13 बार मानसून लेट, 7 बार ज्यादा बारिश:3 बार वक्त से पहले आया तो 25% तक कम बरसा, राजस्थान का 30 साल का एनालिसिस

राजस्थान में मानसून की धीमी रफ्तार और देरी चर्चा में है। पिछली बार मानसून 7 दिन जल्दी पहुंच गया था। बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस बार इतनी ही दिन देरी से यहां पहुंचने की आशंका है। आशंका यह भी है कि देरी से आया मानसून उतना नहीं बरसेगा, जितना समय पर या समय से पहले आने पर बरसता है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के अगले सप्ताह राजस्थान पहुंचने की उम्मीद है। 10 फीसदी तक कम बारिश की भी आशंका जताई है। इस बीच भास्कर ने 1996 से लेकर 2025 तक यानी 30 साल के डेटा का एनालिसिस किया। इसमें सामने आया कि 30 साल में केवल 2 बार तय समय पर मानसूनी बादल राजस्थान से टकराए हैं। 15 बार मानसून समय से पहले और 13 बार देरी से आया है। इतना ही नहीं, 7 बार देरी से आया मानसून भी जमकर बरसा। 3 बार समय से पहले मानसून आया। इस दौरान जरूर 25% तक कम बारिश हुई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 3 बार सबसे ज्यादा लेट, एक बार तोड़ डाला रिकॉर्ड मौसम विभाग में पिछले 30 साल के दौरान मानसून आने के अनुमानों की तारीख हमेशा बदलती रही है। अमूमन यह 20 से 25 जून के बीच की रही है। वहीं सामान्य बारिश अलग-अलग वर्षों में 415 से 435.6 मिलीमीटर (MM) तक मानी जाती रही है। इस एनालिसिस में मानसून आने की सामान्य तारीख को 25 जून मानकर जल्दी या देरी के दिन तय किए गए हैं। साल 2012 में मानसून सबसे ज्यादा 8 दिन लेट आया, लेकिन अगस्त में हुई बारिश ने सबकी चिंता दूर कर दी। 2012 में सामान्य से 11 फीसदी अधिक बारिश हुई। साल 2019 में 7 दिन देरी से मानसून राजस्थान पहुंचा, लेकिन बरसात में कोई कमी नहीं रही। 2019 में तीन दशकों में पहली बार बारिश का आंकड़ा 550 MM से पार पहुंच गया। खास बात यह रही कि मानसून ने पहले ही दिन राजस्थान के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर लिया। साल 2014 में मानसून में 7 दिन की देरी दर्ज की गई। तब बरसात लगभग सामान्य जैसी ही रही। आंकड़े बताते हैं कि देरी से (जुलाई में) दस्तक देने वाले मानसून ने पिछले 30 सालों में अब तक कभी बारिश के आंकड़े माइनस में नहीं पहुंचाए। 10 बार 5 दिन तक की देरी से एंट्री मानसून 10 बार 5 दिन तक की देरी से राजस्थान में दाखिल हुआ। इन 10 अलग-अलग सालों में 5 बार सामान्य से अधिक और इतनी ही बार सामान्य से कम बरसात हुई। इनमें साल 2006 सबसे चौंकाने वाला रहा। मानसून 2 दिन की देरी से पहुंचा। अगस्त 2006 के आखिरी हफ्ते में बाड़मेर में पूरे साल के औसत से 5 गुना अधिक बारिश हो गई, बाढ़ आ गई। वहीं, 2002 और 2009 में मानसून 4-4 दिन देरी से था और दोनों बार सूखा पड़ा। 2022 में मानसून 5 दिन की देरी से था, लेकिन 596 MM बरसात ने राजस्थान को तर कर दिया। इस दौरान पूर्वी राजस्थान में करीब 781 MM बारिश दर्ज हुई। साल 2010 में मानसून एक दिन देरी से था, लेकिन बारिश करीब 540 एमएम दर्ज की गई। आमतौर पर पूर्वी राजस्थान में अधिक बरसात होती है, लेकिन उस दौरान पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान में लगभग 27 फीसदी बरसात अधिक हुई। 2 बार तय समय पर आया और दोनों बार कर गया तर 30 साल में 2 बार ही मानसून तय समय पर राजस्थान पहुंचा। खास बात यह रही कि दोनों ही बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। 2024 में करीब 679 MM बरसात हुई थी। 2023 में भी सामान्य से 15% ज्यादा बारिश हुई। 4 बार सबसे जल्दी, तोड़ा 108 साल का रिकॉर्ड राजस्थान में 30 साल में 4 बार सबसे जल्दी मानसून पहुंचा। बरसात चारों बार औसत से अधिक रही। 2001 में मानसून 12 दिन पहले राजस्थान पहुंच गया। हालांकि सबसे जल्दी मानसून आने के बावजूद कोई रिकॉर्ड नहीं टूटा। बरसात 11 फीसदी अधिक दर्ज हुई। रिकॉर्ड पिछले साल यानी 2025 के मानसून ने तोड़े थे। मानसून 7 दिन पहले राजस्थान पहुंचा और 64 फीसदी अधिक बरसा। 108 साल का रिकॉर्ड टूट गया। 2021 में भी मानसून 7 दिन पहले पहुंचा था और बरसात 17 फीसदी अधिक रही। जल्दी आने पर भी 2 बार सूखे जैसे हालात मानसून के 1 से 4 दिन पहले आने की बात करें तो पिछले 30 सालों में 11 बार ऐसा हुआ। 1999 में मानसून एक दिन पहले आया, लेकिन 25 फीसदी कम बरसा। 2004 में 3 दिन पहले आया और 22 फीसदी कम बरसात हुई। इन दोनों ही सालों में राजस्थान को सूखे के हालातों का सामना करना पड़ा। इधर, 2011 में भी एक दिन पहले मानसून आया और 11 फीसदी कम बरसा, लेकिन तब हालात सामान्य रहे। 1996, 2011 और 2016 में मानसून 2 से 3 दिन पहले आया। इन सालों में बरसात का आंकड़ा 500 MM से ज्यादा रहा। सबसे ज्यादा 2011 में 41 फीसदी अधिक 590 MM से भी ज्यादा बरसात हुई। —— यह खबर भी पढ़िए… राजस्थान के 27 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जयपुर में 30 मिनट की बरसात में सड़कें लबालब, कोटा-जोधपुर में भी बदला मौसम राजस्थान में गुरुवार (25 जून) को प्री-मानसून की बारिश का दौर जारी रहा। जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर संभाग के कुछ एरिया में दोपहर बाद आंधी चली, फिर बारिश हुई। जयपुर में गुरुवार को 2 इंच बरसात से सड़कें लबालब हो गईं। नागौर, भीलवाड़ा, जोधपुर, कोटा के भी कुछ इलाकों में 20 से 35MM तक बरसात हुई। पढ़ें पूरी खबर…

