हे भगवान! इन्हें सद्‌बुद्धि दो:किडनी मरीजों का दर्द- हमारी जिंदगी की फाइल एक माह से कमरे में कैद,1-1 दिन कीमती, ट्रांसप्लांट अटका …SMS प्रबंधन ताला क्यों नहीं तोड़ता?

एसएमएस हॉस्पिटल में किडनी के 11 मरीजों की जिंदगी एक कमरे में कैद है। एक माह से इस पर ताला है, जिससे किडनी ट्रांसप्लांट अटका हुआ है। ये वे मरीज हैं, जो 6 माह से हर दूसरे दिन डायलिसिस करवा रहे हैं, इसलिए घर छोड़कर जयपुर में धर्मशालाओं में रह रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सभी को कमेटी से किडनी ट्रांसप्लांट की अप्रूवल मिल चुकी है। पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में नेफ्रोलॉजी यूनिट-2 के हेड के रिटायर होने के बाद से ट्रांसप्लांट अटक गए हैं। जानकारी के अनुसार फाइल मरीज के पास ही रहती है, लेकिन ट्रांसप्लांट से पहले डॉक्टर अपने पास रख लेते हैं। 1 जून से ये फाइलें ताले में हैं।
31 मई को रिटायर्ड; नेम प्लेट लगी है, कमरा लॉक नेफ्रोलॉजी में यूनिट-2 के हैड डॉ. धनंजय अग्रवाल 31 मई 2026 को रिटायर्ड हुए, लेकिन सुपर स्पेशियलिटी में 5वीं मंजिल पर 518 नंबर कमरे पर उनकी नेम प्लेट लगी है और बाहर ताला है। सरकार ने 19 जून को पे-माइनस पेंशन के आधार पर मेडिकल कॉलेज अजमेर में उनकी पुनर्नियुक्ति की है। आरोप है कि फाइलें भी अंदर बंद हैं। कराह सुनो सरकार; किसी की हर दूसरे दिन डायलिसिस, 13 किलो वजन घट गया 40 डायलिसिस हुए, सूजन बढ़ रही है, अब भूख भी नहीं लगती बांसवाड़ा की 48 वर्षीय महिला का हर दूसरे दिन डायलिसिस हो रहा है। 40 हो चुके हैं। परिवार 10 मार्च से धर्मशाला में रह रहा है। पति किडनी देंगे। उनका कहना है कि एनओसी मिल गई, पुलिस वेरिफिकेशन हो चुका है। घर-दुकान सब छोड़कर यहां रह रहे हैं। दर्द; पेशाब कम आता है, भूख नहीं लगती। डायलिसिस ना कराएं तो सूजन आ जाती है। हर महीने ढाई किलो वजन घट रहा, सिरदर्द लगातार बढ़ रहा कोटपूतली के 35 साल के युवक को 8 दिसंबर 2025 को एसएमएस लाया गया। डायलिसिस के चलते यहीं धर्मशाला में रह रहे हैं। किडनी पिता देंगे। सभी प्रक्रिया हो चुकी थी। उनका कहना है कि एचओडी से भी मिल चुके हैं, लेकिन ट्रांसप्लांट पर कोई जवाब नहीं दे रहा। दर्द; बीपी हाई होने पर सिरदर्द-उल्टी होती है। 5 माह में 58 से 45 किलो वजन हो गया। एक्सपर्ट की मानें तो जितने ज्यादा डायलिसिस, किडनी रिजेक्शनके चांस उतने ज्यादा …और जिम्मेदार जवाब के लिए टहला रहे नेफ्रोलॉजी एक्सपर्ट की मानें तो किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस एक पेनफुल प्रॉसीजर हैं। जितना मरीज की डायलिसिस होती है, उतने ही किडनी के लिए रिजेक्शन के चांस बढ़ सकते हैं। हैपेटाइटिस बी और सी फैलता है। डायलिसिस के बाद कमजोरी आने के साथ ही प्रोटीन लॉस होता है। वहीं इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। सुपर स्पेशियलिटी में कमरे पर नेम प्लेट लगी है तो विभागी मामला है। नेफ्रोलॉजी एचओडी डिसाइड करेंगे। -डॉ. नचिकेत व्यास, अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी मरीजों को रेगुलर देख रहे हैं। डायलिसिस भी की जा रही है। इनकी फाइलों के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। -डॉ. संजीव शर्मा, यूनिट-2 हैड, नेफ्रोलॉजी, एसएमएस सीधी बात; डॉ. धनंजय अग्रवाल Q. क्या आपने अजमेर जॉइन कर लिया है?
-अभी सोच रहा हूं। Q. मरीजों का कहना है कि SMS में आपके रूम में उनकी फाइलें लॉक है?
-सरकार से बात करें, मेरे लॉक में फाइलें नहीं हैं। (फोन काट दिया।)
एसएमएस प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के मोबाइल पर असिस्टेंट ने कहा- सर बाहर हैं। दूसरी बार बोले- कल शाम तक बात होगी।

