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कब्रिस्तान में हार्ट अटैक से व्यक्ति की मौत:पौधों में पानी देने गया था, घरवालों को जमीन पर पड़ा मिला

पाली शहर में कब्रिस्तान में इबादत करने और पौधों को पानी देने गए व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजनों के पहुंचने पर बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े मिले। तुरंत टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रोज की तरह इबादत करने गए थे भाई अख्तर हुसैन ने बताया, जंगीवाड़ा निवासी मोहम्मद रमजान (52) पुत्र हब्बास खान पेशे से ड्राइवर थे। गुरुवार सुबह वे अपनी वैन से बच्चों को स्कूल छोड़कर लौटे। इसके बाद रोज की तरह रामलीला मैदान के पास स्थित कुरैशी समाज के कब्रिस्तान में फातिया (इबादत) करने और वहां लगे पौधों में पानी देने पहुंचे। अचानक गिरे, लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया इबादत के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे कब्रिस्तान में ही गिर पड़े। वे पहुंचे तो रमजान बेहोशी की हालत में पड़े थे। लोगों की मदद से बेहोशी की बिना देर किए टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक से मौत हो बताया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों को खुलासा हो होगा। — हार्ट से मौत की ये खबरें भी पढ़ें … 1. पाली में चलती बस में ड्राइवर की मौत का VIDEO:इंदौर से जोधपुर जा रही थी लग्जरी स्लीपर, हार्ट-अटैक की आशंका पाली में एक चलती बस में 36 साल के ड्राइवर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। यह घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पूरी खबर पढ़िए 2. SMS ​हॉस्पिटल के डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत:महाराष्ट्र में सेमिनार के दौरान सीने में उठा दर्द; तीन दिन पहले महिला की सर्जरी की थी सीनियर जनरल सर्जन डॉ. बी.एल. यादव की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। वे महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में सर्जन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गए थे। पूरी खबर पढ़िए

50 लाख में स्कूल लेक्चरर का पेपर खरीदने वाला गिरफ्तार:7 लाख लेकर पेपर पढ़ाया; सीनियर टीचर का पेपर 29 अभ्यर्थियों तक पहुंचाया

स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में एसओजी ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 50 लाख में लीक पेपर खरीदकर अभ्यर्थियों को पढ़ाया था। सरकारी नौकरी भी दिलवाई थी। एसओजी ने आरोपी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ (45) निवासी पापड़िया की ढाणी, जयपुर को गुरुवार को चौमूं से गिरफ्तार किया है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- एसओजी थाने में दर्ज केस की जांच में सामने आया था कि पेपर लीक गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह ने तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से करीब 60 लाख रुपए में प्रश्नपत्र हासिल किए थे। इसके बाद कृषि विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल और शारीरिक शिक्षा सब्जेक्ट के सॉल्व पेपर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। 50 लाख में खरीदा पेपर, 7 लाख लेकर कराया चयन जांच में खुलासा हुआ कि विनोद रेवाड़ ने करीब 50 लाख रुपए में 4 सब्जेक्ट के सॉल्व प्रश्नपत्र खरीदे। इसके बाद कृषि विज्ञान विषय के अभ्यर्थी अशोक कुमार यादव को 7 लाख रुपए में प्रश्नपत्र पढ़ाया। परिणामस्वरूप अशोक कुमार यादव का चयन स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) के पद पर हुआ। वो वर्तमान में सीकर जिले के श्रीमाधोपुर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (देवराला) में कार्यरत था। 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। इस मामले में उसने 8 अभ्यर्थियों से करीब 10-10 लाख रुपए लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। आरोपी को साल 2025 में ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। 29 अभ्यर्थियों से वसूले 57 लाख रुपए वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 के मामले में भी जांच में सामने आया कि विनोद रेवाड़ ने 29 अभ्यर्थियों से करीब 57 लाख रुपए लेकर उन्हें परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र पढ़ाया। इस मामले में आरोपी अरुण शर्मा उर्फ राजेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली 13 जुलाई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने विनोद रेवाड़ की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 16 जुलाई को SOG की विशेष टीम ने चौमूं के बराला हॉस्पिटल के पास से बुधवार को गिरफ्तार किया। । 20 जुलाई तक रिमांड पर आरोपी को न्यायालय में पेश कर 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। SOG उससे पेपर लीक नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और अवैध लेनदेन के संबंध में पूछताछ कर रही है।

