बालेसर की स्कूलों में छात्रों के नशे के दुष्प्रभाव बताए:'नशे को ना कहो, अपने सपनों को हां' थीम पर दी जानकारी

बालेसर के विभिन्न स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर लगे। यह पहल “ट्रांसफोरमेटिव ट्यूजडे” के तहत “नशे को ना कहो, अपने सपनों को हां” थीम पर केंद्रित थी, जिसका उद्देश्य छात्रों को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक करना था। मंगलवार को तालुका विधिक सेवा समिति की अध्यक्ष एवं एडीजे बालेसर प्रिया टावरी ने आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक स्कूल में एक शिविर को संबोधित किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को युवाओं में बढ़ती नशे की लत के प्रति आगाह किया और बताया कि विद्यार्थी जीवन व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण अवस्था है। उन्होंने जोर दिया कि आज की आदतें ही भविष्य का निर्माण करेंगी, इसलिए सही और गलत में अंतर समझना आवश्यक है। न्यायिक अधिकारी के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए, टावरी ने बताया कि उन्होंने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां नशे ने न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार के जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि नशा अनेक सामाजिक और कानूनी समस्याओं की जड़ बन गया है, और ये केवल मादक पदार्थों का सेवन नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्र सोच, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। इसी क्रम में, एसीजेएम बालेसर रवि प्रकाश बाकोलिया ने राजकीय बालिका उमावि बालेसर में और जेएम बालेसर आशुतोष जागिड़ ने राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल बालेसर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए। इन अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को नशे की लत, व्यक्ति एवं समाज पर इसके दुष्प्रभावों, नशा पीड़ितों के पुनर्वास तथा नशे की रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तृत विधिक जानकारी प्रदान की। इन शिविरों में न्यायिक अधिकारियों ने बालकों के अधिकारों व कर्तव्यों, विभिन्न सामाजिक विधिक मुद्दों और विधिक सेवा प्राधिकरण की निःशुल्क सेवाओं पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर आदर्श उमावि के प्राचार्य विजयसिंह परिहार, भूरसिंह देवड़ा, अधिवक्ता विशनाराम सिद्धप, न्यायालय रीडर गोपालसिंह, कर्मचारी हिमांशु सांखला, राहुल शर्मा, लीलाधर सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *