मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा:कांग्रेस ने आपातकाल में संविधान को कुचला, देश को जेलखाना बनाकर रख दिया
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है। जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना बना दिया गया था। मुख्यमंत्री गुरुवार को दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम में संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में एक लाख से अधिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और पत्रकारों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे, न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। समारोह में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। राठौड़ ने कहा- लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था आपातकाल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। घनश्याम तिवाड़ी ने साझा किए अनुभव समारोह में राज्यसभा सांसद व लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत रहकर कार्य करना पड़ा।

