दो दिन से लापता युवक का शव खेत में मिला:मौत के कारणों की जांच में जुटी मुंडावर पुलिस

मुंडावर थाना क्षेत्र के बीजवाड़ चौहान निवासी 40 वर्षीय गोपाल सिंह जाटव का शव रविवार रात बिरोद के पास एक खेत में मिला। सूचना मिलने पर मुंडावर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया। थानाधिकारी मोहर सिंह मीणा ने बताया कि गोपाल सिंह दो दिन पहले घर से लापता हुए थे। मृतक के भाई मुकेश की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, मौत के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो पाएगा।

बांसवाड़ा का इनामी बदमाश गुजरात से गिरफ्तार:गांजा तस्कर और चेक बाउंस मामले में फरार आरोपी भी पकड़ा

बांसवाड़ा में वांटेड अपराधियों की धरपकड़ के लिए ‘ऑपरेशन सुदर्शन चक्र-2’ और ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ चलाया जा रहा है। इसके तहत बांसवाड़ा एसपी और एएसपी नरपत सिंह भाटी के सुपरविजन में टीमों ने तीन अलग-अलग मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी सुधीर जोशी ने कहा कि जिले में अपराधियों, तस्करों और फरार वारंटियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सुदर्शन चक्र-2 के तहत आगे भी ऐसे वांछित अपराधियों के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी। अब पढ़िए- किस मामले में किसे पकड़ा

फलोदी में एक जुलाई से 'मां री संभाल' अभियान:डॉक्टर्स डे पर होगा आगाज, कलेक्टर ने ली बैठक

फलोदी जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए “माँ री संभाल” अभियान 1 जुलाई 2026 को डॉक्टर्स डे पर शुरू होगा। इसका उद्देश्य गर्भावस्था से जुड़े जोखिमों की समय पर पहचान कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना है। यह अभियान जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग, फलोदी द्वारा चलाया जाएगा। अभियान को लेकर बैठक अभियान के सफल क्रियान्वयन के संबंध में सोमवार को जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने चिकित्सा विभाग के जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अभियान के तहत आयोजित शिविरों में प्रत्येक गर्भवती महिला की आवश्यक जांचें एक साथ की जाएंगी। इनमें हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर (बीपी), ब्लड ग्रुप और पेशाब (यूरिन) की जांचें शामिल हैं। इन जांचों के माध्यम से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, संक्रमण या अन्य चिकित्सीय जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे जोखिम वाली गर्भावस्थाओं का समय पर उपचार और विशेष निगरानी संभव होगी, जिससे सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकेगा। अधिकतम लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का आह्लान जिला कलेक्टर ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान के दौरान सभी शिविरों में आवश्यक जांच सुविधाएं, चिकित्सकीय संसाधन और पर्याप्त मानवबल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रत्येक गर्भवती महिला का समयबद्ध पंजीकरण, जांच और फॉलोअप सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया, ताकि अभियान का अधिकतम लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंच सके। अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत पर कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों में चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और महिला प्रसविका अपनी सेवाएं देंगे। जिला कलेक्टर ने सभी गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि वे “माँ री संभाल” अभियान का लाभ उठाएं। उन्होंने निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान पर पहुंचकर सभी आवश्यक जांचें करवाने और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में सहभागी बनने का आग्रह किया। इस संबंध में हुई बैठक में सीएमएचओ डॉ. प्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ट्राइबल पीएचडी शोधार्थियों को हर महीने 37 हजार की फैलोशिप:टीएसपी एरिया के शोधार्थी कर सकते आवेदन, लास्ट डेट कल

