अब यूजरनेम से भी होगी WhatsApp पर चैट:29 जून से बुकिंग शुरू; बिना मोबाइल नंबर बताए बातचीत भी कर सकेंगे

अब तक वॉट्सएप पर किसी नए व्यक्ति से बात करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सएप ने यूजरनेम फीचर लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसके बाद लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे। कंपनी ने 29 जून से दुनियाभर में यूजरनेम की बुकिंग शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिलेगी। आने वाले कुछ महीनों में इसे धीरे-धीरे सभी देशों में रोल आउट किया जाएगा। जब यह फीचर यूजर के इलाके में उपलब्ध होगा, तब उसके वॉट्सएप के अंदर नोटिफिकेशन मिलेगा। सबसे पहले जानें, जल्दी यूजरनेम बुक करना क्यों जरूरी है दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स एक जैसे या मिलते-जुलते यूजरनेम चुन सकते हैं। ऐसे में जो लोग पहले अपना यूजरनेम रिजर्व करेंगे, उन्हें अपनी पसंद का यूजरनेम मिलने की संभावना ज्यादा होगी। WhatsApp के हेड कुणाल शाह ने X पर लिखा सही समय ही सब कुछ है। दुनिया भर में यह फीचर जारी होने से पहले ही WhatsApp से जुड़ें और अपना यूजरनेम सुरक्षित कर लें। अब अपनी पसंद का यूजरनेम लेने का समय है। लोगों से जुड़ने का एक अधिक निजी (प्राइवेट) तरीका जल्द ही आपके WhatsApp पर आने वाला है। इस नए फीचर से क्या बदलेगा यूजरनेम फीचर आने के बाद कुछ स्थितियों में फोन नंबर अपने-आप दिखाई नहीं देगा। इनमें शामिल हैं: इस बदलाव से आपका फोन नंबर निजी (प्राइवेट) रहेगा। वह तभी दिखाई देगा, जब आप खुद उसे साझा करना चाहेंगे। वॉट्सएप Username फीचर से जुड़े 8 सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है इन लोगों को आपसे संपर्क करने के लिए यूजरनेम की जरूरत नहीं होगी ……………….. यह खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर फ्रॉड रोकने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

डकैत जगन गुर्जर के परिजनों का धरना, मांगों पर अड़े:बेटा बोला- प्लानिंग से पिता की हत्या की गई; लिखित आश्वासन नहीं मिला तो जान दे दूंगा

डकैत जगन गुर्जर की हत्या के विरोध में परिवार वाले अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उसके बेटे आसाराम ने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा- मैं जगन गुर्जर का खून हूं..मैं घर में घुसकर मारना भी जानता हूं..और जेल में भी मारना जानता हूं, इसका जवाब फिर सरकार देगी। परिजन मांगों को लेकर लिखित आश्वासन देने पर अड़े हैं। आसाराम ने बताया कि पूरी प्लानिंग के तहत पिता का मर्डर किया गया है। शक किसी पर नहीं है, लेकिन एक व्यक्ति पिता की हत्या नहीं कर सकता। कहां आरोपी 30 किलो का और मेरे पिता हट्‌टे-कट्‌टे इंसान थे। सेवर जेल में पिता को मारने की साजिश हुई थी। तब पिता 15 लोगों पर भारी पड़ गए थे। इसमें पूरी जेल प्रशासन की मिलीभगत है। आसाराम ने बताया- चाचा पप्पू गुर्जर की सुरक्षा को लेकर कुछ टाइम पहले गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म से मुलाकात की थी। तब उन्हें एक ज्ञापन देकर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से शिफ्ट करने की मांग की थी, लेकिन उनकी कोई मांग पूरी नहीं की गई। जेल में बंद मेरे चाचा पप्पू गुर्जर की भी जान को खतरा है। उनको धौलपुर जेल में स्थानांतरित (ट्रांसफर) किया जाए। आसाराम ने कहा कि जो प्रशासन ने मांगों पर आश्वासन दिया है अगर वह लिखित में नहीं दी गई, तब तक धरना जारी रहेगा। मेरे पिता खत्म हो चुके हैं तो मैं जी कर क्या करूंगा। इसलिए अपने प्राण त्याग दूंगा यहीं पर…। उधर, मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। अधिकारी परिवार वालों को लगातार समझाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार वाले पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर रहे हैं। सीओ मनीष बडगुर्जर ने बताया- परिवार वालों की जो भी मांगें हैं, उनसे सीनियर अफसरों को अवगत करा दिया गया है। इधर, हाई सिक्योरिटी जेल में बंद डकैत पप्पू गुर्जर को भाई जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिल गई है। मंगलवार को जेल उपाधीक्षक भंवर सिंह समेत ड्यूटी पर मौजूद जेलकर्मियों के बयान दर्ज किए गए। अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हुई थी हत्या 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी। वह धौलपुर के डांग के भवुतीपुरा का रहने वाला था। आरोप है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग देखिए…