70 करोड़ का फर्जीवाड़ा:खाद की जगह मिट्टी बेच दी; SIT ने आरोपी माना, CID-CB से क्लीन चिट

कृषि विभाग ने 5 साल में सरकारी टेंडरों के जरिए 70 करोड़ की घटिया खाद खपा डाली। 29 सैंपल फेल हुए तो मामले का खुलासा हुआ। साल 2021 में करधनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच तीन एडिशनल एसपी और एसआईटी ने की। तीनों ने आरोप को सही माना। इसके बाद चौथी बार जांच सीआईडी-सीबी को दी गई। सीआईडी-सीबी ने मामले को सिविल नेचर का बताते हुए 3 जून को क्लीन चिट दे दी। वर्ष 2011 से 2016 के बीच इस फर्म ने कृषि विभाग के टेंडरों में 70 करोड़ की खाद सप्लाई की थी। वर्ष 2013 से 2016 के बीच जब कृषि विभाग ने इस खाद की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच करवाई, तो 29 नमूने अमानक (फेल) पाए गए। विभाग ने जालसाजी पकड़े जाने पर निर्माता कंपनी, वितरक, विक्रेता और कागजी क्वालिटी कंट्रोलर आनंदी लाल के खिलाफ 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 मुकदमे दर्ज करवा दिए। एफआर में साफ लिखा कि किस आधार पर रिपोर्ट दी
सीआईडी-सीबी के एडिशनल एसपी नानगराम का कहना है कि एफआर देना आईओ की राय है। इसे अफसरों ने सही माना है। कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है। एफआर में साफ है कि किस आधार पर यह रिपोर्ट दी गई है। भास्कर इनसाइट – नौकरी मांगने आए युवक के दस्तावेज पर फर्जी शपथ पत्र झोटवाड़ा निवासी आनंदी ने 2011 में विद्याधर नगर स्थित रॉयल केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था। कंपनी के हरवेंद्र माथुर, कलीम अहमद और गिर्राज ने शैक्षणिक और निवास संबंधी दस्तावेज रख लिए। आनंदी को नौकरी तो नहीं दी गई, लेकिन उसके नाम से क्वालिटी कंट्रोलर का शपथ पत्र दे दिया। नमूने जांच में फेल होने पर 29 केस दर्ज हुए। तब मामला खुला। फैक्ट्री का कारोबार 20 से 22 करोड़ रुपए तक आरोपी कलीम अहमद ने 14 जून 2025 को पूछताछ में बताया था कि फैक्ट्री का कारोबार 20-22 करोड़ रहा। पूरा माल कोऑपरेटिव एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बेचा जाता था। फिलहाल, सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका लंबित है। इसके बावजूद सीआईडी-सीबी द्वारा मामले में एफआर लगाना सवालों में है। 9 अफसरों ने 5 साल में मामले की जांच की, तीन ने केस ही छोड़ दिया था जांच सीआईडी-सीबी कर चुकी है; कृषि विभाग का इस मामले से कोई संबंध नहीं है : संयुक्त निदेशक इस पूरे मामले की जांच पहले ही सीआईडी-सीबी कर चुकी है। विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दोनों पक्षों के बीच आपसी विवाद का मामला है, कृषि विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है। -विनोद कुमार गेरा, संयुक्त निदेशक (खाद-बीज सप्लाई), कृषि आयुक्तालय, जयपुर

स्वायत्त शासन विभाग:10 कमरों के होटल व 50 सीटर रेस्त्रां के लाइसेंस अब रिन्यू होंगे

स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की वार्षिक लाइसेंस फीस से जुड़ा आदेश एक माह में ही बदल दिया है। निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने 24 जून, बुधवार को संशोधित आदेश जारी किया है। इसके तहत अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ब्यूटी पार्लर के लिए नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। दरअसल, इससे पहले 24 मई को जारी आदेश में होटलों (10 कमरों तक, 25 कमरों तक और 26 से 50 कमरों तक) के लाइसेंस रिन्युअल की श्रेणियां तय की गई थीं। इसके साथ ही रेस्टोरेंट के लिए सीधे 100 सीटर की श्रेणी बना दी गई थी, जबकि इसमें 50 सीटर और 51 से 100 सीटर वाले छोटे रेस्टोरेंट की श्रेणी हटा दी गई थी। इस विसंगति के कारण छोटे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया था। अब नए संशोधित आदेश में कमरों की संख्या के आधार पर लाइसेंस जारी करने की राशि निर्धारित कर दी गई है। भास्कर ने उठाया था मुद्दा :भास्कर ने 26 मई के अंक में खबर प्रकाशित कर नई व्यवस्था से संभावित नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। बताया था कि पुराने आदेश की वजह से उदियापोल, सूरजपोल, रेलवे स्टेशन, गुलाब बाग और ओल्ड सिटी के 150 से 200 छोटे होटल सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे थे। होटल-रेस्टोरेंट की नई श्रेणियां

भव्य सम्मान समारोह आयोजित:29 को जयपुर में 154 भामाशाह और 95 प्रेरकों का होगा सम्मान

प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों के शैक्षिक व भौतिक विकास में योगदान देने वाले दानदाताओं और प्रेरकों के सम्मान में 29 जून को भव्य समारोह आयोजित होने जा रहा है। राजधानी जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले इस प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में 154 भामाशाहों और 97 प्रेरकों को सम्मानित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में दिए गए योगदान के आधार पर सम्मान की श्रेणियां तय की गई हैं। भामाशाह कैटेगरी (राज्य स्तर) पर 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की आर्थिक सहायता देने वाले दानदाताओं को भामाशाह यानी शिक्षा विभूषण और 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये से कम का सहयोग करने वालों को शिक्षा भूषण की उपाधि से नवाजा जाएगा। वहीं, 1 लाख से 30 लाख रुपये तक के दानदाताओं को जिला स्तर पर शिक्षा श्री सम्मान मिलेगा। प्रेरक कैटेगरी (राज्य स्तर) पर दानदाताओं को प्रेरित कर 50 लाख रुपये या इससे अधिक का कार्य करवाने वाले प्रेरकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि निदेशालय ने सूची जारी करने से मना कर दिया जबकि जयपुर में कई जगह सूची पहुंच चुकी है। भास्कर के पास भी सूची मौजूद है।

श्रम विभाग के नए आदेश:फंसा नाइट बाजार; 10 कर्मचारियों का पंजीकरण, तभी मिलेगी मंजूरी

श्रम विभाग के नए आदेश उदयपुर सहित प्रदेश में शुरू होने वाले नाइट बाजारों को लेकर पेंच फंसा दिया है। अब नाइट बाजार में पंजीकृत दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों को अनुमति तभी मिलेगी, जब वहां 10 कर्मचारियों का पंजीकरण हो। जबकि कई रेस्टोरेंट और दुकानों में केवल 4 से 5 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में उन्हें अनुमति कैसे मिलेगी? दूसरी ओर, श्रम विभाग ने छोटे व्यापारियों के लिए 20 अगस्त 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें 10 कर्मचारियों तक वाले दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों को पंजीयन से छूट देने का प्रावधान किया गया था। इस तरह दो आदेशों के बीच सरकार की यह योजना एक बार फिर उलझ गई है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1958 के तहत पंजीकृत दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कार्य समय संबंधी कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान की है। श्रम विभाग की ओर से 19 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू होगी। साथ ही, 15 अप्रैल 2024 की पूर्व अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन रोटेशन के आधार पर सवेतन अवकाश देना होगा। किसी भी कर्मचारी से रोज 10 घंटे तथा सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य नहीं लिया जा सकेगा। अतिरिक्त कार्य लेने की स्थिति में उसका अलग से रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। छोटे व्यापारियो के लिए होनी चाहिए अलग से व्यवस्था
नाइट बाजार के आदेश में एक गफलत है। पहले आदेश निकाला था कि जिन दुकानों, वाणिज्यिक संस्थानों में 10 कर्मचारी हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अब संस्थान खोलने के लिए 10 से ज्यादा कर्मचारी होने पर ही अनुमति मिलेगी। नए आदेश के तहत छोटे व्यापारियों को फायदा नहीं मिलेगा। इनका भी पंजीकरण होना चाहिए। अलग से कोई व्यवस्था हो। इसके लिए श्रम विभाग के अधिकारियों को इस मामले में ज्ञापन सौंप चुके हैं।

