सीनियर टीचर भर्ती के 886 पद घटाए:अब 9 हजार 651 पदों के लिए होगी परीक्षा; 12 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने सीनियर टीचर भर्ती के 886 पद घटा दिए गए है। अब यह भर्ती कुल 9,651 पदों पर की जाएगी। इस परीक्षा में 12 लाख तीस हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन किया है। पूर्व में ये भर्ती 10537 पदों पर होनी थी। 12 से 18 जुलाई 2026 तक होने वाली ये परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। विषयवार पदों की नवीनतम संख्या के संबंध में आयोग ने शुद्धि-पत्र जारी कर दिया है। विज्ञापन की शेष शर्तें पहले की तरह ही यथावत रहेंगी। विस्तृत सूचना एवं शुद्धि-पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर खंड पीठ में आज परीक्षा को स्थगित करने और फॉर्म री-ओपन करने के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान- आयोग सचिव ने कोर्ट में बताया कि विज्ञापन जारी करने की तिथि को प्रभावी नियमों के अनुसार भर्ती के अंतर्गत मूल पदों में अधिकतम 50 प्रतिशत तक की ही वृद्धि की जा सकती है। इससे पहले जारी शुद्धि-पत्र संख्या 10/2026-27 के जरिए पदों की संख्या बढ़ाकर 10,537 कर दी गई थी, जो कि 50 प्रतिशत से अधिक थी। इसको संशोधित करते हुए इस भर्ती के अन्तर्गत नियमानुसार 50 प्रतिशत तक की ही वृद्धि करते हुए पद भरे जाएंगे। इसके लिए शुद्धि-पत्र जारी कर पदों की संशोधित संख्या को अधिसूचित कर दिया जाएगा। शुद्धि-पत्र जारी कोर्ट में सुनवाई के बाद आयोग की ओर से शुद्धि-पत्र संख्या 11/2026-27 जारी भी कर दिया गया है, जिसके तहत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाए गए अतिरिक्त पदों को हटाकर अब कुल पद 9,651 अधिसूचित किए गए हैं। वर्गवार वर्गीकरण जल्द जारी करेंगे इस भर्ती का मूल विज्ञापन (संख्या 07/2025-26) पिछले साल 17 जुलाई 2025 को 10 विषयों के कुल 6,500 पदों के लिए जारी किया गया था। इसके लिए 19 अगस्त से 17 सितंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। बाद में माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार पदों को बढ़ाकर पहले 10,537 किया गया था, जिसे नियमानुसार पुनः संशोधित कर 9,651 किया गया है। वर्गवार वर्गीकरण जल्द जारी किया जाएगा। अलग-अलग सब्जेक्ट की परीक्षाओं को चार ग्रुप में बांटा ग्रुप A- इसमें सोशल साइंस विषय है। इसके अभ्यर्थियों की 12 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सोशल साइंस की परीक्षा होगी। ग्रुप B- इसमें हिंदी विषय है। इस सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की 13 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक हिंदी की परीक्षा होगी। ग्रुप C- इसमें साइंस और संस्कृत सब्जेक्ट है। इन विषयों के सभी अभ्यर्थियों की 14 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक साइंस विषय की परीक्षा होगी। 15 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक संस्कृत विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी। ग्रुप D- इसमें गणित, इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी, सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट रखे गए हैं। इन सब्जेक्ट के सभी अभ्यर्थियों की 16 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक गणित विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 17 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक इंग्लिश और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक उर्दू विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। 18 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक पंजाबी और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी।

गहलोत बोले-रिफाइनरी के इतिहास की सीएम को जानकारी नहीं है:मदन राठौड़ का पलटवार, कहा- 'रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें गहलोत'

