तानों-वर्चस्व की जंग में गई डकैत जगन की जान:गैंग में दबदबा बनाने के लिए रची साजिश; जानिए 15 मिनट में कैसे हुआ मर्डर

अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को हुई डकैत जगन गुर्जर की हत्या महज आवेश में आकर किया गया अपराध नहीं था, बल्कि जेल के भीतर वर्चस्व की लड़ाई और लगातार मिल रहे तानों का नतीजा है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विष्णु जाट अपने गैंग के बीच खुद को बड़ा अपराधी साबित करना चाहता था। दूसरी ओर, 100 से ज्यादा मुकदमों वाला डकैत जगन गुर्जर, विष्णु के अपराधों और उसके परिवार को लेकर लगातार तंज कसता था। गैंग के साथियों के तानों और जगन के कमेंट्स (टिप्पणियों) से आहत होकर विष्णु ने जगन की हत्या का प्लान बनाया, फिर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। पुलिस की पड़ताल में वारदात से लेकर सबूत मिटाने तक की पूरी कहानी अब सिलसिलेवार (मिनट-टू-मिनट) सामने आ गई है। जेल में इस तरह हुई डकैत जगन गुर्जर की हत्या जगन को ‘जग्गू दादा’ कहकर बुलाते थे बंदी पुलिस सूत्रों के अनुसार, विष्णु जाट पहले से हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। उसकी गैंग के कई सदस्य भी उसी जेल में बंद हैं। गैंग के साथी अक्सर उसका मजाक उड़ाते थे कि उसके खिलाफ केवल छोटे-मोटे चोरी के मुकदमे दर्ज हैं और उसने अब तक कोई बड़ा अपराध नहीं किया है। दूसरी तरफ, मार्च 2026 में डकैत जगन गुर्जर को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया था। 100 से ज्यादा मुकदमों वाले जगन का जेल में अलग ही दबदबा था। बंदी उसे ‘जग्गू दादा’ कहकर बुलाते थे। जांच में सामने आया है कि जगन अक्सर विष्णु के अपराधों और उसके परिवार को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करता था। गैंग के साथियों के तानों और जगन के कमेंट्स से परेशान होकर विष्णु ने तय कर लिया कि यदि वह जगन जैसे बड़े अपराधी की हत्या कर देगा, तो जेल में उसका भी वर्चस्व स्थापित हो जाएगा। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कहा- मैंने जगन की हत्या कर उसका ‘उद्धार’ किया है। पहले साथ रहे दोनों भाई, फिर अलग की गई सेल पुलिस सूत्रों के अनुसार, जगन गुर्जर का भाई पप्पू गुर्जर पहले से ही हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। 29 मार्च 2026 को जगन के अजमेर जेल आने के बाद दोनों भाइयों को शुरुआत में एक ही वार्ड में रखा गया था। बाद में दोनों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। इस बीच दोनों के बीच विवाद होने के बाद 16 मई को जगन को अलग ब्लॉक में भेज दिया गया। इसके बाद 27 जून को विष्णु को जगन की सेल में शिफ्ट किया गया। इसके ठीक 2 दिन बाद 29 जून को उसने जगन की हत्या कर दी। ब्लॉक का CCTV चालू, लेकिन सेल का कैमरा खराब जांच में सामने आया कि जिस ब्लॉक में दोनों बंद थे, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में विष्णु का जगन की सेल में जाना, जेल प्रहरी की गश्त, कंपाउंडरों का इंजेक्शन लगाने आना और अन्य गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। हालांकि, जिस सेल में हत्या हुई, उसका कैमरा कई दिनों से खराब पड़ा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। उसने वारदात वाले दिन सुबह करीब 10 बजे सबूत मिटाने की नीयत से कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा दिया था, ताकि कुछ दिखाई न दे। जेल अधीक्षक बोले- टेक्निकल स्टाफ नहीं, कई कैमरे बार-बार खराब होते हैं जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया- जेल में सीसीटीवी की देखरेख के लिए कोई टेक्निकल स्टाफ नहीं है। करीब 20 कैमरे समय-समय पर अचानक खराब हो जाते हैं। इन्हें ठीक कराने के लिए 7-8 बार DOIT को मेल भी भेजा गया, लेकिन समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई। कई कैमरे अपने आप कुछ समय के लिए चालू हो जाते हैं और फिर बंद (नॉन-लाइव) हो जाते हैं। फिलहाल सिविल लाइंस थाना पुलिस ने आरोपी विष्णु जाट को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर पूछताछ की है। शनिवार (आज) को उसे दोबारा कोर्ट में पेश कर आगे की जांच और रिमांड को लेकर कार्रवाई की जाएगी। ——- ये खबरें भी पढ़िए… 1- डकैत जगन गुर्जर की हत्या करने वाला विष्णु जाट गिरफ्तार, बोला- वह मुझसे कपड़े धुलवाता था, कमेंट भी करता था; झगड़े के कारण मार डाला अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी विष्णु सिंह जाट को शुक्रवार सुबह 10.30 बजे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। हथियारबंद जवान जेल से कड़ी सुरक्षा में उसे लेकर सिविल लाइन थाना पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर 2- जगन गुर्जर की 3 मिनट में थम गई थीं सांसें:सुसाइड दिखाने की कोशिश; 13 फीट ऊंचे पंखे पर मिला गमछा, CCTV पर टूथपेस्ट लगाया अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को हुए कुख्यात डकैत जगन गुर्जर हत्याकांड में रोज नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और जेल प्रशासन की जांच में सामने आया है कि वारदात के बाद आरोपी विष्णु जाट ने हत्या को सुसाइड (आत्महत्या) का रूप देने की पूरी कोशिश की थी। पढ़ें पूरी खबर…

