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बिजनेसमैन डाटा की बहू ने पति-परिजनों पर कराया मुकदमा दर्ज:रात 12 बजे महिला थाने पहुंचीं; मानसिक रूप से प्रताड़ित करने-घर में नहीं घुसने देने का आरोप

अलवर में तेल और घी के बड़े बिजनेसमैन विजय डाटा के बेटे सौरभ डाटा के बाद बहू शिखा डाटा ने भी पति और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। शिखा डाटा ने महिला थाने में बुधवार रात करीब 12 बजे यह मामला दर्ज कराया। वहीं अगले दिन गुरुवार सुबह शिखा डाटा दोबारा महिला थाने पहुंची। वहां पुलिस से बातचीत के बाद परिवार के लोगों के साथ गुरुग्राम के लिए निकल गई। रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद शिखा डाटा ने कहा- पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। वहीं महिला थाना प्रभारी कांता ने बताया- शिखा डाटा ने अपने पति और परिवार के खिलाफ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और घर में नहीं घुसने देने की रिपोर्ट दी है। इस मामले के जांच की जाएगी। सौरभ डाटा ने तीन दिन पहले कराई थी रिपोर्ट दर्ज असल में 3 दिन पहले सौरभ डाटा ने कोतवाली थाने में पत्नी शिखा डाटा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें सौरभ ने पत्नी शिखा पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। अब पत्नी ने भी पति पर उसी तरह के आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। दोनों रिपोर्ट की पुलिस जांच करेगी। शिखा ने वीडियो जारी कर टॉर्चर करने के लगाए थे आरोप शिखा डाटा ने कुछ दिन पहले वीडियो जारी करते हुए कहा था कि मुझे अपने घर में घुसने नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया- मेरे साथ लगे स्टाफ को भी टॉर्चर किया जा रहा है। वीडियो में यह भी कहा कि मेरे कमरे की लाइट काट दी और रसोई गेैस का कनेक्शन भी काट दिया। डाटा ग्रुप के ऑफिस के कई कर्मचारियों पर पति को बहकाने के आरोप भी लगाए गए थे। अब इन सब मामलों की पुलिस जांच करेगी। बता दें कि यह अलवर का हाई प्रोफाइल मामला है। डाटा ग्रुप बड़ा बिजनेस ग्रुप है। इस मामले में डाटा ग्रुप कंपनी के सीनियर कर्मचारी एसके पारीक ने कहा- यह परिवार का मामला है। पति-पत्नी दोनों ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है। अब पुलिस जांच करेगी।
बिजनेसमैन के बेटे-बहू में विवाद, मानसिक प्रताड़ना का आरोप:महिला बोली- मेरे कमरे की लाइट बंद की, रसोई गैस का कनेक्शन भी काट दिया