रिफाइनरी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच सियासी वार पलटवार का दौर शुरू हो गया है। सीएम भजनलाल शर्मा के बयान पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- ‘सीएम को रिफाइनरी के इतिहास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है।’ गहलोत ने एक्स पर कांग्रेस राज के दौरान रिफाइनरी शिलान्यास की तस्वीरें भी शेयर की हैं। इस पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा- ‘गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें।’ गहलोत और राठौड़ दोनों ने अपने एक्स पर वार पलटवार किए। देखिए, गहलोत की शेयर की गई ये 2 PHOTOS गहलोत बोले- रिफाइनरी को लेकर सीएम को गलत जानकारी पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सीएम पर पलटवार करते हुए एक्स पर लिखा- मुख्यमंत्री पूर्व में रिफाइनरी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर गलत बयान दे चुके हैं। मुख्यमंत्री को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें। गहलोत ने लिखा- मुख्यमंत्री को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास साल 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है। इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई। रिफाइनरी के लिए एचपीसीएल को राजी करना चुनौतीपूर्ण काम था गहलोत ने लिखा- राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए ‘हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। सामान्यत: रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, लेकिन एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह ‘एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड’ (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष का गहलोत के बयान पर पलटवार मदन राठौड़ बोले- गहलोत साहब,रिफाइनरी पर गुमराह करना बंद करें मदन राठौड़ ने एक्स पर लिखा- ‘कागजी शिलान्यास बनाम धरातल का विकास।’ गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना बंद करें। राजस्थान की जनता भ्रामक बयानों और चुनावी स्टंट का अंतर अच्छी तरह जानती है। 2013 में चुनाव से ठीक दो महीने पहले बिना बजट, बिना जमीन और बिना पर्यावरण मंजूरी के केवल वोट बैंक के लिए पत्थर लगाना विकास नहीं, राजनीतिक छलावा था।
कांग्रेस राज में एचपीसीएल से एमओयू पर प्रदेश पर बोझ था मदन राठौड़ ने लिखा- पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हितों को ताक पर रखकर एचपीसीएस से जो एमओयू किया था, वह राजस्थान पर भारी वित्तीय बोझ था। 2014 में भाजपा सरकार ने कड़ा मोलभाव कर राज्य के हजारों करोड़ रुपए बचाए और जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसका वास्तविक ‘कार्यारंभ’ कराया। काम की कछुआ चाल के जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं राठौड़ ने लिखा- लागत बढ़ने का रोना रोने वाले याद रखें कि 2018 से 2023 के बीच अपनी आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण इस प्रोजेक्ट को अटकाने, लटकाने और भटकाने का काम किसने किया? काम की कछुआ चाल के असली जिम्मेदार आज खुद को दूरदर्शी बता रहे हैं। हमारी डबल इंजन सरकार कागजी पत्थरों पर नहीं, धरातल पर काम करने में विश्वास रखती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पचपदरा रिफाइनरी का काम अब पूरी पारदर्शिता और तीव्र गति से पूरा होकर जल्द राजस्थान की प्रगति का नया आधार बनेगा।

'बोर्ड लगा देने को उद्घाटन नहीं कहा जा सकता':राज्यवर्धन बोले- शिलान्यास हुआ तो रिफाइनरी शुरू क्यों नही हुई, 2400 को नियुक्ति पत्र सौंपे

प्रदेश के हर छोर पर विकास हो रहा है। डबल इंजन सरकार की ताकत से पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी लग गई है। ये बात शनिवार को दौसा जिला प्रभारी व उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने टाउन हॉल में आयोजित जिला स्तरीय रोजगार उत्सव कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए कही। पूर्व सीएम गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा- यदि 2013 में शिलान्यास हो गया था, तो फिर रिफाइनरी काम क्यों नहीं कर रही थी। केवल बोर्ड लगा देने को उद्घाटन नहीं कहा जा सकता, जब रिफाइनरी काम करना शुरू करती है तो उसे उद्घाटन कहा जाता है। उन्होंने कहा- इसके अलावा फैक्ट्रियों में अन्य प्रोडक्ट का उत्पादन होगा। कार्यक्रम में 2400 नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। कांग्रेस पर साधा सीधा निशाना मंत्री राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना लगाते हुए कहा- भाजपा सरकार केवल घोषणा करने और नारे लगाने में विश्वास नहीं करती बल्कि जिस कार्य का शिलान्यास करती है, उसका उद्घाटन भी हम ही करते हैं। उन्होंने आगे कहा- हमारी सरकार पूर्व की तरह होटल में बंद रहने और अपने ही विधायकों को पकड़ने वाली सरकार नहीं है। हममें जनता के हितों के लिए काम करने की प्रतिबद्धता है। 50 हजार युवाओं को दिए नियुक्ति पत्र मंत्री राठौड़ ने कहा- प्रदेश के कई हिस्सों में पानी की समस्याओं का भी तेजी से समाधान हो रहा है। 50 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं। जयपुर शहर में बेहतर ट्रांसपोर्टेशन के लिए मेट्रो फेस-टू का शिलान्यास किया गया है। प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है कि साधारण व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सके इसके लिए सुविधाओं में विस्तार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भाजपा सरकार विकास के सभी मार्ग प्रशस्त कर रही है। राठौड़ ने कहा- यह काम अभी ओर गति पकड़ेगा। जब जनता के आशीर्वाद से सरकार बार-बार रिपीट होती है तो काम करने की क्षमता कई गुना तेजी से बढ़ जाती है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने में राजस्थान का बहुत अहम रोल रहेगा। 8 लोगों की मौत पर बोले राठौड़ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 8 लोगों की मौत के मामले में मंत्री राठौड़ ने कहा- एक्सप्रेस-वे के निर्माण संबंधी कमियों को लेकर सम्बंधित ठेकेदार पर कार्रवाई होगी। भाजपा सरकार करप्शन रहित जीरो टॉलरेंस वाली हैं। वहीं दौसा की पेयजल समस्या के सवाल पर मंत्री ने कहा- जल संसाधन मंत्री के नेतृत्व में तत्परता से काम किया जा रहा है। यहां के लोगों ने पानी के लिए वर्षों से इंतजार किया है, वह अब महीनों में रह गया है। नवनियुक्त कार्मिकों को सौंपे नियुक्ति पत्र इससे पहले राज्यसभा सांसद डॉ. अलका सिंह गुर्जर, लालसोट विधायक रामबिलास मीणा, कलेक्टर डॉ. सौम्या झा और एसपी पीयूष दीक्षित ने अलग-अलग विभागों के नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। कलेक्टर ने बताया कि 2400 युवाओं को आमंत्रित किया गया था। ये रहे मौजूद आयोजन को राज्य स्तरीय रोजगार उत्सव से भी वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया था। जहां सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुना। इस दौरान जिला परिषद सीईओ बिरदीचंद गंगवाल, एएसपी शंकरलाल मीणा, एएमई एलसी मीणा, प्रदेश प्रवक्ता प्रिया मीणा, भाजपा नेता सिकंदर वधावन, शहर अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।

