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वाट के नाम पर निगम की ‘वॉट:5 हजार की ब्रांडेड बॉडी में 200 की चाइनीज LED प्लेट, मेंटेनेंस पर 13.60 करोड़ खर्च

प्रदेशभर की सड़कों पर नगर निगम ऐसी स्ट्रीट लाइटें लगा रहा है, जो दूर से चमकती दिखती हैं, लेकिन सड़क पर उनकी पूरी रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है। यानी पोल के नीचे उजाला और आगे अंधेरा। भास्कर टीम ने एक्सपर्ट के साथ जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में मौके पर रियलिटी चेक किया। लाइटें खुलवाकर अंदर के पार्ट्स की जांच में सामने आया कि बाहर से एमआई और बजाज जैसी ब्रांडेड दिखने वाली लाइटों में अंदर सस्ती चाइनीज एलईडी प्लेट लगी है। 5000 हजार रुपए की ब्रांडेड बॉडी में 200 रुपए की लाइट मिली। कई लाइटों में न एलईडी ड्राइवर मिला और न ही सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (एसपीडी) है। नगर निगम में स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के नाम पर घटिया सामग्री लगाने का भी मामला सामने आया है। खराब हो रही लाइटों की जगह कम गुणवत्ता वाली लाइटें लगाई जा रही हैं, जो जलती तो हैं, लेकिन उनका फोकस सड़क पर नहीं पड़ता। प्रदेश में 14.50 लाख लाइटें पहले से लगीं, निकायों ने 1.50 लाख लगाईं; 2 लाख और लगाने का लक्ष्य केंद्र के स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम के तहत 2024 तक राजस्थान में 14.50 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइटें लग चुकी थीं। निकायों ने अपने स्तर पर 1.50 लाख लाइटें लगाईं। राज्य सरकार ने 2 लाख और लाइटें लगाने की घोषणा की है। सब गोलमाल है… मेंटेनेंस का बिल पूरा, खर्च कम; ठेकेदार को ज्यादा भुगतान यदि किसी ठेकेदार के पास 10 हजार पॉइंट हैं, तो 40 रुपए प्रति पॉइंट के हिसाब से उसे हर माह 4 लाख रुपए मिलते हैं। जांच में सामने आया कि वह करीब 50 हजार रुपए का घटिया सामान लगा रहा है। चाइनीज प्लेटें लगी हैं; ड्राइवर-SPD गायब पहले ठेकेदार, अब निगम संभाल रहा मेंटेनेंस, खर्च बढ़ा पहले ईईएसएल कंपनी के पास 1.26 लाख एलईडी लाइटों और मेंटेनेंस का काम था। जयपुर के मानसरोवर, विद्याधर नगर, वैशाली नगर, सिविल लाइंस और झोटवाड़ा जोन इसमें शामिल थे। निगम कंपनी को 25 रुपए प्रति पॉइंट भुगतान कर रहा था। दिसंबर 2024 में कंपनी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेंटेनेंस निगम की लाइट शाखा ने संभाला। जेडीए से ली गई 30 हजार लाइटें भी निगम मेंटेन कर रहा। ठेकेदारों को 40-80 रुपए/लाइट भुगतान कर रहे। 17 माह में 13.60 करोड़ खर्च हुए। यानी हर माह 80 लाख रुपए। 60 वाट की जगह 10 लक्स, मुख्य सड़कों पर भी मानक से कम रोशनी

खाद-बीज बेचने वालों पर कृषि विभाग की नजर,तीन माह में 420 नमूने ले जांच के लिए भेजे…गत साल लिए 1467 में से 13 अमानक