बिजनेसमैन ने बेटे को किया किडनैप, VIDEO:मुंबई से फ्लाइट से आए किडनैपर, 12 दिन लॉज में रुके; आरोपी पिता राजस्थान से गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के मुरैना में गुटखा कारोबारी ने अपने 4 साल के बेटे का स्कूल से किडनैप कर लिया। किडनैपर मुंबई से फ्लाइट से ग्वालियर पहुंचे, फिर मुरैना आए। यहां साईं पैलेस लॉज में 12 दिन रुककर रेकी की। रेनबो पब्लिक स्कूल से किडनैप कर लिया। प्रबंधन ने बिना आईडी कार्ड मांगे बच्चे को सौंप दिया। रेनबो पब्लिक स्कूल के बाहर लगे CCTV कैमरे में अपहरण की वारदात कैद हुई। आरोपी कारोबारी नीरज उर्फ नीलेश राजपूत का ड्राइवर कार्तिकेय को कंधे पर उठाकर ले जाता नजर आया। आगे पिता स्कूटी लेकर खड़ा था। 3 साथियों के साथ वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी पिता को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। साथ में बच्चा भी है। साथी अभी फरार हैं। दैनिक भास्कर की टीम साईं पैलेस लॉज पहुंची, जहां आरोपी पिता साथियों के साथ ठहरा था। टीम ने कमरे का जायजा लिया। लॉज संचालक से अपहरण से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान लॉज संचालक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पढ़िए अपहरण कांड की पूरी कहानी… वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए… टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे बच्चे को सौंपा मुरैना पुलिस के मुताबिक, 14 जुलाई को आरोपी लॉज संचालक की स्कूटी से स्कूल पहुंचा। छुट्टी के बाद एक आरोपी बच्चे का नाम बताकर उसे अपने साथ ले गया। टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे या पूछताछ किए मासूम को उसके हवाले कर दिया। इसके बाद आरोपी बच्चे को लेकर फरार हो गए। जांच में सामने आया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। पुलिस की कई टीमें राजस्थान में दबिश दे रही हैं। फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती, प्यार और फिर शादी कार्तिकेय अपहरण कांड की जांच के बीच परिवार की जानकारी सामने आई। नीलेश राजपूत और इशू यादव की पहचान 2018 में फेसबुक के जरिए हुई थी। दोनों की दोस्ती प्यार में बदली और 2019 में उन्होंने शादी कर ली। नीलेश मूल रूप से राजस्थान के पाली का रहने वाला है। शादी के समय वह मुंबई में रहकर गुटखा का कारोबार करता था। शादी के बाद दोनों करीब तीन-चार साल मुंबई में साथ रहे। इसी दौरान बेटे कार्तिकेय का जन्म भी मुंबई में हुआ। विवाद के बाद बेटे को लेकर मुरैना आ गई पत्नी पत्नी इशू यादव का आरोप है कि बेटे के जन्म के बाद नीलेश शराब और नशे का आदी हो गया। वह उसके साथ मारपीट करने लगा। विवाद बढ़ने पर जनवरी 2025 में इशू बेटे कार्तिकेय को लेकर मायके मुरैना आ गई। अगस्त 2025 में नीलेश मुरैना पहुंचा और बेटे को अपने साथ मुंबई ले गया। समझौते का भरोसा मिलने पर इशू भी उसके साथ मुंबई चली गई, लेकिन कुछ समय बाद फिर विवाद और मारपीट शुरू हो गई। जनवरी 2026 में इशू दोबारा बेटे कार्तिकेय को लेकर मुरैना लौट आई। तब से दोनों पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे थे। करीब 2 महीने पहले इशू और उसकी मां ममता यादव ने कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया था। स्कूल में दाखिले की जानकारी मिलते ही मुरैना पहुंचा पिता पुलिस जांच के अनुसार, इसी शैक्षणिक सत्र में कार्तिकेय का रेनबो पब्लिक स्कूल में दाखिला कराया गया। जानकारी मिलने पर पिता नीलेश मुंबई से मुरैना पहुंचा। पुलिस का मानना है कि इसी दौरान उसने बेटे के अपहरण की योजना बनानी शुरू कर दी। 26 जून को नीलेश राजपूत मुरैना पहुंचा और साईं पैलेस लॉज में एक साथी के साथ कमरा लेकर रुका। इसके बाद वह लौट गया। फिर 28 जून से 14 जुलाई तक 3 साथियों के साथ दोबारा उसी लॉज में ठहरा। इसी दौरान उसने बच्चे की गतिविधियों, स्कूल आने-जाने के रास्तों, छुट्टी के समय और सुरक्षा व्यवस्था की रेकी कर पूरी साजिश तैयार की। 28 जून से 14 जुलाई तक साथियों के साथ लॉज में रुका लॉज संचालक अमित गुप्ता ने बताया कि नीलेश पहली बार 26 जून को एक साथी के साथ आया था। इसके बाद 28 जून से 14 जुलाई तक वह दो साथियों के साथ लगातार लॉज में रुका। इस दौरान एक अन्य व्यक्ति भी कई बार वहां आया-जाया और कई बार ठहरा। कमरा बदला, किराए में भी किया मोलभाव शुरुआत में आरोपियों को कमरा नंबर-6 दिया गया था। बाद में 3 लोगों के रहने पर उन्हें कमरा नंबर-4 दे दिया गया। पहले कमरे का किराया 800 रुपए प्रतिदिन था, जबकि बड़े कमरे का किराया 1200 रुपए तय हुआ। बातचीत के बाद आरोपी 1000 रुपए प्रतिदिन देने पर सहमत हो गए। खाना खाने के बहाने कई बार ले गए स्कूटी लॉज संचालक के मुताबिक, आरोपी कई बार खाना खाने का बहाना बनाकर उनकी स्कूटी ले जाते थे और कुछ देर बाद लौटा देते थे। इससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। 14 जुलाई को भी उन्होंने कुछ देर के लिए स्कूटी मांगी। संदेह से बचने के लिए उसी स्कूटी से रेनबो पब्लिक स्कूल पहुंचे। स्कूल के बाहर इंतजार, फिर बच्चे को लेकर हुए फरार 14 जुलाई को एक आरोपी स्कूल के बाहर छुट्टी का इंतजार करता रहा। दोपहर करीब 2 बजे छुट्टी होते ही वह स्कूल के गेट के अंदर पहुंचा, बच्चे का नाम बताया और उसे लेने की बात कही। गेट पर मौजूद टीचर ने बिना पहचान पत्र मांगे और बिना पूछताछ के कार्तिकेय को उसके साथ भेज दिया। आरोपी बच्चे को करीब 100 मीटर तक गोद में लेकर पैदल चला। इसके बाद वह पहले से स्कूटी लेकर खड़े साथी के पास पहुंचा और दोनों फरार हो गए। कुछ देर बाद कार्तिकेय की नानी उसे लेने स्कूल पहुंचीं तो बच्चा नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और अपहरण का मामला दर्ज कराया। सीसीटीवी फुटेज से खुली साजिश की परतें पुलिस ने स्कूल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। शुरुआत में मां और नानी आरोपी की पहचान नहीं कर सकीं। पुलिस की सख्ती और सीसीटीवी फुटेज दिखाने के बाद मां ने बताया कि बच्चे को ले जाने वाला व्यक्ति उसके पति का ड्राइवर नीरज है। वहीं, लॉज संचालक ने भी सीसीटीवी देखकर उस स्कूटी चालक की पहचान कर ली, जो आरोपी पिता के साथ लॉज में ठहरा था। अपहरण के बाद आरोपी चंबल नदी की ओर पहुंचे। नाकेबंदी और पीछा किए जाने की आशंका में उन्होंने स्कूटी सड़क किनारे लावारिस छोड़ दी। चंबल के पास छोड़ी स्कूटी, दूसरे वाहन से भागे स्कूटी छोड़ने के बाद आरोपी ने लॉज संचालक को फोन कर कहा, “स्कूटी चंबल नदी के पास खड़ी है, जाकर ले जाना। अब हम वापस नहीं आएंगे।” बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। कुछ समय बाद उसने वॉयस मैसेज भेजकर स्कूटी चंबल पुल के पास खड़ी होने की जानकारी दी। बुधवार देर रात उसने फिर मैसेज कर पूछा कि स्कूटी ले आए क्या। किराए और पैसों की बात होने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिस ने साईं पैलेस लॉज के कमरे की तलाशी लेकर ट्रॉली बैग, कपड़े और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं बरामद कीं। राजस्थान से पिता गिरफ्तार, बच्चा भी साथ में 15 जुलाई को पुलिस को मोबाइल लोकेशन धौलपुर होते हुए राजस्थान के पाली क्षेत्र में मिली। इसके बाद पुलिस की कई टीमें राजस्थान रवाना की गईं। 16 जुलाई को जांच में पिता नीलेश राजपूत की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे अपहरण की साजिश का मुख्य आरोपी माना। पुलिस ने पिता को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव का बेटा गिरफ्तार:खुद को IPS बताकर लेडी साइंटिस्ट से ठगी, MBBS छात्र से ₹15 लाख हड़पे