जसदेर तालाब के आगोर की जमीन पर अतिक्रमण का मामला:20 में से सिर्फ 8 बीघा जमीन से हटाए कब्जे,दूसरे दिन कार्रवाई नहीं

शहर के बाड़मेर ग्रामीण ग्राम पंचायत क्षेत्र के जसदेर तालाब के आगोर में प्रशासनिक लापरवाही के कारण सरकारी जमीन पर दुबारा अतिक्रमण शुरू हो गया है। खसरा संख्या 2546/1211 की 20 बीघा आगोर भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने पहुंचा दस्ता महज 8 बीघा जमीन खाली कराकर लौट गया। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमी महिला ने हाथों में पेट्रोल की बोतलें लेकर टीम का कड़ा विरोध किया। मौके पर काफी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद इस उग्र विरोध के आगे अतिक्रमण दस्ता बेअसर साबित हुआ। टीम ने विरोध बढ़ता देख कार्रवाई को बीच में ही रोक दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को आश्वासन दिया था कि वे गुरुवार को दुबारा आकर बची हुई जमीन से अतिक्रमण हटाएंगे। लेकिन गुरुवार देर शाम तक न तो कोई अधिकारी पहुंचा और न ही अतिक्रमण दस्ता। 72 भूमिहीन परिवार कतार में, जमीन आवंटित नहीं की अतिक्रमियों ने मौके पर दुबारा कब्जा करना शुरू कर दिया है। एक तरफ दबंगों द्वारा आगोर की जमीन पर कब्जे किए जा रहे हैं, बाड़मेर ग्रामीण ग्राम पंचायत के 72 भूमिहीन परिवार पुनर्वास के इंतजार में हैं। सरपंच ने परिवारों को बसाने के लिए प्रशासन से 10 बीघा जमीन आवंटित करने की मांग की थी। इन 72 परिवारों की फाइलें तैयार है, लेकिन लंबे समय से दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा:1048 का 15 रुट के लिए चयन, यात्रा कार्यक्रम सितंबर से

