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मायावती ने भतीजे आकाश के ससुर को पार्टी से निकाला:कहा- बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे, अब कभी वापस नहीं लेंगे

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। उन्होंने रविवार को कहा- अशोक बार-बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं सुधरे। अब इन्हें कभी पार्टी में वापस नहीं लेंगे। मायावती ने रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर कर दिया। बेनीवाल बसपा में कोऑर्डिनेटर के साथ ही पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। डेढ़ साल में यह दूसरा मौका है, जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला है। 12 फरवरी 2025 को गुटबाजी करने पर भी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किया था। हालांकि, छह महीने बाद सितंबर 2025 में उनकी दोबारा पार्टी में वापसी हो गई थी। अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बसपा की जिम्मेदारी थी। मायावती ने शनिवार को उनसे इन राज्यों का जिम्मा छीन लिया था। इसके बाद सोशल मीडिया में खबरें आईं कि अशोक सिद्धार्थ को यूपी का जिम्मा दिया जा सकता है। इससे भड़ककर रविवार को मायावती ने ‘X’ पर लिखा- बार-बार चेतावनी के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। इस वजह से उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई थीं। बावजूद इसके उन्होंने यूपी लौटने की खबरें फैलाकर कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने की साजिश रची। इसीलिए अब उन्हें पार्टी से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। रामजी गौतम का कद बढ़ाया, कार्यकर्ताओं को सावधान रहने को कहा गुटबाजी और अनुशासनहीनता के लिए पहले भी निकाले गए इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- मायावती ने साफ किया था- उम्मीदवार तय करने का हक सिर्फ उनका 2 दिन पहले 31 जुलाई को मायावती ने साफ कर दिया था कि बसपा में टिकट तय करने का हक सिर्फ उनका है। आकाश आनंद या दूसरे नेता बस उनके कहने पर कार्यकर्ता सम्मेलन में उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करते हैं। इसी सिलसिले में आकाश 10 अगस्त को हाथरस जाकर बसपा प्रत्याशी का नाम घोषित करेंगे। मायावती ने आकाश आनंद को लेकर 2 अहम बातें साफ-साफ कही थीं- सरकारी नौकरी छोड़कर नेता बने अशोक सिद्धार्थ 5 जनवरी 1965 को जन्मे डॉ. अशोक सिद्धार्थ पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज से नेत्र रोग में डिप्लोमा किया। वह सरकारी सेवा के दौरान बामसेफ में विधानसभा, जिला और मंडल अध्यक्ष पदों पर रह चुके हैं। वह साल 2007 में कन्नौज के गुरसहायगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हो गए थे। बसपा की ओर से वह पहली बार 2009 और दूसरी बार 2016 में एमएलसी रहे हैं। फिर 2016 में राज्यसभा भेजा गया। वह 2022 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। बसपा में कानपुर-आगरा जोनल कोऑर्डिनेटर जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुके हैं। राष्ट्रीय सचिव पद के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित 5 राज्यों का प्रभार भी संभाला है। वहीं, डॉ. सिद्धार्थ की पत्नी सुनीता सिद्धार्थ साल 2007 से लेकर 2012 तक यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। अशोक के बारे में दावा किया जाता है कि वह लो-प्रोफाइल रहने वालों में से हैं। वह पार्टी में पर्दे के पीछे रहते हुए काम करते रहे हैं। रणधीर सिंह बेनीवाल 1990 में बसपा में शामिल हुए थे रणधीर सिंह बेनीवाल सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। जाट समुदाय से आते हैं। 1990 में बसपा में शामिल हुए थे। मायावती ने मार्च 2025 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया था।
चार दिन पहले मायावती ने उन्हें हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रभार से हटा दिया था। फिर एक दिन पहले उन्हें दोबारा रामजी गौतम के साथ पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंप दी थी। ———————— ये खबर भी पढ़िए- UP चुनाव में 5 राज्यों की 12 पार्टियां लड़ेंगी:ओवैसी, चंद्रशेखर और पल्लवी बिगाड़ेंगे समीकरण; क्या है छोटे दलों का ‘सियासी गणित’ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में 5 राज्यों की 12 क्षेत्रीय पार्टियां उतरने की तैयारी कर रही हैं। बिहार की JDU, लोजपा और VIP से लेकर महाराष्ट्र की शिवसेना (UBT) और NCP (शरद गुट) तक यूपी में अपनी किस्मत आजमाना चाहती हैं। पूरी खबर पढ़िए

