बॉम्बे हाईकोर्ट जज बोले-सरकार का विरोध करने पर केस क्यों:लोगों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा; पुलिस PM-CM की नौकर नहीं

बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने गुरुवार को कहा कि पुलिस सिर्फ इसलिए लोगों को शहर-इलाके से नहीं निकाल सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है या सरकार के खिलाफ नारे लगाए हैं। उन्होंने कहा- विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। पिटीशनर ने अभी ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए देश निकाला ऑर्डर क्यों? सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद के मामले में जस्टिस जामदार ने कहा- सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे, तो क्या आप केस कर देंगे? सईद अहमद पर सरकार के विरोध से जुड़े केस मामला SDPI के महासचिव सईद अहमद से जुड़ा है। मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ एक साल का देश निकाला आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ सईद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सईद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद समेत कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे थे। जस्टिस जामदार ने पूछा कि सईद के खिलाफ दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर करने का आदेश क्यों दिया गया? इनमें ज्यादातर मामले केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन और धरना-प्रदर्शन से जुड़े थे। अहमद के खिलाफ देश निकाला का आदेश रद्द जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि सरकार के फैसलों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना किसी व्यक्ति को देश निकाला देने का आधार नहीं हो सकता। संविधान नागरिकों को अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सईद अहमद के खिलाफ जारी एक साल के देश निकाला आदेश को रद्द कर दिया और पुलिस व प्रशासन के दोनों आदेश निरस्त कर दिए। जस्टिस बोले- पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही जस्टिस जामदार ने कहा- दो दिन पहले मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक बच्चे विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी और स्टेट असेंबली में इस पर चर्चा हो रही थी। एक प्रेसाइडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाता है और वह कैसे एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चला गया, यह क्या है? सईद को भी साइड बदल लेनी चाहिए। वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। तुम्हारे (सईद) पास कुछ FIR हैं। केस बदलने के बारे में सोचो, वॉशिंग मशीन है। ——————————————- पूरी खबर पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक, ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पूरी खबर पढ़ें…

श्रीगंगानगर पुलिस की हिरासत से चोर फरार:कोर्ट में पेश करने ले जा रही थी पुलिस, जिलेभर में कराई नाकाबंदी

श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर में पुलिस हिरासत से चोरी के दो आरोपी फरार हो गए। जिलेभर में अलर्ट जारी कर नाकाबंदी कर दी गई है, लेकिन आरोपियों का अब तक कोई अता-पता नहीं लगा है। जानकारी अनुसार- श्रीकरणपुर शहर के वार्ड-18 स्थित एक दुकान में चोरी करने वाले दोनों आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किया था। शाम को पुलिस दोनों आरोपियों को श्रीकरणपुर कोर्ट में पेश करने ले जा रही थी। इसी दौरान दोनों आरोपी पुलिस को चकमा देकर भाग गए। फरारी की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित जगहों पर सिविल ड्रेस पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। सर्कल सीओ पुष्पेंद्र सिंह और सीआई सीर कौर ने रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। श्रीकरणपुर स्टेशन पर सघन तलाशी फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने श्रीकरणपुर रेलवे स्टेशन पर भी सघन तलाशी अभियान चलाया। करणपुर से श्रीगंगानगर जाने वाली ट्रेन को स्टेशन पर करीब 15 से 20 मिनट तक रोका गया। पुलिस टीम ने प्रत्येक डिब्बे की गहन जांच की और यात्रियों से पूछताछ की, लेकिन दोनों आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद ट्रेन को श्रीगंगानगर के लिए रवाना कर दिया गया। एसपी हरिशंकर ने बताया- फरार आरोपियों की तलाश में जिलेभर में पुलिस टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। नाकाबंदी की गई है और जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अब 27 अगस्त तक चलेगी बाड़मेर-हरिद्वार स्पेशल ट्रेन:12 अतिरिक्त फेरे होंगे, रवाना और ठहरने के समय में नहीं हुआ बदलाव