ट्राइबल क्षेत्र के पीएचडी शोधार्थियों को हर महीने 37 हजार फैलोशिप से लेकर अन्य लाभ दिए जाते हैं। इसके लिए आवेदन करने की लास्ट डेट 30 जून है। माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर ने टीएसपी क्षेत्र और बारां जिले की शाहबाद और किशनगंज तहसील के जनजाति वर्ग के पीएचडी शोधार्थियों से शोध फैलोशिप छात्रवृत्ति(स्कॉलरशिप) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन 30 जून की शाम 5 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। संस्थान के निदेशक ओपी जैन ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य जनजाति वर्ग के शोधार्थियों को आर्थिक सहयोग देकर उच्च शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना है। योजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। ये पात्रता जरूरी हैं यह लाभ सरकार देगी
जैन ने बताया कि चयनित शोधार्थियों को हर महीने 37 हजार रुपए की फैलोशिप, 3,330 रुपए प्रतिमाह मकान किराया भत्ता और शोध अवधि के दौरान 40 हजार रुपए आकस्मिक निधि के रूप में दिए जाएंगे। गलत जानकारी देने पर फैलोशिप राशि लौटानी होगी
जैन ने बताया कि यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी देकर फैलोशिप प्राप्त करता है या निर्धारित समय में शोध पूरा नहीं करता और शोध अवधि समाप्त होने के एक साल के भीतर शोध प्रबंध जमा नहीं करता है, तो उसे दी गई पूरी फैलोशिप राशि वापस वसूल की जाएगी। विभाग का उद्देश्य गंभीर और समयबद्ध शोध कार्य को प्रोत्साहित करना है।

धरियावद में वन विभाग की कार्रवाई पर विवाद:विधायक और ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, वन कर्मियों पर कार्रवाई की मांग

प्रतापगढ़ के धरियावद में एक सप्ताह पहले वन विभाग की ओर से की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का मामला अब तूल पकड़ रहा है। इस कार्रवाई के विरोध में आज बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने विधायक थावरचंद डामोर के नेतृत्व में पहले उपखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और बाद में उदयपुर रोड पर धरना प्रदर्शन करते हुए कुछ देर के लिए जाम लगा दिया। विभाग के अधिकारियों ने की समझाइश सूचना मिलने पर उपखंड अधिकारी अश्विनी मालू और पुलिस उप अधीक्षक नानालाल सालवी सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन बात नहीं बन पाई। इसके बाद प्रदर्शनकारी वन विभाग के रेंज कार्यालय को घेरने के लिए निकल पड़े। धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने बताया कि एक सप्ताह पहले वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जून बोरिया गांव में नाथ परिवारों के निर्माणाधीन मकानों को ध्वस्त कर दिया था। वन विभाग का दावा था कि यह निर्माण वन भूमि पर अतिक्रमण करके किया जा रहा था। हालांकि, विधायक के अनुसार, मौके पर मौजूद पटवारी और तहसीलदार ने इसे चारागाह भूमि बताया था, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यह उनकी खातेदारी भूमि है। इस मुद्दे पर शुरुआत से ही विवाद था। वन कर्मियों पर कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि गरीबों के आशियाने गिराने वाले वन कर्मियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन किया जाएगा। समय बीतने के बाद भी कार्रवाई न होने पर आज विधायक थावरचंद डामोर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों के लोग और ग्रामीण उपखंड कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। बाद में सभी धरियावद-उदयपुर मार्ग पर पहुंचे और सड़क जाम कर दी। सूचना पर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे उपखंड अधिकारी अश्विनी मालू और पुलिस उप अधीक्षक नानालाल सालवी ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत शुरू की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विधायक बोले-कार्रवाई के नाम पर मजदूरों का मकान उजाड़ा इस दौरान विधायक डामोर ने कहा कि वन विभाग कार्रवाई के नाम पर गरीब मजदूर परिवारों के मकान उजाड़ रहा है, उनकी मानवीय संवेदनाएं खत्म हो चुकी है केवल अपना रोब दिखाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है, जब तक ऐसे वन कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा, उन्होंने मांग की की ऐसे लोगों को निलंबित कर मामले की जांच की जाए साथ ही गरीब परिवारो के मकान बनाकर उन्हे प्रदान किये जाए, इसके बाद प्रदर्शनकारी प्रादेशिक वन क्षेत्र कार्यालय का घेराव करने के लिए निकल पड़े।

स्लीपर-सेल बबीता धाकड़ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेशी:15 दिन की न्यायिक हिरासत बढ़ी, खदीजा को सुरक्षा कारणों से जेल से ही किया गया पेश

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा की सोमवार को जयपुर जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत 15 दिन के लिए बढ़ाते हुए जेल में ही रखने के आदेश दिए हैं। जयपुर जिला अदालत के सीजेएम-2 की कोर्ट में सोमवार को बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी कराई गई। सुरक्षा कारणों के चलते उसे जेल से कोर्ट नहीं लाया गया। पेशी से पहले एटीएस की टीम ने अदालत में आरोपी का वारंट पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने बबीता धाकड़ की न्यायिक हिरासत 15 दिनों के लिए बढ़ा दी और उसे जेल में ही रखने के आदेश दिए। इससे पहले शनिवार को सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद एटीएस ने उसे जयपुर की वेकेशन कोर्ट में पेश किया था, जहां से दो दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। राजस्थान एटीएस ने बबीता धाकड़ उर्फ खदीजा को 20 जून को जयपुर से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी गतिविधियों में शामिल थी। गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने उससे सात दिन तक गहन पूछताछ की। फिलहाल बबीता धाकड़ न्यायिक हिरासत में जेल में है। एटीएस मामले की जांच जारी रखते हुए उसके संपर्कों, डिजिटल सबूतों और कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

जोधपुर में ट्रक-टैक्सी भिड़ंत में ड्राइवर की मौत:बुजुर्ग मां बोली- पहले पति चले गए, अब इकलौता बेटा भी छिन गया; कमाने वाला कोई नहीं बचा

जोधपुर के लूणी थाना क्षेत्र में सजाड़ा के पास पत्थर से भरे एक ट्रक और टैक्सी में भीषण भिड़ंत हो गई। हादसे में टैक्सी ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसने जोधपुर के मथुरादास माथुर (MDM) हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मौत की सूचना के बाद परिजनों ने शाम को अस्पताल के गेट के बाहर प्रदर्शन किया। परिजनों की मांग थी कि पुलिस हादसे के जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर को तुरंत गिरफ्तार करे। हालांकि, बाद में पुलिस की समझाइश और आश्वासन के बाद आक्रोशित परिजन शांत हुए। हादसा सोमवार सुबह करीब 4 बजे हुआ। जोधपुर की मदेरणा कॉलोनी का रहने वाला मोहम्मद शरीफ (46) अपनी टैक्सी से रेलवे स्टेशन से सजाड़ा धाम सवारी छोड़कर वापस लौट रहा था। टोल नाके से थोड़ा आगे कृष्णा होटल के पास सामने से आ रहे पत्थर से भरे ट्रक ने उसकी टैक्सी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में मोहम्मद शरीफ गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीर उसे तुरंत एमडीएम (MDM) हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने टैक्सी जब्त की, अस्पताल के बाहर जुटी भीड़ घटना की सूचना मिलने के बाद लूणी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त टैक्सी को सड़क से हटवाकर खेजड़ली चौकी में रखवाया। इसके साथ ही फरार ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। इधर, हादसे के बाद कार्रवाई की मांग को लेकर मृतक के परिजन और समाज के लोग मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल के बाहर एकत्रित हो गए। सूचना मिलने पर शास्त्रीनगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों से समझाइश कर उन्हें शांत करवाया। लूणी पुलिस का कहना है कि ट्रक चालक की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ‘पापा चले गए, अब हमारा कौन है…’ कहकर बार-बार बेहोश हो रही बेटी हादसे की खबर सुनकर मृतक की बड़ी बेटी हिना का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपने पिता को याद कर बार-बार बेसुध हो रही है। हिना ने रोते हुए बताया, “हम चार बहनें हैं। हमारा पालन-पोषण करने वाले पापा ही हमें छोड़कर चले गए। अब हमारे परिवार में कमाने वाला कोई नहीं बचा है।” इतना कहते ही हिना फिर से बेहोश हो गई, जिसे वहां मौजूद लोगों ने संभाला। घर का इकलौता सहारा छिना, पत्नी 5 महीने की गर्भवती मृतक की मां सायरा बानो ने बताया कि उनका बेटा रविवार शाम को घर से टैक्सी लेकर निकला था। दिनभर कोई सवारी नहीं मिली तो वह घर नहीं आया। रात को जब सवारी मिली, तो वह उसे छोड़ने सजाड़ा धाम गया था। वहां से लौटते समय यह हादसा हो गया। सायरा बानो ने रोते हुए बताया, “मेरे पति की पहले ही मौत हो चुकी है। बेटा ही घर में अकेला कमाने वाला था, अब वह भी चला गया। बहू 5 महीने की गर्भवती है, अब इस परिवार का गुजारा कैसे होगा?” किराए की टैक्सी चलाकर पालता था पेट, मुआवजे की मांग पड़ोस में रहने वाले ताजुल ने बताया कि मोहम्मद शरीफ किराए पर टैक्सी लेकर चलाता था। कभी कमाई होती थी तो कभी नहीं। अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, इसलिए सरकार को पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद पुलिस ने भी परिजनों को सही तरीके से जवाब नहीं दिया।

