गहलोत बोले- राजस्थान में सरकारी भुगतान तंत्र ठप:ऐसा वित्तीय कुप्रबंधन कभी नहीं देखा; न पेंशन मिल रही न इलाज, सीएम तुरंत दखल दें

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सरकारी भुगतान तंत्र के पूरी तरह ठप होने का दावा करते हुए सीएम भजनलाल शर्मा को लैटर लिखा है। गहलोत ने लैटर में गंभीर वित्तीय संकट का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारियों को होने वाली परेशानियों और वेंडर्स का भुगतान नहीं होने पर सवाल उठाए। गहलोत ने लैटर में लिखा- राजस्थान में सरकारी भुगतान तंत्र जिस तरह ठप पड़ चुका है, उसे लेकर मैं गहरी चिंता के साथ यह लिख रहा हूं। यह किसी एक विभाग या किसी एक योजना की समस्या नहीं है। कर्मचारी, पेंशनभोगी, दुर्घटना पीड़ित परिवार, अस्पताल, दवा विक्रेता और छोटे ठेकेदार, लगभग हर वर्ग आज अपने वाजिब भुगतान के लिए भटक रहा है। प्रदेश के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का ऐसा स्वरूप पहले कभी नहीं देखा गया। गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री को समय रहते इसमें हस्तक्षेप कर लोगों को राहत दिलानी चाहिए। आरजीएचएस योजना में अस्पतालों-मेडिकल स्टोरों का भुगतान अटका गहलोत ने लिखा- आरजीएचएस योजना के तहत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपए का भुगतान महीनों से अटका है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि राज्य मानवाधिकार आयोग को इसे मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए स्वतः संज्ञान लेना पड़ा। कई अस्पतालों ने योजना से जुड़ी सेवाएं सीमित करने या एमओयू समाप्त करने तक की चेतावनी दे डाली। नतीजा यह है कि कैशलेस इलाज का दावा करने वाली योजना में भी कर्मचारियों और पेंशनरों को पहले अपनी जेब से पैसे जमा करवाने पड़ रहे हैं। इस भरोसे पर कि सरकार से भुगतान आने पर बाद में वापसी होगी। ऐसे मामलों में राज्य सरकार को लिखित गारंटी देकर अस्पतालों को पुनर्भुगतान के लिए पाबंद करना चाहिए। एक्सीडेंट में मौत पर पांच लाख की सहायता भी नहीं मिल रही गहलोत ने लिखा- मुख्यमंत्री चिरंजीवी, आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के तहत भी रुपए नहीं मिल रहे हैं। इसके तहत दुर्घटना में मौत होने पर पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए की सहायता राशि मिलनी होती है। यह जानकारी मिल रही है कि सैकड़ों मामलों में दावे स्वीकृत होने के बावजूद पीड़ित परिवारों को भुगतान नहीं मिल पाया है। जिस परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खोया हो, उसे स्वीकृति के बाद भी महीनों राशि के लिए इंतजार करना पड़े, यह राज्य सरकार की असंवेदनहीनता को दिखाता है। रिटायरमेंट के बाद कई महीनों तक कर्मचारियों को नहीं मिल रहे रुपए गहलोत ने लिखा- राज्य के रिटायर्ड कर्मचारियों की हालत भी उतनी ही चिंताजनक है। जीपीएफ, ग्रुप बीमा, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश (पीएल) जैसी रकम, जो कर्मचारी का हक है। रिटायरमेंट के बाद कई महीनों तक जारी नहीं हो रहा। साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी प्रदेश के कई जिलों में कई महीनों से लंबित चल रही है। इससे बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनभोगी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ट्रेजरी से पास हो चुके बिलों का भुगतान नहीं हो रहा गहलोत ने लिखा- ट्रेजरी से पास हो चुके बिलों के भुगतान पर भी कई महीनों से संकट बना हुआ है। इसका सीधा असर सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर पड़ रहा है। हालत यह हो गई है कि छोटे-छोटे ठेकेदारों को अपने वाजिब भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना पड़ रहा है। हजारों श्रमिकों और छोटे उद्यमियों की आजीविका इसी भुगतान संकट के कारण खतरे में है। भुगतान संकट प्रशासनिक लापरवाही नहीं गहलोत ने लिखा- भुगतान का यह संकट केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। जिस राज्य को अपने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और सेवा प्रदाताओं के भरोसे पर खड़ा होना चाहिए, वहां आज यह भरोसा ही डगमगा रहा है। आम आदमी, सरकारी कार्मिक, पेंशनभोगी, ठेकेदार समेत समाज का हर वर्ग आज परेशान है। इस विषय की गंभीरता को समझते हुए समय रहते निर्णय लेना जरूरी है, ताकि प्रदेश के लाखों परिवारों को इस अनावश्यक संकट से राहत मिल सके।

जहां बस जली वहां से 3KM-दूर ट्रॉमा-सेंटर ताले में बंद:3 साल से उद्घाटन ही नहीं हो पाया, हादसे में 8 लोगों की हुई थी मौत

दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बुधवार को हुए हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई थी। जिस जगह हादसा हुआ वहां से 3 किमी दूर NHAI का डेवलप किया ट्रॉमा सेंटर है। इसके चलते एम्बुलेंस समय पर आ गई थी, लेकिन ये ट्रॉमा सेंटर ताले में बंद है। 2023 में बने इस ट्रॉमा सेंटर का अब तक उद्घाटन नहीं हो पाया है। यहां पर एंबुलेंस के अलावा कोई सुविधा विकसित ही नहीं की गई है। इसके कारण कोलवा थाना क्षेत्र में हुए हादसे के बाद घायलों को 25 किलोमीटर दूर दौसा जिला हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी जब भी इस एक्सप्रेस-वे पर हादसा होता है तो घायलों को दौसा जिला हॉस्पिटल ही ले जाना पड़ता है। घटना के अगले दिन भास्कर टीम रेस्ट एरिया में पहुंची जहां ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग तो तैयार है, लेकिन हॉस्पिटल अब तक संचालित नहीं हो रहा है। वहीं NHAI के अधिकारियों का कहना है- ट्रॉमा सेंटर शुरू करने का मामला अभी पाइपलाइन में है। स्वीकृति मिलते ही शुरू कर देंगे। ट्रॉमा सेंटर पर लगा है ताला जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर गुरुवार सुबह साढ़े नौ बजे भास्कर टीम धनावड़ रेस्ट एरिया पहुंची। यहां हाईवे के दोनों तरफ बने ट्रॉमा सेंटर पर एक तरफ के गेट पर ताला लगा था। दूसरे तरफ ट्रॉमा सेंटर का ताला खुला तो था लेकिन अंदर कोई सुविधा नहीं थी। बाहर खड़ी थी सिर्फ एक एम्बुलेंस। एंबुलेंस चालक घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाते हैं ट्रॉमा सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया- कैंपस तो बनाया हुआ है, लेकिन अस्पताल शुरू नहीं हुआ है। एक्सीडेंट में घायलों को जिला अस्पताल ही पहुंचाते हैं। टीम ने रेस्ट एरिया को लीज पर संचालित कर रहे इंडियन ऑयल के बिजनेस मैनेजर मुकेश बैरवा से बात की। मुकेश बैरवा ने कहा- NHAI ने फ्यूचर एरिया के नाम से रिजर्व जगहों को फिलहाल डेवलप नहीं किया है। होटल-ढाबे और पेट्रोल पंप तो हैं लेकिन चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। मुकेश बैरवा ने कहा- NHAI ने फ्यूचर एरिया के नाम से रिजर्व जगहों को फिलहाल डेवलप नहीं किया गया है। होटल-ढाबे और पेट्रोल पंप तो हैं लेकिन चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। अधिकारी बोले- मामला पाइपलाइन में ट्रॉमा सेंटर के संचालन के लिए 3 साल बाद भी टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी है। दौसा में NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर गजेंद्र सिंह ने बताया- रेस्ट एरिया में बने ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के लिए मुख्यालय द्वारा पॉलिसी बनाई जा रही है। फिलहाल अभी पूरा मामला पाइपलाइन में है, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद ट्रॉमा सेंटर संचालन संबंधी गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। तीन साल बाद भी नहीं शुरू हुआ ट्रॉमा सेंटर 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी परिसर से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था। उस समय यह कहा गया था कि रेस्ट एरिया में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया है। जहां पर 24 घंटे डॉक्टर ड्यूटी देंगे। सफर के दौरान किसी की तबीयत खराब हो जाती है तो उसे ट्रॉमा सेंटर लाया जा सकेगा। यहां पर मेल-फीमेल वार्ड अलग से बनाए गए हैं। यहां आईसीयू वार्ड, ऑपरेशन थिएटर भी बनाया गया है। जहां मरीजों का ऑपरेशन भी किया जा सकेगा। एम्बुलेंस भी NHAI की ओर लगाई गई है। हाईवे पर हादसा होता है तो एम्बुलेंस से तुरंत ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को लाया जा सकेगा, लेकिन तीन साल बाद भी चिकित्सा के नाम पर सिर्फ एक एंबुलेंस है। बस ट्रेलर की भिड़ंत में 8 लोगों की हुई थी मौत बुधवार को ऋषिकेश से इंदौर जा रही, हंस ट्रेवल्स की बस दौसा के कोलवा थाना इलाके से निकल रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर पहुंची थी। रात 2:28 बजे पर ड्राइवर को झपकी आई और बस आगे चल रहे ट्रेलर से भिड़ गई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों वाहन एक्सप्रेसवे के बीच में बने डिवाडर पर चढ़ गए थे। कुछ ही मिनटों में बस और ट्रेलर में आग लग गई। दोनों वाहन बुरी तरह जल गए थे। अंदर रखा सामान भी जल गया। हादसे में 6 जिंदा जल गए और 2 की मौत चोट आने से हो गई। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की तस्वीरें… हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 4 दावों में फेल एक्सप्रेसवे पर जयपुर-दिल्ली का सफर:जगह-जगह ढाबे खुले, गड्ढे भी; 120 की रफ्तार वाली गाड़ियों से जानवरों की मौतें एक साल पहले 2 जुलाई 2025 को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जयपुर-दौसा-बांदीकुई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे शुरू किया था। (पढ़ें पूरी खबर) राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर की भिड़ंत हो गई। एक्सीडेंट में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने से और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। (पूरी खबर पढ़िए)

