पिकअप पर 'जय बाबा की' लिखा था, पुलिस ने काटा-चालान:विधायक भाटी बोले- राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना क्या गुनाह हैं?

बाड़मेर में रीको थाना पुलिस की ओर से काटा चालान विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर चालान की कॉपी और गाड़ी की फोटो भी सामने आई है, जिसमें बाबा गरीबनाथ जी का नाम कांच पर छोटे अक्षरों में लिखा हुआ था। शुक्रवार को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी क्या गुनाह है। भाटी ने पीएमओ, सीएमओ और राजस्थान पुलिस को टैग किया है। साथ ही चालान और गाड़ी का फोटो शेयर किया है। दरअसल, खुशाल पुत्र चुतराराम निवासी शिव की बोलेरो पिकअप गाड़ी का चालान बाड़मेर रीको थाना पुलिस ने 14 जून को काटा था। पुलिस के अनुसार, चालान इसलिए काटा गया कि गाड़ी के कांच पर छोटे अक्षर से कुछ लिखा हुआ था। चालान रीको थाने के एसआई लूणदान की ओर से काटा गया। इसके कुछ घंटों बाद ही चालान और गाड़ी का फोटो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है। भाटी बोले- इष्ट का नाम लिखना क्या गुनाह है?
मामले में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने तंज कसते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी क्या गुनाह है? विधायक भाटी ने कहा कि यदि नियमों की पालना आवश्यक है तो उसका क्रियान्वयन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। आमजन की आस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज ऐसी स्थिति बन गई है कि लोग अपने आराध्य और इष्ट देवता का नाम भी अपने वाहन पर नहीं लिख सकते। थानाधिकारी बोले- नियमों के अनुसार की गई कार्रवाई
रीको थाना अधिकारी चैन प्रकाश ने बताया कि 14 जून को एक पिकअप गाड़ी का चालान SI लूणदान उप निरीक्षक, पुलिस थाना रीको बाड़मेर की ओर से काटा गया था। इसकी फ्रंट विंडशील्ड पर दो बड़ी काली फिल्म ऊपर और नीचे लगाई गई थी। उन पर ‘जय बाबा गरीब नाथ जी’ लिखा हुआ था। इसके अलावा भी विंड शील्ड पर सूरज राहुल स्वरूप वगैरह कुल पांच नाम लिखे हुए थे। इसकी वजह से ड्राइवर के सामने का दृश्य आंशिक रूप से बाधित होता पाया गया है, जो सामान्यतः ड्राइवर के दृश्यता संबंधी नियम के उल्लंघन में मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान बनता है। हाल ही में राजस्थान पुलिस ने एक राज्यव्यापी अभियान में, वाहनों पर हूटर, फ्लैशलाइट, नंबर प्लेट पर जाति सूचक या पद सूचक अन्य कोई नाम शब्द चिन्ह और वाहनों की विंडशील्ड/फ्रंट ग्लास पर अनाधिकृत शब्द चिन्ह इत्यादि प्रदर्शित करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए एक महीने का अभियान चला रखा है। इसी अभियान के तहत कार्रवाई की गई है।

होटल का कारोबार ठप हुआ तो बना नशा तस्कर:सप्लाई चेन का खुलासा होते ही फरार हुआ 25 हजार का इनामी तस्कर जोधपुर से दबोचा

राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 25 हजार के इनामी बदमाश को गिरफ्तार किया, जो एक साल से फरार चल रहा था। आरोपी ड्रग तस्कर सुनील झांझड़ा (26) को जोधपुर के नेटड़ा टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया है। आरोपी राज्य के टॉप ड्रग तस्करों में शामिल था। इसके साथ ही ANTF ने अपने अभियान में अब तक 69वें इनामी अपराधी को गिरफ्तार किया है। एडीजी एएनटीएफ के निर्देशन और आईजी ANTF विकास कुमार की निगरानी में चलाए गए ‘ऑपरेशन मदशंभूक’ के तहत यह कार्रवाई की गई। आरोपी सुनील झांझड़ा(26) निवासी कजनाऊ पालड़ी, थाना खेड़ापा, जिला जोधपुर पर हनुमानगढ़ पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। होटल का कारोबार ठप हुआ तो बना नशा तस्कर आईजी ANTF विकास कुमार ने बताया कि आरोपी ने बीए तक पढ़ाई करने के बाद रोजगार की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने जोधपुर-नागौर हाईवे पर एक होटल खोला। होटल से पर्याप्त आमदनी नहीं होने पर उसकी मुलाकात पंजाब के एक ट्रक चालक से हुई, जिसने अधिक कमाई के लिए अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई का रास्ता बताया। इसके बाद आरोपी ने होटल की आड़ में ट्रक चालकों को मादक पदार्थ बेचने का कारोबार शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका संपर्क पंजाब के तस्करों से हो गया और उसने राजस्थान से पंजाब तक नशे की सप्लाई का नेटवर्क खड़ा कर लिया। सप्लाई चेन का खुलासा होने पर हुआ फरार जांच में सामने आया कि आरोपी अपने होटल कर्मचारियों के माध्यम से भी मादक पदार्थ पंजाब तक भिजवाता था। इसी दौरान हनुमानगढ़ पुलिस ने एक खेप पकड़ ली, जिसमें जांच के दौरान सुनील का नाम सामने आया। पुलिस जब उसे पकड़ने होटल पहुंची तो वह फरार हो चुका था और पिछले एक साल से लगातार पुलिस से बचता फिर रहा था। रिश्तेदार के कार्यक्रम में जा रहा था, टोल प्लाजा पर दबोचा ANTF को सूचना मिली कि आरोपी गुजरात नंबर की स्कॉर्पियो से अपने परिवार के साथ किसी रिश्तेदार के कार्यक्रम में शामिल होने जोधपुर जा रहा है। सूचना के आधार पर एक टीम ने उसका पीछा किया, जबकि दूसरी टीम ने नेटड़ा टोल प्लाजा पर नाकाबंदी कर दी। जैसे ही आरोपी की गाड़ी टोल प्लाजा पहुंची, दोनों टीमों ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले अनजान बनने की कोशिश करते हुए कहा कि उसे किसी मुकदमे की जानकारी नहीं है, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने एनडीपीएस एक्ट के मामले में फरार होने की बात स्वीकार कर ली।

राजस्थान के शहीद को नेशनल वॉर-मेमोरियल में 'रोल ऑफ ऑनर':ऑपरेशन सिंदूर में दिया था सर्वोच्च बलिदान; पत्नी बोलीं- ये जीवन का सबसे गौरवशाली दिन

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के 6 जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किया गया है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद होने वाले जवानों में राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मेहरादासी गांव के निवासी सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा भी हैं। सुरेंद्र कुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वे उधमपुर की 39 विंग में ‘मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट’ के पद पर कार्यरत थे। करीब 14 वर्षों से एयरफोर्स की मेडिकल विंग में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 10 मई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर सेक्टर में पाकिस्तान के हवाई हमले में सुरेंद्र मोगा गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्होंने इलाज के दौरान वीरगति प्राप्त की थी। पत्नी भावुक हुईं, बोलीं- यह दिन सबसे कठिन, लेकिन सबसे गौरवशाली भी
सुरेंद्र मोगा को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा मिलने के बाद उनकी पत्नी वीरांगना सीमा देवी ने भावुक शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा- यह दिन उनके जीवन का सबसे कठिन, लेकिन सबसे गौरवशाली दिन है। सीमा देवी ने बताया- सबसे पहले मेरे पास दिल्ली से एयरफोर्स की एक अधिकारी का फोन आया, जिन्होंने यह जानकारी दी कि मेरे पति सुरेंद्र मोगा को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा प्रदान कर दिया गया है। इसके कुछ ही देर बाद ससुर का फोन आया और उन्होंने भी यह गौरवपूर्ण समाचार साझा किया। उन्होंने कहा- पति को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अभी दोनों बच्चे दक्ष और वर्तिका सीकर में एजुकेशन ले रहे हैं। दक्ष तीसरी और वर्तिका 8वीं क्लास में है। दोनों अपने पिता को खोने के गहरे दुख और देश के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के गर्व के साथ जीवन जी रहे हैं। सीमा देवी ने कहा- यह शहादत केवल हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पूरे देश की है। एक पत्नी का सुहाग उजड़ने का दर्द मैं ही जानती हूं, लेकिन आज मेरे मन में एक अलग ही सुकून है। अब पूरी दुनिया जान गई है कि सुरेंद्र मोगा ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उन्होंने बताया- मैं सीकर में अपने बच्चों का पालन-पोषण उन्हीं संस्कारों के साथ कर रही हूं, जो मेरे पति का सपना थे। हमारा परिवार कभी हार नहीं मानेगा और उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मुझे गर्व है कि मेरे पति देश के वीर सपूत थे। उनका बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा। पिता CRPF से और ससुर वायु सेना से रिटायर्ड
शहीद सुरेंद्र कुमार मोगा के पिता शिशुपाल मोगा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) से और चाचा प्यारेलाल मोगा भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। ससुर रामनिवास मील भी भारतीय वायु सेना से रिटायर्ड हैं। सुरेंद्र ने बचपन से पिता को और दूसरे रिश्तेदारों को आर्मी की यूनिफॉर्म में देखा था। ऐसे में देश सेवा का जज्बा बचपन से था। इसके बाद सुरेंद्र ने साल 2010 में एयरफोर्स जॉइन की थी। वे करीब 14 सालों से भारतीय वायुसेना में सेवारत थे। मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल’ से किया गया सम्मानित
शहीद सुरेंद्र मोगा को सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल (गैलंट्री)’ से सम्मानित किया गया। 93वें वायु सेना दिवस के अवसर पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर आयोजित समारोह में भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने यह वीरता सम्मान शहीद की वीरांगना पत्नी सीमा मोगा को प्रदान किया था। सम्मान ग्रहण करते समय वीरांगना सीमा मोगा ने गर्व और भावनाओं के साथ कहा था- सुरेंद्र मोगा हमेशा कहते थे- देश पहले हैं, बाकी सब बाद में। उन्होंने कहा- यह पुरस्कार मेरे पति की वीरता और त्याग का प्रतीक है।
2019 में हुआ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन 2019 में इंडिया गेट के पास हुआ था। यहां स्वतंत्रता के बाद देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज किए जाते हैं। इन छह नामों के जुड़ने के साथ ही ऑपरेशन सिंदूर भी उन सैन्य अभियानों में शामिल हो गया है, जिन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आधिकारिक रूप से सम्मान दिया गया है। ये खबर भी पढ़िए… झुंझुनूं में शहीद की पत्नी बोलीं-आई लव यू यार:गाल पकड़ कर कहा-प्लीज उठ जाओ; बेटे ने सैल्यूट किया, पाकिस्तानी अटैक में गई थी जान पाकिस्तानी हमले में शहीद झुंझुनूं के एयरफोर्स जवान सुरेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। 8 साल के बेटे दक्ष ने मुखाग्नि दी। शहीद की बेटी वृतिका (11) का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रही हैं- मेरे पापा बहुत अच्छे थे। दुश्मनों का खात्मा कर खुद शहीद हो गए। पूरी खबर पढ़िए

सलूम्बर में मुहर्रम पर निकाला ताजिए का जुलूस:रावली पोल पर सलामी रस्म, सेरिंग तालाब में किए ठंडे

सलूम्बर में मुहर्रम की दसवीं यौमे आशूरा शुक्रवार को मनाई गई। इस अवसर पर शहर में इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मजलिसों का आयोजन किया गया। करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सेरिंग तालाब में किया ठंडा
शहर के बाहर और अंदर से ताजियों के जुलूस पारंपरिक मार्गों से निकाले गए। अन्दर का शहर का ताजिया मदरसा चौक स्थित अंजुमन से बोहरवाड़ी, आजाद मोहल्ला, होली चौक होते हुए रावली पोल पहुंचा। बाहर का शहर का ताजिया गांधी चौक, होली चौक और आजाद मोहल्ला से होते हुए रावली पोल पहुंचा। रावली पोल पर दोनों ताजियों की पारंपरिक सलामी की रस्म अदा की गई। इसके बाद ताजियों को सेरिंग तालाब में ठंडा किया गया। जुलूस के दौरान “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। रास्तेभर विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं ने छबील लगाकर राहगीरों और अकीदतमंदों को ठंडा पानी, शरबत और अन्य पेय पदार्थ वितरित किए। समाज के लोगों के अनुसार, करबला में तीन दिन तक पानी बंद किए जाने की घटना की याद में छबील लगाना सेवा, इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। शहर के सदर मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि मुहर्रम हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास की कुर्बानी, वफादारी और इंसानियत के संदेश को याद करने का अवसर है। अंदर शहर के सदर अताउल्लाह खान ने कहा कि यौमे आशूरा सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुहर्रम के संदेश को सत्य, इंसाफ, सब्र और कुर्बानी का बताया। डीएसपी हेरम्भ जोशी के निर्देशन में पूरे जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। प्रशासन की सतर्कता और समाज के सहयोग से यह आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