राजस्थान यूनिवर्सिटी की पहली मेरिट लिस्ट जारी:महारानी कॉलेज में बीकॉम 97% तो राजस्थान कॉलेज में बीए 95.79% पर बंद हुई पहली कट-ऑफ

राजस्थान विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-27 के ग्रेजुएशन एडमिशन के लिए पहली मेरिट लिस्ट जारी कर दी है। यूनिवर्सिटी महारानी कॉलेज, महाराजा कॉलेज, राजस्थान कॉलेज और यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज समेत सभी संघटक कॉलेजों की पहली कट-ऑफ सोमवार को वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई। सीटों के मुकाबले कई गुना आवेदन आने के कारण इस बार अधिकांश लोकप्रिय कोर्सों की कट-ऑफ पिछले सालों की तुलना में अधिक रही।
पहली मेरिट लिस्ट में चयनित विद्यार्थियों को 30 जून से 2 जुलाई तक संबंधित कॉलेज में दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। इसके बाद 3 जुलाई तक फीस जमा कर प्रवेश सुनिश्चित करना होगा।
महारानी कॉलेज में बीकॉम पास कोर्स की कट-ऑफ सबसे ज्यादा 97%
यूनिवर्सिटी महारानी कॉलेज में कॉमर्स संकाय की कट-ऑफ सबसे अधिक रही। बीकॉम पास कोर्स में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 97 प्रतिशत रही। ओबीसी के लिए 94.40, एससी 87.20, एसटी 75.60, ईडब्ल्यूएस 92.40 और एमबीसी 80.40 प्रतिशत रही।
बीकॉम मेजर (एबीएसटी) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 96.20 प्रतिशत, ओबीसी 92.30, एससी 79, एसटी 61, ईडब्ल्यूएस 91.20 और एमबीसी 80.80 प्रतिशत रही। बीकॉम मेजर (बीएडीएम) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 95.40 प्रतिशत, जबकि बीकॉम मेजर (ईएएफएम) में 96.20 प्रतिशत रही। वहीं बीबीए (एसएफएस) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 91.20 प्रतिशत रही। राजस्थान कॉलेज में बीए के लिए 95.79% तक पहुंची कट-ऑफ
राजस्थान कॉलेज में थ्री/फोर ईयर बीए पास कोर्स (डे) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 95.79 प्रतिशत रही। ओबीसी 93.80, एससी 91, एसटी 91.60, ईडब्ल्यूएस 92.40 और एमबीसी 93 प्रतिशत रही।
एसएफएस बीए पास कोर्स में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 68.40 प्रतिशत रही। बीए मेजर में भूगोल और राजनीति विज्ञान के लिए सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 94-94 प्रतिशत रही। अर्थशास्त्र में 91.60, इतिहास में 90.60, अंग्रेजी साहित्य में 90, हिंदी में 75.80, मनोविज्ञान में 74 और समाजशास्त्र में 70 प्रतिशत कट-ऑफ रही। लोक प्रशासन विषय में 50 प्रतिशत तक प्रवेश रखा गया है। कॉमर्स कॉलेज में बीकॉम रेगुलर के लिए 93% कट-ऑफ
