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एक पेड़, ,एक जिंदगी के लिए महाभियान शुरू, पौधे लगाए

टोंक| पर्यावरण का महाभियान ‘एक पेड़, एक जिंदगी’ के तहत दैनिक भास्कर की ओर से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांधी नगर की हरे कृष्णा कॉलोनी स्थित विवेकानंद खेल मैदान में पौधारोपण हुआ। इस मौके पर पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी संकल्प लिया गया। 21 पौधे लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिदिन इस अभियान के तहत पौधारोपण किया जाएगा। इस मौके पर शिक्षाविद रमेशकाला, सुमन काला, इंदिरा देवी, लोकेश धाकड़, जोधराज सिंह, आलोक, जितेश, लक्षिता, अवनी, कोमल आदि मौजूद रहे। उन्होंने भास्कर के अभियान की सराहना की। इस मौके पर चंपा, मोगरा, अनार, आम, जामुन, नीम, सीताफल, पपीता, तुलसी आदि के पौधे लगाए गए।

2.44 करोड़ का बीज निगम घूसकांड:चार्जशीट पेश होने से पहले भास्कर में; 4 नए आरोपी बनाए, संगठित गिरोह चला रहा था निदेशक जुगल किशोर

प्रदेश में राज्य बीज निगम के बहुचर्चित 2.44 करोड़ रुपए के रिश्वत कांड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। एसीबी इस माह के अंत तक चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन संबंधी औपचारिकताएं अंतिम दौर में हैं। चालान पेश होने के बाद एसीबी जांच का दूसरा चरण शुरू करेगी, जिसमें अब तक सामने आए चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। एसीबी की जांच में सामने आया कि बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर के संरक्षण में संगठित गिरोह की तरह काम हो रहा था, जिसमें अलग-अलग तरह से वसूली हो रही थी। मामले में सुनील सेतिया छापे की कार्रवाई के बाद फैक्ट्री संचालक या संबंधित लोगों से संपर्क करता था और जुगल किशोर सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क कराने व मामले में मदद करने की बात कहता था। गिरोह में लाइजनर का काम करने वाले अन्य लोग भी हैं। एसीबी ने 7 जून को राजस्थान राज्य बीज निगम में करोड़ों रुपए के रिश्वत नेटवर्क का खुलासा किया था। कार्रवाई के दौरान तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई, उनके करीबी स्वतंत्र बिश्नोई, फलौदी विधायक के तत्कालीन निजी सहायक गणपत बिश्नोई, किरण कपाड़िया, सुनील सेतिया और सतपाल के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जांच के दौरान मुख्य आरोपियों को पहले पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। इसके बाद अदालत से दो दिन का अतिरिक्त रिमांड लेकर आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई, जिसमें पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। पूछताछ, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर एसीबी ने रिश्वत के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं। जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपए के लेन-देन का पूरा सिस्टम संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान एसीबी ने जुगल किशोर के ठिकानों और बस के जरिए भेजी जा रही नकदी सहित करीब 2.44 करोड़ रुपए बरामद किए थे। 60 लाख की कहानी अब भी अधूरी… जांच में एसीबी के सामने यह तथ्य आया कि रिश्वत के सौदे में करीब 60 लाख रुपए गणपत बिश्नोई के हिस्से में गए थे। हालांकि पूछताछ और तलाशी के बावजूद यह राशि बरामद नहीं हो सकी। एसीबी को संदेह है कि रकम को अलग-अलग लोगों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया। सूत्रों के अनुसार चालान पेश होने के बाद एसीबी चार अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाएगी। इनमें बीज निगम के तत्कालीन निदेशक के लिए कथित रूप से लाइजनिंग करने वाला एक व्यक्ति, जोधपुर निवासी रोशनी, तथा जांच के दौरान सामने आए दो अन्य लोग शामिल हैं। एसीबी का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद 60 लाख रुपए के लेन-देन और पूरे नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आ सकती हैं।

भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का पुष्पवर्षा से स्वागत श्रद्धालुओं को कराई कुल्फी व शीतल जल सेवा

भास्कर न्यूज | टोंक जिला मुख्यालय पर निकाली गई भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा का विश्वकर्मा जांगिड़ समाज महिला संगठन ने जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा सहित मातृ शक्ति के साथ पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। संगठन की ओर से रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं व भक्तों के लिए कुल्फी और शीतल जल सेवा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भगवान श्री जगन्नाथ के जयघोष के साथ रथयात्रा में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई गई। जिलाध्यक्ष ज्योति शर्मा ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दौरान सीमा जांगिड़, किरण जांगिड़, चंदा, आशा, शिमला, सुशीला, बीना, पूजा, सोहनी सहित विश्वकर्मा जांगिड़ समाज महिला संगठन की अनेक महिलाओं ने सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।

नारी जन जागृति संस्थान के स्थापना दिवस गौशाला छप्पन भोग आज, रक्तदान कल

ब्यावर |नारी जन जागृति संस्थान अपने 8वें स्थापना दिवस पर शनिवार को मसूदा रोड स्थित गौशाला में सुबह 7 बजे संस्थान की ओर से गौ माताओं के लिए 56 भोग का आयोजन होगा। संस्थान की ओर से 19 जुलाई को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक रेड आर्मी की ओर से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित होगा।

साइबर ठगी 400 गुना बढ़ी:2018 में 3 केस, अब तक 1229, जबकि 10 लाख से ज्यादा के केस ही दर्ज किए

राजधानी में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2018 में साइबर थाने में केवल 3 मुकदमे दर्ज हुए थे। इसके बाद 8 साल में 1229 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। यानी केसों का बोझ 400 गुना तक पहुंच गया, लेकिन साइबर थाना अब भी पुराने संसाधनों के कही भरोसे है। चार कमरों के थाने में तैनात अधिकांश पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच के केवल 2-3 दिन के शॉर्ट टर्म कोर्स किए हैं। एक भी स्थायी तकनीकी विशेषज्ञ नहीं है। जबकि साइबर ठग रोज नई तकनीक ला रहे हैं। ठगी की रकम कई बैंक खातों, म्यूल अकाउंट और डिजिटल वॉलेट से कुछ ही मिनटों में अलग-अलग राज्यों या देशों तक पहुंच रही है। वीपीएन और फर्जी आईपी एड्रेस से अपराधी की लोकेशन और क्रिप्टोकरेंसी से रकम को ट्रैक करना तक मुश्किल है। ऐसे में डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ, नेटवर्क एनालिस्ट, आईपी ट्रैकिंग एक्सपर्ट, मोबाइल-लैपटॉप डेटा रिकवरी विशेषज्ञ, बैंकिंग ट्रांजेक्शन एनालिस्ट, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन एनालिस्ट और सोशल मीडिया इंटेलिजेंस टीम की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने हाल ही दो प्रोग्रामर और एक सहायक प्रोग्रामर को अस्थायी रूप से लगाया है। 5 लाख से ज्यादा की ठगी पर केस, 10 लाख से ज्यादा के ही दर्ज कर रहे नियमों के अनुसार 5 लाख रुपए से अधिक की ऑनलाइन ठगी के मामलों की जांच साइबर थाने को करनी चाहिए। लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के कारण जयपुर साइबर थाना 10 लाख रुपए से अधिक की ठगी के मामलों को ही जांच के लिए ले रहा है। ऐसे में सवाल यह भी है कि 10 लाख रुपए से कम ठगी वाले पीड़ित कहां जाएं? वहीं 5 लाख रुपए से कम साइबर ठगी के केस संबंधित थानों में दर्ज किए जाते हैं। ऐसे मामलों की तकनीकी जांच और अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। लॉकअप में वॉशरूम नहीं, रात में आरोपियों को विधायकपुरी थाने भेजना पड़ता है

भाटों का खेड़ा तक सड़क स्वीकृत

जखाणा पुलिया से भाटों का खेड़ा तक सड़क मार्ग स्वीकृत होने पर छावनी बोरदा और भाटों का खेड़ा के ग्रामीणों में खुशी का माहौल रहा। ग्रामीणों ने मिठाई बांटी। आतिशबाजी कर खुशी मनाई। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद से इस मार्ग के निर्माण का इंतजार था। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को वर्षों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के मौसम में किसी के बीमार होने पर मरीज को चारपाई पर ले जाना पड़ता था। सड़क स्वीकृत होने से अब ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इस दौरान नारायण सिंह, पप्पू सिंह, कुलदीप योगी, सोनू जैन, पप्पू प्रजापत, गोपाल बैरागी, हेमराज मीणा, नरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, पृथ्वीराज सिंह और भंवर सिंह मौजूद रहे।

