम में ‘वॉल ऑफ फिल्ममेकर्स’ (म्यूर दे सिनेमास्त) पर जगह देकर उन्हें सम्मानित किया गया। ‘वॉल ऑफ फिल्ममेकर्स’ पर वर्ल्ड सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चुनिंदा फिल्मकारों के नाम स्थायी रूप से दर्ज किए जाते हैं। इसलिए इसे फिल्म जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में माना जाता है।

फायरिंग के आरोपियों की पुलिस से मुठभेड़:रेवाड़ी में दो बदमाशों को गोलियां लगीं; सब इंस्पेक्टर की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी गोली

हरियाणा के रेवाड़ी में गुरुवार-शुक्रवार देर रात पुलिस और दो बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। जड़थल गांव के पास हुई इस मुठभेड़ में बदमाशों की गोली एक सब इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, जिससे उनकी जान बच गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों बदमाशों के पैर में गोली मारकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपियों की पहचान रेवाड़ी के बोलनी निवासी मोहन और राजस्थान के खुशखेड़ा निवासी गोविंद के रूप में हुई है। दोनों पर हत्या, हत्या के प्रयास, फिरौती, लूट, डकैती और चोरी समेत 25 से अधिक मामले दर्ज हैं। 28 जून को आरोपियों ने बखापुर गांव में फायरिंग की थी। मुठभेड़ के बाद की तस्वीरें… अब सिलसिलेवार पढ़िए, क्या है पूरा मामला… बखापुर फायरिंग केस के आरोपियों की मिली थी सूचना DSP क्राइम सुरेंद्र श्योराण ने बताया कि बखापुर गांव निवासी रतिराम ने 28 जून को कसौला थाना पुलिस में शिकायत दी थी कि पल्सर बाइक पर सवार तीन युवक गांव में आए और फायरिंग कर फरार हो गए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। गुरुवार रात को धारूहेड़ा CIA को सूचना मिली थी कि 28 जून को बखापुर गांव में हुई फायरिंग के आरोपी कच्चे रास्ते से रावता से जड़थल की ओर जा रहे हैं। रुकने का इशारा करते ही पुलिस पर की फायरिंग सूचना मिलते ही CIA प्रभारी योगेश अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और रास्ते पर नाकेबंदी कर दी। नाकेबंदी के दौरान बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन दोनों ने भागने की कोशिश करते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। एक गोली SI फखरूद्दीन की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, जिससे उनकी जान बच गई। जवाबी फायरिंग में दोनों बदमाश घायल पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान दोनों बदमाशों के पैरों में गोली लगी और वे घायल होकर गिर पड़े। पुलिस ने मौके पर ही दोनों को गिरफ्तार कर इलाज के लिए रेवाड़ी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। मुठभेड़ की सूचना मिलते ही DSP हेडक्वार्टर रविंद्र कुमार, DSP क्राइम सुरेंद्र श्योराण, शहर थाना प्रभारी सूबे सिंह और गोकलगेट चौकी प्रभारी नरेश पुलिस टीम के साथ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एक और मामला दर्ज कर लिया है। दोनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड घायल आरोपियों की पहचान मोहन और गोविंद के रूप में हुई। मोहन पर हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, फिरौती और चोरी के 8-9 मामले दर्ज हैं। वहीं गोविंद के खिलाफ हरियाणा और राजस्थान में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती और फिरौती समेत 14-15 मामले दर्ज हैं।

हिस्ट्रीशीटर सलमान गद्दी समेत 5 बदमाश गिरफ्तार:मारपीट के मामले में फरार चल रहे एक लाख के इनामी अपराधी को दबोचा, देसी कट्टा और लाठी-डंडे बरामद