सीमेंट प्लांट के बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का लाठीचार्ज, VIDEO:ट्रेलर की टक्कर से युवक की हुई थी मौत, हंगामे के दौरान पत्नी बेहोश; मुआवजा-स्पीड ब्रेकर की मांग

सीमेंट प्लांट के आगे ट्रेलर की चपेट में आने से एक किसान की मौत हो गई। गुस्साए परिजन और गांव वालों ने सीमेंट फैक्ट्री के गेट के बाहर हंगामा कर दिया। इस दौरान ग्रामीण गेट खोलकर अंदर घुस गए। मौके पर मौजूद पुलिस ने लाठीचार्ज कर मौके से उन्हें खदेड़ा। इस दौरान मृतक की पत्नी बेहोश हो गई। जिसे एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया। घटना झुंझुनूं जिले के गोठड़ा थाना क्षेत्र की है। थाना अधिकारी धर्मेंद्र ने मीणा ने बताया- बुधवार शाम 5 बजे गोठड़ा स्थित श्री सीमेंट प्लांट के अंदर जा रहे एक ट्रेलर की चपेट में आने से एक बाइक सवार किसान की मौत हो गई थी। किसान की पहचान धींवा की ढाणी, टोडपुरा (गोठड़ा) निवासी ओमप्रकाश (43) की मौत हो गई। घटना के बाद शव को पुलिस ने नवलगढ़ जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया। सीमेंट प्लांट के बाहर धरने पर जुटे ग्रामीण आक्रोशित ग्रामीण और परिजन गुरुवार सुबह 7:30 बजे सीमेंट प्लांट के बाहर जुटना शुरू हो गए। मृतक परिजनों का आरोप है कि सीमेंट प्लांट के अंदर जा रहे ट्रेलर ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए बाइक सवार को कुचल दिया। ग्रामीण मृतक के परिजनों को मुआवाजा और दोनों तरफ स्पीड ब्रेकर की मांग कर लगे। धरने की सूचना पर नवलगढ़ डीएसपी सुगन सिंह, थाना अधिकारी धर्मेंद्र जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीण और परिजनों से काफी समझाइश की कोशिश की। मगर गांव वाले अपनी मांग पर अड़े रहे और फैक्ट्री के गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया। सीमेंट प्लांट में घुसे ग्रामीण, पुलिस ने किया लाठीचार्ज 9:30 बजे कंपनी के अधिकारी और ग्रामीणों के प्रतिनिधि मंडल के बीच वार्ता हुई। मगर बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। दोपहर 12:30 बजे तक जब बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंचे तो आक्रोशित गांव वाले सीमेंट प्लांट के गेट को खोलकर अंदर घुस गए। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को वापस गेट के बाहर खदेड़ा। इस दौरान भगदड़ की स्थिति बन गई। इस पर कुछ गांव वालों ने पुलिस पर पथराव किया। 4 थानों का पुलिस जाप्ता पहुंचा थाना अधिकारी ने बताया- विवाद बढ़ने के बाद नवलगढ़, मुकुंदगढ़, गुढ़ा और गोठड़ा थानों से पुलिस जाप्ता बुलाया गया। इस दौरान गांव वाले फिर से सीमेंट प्लांट के गेट के बाद धरने पर बैठ गए। दोपहर 12:45 पर गांव की कुछ महिलाओं ने फिर से गेट के अंदर के अंदर घुसने की कोशिश की। मगर मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान मृतक ओमप्रकाश की पत्नी की तबीयत बिगड़ गई और प्लांट के आगे बेहोश हो गई। जिसे तुरंत एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया। ग्रामीण बोले- जल्द मुआवजा मिले किसान नेता राजेश कटेवा ने कहा- सीमेंट फैक्ट्री के वाहन लापरवाही से चलते हैं। एक किसान उनकी चपेट में आ गया। सीमेंट प्लांट के लिए एक अगल से लेन होनी चाहिए। यहां से हर रोज ग्रामीणों का आना जाना होता है। अब तक 22-25 मौत हो चुकीं हैं। हर बार यहां आकर संघर्ष करना होता है। हम चाहते हैं कि गरीब परिवार को मुआवजा मिले। साथ ही दोनों ओर स्पीड ब्रेकरों का निर्माण हो। परिवार को 11 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी तीन दौर की वार्ता के बाद शाम 4 बजे एसडीएम अजीत सिंह राठौड़ की मौजूदगी में ग्रामीण और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच सहमति बन गई। एसडीएम ने बताया- 5 लाख रुपए की फौरन मदद एनजीओ और ट्रांसपोर्टर के जरिए दी जाएगी। 5 लाख रुपए आयुष्मान योजना में कवर हो रहा है। वहीं एक लाख रुपए क्राउड फंडिंग के जरिए दिलाए जाएंगे। परिवार को कुल 11 लाख की आर्थिक मदद मिलेगी।
नवलगढ़ की ओर जा रहा था बाइक सवार डीएसपी सुगन सिंह ने बताया-मृतक के परिजन और ग्रामीणों से बातचीत की जा रही है। ओमप्रकाश के परिवार में तीन बेटी और दो बेटे हैं। ओमप्रकाश खेती कर परिवार का पालन पोषण करता था। ओमप्रकाश किसी काम से नवलगढ़ की ओर आ रहा था। इस दौरान ट्रेलर ने उसे चपेट में ले लिया। परिजनों की रिपोर्ट मिलने के बाद शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। ट्रेलर और ड्राइवर की तलाश की जा रही है। … यह खबर भी पढ़ें CM आवास जाने से रोका तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया:पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ा, आंसू गैस के गोले छोड़े; 12 से ज्यादा लोगों को चोटें आईं जयपुर में बुधवार शाम घुमंतू और अर्धघुमंतू जातियों की महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। महापंचायत के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रहे थे। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। (पढ़ें पूरी खबर)