कॉमर्स कॉलेज में बीकॉम रेगुलर के लिए सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 93 प्रतिशत रही। ओबीसी 88, एससी 75, एसटी 45.20, एमबीसी 61.60 और ईडब्ल्यूएस 85 प्रतिशत रही।
बीबीए में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 90.20 प्रतिशत, बीसीए में 87.60 प्रतिशत रही। बीकॉम (एबीएसटी) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 93 प्रतिशत, बीकॉम (बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) में 86.50 प्रतिशत और बीकॉम (ईएएफएम) में 84.60 प्रतिशत रही। बीकॉम (एसएफएस) में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 75 प्रतिशत और बीकॉम (बीएफएसआई) में 75.80 प्रतिशत रही।
महाराजा कॉलेज में बीएससी (मैथ्स) की कट-ऑफ सबसे ज्यादा 96%
महाराजा कॉलेज में विज्ञान संकाय की पहली मेरिट लिस्ट में सबसे अधिक कट-ऑफ बीएससी (मैथ्स) के लिए रही। सामान्य वर्ग में बीएससी (मैथ्स) की कट-ऑफ 96 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा बीएससी (मैथ्स ग्रुप) में 95.40 प्रतिशत, बीएससी (फिजिक्स) में 95.40 प्रतिशत, बीएससी (केमिस्ट्री) में 93.40 प्रतिशत, बीएससी (जूलॉजी) में 92 प्रतिशत, बीएससी (बायो ग्रुप) में 91.20 प्रतिशत और बीएससी (बॉटनी) में 91 प्रतिशत कट-ऑफ रही। वहीं बीसीए में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 90 प्रतिशत और बीएससी (स्टैटिस्टिक्स) में 71 प्रतिशत रही। अधिकांश पाठ्यक्रमों में ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और एमबीसी वर्ग की कट-ऑफ भी 80 से 94 प्रतिशत के बीच रही, जिससे स्पष्ट है कि इस बार महाराजा कॉलेज में भी प्रवेश के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिला। रिक्त सीटें बचने पर जल्द जारी होगी दूसरी मेरिट लिस्ट
राजस्थान विश्वविद्यालय में इस बार 22 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि चारों संघटक कॉलेजों में करीब 6700 आवेदन जमा हुए। सीटों की तुलना में कई पाठ्यक्रमों में तीन गुना तक आवेदन आने से प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी और पहली कट-ऑफ भी ऊंची रही। विश्वविद्यालय के अनुसार पहली मेरिट लिस्ट में चयनित विद्यार्थियों को 30 जून से 2 जुलाई तक दस्तावेज सत्यापन कराना होगा। इसके बाद 3 जुलाई तक फीस जमा करने के बाद संबंधित कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। रिक्त सीटें बचने पर विश्वविद्यालय दूसरी मेरिट लिस्ट जारी करेगा।

दर्दनाक हादसे का चश्मदीद बोला- शवों के बीच तड़पता रहा:आंख खुली तो अस्पताल में था, जयपुर-अजमेर हाईवे पर खड़ी बस को ट्रक ने मारी टक्कर, 3 की मौत