फीस रिफंड नहीं की तो कॉलेज पर लगा जुर्माना:घर से 25 किमी दूर था कॉलेज, छात्र ने वापस मांगी थी फीस; अभी देनी होगी पूरी फीस

जयपुर महानगर द्वितीय की स्थायी लोक अदालत ने बियानी लॉ कॉलेज पर पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए परिवादी छात्र को उसकी पूरी फीस दो महीने में लौटाने के निर्देश दिए हैं। अध्यक्ष अनिता शर्मा और सदस्य कल्याण सहाय अग्रवाल की बेंच ने यह आदेश परिवादी छात्र माधव खंडेलवाल के परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिए। परिवाद में छात्र ने कहा था कि उसने 1 अगस्त 2024 को बियानी लॉ कॉलेज में एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने के लिए 10 हजार रुपए और 6 अगस्त 2024 को द्वितीय सेमेस्टर की 15 हजार रुपए की फीस जमा कराई थी। एडमिशन के बाद छात्र को पता चला कि कॉलेज विद्याधर नगर में न होकर कालवाड़ में स्थित है, जो उसके घर से 25 किलोमीटर दूर है। छात्र ने 20 नवंबर 2024 को फीस वापसी के लिए आवेदन किया, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया और न ही लीगल नोटिस का कोई जवाब दिया।
दो महीने में फीस लौटाने के निर्देश जवाब में कॉलेज प्रशासन की ओर से कहा गया कि एडमिशन के समय ही हमने छात्र को बता दिया था कि फीस किसी भी हाल में रिफंड नहीं की जाएगी। छात्र ने स्वेच्छा से बीच में पढ़ाई छोड़ी है, जिससे कॉलेज को भविष्य की पूरी फीस का नुकसान हुआ है। छात्र के अधिवक्ता प्रमोद कुमार खंडेलवाल ने कहा कि यूजीसी (UGC) की फीस रिफंड पॉलिसी 2024-25 के तहत प्रवेश की अंतिम तिथि से पहले अगर कोई छात्र रिफंड के लिए आवेदन करता है, तो कॉलेज को उसकी पूरी फीस लौटानी होगी। प्रार्थी ने प्रवेश की अंतिम तिथि 5 दिसंबर 2024 से 15 दिन पहले ही फीस रिफंड के लिए आवेदन कर दिया था। कॉलेज पर पांच हजार रुपए का जुर्माना दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत ने कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए कि वह छात्र की फीस दो महीने में लौटाए। फीस तय समय पर नहीं लौटाने पर कॉलेज को परिवाद दायर करने की तिथि से प्रार्थी को 7 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन छात्र को परिवाद व्यय और मानसिक संताप की क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार रुपए भी अदा करेगा।

टोंक समेत प्रदेश की 69140 स्कूलों को मिलेंगे 220.062 करोड़-रुपए:वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकारी स्कूलों को कार्यों के लिए तीन चरणों में मिलेगी राशि

राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से टोंक समेत राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को नामांकन के अनुसार पूरे सत्र में होने वाले कार्यों के लिए बजट दिया गया है। शिक्षा परिषद ने कंपोजिट स्कूल अनुदान सत्र 2026-27 दिशा-निर्देश गुरुवार को जारी किए है। इसमे सरकारी प्राइमरी और माध्यमिक 69140 स्कूलों के लिए सरकार 220 करोड़ 6 लाख 20 हजार रुपए की कंपोजिट स्कूल ग्रांट राशि देगी। इसमें राज्य के प्रारंभिक शिक्षा के 49 हजार 985 स्कूलों को 108 करोड़ 81 लाख 20 हजार रुपए और माध्यमिक शिक्षा के 19 हजार 155 स्कूलों को 111 करोड़ 25 लाख रुपए मिलेंगे। यह राशि सत्र 2026-27 के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से दी जाएगी। इसमें टोंक के प्राइमरी शिक्षा में 1118 स्कूलों को 1 करोड़ 98 लाख 90 हजार रुपए और माध्यमिक शिक्षा में 384 स्कूलों को 2 करोड़ 14 लाख 10 हजार रुपए मिलेंगे। यह राशि स्कूल प्रबंधन स्कूल के विभिन्न कार्यों पर खर्चे करती है। विद्यालय में आवश्यकता के अनुसार राशि खर्च होगी शिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया- राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से टोंक समेत राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को नामांकन के अनुसार पूरे सत्र में होने वाले कार्यों के लिए बजट दिया है। शिक्षा परिषद ने कंपोजिट स्कूल अनुदान सत्र 2026-27 दिशा-निर्देश गुरुवार को जारी किए है। जिसमें समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक,माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की सामान्य शैक्षिक, सह-शैक्षिक, भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन तथा विद्यालय स्वच्छता एक्शन प्लान के लिए कंपोजिट स्कूल ग्रांट दिए जाने का प्रावधान है। विद्यार्थी हित में विद्यालय की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य को बढ़ावा देना उद्देश्य इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य को बढ़ावा देने के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाओं का विकास करना एवं विद्यालयों की दैनिक, भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। यह अनुदान डाइस डाटा 2024-25 के अनुसार पीएमश्री विद्यालयों को छोड़ते हुए राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को दी जाती है। जो कि शिक्षा विभाग,पंचायती राज विभाग, केजीबीवी, संस्कृत शिक्षा के विद्यालयों, द्वारा संचालित विद्यालयों समाज कल्याण विभाग के अधीन आते हैं, को जारी की जानी है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से सत्र 2026-27 में राज्य के प्रारंभिक शिक्षा के 49 हजार 985 स्कूलों को 10881.200 तो माध्यमिक शिक्षा के 19 हजार 155 स्कूलों को मिलेंगे 11125.000 लाख रुपए की राशि दी जाएगी जिसका भुगतान जुलाई से सितम्बर तक 40 एवं अक्टूबर से दिसंबर तक 30 एवं जनवरी से फरवरी माह तक 30 प्रतिशत राशि स्कूलों को जारी की जाएगी। इन कार्यों पर खर्च करनी होगी स्कूलों को राशि ग्रांट का उपयोग दरी-पट्टी, बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था,परीक्षा संबंधी स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, समाचार पत्र, छात्र उपयोग में अन्य आवर्ती खर्च, झाडू,मटका, मग, श्याम पट्ट एवं रंग रोगन,प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट संबंधी कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा, स्कूल भवन की मामूली मरम्मत और अग्निशमन यंत्रों में गैस भरवाने जैसे कार्यों के लिए भी यह राशि उपयोगी होगी। साथ ही, बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने का किराया भी इसी मद से दिया जा सकेगा। स्वच्छता पर 10 प्रतिशत खर्च अनिवार्य: शिक्षा परिषद ने साफ किया है कि राज्य के सभी स्कूलों को कुल ग्रांट का न्यूनतम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। इसमें शौचालय की सफाई, फिनाइल,टॉयलेट क्लीनर, साबुन, सैनिटाइजर और कचरा पात्र जैसी वस्तुओं पर खर्च करना अनिवार्य है। बालिकाओं के लिए डिस्पेंसर और इन्सीनरेटर के रखरखाव को भी प्राथमिकता दी गई है। वहीं इस राशि से छात्र या स्टाफ या ऑफिस के लिए फर्नीचर,जलपान,उत्सव आयोजन या फोटोग्राफी पर खर्च नहीं कर सकेंगे। यदि बजट का दुरुपयोग पाया गया, तो संस्था प्रधान के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर राशि की वसूली की जाएगी। नामांकन के अनुसार स्कूलों को ग्रांट राशि मिलेगी नामांकन के अनुसार स्कूलों को ग्रांट राशि उपलब्ध करवाई जाएगी। जिसमे 1-30 10000 (स्वच्छता पर 1 हजार), 31-100 25000 (स्वच्छता पर 2500 रुपए), 101-250 50000 (स्वच्छता पर 5000 रुपए), 251-1000 75000 (स्वच्छता पर 7500 रुपए), 1000 से अधिक 100000 (स्वच्छता पर 10 हजार रुपए) दी जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों को मिलेगी ये राशि प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों को 1 से 30 नामांकन वाले 589 स्कूलों को प्रति स्कूल 10 हजार रुपए, 31 से 100 नामांकन वाले 442 स्कूलों को प्रति स्कूल 25 हजार रुपए, 101 से 250 नामांकन वाले 87 स्कूलों को प्रति स्कूल 50 हजार रुपए, 251 से 1000 नामांकन वाले 00 है। 1118 स्कूलों को 198.9000 लाख रुपए मिलेंगे सत्र 2026-27 में टोंक जिले में नामांकन के माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों को 1 से 30 नामांकन वाले 01 स्कूल को प्रति स्कूल 10 हजार रुपए, 31 से 100 नामांकन वाले 39 स्कूलों को प्रति स्कूल 25 हजार रुपए, 101 से 250 नामांकन वाले 217 स्कूलों को प्रति स्कूल 50 हजार रुपए, 250 से 1000 नामांकन वाले 125 स्कूलों को प्रति स्कूल 75 हजार रुपए, 1000 से अधिक नामांकन वाली 2 स्कूलों को एक एक लाख रुपए राशि मिलेगी।