'बच्चों के लिए जीने वाला जान कैसे ले सकता है':भाई बोला-बेटी को टीचर बनाना चाहता था, ट्रैक्टर चालाना भी सिखाया; हर इच्छा पूरी करता था

पत्नी और दो बच्चों की हत्या कर किसान गेनाराम के सुसाइड करने बाद भाई को यकीन नहीं है कि वो ऐसा कर सकता है? भाई ने कहा- जो पिता बच्चों की हर छोटी-छोटी खुशी का ख्याल रखता था, उनके भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करता था। समझ ही नहीं आ रहा… जो अपने बच्चों से इतना प्यार करता था, उनके लिए जीता था, वही उनकी जान कैसे ले सकता है। इतना कहते-कहते उनकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से उन्होंने कहा- बेटी को पढ़ाकर टीचर बनाना चाहता था। उसे बेटे और बेटी, दोनों से बहुत प्यार था। वह बच्चों की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने की कोशिश करता था। पहले समझे … क्या है पूरा मामला घटना फलोदी जिले के देचू थाना में 30 जून को हुई थी। पाली जिले के बीठू गांव (रोहट) के रहने वाले किसान गेनाराम (35), उसकी पत्नी पुष्पा (32), बेटी खुशबू (13) और बेटे किशन (10) के शव फतेहगढ़ क्षेत्र स्थित उनके कृषि कुएं पर बने घर में मिले थे। गेनाराम का शव कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला, जबकि पत्नी और दोनों बच्चों के शव पास में खाट पर पड़े थे। 1 जुलाई को चारों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। घटना से एक दिन पहले गेनाराम अपनी पत्नी के साथ बीठू गांव स्थित मंदिर में दर्शन कर उसकी सलामती की कामना करने गया था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई कि गेनाराम ने पहले पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या की, इसके बाद खुद फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। अब पढ़िए … किसान के भाई की जुबानी 1. बेटी को टीचर बनाना चाहता था, ट्रैक्टर चलाना भी खुद सिखाया चेनाराम ने बताया – उनकी भतीजी खुशबू देचू के सरकारी स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ती थी और पढ़ाई में बहुत होशियार थी। गेनाराम को उस पर बहुत गर्व था। वह अक्सर कहता था – मेरी खुशबू पढ़ाई में बहुत तेज है, मैं उसे खूब पढ़ाऊंगा और टीचर बनाऊंगा। एक दिन खुशबू ने ट्रैक्टर चलाना सीखने की जिद की तो गेनाराम खुद उसे ट्रैक्टर चलाना सिखाने लगा। वह मुस्कुराकर कहता था- आज मेरी बेटी ट्रैक्टर चला रही है, कल टीचर बनेगी तो कार भी चलाएगी। उसने बेटे-बेटी दोनों के बेहतर भविष्य के कई सपने देख रखे थे। 2. बच्चों की हर जिद पूरी करता, खेत में झूला भी बांध रखा था चेनाराम ने बताया – गेनाराम अपने दोनों बच्चों पर जान छिड़कता था। बेटे किशन से उसका लगाव कुछ अलग ही था। वह दिन-रात खेत में मेहनत करता, ताकि बच्चों को किसी चीज की कमी न रहे। चाहे कितना भी थककर घर लौटे, लेकिन अगर खुशबू रील बनाने या फोटो खिंचवाने की जिद करती तो कभी मना नहीं करता। खेत में ही बच्चों के लिए झूला बांध रखा था, ताकि वे खेलते रहें और वह काम करते-करते उन्हें देखकर खुश होता रहे।
3. पानी-पूरी की जिद भी तुरंत पूरी की, बच्चों की खुशी में ही खुश रहता था चेनाराम ने बताया – कुछ दिन पहले बेटे और बेटी ने पानी-पूरी खाने की इच्छा जताई थी। इसके बाद गेनाराम बाजार से उनके लिए ढेर सारी पानी-पूरी लेकर आया। उसने बच्चों से हंसते हुए कहा था- पेट भरकर खाओ… मेरे बच्चों की हर इच्छा पूरी होगी। बच्चों की खुशी ही उसकी सबसे बड़ी खुशी थी। 4. पत्नी की तबीयत खराब थी, कुलदेवी के दर्शन की भी सलाह दी थी चेनाराम ने बताया – करीब एक सप्ताह पहले उन्हें पता चला था कि गेनाराम की पत्नी की तबीयत खराब है। उन्होंने गेनाराम से कहा था कि पहले उसे अस्पताल दिखाओ और फिर कुलदेवी के दर्शन भी कर आओ, ताकि सब कुछ ठीक हो जाए। तीनों भाई (गेनाराम, चेनाराम और शिवाराम) देचू क्षेत्र में अपने-अपने कृषि कुओं पर परिवार के साथ रहते थे और खेती-बाड़ी कर परिवार चलाते थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। 5. आज भी यकीन नहीं हो रहा कि ऐसा कैसे हो गया चेनाराम ने कहा – यही वजह है कि पूरा परिवार इस घटना को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। जो पिता बच्चों की हर छोटी-छोटी खुशी का इतना ख्याल रखता था, उनके भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करता था, वही इतना खौफनाक कदम कैसे उठा सकता है। इतना कहते-कहते उनकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से उन्होंने कहा- समझ ही नहीं आ रहा… जो अपने बच्चों से इतना प्यार करता था, उनके लिए जीता था, वही उनकी जान कैसे ले सकता है। —- घटना से जुड़ी खबरें ‘मालूम होता बेटे-बहू की लाश आएगी तो जाने नहीं देती’:मां बोलीं- बहू की सेवा भी मैं कर दूंगी, नहीं माना; अगले दिन मौत की खबर आई पति-पत्नी और बेटा-बेटी का एक चिता पर अंतिम संस्कार:बिलख पड़े लकवाग्रस्त पिता, मां बोलीं-बुढ़ापे में बेटे-पोतों की लाश देखनी पड़ रही पत्नी, बेटे-बेटी की हत्या कर किसान ने सुसाइड किया:महिला पर बताया था भूत-प्रेत का साया; फर्श पर पड़े मिले शव पत्नी और 2-बच्चों की हत्या कर पति ने किया सुसाइड:गेनाराम पति-बच्चों के साथ कल आया था बीठू, मंदिर दर्शन कर शाम को वापस गया, सुबह मिली चारों की बॉडी