लाइनमैन से लेकर फील्ड स्टाफ तक का टोटा होगा दूर:एवीवीएनल : 539 पद भरेंगे, 3 के बजाय 1 घंटे में होगा फॉल्ट सुधार

भीषण गर्मी के बीच बार-बार ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से परेशान उदयपुर के उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) के उदयपुर वृत्त में लंबे समय से बने स्टाफ संकट को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डिस्कॉम में रिक्त तकनीकी पदों के आधे से अधिक पदों पर इसी वर्ष भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में शहर (नॉन-टीएसपी) और ग्रामीण (टीएसपी) क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1,652 स्वीकृत तकनीकी पदों में से 539 पद रिक्त हैं, जो कुल पदों का 32.62 प्रतिशत है। लाइनमैन और तकनीकी सहायकों की कमी के कारण ट्रांसफार्मर जलने या लाइनों में फॉल्ट आने पर मरम्मत में औसतन 1 से 3 घंटे तक लग जाते हैं। वहीं, जेईएन के 18 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। नई भर्ती के बाद फील्ड में स्टाफ की उपलब्धता बढ़ने से फॉल्ट सुधार का समय घटकर आधे से एक घंटे तक रह जाने की उम्मीद है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि अघोषित कटौती की समस्या में भी कमी आएगी। भर्ती में 4 से 6 माह लगेंगे, अगली गर्मियों में मिलेगी राहत हालांकि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पूरा होने में अभी समय लगेगा। विज्ञप्ति जारी होने, परीक्षा, परिणाम, काउंसलिंग और नियुक्ति की प्रक्रिया में कम से कम 4 से 6 माह का समय लगना तय है। उधर, जिले की बिजली आपूर्ति को मजबूती देने वाले घासा के निर्माणाधीन 440 केवी जीएसएस और शहर के लिए स्वीकृत 20 नए जीएसएस भी अगले वर्ष तक ही शुरू हो पाएंगे। ऐसे में मौजूदा गर्मी में उपभोक्ताओं को वर्तमान संसाधनों के सहारे ही काम चलाना होगा, लेकिन अगले वर्ष तक उदयपुर के ‘नो-कट जोन’ बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है। जरूरी क्यों… खाली पदों से पूरे सिस्टम पर बढ़ रहा है दबाव
शुरुआती योजना में फील्ड स्तर के तकनीकी सहायकों को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन अब सरकार तकनीकी संवर्ग के 50% से अधिक रिक्त पद भरने की तैयारी कर रही है। खाली पदों के कारण मौजूदा बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। नए लाइनमैन और सब-स्टेशन अटेंडेंट की नियुक्ति से स्पॉट बिलिंग, लाइनों के रखरखाव में तेजी आएगी। बता दें कि हाल ही में प्रदेश स्तर पर जेईएन, जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट के 2,005 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2024:नई नियुक्ति से भरेंगे सेकंड ग्रेड के 1711 पद, 26 जून तक भरने होंगे मंडल के विकल्प

वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2024 में चयनित 1711 अभ्यर्थियों को नए शिक्षा सत्र, जुलाई में नियुक्ति मिलने की संभावना है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने चयनित अभ्यर्थियों से मंडल आवंटन के लिए ऑनलाइन प्राथमिकता विकल्प मांगे हैं। अभ्यर्थियों को 26 जून रात 8 बजे तक अपनी पसंद के मंडलों के विकल्प ऑनलाइन भरने होंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय तक विकल्प प्रस्तुत नहीं करता है तो विभाग उसे किसी भी मंडल में आवंटित करने के लिए स्वतंत्र होगा। मंडल आवंटन के बाद संबंधित मंडलों द्वारा मेरिट के आधार पर काउंसलिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें रिक्त पदों के अनुसार स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। राज्य के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से वरिष्ठ अध्यापकों की कमी बनी हुई है। तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक लंबे समय से नहीं होने के कारण वर्तमान में सेकंड ग्रेड शिक्षकों के 48 हजार से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं। यदि किसी अभ्यर्थी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त नहीं होता है तो वह निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर के नाम प्रार्थना पत्र तथा स्वहस्ताक्षरित आधार कार्ड की प्रति ई-मेल के माध्यम से भेजकर मोबाइल नंबर में संशोधन करवा सकता है। 8 विषयों में चयनित 1711 अभ्यर्थी

सिस्टम शहर ले डूबेगा:प्री- मानसून में फेल, शहर डूबा, वाहन धंसे, गोपालपुरा बाईपास पर टैंकर पलटा-ट्रैक्टर धंसा, खातीपुरा में ड्रेनेज के लिए खोदे गड्ढे में कटाव

राजधानी में हर साल जून अंत तक मानसून दस्तक दे देता है। यह जेडीए, निगम, जिला प्रशासन सबको पता है। इसके बावजूद हर साल इसी दौरान शहरभर की सड़कें खुदी मिलती हैं। कहीं ड्रेनेज लाइन डाली जा रही होती है तो कहीं सीवर प्रोजेक्ट अधूरा होता है। गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है। नतीजा- पहली तेज बारिश में सड़कें धंस जाती हैं, कॉलोनियां डूब जाती हैं और कई हादसे सामने आते हैं। गुरुवार को प्री-मानसून की पहली तेज बारिश ने यही सच फिर सामने रख दिया। एक घंटे में 50 मिमी (करीब 2 इंच) पानी बरसा, जिसने मानसून की तैयारियों की पोल खोल दी। अधूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट, सीवर लाइन के कटाव और मिट्टी से भरे गड्ढे लोगों के लिए खतरा बन गए। कहीं पूरा ट्रैक्टर समा गया तो कहीं टैंकर धंस गया। पुराने पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। भास्कर सवाल… मानसून से पहले काम पूरे क्यों नहीं होते?
जून में बारिश सामान्य बात है। इसके बावजूद शहर में मानसून से ठीक पहले या उसी दौरान ड्रेनेज, सीवर और सड़क खुदाई के काम चलते रहते हैं। बारिश होते ही मिट्टी बैठती है, कटाव होता है और सड़कें धंस जाती हैं। {गोपालपुरा बाईपास पर यही हुआ। 10 दिन पहले सड़क पर गड्ढा हुआ तो मिट्टी डालकर काम पूरा मान लिया गया। गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश में मिट्टी बैठ गई और वहां से गुजर रहा सीवर टैंकर धंसकर पलट गया।
सवाल- गड्ढा पहले से चिह्नित था, फिर भी नहीं सुधारा, हमेशा हादसे का इंतजार क्यों रहता है? खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन का कटाव, 20 फीट चौड़ा गड्ढा बना
खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन के लिए बॉक्स डाले जा रहे थे। खातीपुरा के पास सड़क खोदी गई थी। तेज बारिश के बाद इसमें पानी भर गया और 20 फीट चौड़ा कटाव हो गया। सूचना पर जेडीए टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी से मिट्टी डालकर कटाव भरा। इस प्रोजेक्ट का अभी करीब 100 मीटर का काम बाकी है।
सवाल- मानसून से पहले प्रोजेक्ट पूरे क्यों नहीं किए जाते, डेडलाइन की मॉनिटरिंग क्यों नहीं होती? सीकर रोड पर 40 करोड़ का ड्रेनेज फेल
तेज बारिश से सीकर रोड पर जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। यहां हाल ही में 40 करोड़ रुपए खर्च कर नया ड्रेनेज सिस्टम डाला गया है।
सवाल- प्री-मानसून की तेज बारिश का पानी ही नहीं निकला, तो मानसून में क्या होगा? SMS में ट्रॉमा लीक, ECG रूम दूसरी जगह शिफ्ट… माइनर ओटी भी टपक रही एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी की माइनर ओटी व ईसीजी रूम में पानी भर गया। दोनों जगह छत टपक रही है। ईसीजी को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग ट्रॉमा की छत पर काम कर रहा है। एसएमएस ट्रॉमा के नोडल अधिकारी डॉ. राजेन्द्र मांडिया का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए ईसीजी रूम को एक्स-रे रूम के पास स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास शिफ्ट किया है।

हर चौथे दिन 20 से 25 हजार रुपए का ई-चालान:दूसरे की नंबर प्लेट लगाकर जयपुर में दौड़ता रहा डंपर, असली मालिक पर 10 लाख रुपए के चालान