8 साल के बच्चे को टीचर ने बुरी तरह पीटा:बेहोश हुआ तो घरवालों को बुलाया, गणित की कॉपी घर भूल गया था स्टूडेंट

बाड़मेर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में टीचर ने मैथ की कॉपी नहीं लाने पर चौथी क्लास के स्टूडेंट को डंडे से बुरी तरह पीटा। जिससे बच्चा बेहाश हो गया। यह देख स्कूल स्टाफ घबरा गया। एक टीचर ने स्टूडेंट के परिजनों को सूचना दी। परिजन स्कूल पहुंचे और बच्चे को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। मामला चौहटन के टीपीएस पब्लिक स्कूल का गुरुवार सुबह 10 बजे का है। डॉ. रतनाराम चौधरी ने बताया – हॉस्पिटल में बच्चे को करीब 10.30 बजे लाया गया था। तुरंत इलाज के बाद हालत में सुधार आ गया था। करीब आधे घंटे तक ओपीडी में निगरानी में रखा गया। मारपीट से नीले निशान (नील) पाए गए। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी। वहीं स्कूल संचालक का कहना है कि मामले में टीचर की गलती होगी तो उसे स्कूल से निकाल देंगे।
कॉपी भूलने पर टीचर ने डंडे से पीटा बच्चे के पिता ने बताया – मेरा 8 साल का बेटा प्राइवेट टीपीएस पब्लिक स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ता है। गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे बस से स्कूल गया था। करीब 10 बजे क्लास में गणित के टीचर गणपत ने कॉपी मांगी। बच्चे ने बताया कि वह गणित की कॉपी घर पर भूल गया है। कल लेकर आएगा। इस पर टीचर ने डंडे से उसकी पिटाई कर दी। जिससे उसे चक्कर आने लगे और बच्चा अचेत हो गया। इसके बाद स्कूल के अन्य टीचर जसवंत ने हमें फोन करके तबीयत बिगड़ने की सूचना दी। सूचना मिलने पर हम स्कूल पहुंचे तो बेटे की तबीयत खराब थी। पूछने पर उसने बताया कि गणित की कॉपी घर पर छूटने पर शिक्षक ने डंडे से पीटा। इसके बाद हम उसे चौहटन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज कराया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे का का बयान लिया। स्कूल संचालक जगदीश विश्नोई ने बताया- बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था, जिस पर टीचर ने उसे डंडे से मारा। मैं फिलहाल बाहर हूं। वापस लौटने पर पूरे मामले की जांच करेंगे और यदि टीचर की गलती पाई गई तो उसे स्कूल से हटा दिया जाएगा।

जांच समिति ने माना- मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति अनुसूचित:1950 से लेकर अब तक के सरकारी रिकॉर्ड से पुष्टि; वैध प्रमाण पत्र लगाया था

नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति ने जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को वैध माना है। समिति ने कहा कि राज्यमंत्री बागरी के परिवार के राजपूत होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। समिति के मुताबिक, शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके उलट 1950 से लेकर अब तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज उनके परिवार के अनुसूचित जाति से संबंधित होने की पुष्टि करते हैं। समिति ने कहा- आजादी के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण सबूत हैं। इनमें राज्यमंत्री के परिवार की जाति बागरी दर्ज है। ऐसे रिकॉर्ड में बाद में बदलाव की संभावना कम मानी जाती है इसलिए इन्हें विशेष महत्व दिया गया। कांग्रेस नेता ने लगाई थी याचिका दरअसल, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 24 अप्रैल को याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने फैसला राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति पर छोड़ा था। कोर्ट ने समिति को 60 दिन में निर्णय लेने को कहा था लेकिन इसने 14 जुलाई को ही अंतिम फैसला दे दिया। समिति के अध्यक्ष गुलशन बामरा, सचिव सत्येंद्र सिंह जबकि सदस्य- विषय विशेषज्ञ मातादीन कनेरिया और सुधीर श्रीवास्तव थे। परिवार के दूसरे दस्तावेजों से भी बागरी होने की पुष्टि समिति ने राजस्व अभिलेख, खसरा-खतौनी, परिवार की वंशावली, स्कूल रिकॉर्ड, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज, पूर्व में जारी जाति प्रमाणपत्र, परिवार के सदस्यों के अभिलेख और संबंधित विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड जांचे। सभी में परिवार की जाति बागरी ही दर्ज मिली। किसी भी दस्तावेज में परिवार को राजपूत नहीं बताया गया। राजस्व अधिकारी, जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी और अन्य विभागों से रिपोर्ट भी ली गई। सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद फैसला किया गया। शिकायतकर्ता न्यायिक मंच पर चुनौती देने स्वतंत्र समिति ने अपने अंतिम निष्कर्ष में कहा- उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र वैध है। इसे निरस्त करने का कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं मिला इसलिए शिकायत को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि शिकायतकर्ता इस निष्कर्ष से असहमत हैं तो वे सक्षम न्यायिक मंच पर इसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। शिकायतकर्ता बोले- 6 महीने में पूर्व मंत्री हो जाएंगी कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा- छानबीन समिति ने देखभाल समिति का काम किया है। इस समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी की देखभाल बहुत अच्छे से की है। संवैधानिक दस्तावेजों और तथ्यों को दरकिनार कर दिया गया। ये खबर भी पढ़ें… मंत्री प्रतिमा बोलीं- अपराधियों जैसे सलूक से दुखी हूं मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सुनवाई की। मंत्री ने वंशावली से संबंधित दस्तावेज समिति को देते हुए कहा- मैं बागरी समाज से हूं, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल है। मेरी जाति साबित करने के लिए गांव में मुनादी कराई गई, अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। मैं इससे दुखी हूं। पढे़ं पूरी खबर…