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा खरीफ सीजन में किसानों को नकली खाद और बीज की बिक्री से बचाने के लिए कृषि विभाग ने जिलेभर में विशेष सघन जांच अभियान चला रखा है। अभियान के तहत खाद-बीज विक्रेताओं और निर्माण इकाइयों से लगातार नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए विभाग की मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच में कोई नमूना नकली या निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा पेश कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार अब तक 420 नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें 250 खाद के नमूने विभिन्न फैक्ट्रियों के अलग-अलग बैचों से, 68 खाद के नमूने जिले की दुकानों से तथा 102 बीज के नमूने विभिन्न बीज विक्रेताओं से लिए गए हैं। विभाग का कहना है कि खरीफ सीजन में खाद और बीज की मांग बढ़ने के साथ नकली एवं अमानक सामग्री की बिक्री की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जिलेभर में निरीक्षण कर नियमित रूप से सैंपल लिए जा रहे हैं। यह विशेष अभियान 15 जुलाई तक जारी रहेगा। कृषि विभाग ने गत साल भी सालभर में बीज के 503, खााद फैक्ट्रीयों से खाद के 900 और 64 कीटनाशकों के नमूने लेकर जांच के लिए विभाग की प्रयोगशाला में भेजे, जहां से 13 नमूने अमानक पाए गए। शहर व जिले में करीब 850 निजी दुकानों के साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियां व क्रय-विक्रय सहकारी समितियां किसानों को खरीफ की बुवाई के लिए खाद-बीज की बिक्री कर रही है। किसान यहां से खाद के साथ ही बीज भी खरीद रहे है। ऐसे में उनके साथ कोई धोखा नहीं हो जाए, इसे देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारी लगातार खाद-बीच के नमूने ले रहे हैं। साथ ही अमानक खाद और बीज नहीं रखने की हिदायत भी दी जा रही है। निजी दुकानों के साथ ही सहकारी समितियां विक्रय करती है खाद-बीज

श्रीजी जायन्ट्स ग्रुप की नई कार्यकारिणी ने ली शपथ

ब्यावर| जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन फेडरेशन-9 के तहत जायन्ट्स ग्रुप ऑफ श्रीजी ब्यावर का वर्ष 2026-27 का पदस्थापना समारोह हुआ। संस्था अध्यक्ष जान्हवी भारवानी ने बताया कि केन्द्रीय कमेटी सदस्य देवेन्द्र गेलड़ा मुख्य अतिथि रहे। फेड-9 अध्यक्ष कुसुम जैन मौजूद रहीं। यूनिट डायरेक्टर डॉ. फूल कौर मुंद्रा विशिष्ट अतिथि रहीं। अतिथियों ने अध्यक्ष जान्हवी भारवानी के साथ नवगठित कार्यकारिणी को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्य अतिथि देवेंद्र गैलरा ने श्रीजी ग्रुप के सामाजिक, सेवा व जनकल्याण के कामों के बारे में बताया। प्रदेश अध्यक्ष कुसुम जैन ने नई टीम से आगामी कार्यों की रूपरेखा पर चर्चा की। फूल कौर मूंदड़ा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में महेंद्र छाजेड़, सुरेश रांका, हरीश सांखला, दमयंती जयपाल, दीक्षा आनन्दानी, नरेश भारवानी, विक्रम सोनी सहित अन्य मौजूद रहे।

हिमाचल में खिली धूप, 96 घंटे कमजोर रहेगा मानसून:18 जुलाई से भारी बारिश, जुलाई में नॉर्मल से 32% ज्यादा बरसे बादल

हिमाचल की राजधानी शिमला समेत राज्य के अधिकांश भागों में आज सुबह से ही धूप खिली हुई है। प्रदेश में दो दिन से मौसम साफ बना हुआ है। इससे तापमान में उछाल और मैदानी इलाकों में उमस बढ़ी है। राज्य में अगले चार दिन भी मानसून कमजोर रहने से तापमान में और उछाल आएगा। मौसम विभाग के अनुसार- 17 जुलाई की रात एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से 18 जुलाई से पूरे प्रदेश में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। विभाग ने 23 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के मुताबिक 17 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ बना रहेगा और व्यापक बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान केवल कुछेक स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इससे कई शहरों के तापमान में दो से तीन डिग्री तक का उछाल आएगा। जुलाई में सामान्य से 32% ज्यादा बारिश बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में अब तक प्रदेश में सामान्य से 32 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 से 13 जुलाई के बीच सामान्य तौर पर 94.5 मिमी बारिश होती है, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में 125 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। किन्नौर में सामान्य से 115% ज्यादा बारिश हालांकि सभी जिलों में बारिश का वितरण समान नहीं रहा। किन्नौर में सामान्य से 151 प्रतिशत, सोलन में 115 प्रतिशत और कुल्लू में 107 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति और मंडी जिलों में इस अवधि के दौरान सामान्य से कम वर्षा हुई है। 18 जुलाई से फिर भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने 18 जुलाई से प्रदेश में मानसून के दोबारा सक्रिय होने की संभावना जताई है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने तथा आवश्यक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

भोपाल के यूनिवर्सिटी कैंपस में 'स्मैक की पुड़िया':गार्ड्स ही ड्रग्स सप्लायर, पूछा-दम चाहिए तो बताओ; तस्करों का पीछा कर राजस्थान तक पहुंचा भास्कर रिपोर्टर; पार्ट-1