ATM में कैश डालने वाले 2 कर्मचारी करोड़ों लेकर फरार:दो दिन तक सिस्टम को नहीं लगी भनक; ड्राइवर के घर खड़ी मिली कैश वैन

झुंझुनूं में एटीएम में कैश डालने वाले दो कर्मचारी 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए लेकर फरार हो गए। तीन दिन तक चली कंपनी की जांच में 28 एटीएम चेक किए गए, जिनमें 9 एटीएम में गड़बड़ी मिली। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि 3 एटीएम में कैश ही नहीं डाला गया। सिर्फ इन्हीं तीन एटीएम में करीब 59.50 लाख रुपए की कमी मिली। आरोप है कि दोनों कर्मचारी बैंक से कैश लेकर निकले, लेकिन पूरी रकम एटीएम में नहीं डाली और फरार हो गए। उनकी कैश वैन बाद में ड्राइवर के घर के बाहर खड़ी मिली। हैरानी की बात यह है कि करीब 48 घंटे तक कंपनी को इस गड़बड़ी की भनक तक नहीं लगी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। जानें कैसे की लूट की तैयारी 1. एक ही गांव से थे दोनों आरोपी हर एटीएम की सुरक्षा दो स्तर पर होती है। पहली तकनीक और दूसरी इंसान। मशीन की सुरक्षा तकनीक करती है, लेकिन मशीन में कैश भरने की जिम्मेदारी कर्मचारियों की होती है। इसी वजह से कैश मैनेजमेंट कंपनियां अपने कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं। जांच के अनुसार मुख्य आरोपी सुमेर सिंह नवंबर 2025 में कंपनी से जुड़ा था। इसके कुछ महीने बाद मार्च 2026 में उसने अपने गांव सुजडोला निवासी संदीप सिंह को भी कंपनी में नौकरी दिला दी। दोनों एक ही टीम में काम करने लगे। रोज एटीएम में कैश भरते-भरते दोनों ने पूरी कैश लोडिंग व्यवस्था समझ ली। किस एटीएम में कितना कैश जाता है, किस मशीन में सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन होता है, कौन-सा एटीएम कितनी जल्दी खाली होता है और कंपनी किस तरह निगरानी करती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से पूरी योजना तैयार हुई। 2. खुद कैश वैन लेकर अलग-अलग एटीएम पहुंचे आरोपी जांच में सामने आया है कि 25 जून को दोनों कर्मचारी कैश लेकर निकले। आरोप है कि कुछ समय बाद उन्होंने ड्राइवर और गनमैन को वापस भेज दिया। इसके बाद दोनों खुद कैश वैन लेकर अलग-अलग एटीएम तक पहुंचे। यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ। कुछ मशीनों में पूरी नकदी नहीं डाली गई। कुछ मशीनों में कम नकदी डाली गई। तीन मशीनों में कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार कैश डाला ही नहीं गया, लेकिन रिपोर्ट में कैश लोडिंग पूरी दिखाई गई। अगर जांच में यह सही साबित होता है, तो यह सिर्फ गबन नहीं बल्कि पूरी कैश लोडिंग व्यवस्था को समझकर किया गया ऑपरेशन माना जाएगा। 3. ज्यादा ट्रांजेक्शन वाले एटीएम चुने ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि जिन एटीएम में रोज सबसे ज्यादा ग्राहक आते थे, वहां कुछ कैश डाल दिया गया। इससे मशीनें तुरंत खाली नहीं हुईं। बैंक को तुरंत अलर्ट नहीं मिला और कंपनी को भी शुरुआत में शक नहीं हुआ। जांच के अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले समय का पूरा हिसाब लगाया। 4. दो दिन की छुट्टी, सिस्टम को नहीं लगी भनक 25 जून के बाद 26 जून और फिर शनिवार व रविवार की छुट्टियां रहीं। लगातार चार दिन तक नियमित निगरानी प्रभावित रही। इस दौरान कई एटीएम धीरे-धीरे खाली होते गए। कुछ ग्राहकों को परेशानी हुई, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला करोड़ों रुपए के गबन का है। 29 जून को जब दोनों कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और उनके मोबाइल बंद मिले, तब कंपनी को बड़ा शक हुआ। 5. तीन दिन की ऑडिट में खुला पूरा मामला इसके बाद जयपुर से विशेष ऑडिट टीम झुंझुनूं पहुंची। 29 जून, 30 जून और 1 जुलाई तक लगातार जांच की गई। कुल 28 एटीएम की जांच हुई। इनमें 9 एटीएम में गड़बड़ी मिली। तीन एटीएम में कैश नहीं मिला, जबकि छह एटीएम में तय राशि से कम नकदी मिली। जांच में कुल 1 करोड़ 13 लाख 3 हजार रुपए की कमी सामने आई। इसके अलावा ग्राहकों के 92 हजार रुपए के लेनदेन भी जमा नहीं किए गए। इस तरह कुल कथित गबन 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए का सामने आया। कैश वैन मिली, लेकिन दोनों कर्मचारी गायब करोड़ों रुपए ले जाने वाली कैश वैन चिड़ावा में ड्राइवर के घर खड़ी मिली। लेकिन जिन दो कर्मचारियों के जिम्मे कैश था, वे दोनों गायब मिले। उनके मोबाइल बंद हैं और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। अब पुलिस मोबाइल लोकेशन, जीपीएस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग लॉग और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पूरी कड़ी जोड़ रही है। एसपी और एएसपी को दी गई जानकारी एएसपी देवेंद्र राजावत ने बताया कि CMS कंपनी बैंकों से नकदी लेकर एटीएम में जमा करने का काम करती है। चिड़ावा थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में सुजडोला गांव के सुमेर सिंह और संदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बैंक से ली गई करीब 1 करोड़ 13 लाख रुपए से ज्यादा की राशि एटीएम में जमा नहीं की और फरार हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें बनाई गई हैं। जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गबन की गई राशि बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।