बेटी का मर्डर करने वाले को 10 साल की जेल:पढ़ाई नहीं करने पर मुक्कों से मार-मार कर ली थी जान, 13 गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

आबूरोड के गांधीनगर क्षेत्र स्थित प्रेम नगर में 11वीं कक्षा की छात्रा मोमिना की हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। छात्रा की मौत का मामला अप्रैल 2024 में सामने आया था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। 5 अप्रैल 2024 को छात्रा के चाचा अकरम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके भाई फतेह मोहम्मद ने फोन कर उसे घर बुलाया। मौके पर पहुंचने पर उसकी भतीजी मोमिना घर के फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता ने बेटी के साथ मारपीट की थी। आरोप था कि फतेह मोहम्मद ने लकड़ी, थप्पड़ों और मुक्कों से मोमिना की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आबूरोड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 11वीं की परीक्षा शुरू होने वाली थी जांच में सामने आया था कि मोमिना की 11वीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली थी। परिवार के अनुसार पिता पढ़ाई को लेकर उस पर लगातार दबाव बना रहा था। घटना से पहले भी दो दिनों तक उसके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। मोमिना ने इससे पहले 10वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह आबूरोड के अर्बुद स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा थी। चाचा की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था हत्या का मामला घटना के बाद मोमिना के चाचा अकरम की शिकायत पर आबूरोड सिटी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। 13 गवाहों और 30 दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए, 30 दस्तावेज और दो आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फतेह मोहम्मद को दोषी माना। अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी फतेह मोहम्मद को 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत का यह फैसला करीब दो वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। — इस घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- पढ़ाई नहीं करने पर पिता ने बेटी को मार डाला: परीक्षा के 2 दिन पहले से कर रहा था मारपीट; बेहोश हुई तो हॉस्पिटल लेकर पहुंचे घरवाले पिता ने 11वीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी को पीट-पीटकर मार डाला। परीक्षा की तैयारी नहीं करने से पिता नाराज था। बेटी को लकड़ी और मुक्का से इतना मारा कि उसे अंदरूनी चोटें आईं। (पूरी खबर पढ़ें)

सरकार ने 20 लाख में खरीदे 10-लाख कीड़ों के सिर:2 रुपए में बिका एक 'साल बोरर'; सुबह पकड़ते हैं ग्रामीण, डेढ़ लाख पेड़ खा गए कीड़े