कानोता थाना पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर और इनामी अपराधी सलमान खान उर्फ सलमान गद्दी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सलमान के कब्जे से एक देसी कट्टा भी बरामद किया है, जबकि अन्य आरोपियों से लाठी-डंडे जब्त किए गए हैं। आरोपी मारपीट और हथियारों से हमला करने के मामले में नामजद थें। डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा ने बताया कि 11 जून को पीड़ित ने कानोता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 8 जून को आरोपियों ने उसे और उसके भाई को धमकाया था। इसके बाद 10 जून की रात करीब 8 बजे सलमान गद्दी, शाहरुख गद्दी, सोहेल गद्दी, रफीक गद्दी, आसिफ गद्दी सहित 15-20 अन्य लोगों ने लाठी-डंडों, सरियों और पिस्टल के साथ हमला कर गंभीर मारपीट की। इस संबंध में कानोता थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। सीसीटीवी और मुखबिर की सूचना से गिरफ्तारी जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मुखबिर तंत्र की मदद से फरार आरोपियों का पता लगाया। इसके बाद हिस्ट्रीशीटर और इनामी अपराधी सलमान खान उर्फ सलमान गद्दी को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से एक देसी कट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने इस कार्रवाई में रफीक खान, शाहरुख खान, नासिर खान और धनराज बैरवा उर्फ छोटू को भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी मामले में सोहेल खान और आसिफ खान को गिरफ्तार किया जा चुका है। कई संगीन मामलों में आरोपी है सलमान कानोता थाना प्रभारी मुनीन्द्र सिंह ने बताया कि सलमान गद्दी गंगापुर सिटी के उदेई मोड़ थाने का हिस्ट्रीशीटर और इनामी अपराधी है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, चोरी, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा वह गंगापुर सिटी के एक अन्य गंभीर मामले में भी फरार चल रहा था। पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

हाईकोर्ट ने पूछा- राज्य पशु ऊंट की संख्या कम क्यों:पशुपालन निदेशक को किया तलब, हाथियों की दुर्दशा पर PCCF को बुलाया

राजस्थान के राज्य पशु ऊंट की संख्या में लगातार हो रही कमी और जयपुर के हाथी गांव में हाथियों की दुर्दशा को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने आगामी 5 अगस्त को पशुपालन निदेशक को तलब करते हुए यह बताने के लिए कहा है कि प्रदेश में ऊंटों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार क्या कदम उठा रही है। वहीं, जयपुर के हाथी गांव में हाथियों को केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार खुराक और चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने से जुड़े मामले में वन विभाग का स्पष्ट जवाब न आने पर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) को आगामी 23 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। ये दोनों आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने आज स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। गौशाला की तरह ऊंटशाला क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा- जिस तरह गायों के संरक्षण के लिए गौशालाएं हैं, वैसे ही ऊंटों के लिए कोई ऊंटशाला क्यों नहीं है? सुनवाई के दौरान न्यायमित्र (Amicus Curiae) प्रतीक कासलीवाल ने अदालत को बताया कि साल 2015 में सरकार ऊंटों के संरक्षण के लिए कानून लेकर आई थी, लेकिन इस कानून के बनने के बाद से ही प्रदेश में लगातार ऊंटों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। क्रूरता के चलते हथिनी की मौत हुई
हाथी गांव में हाथियों की दुर्दशा को लेकर न्याय मित्र एडवोकेट शोभित तिवाड़ी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2008 में हाथियों के संरक्षण व कल्याण के लिए दिशा-निर्देश बनाए थे। इन दिशा-निर्देशों की पालना में हाथी गांव की क्या स्थिति है,यही इस याचिका का मूल उद्देश्य है। लेकिन राज्य सरकार इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रही है। उन्होने कहा कि इससे पहले मई में आईपीएल मैच के दौरान चंचल नाम की हथिनी को गुलाबी रंग से रंग दिया था। इस क्रूरता के कारण उस ​हथिनी की मौत हो गई थी। जबकि एक दूसरी हथिनी को सरकार स्वस्थ बता रही है। जबकि सच्चाई यह है कि बीमारी के कारण उसे जामनगर के वंतारा में भेजा गया है। इससे साफ है कि हाथियों की उचित देखभाल नहीं हो रही है। ——– यह खबर भी पढ़िए सरकार को मिली 16 साल के हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी:हाईकोर्ट ने कहा- खानपान-हेल्थ का ध्यान रखें; असम से अवैध तरीके से लाए थे जयपुर असम से मार्च में जयपुर लाए गए 16 साल के हाथी ‘मोहन’ की कस्टडी सरकार के पास ही रहेगी। हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाथी की कस्टडी महावत को देने के आदेश पर रोक लगा दी है। पढ़ें पूरी खबर