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के 35 वर्षीय बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने फर्जी IPSअधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को कभी IPS, कभी RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेता था। पुलिस ने उसे गुरुवार को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पिता वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। बचपन से अधिकारियों का रुतबा देखकर वह भी IPS बनना चाहता था। उसने कई साल UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया। दो मामलों में 19.60 लाख की ठगी का आरोप राजपुर थाने में दर्ज दो मुकदमों में आरोपी पर एक MBBS छात्र से कंपनी रजिस्ट्रेशन और स्टार्टअप फंडिंग के नाम पर 15 लाख रुपए, जबकि एक महिला वैज्ञानिक से रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने के नाम पर 4.60 लाख रुपए ठगने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और सेना के 25 लोगो, सेना/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां, 3 फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया है। लोगों का भरोसा जीतकर करता था ठगी एसपी सिटी के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और प्रभावशाली बातचीत के जरिए वह लोगों का भरोसा जीतता था। इसी का फायदा उठाकर वह कई सालों से धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस अब उसके अन्य पीड़ितों और संभावित आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। दो शिकायतें मिलने के बाद एसएसपी देहरादून के निर्देश पर राजपुर थाना पुलिस ने विशेष टीम बनाई। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और क्या इस गिरोह में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. बड़े अधिकारियों के सामने खुद को बताया RAW एजेंट- देहरादून की राजपुर थाना पुलिस ने खुद को फर्जी IPS, रॉ (RAW) एजेंट और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक हाई-प्रोफाइल शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्त का नाम आर० यशोवर्धन (35) है, जो उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस० रामास्वामी का बेटा है। एसएसपी देहरादून की सटीक रणनीति पर राजपुर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान अभियुक्त को CSI तिराहा, ओल्ड मसूरी रोड से दबोच लिया। 2. ठगी के दो बड़े मामले (19.60 लाख की धोखाधड़ी)- राजपुर थाने में आरोपी यशोवर्धन के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमों के आधार पर BNS की धाराओं 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत केस दर्ज है 3. UPSC में फेल हुआ, तो चुना जालसाजी का रास्ता- एसपी सिटी प्रमोद कुमार के मुताबिक, यशोवर्धन के पिता उत्तराखंड के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह बचपन से ही अधिकारियों का रुतबा देखकर IPS बनने का सपना देखता था। उसने कई साल तक UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। असफलता हाथ लगने पर उसने लोगों पर रौब झाड़ने के लिए फर्जी आईडी, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को IPS, RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया। वह प्रभावशाली बातचीत से लोगों का भरोसा जीतकर टेंडर, नौकरी और सरकारी काम का झांसा देता था। 4. पुराना हाई-प्रोफाइल मारपीट का मामला- विधायक के बेटे पर आरोप- इस पूरे ठगी के घटनाक्रम के पीछे एक पुराना और गंभीर मारपीट का मामला जुड़ा हुआ है, जिसमें यही महाठग (यशोवर्धन) पीड़ित था- अभी देहरादून पुलिस ने फर्जी IPS यशोवर्धन को गिरफ्तार कर उसे कोर्ट में पेश करने की कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली है। पुलिस अब उसके जाल में फंसे अन्य पीड़ितों का पता लगाने और उसके संभावित पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है। —————————————————- ये खबर भी पढ़ें… देहरादून में गलत ऑपरेशन से 15 वर्षीय बच्चे की मौत:डॉक्टर के पास नहीं थी डिग्री, 4 साल बाद कोर्ट के आदेश पर FIR देहरादून में पांच डॉक्टरों पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगा है, जिससे 15 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में डॉक्टर आलम (संचलाक) के पास डिग्री नहीं होने की बात सामने आई है। गौरव सड़क हादसे में घायल हो गया था। (पढ़ें पूरी खबर)