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में वन विभाग जंगलों को बचाने कीड़ों का सिर कटवा रहा। साल बोरर कीड़े का सिर 2 रुपए में खरीद रहा है। मकसद कीड़ों को खत्म कर साल (सरई) के जंगलों को बचाना है। अब तक करीब 10 लाख कीड़ों के सिर काटे जा चुके हैं। बदले में ग्रामीणों को 20 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। दरअसल, साल बोरर कीट ने जिले के जंगलों को प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद 1 लाख 46 हजार 784 प्रभावित पेड़ों की कटाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग कीड़ों की संख्या कम करने के लिए ग्रामीणों की मदद से विशेष अभियान चला रहा है। ये तस्वीरें देखिए कीड़ों को पकड़ने के लिए सुबह जंगल पहुंचते हैं ग्रामीण एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि बारिश के मौसम में हर दो हेक्टेयर क्षेत्र में साल का एक पेड़ काटकर उसकी छाल को पीटने के बाद छोड़ दिया जाता है। साल के रस की खुशबू से आकर्षित होकर कीट वहां रस पीने पहुंचते हैं। इसके बाद सुबह 5 से 7 बजे के बीच ग्रामीण जंगल पहुंचकर उन्हें पकड़ लेते हैं। पकड़े गए कीटों के सिरों की माला बनाकर उन्हें कीट संग्रहण केंद्रों पर जमा कराया जाता है। इसके लिए खारीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में 5 संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। 30 जुलाई के बाद एकत्र किए गए इन कीटों को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 30 हजार हेक्टेयर जंगल में फैला साल बोरर का प्रकोप वन विभाग के एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगे सरई (साल) के पेड़ साल बोरर कीट से प्रभावित हैं। कीटों को पकड़ने का अभियान 20 जून से ग्रामीणों की मदद से लगातार चलाया जा रहा है। वन विभाग ने साल बोरर कीट का एक सिर लाने पर 2 रुपए देने की व्यवस्था की है। अब तक ग्रामीण करीब 10 लाख कीड़ों के सिरों की माला बनाकर वन विभाग कार्यालय में जमा कर चुके हैं। प्रत्येक व्यक्ति के जमा किए गए सिरों की अलग-अलग एंट्री की जा रही है। ऐसे पकड़े जाते हैं साल बोरर कीड़े एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि सरई के पेड़ों की छाल काटकर उसे पीटा जाता है। इससे निकलने वाली सुगंध करीब 3 किलोमीटर दूर तक फैलती है। इसकी गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट रस पीने पहुंचते हैं। कुछ समय के लिए सुस्त हो जाते हैं। वन विभाग पेड़ों की छाल का रेजिन कूटकर उसका पाउडर भी घरों के आसपास रखवाता है। इसकी गंध से आकर्षित होकर कीट वहां पहुंचते हैं, जहां ग्रामीण उन्हें पकड़ लेते हैं। सूरज निकलने से पहले कीटों को पकड़ लिया जाता है, क्योंकि बाद में वे उड़ने लगते हैं। पकड़े गए कीटों के सिर काटकर उनकी माला बनाई जाती है। वन विभाग के कर्मचारियों के पास जमा कराई जाती है। इसके बाद प्रति सिर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। आखिर पेड़ों के लिए इतना खतरनाक क्यों है यह कीड़ा साल बोरर केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। संख्या बढ़ने पर यह पेड़ के तने में घुसकर उसे धीरे-धीरे खाता है। इसके कारण तने के नीचे बुरादे जैसा पाउडर जमा होने लगता है। वन विभाग के मुताबिक, समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह एक पेड़ से दूसरे और फिर पूरे जंगल में तेजी से फैल जाता है। इससे बड़ी संख्या में साल के पेड़ सूख जाते हैं। हर-भरे पेड़ नष्ट हो जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। 1.46 लाख पेड़ों की कटाई की तैयारी वन विभाग की प्रोडक्शन DFO भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल ने 1 लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ों को चिह्नित किया है। कीड़ों ने इन पेड़ों को खोखला कर दिया है। इनकी कटाई के लिए भारत सरकार की अनुमति का इंतजार है। अनुमति मिलने के बाद कटाई में करीब 3 महीने लगेंगे। 2 DFO की मौजूदगी में कीड़ों का खात्मा वन विभाग के मुताबिक, अब तक इस अभियान के तहत करीब 20 लाख रुपए का भुगतान बन चुका है, जो ग्रामीणों में वितरित किया जाएगा। पकड़े गए कीटों को जुलाई के अंत में 2 डीएफओ अधिकारियों की मौजूदगी में खत्म किया जाएगा। अभियान भी जुलाई के अंत तक चलेगा। कटाई के बाद मिलेगी हजारों क्यूबिक मीटर लकड़ी अभियान के लिए सामान्य, उत्पादन, मंडला वेस्ट और मंडला ईस्ट के चार डीएफओ अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। पेड़ों की कटाई के बाद करीब 46,390 क्यूबिक मीटर इमारती लकड़ी और 43,390 क्यूबिक मीटर जलाऊ लकड़ी मिलने की उम्मीद है। इनकी ई-नीलामी होगी। लकड़ी को गाड़ा सरई और करंजिया काष्ठ गार में सुरक्षित रखा जाएगा। डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर का यह पहला बड़ा हमला नहीं है। इससे पहले 1997-98 में भी इसके प्रकोप के कारण बड़ी संख्या में साल के पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी। क्या होता है साल बोरर? साल बोरर (Sal Borer) ऐसा कीट है, जो केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसका वैज्ञानिक नाम हॉपलोसेरामबिक्स स्पिनिकोर्निस (Hoplocerambyx spinicornis) है। यह साल के तने में सुरंग बनाकर लार्वा और कीड़े के रूप में रहता है। इसकी लंबाई करीब 2 इंच होती है और जीवन चक्र लगभग एक वर्ष का होता है। साल के जंगलों में इसका प्रकोप इतना गंभीर माना जाता है कि इसे कई बार महामारी की तरह भी देखा जाता है। साल बोरर से बचाव के उपाय वन विभाग के अनुसार, साल बोरर कीट के नियंत्रण के लिए संक्रमित पेड़ों की कटाई, कीड़ों को पकड़कर उनके सिर नष्ट करना और आवश्यकता पड़ने पर कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

