ब्रेकिंग न्यूज़
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 आज से:125 भारतीय खिलाड़ी 8 खेलों में उतरेंगे; 1,168 मेडल्स के लिए 3,000+ एथलीट्स में होगा मुकाबला

स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में आज 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत होगी। 2 अगस्त तक चलने वाले इस इवेंट में 74 देशों के 3,000 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। 10 खेलों में 215 गोल्ड सहित कुल 1,168 मेडल दांव पर होंगे। भारत के 125 खिलाड़ी 8 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। स्टोरी में जानिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी… कॉमनवेल्थ गेम्स कब और कैसे शुरू हुआ? कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में हुई थी। तब इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था। पहले एडिशन में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े 11 देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इसमें एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, लॉन बॉल्स, रोइंग, स्विमिंग और रेसलिंग जैसे खेल शामिल थे। 1930 से 1950 तक इस टूर्नामेंट को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा गया। 1954 में इसका नाम बदलकर ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स किया गया। 1970 में यह ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स बना और 1978 से इसे कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम से जाना जाता है। इसका आयोजन हर चार साल में होता है। इसका मकसद कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों को बड़े इंटरनेशनल मंच पर कम्पटीशन का अवसर देना है। भारत ने पहली बार 1934 में हिस्सा लिया था। हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे बड़े खेल गायब इस बार कुल 10 खेलों में 215 मेडल इवेंट्स होंगे। इनमें 47 पैरा-स्पोर्ट्स मेडल इवेंट्स शामिल हैं। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसे खेल ग्लासगो 2026 का हिस्सा नहीं हैं। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सबसे ज्यादा मेडल शूटिंग में ही जीते हैं। भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? भारत ने 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू किया था।भारत ने 1930, 1950, 1962 और 1986 को छोड़कर बाकी सभी एडिशन में हिस्सा लिया है। लंदन 1934 गेम्स में भारत की ओर से छह एथलीटों ने हिस्सा लिया था। भारतीय दल ने 10 ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स और एक कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया। इसी एडिशन में भारत ने अपना पहला मेडल जीता था। पहलवान राशिद अनवर ने पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल हासिल किया था। 1934 में डेब्यू के बाद से भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 564 मेडल जीते हैं। इनमें 203 गोल्ड, 189 सिल्वर और 172 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नया क्या होगा?
कॉमनवेल्थ माइल की वापसी: एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ माइल की वापसी होगी। यह इवेंट आखिरी बार 1966 में हुआ था। यानी करीब 60 साल बाद इसकी वापसी हो रही है। 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 1500 मीटर की जगह 1 मील यानी 1.609 किलोमीटर की रेस कराई जाएगी। इस बार मेंस के साथ विमेंस की माइल रेस भी होगी।
सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम: 2026 में छह खेलों में पैरा-स्पोर्ट्स को पूरी तरह शामिल किया गया है। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट प्रोग्राम है। कितने वेन्यू पर होंगे इवेंट्स? कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन ग्लासगो के चार अलग-अलग वेन्यू पर किया जाएगा। ग्लासगो दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2014 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन किया था। ओपनिंग सेरेमनी में चानू-लवलीना फ्लैग बियरर होंगी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की ओपनिंग सेरेमनी 23 जुलाई 2026 को होगी। समारोह ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरीना में भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे से 2:30 बजे तक होगी। भारत की ओर से मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन फ्लैग बियरर होंगी। इसमें मशहूर ब्रिटिश सिंगर टॉम वॉकर परफॉर्म करेंगे। मेडल में दिखेगा शहर की पहचान और इतिहास ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल्स में मेजबान शहर की पहचान, इतिहास और समावेशिता की झलक दिखेगी। पुरस्कार विजेता आर्टिस्ट और डिजाइनर मिलित्सा मिलेनकोवा ने मेडल डिजाइन किए गए हैं। ये मेडल ग्लासगो के लैंडमार्क्स, कोट ऑफ आर्म्स, औद्योगिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार मेडल्स में ब्रेल और टैक्टाइल एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं। कहां देख सकते हैं इवेंट्स? भारत में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनल पर किया जाएगा। इसके अलावा ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। आप इन खेलों का लुत्फ डीडी स्पोर्ट्स पर भी मुफ्त में उठा सकते हैं। इसके अलावा दैनिक भास्कर एप पर भी लाइव अपडेट्स पढ़े जा सकेंगे। ————————— कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… भारत के 125 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, पिछली बार से 85 कम स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से शुरू होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत ने अपने 125 एथलीटों के दल की घोषणा कर दी है। ESPN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दल में 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी कुल 13 खेल विधाओं में अपनी चुनौती पेश करेंगे। पूरी खबर…

