शहजाद भट्टी को मुखौटा बनाकर नेटवर्क फैलाना चाहती है पाकिस्तानी-इंटेलिजेंस:एडीजी दिनेश एमएन बोले- सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने, जासूसी और हथियार सप्लाई कराने की साजिश
राजस्थान आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क और विदेशी गैंगस्टर्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एटीएस के एडीजी (ऑपरेशंस) दिनेश एमएन ने सोमवार को बताया कि पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी को पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ऑफिसर (पीआईओ) एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रभाव में लेकर उनसे जासूसी करवाना, संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाना और हथियारों की सप्लाई कराना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए शहजाद भट्टी को आगे रखकर काम करती है। हालांकि राजस्थान एटीएस, आईबी और अन्य एजेंसियों की सतर्कता के चलते अब तक इस नेटवर्क का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। भट्टी का नेटवर्क सक्रिय होने के मिले थे इनपुट दिनेश एमएन ने बताया कि पिछले कुछ समय से शहजाद भट्टी के नेटवर्क के सक्रिय होने की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑफिसर सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने, उन्हें पैसों और अन्य प्रलोभनों का लालच देने और संवेदनशील स्थानों के फोटो और वीडियो मंगवाने की कोशिश की जाती है। साथ ही सीमापार से हथियार भेजने के भी प्रयास किए जाते हैं। तकनीकी निगरानी से हर बार नाकाम हुई साजिश एडीजी ने दावा किया कि शहजाद भट्टी और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क का अब तक एक भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। जैसे ही किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है, एटीएस की तकनीकी टीम तुरंत सक्रिय होकर इनपुट की पुष्टि करती है और समय रहते कार्रवाई करती है। इस पूरे नेटवर्क पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और पंजाब पुलिस भी लगातार नजर रखे हुए हैं। कुछ लोगों को समझाइश, सक्रिय लोगों पर मुकदमा उन्होंने बताया कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग केवल संपर्क में पाए जाते हैं, जिन्हें समझाइश देकर पाबंद किया जाता है। वहीं जो लोग सक्रिय रूप से देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाती है। हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि कई लोगों को समझाइश कर निगरानी में रखा गया है। आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के साथ संयुक्त पूछताछ दिनेश एमएन ने बताया कि महत्वपूर्ण मामलों में एटीएस, आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ करते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी लालच या बहकावे में आकर देशविरोधी गतिविधियों का हिस्सा न बनें। यदि कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर गिरफ्तार किया जाएगा। एक साल में एटीएस की बड़ी कार्रवाई एडीजी ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच एटीएस ने आतंकवाद, अवैध हथियार, विस्फोटक, मादक पदार्थ तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के खिलाफ भी बड़ा अभियान रोहित गोदारा और वीरेंद्र चारण की गिरफ्तारी के सवाल पर एडीजी ने कहा कि दोनों राजस्थान सहित कई राज्यों में वांछित हैं। विदेश में मौजूद अपराधियों तक पहुंचने के लिए इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। एजीटीएफ और पुलिस लगातार उनके स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में पांच से छह मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं और अलग-अलग जिलों से करीब 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का प्रयास है कि फायरिंग, हत्या और रंगदारी जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जाए। जिन लोगों को धमकियां मिलती हैं, उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। लोकल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार दिनेश एमएन ने कहा कि रंगदारी और सुपारी से जुड़े अधिकांश मामलों में स्थानीय बदमाश विदेश में बैठे गैंगस्टर्स की मदद करते हैं। यही लोग टारगेट की रेकी करते हैं और अपराधियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देते हैं। ऐसे सभी स्थानीय सहयोगियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कुचामन सिटी के कारोबारी हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मामले में स्थानीय नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं तेलंगाना में भी गैंगस्टर्स की मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के लोकल नेटवर्क को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और फरार अपराधियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। यूएपीए के तहत कार्रवाई अवैध विस्फोटक पर कार्रवाई हथियार तस्करी पर कार्रवाई मादक पदार्थ तस्करी पर कार्रवाई फर्जी आधार गिरोह पर कार्रवाई सोशल मीडिया निगरानी और डी-रेडिकलाइजेशन