मुहर्रम पर पहलवान ने कीलों पर लेटकर पत्थर तुड़वाया:सीकर में ताजियों को पहनाई नोटों की माला,मातमी धुन के बीच निकला जुलूस

सीकर में मुहर्रम के मौके पर अकीदत और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। दोपहर से लेकर शाम तक जाट बाजार और मोचीवाड़ा एरिया से मुहर्रम का जुलूस निकला। जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कर्बला मैदान पहुंचा। मातमी धुनों के बीच निकले ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस दौरान एक पहलवान ने कीलों पर लेटकर सीने पर पत्थर तुड़वाने का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पहले देखिए, मुहर्रम से जुड़ी PHOTO’S मुहर्रम पर्व पर 7 ताजिए जाट बाजार एरिया से और 6 ताजिए मोचीवाड़ा एरिया से निकले। मोचीवाड़ा एरिया से निकलने वाले ताजियों को परंपरा के मुताबिक नोटों की माला पहनाई गई। जुलूस के दौरान सीकर के जाट बाजार में पप्पू पहलवान ने कीलों पर लेटकर अपनी छाती पर रखकर करीब 50 किलो का पत्थर तुड़वाया। इस करतब को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। जुलूस के दौरान जाट बाजार में कई बार युवाओं के बीच नोकझोंक हुई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें समझाया। आज जुलूस के दौरान सीकर में ड्रोन कैमरे से हर मूवमेंट की निगरानी रखी गई।

फलोदी में मातमी धुनों के बीच निकले ताज़िए:अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की शहादत को किया याद, व्यवस्था संभालने के लिए सुरक्षा जवान रहे तैनात

फलोदी में मुहर्रम के अवसर पर बुधवार शाम पारंपरिक श्रद्धा और अनुशासन के साथ ताज़ियों का जुलूस निकाला गया। अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। किले के पीछे से शुरू हुआ जुलूस ताज़िया जुलूस की शुरुआत किले के पीछे स्थित क्षेत्र से हुई, जहां शहर के विभिन्न मोहल्लों से तैयार किए गए ताज़िए एकत्रित हुए। इसके बाद लोहार एवं कुरेशी, चूडीगर, नयारिया और फकीर समाज की ओर से निकाले गए ताज़िए निर्धारित मार्गों से होकर आगे बढ़े। जुलूस में मुस्लिम समाज के लोगों के साथ अन्य समुदायों के नागरिकों ने भी भागीदारी निभाई। मातमी धुनों के बीच गूंजती रहीं ‘हुसैन’ की सदाएं जुलूस के दौरान मातमी धुनों और ‘हुसैन’ की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मार्ग में कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने शर्बत एवं पेयजल की व्यवस्था कर जुलूस का स्वागत किया। ताज़ियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों और मार्ग के किनारे मौजूद रहे। वहीं किले के आसपास मुहर्रम के अवसर पर लगी अस्थायी दुकानों पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रशासन ने किए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम मुहर्रम के जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 35 पुलिसकर्मियों और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे जुलूस के दौरान व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