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में तोड़फोड़ करने वाला था संदिग्ध जैश आतंकी:बंगाल STF का दावा- पुलिस की वर्दी पहनकर घुसने वाला था; गर्लफ्रेंड भी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल STF ने दावा किया है कि बर्धमान जिले से गिरफ्तार संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव हमीम मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में तोड़-फोड़ की साजिश रची थी। STF के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने हमीम को CJP के छात्र प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी पहनकर घुसने और वहां अशांति फैलाने का निर्देश दिया था। STF के IG गौरव शर्मा के मुताबिक, हमीम को बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी सुरक्षा से जुड़ी जानकारी जुटाने का भी काम सौंपा गया था। हमीम को दो दिन पहले पूर्व बर्धमान से गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे 14 दिन की STF हिरासत में भेज दिया है। STF ने हमीम की गर्लफ्रेंड अर्पिता सरकार को भी झारखंड से गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि दोनों पाकिस्तान से जुड़े शाहजाद भट्टी गैंग के इशारे पर काम कर रहे थे। राज्य मंत्री के बेटे को हनी ट्रैप में फंसा रही थी अर्पिता हमीम और उसकी गर्लफ्रेंड पर बंगाल के राज्य मंत्री उमेश राय के बेटे को हनीट्रैप कर अगवा करने और परिवार से वसूली की साजिश रचने का भी आरोप है। STF के मुताबिक, अर्पिता कई नेताओं और अन्य चर्चित लोगों से हनीट्रैप के जरिए जानकारी जुटाकर हमीम तक पहुंचाती थी। उसके वॉट्सऐप चैट से पाकिस्तान से जुड़े संपर्कों के संकेत मिले हैं। STF के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जांच में पता चला है कि यह साजिश पाकिस्तान के हैंडलर्स ने रचाई थी। हर आरोपी की भूमिका, इसमें और कितने लोग शामिल थे, इसकी जांच कर रहे हैं। सोशल मीडिया से कट्टरपंथी बना हमीम, विदेशी SIM भी मिले, STF के 5 दावे… बंगाल CM की गतिविधियों पर नजर रख रहा था STF के मुताबिक 23 साल का हमीम हावड़ा में काम करता था। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वह बर्धमान चला गया था, जहां उसने अपार्टमेंट किराए पर लिया। जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह पिछले दो-तीन महीनों से छिपा हुआ था। हमीम एक साल पहले सोशल मीडिया के जरिए आतंकवादी संगठन के उस मॉड्यूल से जुड़ा, जिसे गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर चलाते थे। हमीम को पाकिस्तानी हैंडलर्स ने CM की गतिविधियों पर नजर रखने का काम सौंपा था। उसे उन जगहों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए कहा गया था जहां मुख्यमंत्री बिना सुरक्षा के रह सकते हैं। राज्यमंत्री की शिकायत के बाद जुड़े टेरर मॉड्यूल के तार STF ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि मॉड्यूल की जांच तब शुरू हुई जब सरकार के मंत्री से पैसे ऐंठने और हनी-ट्रैप का इस्तेमाल करके उनके बेटे को किडनैप करने की साजिश के बारे में इनपुट मिले। अधिकारी के मुताबिक जांच में सामने आया कि इसके पीछे एक ऑर्गनाइजेशन का हाथ है। इससे साहिबगंज के एक सोशल मीडिया हैंडल का पता चला, जिसे अर्पिता सरकार नाम की एक लड़की ऑपरेट कर रही थी। सोशल मीडिया अकाउंट की जांच से ऑफिसर्स को मंडल का पता चला। ——————————– आतंकी हमले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कश्मीर में छत्तीसगढ़ के हिंदू मजदूरों की नाम पूछकर हत्या: लश्कर आतंकी लतीफ पर शक दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों की हत्या आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने की है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। ये फ्रंट लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है। सूत्रों ने बताया कि इस वारदात को अंजाम आतंकी मोहम्मद लतीफ ने दिया है। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम के केलाम में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी। पुलिस को यह जानकारी मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने दी। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे। पढ़ें पूरी खबर…

