राजेंद्र राठौड़ ने शेविंग कराते हुए की सुनवाई:मंत्री झाबर सिंह के स्वागत में 'समस्या वाला पोस्टर'; स्कूल की छत पर चढ़े DEO साहब

नमस्कार बारां में नगरीय विकास मंत्रीजी के स्वागत में अनोखे पोस्टर लग गए। भाजपा के ऐसे सीनियर नेता, जिनके पास पद तो कोई नहीं, लेकिन फुरसत चैन से दाढ़ी बनवाने की नहीं। जयपुर में सरकारी स्कूलों की छतें चेक हो रही हैं। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. टूटी सड़कों पर मंत्रीजी का ‘स्वागत’ बरसात में सड़कें टूटती ही हैं। इसमें शिकायत क्या करना? लेकिन लोगों को लगता है कि शिकायत करना हमारा अधिकार है। बारां में सड़कें टूटी हैं। सड़कों में गड्‌ढे हैं। गड्‌ढों में पानी भर जाता है। दुपहिया वाले गिर पड़ते हैं। पानी उछलने से कपड़े गंदे हो जाते हैं। टूटी सड़कें रोजगार को बढ़ावा देती हैं। सड़क टूटेगी तो बेकार बैठे ठेकेदार को काम मिलेगा। मजदूरों को काम मिलेगा। गाड़ी खराब होगी तो टायर बिकेंगे, मैकेनिकों को काम मिलेगा। मोटर पाट्‌र्स बनाने वाली कंपनियों में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ेगी। कपड़े खराब होंगे तो साबुन-डिटर्जेंट बनाने वाली कंपनियों को काम मिलेगा। जूते-चप्पल बनाने वाले फैक्ट्रियों के मजदूरों को काम मिलेगा। रोजगार के इतने अवसरों के बाद भी बारां में कुछ लोगों ने नगरीय विकास मंत्री जी के आने पर चौराहे पर पोस्टर टांग दिया। पोस्टर पर लिखा था- मंत्रीजी का बारां की सड़कों पर हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सड़कें बदहाल हैं। जनता बेहाल है। बदहाल सड़कों से कब मिलेगी निजात? पूछता है बारां। हालांकि यह इबारत लिखने में हिंदी की वर्तनी उतनी ही अशुद्ध थी, जितनी सुजानगढ़ वाले SDM साहब की। मंत्रीजी को बुरा तो लगा होगा। उन्होंने अपने गांव में लोगों के स्वागत के लिए कालीन बिछा दी थी। लोग हैं कि पोस्टर बिछा रहे हैं। खैर, नगरीय विकास का काम जीवन-मृत्यु के चक्र जैसा है। सड़क बनेगी तो टूटेगी, टूटेगी तो बनेगी। यही चक्र चलता रहेगा। बारां वाले छोटे-मोटे गड्‌ढों पर रो रहे हैं। यहां राजधानी की सड़कों में से सुरंगें निकल रही हैं। लेकिन कोई चूं तक नहीं करता। सड़क का तो पता नहीं लेकिन दिल को तसल्ली देने के लिए मंत्रीजी ने अपने सोशल मीडिया पर जोरदार रील डाल रखी है। स्लोमोशन वीडियो के साथ जानी-पहचानी आवाज आती है- सफर में धूप तो होगी। जो चल सको तो चलो। इसी में आगे जोड़ा जा सकता है- सड़क में गड्‌ढे तो होंगे, जो संभल सको तो चलो। 2. शेविंग के साथ जनसुनवाई राजेंद्र राठौड़ साहब ने एक मामले में इंपीरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डॉ. वीरू सहस्रबुद्धे को भी पछाड़ दिया। हम उन सहस्रबुद्धे की बात कर रहे हैं जो ‘थ्री इडियट’ फिल्म में प्रोफेसर थे। समय का सदुपयोग करने के लिए सहस्रबुद्धे अपने चेंबर में संगीत सुनते हुए दो घड़ी आराम करते हैं और इसी दौरान हजामत बनवाते हैं। दोनों हाथों से लिखने में दक्ष सहस्रबुद्धे तक शेविंग कराते वक्त सोफे पर पसर जाया करते थे और सभी एक्टिविटीज बंद कर दिया करते थे। लेकिन राठौड़ साहब रेस में आगे निकल गए। उनके पास तो पार्टी-संगठन में कोई विशिष्ठ पद या कार्यभार भी नहीं। इसके बावजूद उन्हें इतनी फुरसत भी नहीं कि दो-चार मिनट का वक्त निकालकर दाढ़ी बनवा लें। उनका एक वीडियो सामने आया जिसमें वे कुर्सी पर बैठे जनसुनवाई कर रहे हैं। साथ ही शेविंग भी हो रही है। समस्या सुनाई जा रही है और उसी अवस्था में सुनी भी जा रही है। राजू भैया से बाबोसा तक के सफर के पीछे राठौड़ साहब की यही मेहनत और लगन नजर आती है। बिना पद इतना सब कुछ कर रहे हैं। पद मिलने के बाद तो… 3. चलते-चलते.. क्या समय आ गया है? घोर कलयुग। जो अफसर AC दफ्तरों में बैठने के आदी रहे, उन्हें नसैनी लगाकर छतों पर चढ़ाया जा रहा है। DEO का काम क्या अब सरकारी स्कूल की छतों पर चढ़कर ये देखने का है कि मोरा (नाला) जाम तो नहीं है। ये कैसा सेफ्टी ऑडिट? दरअसल सरकारी आदेश था कि हर सरकारी स्कूल का सेफ्टी ऑटिड किया जाए। स्कूल की हालत क्या है? जर्जर तो नहीं, गिरने की हालत में तो नहीं? आदेश में साफ लिखा था कि शिक्षा अधिकारी खुद जाकर स्कूलों की हालत देखें। छतों पर पानी तो नहीं भरा है। दीवारों में तरेड़ें तो नहीं पड़ी हैं। करंट तो नहीं दौड़ रहा? पलस्तर गिरने की अवस्था में तो नहीं है? 7 जुलाई तक ऑडिट करना था। ऐसे में जयपुर में जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अपनी टीम लेकर लेकर निकले और सरकारी स्कूलों की छतें नाप ली। अधिकारी भी धन्यवाद के पात्र हैं, जो अपनी जगह किसी और को नहीं चढ़ाया। खुद चढ़े और हालात अपनी आंखों से देखे। तभी लापरवाही बरतने वाले दो स्कूलों को नोटिस दे पाए। बात नौनिहालों के जीवन की है। अधिकारी अपने फर्ज की सीढ़ी चढ़ेंगे तो बच्चे भी सुरक्षित माहौल में पढ़ेंगे। इनपुट सहयोग- शुभम निमोदिया (बारां), नरेश भाटी (चूरू)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

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