तौल-माप नियम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव:रेहड़ी से ज्वैलर्स तक… कम तौला तो 5 लाख तक की पेनल्टी लगेगी

राजस्थान में कम या गलत तौल कर ग्राहकों को चूना लगाना अब महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर गलत तौल, बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट, कम माल देने, रिकॉर्ड नहीं रखने और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार करने जैसी गड़बड़ियों पर 2 से 5 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। पेनल्टी का दायरा बढ़ा संशोधित ड्राफ्ट में रेहड़ी, ठेला और फेरी वालों की श्रेणी में सब्जी, फल, चाट, पकौड़ी, चाय और खिलौने बेचने वाले शामिल किए गए हैं। किराना, जनरल स्टोर, सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ज्वैलर्स तथा उद्योग, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, पेट्रोल-डीजल पंप और पेट्रोलियम डिपो भी नियमों के दायरे में रहेंगे। अनियमितता मिलने पर 15 दिन में सुधार कर जवाब देना होगा। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है- तीसरी गलती पर ठेला वालों पर 2 लाख जुर्माना
गैर-मानक कांटा-बांट या वजन-माप उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर तीसरी बार में रेहड़ी-ठेला वालों पर 2 लाख, किराना स्टोर व होटल-रेस्टोरेंट पर 2.5 लाख, बड़ी रिटेल चेन पर 3 लाख और वेटब्रिज संचालकों पर 3.5 लाख तक जुर्माना प्रस्तावित है। ज्वैलर्स, उद्योगों, पेट्रोल पंपों और कंपनियों के लिए यह राशि 5 लाख तक पहुंच सकती है। कांटे-बांट से छेड़छाड़ पर 1 लाख तक जुर्माना
वजन बढ़ाने-घटाने या माप उपकरणों में जानबूझकर छेड़छाड़ करने पर दूसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 1 हजार, किराना स्टोर पर 5 हजार और होटल-ढाबों पर 10 हजार तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं वेटब्रिज संचालकों और ज्वैलर्स के लिए यह पेनल्टी बढ़ाकर 1-1 लाख तक प्रस्तावित की गई है। गलत यूनिट में बिक्री पर 1 लाख रु. तक जुर्माना
किलो, लीटर, मीटर या निर्धारित संख्या के बजाय गलत इकाई में सामान बेचने पर तीसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 50 हजार, किराना स्टोर पर 70 हजार, होटल-ढाबों पर 80 हजार, ज्वैलर्स पर 1 लाख तक जुर्माना। रजिस्ट्रेशन नहीं तो कारोबार पर 3.5 लाख तक जुर्माना, कम तौल पर भी सख्ती राज्य सरकार ने विधिक माप विज्ञान नियम-2011 में बड़े बदलाव का मसौदा जारी किया है। लाइसेंस व्यवस्था खत्म कर रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। बिना पंजीकरण वजन-माप उपकरण बनाने, मरम्मत या बेचने तथा गलत जानकारी देने पर तीसरी बार में 3.5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकेगा। कम माल देने पर रेहड़ी-ठेला संचालकों से लेकर पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और ज्वैलर्स तक पर 150 रुपए से 20 हजार रुपए तक दंड का प्रावधान किया गया है। बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट मिलने पर 2 हजार से 8 हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा। पेट्रोल पंपों पर माप जांच व्यवस्था सख्त होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपए तक पहुंच सकेगा।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा:कांग्रेस ने आपातकाल में संविधान को कुचला, देश को जेलखाना बनाकर रख दिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है। जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना बना दिया गया था। मुख्यमंत्री गुरुवार को दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम में संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में एक लाख से अधिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और पत्रकारों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे, न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। समारोह में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। राठौड़ ने कहा- लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था आपातकाल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। घनश्याम तिवाड़ी ने साझा किए अनुभव समारोह में राज्यसभा सांसद व लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत रहकर कार्य करना पड़ा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग:एसओपी में ‘सफेद गाउन’, हकीकत, पीबीएम में जिस साड़ी में घर से आती हैं महिलाएं उसी में कर दिया जाता है ऑपरेशन

चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए जारी की गई एसओपी पर काम शुरू हो गया है। शुक्रवार तक सभी एचओडी को रिपोर्ट पेश करनी है। पीबीएम अस्पताल की 89 साल पुरानी बिल्डिंग में उसका कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी ऑपरेशन थिएटर की एसओपी में स्पष्ट लिखा है कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में भेजने से पहले सफेद गाउन पहनाना जरूरी है, लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पीबीएम अस्पताल में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। खासकर जनाना विंग की बात करें तो प्रसूताएं जिस हालत में आती हैं, उसी हालत में उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उन्हीं वस्त्रों में बाहर भेजा जाता है, जो प्रसूता घर से पहनकर आई थी। आम तौर पर हरे रंग की एक चद्दर से प्रसूता को ढका जाता है, जिसे सफाईकर्मी वापस ले जाती है। वही चद्दर दूसरी प्रसूता के काम आती है। वार्ड में बेडशीट भी मैली मिलती है। उस पर खून के सूखे हुए दाग-धब्बे नजर आते हैं। ऐसा ही हाल लेबर रूम का है। वहां तो एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को लेटना पड़ता है। गौरतलब है कि पीबीएम जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। कोटा, जोधपुर और नागौर में भी इस प्रकार की घटनाएं होने पर सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में ओटी का प्रोटोकॉल गाइडलाइन के तहत संचालित होता है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ के कारण इसकी अनदेखी कर दी जाती है। भास्कर इनसाइट- 90 हजार की ओपीडी, 27 हजार महिलाएं भर्ती हो रहीं पीबीएम अस्पताल की बिल्डिंग 89 साल पुरानी है। जाहिर है जनाना ओटी भी उतना ही पुराना है। इन सालों में मरीजों की संख्या बढ़कर साल में 90 हजार तक पहुंच गई है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। जनाना में पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। रोज औसत 50 महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन होते हैं, जिनमें 20 मेजर और 30 माइनर सर्जरी होती है। इनमें 30 से 40 का आंकड़ा प्रसव का है। एक साल में करीब 27 हजार महिलाएं भर्ती होती हैं। दस हजार के नॉर्मल और लगभग सात हजार महिलाओं के सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। वार्डों में वेंटिलेशन तक नहीं है। जनाना टॉयलेट की सफाई ही नहीं होती। वहां डिब्बा तक नहीं मिलता। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव के दौरे के बाद यह कमियां सामने आईं तो प्रशासन हरकत में आया है। नोडल प्रभारी से लेकर वार्ड इंचार्ज तक को नोटिस जारी प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के दौरे के दौरान पीबीएम अस्पताल में सामने आई खामियों को लेकर अधीक्षक की जमकर खिंचाई की थी। वापस जयपुर लौटते वक्त भी उन्होंने अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुधारने की हिदायत दी। राठौड़ के दौरे का असर अब नजर आने लगा है। अधीक्षक ने ताबड़तोड़ नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। एमएनडीवाई के नोडल अधिकारी डॉ. संजय लोहड़ा, वार्ड इंचार्ज और सुपरवाइजर से लेकर सफाई ठेकेदार तक को नोटिस जारी किए हैं। व्यवस्थाओं में सुधार करना तो दूर की बात, मीडिया में आ रही खबरों के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती कमला की हालत गंभीर सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मेडिसिन आईसीयू में भर्ती की गई कमला की हालत गंभीर बनी हुई है। उसके खून की उल्टी हुई है। कमला के 15 दिन के अंतराल में दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं। उसे एम्स जैसे उच्च संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, तारा की हालत में काफी सुधार है। उसे एक-दो दिन में छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सा निदेशालय ने एसओपी जारी की है। उसका पालन कराया जाएगा। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए गाउन और अलग से कपड़ों के लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा। -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल

हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र:हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र, मेडिकल आईसीयू पर घटेगा दबाव, गंभीर हृदय रोगियों की होगी विशेष निगरानी

आरबीएम अस्पताल में कार्डियक आईसीयू अलग से खोला जाएगा, जहां हार्ट मरीजों को अलग से उपचार केन्द्र मिलेगा। इससे मेडिकल आईसीयू पर दबाव घटेगा और गंभीर हृदय रोगियों की विशेष निगरानी में इलाज हो सकेगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पताल की सी ब्लाक की नई बिल्डिंग में हृदय रोगियों के लिए फस्ट फ्लोर पर हृदय रोग विभाग है। जहां रूम नंबर 117 में कार्डियोलॉजी ओपीडी है, उसके पास रूम नंबर 116 में 2डी ईको की और रूम नंबर 118 में टीएमटी की जांच तथा रूम 119 में ईसीजी की जांच की सुविधा है। इसके सामने होल्टर जांच शुरू की गई है। आईसीयू में मरीजों को मिलेंगी ये सुविधाएं गंभीर हृदय रोगियों की 24 घंटे विशेष निगरानी हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन वाले मरीजों का उपचार लगातार ईसीजी, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर की मॉनिटरिंग कार्डियोलॉजिस्ट व प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में इलाज आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधा कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय संबंधी उन्नत उपचार की बेहतर व्यवस्था कार्डियक आईसीयू से मरीजों को होंगे ये फायदे – हार्ट मरीजों को मेडिकल आईसीयू पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
– गंभीर हृदय रोगियों को अलग और विशेषज्ञ उपचार मिलेगा।
– मेडिकल आईसीयू पर मरीजों का दबाव कम होगा।
– इलाज के दौरान संक्रमण और जटिलताओं के जोखिम में कमी आएगी।
– मरीजों की निगरानी और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होगी।
– कैथ लैब शुरू होने पर एक ही स्थान पर समग्र हृदय उपचार उपलब्ध होगा। कार्डियक आईसीयू जल्दी ही शुरू किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों को विशेषज्ञ निगरानी और बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी। इससे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध होगा और मेडिकल आईसीयू पर भी दबाव कम होगा। आगामी समय में कैथ लैब शुरू होने से हृदय रोग उपचार सेवाएं और मजबूत होंगी। – डॉ. विवेक भारद्वाज, प्रिंसिपल, एसजेपी मेडिकल कॉलेज, भरतपुर रूम नंबर 144 में का​र्डियक आईसीयू 7 बैड का शुरू करने जा रहे हैं, जिसे जल्दी ही शुरू किया जाएगा। इसके पास ही रूम 145 में 10 बैड का वार्ड होगा, जबकि 139 से 143 तक कैथ लैब का एरिया होगा और उसे मशीन आने के बाद शुरू किया जाएगा। -डॉ नगेंद्र भदौरिया, पीएमओ

अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस विशेष:कभी शराब ने तबाह की जिंदगी, अब 1500 से ज्यादा युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकाला

कभी शराब की लत ने उन्हें परिवार, समाज और खुद की नजरों में गिरा दिया था। जॉन्डिस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे नरपत सिंह चौहान के सामने जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा था। लेकिन भतीजी के एक मासूम सवाल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वही नरपत सिंह न केवल खुद नशे से मुक्त हैं, बल्कि अपने आरोग्य सेवा संस्थान उदयपुर के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाल चुके हैं। 26 जून अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा सकता है। बदलाव की तीन कहानियां, जो उम्मीद जगाती हैं नरपत सिंह बताते हैं कि नशे से बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उनके संस्थान से जुड़ी कई कहानियां आज बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं और लोगों को नई दिशा दे रही हैं। भतीजी के एक सवाल ने बदल दी जिंदगी नरपत सिंह बताते हैं कि तीन माह की उम्र में पिता का साया उठ गया था। युवावस्था में तनाव दूर करने के लिए शुरू हुई शराब की आदत धीरे-धीरे गंभीर लत बन गई। जॉन्डिस और लिवर संबंधी बीमारियों के बीच नशामुक्ति केंद्र में उपचार के दौरान भतीजी के सवाल-“काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?”-ने उन्हें झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए नशा छोड़ने का संकल्प लिया।

पंजाब में 3 ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी:मौके पर नहीं भरा जा सकेगा चालान, कोर्ट जाना होगा, जेल भी हो सकती है

पंजाब में सड़क पर रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और अंडरएज ड्राइविंग पर सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी। पंजाब सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने के इन तीन मामलों को नॉन कंपाउंडेबल कैटेगरी में शामिल कर दिया है। इन कैटेगरी में अगर अब आपका चालान होता है तो उसका भुगतान न तो आप मौके पर कर सकेंगे और न ही RTO दफ्तर में जाकर चालान का भुगतान होगा। इन मामलों में फंसे लोगों को कोर्ट के चक्कर काटने होंगे और मजिस्ट्रेट के सामने ही चालान का फैसला होगा। खास बात यह है कि कोर्ट में चालान की सुनवाई के दौरान अगर मामला ज्यादा गंभीर हुआ तो कोर्ट ड्राइवर को एक्ट के अनुसार कानूनी सजा भी सुना सकता है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की हरी झंडी के बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सचिव वरुण रूजम (IAS) ने इस आदेश को पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सचिव ने अपने आदेशों में कहा है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद के ऐसे चालानों का फैसला पुलिस और आरटीओ अपने स्तर पर न करवाएं। सरकार ने यह नोटिफिकेशन 17 जून को जारी किया और अब आरटीओ व पुलिस को भेजा है। इन 3 मामलों पर पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या हुआ है, पढ़िए… सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बेहद सख्त फैसला, जानिए.. किन-किन धाराओं के तहत बदला नियम; कितनी होगी सजा, जानिए…

90 करोड़ का श्मशान घाट, ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया:अंतिम संस्कार में लगेंगे 5 हजार, पटना-मुंगेर में 1 रुपए में मिलेगी 17 एकड़ जमीन

पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए VVIP व्यवस्था शुरू हो गई है। गंगा किनारे स्थित बांस घाट श्मशान को अत्याधुनिक बना दिया गया है। यहां एक साथ 18 शवों को जलाने की व्यवस्था है। अंतिम यात्रा में आए लोगों के बैठने के लिए 2 AC वेटिंग हॉल हैं। 90 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए श्मशान को सरकार ने संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार फ्री में नहीं होगा। इसके लिए 3500 से 5000 रुपए तक खर्च करने होंगे। जबकि दीघा, गुलबी और खाजकला के सरकारी घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए 300 रुपए की रसीद कटती है। यही नहीं, इस संस्था को बिहार सरकार पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में 1-1 रुपए की लीज पर 17 एकड़ जमीन देने जा रही है। बांस घाट श्मशान क्यों खास है? यहां क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? पटना के दीघा श्मशान में क्या होगा? मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को क्यों 15 एकड़ जमीन मिलने वाली है? पढ़िए रिपोर्ट..। 4.5 एकड़ में फैले श्मशान में एक साथ जलेंगी 18 चिताएं पटना का बांसघाट श्मशान 4.5 एकड़ में फैला है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसे 89.40 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। यहां पहले मौजूद श्मशान 1.24 एकड़ में फैला था। यहां एक साथ 18 चिताएं जलाने की व्यवस्था की गई है। शव जलाने के लिए हैं ये तीन तरह की व्यवस्थाएं… इलेक्ट्रिक शवदाह गृह: शव जलाने के लिए चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं। इसमें 15 से 20 मिनट में शव जलकर राख हो जाता है। ये लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। वुड क्रीमेसन ओवन: 6 वुड क्रीमेसन ओवन हैं। इसे बिहार की कंपनी ने तैयार किया हैं। इसमें शव जलाने में कम लकड़ी लगती है। शव 20-25 मिनट में राख हो जाता है। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी लगाई गई है। पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल: 8 पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल भी हैं। यहां शव को पारंपरिक तरीके से चिता पर रखकर जलाया जाता है। शव जलाने में खर्च होंगे 5 हजार रुपए श्मशान में शव जलाने की न्यूनतम फीस 3500 रुपए है। डोम, पंडित और दूसरे खर्च जोड़ दें तो यह कम से कम 5000 रुपए तक पहुंच जाता है। अगर शव को लकड़ी से जलाना है तो अलग से लकड़ी खरीदनी होगी। यह श्मशान परिसर में मिल जाएगी। शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम है। इसमें मोर्चरी फ्रीजर की व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए हैं चार दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं। यहां कपड़ा, डीप गप्स क्लोथ, लेस गप्स क्लोथ, एकरंगा क्लोथ, राम नाम पट्टी, धोती, घी, चंदन की लकड़ी, देवदार, अगरबत्ती, कपूर, गुलाब जल, पंचमेवा, साड़ी, चूना, माचिस, जौ, हवन सामग्री सहित अन्य जरूरी सामान मिल जाएंगे। 42 फीट ऊंचे हैं मोक्ष और बैकुंठ द्वार आकर्षण का मुख्य केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं। इसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों की ऊंचाई 42 फीट है। एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह स्थापित किया गया है। इन्हें जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं। इनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी लाया जाता है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होती और लोग गंगा में अस्थी विसर्जन भी कर पाते हैं। एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को तमिलनाडु के आदियोगी के तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए जालंधर से कारीगर आए थे। इसे फाइबर मटेरियल से बनाया गया है। इस 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ स्थापित प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देंगी और साथ ही आसपास लाइटिंग भी की गई है। वहीं, आगे की तरफ रास्तों पर ग्रीन एरिया को डेवलप गया है। श्मशान घाट की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग इस श्मशान घाट के दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है, जहां इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा और कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नरक के मार्ग को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। वहीं, शांति मिलने के लिए स्लोगन को भी लिखा गया है। इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी को उकेरी गई है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी यहां आए शोकाकुल लोगों को किसी भी परिस्थिति में सच्चाई और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करेगी। चहारदीवारी में ओम लिखे आकर्षक स्टील फ्रेम लगाये जा रहे इस पूरे परिसर के पीछे वाले एरिया में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का इलाका है, जहां से रोज हजारों की संख्या में गाड़ियां गुजरती है। जलते शव खुले में दिखायी नहीं दे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परिसर की दीवारों पर त्रिशूल बना आकर्षक फ्रेम लगाए गए हैं, जिसे मोक्ष धाम और वैकुंठ धाम नाम दिया गया है। यह एक HPL (हाई प्रेशर लैमिनेट) शीट है। इस व्यू कटर को गुजरात से मंगाया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन स्लॉट कर सकते बुक शवदाह गृह में ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। इससे परिजनों को लंबी कतारों और अफरातफरी से मुक्ति मिलेगी। लोग इसके लिए स्लॉट भी बुक कर सकते हैं। इसके लिए पटना नगर निगम के वेबसाइट पर जाकर टिकट आईडी जेनरेट करना होगा। व्हाट्सएप चैटबोट 9264447449 के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं। वहीं, पिकअप सर्विस के लिए मुक्ति रथ भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। हेल्प डेस्क की टीम लोगों को रजिस्टर करने में मदद भी करेगी। हालांकि, अभी तक दाह संस्कार की तरह तय नहीं की गई है। बिहार में बनाए जा रहे 40 अत्याधुनिक शवदाह गृह बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इसमें से 20 शवदाह गृह का निर्माण पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण हो चुका है। इन तैयार किए गए 20 शवदाह गृहों के सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। ये शवदाह गृह में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध होगी। पटना के दीघा में बनेगा बिहार का पहला LPG बेस्ड शवदाह गृह पटना के दीघा में बिहार का पहला LPG गैस आधारित शवदाह गृह बनेगा। पटना नगर निगम और ईशा फाउंडेशन के ईशा आउटरीच के बीच इस परियोजना को लेकर कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट पर साइन किया गया है। बिहार सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 2.11 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपए में 33 साल के लिए लीज पर दी है। यहां 4 एलपीजी फर्नेस लगाए जाएंगे। मेयर सीता साहू ने कहा कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह आज के समय की जरूरत है। इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक विधियों के बाद एलपीजी आधारित दाह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा। मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में मिलेगी 15.01 एकड़ जमीन सम्राट सरकार मुंगेर के तारापुर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में 99 साल के लिए 15.01 एकड़ जमीन लीज पर देगी। तारापुर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का क्षेत्र है। वह तारापुर के विधायक हैं। ईशा फाउंडेशन को जमीन सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए मिलेगी।

बिहार के पैसे से मालामाल हो रहे दक्षिण के राज्य?:बैंकों ने भेजे ₹2.44 लाख करोड़, ज्यादा से ज्यादा पैसा बिहारियों को क्यों देना चाह रही सरकार

23 जून को बिहार के बैंकों ने नया सीडी रेशियो (कर्ज-जमा अनुपात) जारी कर दिया। बिहार का सीडी रेशियो 60.21% हो गया है। मतलब साफ है कि बिहार में जमा राशि का 60% लोन ही बिहार के लोगों को दिया जा रहा है। बाकी के 40% रुपए को दक्षिण भारत के राज्यों में भेज दिया जा रहा है। बैंकों की इस रिपोर्ट पर सरकार भड़क गई और तुरंत ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज देने का आदेश दिया। सम्राट सरकार ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज क्यों देना चाह रही है, क्या बिहार के पैसे से साउथ के राज्य हो रहे मालामाल, समझेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… सवाल-1ः बिहार सरकार बैंकों को बिहारियों को ज्यादा कर्ज देने की हिदायत क्यों दे रही? जवाबः 23 जून को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में डिप्टी CM और वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा- ‘बैंकों ने लोन देने के मामले में अपना परफॉर्मेंस 6 महीने के अंदर नहीं सुधारा तो उनकी शाखाओं से सरकार की जमा राशि वापस निकाल ली जाएगी। साथ ही उन्हें दी सुरक्षा भी विड्रॉ कर लिया जाएगा।’ उन्होंने बैंकों को चेतावनी दी कि जिनका सीडी रेशियो यानी कर्ज देने का अनुपात 50 प्रतिशत से कम होगा, उसमें सरकार अपना पैसा नहीं जमा करेगी। डिप्टी CM ने यह हिदायत तब दी जब बैठक में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार का सीडी रेशियो यानी कर्ज-जमा अनुपात 2025-26 में 60.21% है। इसका मतलब है कि बिहार के बैंकों में अगर 100 जमा हुए तो उसमें से केवल 60.21 रुपए ही लोन के रूप में स्थानीय लोगों या उद्योगों को दिए गए। मतलब 40 रुपए बैंकों ने बिहार के बाहर भेज दिए। अब इसे आंकड़ों से समझिए… 31 मार्च 2026 के अंत तक बिहार की बैंक शाखाओं में 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये जमा थे। इसमें से लोन के तौर पर 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपए दिए गए। इनमें लगभग 17 हजार करोड़ रुपए वे भी शामिल हैं, जो या तो नाबार्ड की ओर से रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत बिहार सरकार को दिए गए या दूसरे राज्यों के बैंकों ने बिहार में निवेश के लिए दिए। मतलब कि बैंकों ने बिहारियों के जमा किए पैसों में से 2 लाख 44 हजार 865 करोड़ रुपए दूसरे राज्यों में भेज दिए हैं। अगर बिहार का पैसा, बिहार में रहता तब 3 फायदे होते सवाल-2: …तो क्या UP-बिहार के पैसे से दक्षिण और गुजरात-महाराष्ट्र का विकास हो रहा है? जवाबः तकनीकी और वित्तीय रूप से, हां। बैंकिंग प्रणाली के काम करने के तरीके के आधार पर इसे समझा जा सकता है। फंड का ट्रांसफर: बैंकों के पास जो पैसा जमा होता है, वह एक केंद्रीय पूल में जाता है। चूंकि तमिलनाडु (126%), तेलंगाना (128%), और आंध्र प्रदेश (155%) का सीडी रेशियो 100% से कहीं अधिक है, इसका सीधा मतलब है कि इन राज्यों के बैंकों ने वहां जमा राशि से ज्यादा लोन बांट रखा है। और यह पैसा कम सीडी रेशियो वाले राज्यों UP-बिहार और झारखंड के हो सकते हैं। जिन राज्यों (जैसे बिहार) में जमा राशि ज्यादा है और लोन कम उठ रहा है, बैंक उस ‘अतिरिक्त पैसे’ को उन राज्यों में ट्रांसफर कर देते हैं जहां लोन की मांग बहुत ज्यादा है (जैसे दक्षिण भारत के औद्योगिक राज्य)। औद्योगिक राज्यों को फायदा: तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य अत्यधिक औद्योगिक हैं। वहां बड़े-बड़े कॉर्पोरेट, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और विनिर्माण इकाइयां हैं, जो हजारों करोड़ रुपये का लोन लेती हैं। परिणाम यह होता है कि बिहार के छोटे जमाकर्ताओं के पैसे से दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े उद्योगों को लोन मिलता है। इससे उन राज्यों का विकास तेजी से होता है और बिहार सिर्फ एक “डिपॉजिट सेंटर” बनकर रह जाता है। आर्थिक प्रभाव: इस व्यवस्था के कारण बिहार के जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल दक्षिण भारत के राज्यों में उद्योगों, इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार को लोन देने के लिए किया जाता है, जिससे वहां रोजगार और विकास को गति मिलती है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया था। उन्होंने यही आरोप लगाया था कि राज्य के लोगों का पैसा राज्य के लोगों को रोजगार या दूसरे काम के लिए नहीं मिल पाता है, लेकिन उसी पैसे से दूसरे राज्य में लोन बांटा जाता है। इससे बिहार पिछड़ रहा है। बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाए रिटायर्ड बैंक अधिकारी राजीव कुमार दास कहते हैं, ‘बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाना चाहिए। परंतु इसके लिए यहां निवेश योग्य परियोजनाओं की संख्या और आकार भी बढ़नी चाहिए। बड़ी परियोजनाओं के लिए कॉरपोरेट स्तर पर फाइनेंसिंग की रणनीति तय होती है। दक्षिण भारत के राज्य इसी में बाजी मार ले जाते हैं। बैंकों को 3% कैश रिजर्व रेशियो और 18% एसएलआर के तौर पर रखना होता है। इन सबके बाद बची हुई राशि ट्रेजरी ऑक्शन के तौर पर एक बैंक दूसरे बैंक को देते हैं। इसके जरिए राशि पाने वाले बैंक अपनी मर्जी से फाइनेंस करते हैं।’ सवाल-3: बिहार के लोगों को बैंक लोन क्यों नहीं देते? जवाबः बैंकों के लोन नहीं देने के 3 बड़े कारण हैं… लोन डूबने का खतराः बैंकों का मानना है कि बिहार में लोन रिकवरी (ऋण वापसी) की दर खराब है। RBI और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में कृषि और MSME सेक्टर में NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) की दर 7.57% से 7.72% के बीच है। जो राष्ट्रीय औसत 2.15% से 2.8% से करीब 3 गुना अधिक है। इस कारण बैंक लोन देने से कतराते हैं। औद्योगिक पिछड़ेपन और बड़े उद्योगों की कमी: लोन की सबसे ज्यादा मांग बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आती है। बिहार में बड़े उद्योगों की कमी के कारण ‘क्रेडिट अवशोषण क्षमता’ कम है। दस्तावेज और कोलेटरल (जमानत) की कमी: बिहार में एक बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है। बैंकों की ओर से मांगे जाने वाले दस्तावेज (जैसे आईटीआर, पक्का लैंड टाइटल) न होने के कारण लोन रिजेक्ट हो जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोगों का कोई क्रेडिट इतिहास नहीं होता, जिससे बैंक उन्हें लोन देने में कतराते हैं। जमीन के दस्तावेजों का विवाद: बिहार में लोन के बदले बंधक रखने के लिए जमीन के कागजात अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। दाखिल-खारिज और म्यूटेशन की समस्याओं के कारण बैंक लोन रिजेक्ट कर देते हैं। जागरूकता का अभाव: आम लोगों में बैंकों की लोन प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं (जैसे मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया) की सही जानकारी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की समझ की कमी होती है। सवाल-4: सरकार कितना सीडी रेशियो बेहतर मानती है? जवाबः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के मुताबिक, किसी भी राज्य या क्षेत्र के लिए 60% या उससे अधिक का सीडी रेशियो एक स्वस्थ या न्यूनतम स्वीकार्य स्तर माना जाता है। आदर्श स्थिति: आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आदर्श सीडी रेशियो 70% से 80% के बीच होना चाहिए। 60% से कम: यह दर्शाता है कि बैंक स्थानीय स्तर पर ऋण देने में रुचि नहीं ले रहे हैं या वहां आर्थिक गतिविधियां सुस्त हैं। डॉ. डी. सुभाष राव समिति ने सिफारिश की थी कि जिन राज्यों का सीडी रेशियो 60% से कम है, वहां बैंकों को विशेष जिला स्तरीय योजनाएं बनाकर लोन बढ़ाना चाहिए। 100% से अधिक: यह अत्यधिक आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है, लेकिन बैंकों के लिए यह जोखिम भरा भी हो सकता है क्योंकि वे अपनी जमा पूंजी से अधिक लोन दे रहे होते हैं (इसके लिए वे बाहरी फंड या आरबीआई से रीफाइनेंस पर निर्भर होते हैं)। सवाल-5: क्या विकास का पैमाना ज्यादा लोन लेना ही है? लोन राज्य के विकास को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाबः केवल लोन लेना ही विकास का एकमात्र पैमाना नहीं है, लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था में बिना लोन के तीव्र विकास असंभव है। लोन (क्रेडिट) को किसी भी अर्थव्यवस्था की “लाइफलाइन” कहा जाता है। यह राज्य के विकास को इस तरह प्रभावित करता है… पूंजी निर्माण: जब उद्योगों, स्टार्टअप्स और किसानों को लोन मिलता है, तो वे नई फैक्ट्रियां लगाते हैं, तकनीक खरीदते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं। इससे राज्य की GSDP बढ़ती है। रोजगार के अवसर: लोन के जरिए जब नए व्यवसाय शुरू होते हैं या पुराने व्यवसायों का विस्तार होता है, तो स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होता है। क्रय शक्ति में वृद्धि: रिटेल लोन (जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन) से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे बाजार में मांग पैदा होती है और अर्थव्यवस्था चक्र गतिशील रहता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को मिलने वाले लोन से सड़कें, बिजली घर, और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे तैयार होते हैं, जो दीर्घकालिक विकास की नींव रखते हैं।