जयपुर में युवती-भाभी से सरेआम अभद्रता, VIDEO:सूचना पर पहुंचे युवती के भाई पर जानलेवा हमला; सिर में तीन टांके आए

जयपुर के रामनगरिया थाना क्षेत्र में कार से दूसरी कार टकराने पर विवाद बढ़ गया। युवकों ने एक युवती और उसकी भाभी के साथ अभद्रता की। फोन कर बुलाए युवती के भाई पर युवकों ने जानलेवा हमला कर दिया। युवक के सिर में तीन टांके आए हैं, वहीं एक आंख पर गंभीर चोट लगी है। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरोपी मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। पीड़िता के अनुसार, 27 जून की शाम करीब 5:15 बजे वह अपनी भाभी के साथ तिलक नगर स्थित घर से जगतपुरा स्थित एक सैलून जा रही थी। इसी दौरान जगतपुरा की सर्विस लेन में एक स्विफ्ट कार (RJ14 CV 8367) ने उनकी कार (RJ14 CG 0141) को साइड से टक्कर मार दी। फोन कर बुलाए भाई पर हमला युवती का आरोप है कि हादसे के बाद जब उन्होंने विरोध किया तो कार सवार युवक गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने लगे। इसी बीच उन्होंने अपने भाई को फोन किया, जो एमजी हेक्टर कार में पीछे ही आ रहे थे और कुछ ही मिनट में मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि भाई के पहुंचते ही दूसरे पक्ष के युवक ने अपने 7-8 साथियों को बुला लिया। सबसे पहले वीडियो बना रही भाभी का मोबाइल छीनने की कोशिश की गई। युवती की भाभी ने कहा कि आरोपियों ने उनके दोनों हाथ पकड़ लिए, उनके साथ हाथापाई की और जबरन अपनी कार में बैठाने की कोशिश की। विरोध करने पर भाई के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी, तीन टांके आए और एक आंख भी गंभीर रूप से घायल हो गई। बता दें कि तीन दिन पहले ही 23 जून को ही शादी हुई थी। पीड़ित की शादी की महंदी भी नहीं उतरी थी और शादी के बाद के अन्य कार्यक्रम होने थे। लेकिन पीड़ित से हुई मारपीट के बाद पूरा परिवार डर और सदमें में है। सूचना के बाद भी नहीं पहुंची पुलिस पीड़ित युवती का कहना है कि घटना के दो से पांच मिनट के भीतर ही उन्होंने 100 और 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दे दी थी, लेकिन पुलिस समय पर मौके पर नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि पुलिस करीब आधे घंटे बाद पहुंची, तब तक आरोपियों ने उनके भाई के साथ मारपीट कर दी थी और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार कर चुके थे। वीडियो में मारपीट करते दिखे युवक युवती का कहना है कि जान बचाने के लिए वे पास की एक दुकान में भागे। उन्होंने दावा किया कि घटना के वीडियो और फोटो उनके मोबाइल में मौजूद हैं। वहीं, पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी कार को टक्कर मारने के बाद मारपीट करते नजर आ रहे हैं। मामले में रामनगर थाना पुलिस ने युवती की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 281, 115(2), 126(2) और 189(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एएसआई सुरेश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। रामनगरिया थाना प्रभारी चंद्रभान ने बताया- मामले में पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच शुरू कर दी गई है। वहीं पीड़ित कहा कि आरोपी इतना सब होने के बाद भी थाने में मौजूद था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। बता दें कि मामले में पुलिस ने मंगलवार को दो स्थानीय निवासियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान ओमप्रकाश शर्मा और उसके भाई सत्यनारायण शर्मा निवासी टीलावाला जगतपुरा को गिरफ्तार किया है।

