6 साल बाद बदले अंदाज में लौटा भारत-चीन व्यापार:पहली खेप में 26 पास जारी; इस बार सड़क से लिपुलेख तक पहुंचेंगे व्यापारी

छह साल बाद भारत-तिब्बत सीमा व्यापार नए स्वरूप में लौट रहा है। पहली बार व्यापारी सड़क मार्ग से वाहनों के जरिए लिपुलेख दर्रे के नजदीक तक पहुंच सकेंगे। इसी बीच प्रशासन ने व्यापार की पहली खेप में 26 ट्रेड पास जारी कर दिए हैं, जिनमें 17 व्यापारी और नौ सहायक शामिल हैं। गुंजी में कस्टम कार्यालय और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी शुरू कर दी गई हैं। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए तैयार हो चुके परमिट तत्काल जारी कर दिए गए हैं। इस वर्ष सीमा व्यापार के लिए कुल 103 आवेदन मिले हैं। शेष आवेदनों की जांच के बाद अगले दो-तीन दिनों में 25 से 30 और पास जारी किए जाएंगे। सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबारों को होगा। युवाओं-महिला व्यापारियों की बढ़ी भागीदारी एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि इस वर्ष सीमा व्यापार में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। नवयुवक व्यापारी के रूप में सुनील गर्ब्याल सहित एक महिला व्यापारी भी इस व्यापारिक गतिविधि से जुड़ने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा व्यापार के पुनः संचालन से सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। सामान्य पासपोर्ट से इतना अलग ट्रेड पास… 1. विदेश यात्रा का नहीं, सीमा व्यापार का दस्तावेज सामान्य पासपोर्ट भारत सरकार का आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसके जरिए व्यक्ति वीजा नियमों के तहत दुनिया के विभिन्न देशों की यात्रा कर सकता है। इसके विपरीत भारत-तिब्बत ट्रेड पास केवल सीमा व्यापार से जुड़े अधिकृत लोगों को जारी किया जाता है। यह पर्यटन, नौकरी या अन्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए मान्य नहीं होता। 2. तय मार्ग और सीमित अवधि के लिए मान्य सामान्य पासपोर्ट कई वर्षों तक वैध रहता है और धारक को विभिन्न देशों की यात्रा की अनुमति देता है। वहीं ट्रेड पास केवल निर्धारित ट्रेड सीजन और अधिकृत व्यापारिक मार्ग, जैसे लिपुलेख दर्रा-तकलाकोट क्षेत्र के लिए ही जारी किया जाता है। इसकी वैधता सीमित होती है और अवधि समाप्त होने पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। 3. विशेष अनुमति-पत्र, जिसमें भूमिका भी तय होती है ट्रेड पास सामान्य पहचान दस्तावेज नहीं, बल्कि सीमा व्यापार के लिए जारी विशेष अनुमति-पत्र है। यह केवल पंजीकृत व्यापारियों, उनके सहायकों, पोर्टर, कुली और म्यूल (खच्चर) चालकों को दिया जाता है। पास में धारक की श्रेणी भी दर्ज होती है। इसे किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता और ट्रेड सीजन समाप्त होने पर संबंधित प्राधिकरण को वापस जमा करना पड़ता है। पात्रता से मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया भारत-तिब्बत ट्रेड पास सामान्य पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि सीमा व्यापार से जुड़े पंजीकृत व्यापारियों, उनके सहायकों, पोर्टर, कुली और म्यूल (खच्चर) चालकों को जारी किया जाता है। पास बनवाने के लिए आवेदक का नाम सीमा व्यापार या पंजीकृत व्यापारी सूची में होना जरूरी है। इसके बाद आवेदन ट्रेड कार्यालय या जिला प्रशासन के पास जमा किया जाता है। आवेदन मिलने पर एसआईबी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच) समेत अन्य सुरक्षा और प्रशासनिक जांच होती है। सभी मंजूरियां मिलने के बाद ट्रेड पास जारी किया जाता है। इसके लिए पहचान पत्र, स्थानीय निवासी या व्यापारी प्रमाण, व्यापार पंजीकरण दस्तावेज, फोटो और सुरक्षा क्लीयरेंस से जुड़े रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है। अंतिम दस्तावेजों की सूची संबंधित जिला प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार तय होती है। पहली बार सड़क आधारित मॉडल में बदलेगा व्यापार अब तक लिपुलेख दर्रे से होने वाला कारोबार पूरी तरह पारंपरिक ढुलाई व्यवस्था पर निर्भर था। व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा कर दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों, याक और पोर्टरों के जरिए ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। कुमाऊं यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सुमन जोशी के मुताबिक पहले सीमांत समुदाय नेपाल से चावल, जौ और गेहूं लेकर तिब्बत की ग्यानिमा और गरहाटोक मंडियों तक पहुंचते थे, जहां बदले में नमक और बोरेक्स लिया जाता था। कई जगह एक नाली चावल के बदले पांच नाली नमक तक का विनिमय होता था। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाया जाएगा। इसके बाद चीन क्षेत्र में सड़क मार्ग उपलब्ध रहेगा, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी पहुंचेंगे। तकलाकोट की नई मंडी में मिलेंगी दुकानें करीब 7 साल तक व्यापार बंद रहने के दौरान तकलाकोट की पुरानी मंडी की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गई थीं। अब भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की गई है। इसी नई मंडी में भारतीय व्यापारियों को दुकानें दी जाएंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा की भी मांग की गई है। व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि सड़क और आधुनिक सुविधाओं के कारण आने वाले वर्षों में कारोबार का दायरा और बढ़ सकता है। 