रिपोर्टर ने एनकाउंटर का क्राइम सीन रिक्रिएट किया:भरत तिवारी ने पिस्टल फेंकी, थानेदार ने धक्का मारा, STF ने 30 सेकेंड में मारीं 3 गोलियां

“दाहिना हाथ कंधे पर रखा। बाएं हाथ से सीना ठोकने लगा। बोला- बहुत अच्छा..तुम पढ़े लिखे हो, इसलिए मुझे विश्वास था ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ..। 10 कदम ऐसे ही आगे बढ़ा, अचानक अपनी कमर से तेज धक्का मारकर गिरा दिया। जमीन पर गिरते ही 30 सेकेंड में 3 गोलियां मार दीं। पहली गोली लगते ही भरत बोला- धोखा देकर गोली मार दी..। इसके बाद पुलिस की गाड़ियां भरत को लेकर चली गईं। फिर हमारा भरत लौटकर नहीं आया..। पुलिस वालों ने उसका मर्डर कर दिया..।” यह खुलासा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हुआ है। हमारी पड़ताल के दौरान भरत के करीबी दोस्त राजू ने एनकाउंटर की पूरी कहानी बताई। हमारी टीम भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू को मुठभेड़ वाली जगह पर लेकर पहुंची। हमने दोनों के साथ उस दिन हुए एनकाउंटर का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। 17 जून को सुबह 9.32 बजे जब पुलिस ने भरत को गोली मारी थी तो ये दोनों वहां से 20 मीटर दूर खड़े थे। एनकाउंटर वाले दिन क्या-क्या हुआ? भरत ने पिस्टल किसके कहने पर फेंकी? उस पर किसने गोलियां चलाईं? भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए सभी सवालों के जवाब… भरत के भाई के साथ रिपोर्टर ने सीन रिक्रिएट किया भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना से 120 किलोमीटर दूर भोजपुर (आरा) के बेलौटी गांव पहुंची। सुबह के करीब 10 बजे थे। हमें जानकारी मिली थी की एनकाउंटर वाले दिन भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू ने सबसे नजदीक से पूरी घटना को देखा था। हम उन दोनों से मिले। उस दिन क्या हुआ था इसे लेकर हमारी उनसे बात हुई। इसके बाद हम दोनों को लेकर एनकाउंटर वाली जगह पर पहुंचे। हमने दोनों के साथ 17 जून को हुई मुठभेड़ का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। हम भरत तिवारी के घर से लगभग 2 किलोमीटर दूर एनकाउंटर वाले स्पॉट पर खड़े थे। आसपास खेत थे। पास ही ईंटें पड़ी थीं। जिस कच्ची सड़क पर हम खड़े थे वो उबड़-खाबड़ थी। भरत के भाई पप्पू के साथ हम एनकाउंटर वाली जगह पर खड़े थे। पप्पू ठीक उस जगह खड़ा था, जहां 17 जून को भरत खड़ा था। हम उसके ठीक सामने थे। पप्पू ने बताया कि 17 जून को वो यहां से करीब 20 मीटर दूर खेत में बनी झोपड़ी के पास खड़ा था। यहां से थोड़ी दूर पर चंदन और उसका भाई था। पुलिस ने आसपास का इलाका पहले ही खाली करवा दिया था, ताकी कोई घटना का वीडियो ना बना पाए। पुलिस पूरी प्लानिंग के साथ तैयार थी। उसने स्पॉट दिखाते हुए कहा कि भरत ने इसी जगह पिस्टल फेंकी थी। जिसे एक पुलिस वाले ने उठाया लिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी के पास खड़ी STF ने उसपर गोलियां चला दीं। पुलिस ने 3 गोली मारी तो लगा सब खत्म हो गया पप्पू ने बताया कि सुबह जब भरत घर से निकला तो मैं भी खेत की तरफ गया था। कुछ देर बाद मैं ईंट के पास आकर खड़े हो गया। घटना के समय उस दिन मैं यहीं खड़ा था, जो लाल रंग का घर आपको दिख रहा है, उसके पास ही नीले वाले घर के सामने और लोग खड़े थे। मेरे साथ चंदन और उनके भाई भी थे। चंदन मुझसे आगे चला गया। उसने इशारा करते हुए बताया कि उसी दौरान भरत की मां और बहन इस रास्ते से दौड़ते हुए इधर आ रही थीं। पहले से यहां महिला पुलिस भी खड़ी थीं। वो भरत की मां और बहन को यहां से मारकर भगाने लगीं। दोनों को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया। जिनके लिए भरत लड़ाई लड़ रहे थे, उन्हें जबरन घर से भगा दिया गया। पुलिस ने ऐसा धमकाया कि लोग घर छोड़कर भाग गए। हम लोगों को भी यहां से भगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन थोड़ा पीछे जाकर हम वापस आ गए। हम लोग उधर नहीं जा पाए और यहीं रुक गए। इसके बाद पुलिस उन्हें पकड़कर आगे ले गई। तभी हमने लगातार तीन गोलियों की आवाज सुनीं। पप्पू ने आगे बताया कि गोली की आवाज सुनते ही लगा अब सब खत्म हो गया। हमको लग गया कि भरत को मार डाला गया। उस समय सभी अलग-अलग बातें कह रहे थे। कोई कह रहा था कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, तो कोई कह रहा था कि मार दिया गया। गोली की आवाज आई तो सभी पुलिस वाले भरत को घेरकर खड़े हुए थे। फिर एक गाड़ी आगे आई, उसमें उठाकर लादा जाने लगा। और देखते ही देखते भरत को लेकर पुलिस वाले लेकर चले गए। सबसे नजदीकी रास्ते से अस्पताल जल्दी पहुंचा जा सकता था, लेकिन उन्होंने लंबे रूट को चुना। उन लोगों ने इसलिए ऐसा किए ताकि उनका इलाज समय से नहीं हो पाए। 10 मिनट के रास्ते में 20 से 25 मिनट का समय लगाया गया। घटना के बाद पूरा माहौल शांत हो गया, किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि भरत अब लौटकर नहीं आएगा। हम लोगों की आंखों के सामने ही पुलिस वालों ने धोखे से भरत की जान ले ली। पप्पू से बातचीत के बाद हम भरत के करीबी दोस्त राजू से मिले। वो एनकाउंटर वाली जगह से थोड़ी दूर पर हमारे साथ खड़ा था। आसपास के घरों की ओर इशारा करते हुए बताया कि यहां सब जगह STF के जवान घुसे हुए थे। भरत जब पुलिस के कहने पर वहां गया तो उसके बहकावे में लेकर पिस्टल फिंकवाई गई। झूठा वादा किया गया कि हम तुम्हारी मांग मान लेंगे। मैं वहां से करीब 20 मीटर दूर खड़ा था। उसने इशारों से बताया कि भरत ने जैसे ही पिस्टल फेंकी। थानेदार आया उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, बहुत अच्छा। तुम अच्छे लड़के हो। करीब 10 मीटर आगे जाने के बाद थानेदार ने कमर से धक्का देकर उसे गिरा दिया। इसके बाद 30 सेकेंड में भरत के 3 गोलियां मारी गईं। रिपोर्टर – आप भरत के काफी करीबी रहे हैं, हर समय साथ रहते थे?
राजू – जी शुरू से लेकर गोली लगने तक मैंने साथ नहीं छोड़ा, बागेश्वर धाम तक साथ गया था। रिपोर्टर – एनकाउंटर की स्थिति बनी कैसे?
राजू – एनकाउंटर नहीं, उन लोगों का प्लान ही था मार देने का। रिपोर्टर – क्या हुआ था बताइए?
राजू – एक दिन पहले STF के जवानों ने इलाकों को घेर लिया था। रिपोर्टर – एक दिन पहले क्यों घेर लिया?
राजू – प्लान था, इसलिए यहां हर एक घर में वह छिपे हुए थे। रिपोर्टर – इसके पीछे भरत को मार देने की पूरी प्लानिंग थी?
राजू – घटना के दिन सबने घेर रखा था, माइक से ऐलान किया जाने लगा। रिपोर्टर – माइक पर क्या बोल रहे थे, आप लोगों ने सुना?
राजू – भगा रहे थे, लेकिन मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख सुन रहा था। रिपोर्टर – क्या बोल रहे थे, भरत के लिए संदेश था क्या?
राजू – हां, बोल रहे थे, आत्मसमर्पण कर दो, कुछ नहीं होगा। रिपोर्टर – अचानक फायरिंग कैसे होने लगी?
राजू – पुलिस वाले फायरिंग करने लगे तो भरत ने भी एक हवाई फायरिंग की। भरत को मारने में SDPO ने की थी बड़ी साजिश राजू ने बताया पूरी प्लानिंग SDPO की थी। वह मौके पर पहुंचा और भरत को अपने जाल में फंसा लिया। उसने पहले से प्लानिंग कर रखी थी। उसने पहले कॉल किया फिर भरत को अपनी बातों में फंसाया। रिपोर्टर – उसने भरत को कैसे फंसा लिया?
राजू – SDPO पहुंचा और आश्वासन दिया कि मांगें पूरी की जाएंगी। ऐसे और कई दावे करने लगा। रिपोर्टर – किस आधार पर दावा कर रहा था?
राजू – झूठे दावाें पर भरत बोला – मांग पूरा करने का आश्वासन है, इसलिए मैं सरेंडर कर रहा हूं। रिपोर्टर – फिर क्या हुआ?
राजू – पहले बोले, हथियार ले लीजिए, पुलिस बोली – नहीं, फेंक दो। उसने हथियार फेंक दिया। तुरंत एक पुलिस वाले ने पिस्टल उठा ली। थानेदार ने बड़ी चालाकी से भरत को गोली मरवाई राजू बोला- हम लोगों को लगा कि भरत ने पिस्टल फेंक दी है, अब पुलिस गिरफ्तार कर लेगी, लेकिन अचानक पूरी कहानी बदल गई। थानेदार राजेश मालाकर भरत के पास पहुंचा। दाहिना हाथ भरत के कंधे पर रखा और बाएं हाथ से सीने को ठोकते हुए बोला – बहुत अच्छा किए, तुम पढ़े-लिखे हो। मुझे पहले से पता था तुम ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ, तुमको अपने साथ ले चलूंगा। वह कंधे पर हाथ रखकर महज 10 कदम आगे बढ़ा ही था, अचानक अपनी कमर से भरत की कमर में तेज धक्का मारकर पीछे हट गया। जैसे ही भरत गिरा, STF के जवान ने गोली चला दी। भरत ने कहा, धोखे से गोली मार दी। फिर ताबड़तोड़ 2 गोली और मारी गई। थोड़ी देर पुलिस वाले घेर कर खड़े हो गए, फिर गाड़ी में लाद दिया। गाड़ी में लेकर इधर-उधर घूमते रहे, गांव से बाहर निकलने का लंबा रूट पकड़ा। जब रिपोर्टर ने सवाल किया आपने ऐसा होते अपनी आंखों से देखा? राजू ने बताया हां, सबसे करीब से मैंने ही देखा था मैं, मेरा एक दोस्त और भरत का भाई चंदन सब साथ में खड़े पर थे। हम लोगों ने तीनों गोलियां चलते हुए देखीं इसकी आवाज भी सुनी। राजू ने बताया कि सबसे करीब घटना को देखने वालाें में उसके साथ भरत का छोटा भाई चंदन भी था। चंदन को ढूंढते हुए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम भरत के घर पहुंची। चंदन ने दावा किया कि भरत को मारने की कहानी पहले से ही लिखी गई थी। पुलिस वालों ने धोखा देकर भइया को मार डाला, मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख रहा था। रिपोर्टर – कितने दिनों से भारत तिवारी ने हथियार रखा था?
चंदन – हम लोगों को पता नहीं था, लेकिन जब वीडियो सामने आया तब पता चला। रिपोर्टर – आप लोगों को पता नहीं था इसके बारे में क्या?
चंदन – वह घर में कुछ नहीं बताते थे, बहुत पूछते थे वो कुछ नहीं बताते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यो होता था?
चंदन – वह गांव वालों के लिए लड़ते थे, उनके फोन में कुछ न कुछ बड़ा राज है। रिपोर्टर – फोन कहां है?
चंदन – फोन तो प्रशासन के पास है। रिपोर्टर – कभी बताया नहीं, वीडियो के बारे में?
चंदन – एक लाइव में यह बोला था कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मेरा फोन मेरे परिवार वालों को सौंपा जाए। रिपोर्टर – वह ऐसा क्यों बोल रहे थे?
चंदन – उन्हें पहले ही जानकारी हो गई थी कि ये लोग उन्हें मार देंगे। रिपोर्टर – उनको कैसे पता था कि उनका एनकाउंटर किया जाएगा? वीडियो में पहले से बोल रहे थे?
चंदन – अब यह उन्हें ही पता था। मोबाइल में था बड़ा राज, इसलिए जान ले ली भरत के भाई चंदन का कहना है कि मोबाइल में कोई बहुत बड़ा राज था जिससे पुलिस काफी बेचैन हो गई थी। इसी राज के लिए प्लानिंग के तहत उनही हत्या कर दी गई होगी। रिपोर्टर – प्रशासन से क्या दुश्मनी थी?
चंदन – कुछ न कुछ तो थी, तभी हथियार उठाया। वह बार-बार वीडियो में बोलते थे, मार दिया जाएगा। रिपोर्टर – उनका वीडियो किसने बनाया था?
चंदन – वह खुद अपना वीडियो बनाते थे। किसी को साथ नहीं रखते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यों, कोई खतरा था क्या?
चंदन – हां, वह जानते थे कि आज नहीं तो कल कुछ गड़बड़ होने वाली है। रिपोर्टर – वह गांव की लड़ाई लड़ रहे थे, तो क्या सिर्फ लड़ाई लड़ने की वजह से उनके साथ ऐसा हुआ, या इससे पहले भी कुछ हुआ था?
चंदन – नहीं, सिर्फ यह लड़ाई नहीं है, उनके हाथ कुछ ऐसे सबूत लगे थे, जिसके लिए प्रशासन बेचैन था। रिपोर्टर – कौन सा ऐसा सबूत था जो प्रशासन के खिलाफ था?
चंदन – कुछ न कुछ सिस्टम के खिलाफ रहा होगा। सारा राज उनके मोबाइल से खुलेगा। हथियार फेंक दिया, फिर क्यों गोली मारी गई। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था?
चंदन – मैं बिल्कुल पास था, प्रशासन के लोग चारों तरफ से घेर चुके थे। रिपोर्टर – पुलिस ने कितनी देर तक घेरा था?
चंदन – एक से डेढ़ घंटे तक ड्रामा कर रही थी। पुलिस चाहती तो आसानी से उन्हें पकड़ लेती। कहानी पहले से तैयार थी, घर से धोखे से ले गए भास्कर की इन्वेंस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि पुलिस के कुछ अधिकारी बिना वर्दी के भरत के घर प्लानिंग के साथ पहुंचे थे। चंदन ने बताया कि प्रशासन चाहता तो आराम से उन्हें पकड़ सकता था, लेकिन प्लान तो कुछ और ही थी। चंदन ने बताया- उस दिन सुबह करीब 8 बजे पुलिस के कुछ लोग आए और बोले, चलिए उस जगह को दिखाइए, क्या मामला है, क्या मांग है? भाई ने घर से बाइक निकाली। लगभग 10 मिनट में बाइक से वह घटनास्थल पर पहुंच गए। तब तक पुलिस उन्हें चारों तरफ से घेर चुकी थी। हम लोग भी पहुंच गए। पुलिस सबको भगा रही थी, लेकिन हम लोग 20 मीटर की दूरी पर खड़े हो गए। रिपोर्टर – जो लोग बुलाने गए थे, वह कौन थे?
चंदन – एक पुलिस वाला आया था, उसके कंधे पर सिंगल स्टार था, लेकिन बैच नहीं लगा था। रिपोर्टर – क्या वह पुलिस वालों के साथ गए थे?
चंदन – नहीं, पुलिस वाले एक साइड से गए, वह दूसरी साइड से गए। तब तक पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया। रिपोर्टर – हथियार फेंकने के बाद एनकाउंटर किया गया या कुछ देर रोककर?
चंदन – नहीं, हथियार फेंकने के बाद SHO राजेश मालाकार ने उनके कंधे पर हाथ रखा। थोड़ी दूर आगे ले जाते हुए बोले, भरत, तुमसे यही उम्मीद थी। हथ रखे हुए करीब 10 मीटर आगे ले गए, अचानक धक्का दिया और फिर पीछे हो गए। फिर उन्हें भून दिया गया। गोली लगने के 10 मिनट बाद तक पुलिस उन्हें घेरकर खड़ी रही। रिपोर्टर – सबसे पहले किस अस्पताल में ले गए?
चंदन – पहले शाहपुर ले गए? रिपोर्टर – आखिर ऐसा क्यों?
चंदन – उन्हें मारना था, वे चाहते थे कि ब्लड लॉस हो। उस समय तीन फायर की आवाज आई थी। रिपोर्टर – आप लोग पास नहीं गए?
चंदन – पुलिस वाले पास नहीं जाने दे रहे थे। रिपोर्टर – इलाज में देरी तो नहीं हुई?
चंदन – समय पर इलाज मिलता, तो शायद वह बच जाते। रिपोर्टर – मोबाइल मिला कि नहीं?
चंदन – मोबाइल में बहुत राज है, लेकिन पुलिस कह रही कि गायब हो गया है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम उस परिवार को ढूंढने का प्रयास की जिसका घर गोली कांड से महज 20 मीटर की दूरी पर है। काफी तलाश के बाद मंटूचंद्र से हमारी मुलाकात हुई। मंटूचंद्र ने बताया कि पुलिस का पूरा प्लान भरत को गोली मारने का था, इसलिए घटना का अंजाम देने से पहले हम लोगों को परिवार सहित बंदूक दिखाकर भगा दिया। मंटूचंद्र की बीमार बूढ़ी मां चल नहीं सकती है उसे गोद में उठाकर परिवार वाले भागे। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था? आपका घर तो जहां गोली लगी वहां से एकदम सटा हुआ है?
मंटूचंद्र – पास में ही थे, लेकिन हम लोगों को यहां से बंदूक दिखाकर खेत में भगा दिया गया। रिपोर्टर – गांव को खाली कराने में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – बातचीत चल रही थी, उसके बाद पुलिस वालों ने सबको यहां से दूर भगा दिया। ज्यादा समय नहीं लगा, घरों को खाली कराने में। पूरा गांव कुछ ही समय में खाली हो गया। गांव में यहां बहुत लोग नहीं थे। रिपोर्टर – अच्छा, कितने पुलिस वाले आए थे?
मंटूचंद्र – बहुत पुलिस वाले थे, लगभग 100 के आसपास। रिपोर्टर – बातचीत में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – लगभग आधा घंटा लगा होगा, किसी को जानकारी नहीं थी कि यह सब होगा। रिपोर्टर – फिर बंदूक फेंक दी थी या अपने हाथ में पकड़े हुए थे?
मंटूचंद्र – जब एनकाउंटर हुआ तो बंदूक फेंक दी थी, बंदूक फेंकने के बाद ही एनकाउंटर हुआ है। रिपोर्टर – आप देखे थे बंदूक फेकते हुए?
मंटूचंद्र – हां, अगर बंदूक हाथ में लिए रहते और मार दिया होता, तो कोई कुछ नहीं बोलता। रिपोर्टर – हवाई फायर तो किया था ना?
मंटूचंद्र – हां, हवाई फायर किया उसी समय मार देते तो कोई बात नहीं थी। पिस्टल फेकने के बाद क्यों मारा। रिपोर्टर – आप लोगों को तो दिखाई दे रहा होगा कि क्या-क्या हो रहा है?
मंटूचंद्र – हम लोग इधर थे, वहां पर वो पकड़ा गया था। यहां प्रशासन लगी थी, सबने घेरा बना लिया था। उधर से इधर आने नहीं दे रहे थे। रिपोर्टर – भरत ने जब बंदूक फेंक दी, तो कितनी देर बाद एनकाउंटर की आवाज सुनाई दी?
मंटूचंद्र – 30 सेकंड के अंदर 3 फायर हुए और उसके बाद पूरा माहौल शांत हो गया, भरत को लेकर चले गए। रिपोर्टर – गोली लगने के कितनी देर बाद पुलिस उन्हें ले गई? मंटूचंद्र – पुलिस चारों ओर से घेर रखी थी। फायर के बाद एक गाड़ी तेजी से आई और फिर उठाकर लेकर चली गई। हम लोगों को लग गया कि जान से मार दिया। सब लोगों ने देखा है, पहले उन्हें धक्का मारकर गिराया गया, फिर मारा गया है।