टोंक में सीएनजी पंपों पर औचक जांच, माप-तौल और सील की जांच

टोंक| उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा तथा ईंधन वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में शुक्रवार को विभिन्न सीएनजी पंपों पर औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से संचालित इस अभियान के तहत सीएनजी डिस्पेंसरों की डिलीवरी और गुणवत्ता की जांच की जा रही है। विधिक माप विज्ञान अधिकारी महेंद्र चौधरी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान मास फ्लो मीटर की सहायता से सीएनजी डिस्पेंसरों की डिलीवरी की सटीकता परखी गई। इसके अलावा मीटर के सत्यापन प्रमाण-पत्र, सील की स्थिति, गैस की गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया गया। अभियान के तहत सदर थाना के सामने स्थित चौधरी बस सर्विस सीएनजी पंप, चैनपुरा (निवाई) स्थित सुशील फिलिंग एचपीसीएल, पहाड़ी एनएच-12 स्थित दीक्षा सीएनजी पंप तथा जयपुर-कोटा रोड स्थित विजय मोटर्स सीएनजी पंप का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान सभी सीएनजी डिस्पेंसर निर्धारित विधिक माप विज्ञान मानकों के अनुरूप पाए गए। विभाग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस प्रकार के औचक निरीक्षण आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे।

महालेखाकार ने उठाए सवाल:ऊर्जा सलाहकार की नियुक्ति पर ऑडिट का ‘करंट’: पद था नहीं, विज्ञापन भी नहीं निकाला… और नियुक्ति दे दी

ऊर्जा विभाग में ऊर्जा सलाहकार के पद पर हुई नियुक्ति अब ऑडिट की जांच के घेरे में आ गई है। महालेखाकार (ऑडिट) ने ऊर्जा विभाग को प्राइमरी ऑब्जेक्शन मेमो जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जवाब मांगा है। ऑडिट में पूछा है कि जब विभाग में ऊर्जा सलाहकार का कोई स्वीकृत नियमित पद ही नहीं था तो नियुक्ति किस आधार पर की गई। महालेखाकार द्वारा सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी (एनर्जी) को भेजे गए मेमो में राजस्थान सिविल सर्विस रूल्स-2013 का हवाला देते हुए पद सृजन की सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी और वित्त विभाग की स्वीकृति संबंधी जानकारी मांगी गई है। हालांकि विभाग में इस बात की भी चर्चा है कि क्या डिस्कॉम्स के पास कोई योग्य अधिकारी नहीं हैं ? जो जयपुर डिस्कॉम के एक्स एमडी नवीन अरोड़ा को नियुक्ति दी गई है। आपत्ति… पद का दायित्व, कार्यक्षेत्र स्पष्ट किए बिना दी नियुक्ति ऊर्जा विभाग का तर्क: विभाग अपने जवाब में यह बताने की तैयारी कर रहा है कि ऊर्जा सलाहकार के रूप में नियुक्त नवीन अरोड़ा अनुभवी टेक्नोक्रेट हैं और उनकी विशेषज्ञता का लाभ बिजली कंपनियों, घाटा कम करने की योजनाओं तथा केंद्र और राज्य सरकार की ऊर्जा परियोजनाओं को मिल रहा है। विभाग यह भी तर्क दे सकता है कि पूर्व में भी विशेषज्ञ सलाहकारों की नियुक्तियां की जाती रही हैं। ऑडिट में दूसरी आपत्ति यह है कि पद के अधिकार, दायित्व और कार्यक्षेत्र स्पष्ट किए बिना नियुक्ति कर दी गई। ऑडिट में पूछा गया कि पद के लिए विज्ञापन जारी क्यों नहीं किया और आवेदन आमंत्रित किए बिना सीधे नामांकन के आधार पर चयन क्यों हुआ। अनुभव के आधार पर नियुक्ति की गई, उसका मूल्यांकन किस प्रक्रिया से किया गया। ये कोई स्वीकृत पद नहीं है। अनुभव के आधार पर ऊर्जा सलाहकार लगाया गया है। इससे पहले भी सरकारों में ऊर्जा सलाहकार लगाए जाते रहे हैं। इसकी वित्त विभाग से स्वीकृत ली हुई है। ये सलाहकार अनुभवी होते हैं, इसलिए समय समय पर ये सरकारों को सलाह देते हैं। -हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री, राजस्थान