भाई का वादा- राखी लेकर आऊंगा…घर पहुंची लाश:चंडीगढ़ में रोते हुए बहन बोली- वीडियो कॉल पर पसंद करवाई, अब किसे राखी बांधूंगी

भाई ने वीडियो कॉल पर कहा था कि कांवड़ के साथ तुम्हारे लिए राखी भी लेकर आऊंगा। मुझे क्या पता था कि राखी की जगह उसकी लाश आएगी। उसने वादा किया था… अब मैं किसे राखी बांधूंगी। यह कहते हुए सेक्टर-30 के रहने वाले नीतीश की बहन बेसुध हो जाती है। नीतीश अपने तीन दोस्तों के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेने गया था, जहां गंगनहर में नहाते वक्त एक दोस्त डूबने लगा, तो नीतीश भी उसे बचाने के लिए दोस्तों के साथ कूद गया, जिससे चारों की मौत गई थी। नीतीश की मां ने कहा कि बेटा पहली बार कांवड़ लेने गया था। उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि उन्होंने उसे जाने की अनुमति दी। नीतीश ने भोलेनाथ की कसम देकर भरोसा दिलाया था कि वह न तो गंगनहर में नहाने उतरेगा और न ही कोई जोखिम उठाएगा। 1 अगस्त को हरिद्वार से नीतीश का शव घर पहुंचा, जहां सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया। बहन ने कही 2 बड़ी बातें… मां बोली- मेरा बच्चा मम्मी नहीं बोल रहा
नीतीश की मां ने रोते हुए कहा कि मेरा बच्चा मुझसे बात कर रहा था कि मम्मी मैं ठीक हूं. मेरी चिंता ना कर, मैं ठीक हूं। अब मेरा बच्चा मम्मी नहीं बोल रहा। मेरे बच्चे से मम्मी बुला दो कोई। मेरे सीने में ठंडक पड़ जाएगी। मेरा बच्चा मम्मी नहीं बोल रहा है मन्नतों के बाद हुआ था नीतीश का जन्म
नीतिश के पिता टेलर हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। उसकी एक बहन है। पड़ोसियों ने बताया कि वह काफी मन्नतों के बाद पैदा हुआ था। परिजनों ने बताया कि नीतीश पहली बार हरिद्वार कांवड़ लेने गया था। मां हर दो-तीन घंटे बाद फोन कर उसका हाल जानती थीं। नीतिश उन्हें समझाता था कि उसके साथ पहले भी कांवड़ ला चुके दोस्त हैं, इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। अब मां यही कह रही हैं कि अगर बेटे की जिद न मानी होती तो वह आज उनके सामने होता। 4 पॉइंट में जानिए हादसा कैसे हुआ… ************ ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ में एक साथ उठीं 3 दोस्तों की अर्थियां: मां ने नहीं दी जाने की अनुमति, तो भोलेनाथ की कसम देकर हरिद्वार गया था बेटा
चंडीगढ़ में शनिवार को तीन दोस्तों की अर्थियां एक साथ उठीं। शाम करीब 5 बजे सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। तीनों के शव सुबह सेक्टर-30 स्थित उनके घर पहुंचे। (पढ़ें पूरी खबर)

राजस्थान-24 जिलों में बारिश, अजमेर में सड़कों पर पानी भरा:बिहार-झारखंड में बिजली गिरने से 10 की मौत; केरलम और कर्नाटक में लैंडस्लाइड से 11 जानें गईं

देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है। राजस्थान के 24 जिलों में बारिश हो रही है। इसकी वजह से अजमेर की सड़कों पर पानी भर गया। वहीं, बिहार के बांका में अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने सभी जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। झारखंड में भी बिजली गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई। केरलम में भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड और बाढ़ से 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 8 लोग लापता हैं। सरकार ने 209 राहत शिविर बनाए हैं, जहां 5,792 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में रविवार सुबह लैंडस्लाइड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और 3 साल का बेटा संतोष शामिल हैं। हादसे के समय तीनों पहाड़ी के पास बने घर में सो रहे थे। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर के मौसम से जुड़ी तस्वीरें… तमिलनाडु: 2000 लोगों ने बारिश के लिए प्रार्थना की तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में सूखे मौसम की वजह से तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर में मुस्लिम समाज के 2,000 लोगों ने बारिश की विशेष प्रार्थना (सलात अल-इस्तिस्का) की। कई जिलों में तापमान 37.5°C से ऊपर बना हुआ है और राज्य भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। देशभर में मौसम के अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