जब भी माल चाहिए, यहीं आ जाना। मैं मोबाइल नहीं रखता और न ही मोबाइल पर कोई डील करता हूं। ये ऑफर भोपाल की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी गार्ड ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। यहां माल से मतलब ‘स्मैक की पुड़िया’ है। इस यूनिवर्सिटी के ज्यादातर गार्ड्स ड्रग्स सप्लायर यानी ड्रग्स पैडलर हैं। उन्हें स्मैक लोकल डीलर पहुंचाता है। भास्कर की एक महीने की पड़ताल में खुलासा हुआ कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से स्मैक एमपी के कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस तक पहुंच रही है। बड़े ड्रग डीलर छोटे पैडलर के जरिए पूरा नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर ने यूनिवर्सिटी कैंपस से राजस्थान सीमा तक नेटवर्क के चेहरों को खुफिया कैमरे में कैद किया। खास बात ये है कि एमपी सरकार 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें नशे के खिलाफ कार्रवाई से लेकर स्कूल कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, लेकिन इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भास्कर की टीम को कहीं भी पुलिस की सक्रियता नहीं दिखी। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पहले पार्ट में पढ़िए, यूनिवर्सिटी कैंपस में किस तरह ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। पड़ताल में सामने आईं तीन अहम बातें चार स्टेप में समझिए कैसे हुआ नेटवर्क का खुलासा स्टेप 1: कैंपस के आसपास रेकी और छात्रों से पूछताछ दैनिक भास्कर को सूचना मिली थी कि भोपाल के 11 मील बायपास स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी कैंपस में ड्रग्स की सप्लाई हो रही थी। नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए टीम ने पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कैंपस के आसपास रेकी और छात्रों से पूछताछ में पता चला कि गेट के पास ढाबों और दुकानों से ड्रग्स का संचालन होता है। पड़ताल आगे बढ़ने पर सामने आया कि बाहरी लोगों के बजाय यूनिवर्सिटी के सुरक्षा गार्ड ही नेटवर्क में मुख्य रूप से शामिल हैं। ग्राहक बनकर पहुंचे भास्कर रिपोर्टर ने सुरक्षा प्रभारी गोविंद के बारे में पूछताछ की। वहां तैनात एक गार्ड ने सीधे पूछा- ‘दम चाहिए क्या? चाहिए हो तो बताओ…’ इससे साफ हो गया कि गार्ड पूरे रैकेट में शामिल हैं। टीम ने अगले दिन गोविंद से सीधे संपर्क करने का फैसला किया। स्टेप 2: सिक्योरिटी सुपरवाइजर से स्मैक की डील अगले दिन दोपहर भास्कर की टीम यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 2 पर पहुंची, जहां गोविंद तैनात था। गार्ड्स ने उसका नाम सुनते ही टीम को ऑफिस के अंदर बुला लिया। तभी गोविंद वहां पहुंच गया। गोविंद ने पूछा- ‘तुम मेरा नाम लेकर कैसे आए? किसने बताया मेरे बारे में?’ रिपोर्टर ने कहा कि आकाश ने। गोविंद ने तुरंत उस नाम के शख्स को कॉल किया। स्थिति संभालते हुए रिपोर्टर ने बताया कि उन्हें ‘आकाश राजपूत’ ने भेजा है। इससे गोविंद आश्वस्त हो गया। उसने पूछा-‘पहले कहां से माल लेते थे?’ रिपोर्टर ने बताया कि वह गुजरात से नया आया है और रेगुलर सप्लाई के लिए ठिकाना ढूंढ रहा है। गोविंद ने प्रति टोकन 300 रुपए मांगे। एक टोकन मांगने पर उसने कम से कम दो टोकन लेने की शर्त रखी और कहा कि एक टोकन की डिलीवरी संभव नहीं है। दो टोकन की डील तय होने पर उसने गार्ड जितेंद्र को नए के साथ अपना पुराना बकाया टोकन भी लाने को कहा। स्टेप 3: मेन डीलर तक पहुंचने के लिए गार्ड का पीछा जितेंद्र के बाइक से निकलते ही मुख्य गेट पर तैनात भास्कर के दूसरे रिपोर्टर ने सुरक्षित दूरी बनाकर उसका पीछा शुरू किया। जितेंद्र कटारा हिल्स थाने के पास से कच्ची सड़क होते हुए गौरीशंकर परिसर पहुंचा। वहां गार्ड से बात करने के बाद वह EWS बिल्डिंग की ओर बढ़ा। रिपोर्टर ने देखा कि जितेंद्र वहां खड़े तीन युवकों से मिला। उन्हें बाइक पर बैठाकर गेट के बाहर छोड़ने के बाद वह अकेले लौट आया। रिपोर्टर के लौटने पर गोविंद से मोबाइल नंबर मांगा गया, लेकिन उसने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह मोबाइल नहीं रखता और जरूरत पड़ने पर सीधे गेट पर संपर्क करें। इसी बीच एक अन्य युवक के आने पर गोविंद ने रिपोर्टर को जाने का इशारा किया। रिपोर्टर अगले दिन दोबारा आने की बात कहकर लौट आया। स्टेप 4: मेन डीलर से कॉन्टैक्ट कर ड्रग्स की डील भास्कर टीम की अगली पड़ताल गौरीशंकर परिसर से पूरे नेटवर्क के मुख्य सप्लायर की पहचान पर केंद्रित थी। जांच में रितिक नामदेव का नाम सामने आया। उसने गौरीशंकर परिसर में 4-5 लड़कों का गिरोह बना रखा है, जो राजस्थान सीमा से सटे राजगढ़ जिले के गांवों से थोक में स्मैक लाकर भोपाल के इस क्षेत्र में सप्लाई करता है। हॉस्टल और यूनिवर्सिटी के छात्र इनके मुख्य निशाने पर हैं। गिरोह कार (MP 04 ZN 7917) और स्पोर्ट्स बाइक (MP 04 YF 6541) से ड्रग्स की होम डिलीवरी करता है। रितिक तक पहुंचने के लिए भास्कर टीम ने एक ऐसे युवक की मदद ली, जो पहले उससे ड्रग्स खरीदता था। युवक ने ऋतिक को फोन कर ड्रग्स की मांग की। इस पर उसने उसे तुरंत बीडीए (BDA) परिसर आने को कहा। ‘एक ग्राम स्मैक की कीमत 4500’ रिपोर्टर के गौरीशंकर परिसर पहुंचने पर रितिक ने उन्हें सड़क पर खड़ी ऑल्टो कार के पास बुलाया। कार में वह अपने तीन साथियों के साथ मौजूद था। नेटवर्क की जानकारी के लिए रिपोर्टर ने बड़ी मात्रा में सप्लाई और प्रति ग्राम कीमत पूछी। रितिक ने राजस्थान से लाई गई स्मैक की कीमत 4500 रुपए प्रति ग्राम बताई। इस बातचीत से साफ हो गया कि वह इलाके का मुख्य सप्लायर है और यूनिवर्सिटी कैंपस में ड्रग्स का नेटवर्क चला रहा है। अब अगला सवाल था कि राजस्थान की स्मैक ऋतिक जैसे तस्करों तक कैसे पहुंच रही है। इसी कड़ी को जोड़ने के लिए भास्कर टीम ने पड़ताल राजस्थान सीमा से लगे जिलों तक बढ़ाई। दूसरे पार्ट में पढ़िए… राजगढ़ जिले के बोड़ा और पचौर के तस्कर कैसे कर रहे हैं ड्रग्स की थोक सप्लाई और राजस्थान के किस एरिया से आती है सबसे बड़ी खेप?