खून के बदले VIP दर्शन, ज्योतिर्लिंग में ऐसा पहला सिस्टम:ओंकारेश्वर में रक्तदान को आस्था से जोड़ा; MP के दूसरे धार्मिक स्थलों पर भी ऐसा होगा

‘26 जून 2026। राजस्थान के अजमेर से सिमरन लखानी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए परिवार समेत पहुंची हैं। उमस भरी गर्मी में लाइन में लगी हैं। कतार बहुत लंबी है। बीच-बीच में पूजा की थाली अपने परिजन को देकर रुमाल से चेहरा साफ और उसी से हवा भी कर रही हैं। इतने में तीन लोग VIP गेट से दर्शन के लिए जाते दिखे। उन्होंने पास ही खड़े मंदिर के सेवादार से तंज भरे लिहाज से कहा- ये लोग बिना लाइन लगे दर्शन को जा रहे हैं। सेवादार कहते हैं- आप भी इन्हीं की तरह दर्शन कर सकती हैं। आपको महादान करना होगा, वो है रक्तदान। यह सुनते ही सिमरन अपने परिवार के साथ लाइन से निकल VIP दर्शन के लिए रक्तदान करने पहुंच गईं।’ मध्यप्रदेश के ज्योतिर्लिंग खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में VIP दर्शन के लिए नई स्कीम लागू की है। ऐसा करने वाला यह देश का पहला ज्योतिर्लिंग है। इससे न केवल अस्पतालों में ब्लड का संकट कम हुआ है, बल्कि जिला अस्पताल का ब्लड बैंक सरप्लस स्टॉक में आ गया है। जिला ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. अतुल माने कहते हैं- एक ओर श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर रहे हैं। दूसरी ओर, उनका रक्त किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान बन रहा है। रोजाना करीब 40 से 50 यूनिट ब्लड इकट्‌ठा किया जा रहा है। इसी साल फरवरी महीने से 27 जून तक 2300 यूनिट ब्लड डोनेट किया जा चुका है। अब यह व्यवस्था उज्जैन के महाकाल, मैहर, दतिया के पीताम्बरा पीठ समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर लागू किया जाएगी। आइडिया– रक्तदान को शीघ्र दर्शन से जोड़ा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि ओंकारेश्वर में रोजाना करीब 20 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। शनिवार–रविवार और सोमवार को यह संख्या 50 हजार से ज्यादा पहुंच जाती हैं। दर्शन के लिए लंबी कतार लगती है। इसी को देखते हुए ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसमें रक्तदान जैसे महादान को शीघ्र दर्शन से जोड़ा गया। रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को भगवान ओंकारेश्वर के नि:शुल्क वीआईपी दर्शन की सुविधा देने की योजना बनाई गई। कलेक्टर कहते हैं- रक्तदान करने वाले और उनके दो साथियों को भगवान ओंकारेश्वर के निशुल्क VIP दर्शन का अवसर भी मिल रहा है। खंडवा समेत आसपास के जिलों के मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो रहा है। कलेक्टर का कहना है- श्रद्धालु महज 20 मिनट में ब्लड डोनेट करके 3 से 4 घंटे लंबी लाइन से बच सकते हैं। इसके लिए मंदिर के पास में ही ब्लड डोनेशन के लिए पांच बेड वाला कैंप बनाया गया है। इसके बाद सर्टिफिकेट मिलने से डोनर और उनके परिवार को मंदिर में वीआईपी एंट्री मिल जाती है। दर्शन के बाद प्रसाद और भगवान ओंकारेश्वर की तस्वीर भी दी जाती है। पांच महीने में 2,362 श्रद्धालु कर चुके रक्तदान योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2026 को ट्रायल के तौर पर ओंकार प्रसादालय से सप्ताह में केवल मंगलवार और शनिवार को की गई थी। पॉजिटिव रिस्पॉन्स के बाद इसे रोजाना संचालित किया जाने लगा। वर्तमान में यह व्यवस्था शांति निकेतन वृद्धाश्रम से चल रही है। पिछले पांच महीने में अब तक 2,362 श्रद्धालु रक्तदान कर चुके हैं। वॉट्सऐप ग्रुप पर रहते हैं अपडेट को–ऑर्डिनेशन के लिए प्रदेशभर के जिला ब्लड बैंक का वॉट्सऐप ग्रुप बना है। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी डायरेक्टर रूबी खान संबंधित जिले को रक्त उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करती हैं। डॉ. माने के अनुसार प्रदेशभर के धार्मिक स्थल जैसे–उज्जैन के महाकाल, मैहर, ओरछा, दतिया पीताम्बरा पीठ समेत अन्य जगह यह व्यवस्था लागू की जाएगी। वर्तमान में VIP दर्शन व्यवस्था मंदिर में रोजाना सामान्य दर्शन के लिए तीन से चार घंटे लगते हैं। वहीं, वीआईपी दर्शन के लिए 300 रुपए की रसीद कटवानी होती है। इसमें आधे घंटे का समय लगता है। करीब 4 हजार श्रद्धालु शुल्क देकर शीघ्र (वीआईपी) दर्शन करते हैं। वहीं, रक्तदान योजना के तहत रोजाना करीब 50 श्रद्धालु अपने दो साथियों के साथ नि:शुल्क वीआईपी दर्शन करते हैं। यानी रोज करीब 150 श्रद्धालु इस योजना के तहत दर्शन कर रहे हैं। अन्य प्रोटोकॉल, अधिकारी और विशेष श्रेणी के करीब 200 लोगों के दर्शन की अलग व्यवस्था है। अलग ब्लड बैंक बनाने पर विचार डॉ. माने ने बताया कि रक्तदान के बाद सभी यूनिट्स को प्रतिदिन विशेष फ्रीजर में रखा जाता है। एक-दो दिन में वैन की मदद से खंडवा जिला चिकित्सालय स्थित जिला ब्लड बैंक ले जाया जाता है। खंडवा में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद यहां हर महीने 1,200 यूनिट ब्लड की जरूरत थी, लेकिन इसका आधा ही पूरा हो पाता था। इस मॉडल ने ब्लड का सरप्लस स्टॉक जमा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। मेडिकल कॉलेज में बढ़ते ब्लड स्टॉक रखने के लिए अलग ब्लड बैंक सुविधा की योजना पर काम चल रहा है। जिला ब्लड बैंक की क्षमता 450 यूनिट डॉ. माने के अनुसार जिला ब्लड बैंक की स्टोर क्षमता करीब 450 यूनिट है, जबकि जरूरत 80 से 100 यूनिट है। ब्लड बैंक के माध्यम से जिला चिकित्सालय समेत अन्य जगह ब्लड भेजा जाता है। जिन यूनिटों की एक्सपायरी नजदीक होती है, उन्हें पहले उपयोग (First Expiry, First Out) के सिद्धांत पर जारी किया जाता है, ताकि रक्त व्यर्थ न जाए। यहां से आसपास के जिला चिकित्सालय जैसे– बैतूल, बड़वानी, बुरहानपुर, हरदा और खरगोन समेत विभिन्न जिलों को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। रक्त अधिकृत मांग (इंडेंट) और रिप्लेसमेंट/रसीद (Receipt) के आधार पर दिया जाता है। संबंधित केंद्र की आवश्यकता, स्टॉक और विभागीय अनुमति के अनुसार रक्त जारी किया जाता है। घर बैठे मिलेगा लड्डू महाप्रसाद दूसरी बड़ी पहल ये है कि बाबा ओंकार का लड्डू महाप्रसाद घर बैठे मिलेगा। भारतीय डाक विभाग के माध्यम से प्रसाद देशभर में भेजा जाएगा। श्रद्धालु मंदिर की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करेंगे। प्रसाद के साथ शिव चालीसा, रुद्राक्ष और मंदिर दर्शन कार्ड भी निःशुल्क भेजा जाएगा। मंदिर परिसर में डाक विभाग का अलग काउंटर भी शुरू किया जा रहा है।

पहला डाकू जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में उठी थी:दर्जनों मर्डर करने वाला बाद में 3-3 रुपए के लिए झगड़ने लगा, अब जेल में हत्या