बेंगलुरु डे-केयर मामला, पैरेंट्स बोले- बच्चों में डर फैला:वॉशरूम जाने से डरते हैं, केयरटेयर की आवाज सुनकर कांप जाते थे

बेंगलुरु के डे-केयर सेंटर में बच्चों से बदसलूकी मामले में नया खुलासा हुआ है। वायरल वीडियो में जिस बच्ची के साथ बेहरमी की गई। पुलिस ने उसके पैरेंट्स से पूछताछ की। मां ने बताया कि उनकी बेटी के मन में डर बैठ गया। वह बाथरूम जाने से मना करती, रोने लगती और वहां से भाग जाती थी। बच्ची में यह बदलाव डे-केयर सेंटर में डालने के दो महीने बाद ही दिखने लगा था। वहीं एक तीन साल के बच्चे के माता-पिता ने बताया कि उनके बेटे के व्यवहार में भी बदलाव दिखा। वह डे-केयर में कुछ केयरगिवर्स की आवाज सुनकर कांप और सहम जाता था। दरअसल 1 जुलाई को बेंगलुरु की आईटी कंपनी कैपजेमिनी के एचएएल कैंपस स्थित डे-केयर सेंटर का वीडियो सामने आया था। जिसमें बच्चों को टॉयलेट में बंद कर दिया गया था। चेहरे पर जेट स्प्रे से पानी डाला गया और वॉशिंग मशीन में बिठाया गया था। मामले में पुलिस ने पहले पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ केस दर्ज किया था। एक को अरेस्ट कर लिया है। घटना से जुड़ी तस्वीर… डे-केयर केस से जुड़े 3 बड़े अपडेट्स… कंपनी ने डे-केयर सेंटर बंद किया कैपजेमिनी ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। एहतियात के तौर पर बेंगलुरु स्थित ऑन-कैंपस डे-केयर सेंटर को फिलहाल अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। कैपजेमिनी के देशभर में 8 शहरों में ऑफिस कैपजेमिनी दुनिया की बड़ी IT कंपनियों में शामिल है। इसका हेडक्वॉर्टर फ्रांस की राजधानी पेरिस में है। कंपनी सॉफ्टवेयर, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी और कंसल्टिंग से जुड़ी सेवाएं देती है। इसके ऑफिस 50 से ज्यादा देशों में है। भारत में इसके 8 शहरों में ऑफिस हैं, जहां करीब 2.3 लाख कर्मचारी काम करते हैं। अब जानिए क्या होते हैं डे-केयर डे-केयर सेंटर वह जगह होती है, जहां छोटे बच्चों की दिनभर देखभाल, सुरक्षा और शुरुआती सीखने की गतिविधियों का ध्यान रखा जाता है। बड़े शहरों में माता-पिता दोनों की नौकरी पेशा हैं तो ऐसे में कपल अपने बच्चों को इन डे-केयर में तय समय के लिए छोड़ देते हैं, यहां बच्चों की देखभाल की है। इसके बदले में हर महीने तय फीस ली जाती है। कई कंपनिया भी अपने डे-केयर सेंटर चलाती हैं, जहां उनके कर्मचारी अपने छोटे बच्चों को नौकरी करने के समय तक छोड़ देते हैं। छुट्टी के बाद बच्चों को अपने साथ ले जाते हैं। कैपजेमिनी की ही तरह अन्य कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को डे-केयर की सुविधा देती हैं। डे-केयर में बच्चों के साथ गलत व्यवहार पर माता-पिता क्या कानूनी एक्शन लें? अगर किसी डे-केयर में बच्चों के साथ गलत व्यवहार होता है तो माता-पिता सबसे पहले घटना की रिपोर्ट संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराएं। साथ ही सेंटर के खिलाफ स्थानीय बाल सुरक्षा अधिकारी या बाल कल्याण समिति से शिकायत करें। कानूनी मदद लेने के लिए किसी वकील से संपर्क करें और बच्चों की मेडिकल जांच भी करवाएं। ऐसी घटनाओं को सोशल मीडिया या मीडिया के माध्यम से भी उजागर किया जा सकता है ताकि अन्य माता-पिता सतर्क रहें। माता-पिता को डे केयर सेंटर की नियमित निगरानी कैसे करें माता-पिता को चाहिए कि वे समय-समय पर अचानक डे केयर विजिट करें ताकि वहां का वास्तविक माहौल देख सकें। बच्चे से प्यार से बातचीत करें और पूछें कि उसका दिन कैसा बीता, किसके साथ खेला और क्या खाया। स्टाफ से रोजमर्रा की दिनचर्या, खाने-पीने और व्यवहार में आए बदलावों की जानकारी लें। अगर संभव हो तो समय-समय पर CCTV फुटेज देखने की आदत डालें। बच्चे के पहनावे, चोट-खरोंच या मूड में अचानक बदलाव को हल्के में न लें। ये संकेत किसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। ………………… ये खबर भी पढें… बेंगलुरु में 2 युवतियों समेत 3 का मर्डर:युवक ने डिनर पर बुलाकर गला काटा, फिजियोथेरेपिस्ट कमरे में मृत मिली; बीच रोड पर युवक की हत्या बेंगलुरु में दो अलग-अलग मामलों में दो युवतियों की हत्या कर दी गई। दोनों युवतियों की हत्या का आरोप उनके बॉयफ्रेंड पर है। एक युवती के परिवार ने बॉयफ्रेंड पर लव जिहाद का आरोप लगाया है। वहीं एक अन्य मामले में तीन लोगों ने बीच रोड पर एक शख्स का मर्डर कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…

