परिजनों ने मना किया तो भी पंचनामा बनाना था जरूरी:हाईकोर्ट ने दौसा पुलिस पर जताई नाराजगी, कहा-पंचनामा नहीं बनाना पुलिस की गंभीर चूक
हाईकोर्ट ने नाबालिग की हत्या के मामले में पुलिस के पंचनामा नहीं बनाने पर इसे गंभीर चूक बताते हुए नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने दौसा जिले के मंडावर इलाके में साल 2022 में 15 साल के किशोर की हत्या के बाद पंचनामा नहीं बनाने को गंभीर चूक करार दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपी राजेंद्र और एक बाल अपचारी की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पुलिस के कामकाज की शैली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के परिजनों ने पोस्टमॉर्टम के लिए मना किया था तो भी शव का पंचनामा तैयार करवाना अस्पताल में मौजूद पुलिस अधिकारी की ड्यूटी थी। पंचनामा नहीं बनाना पुलिस जांच की गंभीर और जानबूझकर छोड़ी गई कमी है।
आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज जस्टिस रवि चिरानिया ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2024 को प्रसंज्ञान ले लिया है, इसलिए इस स्टेज पर जमानत नहीं दी जा सकती। आरोपियों की तरफ से तर्क दिया गया था कि घटना 12 मई 2022 की है और एफआईआर देरी से 15 जून 2022 को दर्ज कराई गई है, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। पुलिस ने पहले एफआर लगा दी थी, बाद में कोर्ट के आदेश पर जांच हुई मृतक के पिता ने पहले पुलिस को किसी के खिलाफ शिकायत नहीं होने की बात कही थी और पोस्टमॉर्टम से भी इनकार किया था, यह सब लिखित में दिया गया था। पुलिस ने जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट (FR) पेश कर दी थी। बाद में कोर्ट ने परिवादी की प्रोटेस्ट पिटीशन पर 7 अक्टूबर 2024 को संज्ञान लेकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। पुलिस की भूमिका शुरू से ही सवालों में, आरोपियों ने जांच प्रभावित की कोर्ट में परिवादी ने कहा कि आरोपियों और उनके परिजनों ने जांच को प्रभावित किया और पोस्टमॉर्टम नहीं होने दिया। मृतक का अंतिम संस्कार भी देर रात जल्दबाजी में किया गया। पुलिस ने भी शव का पंचनामा नहीं बनाया और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही शव परिजनों को सौंप दिया, जिससे जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां रहीं। कोर्ट ने कहा- भले ही परिवादी ने पहले पोस्टमॉर्टम से मना किया हो, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस अफसर की यह ड्यूटी थी कि वह शव का पंचनामा तैयार कर कानूनी कार्रवाई करता। ऐसा न करके मृतक का शव बिना किसी जांच-पड़ताल के परिजनों को सौंप दिया गया।