पिता गुर्जर मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे और खुद कभी दूध बेचता था। उस कुख्यात डाकू जगन गुर्जर की कहानी का अंत 29 जून को हो गया। अजमेर जेल में उसकी हत्या हो गई। जगन देश का पहला ऐसा डाकू था, जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद में उठाई गई थी। करीब 10 साल का समय ऐसा था, जब वह राजस्थान सहित यूपी (उत्तर प्रदेश) और एमपी (मध्य प्रदेश) में खौफ का दूसरा नाम बन गया था। जगन पर दर्ज कुल 125 मुकदमों में से आधे से ज्यादा मामले मर्डर, मर्डर के प्रयास, लूट, अपहरण और डकैती के थे। कभी राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का महल (धौलपुर पैलेस) उड़ाने की धमकी देने वाले जगन की बाद में स्थिति यह हो गई थी कि वह 3-3 रुपए या पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर भी लोगों से मारपीट करने लगा था। इस वजह से उस पर कई छोटे मुकदमे भी दर्ज हुए। उसके खिलाफ पहली FIR 1994 में हुई थी। हनुमान बेनीवाल ने संसद में उठाई थी एनकाउंटर की मांग सांसद हनुमान बेनीवाल ने जून 2019 में जगन गुर्जर के एनकाउंटर की मांग उठाई थी। बेनीवाल ने संसद में कहा था- सभापति महोदय, राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश में यदि चंबल का बीहड़ किसी चीज के लिए प्रसिद्ध है, तो वह वहां के डाकुओं के लिए है। हम जब स्कूल और कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे, तब इन पर फिल्में भी बनती थीं। कुख्यात डाकू जगन गुर्जर ने अब तक 3 बार सरेंडर किया है। उस पर हत्या, लूट और डकैती के 150 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन वह करीब 70 मामलों में बरी हो चुका है, क्योंकि उसके खौफ के कारण कोई भी कोर्ट में गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। उसने हाल ही में धौलपुर के बाड़ी में व्यापारियों को सरेआम पीटा और महिलाओं को निर्वस्त्र कर वहां घुमाया। राजस्थान सरकार की कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। पुलिस नाकाम साबित हो रही है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि केंद्र सरकार इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे। मेरी आपके माध्यम से सरकार से मांग है कि जगन गुर्जर जैसे खूंखार डाकू का एनकाउंटर किया जाए। एनकाउंटर के डर से सरेंडर किया जगन गुर्जर धौलपुर के भवुतीपुरा गांव का रहने वाला था। वह 1994 में डाकू बना। बाद में दस्यु सुंदरी कौमेश उसकी गैंग में शामिल होने पहुंच गई थी। उसके ऊपर 125 से ज्यादा केस दर्ज हुए, लेकिन उसके भीतर एनकाउंटर का डर इतना ज्यादा था कि वह बार-बार पुलिस के सामने सरेंडर करता रहा। 20 साल की उम्र में पहला केस जब जगन पर पहला केस दर्ज हुआ, तब उसकी उम्र महज 20 साल थी। उसके पिता शिवचरण गुर्जर स्थानीय लोक देवता बाबू महाराज के मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। उनका दूध का धंधा भी चल रहा था। इसी बीच, उसके पिता का मंदिर कमेटी के सदस्यों के साथ प्रसाद बांटने को लेकर विवाद हो गया और इसकी खबर जगन तक पहुंच गई। जगन ने कमेटी के सदस्यों की पिटाई कर दी और फिर पुलिस के डर से बीहड़ में छिप गया। अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद जगन सबसे पहले डकैत मोहन गुर्जर की गैंग में शामिल हुआ। 1995 में उसे पता चला कि मोहन गुर्जर के रिश्तेदारों ने उसके जीजा को मार डाला है। जगन ने इसका बदला जीजा के हत्यारों और अपने गुरु मोहन गुर्जर को मारकर लिया। सरेंडर पर सरेंडर एनकाउंटर के खौफ के चलते उसने पहला सरेंडर 2001 में तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने किया था। जेल से जमानत पर छूटने के बाद उसने फिर से अपराध करना शुरू कर दिया। इसके बाद, 30 जनवरी 2009 को कैमरी गांव के जगन्नाथ मेले में उसने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने भी सरेंडर किया, लेकिन उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। तीसरी बार उसने 19 अगस्त 2018 को बयाना में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने आत्मसमर्पण किया। पुलिस के दबाव में सरेंडर करने के बाद, पूछताछ में जगन गुर्जर ने बताया कि घर से दूर जंगलों में रहने की वजह से उसे खाने-पीने में काफी परेशानी हो रही थी। बीहड़ों में जमीन पर सोना और गंदा पानी पीना उसे रास नहीं आ रहा था, जिससे तंग आकर उसने आत्मसमर्पण कर दिया था। 