जयपुर-अजमेर नेशनल हाईवे-48 पर दूदू के महला गांव के पास सोमवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल बस के खलासी मोहम्मद रेहान ने होश आने के बाद हादसे का ऐसा मंजर बयां किया जिसे सुनकर हर कोई सिहर उठा। उसने कहा कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि साथ खड़े लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और वह खुद शवों के बीच खून से लथपथ पड़ा रहा। सोमवार सुबह करीब पांच बजे जयपुर लौट रही श्रद्धालुओं से भरी बस का एक्सल टूट जाने के कारण बस को हाईवे किनारे खड़ा किया गया था। ड्राइवर बस ठीक करने में जुटा था, जबकि खलासी मोहम्मद रेहान नया एक्सल लेकर लौटा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार ट्रक ने बस को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही बस सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। हादसे में मधुराज, राहुल हरिजन और भंवर सिंह राजावत की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हो गए।
घायल खलासी ने सुनाई हादसे की खौफनाक कहानी गंभीर घायल मोहम्मद रेहान ने बताया कि वह ड्राइवर सहित आठ लोगों के साथ बस के आगे खड़ा था। बस की बैक लाइट और इंडिकेटर चालू थे, फिर भी तेज रफ्तार ट्रक सीधे बस में आ घुसा। उसने कहा कि टक्कर इतनी भयानक थी कि जो लोग ट्रक के नीचे आए, उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। वह खुद सिर, चेहरे, कंधे और पेट पर गंभीर चोट लगने के बाद दर्द से तड़पता रहा। उसकी आंखों के सामने मृतकों और घायलों को उठाया जा रहा था, लेकिन वह खुद हिल भी नहीं पा रहा था। कुछ देर बाद उसकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और जब होश आया तो वह एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के बेड पर था। बहन बोलीं- भाई था सिर्फ कमाने वाला रेहान की बहन नेहा ने बताया कि आठ महीने पहले ही उसके भाई ने बस में खलासी का काम शुरू किया था और वही पूरे परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। पिता बीमारी के कारण काम करने में असमर्थ हैं, जबकि परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार मूल रूप से लखनऊ का रहने वाला है, लेकिन रोजगार की तलाश में जयपुर आकर किराये पर रह रहा है। परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। फिलहाल गंभीर घायल मोहम्मद रेहान का एसएमएस अस्पताल में इलाज जारी है। वहीं, पुलिस हादसे की जांच कर रही है और ट्रक चालक की तलाश में जुटी हुई है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर खड़े वाहनों की सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रेप के दोषी नाबालिग बालक को 20 साल की जेल:DNA रिपोर्ट ने साबित किया अपराध, पीड़िता को 5 लाख रुपए मुआवजा

पॉक्सो मामलों के विशिष्ट न्यायाधीश बृजेश कुमार शर्मा ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नाबालिग आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास और 1 लाख 2 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके साथ ही पीड़ित बालिका को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाने का भी आदेश दिया गया है। इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट, आरोपी को दोषी सिद्ध करने का प्रमुख आधार बनी। विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि यह मामला जिले के महावीरजी थाना क्षेत्र का है। पीड़ित बालिका की ताई ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार घटना से लगभग तीन-चार महीने पहले आरोपी बालक ने पीड़िता को अपनी मौसी के लड़के को खिलाने के बहाने अपने घर बुलाया था। जब पीड़िता उसके घर पहुंची, तो आरोपी उसे जबरन एक कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के चिल्लाने पर आरोपी ने उसके मुंह में चुन्नी ठूंस दी और धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे जान से मार देगा। इस डरावनी घटना और जान से मारने की धमकी के कारण पीड़िता चुप रही। परिणामस्वरूप, उसे चार माह का गर्भ ठहर गया। पेट में बदलाव देखने के बाद पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद महावीरजी थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन अनुसंधान किया और आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 21 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त 43 महत्वपूर्ण दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। पीड़िता के गर्भपात के बाद सुरक्षित रखे गए भ्रूण के सैंपल और विधि से संघर्षरत बालक के खून के नमूने की डीएनए जांच कराई गई थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि भ्रूण का जैविक पिता वही बालक था। इन सभी पुख्ता और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल के कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।