शिमला में भारी बारिश, ढली में तीन गाड़ियां दबी:घरों में घुसा पानी, सड़कें-रास्ते पानी के तालाब में तब्दील, चंबा में ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश की राजधानी में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और भारी बारिश हुई। तेज बारिश के बाद शहर की सड़कें और रास्ते पानी से भर गए। ढली में तेज बारिश के बाद नाले में मलबा आने से तीन गाड़ियां दब गई। ढली में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया। इस दौरान स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को घर लौटते वक्त परेशानी झेलनी पड़ी। शिमला में शाम 4 बजे ही अंधेरा सा छा गया। मानसून की दस्तक से पहले भारी बारिश ने शहर में पानी निकासी के नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। जल निकासी नहीं होने की वजह से शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन जारी कर रात 10 बजे तक चंबा, शिमला, कुल्लू, मंडी और सिरमौर बारिश के साथ आंधी-तूफान का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। हालांकि, सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए रहे। मगर अब ज्यादातर भागों में मौसम खराब बना हुआ है।
राज्य में अगले 7 दिन बारिश के आसार IMD के अनुसार- राज्य में अगले सात दिन तक बारिश के आसार है। 26 से 30 जून तक कुछेक भागों में ही हल्की बारिश हो सकती है। मगर 30 जून की रात को वेस्टर्न डिस्टरबेंस ज्यादा स्ट्रांग होगा। इससे अगले 48 घंटे यानी एक व दो जुलाई को पहाड़ों पर भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछेक क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती है। इसे देखते हुए टूरिस्ट समेत लोकल लोगों को भी सावधानी बरतने, नदी-नालों और लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। चंबा का पारा 8.8 डिग्री गिरा राज्य के कई भागों में बारिश और आसमान में हल्के बादल छाने के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना हो गया है। अधिकांश शहरों का पारा सामान्य से नीचे गिर गया है। चंबा का अधिकतम तापमान सामान्य से 8.8 डिग्री की गिरावट के बाद 28.3 डिग्री सेल्सियस रह गया है। कांगड़ा का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 32.9 डिग्री, मनाली का 1.7 डिग्री कम होने के बाद 25.2 डिग्री और सोलन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री नीचे लुढ़कने के बाद 29.0 डिग्री सेल्सियस रह गया है। अगले एक सप्ताह के दौरान भी ज्यादातर जगह तापमान सामान्य से कम रहेगा। मानसून की एंट्री के संकेत नहीं प्रदेश में मानसून की एंट्री पहले ही 5 दिन लेट हो गई है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भी मानसून की दस्तक के कम आसार हैं। हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले भी कई बार जुलाई के पहले व दूसरे सप्ताह में मानसून दस्तक देता रहा है। राज्य में सबसे देरी से 10 जुलाई 2010 को मानसून आया था। जून में सामान्य से 31% कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार- राज्य में जून महीने में अब तक सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में 1 से 26 जून के बीच सामान्य तौर पर 79.8 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार अभी तक केवल 55.3 मिलीमीटर बादल बरसे हैं।