थानमठुई में खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से बुजुर्ग की मौत

थानमठुई गांव में बुधवार अल सुबह बिजली के खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना को लेकर पुलिस थाने में मर्ग दर्ज करवाई गई। पुलिस के अनुसार संजय कुमार जाट निवासी थानमठुई ने रिपोर्ट दी कि उसके पिता जले सिंह जाट बुधवार सुबह घर से खेत में निनाण निकालने के लिए जा रहे थे। पीछे-पीछे मां चल रही थी। रास्ते में एक खेत के पास रास्ते पर भरे पानी को बचाकर जाने के दौरान उसके पिता का बिजली के खंभे से हाथ छू गया। बिजली के खंभे में आ रहे करंट की चपेट में आने से उसके पिता की मौत हो गई। मां के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। लाइनमैन को फोन कर लाइन बंद करवाई। भास्कर न्यूज | सादुलपुर एडीजे कोर्ट प्रथम ने करीब 6 वर्ष पुराने हत्या के मामले में दोषी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास व एक-एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस अनुसंधान में सुरेश सिंह निवासी लादड़िया व राजकुमार उर्फ लिलिया, धर्मेंद्र उर्फ फौजी, अमर सिंह, संजय निवासी बेरी (झुंझुनूं) के खिलाफ जुर्म धारा 302/34, 120 बी भादंसं में आरोप पत्र पेश किया गया। अभियोजन की तरफ से मामले में 27 गवाह परीक्षित करवाए गए और 106 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए। एडीजे प्रथम मुनेश चंद यादव ने मामले में परिस्थिति जन्य साक्ष्यों व मोबाइल कॉल डिटेल के साक्ष्य को महत्वपूर्ण मानते हुए पांचों आरोपियों को सजा सुनाई। मामले को लेकर राज्य की तरफ से एपीपी सुनील जांगिड़ ने पैरवी की। यह था मामला : घटना के अनुसार लादड़िया (चूरू) के रणवीर सिंह पुत्र मोहनराम जाट ने हमीरवास थाने में मामला दर्ज करवाया था कि उसका बेटा ओमप्रकाश जालोर में प्राइवेट नौकरी करता है। उसके बेटे के पास गांव की प्रियंका देवी लिव इन में रहती है। प्रियंका का पति सुरेश कुमार निवासी लादड़िया उसके बेटे से रंजिश रखने लगा। उसका बेटा 2 मई 2020 को प्रियंका के साथ लादड़िया आया था। वह प्रियंका को उसके गांव बेरी छोड़ने के गया था, लेकिन अगले दिन सुबह तक घर नहीं आया। प्रियंका ने बताया कि बेरी आते समय रास्ते में उसके परिवार के राजकुमार उर्फ लिलिया, संजय निवासी बेरी (झुंझुनूं), सुरेश निवासी लादड़िया और दो-तीन व्यक्ति मिले थे और उनकी बाइक का पीछा किया था। 3 मई को उसके बेटे का फोन आया कि ओमप्रकाश की हत्या हो गई है।

शक्ति नगर बालाजी मंदिर में शिव परिवार की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम

भास्कर न्यूज | टोंक नेशनल हाईवे स्थित पन्नाधाय रोड के समीप शक्ति नगर बालाजी मंदिर में बुधवार को भगवान शिव परिवार की मूर्तियों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा व स्थापना समारोह साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शिव परिवार की मूर्तियों की झांकी के साथ हुई। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और मंगल गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा निकालते हुए कॉलोनी का भ्रमण किया। राजेश महावर ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, नंदी महाराज की मूर्तियों का पंचामृत व पूजन-अर्चना के साथ विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संस्कार संपन्न कराया गया। विद्वान पंडितों के सानिध्य में हवन-यज्ञ आयोजित हुआ, इसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। धार्मिक अनुष्ठानों के समापन पर महाप्रसादी व सामूहिक भोजन का आयोजन किया। इसमें संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान चुन्नीलाल महावर, सत्यनारायण चावला, चिरंजीलाल चंदेल, लालाराम गुर्जर, गोलू गुर्जर, पायल गुर्जर, सुनील, सुरेश, मोहनलाल, छोटू, फूलचंद, राधा कुमारी, सीता, निर्मला, गायत्री चंदेल, हनुमान शर्मा आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आज जिले की 12 ग्राम पंचायतों में लगाए जाएंगे फॉलोअप सेवा शिविर

राज्य सरकार के निर्देश पर जिले में फॉलोअप ग्रामीण व शहरी सेवा शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविर ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर सुबह 9.30 बजे से शाम 6 बजे तक होंगे। मकसद यह है कि अलग-अलग विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन को एक ही जगह मिले। एडीएम कमल सिंह यादव ने बताया कि 23 जुलाई को ग्राम पंचायत बरखेड़ाकला, रूण्डलाव, मण्डावर, पंचायत गैलानी, सांगरिया, आंवलीकला, क्यासरा, हरनावदा, आसलपुर, मनोहरथाना की ग्राम पंचायत ठीकरिया में शिविर होगा। खानपुर की ग्राम पंचायत गोलाना, कंवल्दा में शिविर होंगे। नगर परिषद झालावाड़ से जुड़ा शहरी सेवा शिविर अम्बेडकर भवन में होगा। अन्य नगर पालिकाओं के शहरी सेवा शिविर संबंधित नगर पालिका कार्यालयों में होंगे। यादव ने बताया कि शिविरों में योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। पात्रता के अनुसार लाभ मिलेगा। आवेदन लिए जाएंगे। शिकायतों का निस्तारण होगा।

तेज बहाव में फंसा युवक, आधा घंटे जूझता रहा, बाइक बही, कार ने पार कराई पुलिया

भास्कर न्यूज| ब्यावर अमरकुंज से छावनी की ओर जा रहा व्यक्ति काली माता मंदिर के पास करीब 25 फीट लंबी पुलिया पर पहुंचा ही था कि तेज बहाव ने उसकी बाइक का संतुलन बिगाड़ दिया। देखते ही देखते वह बाइक समेत पानी की चपेट में आ गया और बहाव से जूझने लगा। करीब आधे घंटे तक वह बहाव के बीच जिंदगी और बाइक दोनों को बचाने की जद्दोजहद करता रहा, लेकिन तेज बहाव में हाथ छूटा तो बाइक बह गई और वह खुद पुलिया के किनारे जाकर टिक गया। जब खुद के भी बचने की उम्मीद छूट चुकी थी तो एक कार चालक ने साहस दिखाकर बहते पानी के बीच आया। पीछे बैठे व्यक्ति ने गेट खोल उसे अंदर खींचा और सुरक्षित पुलिया पार कर ले गया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो वहां अपने पिता अब्दुल सलाम के साथ खड़े 9 साल के मोहम्मद अरहान ने अपने मोबाइल में कैद किया और भास्कर को उपलब्ध कराया।