गुरुवार को कलेक्ट्रेट में देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना की ऑनलाइन लॉटरी निकाली गई। इस मौके पर 1048 यात्रियों का चयन रेल से यात्रा के लिए हुआ। इसके अलावा 128 का सिलेक्शन हवाई यात्रा के लिए किया गया। इसके अलावा 1176 की प्रतीक्षा सूची भी जारी की गई है। योजना में जिले से 2446 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 15 रेल और एक हवाई मार्ग यात्रा शामिल है। सबसे अधिक वरीयता लोगों ने रामेश्वरम और तिरुपति बालाजी रूट को दी है। सहायक आयुक्त देवस्थान मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि चयनित सभी वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा की सूचना व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी। साथ ही यात्रा से संबंधित पूरी जानकारी देवस्थान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी। जिला परिषद की सीईओ मृदुल सिंह, एसी देवस्थान मुकेश कुमार मीणा सहित पर्यटन विभाग आदि के अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत 56 हजार वरिष्ठ नागरिकों को निशुल्क तीर्थ यात्रा करवाई जाएगी। इस योजना में 50 हजार को रेल मार्ग से तथा 6 हजार वरिष्ठ नागरिकों को हवाई मार्ग से विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाई जाएगी। सबसे अधिक चाह रामेश्वर और तिरुपति की वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना में पहली यात्रा सितंबर माह में जाने की संभावना है। चूंकि यात्रियों ने प्रथम वरीयता रामेश्वरम को दी है। इसलिए रामेश्वरम-मदुरै रूट पर ट्रेन भेजी जाएगी। अधिकांश यात्रियों को दीपावली से पहले यात्रा कराने का प्लान है।

विकसित पंचायत की कहानी:कभी अरंडी की झाड़ियां थीं पहचान, अब बगीचों से महकता है गांव नगला अंडडुआ, यहां के अमरूद-बेर की कई राज्यों में होते हैं निर्यात

बयाना पंचायत समिति की सीदपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला नगला अंडडुआ गांव कभी अरंडी के पेड़ों की बहुतायत के कारण अपनी पहचान रखता था। इसका नाम भी इसी के कारण नगला अंडडुआ पड़ा। यह गांव गंभीर नदी के किनारे बसा हुआ है, ऐसे में रेतीली मिट्टी अरंडी के लिए उपयुक्त थी, लेकिन समय बदला, किसानों की सोच बदली और अब यही गांव बागवानी की बदौलत पूरे क्षेत्र में “बगीचों के गांव” के रूप में जाना जाता है। करीब 5 हजार आबादी और लगभग 70 प्रतिशत साक्षरता वाले इस गांव में आज करीब 800 बीघा भूमि पर बागवानी की जा रही है। गांव के खेतों में नींबू, बेर, अमरूद, करौंदा, चीकू, मौसमी और मिर्च की फसलें लहलहा रही हैं। यहां उत्पादित अमरूद और बेर की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दिल्ली, मथुरा और आगरा की मंडियों तक है। बागवानी को बढ़ावा देने में लुपिन संस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था ने गांव को बागवानी गांव घोषित कर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया। सरकारी संरक्षण की दरकार गांव के किसान बताते हैं कि बागवानी में किसानों के रुझान को देखते हुए इसे अब सरकारी मदद और संरक्षण की जरूरत है। सरकारी स्तर पर बागवानी के लिए किसानों को प्रोत्साहित और आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। इसके साथियों उन्हें बागवानी की नई तकनीक से भी अपडेट करना चाहिए। ग्राम पंचायत का लेखा जोखा गांव बना प्रेरणा सीदपुर ग्राम पंचायत के सरपंच उदयराम कहते हैं, “नगला अंडडुआ आज क्षेत्र के लिए प्रेरणा बना हुआ है। यहां के किसानों ने मेहनत और नवाचार से गांव की तस्वीर बदली है। पंचायत भी सिंचाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि बागवानी को बढ़ावा मिल सके।

