सरकार की सख्ती; पुलिस ने खामियों का सर्वे कराया:रोड समतल करें और हर 5 से 10 किमी पर रम्बल स्ट्रिप्स लगाएं, इससे ड्राइवर अलर्ट रहेंगे

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिए सरकार की सख्ती के बाद पुलिस ने खामियों का सर्वे कराया है। जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने सर्वे में सामने आई कमियों को दूर कराने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है। इसमें रोड अलाइनमेंट और समतलीकरण दुरुस्त कराने, हर 5 से 10 किमी पर रम्बल स्ट्रिप्स लगाने, रेस्ट एरिया बढ़ाने और एक्सप्रेस-वे को सीसीटीवी कवरेज में लेने जैसे सुझाव दिए गए हैं। आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि एक्सप्रेस-वे पर कई जगह सड़क समतल नहीं है। कुछ स्थानों पर अचानक गड्ढेनुमा स्ट्रक्चर और सड़क की असमानता के कारण तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं। ऐसे स्थानों को चिह्नित कर रोड अलाइनमेंट और समतलीकरण ठीक कराने की जरूरत है। रात में लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को नींद की झपकी आने का खतरा रहता है। इसलिए प्रत्येक 5 से 10 किलोमीटर पर पर्याप्त संख्या में रम्बल स्ट्रिप्स लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि वाहन चालक अलर्ट रहें। साथ ही दुर्घटना संभावित स्थानों पर अतिरिक्त चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड लगाने की भी अनुशंसा की गई है। इंटरकनेक्टिविटी प्वाइंट पर अचानक लेन बदलने से हादसे सर्वे में सामने आया कि इंटरकनेक्टिविटी प्वाइंट पर चालक अचानक लेन बदलते हैं। इससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है। आईजी ने सुझाव दिया है कि ऐसे प्वाइंट से करीब एक किलोमीटर पहले ही नीचे उतरने के लिए अलग लेन निर्धारित की जाए। साथ ही बड़े आकार के संकेतक बोर्ड लगाए जाएं, ताकि चालक समय रहते अलर्ट हो सकें और अचानक कट न मारें। जयपुर-बांदीकुई के बीच रेस्ट एरिया नहीं, मुख्य मार्ग पर खड़े हो रहे वाहन जयपुर से बांदीकुई के बीच रेस्ट एरिया नहीं है। ऐसे में भारी वाहनों के चालक टायर गर्म होने या विश्राम के लिए वाहनों को मुख्य मार्ग पर ही खड़ा कर देते हैं। यह हादसों का बड़ा कारण बन सकता है। पत्र में इस हिस्से में रेस्ट एरिया विकसित करने का सुझाव दिया गया है। रेस्ट एरिया में ट्रक चालकों के लिए सस्ती दरों पर भोजनालय की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि चालक भोजन या आराम के लिए गलत जगह वाहन न रोकें। जून में 34 हादसे, 40 मौतें 1 जुलाई को दौसा में हुए हादसे के बाद आईजी राहुल प्रकाश ने एक्सप्रेस-वे का खुद निरीक्षण किया था। इसके बाद कमेटी से भी विजिट कराई गई। दौसा-अलवर क्षेत्र में पिछले दिनों हादसे लगातार बढ़े हैं। एक्सप्रेस-वे पर यातायात भी बढ़ रहा है। पिछले साल जून में 170 किलोमीटर के क्षेत्र में 25 हादसे हुए थे, जिनमें 21 लोगों की मौत हुई थी। इस साल जून में 34 हादसे हुए, जिनमें 40 लोगों की मौत हुई और 65 लोग घायल हुए। ट्रॉमा सेंटर और रेस्क्यू संसाधन बढ़ाने का सुझाव अलवर-दौसा क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर बनाने की जरूरत बताई गई है। साथ ही प्रत्येक रेस्ट एरिया में दमकल, एम्बुलेंस, क्रेन, वेल्डिंग मशीन, कटिंग उपकरण और प्रशिक्षित ऑपरेटर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। इससे हादसे के बाद घायलों को समय पर मदद मिल सकेगी और वाहन में फंसे लोगों को जल्द निकाला जा सकेगा। कैमरे बदलें, ओवरस्पीडिंग व नो-पार्किंग पर ई-चालान हों आईजी ने एक्सप्रेस-वे को सीसीटीवी कवरेज में लेने का सुझाव भी दिया है। इससे ओवरस्पीडिंग और नो-पार्किंग एरिया में खड़े वाहनों के ऑटोमैटिक ई-चालान हो सकेंगे। पहले लगाए गए कई कैमरे खराब हो चुके हैं। इन्हें बदलकर बेहतर क्वालिटी के कैमरे लगाने की जरूरत बताई गई है। एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को रोकने के लिए कमेटी से सर्वे कराया है। जो खामियां मिली हैं, उन्हें दुरुस्त कराने के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है।
– राहुल प्रकाश, रेंज आईजी, जयपुर

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