800 रुपए में पार्सल डिलीवरी, चाहे विस्फोटक हो या ड्रग्स:कैमरे पर रोडवेज ड्राइवर-कंडक्टर का अवैध सिस्टम, चेक तक नहीं करते कार्टन के अंदर क्या है?

राजस्थान रोडवेज की बसों में 900 से 1 हजार रुपए लेकर धड़ल्ले से अवैध पार्सल भेजे जा रहे हैं। ड्राइवर-कंडक्टर पार्सल तक चेक नहीं करते कि इसमें ड्रग्स या हथियार तो नहीं? पटाखे या अन्य विस्फोटक तो नहीं, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए संकट बन जाए। बड़े-बड़े बोरे और कार्टन तक यात्रियों के सामान के बीच या ड्राइवर के केबिन में रखकर भेजे जा रहे हैं। ये खतरनाक इसलिए है, क्योंकि कई बार इन्हीं पार्सलों के कारण यात्रियों को हादसे के वक्त बस से निकलने की जगह नहीं मिलती। इस खेल का खुलासा करने के लिए भास्कर रिपोर्टर ग्राहक (कस्टमर) बनकर ड्राइवर से मिला। एक पार्सल में ईंट रखकर टनकपुर (उत्तराखंड) भेजने के लिए कहा। ड्राइवर ने पार्सल भेजने के 800 रुपए लिए। चेक तक नहीं किया कि पार्सल में कोई विस्फोटक सामग्री तो नहीं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भास्कर रिपोर्टर जयपुर-टनकपुर रूट की बस के ड्राइवर लोकेश यादव से मिला। ड्राइवर ने कहा- किराया सामान देखकर तय होगा। 900 से 1000 रुपए लगेंगे। ड्राइवर के दावे की सच्चाई जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने खाली कार्टन लिया। उसमें केवल एक ईंट रखी और पैक कर दिया। ऊपर टनकपुर का पता लिख दिया गया, ताकि वह असली पार्सल जैसा लगे। इसके बाद टीम उसी रोडवेज बस के पास पहुंच गई। (रिपोर्टर ने ड्राइवर को 800 रुपए दे दिए।) चीफ मैनेजर को बुलाया तो ड्राइवर मौके से भाग गया रिपोर्टर ने सिंधी कैंप बस स्टैंड के चीफ मैनेजर राकेश राय को मौके पर बुलाया। चीफ मैनेजर के पहुंचते ही ड्राइवर वहां से निकल गया। बाद में उसे बुलाया गया। बस की जांच हुई तो वही कार्टन ड्राइवर के केबिन में रखा मिला। चीफ मैनेजर ने पूछा तो ड्राइवर ने माना कि पार्सल उसी ने रखा था। अपना बचाव करने के लिए ये भी बोला कि बाद में वह बिल लेकर आ जाता। चीफ मैनेजर राकेश राय ने कहा- पहले बिल होना चाहिए था। बिना बिल सामान नहीं ले जाया जा सकता। सामान ड्राइवर के केबिन में रखा गया था, जबकि वहां सामान रखने की अनुमति नहीं है। मामले की रिपोर्ट संबंधित आगार (सेक्शन) को भेज दी गई है। राजस्थान रोडवेज में लघु (छोटे) पार्सल सेवा के ये हैं नियम ——– ये खबरें भी पढ़िए… 1- राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर में भिड़ंत के बाद आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। पढ़ें पूरी खबर… 2- जयपुर में बिना जांच बसों में रखे जा रहे पार्सल:यात्रियों की जान से खिलवाड़; दौसा अग्निकांड के बाद ग्राउंड पर भास्कर का रियलिटी चेक दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 30 जून की देर रात हुए बस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। भीषण हादसे के बाद यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