नामांतरण के बदले रिश्वत लेते पटवारी का VIDEO:दावा-12 बीघा जमीन के लिए 15 हजार रुपए लिए, 36 हजार मांगे थे

सवाईमाधोपुर में खंडार उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुरेड़ी में पटवारी पप्पू कोली का नामांतरण के बदले पैसे लेते हुए वीडियो सामने आया है। किसान से जमीन के नामांतरण के बदले नकदी लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में पहले तय हुई रकम को लेकर बातचीत भी सुनाई दे रही है। घटन 25 जून की की है, जिसका वीडियो आज सामने आया ह। मामले में पटवारी ने कहा कि वीडियो के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में परिवादी से कई बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसिव नहीं किया। पहले 36 हजार मांगे, बाद में 15 हजार में हुआ सौदा जानकारी के अनुसार, 12 बीघा कृषि भूमि का नामांतरण कराने के लिए पहले 3 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से 36 हजार रुपए मांगे गए थे। बाद में 15 हजार रुपए में बात तय हुई। ग्रामीण बोले- बिना पैसे नहीं होते राजस्व के काम ग्रामीणों का आरोप है कि नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व कार्य भी बिना पैसे दिए नहीं हो रहे हैं। किसानों को अपनी ही जमीन के वैध दस्तावेज बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अवैध मांगों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण गौरी शंकर ने इसी पटवारी के खिलाफ पहले भी रिश्वत मांगने की शिकायत अधिकारियों से की थी। — रिश्वत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए … 12 साल पहले घूस में मांगा था कैश और मुर्गा:थाने में रिश्वत लेते पकड़ा गया था एएसआई, 4 साल की कैद और जुर्माना लगाया एसीबी कोर्ट ने 12 साल पुराने रिश्वत के मामले में फैसला सुनाते हुए तत्कालीन एएसआई को 4 साल के कठोर कारावास और 15 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। पूरी खबर पढ़िए

जयकारों के बीच भगवान जगन्नाथ नगर में स्वागत:21 बंदूकों की सलामी दी, छतों पर उमड़ा जनसैलाब, 2 महिलाओं से चेन स्नेचिंग

आषाढ़ी बीज (द्वितीया) के मौके पर आज भगवान जगन्नाथ उदयपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे बड़ी निकलेगी। मंदिर स्थापना के बाद इतिहास में पहली बार 375 साल पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को भी इस यात्रा में शामिल होगा। र थयात्रा को लेकर शहर के जगदीश चौक में पूरा उदयपुर जुटा हुआ है। हजारों की संख्या में यहां भक्त पहुंचे है। भगवान के जयकारा लगाते हुए भक्त यहां पर झुम रहे है। रजत और लकड़ी के दोनों रथों की पूजा के बाद अब भगवान नगर भ्रमण पर निकलेंगे। देखिए, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़ीं PHOTOS…
जगन्नाथ रथयात्रा के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए…

मौलाना का विवादित बयान- श्रीकृष्ण 5 बार नमाज पढ़ते थे:लखनऊ में FIR; संत बोले- जीभ काटने वाले को 10 लाख इनाम देंगे