सावन और त्योहारी सीजन में बढ़ती यात्री भीड़ को देखते हुए रेलवे ने बाड़मेर-हरिद्वार द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के संचालन की अवधि बढ़ा दी है। अब यह ट्रेन 12 अतिरिक्त फेरों के साथ 27 अगस्त तक चलेगी। इससे हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं एवं अन्य यात्रियों को राहत मिलेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 04811/04812, बाड़मेर-हरिद्वार-बाड़मेर द्वि-साप्ताहिक स्पेशल के संचालन में 12-12 अतिरिक्त ट्रिप बढ़ाई गई हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन संख्या 04811,बाड़मेर-हरिद्वार स्पेशल प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को संचालित होती है। पहले इसका संचालन 16 जुलाई तक निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर अब 20 जुलाई से 27 अगस्त तक कर दिया गया है। इस अवधि में ट्रेन 12 अतिरिक्त फेरे लगाएगी। समय और ठहराव में नहीं किया गया बदलाव इसी प्रकार ट्रेन संख्या 04812 हरिद्वार-बाड़मेर स्पेशल प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को चलेगी। पहले इसका संचालन 17 जुलाई तक निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर अब 21 जुलाई से 28 अगस्त तक कर दिया गया है। इस अवधि में भी ट्रेन 12 अतिरिक्त फेरे संचालित किए जाएंगे। रेलवे के अनुसार, ट्रेन के समय,मार्ग,ठहराव और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन स्टेशनों पर है ठहराव यह स्पेशल ट्रेन मार्ग में बायतू, बालोतरा, समदड़ी, दुंदाड़ा, लूणी, जोधपुर, गोटन, मेड़ता रोड, नागौर, नोखा, बीकानेर, लालगढ़, लूनकरनसर, अरजनसर, रजियासर, सूरतगढ़,पीलीबंगा, हनुमानगढ़, मंडी डबवाली, बठिंडा, धुरी, अंबाला कैंट और सहारनपुर स्टेशनों पर ठहरती है।

राजस्थान UCC समिति सदस्य शुचि चौहान जोधपुर दौरे पर:वीसी से करेंगी जिला स्तरीय जनसुनवाई, कलेक्टर ने तैयारियों को लेकर दिए निर्देश

राजस्थान समान नागरिक संहिता-2026 (यूसीसी) की प्रारूप समिति की सदस्य डॉ. शुचि चौहान 6 और 7 जुलाई को जोधपुर संभाग मुख्यालय के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वे संभाग स्तरीय जनसुनवाई करेंगी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से जिलावार सुनवाई भी करेंगी। तैयारियों को लेकर दिए निर्देश
फलोदी कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने इस कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि फलोदी जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में 6 जुलाई को वीसी के माध्यम से जनसुनवाई कार्यक्रम से जुड़ा जाएगा। सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संभाग स्तर की जनसुनवाई आयोजित होगी। इसमें जनप्रतिनिधि, समस्त धर्मों के प्रतिनिधि, सामाजिक विज्ञान और विधि पृष्ठभूमि वाले शिक्षाविद्, विधिवेत्ता, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि वीसी के माध्यम से उपस्थित रहेंगे। फलोदी जिले की सुनवाई के लिए दोपहर 3:30 बजे से पंजीकरण शुरू होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से 6 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की जाएगी। इस जनसुनवाई के दौरान आमजन अपनी अभ्यर्थनाएं प्रस्तुत कर सकेंगे।

3.5 लाख कर्मचारियों की जानकारी होगी जांच के बाद लॉक:बिना परमिशन के नहीं होगा बदलाव; गलत सूचना पर शिक्षा विभाग करेगा कार्रवाई