क्रिकेटर मानव बोले- एक गलती मैच पलट सकती थी:पहला विकेट मिला तो कॉन्फिडेंस आया; कोहली को बॉल करना सपने जैसा

मानव सुथार टेस्ट में डेब्यू के बाद अपने घर श्रीगंगानगर पहुंचे। यहां जिला क्रिकेट संघ और फैंस ने उनका स्वागत किया। मानव ने मैच में कुल 7 विकेट लिए थे। मानव ने बताया- पहली बार खेलने उतरा तो मन में डर था, एक गलती पूरा मैच पलट सकती है। जैसे ही पहला विकेट मिला तो कॉन्फिडेंस बढ़ता गया। फिर घबराहट भी कम हो गई। मानव ने कहा वो देश के लिए वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं। वैभव सूर्यवंशी को लेकर मानव ने अपना पक्ष रखा। पढ़िए मानव का इंटरव्यू… भास्कर: आपका टेस्ट डेब्यू बेहद यादगार रहा। पहला विकेट लेते समय क्या महसूस हुआ? मानव: बहुत अच्छा फील हुआ। हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वह भारतीय टीम के लिए देश का प्रतिनिधित्व करे। जब मुझे टेस्ट कैप मिल रही थी, तब जो फीलिंग आई, वो शब्दों में बयां नहीं कर सकता। बड़े लेवल पर खेलते समय 100% देते हैं। मन में थोड़ा डर भी होता है कि छोटी-सी कमजोरी मैच पलट सकती है। लेकिन पहला विकेट मिलते ही आत्मविश्वास बढ़ गया और उसी रफ्तार से पूरे मैच में गेंदबाजी की। भास्कर: युवराज सिंह, रविचंद्रन अश्विन और अश्विन जैसे दिग्गजों से क्या सीखा। मानव: टेस्ट मैच के दौरान इन सभी सीनियर्स ने मोटिवेशनल पोस्ट शेयर किए। इससे मेरा हौसला और बढ़ गया। वे लगातार मुझे मोटिवेट करते रहते हैं। टेस्ट की तैयारी के दौरान विराट कोहली को गेंदबाजी करने का मौका मिला। इतने बड़े क्रिकेटर के खिलाफ गेंदबाजी करना मेरे लिए सपने जैसा था। भास्कर: वैभव के बारे में क्या कहेंगे? मानव: वैभव आईपीएल में शानदार रहा है। बेहद टैलेंटेड खिलाड़ी है। मैं उसे फॉलो करता हूं और उससे सीखने की कोशिश करता हूं। भास्कर: भारतीय टीम तक पहुंचना कितना मुश्किल रहा? मानव: मिडिल क्लास फैमिली से आकर यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। 12 साल की कड़ी मेहनत और फोकस के बाद यह मुकाम हासिल किया। मेरा हमेशा लक्ष्य पर फोकस रहा। वर्ल्ड कप खेलना चाहता हूं। बस अपना बेस्ट देते रहूंगा। गुजरात टाइटंस के लिए खेल चुके मानव श्रीगंगानगर शहर की डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन की बिहाणी क्रिकेट एकेडमी में प्रैक्टिस करते थे। उनके सिलेक्शन पर जिला क्रिकेट संघ के कोच धीरज शर्मा, सचिव विनोद सहारण भी काफी खुश हैं। कोच धीरज शर्मा ने बताया कि मानव की बॉलिंग स्किल को देखते हुए उसे लगातार प्रैक्टिस करवाते थे। उनकी फिरकी ने जिला क्रिकेट संघ के कई खिलाड़ियों को पैवेलियन लौटाया। सबसे पहले उसका चयन अंडर-14 क्रिकेट टूर्नामेंट में हुआ था। गुजरात टाइटंस (जीटी) नीलामी में सबसे ज्यादा 38.15 करोड़ रुपए के साथ उतरी। मानव सुथार पर 20 लाख रुपए खर्च किए। पढ़ें ये खबर भी… इंडिया के लिए टेस्ट मैच खेलेगा स्कूल टीचर का बेटा:श्रीगंगानगर के मानव सुथार का सिलेक्शन, बोले-बेस्ट दूंगा; रोते हुए मां बोलीं-मैसेज का इंतजार कर रही थी राजस्थान के मानव डेब्यू-टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच बने:पिता बोले- नाम रोशन कर दिया; मां ने कहा- भगवान से दुआ, बेटा वर्ल्ड कप खेले

