उदयपुर में कलेक्ट्रेट के बाहर आंगनबाड़ी कर्मचारियों का प्रदर्शन:सेंटर पर ताला लगाने की दी चेतावनी; राज्य कर्मचारी घोषित करने की मांग
राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्राम साथिनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंगनबाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को सरकार और विभाग के सामने रख रहे हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। अखिल राजस्थान महिला और बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ ने उदयपुर में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। मानदेय में वृद्धि समेत कई मांगों का समाधान नहीं संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष लक्ष्मी खैर ने बताया कि विभाग ने उन्हें 10 से 15 दिनों में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था। इसमें नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि और ग्रेच्युटी पेंशन जैसे बड़े मुद्दों पर नीतिगत निर्णय लेने की बात कही गई थी। वार्ता के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकारी अनदेखी से नाराज होकर संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अब भी मांग पूरी नहीं होने पर पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कर्मी कार्य बहिष्कार करेंगे। 9 महीने का मानदेय बकाया कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों का एक मांग-पत्र भी जारी किया है। इसमें सबसे प्रमुख मांग कुम्हेर (जिला डीग) परियोजना में ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद करने और पिछले कार्यकाल का ऑडिट कराने की है। इस परियोजना के कर्मचारियों का पिछले 9 महीनों का मानदेय बकाया है, जिसे तुरंत भुगतान करने की मांग की गई है। इसके अलावा कोटा चेचट परियोजना समेत कई अन्य जगहों पर भी 1 साल से भुगतान अटका हुआ है। गैर-आईसीडीएस काम करवाना बंद करें आंगनबाड़ी कर्मियों ने मांग की है कि उनसे बीएलओ, चुनाव कार्य, जनगणना और सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-आईसीडीएस काम करवाना पूरी तरह बंद किया जाए। इसके साथ ही बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार सेवा मुक्त हो चुके कर्मियों को 1 अप्रैल 2025 से ग्रेच्युटी का भुगतान तुरंत आदेश जारी कर किया जाए। पेंशन, मानदेय वृद्धि और मानदेय का एरियर की मांग संगठन की मांग है कि जब तक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाता, तब तक कोर्ट के फैसले के आधार पर कम से कम 20 से 25 हजार रुपए न्यूनतम मजदूरी दी जाए। रिटायरमेंट पर एक मुश्त 10 लाख रुपए नकद और पेंशन की सुविधा मिले, जो आखिरी मानदेय के 50 फीसदी से कम न हो। साथ ही मध्य प्रदेश की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने और बकाया एरियर देने की भी मांग उठाई गई है। आंगनबाड़ी सेंटर का भवन किराया भी भरने को मजबूर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन किराए का भुगतान भी पिछले 1 साल से विभाग ने नहीं किया है। इस वजह से कई कार्यकर्ता अपनी जेब से किराया भरने को मजबूर हैं। इसके अलावा 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने और महिला पर्यवेक्षकों के खाली पदों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भरने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