22 जिलों में पहुंचा मानसून, आज पूरे राजस्थान में अलर्ट:जयपुर सहित कई जिलों में 2 इंच तक बारिश; जानें- आगे कैसा रहेगा मौसम

मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ ही राजस्थान में बारिश का दौर भी तेज होने लगा है। लेट आए मानसून ने आधे राजस्थान को कवर कर लिया है। शुक्रवार को जोधपुर, फलोदी, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। जैसलमेर में देर शाम रेत का बवंडर उठा। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश जयपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिले में करीब दो इंच रिकॉर्ड हुई। वहीं, मानसून के सक्रिय होने के बाद जयपुर सहित कई शहरों का दिन का तापमान 35 डिग्री से नीचे पहुंच गया। मौसम विभाग ने अगले 3 दिन पूरे राज्य में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अब देखिए- राजस्थान में बारिश की PHOTOS… मानसून के बड़े अपडेट्स जयपुर में सड़क धंसी, हॉस्पिटल में पानी भरा: मानसून दस्तक देने के साथ ही जमकर बरसने लगा है। 2 जुलाई को दिन में एंट्री करने वाले मानसून ने देर रात तक पूरा जिला कवर लिया और खूब बरसा। सड़कें लबालब हो गईं, कई कॉलोनियों में पानी भर गया। एक अंडरब्रिज डूब गया। लगातार बरसात के कारण सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में पानी भर गया। शहर की टोंक रोड पर 20 फीट का गड्ढा हो गया। कहां-कितनी बारिश हुई?: बांसवाड़ा के घाटोल में 41, केसरपुरा में 36, भूंगड़ा में 25, बीकानेर के बज्जू में 27, जोधपुर के भोपालगढ़ में 22, नागौर में 35, प्रतापगढ़ के अरनोद में 47, धरियावद में 20, टोंक के टोडारायसिंह में 36, उदयपुर के वल्लभनगर में 33 और बारापाल में 20 एमएम बरसात दर्ज हुई। इनके अलावा जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, फलोदी, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर समेत कई अन्य शहरों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। बीकानेर, जैसलमेर में तेज गर्मी, पारा 43 डिग्री: बारिश के बीच भी राजस्थान के कई हिस्सों में दिनभर उमस और गर्मी रही। सबसे अधिक तापमान 43 डिग्री सेल्सियस बीकानेर और जैसलमेर में दर्ज हुआ। इसके अलावा बाड़मेर में 42.3, श्रीगंगानगर में 41.5, जोधपुर में 40.8, फतेहपुर में 39, जालोर में 39.2, नागौर में 38 और चूरू में 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट:जयपुर, जोधपुर, कोटा की आर्थिक सेहत का बनेगा रिपोर्ट कार्ड; रोजगार-उद्योग, जनसंख्या जैसे आंकड़ों से बनेंगी विकास योजनाएं