खबर हटके- लड़का-लड़की साथ दिखे, डेढ़ मिनट में शादी कराई:बिहार में खुला कॉकरोच कैफे; 150 साल बाद लौटाई लाइब्रेरी की किताब, ₹19 लाख फाइन

उत्तर प्रदेश में एक जोड़े की डेढ़ मिनट में शादी करा दी गई। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब बिहार में कॉकरोच कैफे खुल गया है। उधर, भूटान में ऐसी एंटी स्मार्ट सिटी बन रही है, जहां पेड़ों से ऊंची बिल्डिंग नहीं बनेगी। चीन के एक शख्स ने लकवा होने के बाद दिमाग से चलने वाली व्हीलचेयर बना दी। वहीं, ऑस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी में 150 साल बाद किताब लौटी है, जिस पर करीब ₹19 लाख का फाइन बनता है। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

भास्कर अपडेट्स:पुलवामा-बारामूला से आतंकियों के 2 ओवर ग्राउंड वर्कर गिरफ्तार; पिस्टल-ग्रेनेड, 10 जिंदा कारतूस और पाकिस्तानी पोस्टर बरामद

सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला और पुलवामा जिलों में आतंकवादियों के दो ओवरग्राउंड वर्करों (OGW) को गिरफ्तार किया है। उनके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए। बारामूला के शीरी इलाके में गोरीवान में बनाए गए एक मोबाइल व्हीकल चेकपॉइंट पर पुलिस, सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की एक संयुक्त टीम ने एजाज अहमद गनी को पकड़ा। सुरक्षा बलों ने उसके पास से एक पिस्तौल, 10 ज़िंदा कारतूस (9mm) वाली एक मैगजीन और एक मोबाइल फोन बरामद किया। एक दूसरे ऑपरेशन में, सुरक्षा बलों ने चेकिंग के दौरान पुलवामा के राजपोरा इलाके में एक OGW को गिरफ़्तार किया। सुरक्षा बलों ने तौसीफ़ अहमद डार के पास से एक हैंड ग्रेनेड और पाकिस्तानी पोस्टर बरामद किए है। इसके बाद उसे अरेस्ट कर लिय गया। आज की बाकी बड़ी खबरें… केरलम में 75 हजार राशन कार्ड का वितरण, कल सीएम सतीशन कार्यक्रम में शामिल होंगे केरलम सरकार 3 अगस्त को 75 हजार से ज्यादा नए राशन कार्ड बांटेगी। यह वितरण सरकार की 100 दिन की कार्ययोजना का हिस्सा है। इसके तहत 73,024 नए प्राथमिकता वाले (गुलाबी) और 2,000 अंत्योदय अन्न योजना (पीले) राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। राज्य स्तरीय वितरण कार्यक्रम का आयोजन तिरुवनंतपुरम के कनककुन्नु पैलेस में किया गया है। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन सुबह 11 बजे इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जैकब इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। दिल्ली पुलिस ने 6 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा; वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप दिल्ली पुलिस की स्पेशल स्टाफ की फॉरेनर सेल ने ऑपरेशन विस्टा 1.0 के तहत 6 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा है। इन सभी पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, सभी बांग्लादेशी नागरिक डबल एंट्री वीजा पर भारत आए थे। जांच में पता चला कि उन्होंने वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसके बाद फॉरेनर सेल ने सभी को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में 2.9 तीव्रता का भूकंप, सुबह 4:14 बजे लगे झटके, 8 किमी गहराई में था केंद्र
दिल्ली के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में रविवार सुबह 4:14 बजे भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.9 रही। भूकंप का केंद्र जमीन से 8 किलोमीटर की गहराई में था। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंपों के झटके सतह पर अधिक महसूस होते हैं, हालांकि इस भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण बड़े नुकसान की आशंका नहीं है। NEET-UG की काउंसलिंग 4 अगस्त से शुरू होगी; MBBS में दाखिले के लिए एजुकेशनल सेशन 8 सितंबर से MBBS और अन्य अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए ऑल इंडिया कोटा की काउंसलिंग 4 अगस्त से शुरू होगी। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत 8 सितंबर से होगी। काउंसलिंग का पहला राउंड 4 अगस्त से 17 अगस्त तक चलेगा। इसमें शामिल होने की आखिरी तारीख 22 अगस्त है। दूसरा राउंड 24 अगस्त से 2 सितंबर तक होगा, जबकि तीसरा राउंड 10 सितंबर से 18 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। इसके बाद स्ट्रे वैकेंसी राउंड 28 सितंबर से 3 अक्टूबर तक होगा और इसमें शामिल होने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर तय की गई है। कावेरी के पानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, कर्नाटक को निर्देश देने की मांग द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े। यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 16 फरवरी, 2018 के फैसले और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) व कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेशों के अनुसार की गई है।