सरकार ने 23 नए आतंकी घोषित किए:12 पाकिस्तान के रहने वाले; 11 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी; लिस्ट में कुल 80 नाम

केंद्र सरकार ने शनिवार को 23 लोगों को आतंकी घोषित किया है। सरकार का कहना है कि ये सभी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। सरकार के मुताबिक ये लोग आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ, आतंकी हमलों की साजिश, आतंक के लिए पैसे जुटाने, हथियार पहुंचाने और अन्य मदद करने में शामिल रहे हैं। घोषित 23 आतंकियों में 11 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जबकि 12 पाकिस्तान के रहने वाले हैं। इनमें 7 पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) और 4 पाकिस्तान में रह रहे हैं। इन 23 नामों के जुड़ने के बाद सरकार की तरफ से घोषित आतंकियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। आतंकी 2016 नगरोटा आर्मी कैंप हमला और 2022 सुनजवां हमले से जुड़े सरकार ने जिन जैश आतंकियों को लिस्ट में शामिल किया है। उनमें कुछ 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां हमले से जुड़े बताए जा रहे हैं। 29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा आर्मी कैंप पर सेना की वर्दी पहनकर आए तीन आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 7 जवान शहीद हुए थे, जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए। जांच एजेंसियों ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ बताया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां इलाके में आतंकियों ने CISF के जवानों को ले जा रही बस पर हमला किया। इस हमले में एक CISF जवान शहीद हुआ और कई अन्य घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। बाद में जांच में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी।

अयोध्या राम मंदिर की रेकी करने वाला आतंकी घोषित:आरोपी पाकिस्तान का नागरिक, हाफिज सईद का रिश्तेदार; 23 आतंकियों की लिस्ट में 17 पाकिस्तानी