हरियाणा के चरखी दादरी में बैठे डंपर मालिक सुशील कुमार के मोबाइल पर पिछले एक साल से हर हफ्ते 20 से 25 हजार रुपए के ई-चालान आ रहे थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि उनका डंपर कभी जयपुर आया ही नहीं। जांच में सामने आया कि शिवदासपुरा क्षेत्र में बजरी परिवहन में लगा एक डंपर उनके वाहन की नंबर प्लेट लगाकर दौड़ रहा था। इस बीच चालान बढ़ते-बढ़ते 10 लाख रुपए से अधिक हो गए। परिवहन विभाग ने असली डंपर की आरसी सस्पेंड कर दी, जिससे उसकी फिटनेस भी अटक गई। सुशील कुमार ने पहला चालान आने पर ही शिवदासपुरा थाने में शिकायत दी थी, लेकिन फर्जी नंबर प्लेट वाला डंपर पकड़ में नहीं आया। चालान लगातार बढ़ने पर उन्होंने दोबारा मामला दर्ज कराया। पुलिस जांच में सामने आया है कि एचआर-84-3083 नंबर प्लेट लगा डंपर टोल प्लाजा से भी गुजरता रहा है। अब पुलिस फास्टैग के जरिए उसके असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच अधिकारी एएसआई दयाराम गुर्जर ने बताया कि संबंधित टोल प्लाजा को अलर्ट कर निगरानी बढ़ा दी गई है।

नशे की तस्करी भी ऑनलाइन:महज 26 हजार रुपए में यूएस से आपके घर तक तीन दिन में कुकीज-गमी के रूप में पहुंचेंगी जानलेवा ड्रग्स

अब कारोबार, पढ़ाई, शॉपिंग ही नहीं नशे की तस्करी भी ऑनलाइन हो गई है। पैडलर्स के पकड़े जाने के डर से अब ड्रग्स का कारोबार भी डिजिटल होता जा रहा है। अब युवा सस्ता नशा करने के लिए ऑनलाइन नशीली दवाएं मंगवा रहे हैं। इंटरनेट की डार्क और एन्क्रिप्टेड दुनिया में अब सीधे मोबाइल ही पैडलर्स बन गए हैं। ड्रग्स तस्कर अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए युवाओं तक ड्रग्स पहुंचा रहे हैं। टेलीग्राम पर एक ऐसा ही बड़ा इंटरनेशनल ड्रग नेटवर्क चल रहा है। एक चैनल/ग्रुप के जरिए प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाइयों से लेकर विदेशों से तस्करी कर लाए गए घातक सिंथेटिक ड्रग्स की खुली मंडी चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बना ड्रग चैनल्स से संपर्क किया तो माफिया ने दे दिया ड्रग्स का मेन्यू कार्ड भास्कर रिपोर्टर ने अपना नाम और नंबर छिपाकर बात की, ड्रग्स माफिया ने मेनू कार्ड की तरह ड्रग्स की लिस्ट शेयर कर दी। तस्कर ने दावा किया कि वह महज 26 हजार रुपए में भारत की किसी भी जगह पर तीन दिन में ड्रग्स पहुंचा देगा। कुकीज और गमी के पैकेटों में छिपाकर प्रतिबंधित पेनकिलर्स, मैजिक मशरूम और वेप्स भेजे जा रहे हैं। उन्होंने ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम और कोडीन के फोटो भी भेजे। तस्कर ने बिटकॉइन एप पर भुगतान करने को कहा। थोक में ड्रग्स लो तो डिस्काउंट, रीसेल ऑफर भी दे रहे तस्कर
इस नेटवर्क को अलग-अलग देशों से तीन लोग संचालित करते हैं। वह पहचान छिपाकर इस नेटवर्क को चला रहे हैं। वे अपने टेलीग्राम वाले ग्रुप में ग्राहकों को बाकायदा पूरे स्टॉक का ‘मेन्यू कार्ड’ भेज रहे हैं। थोक में माल खरीदने पर डिस्काउंट और रीसेल का ऑफर भी दिया जा रहा है। तस्करी के लिए प्रायोरिटी कूरियर बॉक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। टेलीग्राम से ऑर्डर होता है और विदेश से कुरिअर होता है। तस्कर इसके लिए ‘अज्ञात पार्सल’ या ‘डॉक्यूमेंट्स’ लिखकर डिलीवरी करवा रहे हैं।