प्रतापगढ़ मंडी में जलभराव-अतिक्रमण को लेकर किसानों का प्रदर्शन:7 दिन का अल्टीमेटम, नीलामी डोम में निजी माल भरने का आरोप; मंडी अधिकारी ने दिया सुधार का आश्वासन
प्रतापगढ़ कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों ने भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिन के भीतर सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने मंडी अधिकारी उज्ज्वल जैन से मुलाकात की और अपनी नाराजगी व्यक्त की। 7 दिन का अल्टीमेटम दिया
जिला सह प्रचार प्रमुख सागर प्रजापत ने बताया कि किसानों ने मंडी परिसर में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग करते हुए प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। प्याज-लहसुन डोम में जलभराव
किसानों ने प्याज और लहसुन नीलामी डोम में जलभराव तथा पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि बारिश में उन्हें अपनी उपज पानी और कीचड़ के बीच रखनी पड़ती है, जिससे फसल खराब होने और आर्थिक नुकसान का खतरा रहता है। नीलामी डोम में निजी माल रखने का आरोप
किसानों ने नीलामी डोमों पर व्यापारियों द्वारा निजी माल के भंडारण और अतिक्रमण का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के लिए बने डोमों का उपयोग निजी गोदाम के रूप में हो रहा है, जिससे उन्हें परेशानी होती है। किसान संघ ने ऐसे अतिक्रमण तत्काल हटाने की मांग की।
इसके अतिरिक्त, किसानों ने मंडी परिसर में गंदगी, कचरे के ढेर, जलभराव से बढ़ते मच्छरों के प्रकोप, अनुपयोगी किसान भवन और किसानों के लिए बैठने, पेयजल तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। पदाधिकारी बोले- सम्मानजनक वातावरण देना प्रशासन की जिम्मेदारी
जिला बीमा एवं अनुदान प्रमुख दिलखुश पाटीदार ने कहा – किसानों को सम्मानजनक वातावरण में अपनी उपज बेचने की सुविधा उपलब्ध कराना मंडी प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं संभाग मंडी विपणन सदस्य बाबूलाल गायरी ने कहा कि किसानों के लिए बने नीलामी डोमों पर निजी भंडारण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इन्हें तत्काल खाली कराया जाना चाहिए। मंडी अधिकारी बोले- 7 दिन में होगा सुधार
मंडी अधिकारी उज्ज्वल जैन ने किसानों की सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सात दिनों में आवश्यक सुधार और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो किसानों के साथ मिलकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मंडी प्रशासन की होगी।