राजस्थान के तीन शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा को अब आबादी या भौगोलिक विस्तार से नहीं, बल्कि आर्थिक क्षमता, रोजगार सृजन, महिला उद्यमिता और उद्योग-व्यापार की वास्तविक तस्वीर के आधार पर आंका जाएगा। शहर-स्तरीय सांख्यिकीय रिपोर्ट के तहत इनकी आर्थिक प्रोफाइल तैयार की गई है। इससे सरकार को पहली बार यह स्पष्ट आधार मिलेगा कि किस शहर की अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रों पर टिकी है। कहां रोजगार की संभावना अधिक और किन क्षेत्रों में निवेश या सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है। बता दें, शहरों के लिए ऐसी यह रिपोर्ट पहली बार तैयार की जा रही है। केंद्रीय राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अनिगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) 2025 के आंकड़ों का उपयोग कर शहर-स्तरीय आकलन तैयार करने की पहल की है। पहली बार देश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 46 शहरों (जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या के आधार पर) की एक व्यापक सांख्यिकीय रूपरेखा में आकलन किया गया है। जयपुर में 48.49 हजार प्रतिष्ठानों से 1 लाख को रोजगार रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में लगभग 48.49 हजार प्रतिष्ठान और 1.01 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां प्रति प्रतिष्ठान सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) करीब 4.68 लाख रुपए तथा सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 55 फीसदी है। जोधपुर में प्रति प्रतिष्ठान जीवीए लगभग 3.89 लाख और कोटा में 2.59 लाख रुपए है। तीनों शहरों में सेवा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। सरकार का उद्देश्य शहरों की आर्थिक ताकत और कमजोरियों की पहचान कर विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। अभी अधिकांश सरकारी आंकड़े राज्य या जिला स्तर तक सीमित रहते थे, जिससे शहर-विशेष की चुनौतियों और संभावनाओं का सटीक आकलन कठिन था। नई व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी। भविष्य में इन रिपोर्टों के आधार पर यह तय करना आसान होगा कि किस शहर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएं, कहां व्यापारिक अधोसंरचना बढ़ाई जाए, किस क्षेत्र में कौशल विकास कार्यक्रम चलें और किन शहरों में महिला उद्यमिता को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए। इससे सरकारी निवेश और बजट का उपयोग भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। रिपोर्ट कार्ड से यह फायदा होगा सरकार क्या चाहती है? पहली बार विकास के लिए आर्थिक संकेतकों को पैमाना बनाना बेहतर है। दूसरे शहरों की योजनाएं भी इसी आधार पर बने। -एनके जैन, अध्यक्ष, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई:2.07 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में CBI का एक्शन, राजस्थान-ओडिशा से 3 गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड सरकारी अधिकारी से 2.07 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में सीबीआई ने राजस्थान और ओडिशा में कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने राजस्थान के नागौर और ओडिशा के बालेश्वर सहित सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर की गई। सीबीआई ने इस संबंध में 25 मार्च 2026 को केस दर्ज किया था। सीबीआई के अनुसार ठगों ने एक सेवानिवृत्त लोक सेवक को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर धमकाया। आरोपियों ने उन्हें फर्जी कार्रवाई में फंसाने की बात कहकर कुल 2.07 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सबसे पहले एक ट्रस्ट के नाम से खोले गए बैंक खाते में जमा करवाई गई। इसके बाद रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई अन्य बैंक खातों में लेयरिंग कर ट्रांसफर किया गया। नागौर से एक, बालेश्वर से दो आरोपियों को पकड़ा सीबीआई ने 30 जून 2026 को राजस्थान और ओडिशा में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान राजस्थान के नागौर से एक आरोपी और ओडिशा के बालेश्वर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से संदिग्ध दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। सीबीआई इनकी जांच कर रही है। सीबीआई ने चेताया- डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं
सीबीआई ने लोगों को चेताया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी या रेगुलेटरी अथॉरिटी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती। एजेंसी ने अपील की है कि फर्जी निवेश योजनाओं, पुलिस या जांच अधिकारी बनकर किए जाने वाले कॉल और डिजिटल अरेस्ट की धमकियों से डरकर पैसा ट्रांसफर न करें। संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

भाषिणी बनेगी लोक सेतु:पब्लिक को मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी में मिलेंगे सरकारी आदेश