क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन कर सकता है

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। क्या अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

क्या नीरज चोपड़ा नहीं जीतेंगे कॉमनवेल्थ गोल्ड:ओलिंपिक और खेल संघों की इंटरनल रिपोर्ट- भारत कर सकता है 28 साल में सबसे कमजोर प्रदर्शन

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 32 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 7 गोल्ड शामिल हैं। रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना गया है उनके नाम आप नीचे दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। 2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे? 1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है। ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे। यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों की फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा। 2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी। उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं। भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती। 5 खेल ऐसे जिनमें भारत हमेशा से कमजोर इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है। अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर? ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है। खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

आज 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी:राजस्थान में एक दिन में 9 इंच तक पानी बरसा, सीजन में सबसे ज्यादा बरसात

राजस्थान में बुधवार (22 जुलाई) को इस सीजन की सबसे भारी बारिश हुई। ब्यावर में कल रिकॉर्ड 9 इंच पानी बरसा, जो इस मानसून सीजन में अब तक की सबसे ज्यादा बारिश है। ब्यावर के साथ-साथ अजमेर और भीलवाड़ा में भी कई जगहों पर 3 से 5 इंच तक बारिश हुई। मौसम विभाग ने अगले 2 दिनों तक पूरे राजस्थान में बारिश का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, 25 जुलाई के बाद पश्चिमी राजस्थान में बारिश थोड़ी कम हो जाएगी। गुरुवार को भी राज्य के 11 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। मानसून के बड़े अपडेट्स बरसाती नदियों में उफान, खेत डूबे: पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बरसात ब्यावर के पास बदनोर में 225MM (9 इंच) दर्ज हुई। यहां खेत और खुले इलाके जलमग्न हो गए। भारी बारिश से बरसाती नदियों में पानी बहने लगा है। ब्यावर के साथ डूंगरपुर बांसवाड़ा, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, भरतपुर, नागौर, बूंदी, जैसलमेर, अलवर, पाली के कई इलाकों में दो इंच तक बारिश रिकॉर्ड हुई। 2 दिन तेज बारिश का अलर्ट: मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- राज्य में अभी मानसून एक्टिव रहने और अच्छी बारिश होने की परिस्थितियां अनुकूल है। मानसून ट्रफ अभी नॉर्मल पॉजिशन पर है, जो बीकानेर, टोंक, गुना, दमोह होकर गुजर रही है। उत्तर-पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन सिस्टम के असर से राज्य में अगले दो दिन पूरे प्रदेश में बारिश होगी, जबकि दक्षिणी राजस्थान के हिस्से में कई स्थानों पर भारी से अतिभारी बारिश हो सकती है। राजस्थान के मौसम की PHOTOS… ये शहर सबसे ज्यादा गर्म आगे कैसा रहेगा मौसम राजस्थान के बड़े शहरों में कैसा रहा मौसम? जयपुर: राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में बारिश का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा। बुधवार को फुलेरा, फागी, नरैना, सांभर, जोबनेर और दूदू के इलाकों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा 52 मिमी (करीब 2 इंच) बारिश सांभर में दर्ज की गई। जयपुर शहर में सुबह बूंदाबांदी हुई। बुधवार रात भी कई रुक-रुककर हल्की बारिश हुई। अलवर: जिले में बुधवार सुबह से शाम तक रुक-रुककर रिमझिम बारिश का दौर चलता रहा। अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में यहां तेज बारिश होने की संभावना है। अजमेर: जिले में सुबह से लेकर शाम तक रुक-रुककर तेज बारिश होती रही, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से बड़ी राहत मिली। दिनभर में कुल 79 मिमी बारिश दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 27.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों तक तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। सीकर: शहरी इलाकों में दोपहर करीब 1 बजे तेज हवा के साथ करीब 10-12 मिनट तक रिमझिम बारिश हुई। बारिश के बाद दिनभर उमस रही। फतेहपुर मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, सीकर जिले में 24 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। उदयपुर: लेकसिटी में बुधवार सुबह करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को उदयपुर का अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि मंगलवार को अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री था। कोटा: जिले में मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश के बाद तापमान में अच्छी गिरावट आई है। बुधवार को कोटा का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कोटा में बीते दो दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। जिले के डैम व नदियों में पानी की आवक शुरू हो गई है। जोधपुर: बुधवार को जोधपुर में मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली। बारिश के बाद मौसम खुशनुमा हो गया। बुधवार को जोधपुर का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