पंजाबी रेसलर के एक थप्पड़ से WWE चैंपियन बेहोश:जमीन पर गिरा, फिर उठ नहीं पाया; जीतते ही शेरा ने टी-शर्ट उतारकर लहराई

पंजाब में फिरोजपुर के रेसलर अमनप्रीत सिंह ने पावर स्लैप कंपीटिशन में WWE के पूर्व वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियन जैक हेजर को एक थप्पड़ में बेहोश कर दिया। जैक हेजर पहले दो राउंड में बढ़त पर थे, लेकिन तीसरे राउंड में शेरा के एक जोरदार थप्पड़ ने उनको को नॉकआउट कर दिया। जीतने के बाद मंच पर ही शेरा ने अपनी टी-शर्ट उतार जश्न मनाया। वहीं हेजर को करियर की पहली नॉकआउट हार का सामना करना पड़ा। पावर स्लैप 21 का ये मुकाबला 10 जुलाई 2026 को लास वेगास में हुआ। अमनप्रीत सिंह इससे पहले टीएनए रेसलिंग, डब्लूडब्लूई एनएक्सटी और ओवीडब्ल्यू हेवीवेट में खेल चुके हैं। वह रिंग में महाबली शेरा के नाम से फेमस हैं। शेरा के मैच में क्या-क्या हुआ, 7 पॉइंट में जानें… करियर में पहली बार हारे जैक हेजर
जीत के बाद अमनप्रीत सिंह शेरा का नाम रातों-रात लाइमलाइट में आ गया है। जैक हेजर WWE के स्टार प्लेयर रहे हैं। मिक्स मार्शल आर्ट्स में भी उनका रिकॉर्ड हमेशा विनर का रहा है। अपने पूरे कॉम्बैट स्पोर्ट्स करियर में जैक हेजर को पहली बार इस तरह नॉकआउट होकर हार का सामना करना पड़ा है। ************** पंजाब- मंत्री संजीव अरोड़ा को जेल में चाहिए VIP ट्रीटमेंट: घर के खाने समेत 3 डिमांड की; बीमारी का हवाला देकर गुरुग्राम कोर्ट में लगाईं पिटीशन गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को अब जेल की रोटी और हवा रास नहीं आ रही है। VIP ट्रीटमेंट की आदत और जेल के कड़े नियमों के बीच फंसे मंत्री ने अब राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। (पढ़ें पूरी खबर)