स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों और शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नया आदेश जारी किया है। अब हर कार्मिक को शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज अपनी पूरी जानकारी खुद जांचनी होगी और उसे प्रपत्र-10 में लॉक करना होगा। इसके बाद विभाग उस जानकारी का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करेगा। टोंक समेत पूरे प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख कार्मिक इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इसके आदेश जारी किए हैं। अगर कोई कार्मिक तय प्रक्रिया पूरी नहीं करता या गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 10 जुलाई तक अपनी पूरी जानकारी जांचकर करनी होगी लॉक शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ ही शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी शाला दर्पण पोर्टल पर अपने स्टाफ लॉगिन में जाकर स्टाफ प्रोफाइल के तहत उपलब्ध प्रपत्र-10 की सभी जानकारियां अपनी सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड के अनुसार जांचेंगे। इसके बाद व्यक्तिगत, शैक्षणिक, सेवा, पदोन्नति, पारिवारिक, बैंक, प्रशिक्षण समेत 15 अलग-अलग फॉर्मेट को 10 जुलाई तक लॉक करना होगा। 15 जुलाई तक अधिकारी करेंगे रिकॉर्ड से मिलान कार्मिक द्वारा जानकारी लॉक करने के बाद उसकी जांच होगी। प्रारंभिक शिक्षा के स्कूलों में पीईईओ और यूसीईईओ, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान प्रपत्र-10 में दर्ज जानकारी का सेवा रिकॉर्ड से मिलान करेंगे। शिक्षा विभाग के कार्यालयों में संबंधित कार्यालयाध्यक्ष यह सत्यापन करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी करनी होगी। सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में हमेशा के लिए रखा जाएगा प्रपत्र सत्यापन पूरा होने के बाद प्रपत्र-10 की प्रिंट कॉपी निकाली जाएगी। इस पर कार्मिक और संस्था प्रधान के हस्ताक्षर होंगे और इसे मूल व्यक्तिगत पत्रावली में रखा जाएगा। इसमें सत्यापन करने वाले अधिकारी का नाम और तारीख भी दर्ज होगी। यह दस्तावेज रिकॉर्ड का स्थायी हिस्सा रहेगा। बाद में यदि किसी जानकारी में बदलाव होता है तो उसकी संशोधित प्रति भी रिकॉर्ड में जोड़नी होगी। रिकॉर्ड और पोर्टल की जानकारी एक जैसी करना है उद्देश्य शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया – विभाग चाहता है कि शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज सभी जानकारियां सेवा पुस्तिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाएं। इसी उद्देश्य से सभी कार्मिकों को पहले अपनी जानकारी जांचकर लॉक करने और फिर विभागीय स्तर पर उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लॉक होने के बाद सीधे नहीं बदल सकेंगे रिकॉर्ड एक बार प्रपत्र-10 लॉक और सत्यापित होने के बाद उसमें सीधे कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यदि भविष्य में किसी जानकारी में बदलाव की जरूरत पड़ती है तो संस्था प्रधान या कार्यालयाध्यक्ष को संबंधित ब्लॉक कार्यालय में दस्तावेजों के साथ आवेदन देकर पहले प्रपत्र-10 अनलॉक कराना होगा। इसके बाद ही नई जानकारी दर्ज कर दोबारा लॉक और सत्यापन किया जाएगा। इसलिए विभाग ने सभी कार्मिकों को जानकारी सावधानी से भरने और जांचने के निर्देश दिए हैं। प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों पर भी लागू होंगे नियम जो कर्मचारी नियम-144 (क) के तहत दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, उन्हें भी शाला दर्पण के स्टाफ लॉगिन से अपनी जानकारी भरनी होगी। उनके प्रपत्र-10 का सत्यापन उनके अंतिम विद्यालय या कार्यालय के संस्था प्रधान, कार्यालयाध्यक्ष या पीईईओ द्वारा किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने राज्यपाल के आदेश पर लगाई रोक:दिव्यांग यूनिवर्सिटी के कुलपति देव स्वरूप की बर्खास्तगी रोकी, भर्ती में धांधली के लगे थे आरोप

राजस्थान के राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े द्वारा जारी बर्खास्तगी के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इससे राजस्थान यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में धांधली के आरोप में हटाए गए कुलपति देव स्वरूप को बड़ी अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस रेखा बोराणा की अदालत ने बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति पद से देव स्वरूप को हटाने के आदेश पर रोक लगाई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- प्रथमदृष्ट्या बर्खास्तगी का यह आदेश पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण और मनमाना प्रतीत होता है। ऐसे में इस पर रोक लगाई जाती है। दरअसल, देव स्वरूप के राजस्थान यूनिवर्सिटी में कुलपति रहने के दौरान साल 2011-12 और 2013-14 में 294 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर हुई भर्ती में धांधली की शिकायत मिली थी। जांच के बाद राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी के पहले कुलपति (VC) और विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. देव स्वरूप को 27 मई 2026 को पद से हटा दिया था। जांच में भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू में चहेते अभ्यर्थियों को ज्यादा नंबर देने की गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसमें योग्य अभ्यर्थियों को 50 में से सिर्फ 10, जबकि चहेते अभ्यर्थियों को 49 नंबर दिए जाने का खुलासा हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत कार्रवाई गलत याचिकाकर्ता के सीनियर एडवोकेट आर.एन. माथुर ने कोर्ट में बहस करते हुए कहा- याचिकाकर्ता के खिलाफ साल 2025 में जांच हुई, लेकिन उन्हें हटाने की कार्रवाई उनके कार्यकाल खत्म होने से महज एक महीने पहले की गई। उन्होंने दलील दी कि देव स्वरूप को हटाने की कार्रवाई राजस्थान यूनिवर्सिटी (RU) के एक्ट के तहत की गई है, जबकि वे बाबा आमटे दिव्यांग यूनिवर्सिटी के वीसी (कुलपति) थे। ऐसे में उन पर राजस्थान यूनिवर्सिटी के एक्ट के तहत कार्रवाई की ही नहीं जा सकती। टीचर का चयन अकेला कुलपति नहीं करता याचिका में यह भी कहा गया कि 13 साल पहले उनके कार्यकाल में हुई टीचर चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी थी। शिक्षकों का चयन किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन समिति करती है। चयन समिति में केवल कुलपति ही नहीं होते, बल्कि विषय विशेषज्ञों के अलावा राज्यपाल के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। इसमें प्रत्येक अभ्यर्थी की परफॉर्मेंस के आधार पर उसका मूल्यांकन कर सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाता है। इसलिए, ऐसा कोई भी आरोप कि किसी अभ्यर्थी को अधिक या कम अंक दिए गए, पूरी तरह से बेबुनियाद है और उनकी छवि को खराब करने का प्रयास है। —- मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए.. राजस्थान यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में धांधली:आरोपी VC को हटाया; चहेतों को ज्यादा नंबर दिए, सिलेक्शन प्रोसेस को प्रभावित किया राजस्थान यूनिवर्सिटी में साल 2011-12 और 2013-14 के दौरान 294 सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के पदों पर हुई भर्ती विवाद में घिर गई है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू में चहेते अभ्यर्थियों को ज्यादा नंबर देने की गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। योग्य अभ्यर्थियों को 50 में से सिर्फ 10, जबकि चहेते कैंडिडेट को 49 नंबर देना सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर

68 जब्त वाहन नीलाम, 27 गाड़ियों के नहीं मिले खरीदार:आबकारी विभाग को अनुमान से 38 लाख रुपए अधिक राजस्व मिला

जिले में आबकारी विभाग की ओर से गुरुवार को शराब तस्करी में पकड़ी गई 95 में से 68 गाड़ियां नीलाम की गई। इससे विभाग को अनुमान 38 लाख रुपए का ज्यादा राजस्व मिला। नीलामी से 1 करोड़ 47 लाख रुपए का राजस्व मिला है। हालांकि 9 घंटे 30 मिनट चली नीलामी में 27 गाड़ियों के लिए कोई खरीदार नहीं मिला है। आबकारी विभाग की ओर से शहर के अटल सामुदायिक केंद्र में नीलामी की प्रक्रिया की गई। नीलामी को लेकर कई खरीदार पहुंचे। जिला आबकारी अधिकारी भरत मीणा ने बताया कि जिलेभर में शराब तस्करी करते पकड़ी गई गाड़ियों की नीलामी की गई है। आबकारी विभाग के साथ ही पुलिस थानों की ओर से इन गाड़ियों को जब्त किया गया था। इसमें 24 एचएमवी, 59 एलएमवी ओर 12 दुपहिया गाड़ियों की नीलामी की गई। 95 गाड़ियों में से 68 गाड़ियों की खरीद के लिए 1 करोड़ 47 लाख रुपए की बोली लगी, जबकि विभाग को 1 करोड़ 9 लाख रुपए के राजस्व का अनुमान था, लेकिन विभाग को 38 लाख रुपए का अधिक राजस्व मिला। वहीं, 27 गाड़ियों के लिए कोई खरीदार नहीं आया। इन गाड़ियों के अधिक पुरानी होने के साथ ही खराब हालत बड़ी वजह बताई जा रही है। जिस कारण कोई खरीदार नहीं आया।

हिरासत में मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद:15 साल पुराने मामले में महाराष्ट्र की कोर्ट ने सुनाई सजा, CID ने की थी जांच

महाराष्ट्र के वाशिम जिले की एक अदालत ने 2011 के हिरासत में मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. पी. झापटे ने तत्कालीन रिसोड पुलिस थाने के प्रभारी माधव धांडे समेत 9 पुलिसकर्मियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। यह मामला भेग्या पवार नाम के एक युवक की मौत से जुड़ा है। पवार को चोरी से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए रिसोड पुलिस ने हिरासत में लिया था। हिरासत में ही उसकी मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने हिरासत में उनके साथ यातनाएं दी थीं। इसके बाद मामले की जांच राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दी गई थी। अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी माधव धांडे के अलावा मदन पवार, शिवाजी खिल्लारी, पंजाब पाटकर, रमेश पवार, प्रकाश तराम, नागोराव खांडके, अशोक वैद्य और वसंत जाधव को दोषी करार दिया। सभी को भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई। जांच एजेंसी ने 34 दिनों में की जांच पूरी इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी. जांच एजेंसी ने महज 34 दिनों में जांच पूरी कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और एससी एसटी कानून के तहत भी मामला दर्ज किया था. अदालत में सरकारी पक्ष ने सबूतों और गवाहों के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की कि हिरासत में हुई मौत कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर पुलिस की हिंसा का परिणाम थी। मृतक का नहीं था कोई आपराध‍िक र‍िकॉर्ड सरकारी वकील श्रीराम नारायणराव ने कोर्ट को बताया क‍ि बेग्या पवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और किसी व्यक्ति का अपराध साबित होने से पहले पुलिस को उसे प्रताड़ित करने या कानून अपने हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं था। अदालत ने भी माना कि पुलिस हिरासत में किसी नागरिक के साथ अमानवीय व्यवहार और हिंसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर चोट है। इसी आधार पर सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई। मेडिकल रिपोर्ट में शरीर की कई हड्डियां टूटी निकली थीं माता-पिता ने दर्ज शिकायत में बताया था कि पुलिस का कहना था कि वो उसे सिर्फ पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। लेकिन स्टेशन ले जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने बेग्या पवार की बेरहमी से पिटाई की, जिसके कारण कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई। बाद में जब भेग्या की मेडिकल जांच हुई, तो रिपोर्ट में उसके शरीर की कई हड्डियां टूटने की बात सामने आई थी। युवक का ताल्लुक पारधी समाज से था और इसके विरोध में भारी प्रदर्शन और मार्च निकाले गए थे। —————– ये खबर भी पढ़ें… कांस्टेबल रेवती की गवाही से 9-पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा:तमिलनाडु में बाप-बेटे की कस्टोडियल मौत का सच बताया था तमिलनाडु के सथानकुलम में पिता-बेटे की कस्टोडियल मौत मामले में 6 साल बाद 6 अप्रैल को मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई। इस पूरे मामले में हेड कांस्टेबल रेवती (43) का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। पूरी खबर पढ़ें…

चित्तौड़गढ़ में सरकारी टीचर और युवती की मौत:हाईवे पर यू-टर्न लेते समय ट्रक से हुई बाइक की टक्कर

चित्तौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाईवे पर ट्रक से टक्कर में बाइक सवार सरकारी टीचर और एक युवती की मौत हो गई। अचानक यू-टर्न लेने की कोशिश के दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक से बाइक टकरा गई। हादसे में दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी और मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव मॉर्च्युरी में रखवाकर परिजनों को सूचना दी है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। हादसा भदेसर थाना क्षेत्र के होडा चौराहे पर गुरुवार शाम को हुआ। हाईवे पर यू-टर्न लेते समय ट्रक से टकराई बाइक पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बारां निवासी सरकारी टीचर सुरेश मीणा और छतरगंज (बारां) निवासी युवती रवीना बाइक से उदयपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अचानक बाइक मोड़कर चित्तौड़गढ़ की तरफ लौटने की कोशिश की। तभी पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक से बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों सड़क पर गिर पड़े और सिर में गंभीर चोट लगने से अचेत हो गए। हादसे की सूचना पर भदेसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और 108 एंबुलेंस से जितेंद्र कुमार शर्मा और पायलट विष्णु धाकड़ ने दोनों को जिला हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं पुलिस ने भीड़ हटाकर ट्रैफिक को सुचारु कराया और सड़क पर यातायात फिर से शुरू करवाया। जानकारी के अनुसार, सुरेश मीणा भिंडर के पास खातीखेड़ा गांव के सरकारी स्कूल में लेवल-वन टीचर थे। पुलिस ने दोनों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी।

पाली में शाम को हुई बरसात:शहरवासियों को उमस भरी गर्मी से मिली कुछ राहत

पाली नमें दिनभर उमस भरी गर्मी से बेहाल रहे शहरवासियों को गुरुवार शाम कुछ राहत मिली। शाम के समय तेज हवाओं के साथ करीब 20 मिनट तक बारिश हुई, जिससे मौसम सुहावना हो गया। बारिश के बाद तापमान में गिरावट महसूस की गई और लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली। जबकि ठंडी हवाओं ने वातावरण को खुशनुमा बना दिया। पाली शहर के अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से भी बारिश होने की समाचार मिले हैं। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों के चेहरे खिल उठे। दिनभर की उमस गर्मी के बाद शाम की बारिश ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। गुरुवार को पाली का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में भी बादल छाए रहने और कहीं-कहीं बारिश की संभावना बनी हुई है। बारिश और ठंडी हवाओं ने लोगों को बड़ी राहत देते हुए मौसम को सुखद बना दिया।