अंग्रेजों ने गुलाम देशों के लिए शुरू किया कॉमनवेल्थ गेम्स:पादरी ने आइडिया दिया था, भारत को पहला गोल्ड जीतने में 24 साल लगे

14 अक्टूबर 2010… दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम ‘भारत…भारत…’ के नारों से गूंज रहा था। बैडमिंटन कोर्ट पर सायना नेहवाल थीं। सामने सिर्फ एक फाइनल नहीं था, बल्कि पदक तालिका में भारत का भविष्य भी था। अगर सायना हार जातीं, तो मेजबान भारत तीसरे स्थान पर खिसक जाता, लेकिन उन्होंने जीत दर्ज की। भारत का 38वां स्वर्ण पदक आया। कुल पदक 101 हुए और पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरे स्थान पर पहुंच गया। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत की यह कहानी 2010 में शुरू नहीं हुई थी, इसकी शुरुआत 76 साल पहले हुई थी, जब 1934 में सिर्फ छह भारतीय खिलाड़ी पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरे थे। उस वक्त भारत पर अंग्रेजों का शासन था, लेकिन पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स की कहानी इससे भी 43 साल पहले की है। आइए, 135 साल पुराने इस सफर के बारे में जानते हैं…. न सरकार, न राजा… एक पादरी का आइडिया कॉमनवेल्थ की कहानी शुरू होती है 1891 में। ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था। दुनिया की करीब एक-चौथाई आबादी और विशाल भूभाग पर ब्रिटेन का शासन था। तब एक ब्रिटिश पादरी जॉन एस्टली कूपर ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने बाद में दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि साम्राज्य की ताकत सिर्फ सेना से नहीं, बल्कि लोगों के रिश्तों से भी बढ़ती है। अगर ब्रिटिश साम्राज्य के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी एक मैदान पर उतरेंगे तो आपसी भरोसा और भाईचारा मजबूत होगा। उन्होंने इसका नाम दिया- ‘पैन-ब्रिटेनिक फेस्टिवल’, लेकिन विचार देना आसान था, उसे सच करना मुश्किल। करीब 20 साल तक यह सपना कागजों में ही पड़ा रहा। राजा के राज्याभिषेक ने दिखाया भविष्य 1911 में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम का राज्याभिषेक हुआ। इसी मौके पर लंदन में फेस्टिवल ऑफ एम्पायर आयोजित किया गया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के खिलाड़ी पहली बार एक ही आयोजन में उतरे। यह आधिकारिक कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं थे, लेकिन इतिहासकार इसे कॉमनवेल्थ गेम्स की पहली झलक मानते हैं। यहीं लोगों को एहसास हुआ कि ऐसा आयोजन सफल हो सकता है। ओलिंपिक में हुई एक बैठक… जिसने इतिहास बदल दिया 1928 के एम्स्टर्डम ओलिंपिक के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य के खेल प्रशासक मिले। यहीं फैसला हुआ कि ओलिंपिक से अलग, हर चार साल में ब्रिटिश साम्राज्य के देशों के लिए अपना एक खेल आयोजन होगा। यही वह फैसला था जिसने कॉमनवेल्थ गेम्स को जन्म दिया। पहले गेम्स लगभग रद्द होने की कगार पर थे 16 अगस्त 1930… कनाडा के छोटे से शहर हैमिल्टन में पहले ब्रिटिश एम्पायर गेम्स शुरू होने वाले थे। लेकिन एक बड़ी समस्या सामने थी। उस समय हवाई यात्रा आम नहीं थी। ज्यादातर खिलाड़ी समुद्री जहाजों से कनाडा पहुंचते थे। कई देशों ने साफ कह दिया कि उनके पास यात्रा का खर्च नहीं है। आयोजकों ने कई टीमों की आर्थिक मदद की। तब जाकर पहला आयोजन हो सका। अगर उस समय कनाडा पीछे हट जाता, तो शायद कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास वहीं खत्म हो जाता। आज हजारों खिलाड़ी आते हैं… तब सिर्फ 400 थे पहले संस्करण में केवल 11 देशों के करीब 400 खिलाड़ी। इसमें सिर्फ 6 खेल- एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, स्विमिंग, डाइविंग, कुश्ती और लॉन बॉल्स शामिल थे। आज इन खेलों में हजारों खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और दर्जनों खेल खेले जाते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला स्वर्ण पदक ऑस्ट्रेलिया के रोवर बॉबी पियर्स ने जीता। वे बाद में ओलिंपिक चैंपियन भी बने। 