जयपुर में दिनदहाड़े मकान से दो गैस सिलेंडर चोरी,VIDEO:स्कूटी से आए बदमाश ने तोड़े लॉक, महज 3 मिनट में वारदात कर भाग निकला

जयपुर में दिनदहाड़े एक मकान से दो गैस सिलेंडर चोरी होने हो गए। स्कूटी पर सवार होकर आए बदमाश ने घर के ताले तोड़े और महज तीन मिनट में वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया। पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है। फिलहाल सांगानेर सदर पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी चोर की पहचान और तलाश में जुटी हुई है। घटना सांगानेर इलाके में गोविंदपुरा के गंगा विहार कॉलोनी में बुधवार दोपहर करीब 1:20 बजे की है। सीसीटीवी कैमरे में आरोपी चोर दोपहर 1:17 बजे स्कूटी से आता है और मकान का लॉक तोड़ नजर आ रहा है। फिर वापस चोर स्कूटी के पास आकर इधर-उधर देखता है, फिर वापस जाकर दो गैस सिलेंडर उठाकर अपनी स्कूटी में रख देता है और फरार हो जाता है। ये वारदात महज तीन मिनट में हुई। पहले देखिए, चोरी की 4 PHOTO’S जॉब करने गया हुआ था मकान मालिक पुलिस ने बताया कि चोरी की वारदात गोविंदपुरा के गंगा विहार निवासी गिर्राज प्रसाद के घर हुई। बुधवार सुबह वह मकान लॉक कर अपनी जॉब पर गए थे। पीछे से दिन-दहाड़े बदमाश ने सूने मकान को चोरी की नीयत से निशाना बनाया। लॉक तोड़कर घुसे बदमाश ने कमरे में रखे दो घरेलू गैस सिलेंडर उठाकर भाग गया। शाम करीब 4:45 बजे घर लौटने पर लॉक टूटे मिले। घर के अंदर से गैस सिलेंडर गायब थे। CCTV फुटेज में कैद हुई करतूत घर के आस-पास लगे CCTV फुटेजों को खंगालने पर चोर की करतूत कैद मिली। वीडियो में दोपहर करीब 1:17 बजे आया और 1:20 बजे सिलेंडर चोरी कर स्कूटी से भाग गया। घर के पास स्कूटी खड़ी कर बदमाश ने पहले लॉक तोड़े। लॉक तोड़कर अंदर कमरे में रखे दो गैस सिलेंडर उठाकर बाहर लाया। स्कूटी के आगे की साइड दोनों गैस सिलेंडर को रखकर चोरी कर ले गया।

राजस्थान में जासूसी के लिए रफीक करता था फंडिंग:सेना की जानकारी के बदले जैसलमेर भेजे पैसे, ई-मित्र संचालक को हैनीट्रैप से फंसाया था