सुप्रीम कोर्ट के राजस्थानी भाषा को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने के आदेश के बाद अब एआई का ऐसा मॉडल आ रहा है, जो स्थानीय भाषाओं की ताकत में क्रांति ला देगा। पिछले 2 दिन जयपुर में ई-गवर्नेंस पर चले राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिविजन (डीआईबीडी) ने ऐसा मॉडल रखा, जिससे राजस्थान की मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी, हाड़ौती सहित तमाम स्थानीय भाषाओं का डेटासेट तैयार होगा। भाषिणी ने राजस्थानी भाषा मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन भी शुरू किया। नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी के ज़रिए भाषिणी गवर्नेंस सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में माप योग्य स्पीच और टेक्स्ट-आधारित एआई सेवाओं को सक्षम बनाएगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भाषिणी मॉडल को सराहा। उनका कहना है कि 2026 में भाषिणी की भागीदारी ने सरकारों और संस्थानों को नागरिकों की पसंदीदा भाषाओं में सेवाएं देने में सक्षम बनाकर, बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। नए एआई समाधानों, समुदाय-संचालित डेटासेट निर्माण और माप योग्य भाषा तकनीकों के माध्यम से भाषिणी डिजिटल इंडिया के उस दृष्टिकोण को मजबूत कर रही है, जहां भाषा कभी भी शासन व्यवस्था में बाधा न बने। भाषिणी के सीईओ की सीएम से मंत्रणा
डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीज़न (डीआईबीडी) के सीईओ अमिताभ नाग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ राज्य के लिए बहुभाषी एआई और भाषा-संबंधी तकनीकों को आगे बढ़ाने पर अलग से चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य फोकस भाषा-प्रधान नवाचार के ज़रिए समावेशी डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करना है। नाग ने कहा कि ‘एआई को सच में हर नागरिक की सेवा करने के लिए उन भाषाओं को समझना होगा, जो लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बोलते हैं। भाषा में हर योगदान, हर सत्यापित डेटासेट और हर नया इस्तेमाल हमें ऐसे एआई को बनाने के करीब ले जाता है, जो ज़्यादा समावेशी, ज़्यादा प्रतिनिधित्व करने वाला और सभी के लिए ज़्यादा सुलभ हो। 36 भारतीय भाषाओं पर काम हो चुका भाषिणी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सक्षम बना रही है, हर दिन 2 करोड़ से अधिक एआई के निष्कर्ष प्रोसेस करती है, 8 बिलियन से अधिक एआई इन्फरेंस को सक्षम बना चुकी, 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सहयोग, 20 से अधिक विशेष एनएलपी सेवाएं दे रही।

फि​जिकल टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन राजस्थान में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बने डॉ. पुरोहित

बीकानेर| फिजीकल टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन राजस्थान की प्रदेश कोर कमेटी के निर्णयों के तहत संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से नई नियुक्ति की गई। प्रदेश अध्यक्ष धूमल भाटी ने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पद पर डॉ. सुरेन्द्र पुरोहित को जिम्मेदारी सौंपी। नियुक्ति आदेश में उन्हें निदेशालय स्तर पर समन्वय कर संगठनात्मक काम आगे बढ़ाने, साथ ही निष्क्रिय पदाधिकारियों और जिला कार्यकारिणी के स्थान पर सक्रिय पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इस नियुक्ति पर जिला सुरेन्द्र हर्ष, माणक चन्द व्यास, प्रकाश सारस्वत, मोती नाईम लोदी, शिवराज सिंह, आनन्द स्वामी, एनडी पणिया, सुभाष मिश्रा, कैलाशचन्द, मनमोहन गहलोत, अजय बिंदू, कैलाश प्रजापत सहित कुछ पदाधिकारियों और खेल प्रेमियों ने खुशी जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि संगठन की गतिविधियां अधिक प्रभावी होंगी।

जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग:बारिश से टाटियावास टोल की दुपहिया लेन बनी तालाब, इसका दबाव दूसरी लेन पर बढ़ा, 2 घंटे जाम जैसे हालात

जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित टाटियावास टोल प्लाजा पर गुरुवार तड़के हुई झमाझम बारिश ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जयपुर से चौमूं जाने वाली दिशा में दुपहिया वाहनों के लिए बनाई गई लेन में पानी भर जाने से पूरी लेन तालाब जैसी बन गई। इससे बाइक सवारों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा और कई वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पानी भरने से टोल संचालन भी प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालात बिगड़ने पर टोल कर्मियों ने मोटर लगाकर पानी निकालने का प्रयास शुरू किया, लेकिन तब तक करीब दो घंटे तक जाम जैसे हालात बने रहे। दुपहिया लेन प्रभावित होने के कारण कई वाहन अन्य लेनों में पहुंच गए, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि बारिश से पहले जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी। उनका कहना था कि जब टोल पर प्रतिदिन लाखों रुपए का शुल्क वसूला जाता है, तो सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना भी टोल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। टोलकर्मियों ने मोटर लगाकर निकाला पानी

‘ग्राउंड जीरो’ से देखिए विकास:टोंक रोड पर 20 फीट का गड्ढा; 7 दिन पहले डाली थी गैस लाइन

राजधानी की मुख्य हार्टलाइन टोंक रोड पर शुक्रवार दोपहर अचानक सड़क धंस गई। निगम मुख्यालय से महज 200 मीटर पहले बीपी पेट्रोल पंप के सामने करीब 20 फीट लंबा, 15 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा गड्ढा हो गया। जिस समय सड़क धंसी, उस समय ट्रैफिक गुजर रहा था। गनीमत रही कि कोई वाहन गड्ढे में नहीं फंसा। जांच में सामने आया कि टोरेंट गैस कंपनी ने 7 दिन पहले यहां पीएनजी गैस लाइन डालने के लिए हॉरिजेंटल ड्रिलिंग की थी। लाइन डालने के बाद रीस्टोरेशन के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। नीचे मिट्टी में खाली जगह रह गई। गुरुवार रात तेज बारिश के बाद पानी रिसा, मिट्टी बैठी और शुक्रवार दोपहर सड़क धंस गई। पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्ट किया। जेडीए और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने टोरेंट कंपनी के प्रतिनिधियों को फोन किए, लेकिन कंपनी का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। 7 दिन में ड्रेनेज पाइप फटा, पानी भरा बारिश ने एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। इंजीनियरिंग विभाग की खामी के चलते एक सप्ताह पहले लगाया गया ड्रेनेज पाइप फट गया। पानी ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच गया। इमरजेंसी के पास स्थित ईसीजी रूम, माइनर ओटी और मुख्य कॉरिडोर में पानी भरने से मरीजों व स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ा। कॉरिडोर में फॉल्स सीलिंग का हिस्सा भी गिर गया। मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट किया। नोडल अधिकारी डॉ. राजेंद्र मांडिया ने बताया पाइप को ठीक करवा रहे हैं। देर रात 2 इंच पानी बरसा, सड़कें लबालब मानसून दस्तक देने के साथ ही जमकर बरसने लगा है। 2 जुलाई को दिन में एंट्री करने वाले मानसून ने देर रात तक पूरा जिला कवर लिया और खूब बरसा। सड़कें लबालब हो गईं, कई कॉलोनियों में पानी भर गया। मुरलीपुरा-झोटवाड़ा में दादी का फाटक अंडरब्रिज डूब गया। 5.5 मीटर (18 फीट) से गहरा अंडरपास में पानी भरने से वाहनों की आवाजाही बंद करनी पड़ी है। इससे एक तरफ से दूसरी तरफ जाने वाले वाहनों को करीब 4 से 5 किमी लंबा चक्कर लगाना जाना पड़ा। बीसलपुर का लेवल 313.57 आरएल मीटर पहुंचा: बीसलपुर में पानी की आवक शुरू हो गई। कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश के बाद दो दिन में बांध में 12 सेमी पानी आया। ऐसा पहली बार है कि मानसून के पहले दिन ही बांध में आवक हुई। शुक्रवार को बांध 313.57 आरएल मीटर पहुंच गया। अब कुल भराव क्षमता का 65.42 फीसदी पानी है। बड़ा सवाल: 15 जून से 15 सितंबर तक सड़क खोदने व ड्रिलिंग पर रोक, फिर कैसे खुद रहीं? जेडीए ने टोरेंट कंपनी को शहर में गैस लाइन के लिए ड्रिलिंग और रोड कटिंग की अनुमति दे रखी है, लेकिन अनुमति की शर्तों में साफ लिखा है कि मानसून सीजन में 15 जून से 15 सितंबर तक सड़क खोदने या ड्रिलिंग का काम नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद टोंक रोड जैसी मुख्य सड़क पर 7 दिन पहले गैस लाइन डालने का काम किया गया। परमिशन की शर्तों के अनुसार ड्रिलिंग के बाद सड़क की मरम्मत, केबल, सीवर या पेयजल लाइन डैमेज होने पर उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी कंपनी की है, लेकिन मौके पर सड़क धंसने के बाद भी कंपनी प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। सवाल यह है कि जब मानसून में काम पर रोक थी तो ड्रिलिंग किसकी अनुमति से हुई? काम के बाद रीस्टोरेशन की जांच किसने की? और टोंक रोड जैसी व्यस्त सड़क को बिना मजबूती जांचे ट्रैफिक के लिए कैसे छोड़ दिया गया? भुगतेगी जनता; 3 दिन तक टोंक रोड बाधित रहेगा
सड़क धंसने के बाद पुलिस ने तुरंत बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक को डायवर्ट किया। जेडीए और निगम टीम ने मौके पर पहुंचकर गड्ढे में मलबा और डब्ल्यूएमएम डलवाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थायी मरम्मत में तीन दिन लगेंगे। इस दौरान टोंक रोड की एक लेन बंद रहेगी। पीक आवर्स में यहां लंबा जाम लगने की आशंका है, क्योंकि यह सड़क शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल है और दिनभर भारी ट्रैफिक गुजरता है।