राजस्थान के 27 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट:30 मिनट की बरसात में जयपुर की सड़कें आधा फीट डूबीं, कोटा-जोधपुर में भी बदला मौसम

राजस्थान में गुरुवार (25 जून) को प्री-मानसून की बारिश का दौर जारी रहा। जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर संभाग के कुछ एरिया में दोपहर बाद आंधी चली, फिर बारिश हुई। जयपुर में गुरुवार को 30 मिनट में 2 इंच बरसात हुई। इससे सड़कें लबालब हो गईं। नागौर, भीलवाड़ा, जोधपुर, कोटा के भी कुछ इलाकों में 20 से 35MM तक बरसात हुई। मौसम विभाग ने 26 जून (आज) को भी 27 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में अगले एक सप्ताह तक बारिश का दौर जारी रहने और आगामी 4-5 दिन में मानसून के प्रवेश करने की संभावना है। राजस्थान में मौसम की तस्वीर… ये शहर सबसे गर्म रहे फलोदी, श्रीगंगानगर में 41 डिग्री तापमान दर्ज बारिश से पहले गुरुवार को कुछ शहरों में गर्मी तेज रही। फलोदी, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। दिन का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस फलोदी में दर्ज हुआ। श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 41, जैसलमेर में 40.8, बाड़मेर में 40.5, बीकानेर में 39.3, चूरू में 39.8, जोधपुर में 39.2, पिलानी (झुंझुनूं) में 39.4, करौली में 39, दौसा में 38.8 और पाली में 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। कहां, कितनी बारिश हुई पिछले 24 घंटे के दौरान नागौर के सांजू में 25MM, डेगाना में 35, खींवसर में 13, सवाई माधोपुर के बामनवास में 10, बीकानेर के छतरगढ़ में 14, धौलपुर के बसेड़ी में 5, कोटा के चेचट में 17, कानावास में 4, राजसमंद के रेलमगरा में 5, भीलवाड़ा के सहाड़ा में 22, जोधपुर के भोपालगढ़ में 20MM बरसात दर्ज हुई। राजस्थान के बड़े शहरों में मौसम का हाल जयपुर : राजधानी में गुरुवार सुबह से दोपहर तक मौसम ड्राय रहा और तेज उमस रही। दोपहर करीब 3 बजे के बाद बादल छाए और तेज हवा चली। इसके साथ ही बारिश शुरू हो गई। जयपुर कलेक्ट्रेट, चारदीवारी (परकोटा) के आसपास करीब 50MM (2 इंच) पानी बरसा। इन एरिया में सड़कों पर आधा फीट तक पानी बहता नजर आया, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। शहर के अलावा सांगानेर एरिया में 33MM, जेएलएन मार्ग में 11.4, फागी में 15, जालसू में 12, कालवाड़ में 4 और आमेर एरिया में 2MM बारिश हुई। सीकर : गुरुवार को दिन में धूप निकलने से तापमान में बढ़ाेतरी हुई, लेकिन शाम होते-होते धूल भरी हवा चलने लगी। शाम को काले बादल छाए। 26 जून तक सीकर समेत शेखावाटी इलाके में आंधी-बारिश का अनुमान है। सीकर के फतेहपुर में कृषि अनुसंधान केंद्र पर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र पर गुरुवार दिन का अधिकतम तापमान 38.0 और न्यूनतम तापमान 23.9 डिग्री दर्ज किया गया। कोटा : कोटा में गुरुवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। बादल छाने लगे और हल्की बूंदाबांदी हुई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। दिन का अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उदयपुर : उदयपुर शहर में गुरुवार को मौसम सामान्य रहा, लेकिन दिनभर उमस ने लोगों को परेशान किया। धूप के बीच हवा में नमी बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक दिन पहले अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.0 डिग्री सेल्सियस था। इसके मुकाबले आज पारे में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान 0.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 0.5 डिग्री कम रहा। इसके बावजूद उमस के कारण गर्मी का असर बरकरार रहा। अलवर : अलवर में गुरुवार सुबह से बादल छाए रहे। दोपहर में कुछ समय के लिए धूप भी निकली। बादलों और धूप के बीच लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। दिन का अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले में बादल छाए रहने के बावजूद बारिश नहीं हुई। जोधपुर : जोधपुर शहर में गुरुवार सुबह से ही हल्के बादल छाए रहे। दोपहर बाद धूप निकली। दिनभर उसम और गर्मी ने लोगों को परेशान किया। मौसम विभाग ने बादल छाए रहने और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। तापमान 39.2 डिग्री दर्ज किया गया। अजमेर : अजमेर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 35.2 और न्यूनतम तापमान 25.5 रहा। शहर में सुबह से ही धूप खिली रही। उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया। ——– यह खबर भी पढ़िए… 13 बार मानसून लेट, 7 बार ज्यादा बारिश, 3 बार वक्त से पहले आया तो 25% तक कम बरसा, राजस्थान का 30 साल का एनालिसिस राजस्थान में मानसून की धीमी रफ्तार और देरी चर्चा में है। पिछली बार मानसून 7 दिन जल्दी पहुंच गया था। बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस बार इतनी ही दिन देरी से यहां पहुंचने की आशंका है। इस बीच भास्कर ने 1996 से लेकर 2025 तक यानी 30 साल के डेटा का एनालिसिस किया। पढ़ें पूरी खबर…

अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस विशेष:कभी शराब ने तबाह की जिंदगी, अब 1500 से ज्यादा युवाओं को नशे की गिरफ्त से निकाला

कभी शराब की लत ने उन्हें परिवार, समाज और खुद की नजरों में गिरा दिया था। जॉन्डिस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे नरपत सिंह चौहान के सामने जिंदगी और मौत का सवाल खड़ा था। लेकिन भतीजी के एक मासूम सवाल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज वही नरपत सिंह न केवल खुद नशे से मुक्त हैं, बल्कि अपने आरोग्य सेवा संस्थान उदयपुर के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाल चुके हैं। 26 जून अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन किसी भी व्यक्ति को अंधेरे से उजाले की ओर ले जा सकता है। बदलाव की तीन कहानियां, जो उम्मीद जगाती हैं नरपत सिंह बताते हैं कि नशे से बाहर निकलने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया। उनके संस्थान से जुड़ी कई कहानियां आज बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं और लोगों को नई दिशा दे रही हैं। भतीजी के एक सवाल ने बदल दी जिंदगी नरपत सिंह बताते हैं कि तीन माह की उम्र में पिता का साया उठ गया था। युवावस्था में तनाव दूर करने के लिए शुरू हुई शराब की आदत धीरे-धीरे गंभीर लत बन गई। जॉन्डिस और लिवर संबंधी बीमारियों के बीच नशामुक्ति केंद्र में उपचार के दौरान भतीजी के सवाल-“काकू, तुम शराब क्यों पीते हो?”-ने उन्हें झकझोर दिया। इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए नशा छोड़ने का संकल्प लिया।

हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र:हार्ट मरीजों को मिलेगा अलग उपचार केंद्र, मेडिकल आईसीयू पर घटेगा दबाव, गंभीर हृदय रोगियों की होगी विशेष निगरानी