यूपी में इटावा के रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान दिया है। मौलाना ने कहा, भगवान श्रीकृष्ण धर्म से मुस्लिम थे और दिन में 5 बार नमाज पढ़ा करते थे। अगर योगी राम के बड़े भक्त बनते हैं, अगर वे हमारी किताब पढ़ लें तो इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। मौलाना के बयान वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर आने के बाद हिंदू संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई। लखनऊ में हिंदू महासभा ने मौलाना की तस्वीरों को पैरों से रौंदकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज कोतवाली में FIR के लिए शिकायत दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। अयोध्या के संत विष्णु दास ने मौलाना के बयान की निंदा करते हुए कहा- जो कोई मौलाना जर्जिस अंसारी की जीभ काटकर लाएगा, उसे वह 10 लाख रुपये का नकद इनाम देंगे। मौलाना का यह बयान 23 जून का बताया जा रहा है, जो उन्होंने झारखंड में देवघर जिले के लकरबंधा मैदान में आयोजित जलसे में दिया था। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… पहले मौलाना का बयान, हूबहू पढ़िए… मौलाना जर्जिस अंसारी ने कहा- ‘हमारे भाई अगर बुरा ना मानें, तो कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे। यकीन ना आए तो श्रीमद्भागवत गीता का छठा अध्याय का दसवां मंत्र देख लीजिए।’ योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः ।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥ मौलाना ने दावा किया- ‘श्लोक में कृष्ण जी अर्जुन से कह रहे हैं कि हे अर्जुन! ईश्वर की जब पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो। योगी, यूपी वाला नहीं। योगी युञ्जीत सततमात्मानं, पूरे शरीर का योग करो। यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए और पूरे शरीर का योग होना चाहिए। आज हिंदू धर्म में चले जाइए, सिर्फ ऐसे हाथ उठाएंगे, ‘ओम नमः शिवाय’, बस हो गई पूजा। ये हिंदू-मुस्लिम अगर ये अपनी किताबें पढ़ लें, योगी जी बड़े भक्त बनते हैं राम के… अगर अपनी किताबें पढ़ लें, अपनी किताबें, तो यकीन मानिए इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। क्योंकि इस्लाम ये मुसलमानों का धर्म है ही नहीं सिर्फ, ये उनका भी धर्म है। इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी ने भी पेश किया है, कृष्ण जी ने भी पेश किया है। ये सिर्फ मुसलमानों का नहीं है।’ आगे बढ़ने से पहले भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- मौलाना ने श्लोक की गलत व्याख्या की मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने बयान में श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक की गलत व्याख्या की है और अपने हिसाब से उसे लोगों को समझाया। श्लोक में कहीं भी नमाज या इस्लाम का जिक्र नहीं है। दरअसल, यह भगवद्गीता के अध्याय 6 का 10वां श्लोक है। इस श्लोक का वास्तविक अर्थ है- एक योगी का धर्म है कि वह निरंतर अपने मन, शरीर और आत्मा को परमात्मा में लगाए। एकांत जगह पर और खुद को अकेला करे और अपने मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, सभी प्रकार की इच्छाओं और मोह से मुक्त हो जाए।’ लखनऊ में मौलाना के खिलाफ प्रदर्शन हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी के साथ लोगों ने लखनऊ में मौलाना जर्जिस अंसारी के खिलाफ प्रदर्शन किया। सभी हजरतगंज कोतवाली पहुंचे और मौलाना के खिलाफ शिकायत दी। शिशिर ने कहा- मौलाना जर्जिस ने भगवान कृष्ण को कट्टर मुसलमान, पांच वक्त का नमाजी बताया। इससे सनातन का घोर अपमान हुआ है। हम मुकदमा दर्ज कराने हजरतगंज कोतवाली आए हैं। अगर ये कार्रवाई नहीं होती है, तो हम कल सीएम आवास कूच करेंगे। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो हम अखिलेश यादव के आवास कूच करेंगे। सनातन का अपमान पर अगर दोनों चुप रहेंगे, तो सनातन के लिए, भगवान कृष्ण के लिए, भगवान राम के लिए कौन लड़ेगा? शिशिर ने कहा- अखिलेश से मेरा निवेदन है, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर आप बहुत बोले। कम से कम अपने पूर्वज, जिनके आप वंशज हो, उन प्रभु कृष्ण जी के ऊपर दो शब्द बोल दीजिए, एक FIR करा दीजिए, कुछ मुंह खोल दीजिए, क्योंकि जाना वहीं है और आप इटावा के हो, मौलाना जर्जिस भी इटावा का है। अब बात सियासत की… कांग्रेस ने कहा- चुनाव आ रहा है, भाजपा माहौल खराब करवाएगी मौलाना के गाल कई बार लाल हुए, शर्म नहीं आती: विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा- ये कोई