2 डिग्री बढ़कर 34 डिग्री हुआ पारा, बादलवाई रही

चूरू | फिर सक्रिय हुए मानसून के चलते जिले में बुधवार को दिनभर घने बादल छाए रहे, जिसके कारण लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। चूरू में दोपहर को हल्की बारिश हुई, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखा रहा। बुधवार को अधिकतम तापमान 2.0 डिग्री बढ़कर 34.0 व न्यूनतम तापमान 1.4 डिग्री बढ़कर 26.8 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पूर्व मंगलवार को अधिकतम तापमान 32.0 व न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री दर्ज किया गया था। 4-5 दिन सक्रिय रहेगा मानसून : जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि बुधवार को एक ऊपरी परिसंचरण तंत्र एमपी के उत्तरी भागों व आसपास के क्षेत्र के ऊपर अवस्थित रहा तथा मानसून ट्रफ लाइन बीकानेर, वनस्थली व गुना से होकर गुजर रही है तथा सक्रिय है। साथ ही वायुमंडल के ऊपरी स्तरों में पूर्व-पश्चिम शियर जोन भी राज्य के ऊपर सक्रिय है। इसके प्रभाव से राज्य के अधिकांश भागों में आगामी चार-पांच दिन मानसून सक्रिय रहेगा।

सेंट सोल्जर एकेडमी : लविश यादव व गुंजन राठौर को नीट में सफलता

भास्कर न्यूज | टोंक सेंट सोल्जर एकेडमी ने अपने पहले प्रयास में ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की है। एकेडमी के छात्र लविश यादव ने 720 में से 569 और छात्रा गुंजन राठौर ने 550 अंक लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए पात्रता हासिल की। जिसपर समारोहपूर्वक दोनों विद्यार्थियों का ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच स्वागत करते हुए उनके अभिभावकों का भी शॉल व चुनरी ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले संस्था के पूर्व छात्र डॉ. अभिनव शर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के साथ-साथ संस्था निदेशक बाबूलाल शर्मा को दिया। दूसरी तरफ सफल विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय सेंट सोल्जर एकेडमी के मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि उचित दिशा-निर्देशन से ही यह सफलता संभव हो सकी। प्रबंध निदेशक हितेश शर्मा ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं, जबकि निदेशक बाबूलाल शर्मा ने कहा कि टोंक के विद्यार्थियों को अब नीट-जेईई की तैयारी के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा और संस्था इस संकल्प को आगे भी मजबूती से निभाएगी। प्राचार्य डॉ. शिप्रा बारेगामा ने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संदेश दिया। स्कूल प्राचार्य मदन गोपाल, प्राचार्य मंजु माथुर ने अभिभावकों को संस्था पर विश्वास जताने पर सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भरोसा दिलाया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. धीरज कुमार शर्मा, डॉ. सरोज चाम्पावत, डॉ. सुधीर पारीक, डॉ. विनोद नाकरा, डॉ. राघवेन्द्र नामा, डॉ. शिव सिंह राजावत सहित सभी स्टाफ व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

100 करोड़ का अस्पताल; न डॉक्टर, न सुपरस्पेशलिटी:ईएसआईसी : 2.5 लाख मरीजों से 180 करोड़ की वसूली, इलाज के बजाय कर रहे रेफर