केंद्र सरकार ने शनिवार को 23 लोगों को आतंकी घोषित किया है। इनमें एक आतंकी वो भी है जो अयोध्या में राम मंदिर और नागपुर में RSS कार्यालय की रेकी में शामिल है। आतंकी की पहचान मोहम्मद मुसादिक के रूप में हुई है। यह हाफिज सईद का रिश्तेदार है। हालांकि ये रेकी मुसादिक ने खुद की या करवाई थी और रेकी कब की गई। इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि लिस्ट में शामिल सभी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। ये लोग आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ, आतंकी हमलों की साजिश, आतंक के लिए पैसे जुटाने, हथियार पहुंचाने और अन्य मदद करने में शामिल रहे हैं। घोषित 23 आतंकियों में 6 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जबकि 17 पाकिस्तानी हैं। इनमें 7 पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) और 10 पाकिस्तान में रह रहे हैं। इन 23 नामों के जुड़ने के बाद सरकार की तरफ से घोषित आतंकियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। कुछ आतंकी 2016 नगरोटा आर्मी कैंप हमला और 2022 सुनजवां हमले से जुड़े सरकार ने जिन जैश आतंकियों को लिस्ट में शामिल किया है। उनमें कुछ 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां हमले से जुड़े बताए जा रहे हैं। 29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा आर्मी कैंप पर सेना की वर्दी पहनकर आए तीन आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 7 जवान शहीद हुए थे, जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए। जांच एजेंसियों ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ बताया था। इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां इलाके में आतंकियों ने CISF के जवानों को ले जा रही बस पर हमला किया। इस हमले में एक CISF जवान शहीद हुआ और कई अन्य घायल हुए। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। बाद में जांच में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी। LeT आतंकी संगठन 39 साल तो JeM संगठन 26 साल पुराना सरकार की तरफ से आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया सवाल-जवाब में… सवाल: सरकार किस कानून के तहत आतंकी घोषित करती है? जवाब: UAPA यानी अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट, 1967 भारत का आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों से निपटने का कानून है। 2019 में संशोधन के बाद सरकार को अधिकार मिला कि वह किसी व्यक्ति को भी ‘आतंकी’ घोषित कर सकती है। पहले सिर्फ आतंकी संगठनों को ही प्रतिबंधित किया जा सकता था। सवाल: किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार किसके पास है? जवाब: केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) के पास यह अधिकार है। गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी कर उस व्यक्ति का नाम UAPA की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) में जोड़ देता है। सवाल: सरकार किस आधार पर किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करती है? जवाब: यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों, आतंकी हमलों, भर्ती, फंडिंग, हथियारों की तस्करी या आतंकियों की मदद में शामिल है, तो उसे आतंकी घोषित किया जा सकता है। सवाल: आतंकी घोषित होने के बाद क्या होता है? जवाब: व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है, उसकी संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा सकती है और उसके वित्तीय लेनदेन व गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकती है। सवाल: क्या व्यक्ति इस फैसले को चुनौती दे सकता है? जवाब: हां। वह केंद्र सरकार से अपना नाम हटाने की मांग कर सकता है। मांग खारिज होने पर वह रिव्यू कमेटी और फिर अदालत का रुख कर सकता है। हालांकि पाकिस्तानी आतंकियों के केस में अदालत में चुनौती देने का सवाल नहीं उठता। ———————— ये खबर भी पढ़ें… जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तानी नागरिक अरेस्ट: LoC से घुसपैठ कर अंदर आ गया था जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना ने रविवार को पाकिस्तान के एक घुसपैठिए को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, इस महीने जिले में पकड़ा गया यह तीसरा पाकिस्तानी घुसपैठिया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान 31 साल के रईस खान के रूप में हुई है। जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का निवासी है। पूरी खबर पढ़ें…

प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी का भूमि विवाद हाईकोर्ट पहुंचा:लोगों को हटाने, महिलाओं-बच्चों को रोकने का आरोप; SDM-SHO तलब

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा से जुड़ा किच्छा का चर्चित 8 एकड़ खान फार्म भूमि विवाद अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जबरन कब्जे और प्रशासन की कथित मिलीभगत के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित एसडीएम और किच्छा कोतवाली के थानाध्यक्ष को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही सिविल कोर्ट के 11 जून के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की कथित मिलीभगत से विवादित खान फार्म पर कब्जा कर लिया गया। याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान का दावा है कि फार्म में रह रहे पुरुषों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और पशुओं को परिसर के भीतर ही रोक दिया गया। हाईकोर्ट ने इन आरोपों पर प्रशासन से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की है। 3 पॉइंट में पढ़िए हाईकोर्ट में क्या-क्या हुआ… 1. अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित एसडीएम और किच्छा कोतवाली के थानाध्यक्ष को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम पर उनका पक्ष सीधे सुना जा सके। 2. सिविल कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर सख्ती
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट की ओर से दिए गए स्थगन (स्टे) आदेश का हर हाल में पालन कराया जाए। साथ ही विवादित संपत्ति की मौजूदा स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं होने देने के निर्देश भी दिए हैं। 3. कब्जे और प्रशासन की भूमिका पर मांगा जवाब
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की कथित मिलीभगत से फार्म पर कब्जा किया गया, वहां रह रहे लोगों को हटाया गया और महिलाओं, बच्चों व पशुओं को परिसर के भीतर ही रोके रखा गया। इन आरोपों पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। अब जानिए क्या है पूरा मामला… 1. वसीयत के आधार पर शुरू हुआ विवाद किच्छा के पिपलिया मोड़ स्थित स्वर्गीय कुलसुम खान के 8 एकड़ के खान फार्म पर मालिकाना हक को लेकर विवाद है। एक पक्ष में प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा और उनके चचेरे भाई व हाईकोर्ट के याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान हैं। दोनों का दावा है कि कुलसुम खान उनकी बुआ थीं और उन्होंने वर्ष 2024 में वसीयत के जरिए यह संपत्ति उनके पक्ष में कर दी थी। दूसरी ओर कुलसुम खान की बहन नसरीन सांगा खुद को जमीन की पुश्तैनी मालिक बताते हुए उस पर अपना अधिकार जता रही हैं। 2. कुलसुम खान के निधन के बाद बढ़ा विवाद दिसंबर 2025 में कुलसुम खान के निधन के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। सायरा वाड्रा पक्ष ने आरोप लगाया कि विवादित फार्म पर जबरन कब्जा कर लिया गया। वहीं नसरीन सांगा का दावा है कि उनका परिवार वर्ष 1939 से इस जमीन पर रह रहा है और वह अपनी पुश्तैनी संपत्ति पर काबिज हैं। 3. मामला प्रशासन और सिविल कोर्ट तक पहुंचा विवाद बढ़ने पर प्रशासन ने दोनों पक्षों को दस्तावेजों के साथ तलब किया। एडीएम पंकज उपाध्याय ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए और स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला न्यायालय करेगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खान फार्म पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया। इसी बीच सिविल कोर्ट ने 11 जून को यथास्थिति/स्थगन (स्टे) के आदेश दिए। विवाद ने लिया राजनीतिक रंग भूमि विवाद जल्द ही राजनीतिक मुद्दा भी बन गया। सायरा वाड्रा पक्ष की ओर से जबरन कब्जे का आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ समर्थकों के साथ खान फार्म पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर ट्रक के नीचे आकर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। दूसरी ओर भाजपा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर प्रियंका गांधी वाड्रा से पूरे मामले पर सार्वजनिक जवाब मांगा और आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों ने जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी भूमि विवाद में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया जाना उचित है। अब इस बहुचर्चित भूमि विवाद में सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। BJP बोली- कब्जे की कोशिश हुई भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 2 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि ऊधम सिंह नगर के किच्छा स्थित खान फार्म एस्टेट की जमीन कुलसुम खान के नाम दर्ज है और वहां उनकी 90 वर्षीय बहन नसरीन रहती हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा इस जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रही हैं। भंडारी ने कहा कि चूंकि मामला सिविल विवाद का है और कानूनी प्रक्रिया के जरिए जमीन पर कब्जा संभव नहीं हुआ, इसलिए कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ करीब 100 लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान 90 वर्षीय नसरीन खान को धमकाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। भाजपा ने इन आरोपों को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा से सार्वजनिक जवाब भी मांगा था। कौन हैं प्रियंका गांधी वाड्रा? प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी की प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बेटी तथा राहुल गांधी की बहन हैं। उनके पति रॉबर्ट वाड्रा व्यवसायी हैं। सायरा वाड्रा, रॉबर्ट वाड्रा के बड़े भाई स्वर्गीय रिचर्ड वाड्रा की पत्नी हैं। इसी रिश्ते से सायरा वाड्रा, प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी हैं। वर्तमान में प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस संगठन और चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें : खान फार्म की जमीन को लेकर दो पक्षों में तनाव: प्रियंका वाड्रा की जेठानी ने बताया अपनी वैध संपत्ति, विधायक ने दी आत्मदाह की चेतावनी ऊधम सिंह नगर के किच्छा में स्थित खान फार्म की जमीन को लेकर दो दावेदार सामने आए हैं। बुधवार को जमीन पर कब्जे को लेकर तनाव का माहौल बन गया। इस दौरान किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता खान फार्म पहुंचे और मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…