कांग्रेस का पीएम को लेटर, कहा- सर्वदलीय बैठक बुलाएं:मानसून सत्र में चढ़ावा चोरी का मामला उठाएगी, संशोधन बिल का विरोध करेगी

कांग्रेस मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का मुद्दा उठाएगी। इसके अलावा, सरकार के संशोधन बिलों का विरोध करेगी। यह फैसला गुरुवार को कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक में लिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक यानी परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा। इसमें सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
बैठक सोनिया गांधी के आवास पर हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर और जयराम रमेश समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। रमेश ने कहा- महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें, तो पूरा समर्थन देंगे न्यायाधीशों को हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी बैठक में चर्चा हुई। इस विधेयक की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाई गई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार किया है। कांग्रेस इस विधेयक का भी मजबूती से विरोध करेगी। कांग्रेस एफसीआरए का भी विरोध करेगी- रमेश यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ मानसून सत्र में लाती है तो कांग्रेस इसका पूरी तरह विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक दोबारा लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। अगर इसे फिर पेश किया गया तो पार्टी दोबारा इसका विरोध करेगी। ———————- ये खबरे भी पढ़ें… राहुल गांधी के वॉइस सैंपल का मिलान नहीं होगा:MP-MLA कोर्ट के फैसले को स्पेशल रिविजनल कोर्ट ने रखा बरकरार सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में चल रहे मानहानि केस में राहुल गांधी के वॉइस सैंपल की जांच कराने की मांग वाली निगरानी याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