राजस्थान में पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क का खुलासा औरंगाबाद (महाराष्ट्र) से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। 26 जनवरी को पकड़ा गया जैसलमेर का ई-मित्र संचालक झबरा राम सेना की गोपनीय जानकारियां भेज रहा था। इसके बदले मिलने वाली रकम रफीक फर्जी बैंक खातों के जरिए झबरा राम तक पहुंचाता था। जांच में पता चला कि ई-मित्र संचालक सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क आने के बाद हनीट्रैप में फंस गया था। अब दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पाकिस्तान को कौन-कौन सी संवेदनशील जानकारियां भेजी गईं और इस नेटवर्क में राजस्थान के अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। अब पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. जैसलमेर के गांव में ई-मित्र की दुकान चलाता था झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, झबरा राम मेघवाल (28) पुत्र भाना राम, जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के नेडान गांव का रहने वाला है। गांव में उसकी ई-मित्र की दुकान है। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए काम कर रहा था। उसे 26 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह जेल में बंद है। 2. सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसा, फिर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ के अनुसार, झबरा राम करीब 20 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया। वह हनीट्रैप का शिकार हुआ और धीरे-धीरे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। उसने अपने भारतीय नंबर के व्हाट्सएप का ओटीपी भी पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे दिया, जिसके बाद वे उसका व्हाट्सएप अकाउंट संचालित कर उसी के जरिए संवेदनशील जानकारियां सरहद पार भेजने लगे। 3. सेना की गोपनीय जानकारी भेजता था, रफीक संभालता था पैसों का नेटवर्क खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर्स ने झबरा राम को जैसलमेर और पोकरण जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सेना की गतिविधियों, सैन्य वाहनों की आवाजाही, आर्मी कैंपों और रणनीतिक ठिकानों की तस्वीरें व वीडियो जुटाने का जिम्मा दिया था। हर टास्क पूरा करने के बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। यह रकम सीधे भेजने के बजाय आईएसआई ने औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख का इस्तेमाल किया। रफीक ने अपने और करीबियों के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खुलवा रखे थे। पाकिस्तान से पैसा पहले इन्हीं खातों में आता था और फिर रफीक कमीशन काटकर रकम झबरा राम तक पहुंचाता था। 4. तीन मोबाइल इस्तेमाल किए, एयरफोर्स कर्मचारी से भी जुड़े तार जांच में सामने आया कि झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर और हैंडसेट इस्तेमाल करता था। इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) सुमित कुमार को भी जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार सुमित कुमार और झबरा राम दोनों रफीक चांद शेख के इसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े हुए थे। 5. बैंक खातों की जांच से खुल सकते हैं कई राज, आमने-सामने होगी पूछताछ सीआईडी इंटेलिजेंस अब रफीक के पास मिले फर्जी बैंक खातों और झबरा राम के बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि जासूसी से मिली रकम का इस्तेमाल झबरा राम ने पश्चिमी राजस्थान में अपना नेटवर्क बढ़ाने और कुछ स्थानीय लोगों को लालच देकर जोड़ने में किया हो सकता है। जून 2026 के अंत में औरंगाबाद से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क की जांच में जुटी है। — जासूसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए … पाकिस्तानी हैंडलर्स चला रहे थे जैसलमेर के युवक का वॉट्सऐप:हनीट्रैप में फंसकर ई-मित्र संचालक ने ISI को भेजी खुफिया जानकारी; गिरफ्तार जैसलमेर में जासूसी के शक में पकड़े गए ई-मित्र संचालक का वॉट्सऐप पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स चला रहे थे। पूरी खबर पढ़िए

स्कूल बस और ट्रैक्टर की जोरदार टक्कर VIDEO:बाल-बाल बचे बच्चें, ट्रैक्टर के ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा; सीसीटीवी में कैद हुई घटना

एक स्कूल बस और ट्रैक्टर के बीच भीषण टक्कर हो गई। जिसका सीसीटीवी भी सामने आया है। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर के ब्रेक फेल हो गए ​थे। घटना 30 जून की है। ब्रेक नहीं लगने से हादसा हुआ जानकारी के अनुसार, यह घटना 30 जून की है। जिसका CCTV भी सामने आया है। मंडावा सड़क पर एक स्कूली बस जा रही थी। बस एक सड़क के कट से अंदर की ओर जाने के लिए जैसे ही घूमी वैसे ही सामने से आ रहे ट्रैक्टर ने उसमें जोरदार टक्कर मार दी। जिससे ट्रैक्टर पलट गया। स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैक्टर के ब्रेक फेल हो गए ​थे। इस कारण से यह हादसा हुआ। ​टक्कर इतनी जबरदस्त थी बस का संतुलन बिगड़ गया। इसी दौरान सड़क के किनारे से गुजर रहा एक छात्र, ट्रैक्टर को अपनी ओर आता देख अपनी सूझबूझ और फुर्ती दिखाते हुए कूद गया। जिससे वह बाल-बाल बच गया। टक्कर के बाद बस में मची अफरा-तफरी ​घटना के बाद बस में सवार स्कूली बच्चों में हड़कंप मच गया। बच्चे चिलाने लगे। गनीमत ये रही कि इस दुर्घटना में किसी भी बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। आपसी सहमति बनी, मामल दर्ज नहीं घटना के चार दिन इस हादसे का सीसीटीवी सामने आया। स्कूल प्रबंधन ने इस घटना की पुष्टि की है। स्कूल प्रशासन के अनुसार, ट्रैक्टर चालक और स्कूल प्रबंधन के बीच आपसी सहमति बन गई है। जिसके चलते मामले को सुलझा लिया गया है। आपसी समझौता होने के कारण स्कूल संचालक की ओर से इस संबंध में थाने में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है।

स्कूल वैन का रेडिएटर फटा, तीन मासूम झुलसे:पाइप फटने से गर्म पानी का फव्वारा निकला था, 11 बच्चे सवार थे

