भंवरी देवी पेंशन मामले में हाईकोर्ट सख्त:हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों को अंतिम चेतावनी; आदेश नहीं मानने पर कोर्ट में पेश होना होगा

राजस्थान हाईकोर्ट ने एएनएम भंवरी देवी से जुड़े पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभ मामले में राज्य सरकार व चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने 12 जनवरी 2024 के आदेश का 18 जुलाई 2026 तक पूर्ण पालन करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों को 21 जुलाई को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। 2025 में दायर की थी याचिका याचिकाकर्ता साहिल पेमावत व अन्य ने कोर्ट को बताया कि भंवरी देवी की 2011 में हत्या के बाद उनके वारिसों को बकाया सेवा परिलाभ, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी इन आदेशों का पालन नहीं किया गया है। हाईकोर्ट आदेश के बाद भी उसके बेटे और बेटियों को पेंशन नहीं दी गई है। मामले में भंवरी देवी के बेटे साहिल पेमावत व दो बेटियों ने 3 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को सूचित किया गया कि पेंशन संबंधी प्रस्ताव पेंशन विभाग को भेजा जा चुका है और उसकी स्वीकृति लंबित है। इस पर कोर्ट ने अंतिम मोहलत देते हुए समय पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में चिकित्सा सचिव, सीएमएचओ जोधपुर, चिकित्सा निदेशालय और पेंशन विभाग के संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने 2 साल पहले पेंशन देने का दिया था आदेश हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने 12 जनवरी 2024 को स्पष्ट आदेश दिया था कि भंवरी देवी के बेटे साहिल और दोनों बेटियों अश्विनी व सुहानी को चार महीने के अंदर-अंदर पेंशन और रिटायरमेंट समेत सरकारी सेवा से जुड़े सभी लाभ दिए जाए। चिकित्सा विभाग को यह भी छूट दी गई थी कि वह भंवरी देवी की मृत्यु संबंधी आवश्यक सूचना और सर्विस बुक के लिए अधीनस्थ कोर्ट में आवेदन कर प्राप्त कर सकेगा।

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