भास्कर खुलासे के बाद कांग्रेस आक्रामक, फर्जीवाड़े पर उठाए सवाल:डोटासरा, पायलट, जूली बोले- स्कूल मरम्मत में 503 करोड़ के फर्जीवाड़े की जांच करवाएं सीएम

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की मरम्मत में 503 करोड़ के फर्जीवाड़े और भारी लापरवाही पर दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सरकारी स्कूलों की मरम्मत में हुए फर्जीवाड़े की जांच की मांग की। इन नेताओं ने सरकारी स्कूलों की मरम्मत की बदहाल हालत पर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा- बच्चों की सुरक्षा पर सफेदी करने वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए। एक साल बीतने को है, लेकिन ये तस्वीर बता रही है कि भाजपा सरकार ने झालावाड़ दुखांतिका से कोई सबक नहीं लिया। झालावाड़ में जिस स्कूल की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हुई, उस स्कूल की छत 1 साल बाद भी नहीं बन पाई, निर्माण कार्य आज भी अधूरा है। डोटासरा ने लिखा- अगर सरकार 1 साल में 1 स्कूल नहीं बना पाए तो अंदाजा लगाइए मरम्मत के नाम पर जारी 503 करोड़ रुपए से बाकी स्कूलों का काम किस स्तर और उसकी क्या सच्चाई होगी? भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा सरकार में 503 करोड़ रुपए से हुए मरम्मत कार्यों का सच बेहद शर्मनाक है। बच्चों की सुरक्षा पर भ्रष्टाचार करने वालों को बचाना भी अपराध डोटासरा ने लिखा- जयपुर, दौसा, नागौर, अजमेर और डीडवाना-कुचामन के स्कूलों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सरकारी स्कूलों में दरारों पर सिर्फ रंग-रोगन करके लाखों रुपए उठा लिए गए। कई जगह न छत बदली, न मरम्मत की, और न ही लेवलिंग की गई। वाटर प्रूफ करने और ड्रेनेज व्यवस्था के नाम पर कागजों में काम दिखाकर पैसा उठा लिया गया। जिन स्कूलों में 2 लाख रुपए तक खर्च होने थे। वहां 40 हजार रुपए का भी काम नहीं हुआ। ये सिर्फ घोटाला नहीं, मासूम बच्चों की जान से किया गया भाजपा का भ्रष्टाचार और खुला खिलवाड़ है। मुख्यमंत्री, बच्चों की सुरक्षा पर भ्रष्टाचार करने वालों को बचाना भी अपराध है। पायलट बोले- 503 करोड़ के फंड में भ्रष्टाचार की जांच करें कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने फर्जीवाड़े पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग उठाई। पायलट ने एक्स पर लिखा- पिपलोदी, झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में कई मासूम छात्रों की जान चली गई थी। इस दर्दनाक हादसे की पुनरावृत्ति नहीं हो, इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों की मरम्मत और जर्जर स्कूल भवनों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रदेश में फंड आवंटित किया था। एक साल बीत जाने के बावजूद भी जर्जर भवनों और स्कूलों के भवनों की मरम्मत और हालत में खासा सुधार नहीं हुआ। पायलट ने लिखा- मीडिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में यदि यह दावा किया जा रहा है कि कई सरकारी स्कूलों में मरम्मत कार्य पूरे हुए बिना ही भुगतान जारी कर दिया गया तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। यह वित्तीय अनियमितता तक सीमित मामला नहीं रहा, बल्कि हजारों बच्चों, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्न है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो पायलट ने लिखा- स्कूलों का बुनियादी ढांचा ही यदि कमजोर और असुरक्षित होगा, तो स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर अभिभावकों का विश्वास कैसे बढ़ेगा? बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि 503 करोड़ रुपए के फंड में कहीं भ्रष्टाचार, लापरवाही या फर्जीवाड़ा हुआ है, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जूली बोले- काम पूरा किए बिना पैसा उठाया, बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाला भास्कर खुलासे के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। जूली ने एक्स पर लिखा- प्रत्येक काम में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा ही इस भाजपा सरकार की असली पहचान बन चुका है। झालावाड़ में मासूम बच्चों की मौत जैसी हृदयविदारक घटना के बाद भी इस संवेदनहीन सरकार की आंखें नहीं खुली हैं। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की मरम्मत के लिए जारी 503 करोड़ के बजट में भारी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। बिना काम किए या आधे-अधूरे काम दिखाकर ही भुगतान उठा लिया गया है और हमारे नौनिहालों की जिंदगी को एक बार फिर मौत के साये में, दांव पर लगा दिया गया है। क्या सरकार फिर हादसे के इंतजार में है? जूली ने लिखा- इस सरकार के राज में भ्रष्टाचारियों को हर आपदा और हर हादसे में अपनी चांदी कूटने का खुला अवसर मिल रहा है। विडंबना देखिए कि इतने गंभीर मामले पर भी शिक्षा मंत्री चैन की बांसुरी बजा रहे हैं और पूरा महकमा गहरी नींद में सोया है। क्या सरकार प्रदेश में किसी अगले बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? मुख्यमंत्री तुरंत इस पूरे 503 करोड़ के घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करवाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करवाएं।
यह खबर भी पढ़ें… सरकारी स्कूलों में बच्चों की जान खतरे में!:छत को मरम्मत कर मजबूत बनाना था, सिर्फ पेंट कर दिया; 503 करोड़ के फंड में फर्जीवाड़ा झालावाड़ के पिपलोदी में पिछले साल स्कूल की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए 503 करोड़ का बजट जारी किया गया था। लेकिन जिम्मेदारों की नाक के नीचे ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ, जिसने हजारों मासूमों की जिंदगी फिर खतरे में डाल दी। आदेश थे 20 हजार से ज्यादा स्कूलों की जर्जर छतों को हटाकर मजबूत करने के, लेकिन दरारों में रंगाई-पुताई भरकर छोड़ दिया। (पूरी खबर पढ़ें)

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