सड़क किनारे खड़े तीन भाइयों को पिकअप ने कुचला, मौत:उल्टी होने पर बोलेरो से नीचे उतरे थे, पीछे से चपेट में लिया

जोधपुर के बालेसर में आगोलाई के पास पिकअप ने बोलेरो को टक्कर मारते हुए 3 चचेरे भाइयो को कुचल दिया। हादसे में तीनों की मौत हो गई, बोलेरो में बैठे दो बच्चों को मामूली चोट आई है। गाड़ी में 5 बच्चे, एक महिला समेत 10 लोग सवार थे। हादसा जोधपुर-जैसलमेर नेशनल हाईवे 125 पर शुक्रवार रात 10 बजे हुआ। दयालनाथ की पत्नी को लेकर लौट रहे थे बालेसर थानाधिकारी मूल सिंह भाटी ने बताया-हादसे में जोधपुर जिले के गंगाणा चोखा गांव निवासी राजूनाथ (28) पुत्र सूरम नाथ कालबेलिया, दयालनाथ (27) पुत्र बाबू नाथ और प्रकाश नाथ (25) पुत्र दोलानाथ के रूप में हुई है। मृतकों के चचेरे भाई चनानाथ ने बताया- दयालनाथ की पत्नी पप्पू देवी पीहर गई हुई थी। उसके साथ उसके 5 बच्चे (2 बेटे, 3 बेटी) भी थे। दयालनाथ उन्हीं को वापस लेने के लिए अपने ससुराल टिबड़ी गांव गया था। इस दौरान उसका बड़ा भाई माणकनाथ, राजूनाथ और प्रकाशनाथ भी साथ आए थे। वापस लौटते समय आगोलाई में कालका माता मंदिर के पास नेशनल हाईवे 125 पर राजूनाथ को उल्टी होने पर बोलेरो सड़क किनारे रोक दी। इस दौरान दयाल और प्रकाश भी गाड़ी से उतर गए, तभी पीछे से तेज रफ्तार पिकअप ने बोलेरो और तीनों भाइयों को टक्कर मार दी। दो बच्चों को मामूली चोट आई हादसे में बोलेरो के पास खड़े तीन चचेरे भाइयों की मौत हो गई। दो बच्चे मामूली रूप से घायल हुए, जिन्हें बालेसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया और उनका उपचार किया गया। शवों को मॉर्च्युरी में रखवाया गया है। बालेसर पुलिस सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची। हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन अस्पताल पहुंच गए, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल था। तीनों भाई जोधपुर की खानों में मजदूरी करते थे। दयाल और प्रकाश के दो भाई और दो बहनें है। राजू के एक भाई और 4 बहनें है।