यदि आप उदयपुर संभाग के उन ढाई लाख ईएसआईसी कार्डधारक बीमित कर्मचारियों में से हैं, जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से 15 करोड़ रुपए (सालाना 180 करोड़ रुपए) सरकारी खजाने में जमा कराते हैं। आपकी ही बदौलत उदयपुर में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक आलीशान इमारत बनकर खड़ी हो चुकी है। कागजों में इसे मॉडल हॉस्पिटल और सुपरस्पेशलिटी सेंटर कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ एक भव्य रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। इलाज को छोड़कर बाकी सब कुछ प्रथम श्रेणी का है। यहां 64 की जगह 75 नर्सेज (जरूरत से ज्यादा) मुस्तैद हैं, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज करने वाले डॉक्टर नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत 34 पदों में से केवल 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें भी सिर्फ आंख (ओप्थाल्मोलॉजी), स्किन (डर्मेटोलॉजी), शिशु रोग (पिडियाट्रिक) और रेडियोलॉजी के डॉक्टर ही ड्यूटी बजा रहे हैं। गंभीर रोगों के इलाज के लिए आवश्यक सुपरस्पेशलिटी विभागों नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, आंकोलॉजी (कैंसर), न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी का तो खाता तक नहीं खुला है। यहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। पैरामेडिकल स्टाफ में 77 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 25 हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स 38 में से केवल 1 रेजिडेंट कार्यरत हैं। गत वर्ष आए तीन सीनियर रेजिडेंट्स तो दो-दो महीने काम करके ही यहां से निकल गए। मुख्यालय या तो अस्पताल की क्षमता 100 बेड से बढ़ाकर 150 या 200 बेड करे, ताकि यहां आने वाले डॉक्टरों का अनुभव काउंट हो सके और वे टिक पाएं। या फिर मुख्यालय स्तर से ही स्थायी विशेषज्ञों की सीधी पदस्थापना की जाए, ताकि ढाई लाख बीमित श्रमिकों को उनके हक का इलाज उदयपुर में ही मिल सके। अनोखा आदेश… इलाज मत करो, मरीज को बाहर भेजो जब स्थानीय बीमित श्रमिकों ने डॉक्टर भेजने की गुहार लगाई तो दिल्ली-जयपुर बैठे आकाओं ने डॉक्टर भेजने के बजाय एक और अनोखा आदेश जारी कर दिया। इसमें कहा गया है कि स्थानीय आरएनटी (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज से टाइअप कर काम चलाओ, या फिर मरीज को उठाकर जयपुर, कोटा, अहमदाबाद, अलवर या बीकानेर के ईएसआईसी अस्पतालों में रेफर कर दो। यह स्थिति तब है जब उदयपुर का श्रमिक अपनी जेब से सालाना 180 करोड़ रुपए प्रीमियम भर रहा है और जब इलाज की नौबत आए तो 300 से 500 किलोमीटर दूर दूसरे शहरों की दौड़ लगाएं। आंकड़ों में हकीकत : इस साल 1200 मरीजों को कर चुके रेफर अस्पताल के निर्माण पर 100 करोड़ रु. खर्च हुए हैं। ईएसआईसी का मासिक प्रीमियम कलेक्शन 15 करोड़ रु. है, जो सालाना 180 करोड़ तक पहुंचता है। उदयपुर जिले में 92 हजार और संभाग में 2.50 लाख कार्मिक ईएसआईसी के दायरे में हैं। गत वर्ष 90 हजार ओपीडी व 21 हजार आईपीडी मरीज आए थे। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 44,100 ओपीडी और 17 हजार आईपीडी मरीज दर्ज हुए हैं। गत वर्ष 3,800 मरीजों को बाहर रेफर किया था। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक 1,200 रेफर किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश एमआरआई, सीटी स्कैन, हृदय रोग और न्यूरो से जुड़ी समस्याओं के मरीज हैं। 100 बेड की सीमा: डॉक्टर लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते 100 बेड का अस्पताल होने से यहां कार्यरत डॉक्टरों का अनुभव आगे की पढ़ाई या उच्च पदों के लिए मान्य नहीं माना जाता। यही डॉक्टरों के यहां नहीं टिकने का मुख्य कारण है। कॅरिअर प्रभावित होने की आशंका के चलते डॉक्टर यहां लंबे समय तक काम नहीं करना चाहते। 18 मई को इंटरव्यू के जरिए गायनिक और सर्जरी के दो डॉक्टर नियुक्त किए गए थे, लेकिन इनमें से सर्जरी के डॉक्टर ही टिके। बता दें कि अशोक नगर, बेदला रोड, फतेहपुरा और मादड़ी रोड नंबर-3 के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 1 लाख बीमितों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से अस्पताल शुरू किया गया था, लेकिन अब मेडिकल क्लेम महीनों अटक रहे हैं। हम मुख्यालय से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए समय-समय पर वॉक-इन इंटरव्यू लिए जाते हैं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे मरीजों को सही समय पर उपचार दिलाने के लिए रेफर करना नियम अनुसार अनिवार्य है।
-डॉ. अनुराधा गहलोत, अधीक्षक, ईएसआईसी हॉस्पिटल उदयपुर