पटवारी के दलाल को 1 लाख रिश्वत लेते दबोचा:नामांतरण खोलने के बदले मांगी थी घूस; ACB की कार्रवाई की भनक लगते ही पटवारी फरार

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पटवारी के दलाल को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जयपुर जिले के चौमूं क्षेत्र में गुरुवार को एसीबी ने यह कार्रवाई की। वहीं भनक लगते ही आरोपी पटवारी सुरेंद्र स्वामी फरार हो गया। इसकी तलाश में ACB टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया- ACB चौकी जयपुर नगर चतुर्थ को शिकायत मिली थी कि परिवादी ने दिसंबर 2025 में चौमूं तहसील के आलीसर पटवार हल्के के चारणवास क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। रजिस्ट्री होने के बावजूद नामांतरण (म्यूटेशन) खोलने के लिए पटवारी सुरेंद्र स्वामी अपने निजी दलाल भैरूराम यादव से एक लाख रुपए की रिश्वत मांग रहा था। चाय की थड़ी पर रिश्वत लेते पकड़ा एसीबी ने शिकायत का 1 जुलाई को सत्यापन कराया। इसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। योजना के अनुसार चौमूं कस्बे में एचपी पेट्रोल पंप के पास स्थित चाय की थड़ी पर जैसे ही दलाल भैरूराम यादव ने परिवादी से एक लाख रुपए की रिश्वत ली। ACB टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। वहीं आरोपी पटवारी सुरेंद्र स्वामी पटवार हल्का आलीसर तहसील चौमूं कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। दलाल से की जा रही पूछताछ यह कार्रवाई उप-महानिरीक्षक (द्वितीय) ओमप्रकाश मीणा के सुपरवीजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक रामजीलाल और टीम ने की। वहीं ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरवीजन में आरोपी दलाल से पूछताछ की जा रही है। ACB ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट जज बोले-सरकार का विरोध करने पर केस क्यों:लोगों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा; पुलिस PM-CM की नौकर नहीं

बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने गुरुवार को कहा कि पुलिस सिर्फ इसलिए लोगों को शहर-इलाके से नहीं निकाल सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है या सरकार के खिलाफ नारे लगाए हैं। उन्होंने कहा- विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। पिटीशनर ने अभी ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए देश निकाला ऑर्डर क्यों? सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद के मामले में जस्टिस जामदार ने कहा- सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे, तो क्या आप केस कर देंगे? सईद अहमद पर सरकार के विरोध से जुड़े केस मामला SDPI के महासचिव सईद अहमद से जुड़ा है। मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ एक साल का देश निकाला आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ सईद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सईद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद समेत कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे थे। जस्टिस जामदार ने पूछा कि सईद के खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर करने का आदेश क्यों दिया गया? इनमें ज्यादातर मामले केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन से जुड़े थे। अहमद के खिलाफ देश निकाला का आदेश रद्द जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि सरकार के फैसलों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना किसी व्यक्ति को देश निकाला देने का आधार नहीं हो सकता। संविधान नागरिकों को अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सईद अहमद के खिलाफ जारी एक साल के देश निकाला आदेश को रद्द कर दिया और पुलिस व प्रशासन के दोनों आदेश निरस्त कर दिए। जस्टिस बोले- पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही जस्टिस जामदार ने कहा- दो दिन पहले मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक बच्चे विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी और स्टेट असेंबली में इस पर चर्चा हो रही थी। एक प्रेसाइडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाता है और वह कैसे एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चला गया, यह क्या है? सईद को भी साइड बदल लेनी चाहिए। वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। तुम्हारे (सईद) पास कुछ FIR हैं। केस बदलने के बारे में सोचो, वॉशिंग मशीन है। ——————————————- पूरी खबर पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक, ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पूरी खबर पढ़ें…