3 रुपए के लिए मारपीट, बेटी की शादी में कसम खाई, पर सुधरा नहीं जगन ने साल 2009 में सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उसने अपनी पत्नी को उपचुनाव लड़ाया, लेकिन वह हार गईं। इस हार के बाद उसने फिर से हथियार उठा लिए। तीसरे सरेंडर के बाद भी जगन ने अपना अड़ियल स्वभाव नहीं बदला। साल 2019 में जगन ने 2 अजीबोगरीब झगड़े किए। पहला महज 3 रुपए के खुले पैसों को लेकर और दूसरा गाड़ी का पंचर ठीक से न बनाने को लेकर। हुआ यूं कि जगन अपनी बेटी के इलाज के लिए बाड़ी अस्पताल पहुंचा था। वहां पास ही उसने पानी के पाउच खरीदे। 1-1 रुपए के 3 पाउच खरीदने पर जब दुकानदार ने उससे खुले पैसे मांगे, तो जगन भड़क गया। जगन ने इसके बाद दुकानदार और उसके बचाव में आए अन्य व्यापारियों के साथ मारपीट की। उसने सरेबाजार बंदूक लहराई और तोड़फोड़ भी की। कुछ दिनों बाद जब उसकी कार पंचर हो गई। पंचर बनाने वाले से पंचर सही न बनाने और हवा ठीक से न भरने को लेकर उसकी बहस हो गई। उसने पंचर वाले के साथ भी मारपीट की और यह मामला भी पुलिस तक पहुंच गया। बेटी की शादी में कसम खाई तीन बार सरेंडर करने के बाद, साल 2018 में उसने बेटी की शादी में एक बार फिर जुर्म का रास्ता छोड़ने की कसम खाई थी। लेकिन उसने अपना गलत रास्ता नहीं छोड़ा। जेल से जमानत पर छूटने के बाद उसने धौलपुर जिले के एक गांव में दो महिलाओं के साथ मारपीट की और उन्हें निर्वस्त्र कर पूरे मोहल्ले में घुमाया। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए वह फिर से बीहड़ में जाकर छिप गया। इस घटना के बाद जगन का परिवार भी अपने घर पर ताला लगाकर फरार हो गया। धौलपुर महल उड़ाने की धमकी देने वाले डकैत को नरेगा में भी नहीं मिला काम जगन गुर्जर की हरकतों में कोई सुधार न होने के कारण समाज ने भी उससे दूरी बना ली थी। उसके हिंसक व्यवहार के कारण हर कोई उससे दूर रहना चाहता था। उसने एक बार मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया था कि हालात इतने खराब हैं कि उसे मनरेगा (वीबी–जी राम जी) में भी कोई काम नहीं दे रहा है। गांवों में शादियां होनी बंद हो गई थीं साल 2005 तक इलाके में उसका ऐसा खौफ था कि डकैती के डर से कई गांवों में शादियां तक होनी बंद हो गई थीं। खुद जगन के अपने गांव में 10 साल तक कोई शादी नहीं हुई। उसके डर से न सिर्फ गांववाले, बल्कि उसके पिता भी गांव छोड़कर चले गए थे। साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर वह देशभर में चर्चा में आया था। तब पुलिस ने उस पर 12 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। लगातार होने वाले झगड़ों के कारण कई लोगों से उसकी दुश्मनी हो गई थी। अपनी जान को खतरा बताते हुए उसने करीब 5 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन डीजीपी (DGP) को पत्र लिखकर अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उसने कहा था कि जेल से छूटने के बाद उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और वह और उसका परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। गहलोत और डीजीपी को चिट्ठी लिखने के कुछ समय बाद, 22 जनवरी 2022 को उसने तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा में वीडियो जारी किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद वह फिर फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए जंगल में दबिश दी और उसे धर दबोचा। जगन ने इसे सरेंडर कहा, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाई। अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हुई हत्या 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। — ये खबरें भी पढ़िए… बहन पर टिप्पणियां करता था जगन, इसलिए मार डाला:मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला हत्यारा विष्णु; मर्डर से पहले साथ बैठकर खाना खाया प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सोमवार को उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब जेल के अंदर बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसी की सेल में गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पढ़ें पूरी खबर… अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या:कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी ने तौलिए से गला घोंटा, साथ में लूडो खेला था अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को डकैत जगन गुर्जर की हत्या हो गई। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। पढ़ें पूरी खबर…