नया नहीं है। इसके पहले भी अरशद मदनी ने शायद दिल्ली की एक सभा में भगवान शंकर के बारे में बातें कहीं थी और ये मौलाना जर्जिस जैसे लोग के गाल कई बार लाल हो चुके हैं, लेकिन शर्म नहीं आती। लगता है इनका कुछ और इंतजाम करना पड़ेगा। अगर इनके किसी के बारे में कोई कुछ कह दे, तो सिर तन से जुदा की गैंग खड़ी हो जाती है और हमारे आराध्य देवों के बारे में इस तरह की बेहुधा टिप्पणियां करोगे, ये अस्वीकार्य है, इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। अगर प्रमाण नहीं, तो बिना शर्त माफी मांगें मौलाना: सहारनपुर के प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि मौलाना जरजिस अपने दावे के समर्थन में प्रमाण पेश करें। या फिर देश के मुसलमानों से माफी मांगें। किसी भी धार्मिक, ऐतिहासिक या आस्था से जुड़े विषय पर बिना ठोस दलील और प्रमाण के बयान देना उचित नहीं है। मौलाना जरजिस ने यह बात किस आधार पर कही, इसकी उन्हें भी जानकारी नहीं है। मौलाना कारी ने कहा कि अगर जरजिस के पास अपने दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है, तो उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए। साथ ही पूरे देश के मुसलमानों से माफी मांगनी चाहिए। इस्लाम इल्म, तहकीक और दलील के साथ बात करने की तालीम देता है। बिना प्रमाण किसी बात को दीन का हिस्सा या ऐतिहासिक तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। इससे समाज में भ्रम और गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। मूर्खों की बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, मूर्खों की बात पर कोई भी टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। अब जैसे-जैसे चुनाव आते जाएंगे, भारतीय जनता पार्टी के समर्थक चाहे वो पोंगा पंडित हों और वो चाहे इस तरीके के कट्टरपंथी मौलाना हों, इस तरीके की बात करके माहौल को विषाक्त करने की कोशिश करेंगे। ऐसे लोगों के ऊपर तो कठोरता से कार्रवाई होनी चाहिए। मौलाना अपनी वाहवाही के लिए ज्यादा बोल गए: अयोध्या में धर्मदास महाराज ने कहा, मौलाना को ज्ञान नहीं है। मौलाना केवल अपनी वाहवाही करने में ज्यादा बात बोल गए। पांच हजार वर्ष पहले की बात है। ये लोग 13-14 सौ वर्ष के इतिहास के मुसलमान हैं। इनका इतिहास बहुत कम है। वो लोग पहले के थे उस समय न मुस्लिम धर्म, न बौद्ध धर्म, न ईसाई धर्म, न कोई धर्म था, खाली एक सनातन धर्म था। अब इन लोगों की बात छोड़िए। यही जो कह रहे हैं मौलाना साहब, इनके बात का कोई महत्व नहीं है। अयोध्या के संत विष्णु दास ने कहा, एक मौलाना ने दावा किया है कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे। जो कोई भी उनकी जीभ काटेगा, उसे 10 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। मौलाना ने भगवान कृष्ण के भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उसे संस्कृत का एक शब्द भी नहीं आता और वह भगवद गीता के श्लोकों का गलत अर्थ निकाल रहा है। उन्होंने कहा, इस मौलाना के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। अखिलेश यादव यदुवंशी बनते हैं, लेकिन उस मौलाना के बयान के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल सकते। ऐसे मौलानाओं के खिलाफ अखिलेश यादव क्यों नहीं बोलते? मौलाना के इस बयान से करोड़ों कृष्ण भक्त और हम साधु-संत दुखी हैं। मौलाना की पिटाई होनी चाहिए: महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा, सबसे पहले तो मौलाना की पिटाई होनी चाहिए, बुरी तरह पिटाई होनी चाहिए। वह लगातार गैर-जिम्मेदाराना बयान देते रहते हैं। जब ​​भी कोई मुद्दा शांत होता है, वे दूसरा मुद्दा उठा देते हैं। वे बिना किसी आधार के ऐसी बातें कहते रहते हैं। *********************** यह खबर भी पढ़िए:- बेटे ने पिता की 6 गोलियां मारकर हत्या की:150 करोड़ की प्रॉपर्टी चाहता था, मां लाश देख चीखी, कहा- तूने घर उजाड़ दिया गाजियाबाद में 150 करोड़ की प्रॉपर्टी के विवाद में बेटे ने पिता की हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, बुधवार रात 12 बजे बेटे ने पिस्टल से पिता के चेहरे, सीने और पेट में 6 गोलियां मारीं। बेटा शराब पीकर घर आया था। पिता ने उसे डांट दिया। इसके बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। पति का शव देखकर मां चीख पड़ी। बेटे से कहा- तूने पूरा घर उजाड़ दिया। वहीं, गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बेटा भाग चुका था। आरोपी बेटा निखिल (32) प्रॉपर्टी अपने नाम कराने के लिए पिता हरिओम चौधरी (52) पर दबाव बना रहा था। पढ़ें पूरी खबर…