2019 में करोड़ों का कारोबार, अब बढ़ने की उम्मीद 2019 में इस मार्ग से करीब तीन करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था, जिसमें लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और 1.90 करोड़ रुपये का आयात शामिल था। अब सड़क और आधुनिक सुविधाओं के साथ व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, ऐसे में इस आंकड़े के काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। व्यापार बंद होने के कारण कई भारतीय व्यापारी अपना सामान तिब्बत की तकलाकोट मंडी में ही छोड़ आए थे। पिछले छह साल से करीब 45 व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान वहां फंसा हुआ है। अब व्यापार शुरू होने से इन व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे अपना सामान वापस ला सकेंगे या उसे बेच सकेंगे। सदियों से व्यापार, संस्कृति और भरोसे का रास्ता रहा लिपुलेख लिपुलेख दर्रा सिर्फ सीमा कारोबार का रास्ता नहीं, बल्कि सदियों से भारत, नेपाल और तिब्बत के बीच संपर्क का प्रमुख मार्ग रहा है। सीमांत क्षेत्रों में लंबे समय तक वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित व्यापार चलता था। ब्रिटिश अधिकारी और लेखक सर फ्रांसिस एडवर्ड यंगहसबैंड ने अपनी किताब ‘इंडिया एंड तिब्बत’ में हिमालयी व्यापारिक रास्तों को भारत और तिब्बत के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संपर्क का माध्यम बताया था। इन रास्तों से सिर्फ सामान नहीं, बल्कि परंपराएं, भाषाएं और सीमांत समाजों के रिश्ते भी एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचते थे। तिब्बत के साथ यह संपर्क सिर्फ मंडियों तक सीमित नहीं था। सीमांत इलाकों के मेले, धार्मिक यात्राएं और कारोबारी काफिले भारत, नेपाल और तिब्बत के बीच सामाजिक संबंधों का भी आधार बने हुए थे। जौलजीबी जैसे मेले लंबे समय तक त्रिपक्षीय व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचाने जाते रहे। कौन हैं रं समुदाय, जिन्होंने जिंदा रखा हिमालयी व्यापार लिपुलेख दर्रे से होने वाले पारंपरिक व्यापार में रं समुदाय की सबसे अहम भूमिका रही है। यह समुदाय मुख्य रूप से पिथौरागढ़ की ब्यास, दारमा और चौंदास घाटियों में निवास करता है। रं समाज को भोटिया या शौका समुदाय का हिस्सा भी माना जाता है। सदियों तक यही समुदाय दुर्गम हिमालयी रास्तों में भारत-तिब्बत व्यापार को जिंदा रखे हुए था। इनके रहन-सहन, खानपान और पहनावे में तिब्बती संस्कृति की झलक दिखाई देती है। यह समुदाय अपनी ऊनी बुनाई, लोक संस्कृति और सीमांत जीवनशैली के लिए जाना जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में भोटिया जनजाति की आबादी 39 हजार से ज्यादा थी। व्यापार से पहले पी जाती थी शराब सुमन जोशी की एक सोध के अनुसार ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने पर कई भोटिया परिवार सर्दियों में नेपाल के निचले इलाकों में अस्थायी घर बनाकर रहते थे, जबकि गर्मियों में व्यापारिक काफिलों के साथ तिब्बत की मंडियों तक पहुंचते थे। नेपाल और तिब्बत के बीच यही सीमांत समुदाय कारोबारी पुल की तरह काम करता था। व्यापार शुरू करने से पहले भारतीय व्यापारियों और तिब्बती कारोबारियों के बीच ‘Share Chu-Dul Chyu’ नाम की मित्रता रस्म निभाई जाती थी। दोनों पक्ष चांदी के पात्र में शराब पीते, घी, सत्तू, ऊन और सोने को छूकर भरोसे का प्रतीक मानते थे। दोस्ती के प्रमाण के तौर पर पत्थर के टुकड़े तक संभालकर रखे जाते थे। नेपाल की आपत्ति से फिर चर्चा में आया सीमा विवाद लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को लेकर नेपाल पहले भी आपत्ति जता चुका है। 2019 में भारत सरकार के नए नक्शे के बाद नेपाल ने भी नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें उसने इस पूरे क्षेत्र पर दावा किया था। बाद में नेपाल संसद ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। नेपाल का दावा है कि यह इलाका उसका हिस्सा है, जबकि भारत सिगौली संधि के आधार पर इसे अपना क्षेत्र मानता है। यही वजह है कि भारत-चीन व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ा यह पूरा इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। —————— ये खबर भी पढ़ें : भारत से फिर होंगे कैलाश पर्वत के दर्शन: सुरक्षा कारणों से लगी थी रोक, सेना-ITBP से चर्चा के बाद SOP तैयार कर रहा प्रशासन भारत के ओल्ड लिपुलेख (लिपुपास) से शिवभक्त एक बार फिर कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे। सुरक्षा कारणों से बंद किए गए इस व्यू पॉइंट को दोबारा खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। सेना और आईटीबीपी के साथ चर्चा के बाद प्रशासन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने में जुटा है, ताकि श्रद्धालु भारत की सीमा से ही तिब्बत स्थित पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकें। पढ़ें पूरी खबर…

हिमाचल प्रदेश में 24 जून की रात 12 बजे से रोडवेज बसों की हड़ताल, सरकार ने लागू किया ESMA

हिमाचल पथ परिवहन निगम के ड्राइवर और कंडक्टर यूनियन की सरकार से वार्ता विफल हो गई है। कर्मचारियों ने बुधवार आधी रात से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है।

आकाश इंस्टीट्यूट में शॉर्ट सर्किट, धुआं उठा:100 छात्र भागकर बाहर निकले, फायर विभाग के अफसर पहुंचे, कोचिंग की जांच की

आगरा में मंगलवार सुबह 11.15 बजे आकाश इंस्टीट्यूट में शॉर्ट सर्किट के बाद धुआं उठा। बेसमेंट से उठे धुएं को देखकर छात्र और टीचर घबरा गए। सभी तुरंत भागकर सड़क पर आ गए। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस दौरान 100 से ज्यादा स्टूडेंट्स कोचिंग में पढ़ाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बेसमेंट से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया। लोग चिल्लाने लगे। टीचर्स ने तत्काल सभी कक्षाएं खाली कराईं। इसके बाद किसी ने बिजली की मेन लाइन काट दी। पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। फायर विभाग के अफसर कोचिंग सेंटर पहुंचे। जांच की। दरअसल, सोमवार को लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में ज्यादातर 20 से 30 साल की उम्र के बीच के थे। 2 तस्वीरें देखिए… छात्रा बोली- टीचर्स आए और कहा- क्लासरूम खाली करो छात्रा पूनम ने बताया- हमारी क्लासेज चल रही थी। एकदम से हमारे स्टाफ मेंबर्स और टीचर्स आए। कहा- जल्दी-जल्दी यहां से सभी बाहर निकलो, फिर हम तुरंत एग्जिट एरियर से बाहर आ गए। हमें लगा कि छुट्टी हो गई है या फिर कुछ महत्वपूर्ण काम होगा। बाद में पता चला कि नीचे का जो ग्राउंड एरिया है। वहां रखे ट्रांसफार्मर में आग लग गई है। बस हमें इतनी ही इंफॉर्मेशन है। आर्यन ने कहा- जब आग लगी तब क्लास रूम में 50 बच्चे थे स्टूडेंट आर्यन पंडित ने बताया कि हम लोग क्लास में थे। हमारे पास टीचर्स आए और बोले कि आग लग गई है। फिर हम फायर एग्जिट से तुरंत बाहर आ गए। हमने देखा कि काफी बच्चे बाहर थे। हालांकि, ज्यादा पैनिक स्थिति नहीं हुई थी। धुआं नहीं दिख रहा था। बस पता चला कि कोचिंग में कहीं शॉर्ट सर्किट से आग लगी है। जिस समय आग लगी थी, उस समय हमारी क्लास में ही 50 बच्चे थे। फायर अफसरों ने जांच की, दूसरी कोचिंग भी गए
आकाश इंस्टीट्यूट में शॉर्ट सर्किट की सूचना पर फायर विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे। कोचिंग की जांच की। इसके बाद अफसरों ने पास में ही जीएस कोचिंग सेंटर भी जांच के लिए गए। वहां आने-जाने का रास्ता बहुत संकरा था। फायर एक्सटिंगिवीशर भी खाली थे। अफसरों ने कोचिंग प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि या तो इंतजाम ठीक करिए नहीं तो कोचिंग खाली करिए। कोचिंग मालिक और बिल्डिंग के मालिक दोनों को फायर विभाग ने तलब किया। CFO देवेंद्र कुमार- आकाश इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में आग लगने की सूचना मिली थी, लेकिन वहां आग जैसी कोई बात नहीं थी। बेसमेंट में शॉर्ट सर्किट से धुआं उठा था। यहां कोचिंग में जांच-पड़ताल की गई। यहां सुरक्षा के सभी इंतजाम सही पाए गए। शहर भर में कोचिंग सेंटरों की जांच की जा रही है। वहां फायर मानकों को देखा जा रहा है। जहां कमियां