मानसून रफ्तार पर, लेकिन गत साल के मुकाबले 65% बारिश कम, पिछले साल अब तक भर गए थे 22 बांध, अभी सिर्फ 1 भरा

जिले में मौसम विभाग के यलो अलर्ट के बीच पिछले दो दिनों से मानसून ने फिर से रफ्तार पकड़ी है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज होने से लंबे समय से बनी उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली है। हालांकि बारिश का यह दौर अभी भी जिले में मानसून की मौसमी कमी को पूरी तरह दूर नहीं कर पाया है। इस वर्ष अब तक जिले में सामान्य औसत वर्षा का केवल करीब 22 प्रतिशत ही रिकॉर्ड हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 87.51 प्रतिशत वर्षा हो चुकी थी। जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक जिले के विभिन्न रेनगेज क्षेत्रों में वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक पनवाड़ में 38 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा चांदसेन में 27 मिमी, ठिकरिया में 25 मिमी, नासिर दा में 22 मिमी, मालपुरा में 17 मिमी, लांबाहरिसिंह में 10 मिमी तथा टोरडी सागर क्षेत्र में 1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि टोंक शहर सहित कई जगह बुधवार को हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक जिले में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। बादलों की आवाजाही के साथ कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ क्षेत्रों में एक-दो दौर तेज बारिश होने के आसार हैं। फिलहाल यलो अलर्ट के तहत गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो जिले में वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है और बांधों व जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। किसानों को भी खरीफ फसलों के लिए इस बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मानसून की सुस्ती का असर जिले के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। गत वर्ष इस समय तक सिंचाई विभाग के 30 बांधों में से 22 बांध ओवरफ्लो हो चुके थे तथा इनमें 96.49 प्रतिशत जलभराव हो गया था। वर्तमान में इन बांधों में औसतन करीब 46 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है।

डारडातुर्की में स्वास्थ्य सेवा शिविर में हाई-रिस्क गर्भवतियों सहित विभिन्न रोगों की हुई जांच

भास्कर न्यूज | टोंक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डारडातुर्की में बुधवार को समग्र स्वास्थ्य सेवा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की टीबी, एचआईवी, डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी व सी, सिफिलिस तथा ब्लड शुगर सहित कई रोगों की जांच की गई। बीसीएमओ पीपलू डॉ. संगीत चौधरी ने शिविर का निरीक्षण करते हुए हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं से टीबी, एचआईवी एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच समय पर कराने की अपील करते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। इस दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत पात्र टीबी मरीजों को पोषण सहायता भी वितरित की गई। जिला डीआरटीबी कोऑर्डिनेटर मोनिका कुमावत ने बताया कि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हिमांशु मित्तल के निर्देशानुसार आयोजित शिविर का उद्देश्य, विशेषकर हाई-रिस्क समूह के लोगों को एक ही स्थान पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर निसार खान की देखरेख में टीबी जांच के लिए बलगम के नमूने भी एकत्रित किए गए। शिविर में पीएचसी प्रभारी डॉ. दीपक बरूणा, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, काउंसलर हेमंत वर्मा, सेक्टर हेल्थ सुपरवाइजर, आशा सहयोगिनियां तथा राष्ट्रीय मानव विकास संस्थान के प्रतिनिधि रमेशचंद वर्मा, पूजा प्रजापत और विक्रम धाप सहित स्वास्थ्यकर्मियों ने सेवाएं दीं। ग्रामीणों को टीबी, एचआईवी, हेपेटाइटिस, डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव, समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने के साथ निशुल्क जांच एवं दवाइयों का भी वितरण किया गया।