गगनयान मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने ISRO छोड़ा:10 महीने में 100 इस्तीफे; केंद्रीय मंत्री बोले- लोग आते-जाते रहते हैं

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) से पिछले 10 महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। नौकरी छोड़ने वाले वैज्ञानिकों में गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक भी शामिल हैं। इसके बाद अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नया निर्देश जारी किए हैं। नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया अब सख्त की जाएगी। इस मामले में केंद्रीय विज्ञान और तकनीकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO में लोग आते-जाते रहते हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे LVM3 प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यही लॉन्च व्हीकल गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा। इस्तीफे पर अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा सरकारी निर्देश में कहा गया है कि इस्तीफों और VRS के मामलों में तेजी आने से गगनयान और दूसरे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ रहा है। नौकरी छोड़ने के आवेदनों पर अब अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा। पहले ISRO केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को इस्तीफे और VRS स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। स्टार्टअप्स में जा रहे वैज्ञानिक एक साल में लगातार दो मिशन असफल इस्तीफों से ISRO को हाल के मिशनों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ISRO का “वर्कहॉर्स” माना जाने वाला PSLV एक साल के भीतर लगातार दो मिशनों में असफल रहा। पहला- जनवरी में EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और व्यावसायिक पेलोड लेकर उड़ान भरने वाला PSLV-C62 तीसरे चरण के अंत में आई गड़बड़ी के कारण तय रास्ते से भटक गया था। दूसरा- मई 2024 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी असफल रहा था। उड़ान के करीब 203 सेकेंड बाद तीसरे चरण में चेंबर प्रेशर अचानक गिर गया, जिससे रॉकेट 529 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस कक्षा तक नहीं पहुंच सका और मिशन समाप्त करना पड़ा। इस दौरान रडार सैटेलाइट भी नष्ट हो गया। इसरो अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने के मिशन पर काम कर रहा इन चुनौतियों के बावजूद ISRO अब गगनयान मिशन, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रखे हुए है। गगनयान का लक्ष्य भारत को अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बनाना है।
———————— ये खबर भी पढ़ें: इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, मिशन फेल:तीसरी स्टेज में गड़बड़ी आई; अन्वेषा सहित 16 सैटेलाइट लेकर गया था श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला मिशन ‘PSLV-C62’ फेल हो गया है। रॉकेट 12 जनवरी को सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से 16 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। ISRO चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया। पढ़ें पूरी खबर…

हाईकोर्ट बोला- 5 दिन में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख बताएं:राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम अवमानना की कार्रवाई शुरू करें