एक निजी स्कूल वैन (टाटा मैजिक) का रेडिएटर फट गया। पाइप फटने से गर्म पानी का फव्वारा बच्चों पर आ गया। जिससे वैन के केबिन में सवार तीन मासूम छात्र झुलस गए। वैन में 11 बच्चे सवार थे। तीनों छात्र 5 और 9 साल के है। तीनों के चेहरे, सीने और हाथ-पैर बुरी तरह से झुलस गए। हादसा उस समय हुआ जब वैन बच्चों को घर से बैठाकर स्कूल लेकर जा रही थी। मामला जिले के मानपुर कस्बे का गुरुवार सुबह 9 बजे का है। झुलसे छात्र तीसरी और पांचवी क्लास में पढ़ते है। सूचना पर पहुंची पुलिस मानपुर SHO सतीश कुमार ने बताया- सूचना पर पुलिस जाब्ते के साथ सिकराय अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। जानकारी के अनुसार वैन (टाटा मैजिक) के रेडिएटर का पाइप फटने से गर्म पानी बाहर निकल गया। ये छात्र हुए घायल जिससे दीपक (5), आयुष (5) और हार्दिक (9) झुलस गए। एक छात्र तीसरी क्लास और दो छात्र पांचवी क्लास में पढ़ते है। जिनका इलाज जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। किसी भी तरह का मामला दर्ज नहीं किया गया है। घायल छात्रों को अस्पताल पहुंचाया हादसे के बाद घायल छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। एक छात्र की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जिसे मानपुर अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया। जबकि दो अन्य छात्रों का इलाज सिकराय उपजिला अस्पताल में जारी है। सिकराय विधायक ने चिंता सिकराय विधायक विक्रम बंसीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा- विधानसभा क्षेत्र सिकराय की ग्राम पंचायत मानपुर में आज सुबह स्कूल के बच्चों को स्कूल ले जा रहे वैन का रेडिएटर फटने से बच्चों के घायल होने का समाचार अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दुर्घटना में घायल सभी बच्चे शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों तथा उन्हें जल्द स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो। प्रशासन से भी अपेक्षा है कि घायल बच्चों को समुचित उपचार उपलब्ध कराया जाए और दुर्घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
मेरी संवेदनाएँ सभी घायल बच्चों एवं उनके परिजनों के साथ हैं। ईश्वर सभी बच्चों को शीघ्र स्वस्थ एवं सुरक्षित रखें।

ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 15 महिलाएं दबीं, 2 की मौत:दर्द से बिलखने लगीं घायल; तेज चलाने पर ड्राइवर को टोका था

भरतपुर जिले में जानवर को बचाने के चक्कर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। हादसे में ट्रॉली में सवार 15 महिलाएं दब गईं। इनमें से 2 की मौके पर ही मौत हो गई। 13 घायल हो गईं। घायल महिलाएं दर्द से कराहने लगीं। हादसा वैर थाना क्षेत्र के रायपुर गांव में गुरुवार सुबह करीब 8 बजे हुआ। आरोप है कि महिलाओं ने ड्राइवर से ट्रैक्टर धीरे चलाने के लिए कहा था, लेकिन वह स्पीड में दौड़ाता रहा। जिन 2 महिलाओं की मौत हुई हैं, उनमें ड्राइवर की पत्नी भी थी। 12 घायलों का हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। वहीं एक महिला घर चली गई। थाना प्रभारी धीरेंद्र ने बताया- शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिलाएं रायपुर गांव की तरफ खेतों में कृषि कार्य के लिए जा रही थीं। रायपुर गांव के पास ट्रैक्टर के सामने अचानक एक जानवर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मिथलेश (45) पत्नी वीरेंद्र और धौरी (35) पत्नी दान सिंह की मौत हुई है। मृतका धौरी का पति दान सिंह ही ट्रैक्टर चला रहा था। देखिए, हादसे से जुड़ी PHOTOS… पत्नी को हॉस्पिटल लेकर गया ड्राइवर, अन्य महिलाओं को छोड़ गया वैर कस्बा निवासी मिथलेश (मृतका) के पति वीरेंद्र ने बताया कि ट्रैक्टर ड्राइवर दान सिंह का खेत है। गुरुवार सुबह वह अपनी पत्नी धौरी के साथ वैर कस्बे की जाटव बस्ती आया था। यहां से मेरी पत्नी मिथलेश सहित 14 महिलाओं को खेत में मजदूरी करने के लिए लेकर जा रहा था। रास्ते में महिलाओं ने दान सिंह से ट्रैक्टर धीरे चलाने को कहा था, लेकिन उसने रफ्तार कम नहीं की। हादसे के बाद जब ट्रॉली हटाकर महिलाओं को बाहर निकला, तब तक मौके पर मिथलेश और धौरी की मौत हो चुकी थी। वीरेंद्र का आरोप है कि हादसे के बाद दान सिंह अपनी पत्नी धौरी को लेकर तुरंत हॉस्पिटल चला गया, जबकि बाकी घायल महिलाओं को मौके पर ही छोड़ दिया था। 12 महिलाओं का चल रहा इलाज राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से 12 घायलों को वैर हॉस्पिटल पहुंचाया। बाद में इन्हें आरबीएम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। वहीं एक महिला को हल्की खरोंच आई थी। वह उठकर घर चली गई। बयाना गेट जाटव बस्ती (वैर) निवासी मछला (38), आरती (25), मोहिनी (35), बर्फी (65), हरदेई (35), सत्तो (45), गुड्डी (40), नमकीन (38), सरोज (35), गोविंद (45), संतो (48) और आरती (36) का इलाज जारी है। पसलियां टूट जाने से हुई मौत मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. राघवेंद्र ने बताया कि मिथलेश और धौरी के सीने में गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उनकी कई पसलियां टूट गईं। सिर, हाथ और पैरों में भी गंभीर चोटें थीं। सीने और शरीर पर आई इन गंभीर चोटों के कारण दोनों महिलाओं की मौत हुई।