लाइनमैन से लेकर फील्ड स्टाफ तक का टोटा होगा दूर:एवीवीएनल : 539 पद भरेंगे, 3 के बजाय 1 घंटे में होगा फॉल्ट सुधार

भीषण गर्मी के बीच बार-बार ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से परेशान उदयपुर के उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) के उदयपुर वृत्त में लंबे समय से बने स्टाफ संकट को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डिस्कॉम में रिक्त तकनीकी पदों के आधे से अधिक पदों पर इसी वर्ष भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में शहर (नॉन-टीएसपी) और ग्रामीण (टीएसपी) क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1,652 स्वीकृत तकनीकी पदों में से 539 पद रिक्त हैं, जो कुल पदों का 32.62 प्रतिशत है। लाइनमैन और तकनीकी सहायकों की कमी के कारण ट्रांसफार्मर जलने या लाइनों में फॉल्ट आने पर मरम्मत में औसतन 1 से 3 घंटे तक लग जाते हैं। वहीं, जेईएन के 18 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। नई भर्ती के बाद फील्ड में स्टाफ की उपलब्धता बढ़ने से फॉल्ट सुधार का समय घटकर आधे से एक घंटे तक रह जाने की उम्मीद है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि अघोषित कटौती की समस्या में भी कमी आएगी। भर्ती में 4 से 6 माह लगेंगे, अगली गर्मियों में मिलेगी राहत हालांकि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पूरा होने में अभी समय लगेगा। विज्ञप्ति जारी होने, परीक्षा, परिणाम, काउंसलिंग और नियुक्ति की प्रक्रिया में कम से कम 4 से 6 माह का समय लगना तय है। उधर, जिले की बिजली आपूर्ति को मजबूती देने वाले घासा के निर्माणाधीन 440 केवी जीएसएस और शहर के लिए स्वीकृत 20 नए जीएसएस भी अगले वर्ष तक ही शुरू हो पाएंगे। ऐसे में मौजूदा गर्मी में उपभोक्ताओं को वर्तमान संसाधनों के सहारे ही काम चलाना होगा, लेकिन अगले वर्ष तक उदयपुर के ‘नो-कट जोन’ बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है। जरूरी क्यों… खाली पदों से पूरे सिस्टम पर बढ़ रहा है दबाव
शुरुआती योजना में फील्ड स्तर के तकनीकी सहायकों को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन अब सरकार तकनीकी संवर्ग के 50% से अधिक रिक्त पद भरने की तैयारी कर रही है। खाली पदों के कारण मौजूदा बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। नए लाइनमैन और सब-स्टेशन अटेंडेंट की नियुक्ति से स्पॉट बिलिंग, लाइनों के रखरखाव में तेजी आएगी। बता दें कि हाल ही में प्रदेश स्तर पर जेईएन, जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट के 2,005 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

श्रम विभाग के नए आदेश:फंसा नाइट बाजार; 10 कर्मचारियों का पंजीकरण, तभी मिलेगी मंजूरी

श्रम विभाग के नए आदेश उदयपुर सहित प्रदेश में शुरू होने वाले नाइट बाजारों को लेकर पेंच फंसा दिया है। अब नाइट बाजार में पंजीकृत दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों को अनुमति तभी मिलेगी, जब वहां 10 कर्मचारियों का पंजीकरण हो। जबकि कई रेस्टोरेंट और दुकानों में केवल 4 से 5 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में उन्हें अनुमति कैसे मिलेगी? दूसरी ओर, श्रम विभाग ने छोटे व्यापारियों के लिए 20 अगस्त 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें 10 कर्मचारियों तक वाले दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों को पंजीयन से छूट देने का प्रावधान किया गया था। इस तरह दो आदेशों के बीच सरकार की यह योजना एक बार फिर उलझ गई है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के तहत पंजीकृत दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कार्य समय संबंधी कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान की है। श्रम विभाग की ओर से 19 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू होगी। साथ ही, 15 अप्रैल 2024 की पूर्व अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन रोटेशन के आधार पर सवेतन अवकाश देना होगा। किसी भी कर्मचारी से रोज 10 घंटे तथा सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य नहीं लिया जा सकेगा। अतिरिक्त कार्य लेने की स्थिति में उसका अलग से रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। छोटे व्यापारियो के लिए होनी चाहिए अलग से व्यवस्था
नाइट बाजार के आदेश में एक गफलत है। पहले आदेश निकाला था कि जिन दुकानों, वाणिज्यिक संस्थानों में 10 कर्मचारी हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अब संस्थान खोलने के लिए 10 से ज्यादा कर्मचारी होने पर ही अनुमति मिलेगी। नए आदेश के तहत छोटे व्यापारियों को फायदा नहीं मिलेगा। इनका भी पंजीकरण होना चाहिए। अलग से कोई व्यवस्था हो। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारियों को इस मामले में ज्ञापन सौंप चुके हैं।

भव्य सम्मान समारोह आयोजित:29 को जयपुर में 154 भामाशाह और 95 प्रेरकों का होगा सम्मान

प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों के शैक्षिक व भौतिक विकास में योगदान देने वाले दानदाताओं और प्रेरकों के सम्मान में 29 जून को भव्य समारोह आयोजित होने जा रहा है। राजधानी जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले इस प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में 154 भामाशाहों और 97 प्रेरकों को सम्मानित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में दिए गए योगदान के आधार पर सम्मान की श्रेणियां तय की गई हैं। भामाशाह कैटेगरी (राज्य स्तर) पर 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की आर्थिक सहायता देने वाले दानदाताओं को भामाशाह यानी शिक्षा विभूषण और 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये से कम का सहयोग करने वालों को शिक्षा भूषण की उपाधि से नवाजा जाएगा। वहीं, 1 लाख से 30 लाख रुपये तक के दानदाताओं को जिला स्तर पर शिक्षा श्री सम्मान मिलेगा। प्रेरक कैटेगरी (राज्य स्तर) पर दानदाताओं को प्रेरित कर 50 लाख रुपये या इससे अधिक का कार्य करवाने वाले प्रेरकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि निदेशालय ने सूची जारी करने से मना कर दिया जबकि जयपुर में कई जगह सूची पहुंच चुकी है। भास्कर के पास भी सूची मौजूद है।

स्वायत्त शासन विभाग:10 कमरों के होटल व 50 सीटर रेस्त्रां के लाइसेंस अब रिन्यू होंगे

स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की वार्षिक लाइसेंस फीस से जुड़ा आदेश एक माह में ही बदल दिया है। निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने 24 जून, बुधवार को संशोधित आदेश जारी किया है। इसके तहत अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ब्यूटी पार्लर के लिए नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। दरअसल, इससे पहले 24 मई को जारी आदेश में होटलों (10 कमरों तक, 25 कमरों तक और 26 से 50 कमरों तक) के लाइसेंस रिन्युअल की श्रेणियां तय की गई थीं। इसके साथ ही रेस्टोरेंट के लिए सीधे 100 सीटर की श्रेणी बना दी गई थी, जबकि इसमें 50 सीटर और 51 से 100 सीटर वाले छोटे रेस्टोरेंट की श्रेणी हटा दी गई थी। इस विसंगति के कारण छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया था। अब नए संशोधित आदेश में कमरों की संख्या के आधार पर लाइसेंस जारी करने की राशि निर्धारित कर दी गई है। भास्कर ने उठाया था मुद्दा :भास्कर ने 26 मई के अंक में खबर प्रकाशित कर नई व्यवस्था से संभावित नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। बताया था कि पुराने आदेश की वजह से उदियापोल, सूरजपोल, रेलवे स्टेशन, गुलाब बाग और ओल्ड सिटी के 150 से 200 छोटे होटल सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे थे। होटल-रेस्टोरेंट की नई श्रेणियां

70 करोड़ का फर्जीवाड़ा:खाद की जगह मिट्टी बेच दी; SIT ने आरोपी माना, CID-CB से क्लीन चिट

कृषि विभाग ने 5 साल में सरकारी टेंडरों के जरिए 70 करोड़ की घटिया खाद खपा डाली। 29 सैंपल फेल हुए तो मामले का खुलासा हुआ। साल 2021 में करधनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच तीन एडिशनल एसपी और एसआईटी ने की। तीनों ने आरोप को सही माना। इसके बाद चौथी बार जांच सीआईडी-सीबी को दी गई। सीआईडी-सीबी ने मामले को सिविल नेचर का बताते हुए 3 जून को क्लीन चिट दे दी। वर्ष 2011 से 2016 के बीच इस फर्म ने कृषि विभाग के टेंडरों में 70 करोड़ की खाद सप्लाई की थी। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जब कृषि विभाग ने इस खाद की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाई, तो 29 नमूने अमानक (फेल) पाए गए। विभाग ने जालसाजी पकड़े जाने पर निर्माता कंपनी, वितरक, विक्रेता और कागजी क्वालिटी कंट्रोलर आनंदी लाल के खिलाफ 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 मुकदमे दर्ज करवा दिए। एफआर में साफ लिखा कि किस आधार पर रिपोर्ट दी
सीआईडी-सीबी के एडिशनल एसपी नानगराम का कहना है कि एफआर देना आईओ की राय है। इसे अफसरों ने सही माना है। कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है। एफआर में साफ है कि किस आधार पर यह रिपोर्ट दी गई है। भास्कर इनसाइट – नौकरी मांगने आए युवक के दस्तावेज पर फर्जी शपथ पत्र झोटवाड़ा निवासी आनंदी ने 2011 में विद्याधर नगर स्थित रॉयल केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था। कंपनी के हरवेंद्र माथुर, कलीम अहमद और गिर्राज ने शैक्षणिक और निवास संबंधी दस्तावेज रख लिए। आनंदी को नौकरी तो नहीं दी गई, लेकिन उसके नाम से क्वालिटी कंट्रोलर का शपथ पत्र दे दिया। नमूने जांच में फेल होने पर 29 केस दर्ज हुए। तब मामला खुला। फैक्ट्री का कारोबार 20 से 22 करोड़ रुपए तक आरोपी कलीम अहमद ने 14 जून 2025 को पूछताछ में बताया था कि फैक्ट्री का कारोबार 20-22 करोड़ रहा। पूरा माल कोऑपरेटिव एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बेचा जाता था। फिलहाल, सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका लंबित है। इसके बावजूद सीआईडी-सीबी द्वारा मामले में एफआर लगाना सवालों में है। 9 अफसरों ने 5 साल में मामले की जांच की, तीन ने केस ही छोड़ दिया था जांच सीआईडी-सीबी कर चुकी है; कृषि विभाग का इस मामले से कोई संबंध नहीं है : संयुक्त निदेशक इस पूरे मामले की जांच पहले ही सीआईडी-सीबी कर चुकी है। विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दोनों पक्षों के बीच आपसी विवाद का मामला है, कृषि विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है। -विनोद कुमार गेरा, संयुक्त निदेशक (खाद-बीज सप्लाई), कृषि आयुक्तालय, जयपुर

हे भगवान! इन्हें सद्‌बुद्धि दो:किडनी मरीजों का दर्द- हमारी जिंदगी की फाइल एक माह से कमरे में कैद,1-1 दिन कीमती, ट्रांसप्लांट अटका …SMS प्रबंधन ताला क्यों नहीं तोड़ता?

एसएमएस हॉस्पिटल में किडनी के 11 मरीजों की जिंदगी एक कमरे में कैद है। एक माह से इस पर ताला है, जिससे किडनी ट्रांसप्लांट अटका हुआ है। ये वे मरीज हैं, जो 6 माह से हर दूसरे दिन डायलिसिस करवा रहे हैं, इसलिए घर छोड़कर जयपुर में धर्मशालाओं में रह रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सभी को कमेटी से किडनी ट्रांसप्लांट की अप्रूवल मिल चुकी है। पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में नेफ्रोलॉजी यूनिट-2 के हेड के रिटायर होने के बाद से ट्रांसप्लांट अटक गए हैं। जानकारी के अनुसार फाइल मरीज के पास ही रहती है, लेकिन ट्रांसप्लांट से पहले डॉक्टर अपने पास रख लेते हैं। 1 जून से ये फाइलें ताले में हैं।
31 मई को रिटायर्ड; नेम प्लेट लगी है, कमरा लॉक नेफ्रोलॉजी में यूनिट-2 के हैड डॉ. धनंजय अग्रवाल 31 मई 2026 को रिटायर्ड हुए, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में 5वीं मंजिल पर 518 नंबर कमरे पर उनकी नेम प्लेट लगी है और बाहर ताला है। सरकार ने 19 जून को पे-माइनस पेंशन के आधार पर मेडिकल कॉलेज अजमेर में उनकी पुनर्नियुक्ति की है। आरोप है कि फाइलें भी अंदर बंद हैं। कराह सुनो सरकार; किसी की हर दूसरे दिन डायलिसिस, 13 किलो वजन घट गया 40 डायलिसिस हुए, सूजन बढ़ रही है, अब भूख भी नहीं लगती बांसवाड़ा की 48 वर्षीय महिला का हर दूसरे दिन डायलिसिस हो रहा है। 40 हो चुके हैं। परिवार 10 मार्च से धर्मशाला में रह रहा है। पति किडनी देंगे। उनका कहना है कि एनओसी मिल गई, पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है। घर-दुकान सब छोड़कर यहां रह रहे हैं। दर्द; पेशाब कम आता है, भूख नहीं लगती। डायलिसिस ना कराएं तो सूजन आ जाती है। हर महीने ढाई किलो वजन घट रहा, सिरदर्द लगातार बढ़ रहा कोटपूतली के 35 साल के युवक को 8 दिसंबर 2025 को एसएमएस लाया गया। डायलिसिस के चलते यहीं धर्मशाला में रह रहे हैं। किडनी पिता देंगे। सभी प्रक्रिया हो चुकी थी। उनका कहना है कि एचओडी से भी मिल चुके हैं, लेकिन ट्रांसप्लांट पर कोई जवाब नहीं दे रहा। दर्द; बीपी हाई होने पर सिरदर्द-उल्टी होती है। 5 माह में 58 से 45 किलो वजन हो गया। एक्सपर्ट की मानें तो जितने ज्यादा डायलिसिस, किडनी रिजेक्शनके चांस उतने ज्यादा …और जिम्मेदार जवाब के लिए टहला रहे नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट की मानें तो किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस एक पेनफुल प्रॉसीजर हैं। जितना मरीज की डायलिसिस होती है, उतने ही किडनी के लिए रिजेक्शन के चांस बढ़ सकते हैं। हैपेटाइटिस बी और सी फैलता है। डायलिसिस के बाद कमजोरी आने के साथ ही प्रोटीन लॉस होता है। वहीं इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। सुपर स्पेशियलिटी में कमरे पर नेम प्लेट लगी है तो विभागी मामला है। नेफ्रोलॉजी एचओडी डिसाइड करेंगे। -डॉ. नचिकेत व्यास, अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी मरीजों को रेगुलर देख रहे हैं। डायलिसिस भी की जा रही है। इनकी फाइलों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। -डॉ. संजीव शर्मा, यूनिट-2 हैड, नेफ्रोलॉजी, एसएमएस सीधी बात; डॉ. धनंजय अग्रवाल Q. क्या आपने अजमेर जॉइन कर लिया है?
-अभी सोच रहा हूं। Q. मरीजों का कहना है कि SMS में आपके रूम में उनकी फाइलें लॉक है?
-सरकार से बात करें, मेरे लॉक में फाइलें नहीं हैं। (फोन काट दिया।)
एसएमएस प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के मोबाइल पर असिस्टेंट ने कहा- सर बाहर हैं। दूसरी बार बोले- कल शाम तक बात होगी।

तौल-माप नियम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव:रेहड़ी से ज्वैलर्स तक… कम तौला तो 5 लाख तक की पेनल्टी लगेगी

राजस्थान में कम या गलत तौल कर ग्राहकों को चूना लगाना अब महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर गलत तौल, बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट, कम माल देने, रिकॉर्ड नहीं रखने और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार करने जैसी गड़बड़ियों पर 2 से 5 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। पेनल्टी का दायरा बढ़ा संशोधित ड्राफ्ट में रेहड़ी, ठेला और फेरी वालों की श्रेणी में सब्जी, फल, चाट, पकौड़ी, चाय और खिलौने बेचने वाले शामिल किए गए हैं। किराना, जनरल स्टोर, सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ज्वैलर्स तथा उद्योग, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, पेट्रोल-डीजल पंप और पेट्रोलियम डिपो भी नियमों के दायरे में रहेंगे। अनियमितता मिलने पर 15 दिन में सुधार कर जवाब देना होगा। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है- तीसरी गलती पर ठेला वालों पर 2 लाख जुर्माना
गैर-मानक कांटा-बांट या वजन-माप उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर तीसरी बार में रेहड़ी-ठेला वालों पर 2 लाख, किराना स्टोर व होटल-रेस्टोरेंट पर 2.5 लाख, बड़ी रिटेल चेन पर 3 लाख और वेटब्रिज संचालकों पर 3.5 लाख तक जुर्माना प्रस्तावित है। ज्वैलर्स, उद्योगों, पेट्रोल पंपों और कंपनियों के लिए यह राशि 5 लाख तक पहुंच सकती है। कांटे-बांट से छेड़छाड़ पर 1 लाख तक जुर्माना
वजन बढ़ाने-घटाने या माप उपकरणों में जानबूझकर छेड़छाड़ करने पर दूसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 1 हजार, किराना स्टोर पर 5 हजार और होटल-ढाबों पर 10 हजार तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं वेटब्रिज संचालकों और ज्वैलर्स के लिए यह पेनल्टी बढ़ाकर 1-1 लाख तक प्रस्तावित की गई है। गलत यूनिट में बिक्री पर 1 लाख रु. तक जुर्माना
किलो, लीटर, मीटर या निर्धारित संख्या के बजाय गलत इकाई में सामान बेचने पर तीसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 50 हजार, किराना स्टोर पर 70 हजार, होटल-ढाबों पर 80 हजार, ज्वैलर्स पर 1 लाख तक जुर्माना। रजिस्ट्रेशन नहीं तो कारोबार पर 3.5 लाख तक जुर्माना, कम तौल पर भी सख्ती राज्य सरकार ने विधिक माप विज्ञान नियम-2011 में बड़े बदलाव का मसौदा जारी किया है। लाइसेंस व्यवस्था खत्म कर रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। बिना पंजीकरण वजन-माप उपकरण बनाने, मरम्मत या बेचने तथा गलत जानकारी देने पर तीसरी बार में 3.5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकेगा। कम माल देने पर रेहड़ी-ठेला संचालकों से लेकर पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और ज्वैलर्स तक पर 150 रुपए से 20 हजार रुपए तक दंड का प्रावधान किया गया है। बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट मिलने पर 2 हजार से 8 हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा। पेट्रोल पंपों पर माप जांच व्यवस्था सख्त होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपए तक पहुंच सकेगा।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा:कांग्रेस ने आपातकाल में संविधान को कुचला, देश को जेलखाना बनाकर रख दिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है। जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना बना दिया गया था। मुख्यमंत्री गुरुवार को दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम में संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में एक लाख से अधिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और पत्रकारों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे, न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। समारोह में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। राठौड़ ने कहा- लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था आपातकाल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। घनश्याम तिवाड़ी ने साझा किए अनुभव समारोह में राज्यसभा सांसद व लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत रहकर कार्य करना पड़ा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग:एसओपी में ‘सफेद गाउन’, हकीकत, पीबीएम में जिस साड़ी में घर से आती हैं महिलाएं उसी में कर दिया जाता है ऑपरेशन

चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए जारी की गई एसओपी पर काम शुरू हो गया है। शुक्रवार तक सभी एचओडी को रिपोर्ट पेश करनी है। पीबीएम अस्पताल की 89 साल पुरानी बिल्डिंग में उसका कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी ऑपरेशन थिएटर की एसओपी में स्पष्ट लिखा है कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में भेजने से पहले सफेद गाउन पहनाना जरूरी है, लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पीबीएम अस्पताल में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। खासकर जनाना विंग की बात करें तो प्रसूताएं जिस हालत में आती हैं, उसी हालत में उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उन्हीं वस्त्रों में बाहर भेजा जाता है, जो प्रसूता घर से पहनकर आई थी। आम तौर पर हरे रंग की एक चद्दर से प्रसूता को ढका जाता है, जिसे सफाईकर्मी वापस ले जाती है। वही चद्दर दूसरी प्रसूता के काम आती है। वार्ड में बेडशीट भी मैली मिलती है। उस पर खून के सूखे हुए दाग-धब्बे नजर आते हैं। ऐसा ही हाल लेबर रूम का है। वहां तो एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को लेटना पड़ता है। गौरतलब है कि पीबीएम जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। कोटा, जोधपुर और नागौर में भी इस प्रकार की घटनाएं होने पर सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में ओटी का प्रोटोकॉल गाइडलाइन के तहत संचालित होता है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ के कारण इसकी अनदेखी कर दी जाती है। भास्कर इनसाइट- 90 हजार की ओपीडी, 27 हजार महिलाएं भर्ती हो रहीं पीबीएम अस्पताल की बिल्डिंग 89 साल पुरानी है। जाहिर है जनाना ओटी भी उतना ही पुराना है। इन सालों में मरीजों की संख्या बढ़कर साल में 90 हजार तक पहुंच गई है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। जनाना में पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। रोज औसत 50 महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन होते हैं, जिनमें 20 मेजर और 30 माइनर सर्जरी होती है। इनमें 30 से 40 का आंकड़ा प्रसव का है। एक साल में करीब 27 हजार महिलाएं भर्ती होती हैं। दस हजार के नॉर्मल और लगभग सात हजार महिलाओं के सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। वार्डों में वेंटिलेशन तक नहीं है। जनाना टॉयलेट की सफाई ही नहीं होती। वहां डिब्बा तक नहीं मिलता। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव के दौरे के बाद यह कमियां सामने आईं तो प्रशासन हरकत में आया है। नोडल प्रभारी से लेकर वार्ड इंचार्ज तक को नोटिस जारी प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के दौरे के दौरान पीबीएम अस्पताल में सामने आई खामियों को लेकर अधीक्षक की जमकर खिंचाई की थी। वापस जयपुर लौटते वक्त भी उन्होंने अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुधारने की हिदायत दी। राठौड़ के दौरे का असर अब नजर आने लगा है। अधीक्षक ने ताबड़तोड़ नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। एमएनडीवाई के नोडल अधिकारी डॉ. संजय लोहड़ा, वार्ड इंचार्ज और सुपरवाइजर से लेकर सफाई ठेकेदार तक को नोटिस जारी किए हैं। व्यवस्थाओं में सुधार करना तो दूर की बात, मीडिया में आ रही खबरों के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती कमला की हालत गंभीर सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मेडिसिन आईसीयू में भर्ती की गई कमला की हालत गंभीर बनी हुई है। उसके खून की उल्टी हुई है। कमला के 15 दिन के अंतराल में दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं। उसे एम्स जैसे उच्च संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, तारा की हालत में काफी सुधार है। उसे एक-दो दिन में छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सा निदेशालय ने एसओपी जारी की है। उसका पालन कराया जाएगा। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए गाउन और अलग से कपड़ों के लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा। -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल

हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र:हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र, मेडिकल आईसीयू पर घटेगा दबाव, गंभीर हृदय रोगियों की होगी विशेष निगरानी

आरबीएम अस्पताल में कार्डियक आईसीयू अलग से खोला जाएगा, जहां हार्ट मरीजों को अलग से उपचार केन्द्र मिलेगा। इससे मेडिकल आईसीयू पर दबाव घटेगा और गंभीर हृदय रोगियों की विशेष निगरानी में इलाज हो सकेगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पताल की सी ब्लाक की नई बिल्डिंग में हृदय रोगियों के लिए फस्ट फ्लोर पर हृदय रोग विभाग है। जहां रूम नंबर 117 में कार्डियोलॉजी ओपीडी है, उसके पास रूम नंबर 116 में 2डी ईको की और रूम नंबर 118 में टीएमटी की जांच तथा रूम 119 में ईसीजी की जांच की सुविधा है। इसके सामने होल्टर जांच शुरू की गई है। आईसीयू में मरीजों को मिलेंगी ये सुविधाएं गंभीर हृदय रोगियों की 24 घंटे विशेष निगरानी हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन वाले मरीजों का उपचार लगातार ईसीजी, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर की मॉनिटरिंग कार्डियोलॉजिस्ट व प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में इलाज आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधा कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय संबंधी उन्नत उपचार की बेहतर व्यवस्था कार्डियक आईसीयू से मरीजों को होंगे ये फायदे – हार्ट मरीजों को मेडिकल आईसीयू पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
– गंभीर हृदय रोगियों को अलग और विशेषज्ञ उपचार मिलेगा।
– मेडिकल आईसीयू पर मरीजों का दबाव कम होगा।
– इलाज के दौरान संक्रमण और जटिलताओं के जोखिम में कमी आएगी।
– मरीजों की निगरानी और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होगी।
– कैथ लैब शुरू होने पर एक ही स्थान पर समग्र हृदय उपचार उपलब्ध होगा। कार्डियक आईसीयू जल्दी ही शुरू किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों को विशेषज्ञ निगरानी और बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी। इससे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध होगा और मेडिकल आईसीयू पर भी दबाव कम होगा। आगामी समय में कैथ लैब शुरू होने से हृदय रोग उपचार सेवाएं और मजबूत होंगी। – डॉ. विवेक भारद्वाज, प्रिंसिपल, एसजेपी मेडिकल कॉलेज, भरतपुर रूम नंबर 144 में का​र्डियक आईसीयू 7 बैड का शुरू करने जा रहे हैं, जिसे जल्दी ही शुरू किया जाएगा। इसके पास ही रूम 145 में 10 बैड का वार्ड होगा, जबकि 139 से 143 तक कैथ लैब का एरिया होगा और उसे मशीन आने के बाद शुरू किया जाएगा। -डॉ नगेंद्र भदौरिया, पीएमओ