राम मंदिर के बाद केदारनाथ-बद्रीनाथ से चढ़ावा चोरी का आरोप:कर्मचारियों को नोटिस, तीन दिन में जवाब मांगा; जांच के लिए CCTV सुरक्षित रखा

अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर से भी चढ़ावा चोरी का आरोप लग रहा है। धार्मिक संगठन भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को पत्र लिखकर BKTC अध्यक्ष के निजी सहायक पर चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत मिलने के बाद BKTC के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने निजी सहायक समेत सभी ड्यूटी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। मंदिर के सीसीटीवी फुटेज को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति इस मामले को गंभीरता से ले रही है। जिन कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। सरकार मामले में मंदिर समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. वीडियो वायरल होने के बाद उठी आवाज- यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें मंदिर की दान व्यवस्था और दानपात्रों से निकाली जाने वाली राशि को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद धार्मिक संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने BKTC को एक पत्र सौंपा। इसमें BKTC अध्यक्ष के कथित निजी सहायक (PA) और अन्य ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों पर दान के रुपए में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए। 2. अंदर से ही हुई मुखबिरी- संदीप खत्री के मुताबिक, इस कथित गड़बड़ी की खबर मंदिर समिति के अंदरूनी सूत्र ने भैरव सेना संगठन तक पहुंचाई थी। सूचना यह थी कि पिछले कुछ समय से दान की गिनती के दौरान हेरफेर किया जा रहा है। 2 जुलाई 2026 को जैसे ही सीसीटीवी कैमरे में एक कर्मचारी की स्थिति संदिग्ध दिखाई दी, इसकी सूचना तुरंत भैरव सेना को दी गई, जिसके बाद संगठन ने तुरंत एक्शन लेते हुए BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंप दिया। 3. BKTC के कर्मचारियों को नोटिस जारी- बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने संज्ञान लेते हुए आरोपी निजी सहायक समेत सभी ड्यूटी पर तैनात 4 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 3 दिन के अंदर जवाब मांगा है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के लिए विशेष चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में विधि अधिकारी शिशुपाल सिंह बर्तवाल, वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी शामिल हैं। 2 जुलाई की संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। हालांकि, प्रबंधन के अनुसार फुटेज को जूम करने पर तस्वीर धुंधली होने के कारण फिलहाल पहचान पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है। 4. BKTC अध्यक्ष बोले- मेरे पास कोई निजी सचिव नहीं- हल्द्वानी पहुंचे बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस कर्मचारी को अध्यक्ष का ‘निजी सचिव’ या ‘निजी सहायक’ बताया जा रहा है, वह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अध्यक्ष ने साफ किया कि उनका कोई पर्सनल पीए नहीं है। संबंधित कर्मचारी बीकेटीसी का एक नियमित (परमानेंट) सरकारी कर्मचारी है, जो पूर्व में भी तीन अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में वैयक्तिक सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुका है। अध्यक्ष ने आगे कहा कि यदि जांच के बाद आरोप सही पाए जाते हैं और कोई भी कर्मचारी दोषी मिलता है, तो उसे बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या मामले के बाद से ही BKTC पहले से सतर्क थी और परिसर में हाई-रेजॉल्यूशन (उच्च क्षमता) के कैमरे लगाए गए हैं ताकि पूरे परिसर की साफ रिकॉर्डिंग हो सके। 5. निष्पक्ष जांच की मांग और दान की प्रक्रिया- बद्रीनाथ धाम के पूर्व रक्षा प्रवक्ता एवं तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष अमित सती ने मांग की है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। केवल कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि दान-चढ़ावे की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास न टूटे। मंदिर समिति के अनुसार, दानपात्रों से चढ़े हुए रुपए को निकालने और गिनने की एक तय पारदर्शी प्रक्रिया है। इस दौरान मंदिर के अधिकारी, बैंक के कर्मचारी और अन्य अधिकृत लोग मौजूद रहते हैं और यह पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में होती है। गिनती के बाद पूरी राशि को बैंक में जमा कराया जाता है और रसीदों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। BKTC का विवादों से पुराना नाता नए मामले ने BKTC की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ समय से समिति लगातार कई अन्य प्रमुख विवादों को लेकर भी चर्चा में रही है- क्या है BKTC और क्यों हुआ था गठन श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939 के तहत किया गया था। यह कानून मंदिरों के बेहतर प्रशासन और प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम में समिति की संरचना, उसके अधिकार, मंदिर संचालन, व्यवस्था बनाए रखने और नियम बनाने से जुड़ी बातें तय की गई हैं। यानी समिति के पास मंदिरों के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने का अधिकार इसी कानून के तहत आता है। ——————————————————— ये खबर भी पढ़ें… प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी का भूमि विवाद हाईकोर्ट पहुंचा:लोगों को हटाने, महिलाओं-बच्चों को रोकने का आरोप; SDM-SHO तलब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा से जुड़ा किच्छा का चर्चित 8 एकड़ खान फार्म भूमि विवाद अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जबरन कब्जे और प्रशासन की कथित मिलीभगत के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित एसडीएम और किच्छा कोतवाली के थानाध्यक्ष को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही सिविल कोर्ट के 11 जून के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)