मिली हैं, उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। फायर अधिकारी सोमनाथ ने कहा- शहर के कोचिंग सेंटरों की जांच की जा रही है। फायर के मानक तो पूरे होने ही चाहिए। जो लाइसेंस अथॉरिटी हैं उन्हें भी देखना चाहिए कि वहां ओपन स्टेयर्स हैं कि नहीं। प्रॉपर वेंटिलेशन है कि नहीं। आकाश इंस्टीट्यूट के मैनेजर सचिन मित्तल ने कहा- कोचिंग कॉमर्शियल बिल्डिंग में स्थित है। इसी के बेसमेंट में पावर जंक्शन में शॉर्ट सर्किट से धुआं उठने लगा था। इसकी सूचना गार्ड ने हम लोगों को दी। गार्ड ने ही फायर एक्सटिंगिवीशर की मदद से उस उठते धुएं को बंद किया। उन्होंने कहा- एहतियातन के तौर पर करीब 100 बच्चों को बिल्डिंग से बाहर निकाला गया। कोई पैनिक की स्थिति नहीं थी। बच्चे ज्यादा थे तो निकलने में थोड़ा समय लगा। ————————-
ये खबर भी पढ़ें लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतें, जांच के लिए SIT पहुंची:सभी शव परिजन को सौंपे, 23 साल की बेटी का शव देख मां बेहोश लखनऊ की कोचिंग में आग लगने की घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार सुबह 11 बजे हादसे की जांच के लिए SIT और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने बिल्डिंग की जांच की। SIT टीम में IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं। पढ़िए पूरी खबर

केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से दिया इस्तीफा, कहीं ये वजह तो नहीं

एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति ने स्वीकार भी कर लिया है।

राममंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट SIT ने सरकार को सौंपी:20 पेज की रिपोर्ट में FIR और ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने मंगलवार को अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक, इसमें FIR दर्ज करने और ट्रस्ट को दोबारा गठित करने की सिफारिश की गई है। किसी सीनियर अफसर को मंदिर का CEO नियुक्त करने का भी सुझाव है। डिटेल जांच के लिए SIT ने और समय मांगा है। रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी गई है। टीम ने बताया कि 20 पन्नों की यह शुरुआती रिपोर्ट है। इसमें 150 लोगों से पूछताछ की डिटेल है। सूत्रों के मुताबिक, SIT ने पिछले 5 साल के चढ़ावे का ऑडिट कराने की भी सिफारिश की है। चढ़ावे में अनियमितता रोकने के लिए सुझाव दिए हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार की तरफ से रिपोर्ट पीएमओ को मिल गई है। पीएमओ तय करेगा कि ट्रस्ट के किन सदस्यों को रखा जाए या हटाया जाए। राम मंदिर चोरी मामले में 5 आरोपियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर 2 करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है। इसके अलावा, चंपत राय के करीबी टिन्नू के घर से सोना मिला था। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकती है। राम मंदिर से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए-

शादी से एक दिन पहले दुल्हन और उसके माता-पिता ने जहर खाकर दी जान, एक आरोपी गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला

घटनास्थल से सुसाइड नोट मिला है। इसमें एक शख्स इन तीनों की मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।