राजस्थान में कल से सफाई व्यवस्था ठप:सफाई कर्मी सामूहिक अवकाश पर, कामों का करेंगे बहिष्कार, जयपुर समेत सभी निकाय प्रभावित

राजस्थान में सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। सफाई कर्मियों की भर्ती समेत कई मांगों को लेकर राजस्थान के सफाई कर्मचारियों ने शनिवार से सामूहिक अवकाश पर जाने और सफाई व्यवस्था ठप करने का ऐलान किया है। आंदोलन के तहत जयपुर समेत प्रदेश के सभी नगर निकायों में कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। सफाई कर्मचारी संगठनों और संघर्ष समिति ने शुक्रवार को हुई आमसभा में यह फैसला लिया। इसके तहत सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के वार्डों में कर्मचारी अपनी-अपनी हाजरी गाहों(उपस्थिति केंद्रों) पर एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके विरोध में यह प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा रहा है। इससे कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है। प्रदेशभर में सफाई कार्य बंद कर जताया जाएगा विरोध संघर्ष समिति के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने बताया कि भर्ती से जुड़ी मांगों पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक फैसला नहीं होने के कारण आंदोलन को अगले चरण में ले जाने का फैसला किया गया है। पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन और भूख हड़ताल करने के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया। ऐसे में अब प्रदेशभर में सफाई कार्य बंद कर विरोध जताया जाएगा। संघर्ष समिति के अनुसार, शनिवार सुबह 8 बजे समिति के सदस्य जयपुर की छोटी चौपड़ पर एकत्र होंगे। इसके बाद विभिन्न वार्डों में जाकर कर्मचारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करेंगे। साथ ही डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाले हूपर चालकों, हेल्परों और सेकेंडरी कलेक्शन से जुड़े कर्मचारियों से भी हड़ताल का समर्थन करने का आग्रह किया गया है। सफाई कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील नंदकिशोर ने इसे कर्मचारियों के भविष्य की लड़ाई बताते हुए सभी सफाई कर्मचारियों से एकजुट रहने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि इस बार मांगें नहीं मानी गई तो भविष्य में सफाई कर्मचारियों के अधिकार और रोजगार पर असर पड़ेगा। इधर, वाल्मीकि समाज की ओर से भी प्रदेशभर के समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से आंदोलन के समर्थन की सार्वजनिक अपील जारी की गई है। अपील में कहा गया है कि समाज की आर्थिक स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए सभी लोग इस राज्यव्यापी आंदोलन में सहयोग करें। सफाई कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में भर्ती में परंपरागत सफाई कार्य से जुड़े लोगों को प्राथमिकता देना, पूर्व भर्ती से जुड़े न्यायालयीन मामलों के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना, वर्तमान में सफाई कार्य कर रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता देना, भर्ती को यूनियन के साथ हुए समझौते के अनुसार पूरा करना, ठेका प्रथा समाप्त कर आउटसोर्सिंग बंद करना तथा निकाय कोष से भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया में तीन गुना लॉटरी प्रणाली लागू करने और चयनित कर्मचारियों को दो वर्ष की सेवा के बाद स्थाई करने की मांग भी उठाई गई है।

वन विभाग के तीन कार्मिक सस्पेंड:अवैध खनन के मामले में कार्रवाई, विजिलेंस टीम ने डिकॉय ऑपरेशन किया था

दौसा डीएफओ ने वन विभाग के तीन कार्मिकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध पत्थर खनन के मामले में की गई है। जयपुर वन विभाग की विजिलेंस टीम ने एक डिकॉय ऑपरेशन किया था। इस ऑपरेशन में इन तीनों कार्मिकों की अवैध खनन में संलिप्तता पाई गई। उनकी लापरवाही के कारण क्षेत्र में लगातार अवैध खनन हो रहा था, जिसके बाद विभाग ने यह कदम उठाया। दौसा डीएफओ हरिकिशन सारस्वत ने बताया कि निलंबित किए गए कार्मिकों में वनपाल गिरधारी लाल मीणा, रामजीलाल मीणा और सहायक वनपाल सोहनलाल बैरवा शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध खनन के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।