40 दिन से नर्सिंग कर्मियों का धरना

बाड़मेर | बाड़मेर में नर्सिंग कर्मचारी सेवा बहाली और नई भर्ती प्रक्रिया में मेरिट व बोनस अंक को आधार बनाने की मांग को लेकर 40 दिनों से धरने पर हैं। कर्मचारियों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष अनंतराम विश्नोई से मुलाकात की। ज्ञापन सौंपा। संयोजक जसवंत सिंह योद्धा ने कहा कि प्रदेशभर में निविदा और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए हटाए गए नर्सिंग कर्मचारियों की तुरंत सेवा बहाली हो। कोविड काल में लंबे समय तक अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को रोजगार से बाहर किया गया।

बेगू का बास के युवक की आबूधाबी में संदिग्ध हालत में मौत, 3 माह बाद मिला शव, परिजन हुए आक्रोशित

गांव बेगू का बास के युवक की आबू धाबी में तीन माह पूर्व हुई मौत के बाद शुक्रवार को शव गांव लाए। प्रत्येक ग्रामीण राकेश कुमार (24) की मौत को लेकर स्तब्ध था। शव तीन माह बाद पहुंचने पर ग्रामीणों ने विदेश मंत्रालय के प्रति आक्रोश जताया। परिजन व ग्रामीण बोले कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और विदेश मंत्रालय समय रहते सहयोग करते तो शव पहले पहुंच सकता था। मौत के कारणों व पीड़ित परिवार को मुआवजा मिल सकता था। अशोक ने बताया कि उसके ताऊ का बेटा राकेश पुत्र दलीप चंद मेघवाल आबू धाबी की एसीसी कंपनी में 28 अगस्त, 2025 को लेबर के रूप में काम करने गया था। तीन माह पूर्व तक उससे परिजनों की फोन पर बातचीत होती थी, बाद में फोन बंद आने लगा तो चिंता बढ़ गई। कंपनी में पता करने पर जानकारी नहीं मिली तो दुबई में कार्यरत रिश्तेदार को भेजकर पता कराया तो 18 मई को जानकारी मिली कि राकेश की 22 अप्रैल को ही मौत हो गई थी। परिजनों ने कंपनी में बार-बार संपर्क किया और विदेश मंत्रालय एवं जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया, परंतु तीन माह तक यथासंभव सहयोग नहीं मिला। सांसद राहुल कस्वां से मिलने पर उन्होंने भी आश्वासन दिया, परंतु समय पर कार्रवाई नहीं हुई। बाद में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व कैबीनेट मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलकर गुहार की गई, तो उन्होंने विदेश मंत्रालय में फोन किया, तब जाकर डेडबॉडी मिल सकी। परिवार में वही कमाने वाला था। मृतक के पिता ईंट भट्‌ठे पर काम करते हैं। दो भाई-बहनों वह छोटा और अविवाहित था। इधर, प्रशासक विनोद कुमार मीणा, परिजनों व ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच व पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। आबू धाबी में साथ काम करने वाला रतनगढ़ निवासी कपिल रैगर जब राकेश की डेडबॉडी लेकर घर पहुंचा तो सारी बात बताई। कपिल ने बताया कि वह और राकेश एक ही कंपनी में काम करते थे और साथ ही रहते थे। राकेश लगातार एक-दो दिन तक कमरे पर नहीं लौटा तो उन्होंने कंपनी अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इस पर अधिकारियों का जवाब बहुत ही असंवेदनशील था। बाद में राकेश की मृत्यु की सूचना मिली और उसने कई बार कंपनी से मौत का कारण जानने का प्रयास किया, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया।