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कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा को कला जगत ने किया याद:परंपरा और आधुनिकता पर हुआ सार्थक संवाद, पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें

कलावृत्त एवं राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व प्राचार्य, प्रख्यात चित्रकार एवं कलावृत्त संस्था के संस्थापक कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की कला यात्रा, व्यक्तित्व और उनके रचनात्मक योगदान पर आधारित विशेष व्याख्यान का आयोजन राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के मीटिंग हॉल में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकारों, कला समीक्षकों, शिक्षाविदों, पूर्व विद्यार्थियों और युवा कलाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर डॉ. सुमहेन्द्र के कला-संसार और उनके व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र ने राजस्थानी लघु चित्रकला और आधुनिक कला के बीच एक अद्भुत सेतु का निर्माण किया। उनकी कला विशुद्ध राजस्थानी परंपराओं से जुड़ी होने के बावजूद आधुनिक संवेदनाओं से समृद्ध थी, जिसने उन्हें समकालीन भारतीय कला में विशिष्ट पहचान दिलाई। वरिष्ठ पारंपरिक चित्रकार समदर सिंह खंगारोत ‘सागर’ ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र केवल एक महान चित्रकार ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ शिल्पी, कुशल प्रशासक और प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रत्येक कृति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी और उनका सान्निध्य हर कलाकार के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि डॉ. सुमहेन्द्र ने लघु चित्रकला को परंपरागत सीमाओं से बाहर निकालकर समकालीन अभिव्यक्ति प्रदान की। वरिष्ठ चित्रकार प्रो. भवानी शंकर शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार की सृजनात्मकता समय के साथ विकसित होती है और यही विकास भविष्य की नई परंपरा बनता है। उन्होंने डॉ. सुमहेन्द्र को इस विचारधारा का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके चित्रों में भारतीय परंपरा का आधुनिक रूप स्पष्ट दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों से प्रकृति, संस्कृति और समकालीन विषयों को अपनी कला में स्थान देने का आह्वान किया। चित्रकार एवं कवि अमित कल्ला ने कहा कि कलाकार केवल चित्र बनाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि समाज को नई दृष्टि देने वाला संवेदनशील नेतृत्वकर्ता होता है। उन्होंने भारतीय कला दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रंग, रेखा और रूप केवल दृश्य तत्व नहीं, बल्कि चेतना, भाव और ऊर्जा के प्रतीक हैं। डॉ. सुमहेन्द्र की कला इसी भारतीय दर्शन की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति थी। कलावृत्त के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने युवा कलाकारों से अपने चित्रों में समसामयिक विषयों को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी है। उन्होंने कहा कि युवा कलाकारों को तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपनी रचनाओं में स्थान देना चाहिए। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व छात्र एवं मूर्तिकार महावीर भारती ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से चित्रकला के विद्यार्थी थे, लेकिन वर्ष 1996-97 में कलावृत्त द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मूर्तिकला शिविर में डॉ. सुमहेन्द्र की प्रेरणा से उन्होंने पहली बार पत्थर पर काम किया। उन्होंने कहा कि आज वे दो दशकों से मूर्तिकला के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और इसका सबसे बड़ा श्रेय अपने गुरु डॉ. सुमहेन्द्र को देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी सुमन शर्मा, उनके भाई ओमदत्त शर्मा, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ कलाकार, शिक्षक, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में वर्तमान विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह के अंत में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य अनिल खंडेलवाल ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

भंवरासा बांध से हरिश्चंद्र सागर की नहरों में छोड़ा पानी:मानसून की बेरुखी से सूख रही थीं फसलें; ऊर्जा मंत्री की पहल पर सीएम ने लिया एक्शन

हाड़ौती क्षेत्र में मानसून की बेरुखी के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी, लेकिन अब उन्हें एक बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भंवरासा बांध से हरिश्चंद्र सागर परियोजना की नहरों में पानी छोड़ दिया गया है। इससे खानपुर, सांगोद और पनवाड़ क्षेत्र के किसानों की फसलों को नया जीवन मिल सकेगा। गौरतलब है कि खानपुर, सांगोद और पनवाड़ क्षेत्र में मानसून की सुस्त रफ्तार और बारिश के लंबे अंतराल (खेंच) के कारण खेतों में खड़ी धान की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थीं। इससे किसान बेहद परेशान थे। किसानों की इस गंभीर समस्या और उनकी पीड़ा को देखते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मुख्यमंत्री से फोन पर बात की और उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया। ऊर्जा मंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि पानी के अभाव में किसानों की मेहनत और भारी लागत, दोनों डूबने की स्थिति में हैं। मुख्यमंत्री ने तुरंत भंवरासा बांध से हरिश्चंद्र सागर परियोजना की नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश जारी कर दिए। प्रिंसिपल सेक्रेटरी के आदेश के बाद शुरू हुआ जल प्रवाह
​मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलते ही प्रशासनिक और विभागीय अमला पूरी तरह मुस्तैद हो गया। जल संसाधन विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी अभय कुमार ने उच्च स्तरीय समीक्षा कर तत्काल प्रभाव से नहरों में जल प्रवाह शुरू करने के आदेश जारी किए। विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे बिना समय गंवाए नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित करें। आदेश मिलते ही विभाग स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई और अब नहरों में पानी छोड़ दिया गया है। पूर्व में नहरों में पानी का प्रवाह बंद कर दिया गया था। जिसके बाद से क्षेत्र में बारिश नहीं हुई और खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं। मंत्री नागर ने कहा कि सरकार पूरी तरह किसानों को समर्पित है और संकट की इस घड़ी में हम हर कदम पर उनके साथ मुस्तैद खड़े हैं। किसी भी किसान की मेहनत बेकार नहीं जाने दी जाएगी।

रोटरी क्लब ने पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश:हरियाली के साथ सेवा का संकल्प, तय की नई जनसेवा योजनाएं

बारां में रोटरी क्लब ने रविवार को उम्मेद भवन स्थित अपने परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। वृक्षारोपण के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्लब की आगामी सेवा गतिविधियों की रूपरेखा तय की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संरक्षण का साधन नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी भी हैं। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया। क्लब के कोषाध्यक्ष और कार्यक्रम प्रभारी विवेक जैन ने पर्यावरण संरक्षण को एक निरंतर जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि रोटरी क्लब सेवा कार्यों के साथ-साथ हरित वातावरण बनाने की दिशा में लगातार काम करता रहेगा। समीक्षा बैठक में क्लब की आगामी योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया। इसमें फिजियोथेरेपी मशीन की स्थापना के लिए जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया और प्रकाश टोंगिया को कार्यक्रम मार्गदर्शक मनोनीत किया गया। बैठक में सेवा परियोजनाओं को गति देने, शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने और संगठन विस्तार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में क्लब अध्यक्ष जितेंद्र कुमार गुप्ता और सचिव महेश तिवारी ने मुख्य अतिथि सहित सभी रोटेरियन सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन को सफल बनाने में त्रिवेश बरदानिया, आदित्य जैन, राकेश सेटी, सूर्य प्रकाश विजय, प्रदीप मारू और धीरज कुमार तिवारी सहित कई अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चूरू कार्यकारिणी भंग:मनोज शर्मा नए जिलाध्यक्ष, नई टीम की हुई घोषणा

चूरू में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान स्कूल शिक्षा जिला चूरू की साधारण सभा आयोजित हुई। रविवार को डाइट में हुई इस बैठक में वर्तमान जिला कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। मनोज शर्मा को नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। महासंघ की नई कार्यकारिणी में चिंरजीलाल को जिला मंत्री, राजेश कौशिक को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रदीप पालीवाल को कोषाध्यक्ष और कौशल्या चौधरी को महिला उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। इसके अतिरिक्त, अब्दुल सत्तार परिहार (उपाध्यक्ष पुरुष), योगेश छींपा (उपाध्यक्ष प्रारंभिक), जाकिर हुसैन (सचिव माध्यमिक), धनराज सिंगोदिया (सचिव प्रारंभिक), दशरथ घायल (प्राध्यापक), आनंद सिंह (शारीरिक शिक्षक), नरपत सिंह (संस्कृत शिक्षक) और मनोज जोशी (पंचायत शिक्षक) को भी मनोनीत किया गया। बैठक का प्रथम सत्र मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ। इसमें सदस्यों ने शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी के उत्थान, संस्कारित शिक्षा और नियमित पठन-पाठन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। निवर्तमान जिलाध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने महासंघ की कार्यशैली और संविधान पर चर्चा के बाद वर्तमान कार्यकारिणी भंग करने की घोषणा की। प्रदेश उपाध्यक्ष श्यामसुंदर स्वामी ने प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार नई कार्यकारिणी की घोषणा की। द्वितीय सत्र में वरिष्ठ कार्यकर्ता जगदीश जोशी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों से शिक्षा, शिक्षार्थी और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर भी जोर दिया। तृतीय सत्र में प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी ने नवनियुक्त पदाधिकारियों से हमेशा सक्रिय रहने और कार्यकर्ताओं का सहयोग करने की अपेक्षा की। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्यकर्ता मंगलेश खत्री, मनोज सारस्वत, सूर्यप्रकाश शर्मा, विजेंद्र सैनी, लक्ष्मण दान चारण, मीडिया प्रभारी कन्हैयालाल सैनी सहित सभी खंडों के अध्यक्ष, मंत्री और कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे। बैठक का संचालन प्रभुदयाल सैनी ने किया।

बस-बोलेरो की भिड़ंत में बुआ-भतीजी समेत 3 की मौत:8 गंभीर घायल; तौलियासर भैरूजी के दर्शन कर लौट रहा था परिवार

बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ थाना इलाके में रविवार को बस और बोलेरो में आमने-सामने की भीषण भिड़ंत हो गई। हादसे में बुआ-भतीजी समेत 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा दोपहर करीब 3 बजे नेशनल हाईवे-11 (बीकानेर से जयपुर) पर हुआ। बस बीकानेर से जयपुर जा रही थी, जबकि बोलेरो श्रीडूंगरगढ़ की तरफ से आ रही थी। सभी घायल बोलेरो में सवार थे, जिन्हें पीबीएम हॉस्पिटल रेफर किया गया है। देखिए- भीषण हादसे की 2 तस्वीरें थानाधिकारी कश्यप सिंह ने बताया- बोलेरो सवार एक परिवार के लोग तौलियासर भैरूजी के दर्शन कर नापासर के गुंसाईसर लौट रहे थे। इसी दौरान नेशनल हाईवे पर बस से भिड़ंत हो गई। बोलेरो ड्राइवर दानीराम (45) के साथ ही गाड़ी में बैठी मेघा (16) और उसकी भतीजी शिवांगी (5) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में बोलेरो सवार 8 अन्य लोग घायल हो गए। सभी घायलों को पीबीएम हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। घायलों में 2 की पहचान अमिता और निधि के रूप में हुई है, जबकि 2 साल के बच्चे समेत अन्य घायलों की पहचान करने की जा रही है। ……………….. ये खबर भी पढ़ें… उदयपुर में तेज रफ्तार कार ट्रक में घुसी,पति-पत्नी की मौत:गाड़ी के अंदर ही फंसे रह गए शव, एक साल पहले हुई थी शादी
उदयपुर में गोगुंदा-पिंडवाड़ा हाईवे पर सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार हाईवे पर आगे चल रहे ट्रक में घुस गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार का आगे का पूरा हिस्सा चकनाचूर हो गया। (पूरी खबर पढ़ें)

पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस का बूथ फोकस:भाजपा को 'पर्ची सरकार' बताया, बीएपी पर साधा निशाना

डूंगरपुर के सीमलवाड़ा में रविवार को हुई कांग्रेस की जिला स्तरीय बैठक में आगामी पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों को लेकर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति बनाई गई। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार को “पर्ची सरकार” बताते हुए उसकी नीतियों पर हमला बोला, जबकि भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) पर आदिवासी समाज को गुमराह करने के आरोप लगाए। पंचायत चुनाव की तैयारी पर संगठन का जोर सीमलवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा मुख्य अतिथि रहे, जबकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष गणेश घोघरा ने अध्यक्षता की। बैठक में पूर्व विधायक शंकरलाल अहारी, पूर्व मंत्री शंकरलाल यादव, असरार अहमद पठान, प्रियकांत पंड्या, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष रेखा देवी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विनोद कटारा के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि पंचायतीराज चुनाव को देखते हुए ब्लॉक अध्यक्षों को संगठनात्मक निर्णय लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता दी जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर संगठन को प्रभावी बनाया जा सके। बूथ स्तर तक सक्रिय होंगे कार्यकर्ता जिला कांग्रेस अध्यक्ष गणेश घोघरा ने कहा कि संगठन में नवाचार करते हुए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार “पर्ची सरकार” बन चुकी है और मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर कर ग्रामीणों को परेशानी में डाल दिया है। साथ ही प्रदेश में अकाल जैसे हालात का जिक्र करते हुए सरकार को संवेदनहीन बताया। बीएपी पर आदिवासी समाज को गुमराह करने का आरोप घोघरा ने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भील प्रदेश, कड़ाना बांध का पानी गैंजी घाटा तक पहुंचाने और युवाओं को रोजगार देने जैसे कई वादे किए गए, लेकिन वर्षों बाद भी पूरे नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएपी ने आदिवासी समाज को गुमराह करने का काम किया है। सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलेगी जिम्मेदारी पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने कहा कि संगठन के पदाधिकारियों के कार्यों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। उन्होंने पंचायतीराज चुनाव में कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए सभी से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। लोकतंत्र और आदिवासी समाज पर भी हुई चर्चा पूर्व मंत्री शंकरलाल यादव ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। वहीं पूर्व विधायक शंकरलाल अहारी ने क्षेत्र में अकाल जैसी स्थिति का उल्लेख करते हुए आदिवासी समाज को पुनः कांग्रेस से जोड़ने की आवश्यकता बताई। बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

अच्छी बारिश के लिए घास भैरू की निकाली सवारी:मानसून की सुस्ती ने किसानों की बढ़ाई चिंता, भीषण गर्मी और उमस से लोग परेशान

बारां जिले में मानसून की सुस्ती से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अच्छी बारिश की कामना को लेकर रविवार को शहर समेत जिलेभर में घास भैरू की सवारी निकाली गई। पिछले कई दिनों से जिले में अच्छी बारिश का इंतजार है। बारिश का दौर शुरू नहीं होने से खरीफ फसलों की बुवाई करने वाले किसान परेशान हैं। रविवार को भी जिलेभर में मौसम का मिलाजुला असर रहा; कई जगहों पर बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई।
शहर में दिनभर बादल छाए रहने के बाद भी बारिश नहीं होने से उमस और गर्मी का प्रभाव बना रहा। शहर में श्रीजी चौक से घास भैरू की सवारी शुरू हुई। यह सवारी मंडोला वार्ड से दीनदयाल पार्क, प्रताप चौक, धर्मादा चौराहा और अस्पताल रोड से होते हुए वापस श्रीजी चौक पर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
लोगों ने घास भैरू की पूजा-अर्चना कर अच्छी बारिश की कामना की। शहर के समीप नलका और मेलखेड़ी छापर में भी घास भैरू की सवारी निकाली गई।

हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर रहेगी हर तीसरे दिन नजर:मुख्य सचिव ने दिखाई सख्ती, सुरक्षित प्रसव के लिए नई रणनीति, 24 घंटे तक होगी विशेष निगरानी

राजस्थान में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और हर गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की समीक्षा बैठक लेकर कहा- हर हाई रिस्क गर्भवती महिला की व्यक्तिगत निगरानी की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलों में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की नामवार सूची तैयार कर उसे संबंधित एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) से जोड़ा जाए। प्रत्येक महिला की नियमित मॉनिटरिंग हो और जरूरत पड़ने पर समय रहते उसे बड़े अस्पताल में रेफर किया जाए। उन्होंने सोमवार सुबह सभी जिलों में एएनएम की बैठक लेकर हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। प्रसव के बाद 24 घंटे तक विशेष निगरानी मुख्य सचिव ने कहा- अस्पतालों में प्रसव के बाद पहले 24 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए धात्री महिलाओं की लगातार निगरानी की जाए, उनके पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए और किसी भी प्रकार की जटिलता सामने आने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए। बैठक में लेबर रूम प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और रेफरल सिस्टम जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) का सख्ती से पालन करें, ताकि प्रसव के दौरान किसी तरह की लापरवाही न हो। इन जिलों में सबसे अधिक हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आया कि जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिलों में सबसे अधिक हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं चिन्हित हुई हैं। इन जिलों में विशेष निगरानी और अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम या उससे कम है या जो गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं और उनकी डिलीवरी की तारीख नजदीक है, उन्हें समय रहते ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम इंजेक्शन या आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराई जाए। ऐसी महिलाओं की सूची जिला स्तर पर तैयार रखी जाए और संबंधित एएनएम हर तीसरे दिन उनकी स्वास्थ्य जांच करे। सुरक्षित प्रसव की पहले से होगी तैयारी प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा- केवल इलाज ही नहीं, बल्कि प्रसव की पूर्व योजना (Birth Planning) भी बेहद जरूरी है। गर्भवती महिला का किस अस्पताल में प्रसव होगा, जरूरत पड़ने पर रेफरल कैसे होगा और सभी जरूरी जानकारियां ममता कार्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज हों, यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि चिकित्सा विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, उनकी नियमित निगरानी और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि हर गर्भवती महिला को समय पर उपचार मिले, जटिलताओं की समय रहते पहचान हो और सुरक्षित संस्थागत प्रसव के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

सीकर में स्टूडेंट ने किया सुसाइड:2 साल से हॉस्टल में रहकर कर रहा था तैयारी; स्टाफ ने फंदे से लटके देखा

सीकर में स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया। सुबह हॉस्टल का स्टाफ उसे जगाने पहुंचा तो अंदर से दरवाजा बंद था। कई बार गेट खटखटाने के बाद भी वह नहीं उठा। हॉस्टल स्टाफ ने खिड़की से झांककर देखा तो फंदे से लटका हुआ था। हॉस्टल कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल भिजवाया। पुलिस के अनुसार, छात्र ने पहली बार नीट की परीक्षा दी थी। वह दो साल से हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रहा था। छात्र जयपुर ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला था। कमरे में अकेला रहता था छात्र, पास में मोबाइल भी नहीं था SHO उद्योग नगर राजेश कुमार ने बताया- पुलिस को मौके से कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि छात्र हॉस्टल के कमरे में अकेले ही रहता था। वह अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता था। छात्र के परीक्षा में कितने नंबर आए थे, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। परिवार ने मामले में किसी तरह की रिपोर्ट नहीं दी है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। — यह खबर भी पढ़िए.. दो भाइयों ने एक साथ क्लियर किया NEET:जयपुर के उपलक्ष्य की तीसरी रैंक, बोले- खुद को रिफ्रेश करने के लिए कॉमेडी शो देखता था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार रात NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी किया। जयपुर के उपलक्ष्य गोयल ने देशभर में तीसरी रैंक और अलवर के गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की। अलवर के दो भाई यशवर्धन (146वीं) और चिराग यादव (1096वीं) ने एक साथ नीट क्लियर किया है। पढ़ें पूरी खबर

दिव्यांग बेटे के लिए बनाई स्पेशल कुर्सी, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित:स्कूलों ने एडमिशन देने से इनकार किया तो इनोवेशन किया, मिला पेटेंट

एक मां अपने बच्चे के दर्द को सबसे करीब से महसूस करती है। पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र के हेमलियावास खुर्द निवासी साइकोलॉजिस्ट नेहा सोलंकी ने भी अपने बेटे की तकलीफ को अपनी ताकत बना लिया। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे के लिए उन्होंने ऐसी विशेष कुर्सी तैयार की, जिस पर दिव्यांग बच्चे बिना किसी सहारे के सुरक्षित और आरामदायक तरीके से बैठ सकें। उनके इस इनोवेशन ने उनके बेटे की जिंदगी आसान बनाई, साथ ही देशभर के विशेष बच्चों के लिए उम्मीद भी बनी हैं। अब नेहा सोलंकी का नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने वर्ष 2026 के ‘ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन’ के लिए उनका चयन किया है। पूरे देश से चुने गए 26 इनोवेटर शख्सियतों में उन्हें स्थान मिला है। उन्हें 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी। बेटे की बीमारी बनी प्रेरणा
जयपुर निवासी नेहा सोलंकी की करीब 15 साल पहले पाली जिले के हेमलियावास खुर्द निवासी डॉ. अभिषेक भाटी से शादी हुई। शादी के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशियां आईं, लेकिन 6 महीने बाद पता चला कि उनका बेटा सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। नेहा बताती हैं कि इस बीमारी में मस्तिष्क का विकास होता है, लेकिन शरीर की गतिविधियों पर पूरा नियंत्रण नहीं रह पाता। बच्चे को बैठने, उठने और संतुलन बनाए रखने में काफी कठिनाई होती है। बेटे की परेशानी ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया और यहीं से दिव्यांग बच्चों के लिए कुछ करने का संकल्प जन्मा। स्कूलों के इनकार के बाद इनोवेशन करने का फैसला लिया
वर्तमान में जोधपुर में रह रही नेहा बताती हैं कि वर्ष 2023 में बेटे के स्कूल में प्रवेश के लिए कई निजी स्कूलों के चक्कर लगाए, लेकिन अधिकांश स्कूलों ने उसकी शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए प्रवेश देने से मना कर दिया। आखिरकार एक स्कूल ने शर्त रखी कि यदि बच्चा सुरक्षित तरीके से बैठ सके तो प्रवेश दिया जाएगा। इसी चुनौती ने नेहा को विशेष कुर्सी बनाने की प्रेरणा दी। 9 महीने की मेहनत से तैयार हुई स्पेशल कुर्सी
नेहा ने करीब 9 महीने के रिसर्च और मेहनत के बाद ऐसी विशेष कुर्सी तैयार की, जिस पर सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चा बिना किसी सहारे के सुरक्षित बैठ सकता है। इस कुर्सी में बच्चे के शरीर को जरूरी सपोर्ट मिलता है, जिससे गिरने का खतरा भी नहीं रहता। इसी कारण उनका 10 वर्षीय बेटा सामान्य बच्चों के साथ स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। यह कुर्सी 3 से 12 साल तक के बच्चों के लिए उपयोगी है और इसका पेटेंट भी भारत सरकार से प्राप्त हो चुका है। दिव्यांग बच्चों के लिए बनाई कंपनी
अपने बेटे के अनुभव के बाद नेहा ने एक कंपनी की स्थापना की, जो विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए सहायक उपकरण विकसित करती है। अब तक वे दो प्रकार की विशेष कुर्सियां विकसित कर चुकी हैं। इसके अलावा ऐसे कई अन्य उपकरणों पर भी काम चल रहा है, जिनकी मदद से दिव्यांग बच्चे रोजमर्रा के कार्य अधिक आत्मनिर्भर होकर कर सकें। नेहा के पति एनजीओ चलाते है, जिसके जरिए नशा मुक्ति केंद्र का भी संचालन किया जाता है।