सिजेरियन के बाद फिर एक महिला की तबीयत बिगड़ी:ऑपरेशन के बाद बार-बार टांके खुलने से बच्चेदानी निकालनी पड़ी; अब यूरिन बंद

कोटा के जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक बार फिर महिला की तबीयत बिगड़ी गई। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद महिला के टांके बार-बार खुलते रहे, जिसके चलते उसकी बच्चेदानी निकालनी पड़ी। अब महिला को यूरिन बंद होने जैसी गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल महिला को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज के एसएसबी ब्लॉक में भर्ती कराया गया है। महिला पार्वती(30) नांता इलाके की रहने वाली है। बच्चेदानी में बार-बार टांके टूटने से तबीयत बिगड़ी पार्वती के पति नीनू कुमार ने बताया कि रविवार को सुबह 6 बजे पत्नी को जेके लोन अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। सुबह 10 बजे करीब उसकी ऑपरेशन से डिलीवरी हुई। एक बच्चे को उसने जन्म दिया, लेकिन सिजेरियन के बाद उसकी हालत खराब होने लगी। उसके बच्चेदानी में टांके नहीं लग पा रहे थे और बार-बार टूट रहे थे। गंभीर हालत होने पर महिला की बच्चेदानी निकाली डॉक्टरों ने इस बारे में पार्वती के पति को बताया। उन्होंने कहा कि इसकी हालत खराब है, ऐसे में यहां इसे रिस्क है। पति ने कहा कि जो भी इलाज हो वह करें तो डॉक्टरों ने बच्चेदानी निकालने की बात कही। उसके बाद उससे कागजों पर साइन करवाए और बच्चेदानी निकाल दी। यूरिन आउटपुट बंद होने से पूरे शरीर पर आई सूजन नीनू कुमार ने बताया कि इसके बाद सोमवार से पार्वती की हालत और ज्यादा बिगड़ने लग गई। उसके यूरिन आउटपुट बंद हो गया और पूरे शरीर में सूजन आ गई। ज्यादा हालत बिगड़ने लगी तो उसे जेके लोन से एसएसबी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया। तीन दिन से उसे यूरिन आउटपुट नहीं आ रहा है। वहीं नवजात को पार्वती का पति नीनू संभाल रहा है। नीनू पत्थर तोड़ने का काम करता है। ————- ये खबरें भी पढ़िए… कोटा में दो महिलाओं की मौत, डॉक्टर बर्खास्त, 3 सस्पेंड:सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 की तबीयत बिगड़ी थी; 2 और मरीजों की किडनी फेल कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती 2 और महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। किडनी फेल होने पर उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले सिजेरियन डिलीवरी के बाद 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है। कई की किडनी फेल है। वहीं अब जेके लोन अस्पताल से भी एक मामला सामने आया है। यहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई। (पूरी खबर पढ़ें…) मां आईसीयू में, रिश्तेदारों की गोद में रोते रहे नवजात:सीजेरियन डिलीवरी के चार घंटे बाद बिगड़ी तबीयत; एक महिला की मौत हो गई कोटा के सरकारी हॉस्पिटल में अब एक नवजात की मौत:डिलीवरी के बाद एक और महिला की किडनी में इंफेक्शन, डॉक्टरों ने निजी अस्पताल ले जाने को कहा