प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर आज भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि 5 दिन में (सोमवार तक) चुनाव की तारीख बताएं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सोमवार तक ओबीसी आयोग रिपोर्ट देने की तारीख और राज्य सरकार लॉटरी निकालने की तारीख बताए। सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव मौजूद रहे। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें। इस पर चुनाव आयुक्त ने कहा- हमारी तैयारी पूरी है। हमें सरकार ने आरक्षण का वर्गीकरण करके नहीं दिया है। अगर सरकार हमें लॉटरी निकालकर दे देती है तो हम 2 दिन में चुनाव प्रक्रिया शुरू कर देंगे। वहीं ओबीसी आयोग को लेकर कोर्ट ने कहा- जब 9 मई 2025 को सरकार ने 3 महीने के लिए आयोग का गठन किया था तो आपने रिपोर्ट क्यों नहीं दी। अगर आपसे काम नहीं होता है तो मना कर दीजिए। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार क्यों?
हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह से कहा- जब हमने कह दिया था कि आप ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करेंगे तो आपने चुनाव की घोषणा क्यों नहीं की। ओबीसी आयोग से कहा- जब हमने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दे रखे थे तो आपने रिपोर्ट देने के लिए 14 अगस्त तक की डेट कैसे दे दी। इसका मतलब है कि आप कोर्ट के आदेश की पालना नहीं करना चाहते हैं। इस पर ओबीसी आयोग ने कहा- हमारे पास संसाधन नहीं थे, इसलिए रिपोर्ट नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने कहा- हर हाल में आदेश की पालना होनी चाहिए। दरअसल, हाईकोर्ट ने 22 मई के आदेश से सरकार और चुनाव आयोग को प्रदेश में 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग ने इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं की है। — ये खबर भी पढ़िए- पंचायत-निकाय चुनाव नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी:कहा-इलेक्शन कमीशन सक्षम नहीं तो हम किसी को अपॉइंट कर देते हैं; CEC को तलब किया राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव तय समय सीमा में नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा- अगर राज्य चुनाव आयोग इलेक्शन कराने में सक्षम नहीं है तो हम हाईकोर्ट से किसी को चुनाव कराने के लिए अपॉइंट कर देते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा- हमें सख्त आदेश पास करने के लिए मजबूर मत कीजिए। (पढ़िए पूरी खबर)

आग लगने से घायल स्मार्ट मीटर कंपनी कर्मचारी की मौत:परिजन बोले- अधिकारियों ने पेट्रोल डालकर जलाया है, 2 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

बीकानेर में स्मार्ट मीटर कंपनी में काम करने वाले युवक की झुलसने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। युवक की 14 जुलाई को मौत हुई थी, जिसके बाद 15 जुलाई को परिजनों ने कंपनी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ पेट्रोल डालकर आग लगाने का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी में कार्यरत लक्ष्मण सिंह से जुड़ा है, जो कंपनी में इंचार्ज के पद पर काम कर रहा था। अनूपगढ़ में थी पोस्टिंग अनूपगढ़ निवासी रेवंत सिंह राजपूत ने पुलिस में दर्ज एफआईआर में बताया कि उनका बेटा लक्ष्मण सिंह स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी में बतौर इंचार्ज काम करता था। उसकी पोस्टिंग श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ में थी। नौकरी से हटाने का लगाया आरोप एफआईआर के अनुसार कंपनी के बीकानेर डिवीजन के अधिकारियों ने लक्ष्मण सिंह को काम से हटा दिया था। परिजनों का आरोप है कि फर्जी आदेश जारी कर उसे नौकरी से हटाया गया। जानकारी लेने बीकानेर ऑफिस पहुंचा था रेवंत सिंह ने रिपोर्ट में बताया कि लक्ष्मण सिंह एक जुलाई को खुद को हटाए जाने के संबंध में जानकारी लेने के लिए बीकानेर डिवीजन ऑफिस पहुंचा था। आरोप है कि वहां उसके साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई। पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान लक्ष्मण सिंह पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। इसके बाद उसे तुरंत पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 14 जुलाई को उसकी मौत हो गई। दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 3(5) के तहत नीतिश माथुर और एकराज पंवार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी डिग्री से नौकरी दिलाने वाला आरोपी गिरफ्तार:लेक्चरर भर्ती- 2022 में नियुक्ति का आरोप,अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की प्राध्यापक (हिंदी) स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नियुक्ति दिलाने के मामले में सहयोगी आरोपी को गिरफ्तार किया है। SOG ने आरोपी को 13 जुलाई को पकड़ा था, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि मामले में सहयोगी आरोपी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को गिरफ्तार किया है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार (चित्तौड़गढ़) से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री पेश की थी। RPSC की ओर से सत्यापन कराने पर यह डिग्री फर्जी पाई गई। फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने में निभाई अहम भूमिका जांच में सामने आया कि आरोपी अशोक विश्नोई ने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध करवाई। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने विश्वविद्यालय के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंद्रूल से संपर्क कर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में फर्जी डिग्री हासिल करने वाली ब्रह्मा कुमारी सहित अब तक कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने के संबंध में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी आरोपी की भूमिका की जांच जारी है। पहले भी हो चुका है गिरफ्तार SOG के अनुसार अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को जोधपुर जिले के कुड़ी भगतासनी थाना क्षेत्र में दर्ज एक अन्य प्रकरण में भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक अजयपाल लाम्बा, उप महानिरीक्षक भुवन भूषण यादव, पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में SOG अजमेर यूनिट द्वारा की गई। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और जांच जारी है

