सवाल पूछा तो पटवारी ने मारा थप्पड़:बुलडोजर के नीचे आया सब्जी वाला; सड़क पर बिखर गईं सब्जियां; हनुमान का नया शिगूफा
नमस्कार, चौमूं (जयपुर) में अतिक्रमण की कार्रवाई को लेकर गांव वालों का सवाल पूछना पटवारी को हजम नहीं हुआ। कोटपूतली में बुलडोजर घर-घराया तो सड़क पर ‘हीरे-मोती’ बिखर गए और हनुमान बेनीवाल की नजर अब उत्तर प्रदेश (UP) पर है। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. सवाल पूछने पर झपटा पटवारी संविधान ने अभिव्यक्ति की आजादी दी। लेकिन आजादी का इस्तेमाल करते थप्पड़ पड़ जाए तो क्या करें? गांधीजी होते तो दूसरा गाल आगे कर देते। लेकिन अब लोगों में दया-भाव नहीं। उम्मीद करना बेमानी है कि दूसरे, तीसरे और चौथे गाल तक मामला रहम पर खत्म होगा। बात जयपुर के चौमूं की है। यहां एक तहसील है नांगल पुरोहितान। इसके गांव रामपुरा डाबड़ी में गोचर जमीन थी। जमीन पर रहने वालों का दावा कि वे डेढ़ सौ बरसों से यहां खेती कर रहे हैं। उनका कब्जा है। कान में पुरखे कह गए- कागज झूठा, कब्जा सच्चा। वे इसी नियम का पालन पीढ़ियों से करते आ रहे थे। फिर प्रशासन सख्त हुआ। सरकारी जमीनों से कब्जे हटने लगे। पटवारी ने नक्शा निकाला तो जमीन सरकारी। कब्जा हटाने पूरा अमला पहुंच गया। लोगों ने दावा किया- जमीन पटवारी के ससुराल पक्ष की है। वह भूमाफिया से मिलीभगत कर खुर्द-बुर्द करना चाहता है। यह भी कहा- जमीन खाली कराने के लिए कच्चे मकानों को आग लगा दी। प्रशासन के खिलाफ ढाणी के लोगों ने क्रांति कर रखी है। हर बात पर मोबाइल कैमरा ऑन कर लेते हैं। एक जगह पटवारी जी बैठे दिख गए। एक जुझारू ग्रामीण कैमरा चालू करके पहुंचा और पटवारी से पूछा- पटवारी जी, कौन पंचायती के हो?’ पटवारी भी भरा बैठा था। पहले तो घूरा। फिर आकाशीय बिजली की गति से तमाचा जड़ दिया। मोबाइल आसमान झांकने लगा। 2. हनुमान की यूपी पर नजर हनुमान बेनीवाल को देख मुझे मेरे चचेरे भाई की याद हो आती है। वह आट्र्स में फेल हो गया था। रिजल्ट वाले दिन बोला- अब मैं साइंस लूंगा। ऐसा ही कॉन्फिडेंस हनुमान बेनीवाल में है। उनकी पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी है। राजस्थान विधानसभा में उनका एक भी विधायक नहीं है। चूंकि पार्टी राष्ट्रीय है और लोकतांत्रिक भी, इसलिए उनका मानना है कि उन्हें क्षेत्रीय सीमा से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ना चाहिए। बाड़मेर में उन्होंने कहा- मैं यह कोशिश करूंगा कि यूपी में हम भाजपा को कैसे रोकें? यह मेरी लड़ाई है। मैं कोई लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ता। कार्यकर्ता समझ गए कि अब गाड़ियां लंबी दूरी तक सफर तय करेंगी। पेट्रोल-डीजल का भाव तेज है। भरतपुर से पहले ही गाड़ियां टें बोल जाएंगी। बेनीवाल ने समर्थकों का चेहरा पढ़ लिया। बोले- अगर किसी का हिसाब-किताब बकाया है तो चिंता मत करो। मैं हिसाब-किताब भी पूरा कर दूंगा। 3. चलते-चलते.. चारों दिशाओं में विकास की गंगा बह रही है। इस कारण कहीं-कहीं बाढ़ भी आ रही है। गरीब लोग अक्सर विकास की गंगा के मुहाने पर बस्ती बसा लेते हैं। ऐसे में जब मुख्यधारा का वेग बढ़ता है तो सबसे पहले गरीब चपेट में आते हैं। कोटपूतली में सब्जी वाले चपेट में आ गए। वैसे जिसे देखो वह एक बात जरूर कहता है- हमारे वेतन से ज्यादा तो ये सब्जी वाले कमा रहे हैं। उन्हीं मुओं की नजर लगी होगी। उन्हें सब्जियों के भाव सोने-चांदी, हीरे-मोती सरीखे लगते हैं। उन्हें किसान की मेहनत नहीं दिखती, मौसम की मार नहीं दिखती, सब्जी वालों का रिस्क नहीं दिखता। कोटपूतली जैसा शहर जिनमें एक भी सड़क एक किलोमीटर भी सीधी नहीं, गलियां इंसान से ज्यादा तंग और रास्ते पहाड़ से ज्यादा घुमावदार। वहां से विकास का हाथी गुजरेगा तो हड़कंप मचेगा ही। यहां पुल की उपयोगिता उसके ऊपर से गुजर जाने में नहीं है, बल्कि नीचे कोई धंधा खोलकर बैठ जाने में ज्यादा है। हालात के मारे सैकड़ों मजबूरों ने पुल के नीचे काम जमा रखा था। रोजी-रोटी चल रही थी। लेकिन विकास की नजर में यह अतिक्रमण है। है भी। कई नोटिस-चेतावनी के बाद कोर्ट का आदेश हुआ। पालन करते हुए बुलडोजर घर-घराकर ‘विकास-विकास’ चिंघाड़ते भरे ठेलों के ऊपर से गुजर गया। एक सब्जी वाले ने बाहुबली बनकर बुलजोडर के सामने हाथ उठाया। निर्दयी मशीन का पंजा धड़ाक से ठेले पर गिरा और ‘हीरे-मोती’ सड़क पर बिखर गए। इनपुट सहयोग- मनोज सैनी (चौमूं, जयपुर), विजय कुमार (बाड़मेर), धर्म सिंह यादव (कोटपूतली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

