भाषिणी बनेगी लोक सेतु:पब्लिक को मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी में मिलेंगे सरकारी आदेश
सुप्रीम कोर्ट के राजस्थानी भाषा को स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल करने के आदेश के बाद अब एआई का ऐसा मॉडल आ रहा है, जो स्थानीय भाषाओं की ताकत में क्रांति ला देगा। पिछले 2 दिन जयपुर में ई-गवर्नेंस पर चले राष्ट्रीय सम्मेलन में डिजिटल इंडिया भाषिणी डिविजन (डीआईबीडी) ने ऐसा मॉडल रखा, जिससे राजस्थान की मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी, हाड़ौती सहित तमाम स्थानीय भाषाओं का डेटासेट तैयार होगा। भाषिणी ने राजस्थानी भाषा मॉडल ट्रेनिंग हैकाथॉन भी शुरू किया। नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी के ज़रिए भाषिणी गवर्नेंस सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में माप योग्य स्पीच और टेक्स्ट-आधारित एआई सेवाओं को सक्षम बनाएगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने भाषिणी मॉडल को सराहा। उनका कहना है कि 2026 में भाषिणी की भागीदारी ने सरकारों और संस्थानों को नागरिकों की पसंदीदा भाषाओं में सेवाएं देने में सक्षम बनाकर, बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। नए एआई समाधानों, समुदाय-संचालित डेटासेट निर्माण और माप योग्य भाषा तकनीकों के माध्यम से भाषिणी डिजिटल इंडिया के उस दृष्टिकोण को मजबूत कर रही है, जहां भाषा कभी भी शासन व्यवस्था में बाधा न बने। भाषिणी के सीईओ की सीएम से मंत्रणा
डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीज़न (डीआईबीडी) के सीईओ अमिताभ नाग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ राज्य के लिए बहुभाषी एआई और भाषा-संबंधी तकनीकों को आगे बढ़ाने पर अलग से चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य फोकस भाषा-प्रधान नवाचार के ज़रिए समावेशी डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करना है। नाग ने कहा कि ‘एआई को सच में हर नागरिक की सेवा करने के लिए उन भाषाओं को समझना होगा, जो लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बोलते हैं। भाषा में हर योगदान, हर सत्यापित डेटासेट और हर नया इस्तेमाल हमें ऐसे एआई को बनाने के करीब ले जाता है, जो ज़्यादा समावेशी, ज़्यादा प्रतिनिधित्व करने वाला और सभी के लिए ज़्यादा सुलभ हो। 36 भारतीय भाषाओं पर काम हो चुका भाषिणी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सक्षम बना रही है, हर दिन 2 करोड़ से अधिक एआई के निष्कर्ष प्रोसेस करती है, 8 बिलियन से अधिक एआई इन्फरेंस को सक्षम बना चुकी, 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सहयोग, 20 से अधिक विशेष एनएलपी सेवाएं दे रही।