आरबीएम अस्पताल में कार्डियक आईसीयू अलग से खोला जाएगा, जहां हार्ट मरीजों को अलग से उपचार केन्द्र मिलेगा। इससे मेडिकल आईसीयू पर दबाव घटेगा और गंभीर हृदय रोगियों की विशेष निगरानी में इलाज हो सकेगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पताल की सी ब्लाक की नई बिल्डिंग में हृदय रोगियों के लिए फस्ट फ्लोर पर हृदय रोग विभाग है। जहां रूम नंबर 117 में कार्डियोलॉजी ओपीडी है, उसके पास रूम नंबर 116 में 2डी ईको की और रूम नंबर 118 में टीएमटी की जांच तथा रूम 119 में ईसीजी की जांच की सुविधा है। इसके सामने होल्टर जांच शुरू की गई है। आईसीयू में मरीजों को मिलेंगी ये सुविधाएं गंभीर हृदय रोगियों की 24 घंटे विशेष निगरानी हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और अनियमित धड़कन वाले मरीजों का उपचार लगातार ईसीजी, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर की मॉनिटरिंग कार्डियोलॉजिस्ट व प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में इलाज आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधा कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय संबंधी उन्नत उपचार की बेहतर व्यवस्था कार्डियक आईसीयू से मरीजों को होंगे ये फायदे – हार्ट मरीजों को मेडिकल आईसीयू पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी।
– गंभीर हृदय रोगियों को अलग और विशेषज्ञ उपचार मिलेगा।
– मेडिकल आईसीयू पर मरीजों का दबाव कम होगा।
– इलाज के दौरान संक्रमण और जटिलताओं के जोखिम में कमी आएगी।
– मरीजों की निगरानी और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होगी।
– कैथ लैब शुरू होने पर एक ही स्थान पर समग्र हृदय उपचार उपलब्ध होगा। कार्डियक आईसीयू जल्दी ही शुरू किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से गंभीर हृदय रोगियों को विशेषज्ञ निगरानी और बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी। इससे मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध होगा और मेडिकल आईसीयू पर भी दबाव कम होगा। आगामी समय में कैथ लैब शुरू होने से हृदय रोग उपचार सेवाएं और मजबूत होंगी। – डॉ. विवेक भारद्वाज, प्रिंसिपल, एसजेपी मेडिकल कॉलेज, भरतपुर रूम नंबर 144 में का​र्डियक आईसीयू 7 बैड का शुरू करने जा रहे हैं, जिसे जल्दी ही शुरू किया जाएगा। इसके पास ही रूम 145 में 10 बैड का वार्ड होगा, जबकि 139 से 143 तक कैथ लैब का एरिया होगा और उसे मशीन आने के बाद शुरू किया जाएगा। -डॉ नगेंद्र भदौरिया, पीएमओ

चिकित्सा शिक्षा विभाग:एसओपी में ‘सफेद गाउन’, हकीकत, पीबीएम में जिस साड़ी में घर से आती हैं महिलाएं उसी में कर दिया जाता है ऑपरेशन

चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए जारी की गई एसओपी पर काम शुरू हो गया है। शुक्रवार तक सभी एचओडी को रिपोर्ट पेश करनी है। पीबीएम अस्पताल की 89 साल पुरानी बिल्डिंग में उसका कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी ऑपरेशन थिएटर की एसओपी में स्पष्ट लिखा है कि मरीज को ऑपरेशन थिएटर में भेजने से पहले सफेद गाउन पहनाना जरूरी है, लेकिन भास्कर पड़ताल में सामने आया कि पीबीएम अस्पताल में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। खासकर जनाना विंग की बात करें तो प्रसूताएं जिस हालत में आती हैं, उसी हालत में उन्हें ऑपरेशन थिएटर में लिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद उन्हीं वस्त्रों में बाहर भेजा जाता है, जो प्रसूता घर से पहनकर आई थी। आम तौर पर हरे रंग की एक चद्दर से प्रसूता को ढका जाता है, जिसे सफाईकर्मी वापस ले जाती है। वही चद्दर दूसरी प्रसूता के काम आती है। वार्ड में बेडशीट भी मैली मिलती है। उस पर खून के सूखे हुए दाग-धब्बे नजर आते हैं। ऐसा ही हाल लेबर रूम का है। वहां तो एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को लेटना पड़ता है। गौरतलब है कि पीबीएम जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी फेल हुई थी, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। कोटा, जोधपुर और नागौर में भी इस प्रकार की घटनाएं होने पर सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए एसओपी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में ओटी का प्रोटोकॉल गाइडलाइन के तहत संचालित होता है, जबकि अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती भीड़ के कारण इसकी अनदेखी कर दी जाती है। भास्कर इनसाइट- 90 हजार की ओपीडी, 27 हजार महिलाएं भर्ती हो रहीं पीबीएम अस्पताल की बिल्डिंग 89 साल पुरानी है। जाहिर है जनाना ओटी भी उतना ही पुराना है। इन सालों में मरीजों की संख्या बढ़कर साल में 90 हजार तक पहुंच गई है, लेकिन आधारभूत सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। जनाना में पांच ऑपरेशन थिएटर हैं। रोज औसत 50 महिलाओं के विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन होते हैं, जिनमें 20 मेजर और 30 माइनर सर्जरी होती है। इनमें 30 से 40 का आंकड़ा प्रसव का है। एक साल में करीब 27 हजार महिलाएं भर्ती होती हैं। दस हजार के नॉर्मल और लगभग सात हजार महिलाओं के सिजेरियन डिलीवरी होती हैं। वार्डों में वेंटिलेशन तक नहीं है। जनाना टॉयलेट की सफाई ही नहीं होती। वहां डिब्बा तक नहीं मिलता। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सा मंत्री और प्रमुख शासन सचिव के दौरे के बाद यह कमियां सामने आईं तो प्रशासन हरकत में आया है। नोडल प्रभारी से लेकर वार्ड इंचार्ज तक को नोटिस जारी प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के दौरे के दौरान पीबीएम अस्पताल में सामने आई खामियों को लेकर अधीक्षक की जमकर खिंचाई की थी। वापस जयपुर लौटते वक्त भी उन्होंने अस्पताल में व्यवस्थाओं को सुधारने की हिदायत दी। राठौड़ के दौरे का असर अब नजर आने लगा है। अधीक्षक ने ताबड़तोड़ नोटिस देने शुरू कर दिए हैं। एमएनडीवाई के नोडल अधिकारी डॉ. संजय लोहड़ा, वार्ड इंचार्ज और सुपरवाइजर से लेकर सफाई ठेकेदार तक को नोटिस जारी किए हैं। व्यवस्थाओं में सुधार करना तो दूर की बात, मीडिया में आ रही खबरों के लिए भी नर्सिंग स्टाफ को दोषी ठहराया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती कमला की हालत गंभीर सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मेडिसिन आईसीयू में भर्ती की गई कमला की हालत गंभीर बनी हुई है। उसके खून की उल्टी हुई है। कमला के 15 दिन के अंतराल में दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं। उसे एम्स जैसे उच्च संस्थान में रेफर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, तारा की हालत में काफी सुधार है। उसे एक-दो दिन में छुट्टी दी जा सकती है। चिकित्सा निदेशालय ने एसओपी जारी की है। उसका पालन कराया जाएगा। ऑपरेशन वाले मरीजों के लिए गाउन और अलग से कपड़ों के लिए सरकार से बजट मांगा जाएगा। -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा:कांग्रेस ने आपातकाल में संविधान को कुचला, देश को जेलखाना बनाकर रख दिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल ने संविधान और लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का काम किया। लोकतंत्र सेनानियों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास के उन घटनाक्रमों को याद रखना बेहद जरूरी है। जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को न केवल नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि देश को जेलखाना बना दिया गया था। मुख्यमंत्री गुरुवार को दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान ऑडिटोरियम में संविधान हत्या दिवस एवं लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान देशभर में एक लाख से अधिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और पत्रकारों को बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे, न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई थी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की दुहाई देती है और संविधान को बचाने का पाखंड करती है। लेकिन कांग्रेस ने लोकतंत्र के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक बनने का काम किया। कांग्रेस ने देश में चुनी हुई सरकारों को भंग करने का काम किया। समारोह में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। राठौड़ ने कहा- लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था आपातकाल
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था। उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने के साथ न्यायपालिका की स्वतंत्रता और मीडिया पर सेंसरशिप जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। घनश्याम तिवाड़ी ने साझा किए अनुभव समारोह में राज्यसभा सांसद व लोकतंत्र सेनानी घनश्याम तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भूमिगत रहकर कार्य करना पड़ा।