पीएचडी प्रवेश में 453 स्टूडेंट्स को नोटिस:जांच में नेट स्कोर बढ़ाने, वर्ष बदलने और दस्तावेज जोड़ने के मामले आए सामने

राजस्थान यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में 453 आवेदनों में गड़बड़ियां मिलने पर संबंधित छात्रों को नोटिस जारी किए गए हैं। यूनिवर्सिटी ने इन छात्रों से मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार शाम तक केवल 80 छात्रों ने ही मूल नेट स्कोर कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा कराए थे। शनिवार शाम तक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। राजस्थान यूनिवर्सिटी में दो साल बाद पीएचडी की 984 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई है। इस बार यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार प्रवेश लिखित परीक्षा के बिना इंटरव्यू और नेट स्कोर के आधार पर होना था। इसके लिए 2500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। 22 जून से इंटरव्यू शुरू होने थे, लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद प्रक्रिया रोक दी गई। कई अभ्यर्थियों ने अलग-अलग दस्तावेज जोड़कर पेश किए जांच में कई अभ्यर्थियों द्वारा दो अलग-अलग दस्तावेज जोड़कर प्रस्तुत करने के मामले सामने आए। प्रवेश के लिए 2024 का नेट स्कोर मान्य था, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों ने 2024 के स्कोर कार्ड में पूर्व की परीक्षा का स्कोर जोड़ दिया। कई मामलों में स्कोर कार्ड का वर्ष बदला गया, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने गलत जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए। प्रभादेवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का परीक्षा केंद्र सस्पेंड
पैरामेडिकल परीक्षा में नकल कराने के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कालवाड़ स्थित प्रभादेवी मेमोरियल पीजी कॉलेज का परीक्षा केंद्र सस्पेंड कर दिया है। अब इस कॉलेज में राजस्थान यूनिवर्सिटी से संबंधित कोई परीक्षा आयोजित नहीं होगी। खोरा बीसल थाना पुलिस और पश्चिम जिले की डीएसटी टीम ने हाल ही में पैरामेडिकल परीक्षा में नकल कराने के आरोप में कॉलेज संचालक समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कमेटी ने पीएचडी आवेदनों की जांच की है। कमी मिलने पर 453 छात्रों से मूल दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 8 जुलाई को अंतिम सूची जारी करने की तैयारी है। -प्रो. अल्पना कटेजा, कुलगुरु, राजस्थान यूनिवर्सिटी