36 साल बाद यासीन मलिक की चार्जशीट पेश:आरोप- कश्मीरी पंडित नर्स को किडनैप कर 4 दिन टॉर्चर किया, फिर मार डाला

कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के किड्नैप और हत्या के 36 साल पुराने केस में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने सोमवार को चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। 737 पन्नों की चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन चीफ कमांडर यासीन मलिक समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके साथियों ने सरला भट्ट की किडनैपिंग और उनकी हत्या की साजिश रची थी। यासीन फिलहाल आतंकी फंडिंग के मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वहीं, मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको अब भी फरार है। उसके PoK में छिपे होने की आशंका है। सरला को गोली मारने वाला वही था। तीन और आरोपी अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। मुखबिरी के शक में हत्या की थी सरला भट्ट अनंतनाग की रहने वाली थीं। वह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS), सौरा में स्टाफ नर्स थीं। 34 साल बाद SIA को जांच सौंपी गई थी मार्च 2024 में यह केस जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को सौंपा गया। इसके बाद एजेंसी ने करीब दो साल तक मामले की जांच की। जांच के दौरान कई जगह छापेमारी की गई। पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मेडिकल, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर 737 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। चार्जशीट में पांचों आरोपियों पर हत्या, अपहरण, साजिश और सबूत मिटाने समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1987 (TADA) और भारतीय शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की धाराएं भी लगाई गई हैं। यासीन JKLF का कमांडर था, अब उम्रकैद की सजा काट रहा —————– कश्मीर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तानी नागरिक अरेस्ट: LoC से घुसपैठ कर अंदर आ गया था, जून में ऐसी तीसरी घटना जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना ने रविवार को पाकिस्तान के एक घुसपैठिए को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, इस महीने जिले में पकड़ा गया यह तीसरा पाकिस्तानी घुसपैठिया है। पूरी खबर पढ़ें…

36 साल बाद यासीन मलिक पर चार्जशीट पेश:आरोप- कश्मीरी पंडित नर्स को किडनैप कर 4 दिन टॉर्चर किया, फिर मार डाला

कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के किड्नैप और हत्या के 36 साल पुराने केस में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने सोमवार को चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। 737 पन्नों की चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन चीफ कमांडर यासीन मलिक समेत 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके साथियों ने सरला भट की किड्नैपिंग और उनकी हत्या की साजिश रची थी। यासीन फिलहाल आतंकी फंडिंग के मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वहीं, मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको अब भी फरार है। उसके PoK में छिपे होने की आशंका है। सरला को गोली मारने वाला वही था। तीन और आरोपी अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है। मुखबिरी के शक में हत्या की थी सरला भट अनंतनाग की रहने वाली थीं। वह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS), सौरा में स्टाफ नर्स थीं। 34 साल बाद SIA को जांच सौंपी गई थी मार्च 2024 में यह केस जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को सौंपा गया। इसके बाद एजेंसी ने करीब दो साल तक मामले की जांच की। जांच के दौरान कई जगह छापेमारी की गई। पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मेडिकल, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर 737 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। चार्जशीट में पांचों आरोपियों पर हत्या, अपहरण, साजिश और सबूत मिटाने समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इनके खिलाफ टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1987 (TADA) और भारतीय शस्त्र अधिनियम (Arms Act) की धाराएं भी लगाई गई हैं। JKLF का कमांडर, उम्रकैद की सजा काट रहा