तौल-माप नियम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव:रेहड़ी से ज्वैलर्स तक… कम तौला तो 5 लाख तक की पेनल्टी लगेगी

राजस्थान में कम या गलत तौल कर ग्राहकों को चूना लगाना अब महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन का मसौदा जारी कर गलत तौल, बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट, कम माल देने, रिकॉर्ड नहीं रखने और बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार करने जैसी गड़बड़ियों पर 2 से 5 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा है। पेनल्टी का दायरा बढ़ा संशोधित ड्राफ्ट में रेहड़ी, ठेला और फेरी वालों की श्रेणी में सब्जी, फल, चाट, पकौड़ी, चाय और खिलौने बेचने वाले शामिल किए गए हैं। किराना, जनरल स्टोर, सुपरमार्केट, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, ज्वैलर्स तथा उद्योग, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, पेट्रोल-डीजल पंप और पेट्रोलियम डिपो भी नियमों के दायरे में रहेंगे। अनियमितता मिलने पर 15 दिन में सुधार कर जवाब देना होगा। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है- तीसरी गलती पर ठेला वालों पर 2 लाख जुर्माना
गैर-मानक कांटा-बांट या वजन-माप उपकरण इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर तीसरी बार में रेहड़ी-ठेला वालों पर 2 लाख, किराना स्टोर व होटल-रेस्टोरेंट पर 2.5 लाख, बड़ी रिटेल चेन पर 3 लाख और वेटब्रिज संचालकों पर 3.5 लाख तक जुर्माना प्रस्तावित है। ज्वैलर्स, उद्योगों, पेट्रोल पंपों और कंपनियों के लिए यह राशि 5 लाख तक पहुंच सकती है। कांटे-बांट से छेड़छाड़ पर 1 लाख तक जुर्माना
वजन बढ़ाने-घटाने या माप उपकरणों में जानबूझकर छेड़छाड़ करने पर दूसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 1 हजार, किराना स्टोर पर 5 हजार और होटल-ढाबों पर 10 हजार तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं वेटब्रिज संचालकों और ज्वैलर्स के लिए यह पेनल्टी बढ़ाकर 1-1 लाख तक प्रस्तावित की गई है। गलत यूनिट में बिक्री पर 1 लाख रु. तक जुर्माना
किलो, लीटर, मीटर या निर्धारित संख्या के बजाय गलत इकाई में सामान बेचने पर तीसरी बार पकड़े जाने पर कड़ी पेनल्टी का प्रस्ताव है। रेहड़ी-ठेला संचालकों पर 50 हजार, किराना स्टोर पर 70 हजार, होटल-ढाबों पर 80 हजार, ज्वैलर्स पर 1 लाख तक जुर्माना। रजिस्ट्रेशन नहीं तो कारोबार पर 3.5 लाख तक जुर्माना, कम तौल पर भी सख्ती राज्य सरकार ने विधिक माप विज्ञान नियम-2011 में बड़े बदलाव का मसौदा जारी किया है। लाइसेंस व्यवस्था खत्म कर रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। बिना पंजीकरण वजन-माप उपकरण बनाने, मरम्मत या बेचने तथा गलत जानकारी देने पर तीसरी बार में 3.5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकेगा। कम माल देने पर रेहड़ी-ठेला संचालकों से लेकर पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और ज्वैलर्स तक पर 150 रुपए से 20 हजार रुपए तक दंड का प्रावधान किया गया है। बिना सत्यापन वाले कांटे-बांट मिलने पर 2 हजार से 8 हजार रुपए तक जुर्माना लगेगा। पेट्रोल पंपों पर माप जांच व्यवस्था सख्त होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपए तक पहुंच सकेगा।