लड़की की सगाई को लेकर विवाद,पिता-पुत्र समेत 3 की हत्या:दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार, चाकू से हमला किया

बीकानेर में लड़की के रिश्ते को लेकर हुई कहासुनी में पिता-पुत्र समेत तीन की हत्या कर दी। मामला गुरुवार दोपहर 1:20 बजे का छत्तरगढ़ के खारवाली में सुरजनवाली गांव का है। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी मृदुल कच्छावा और FSL टीम मौके पर पहुंची। खाजूवाला डीएसपी आकांक्षा चौधरी ने बताया- खारवाली निवासी जिंदू खान (55) पुत्र याकूब खान और उसके बेटे करीम खान (25) और साले सुरजनवाली निवासी अलीशेर (60) पुत्र अब्दे खान की हत्या की गई है। हमले में नब्बू (35) घायल हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार दो पक्षों में विवाद हुआ था। झगड़ने वाले दोनों पक्ष आपस में मामा-भांजा लगते हैं। चाकू से एक-दूसरे पर हमला किया गया। पुलिस ने तीनों शवों को छत्तरगढ़ के सरकारी अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया। इसके बाद से अस्पताल में भारी भीड़ इकट्‌ठा हो गई। हॉस्पिटल में पुलिस फोर्स तैनात की गई। बहस खूनी संघर्ष में बदली जानकारी के अनुसार- गांव में पेस्टिसाइड छिड़काव के बाद परिवार का सदस्य बीमार हो गया था। ऐसे में जिंदू, करीम, अलीशेर और नब्बू समेत अन्य लोग हालचाल पूछने गए थे। इसी दौरान परिवार में एक लड़की की सगाई कराने को लेकर बहस हो गई थी। बहस खूनी संघर्ष में बदल गई और मौके पर मौजूद लोगों ने एक-दूसरे पर चाकू से वार कर दिए। 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया- मामले ने गुलाबनबी, याकूब अली, बरकत अली, अकरम, रहमत अली, मशूक, अल्ताफ, सिकंदर समेत 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि सभी आरोपी लाठी, कुल्हाड़ी और बड़ी छुरियां लेकर आए थे कंटेंट : इस्माइल खान, खाजूवाला

SOG ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री रैकेट का आरोपी पकड़ा:पहले पकड़े गए आरोपियों को बिचौलिया बनकर फर्जी डिग्रियां दिलाई थी

चित्तौड़गढ़ में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की साल 2022 की हिंदी लेक्चरर (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और गिरफ्तारी की है। SOG ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि उसने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के नाम पर फर्जी एमए (हिंदी) की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी समेत 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने की कोशिश SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया- RPSC में हिंदी लेक्चरर भर्ती के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री जमा कराई थी। आयोग ने जब डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन कराया तो पता चला कि यह डिग्री मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने जारी ही नहीं की थी। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि अभ्यर्थी ने फर्जी डिग्री और झूठे शपथ पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश की थी। ऐसे जुड़ा अशोक चोटिया का नाम जांच आगे बढ़ी तो एसओजी को पता चला कि अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया ने इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने महेंद्र सिंह राव के जरिए डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट की व्यवस्था करवाई। जांच में यह भी सामने आया कि अशोक ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर यह फर्जी डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए। SOG का कहना है कि जांच में अशोक की भूमिका के पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अदालत से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। 15 गिरफ्तार, दूसरे मामलों में भी आरोपी एसओजी के अनुसार इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अशोक विश्नोई के खिलाफ इसी तरह फर्जी डिग्री दिलाने से जुड़ा एक और मामला भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज है, जिसमें उसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसके अलावा वह जोधपुर जिले के कुड़ी भगतासनी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी पहले गिरफ्तार हो चुका है। एसओजी का कहना है कि पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के जरिए और कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।