1934 में भारत गुलाम था, लेकिन इतिहास लिखा भारत पहली बार इन खेलों में उतरा। आजाद भारत नहीं… ब्रिटिश भारत। पूरे दल में सिर्फ छह खिलाड़ी थे। उनमें से पहलवान राशिद अनवर ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला। यानी भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक उस समय आया, जब देश का अपना तिरंगा भी आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। फिर आया ऐसा युद्ध, जिसने खेल ही रोक दिए 1942 और 1946… इन दोनों सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स होने थे, लेकिन दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध में जल रही थी। लाखों लोग मारे जा रहे थे। ऐसे में खेलों की कोई जगह नहीं थी। इतिहास में केवल यही दो संस्करण हैं, जो विश्व युद्ध की वजह से रद्द हुए। 1950 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड से खेलों की वापसी हुई। जब साम्राज्य टूट गया, तो खेलों का नाम भी बदल गया 1930 में इन खेलों का नाम था- ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, लेकिन अगले तीन दशकों में दुनिया बदल गई। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, घाना, नाइजीरिया, मलेशिया जैसे कई देश आजाद हो गए। ब्रिटिश साम्राज्य सिकुड़ने लगा और नाम बदलने लगे। भारत 24 साल बाद जीता पहला गोल्ड 1958… कार्डिफ। एक दुबला-पतला धावक ट्रैक पर उतरा। नाम था मिल्खा सिंह। उन्होंने 440 यार्ड दौड़ जीतकर इतिहास रच दिया। वे कॉमनवेल्थ गेम्स की एथलेटिक्स स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस जीत के बाद उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ कहा जाने लगा। उसी संस्करण में पहलवान लीला राम ने भी स्वर्ण पदक जीता। भारत 76 साल बाद बना मेजबान भारत 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल हुआ और 2010 में उसने मेजबानी की, यानी 76 साल बाद। नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला दक्षिण एशिया का पहला शहर बना। 71 कॉमनवेल्थ देशों और क्षेत्रों के करीब 6,000 खिलाड़ी 17 खेलों की 272 स्पर्धाओं में उतरे। मेजबान होने का दबाव कम नहीं था, लेकिन भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य समेत 101 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे स्थान पर पहुंचा। आज भी यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 126 भारतीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होंगे। इस बार सिर्फ 10 खेल शामिल हैं। भारत 126 खिलाड़ियों का दल भेज रहा है, जो एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, वेटलिफ्टिंग, जूडो, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, जिम्नास्टिक, लॉन बॉल्स, 3×3 बास्केटबॉल और पैरा कॉम्पिटीशन में हिस्सा लेगा। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहैन भारत की ध्वजवाहक होंगी। वहीं, 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स एक बार फिर भारत लौटेंगे। मेजबानी अहमदाबाद करेगा। 2030 में ही कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए इसे खास माना जा रहा है। ——————–