ट्विशा केस: गिरिबाला-समर्थ का फिर वॉयस सैंपल देने से इनकार:CBI बोली- भोपाल AIIMS ने भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने से मना किया, आरोपियों की रिमांड बढ़ी

भोपाल में एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। CBI ने कोर्ट को बताया कि पिछली पेशी में आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने वॉयस सैंपल देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी, लेकिन जब टीम इसके लिए 6 जुलाई को जेल पहुंची तो दोनों आरोपियों ने सहयोग नहीं किया। CBI ने कहा कि वॉयस सैंपल के बिना जांच प्रभावित हो रही है। वहीं, गिरिबाला सिंह के वकील विनोद जॉर्ज करलो ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने कभी भी वॉयस सैंपल देने से इनकार नहीं किया। CBI टीम के जेल पहुंचने पर गिरिबाला की तबीयत खराब थी, फिर भी उन्होंने दो बार सैंपल दिया। तीसरी बार स्वास्थ्य कारणों से अगले दिन सैंपल लेने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा- समर्थ सिंह भी जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। CBI जब चाहे, उनका वॉयस सैंपल ले सकती है। उनकी आपत्ति केवल प्रक्रिया को लेकर है। सैंपल के लिए दी जाने वाली ट्रांसक्रिप्ट पहले रिकॉर्ड की गई ट्रांसक्रिप्ट से अलग होनी चाहिए, ताकि सैंपलिंग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे। इस पर CBI ने वॉयस सैंपल लेने संबंधी अर्जी कोर्ट में पेश की, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए गिरिबाला और समर्थ की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी। भोपाल AIIMS ने कहा- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट CBI को दे दी, अलग से नहीं देंगे कोर्ट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। ट्विशा पक्ष के वकील शुभांग दीक्षित के मुताबिक, भोपाल AIIMS ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही CBI को सौंपे जा चुके हैं इसलिए अलग से रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। वहीं, दिल्ली AIIMS की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। कई गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाने बाकी हैं। वहीं, कोर्ट ने दर्ज किया कि नोटिस जारी होने के बावजूद दिल्ली एम्स की तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य सूत्रों के अनुसार, दिल्ली AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी है। रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ वैज्ञानिक निष्कर्ष दर्ज हैं, जिन्हें CBI अपनी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देख रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। CBI को 60 दिन में चालान पेश करना है CBI ने 25 मई 2026 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच की 60 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले एजेंसी चालान पेश कर सकती है। यदि तय समय-सीमा के भीतर चालान दाखिल नहीं होता है, तो आरोपी पक्ष कानून के तहत डिफॉल्ट जमानत का दावा कर सकता है। 12 मई को हुई थी ट्विशा की मौत ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर CBI अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। ………………………………… मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्विशा ने फांसी लगाई या गला घोंटते वक्त स्ट्रगल हुआ:जिम बेल्ट में स्किन टिश्यू मिलने का मतलब क्या; क्या बच जाएंगे मां-बेटे ट्विशा शर्मा के स्किन टिश्यू जिम बेल्ट पर मिले:दिल्ली AIIMS ने 11 पेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंपी एक्ट्रेस ट्विशा केस- CBI ने पति-सास पर दर्ज की FIR:रिटायर्ड जज को हाईकोर्ट का नोटिस; MP सरकार बोली- वे जांच में मदद नहीं कर रहीं एक्ट्रेस ट्विशा का मौत के 12 दिन बाद अंतिम संस्कार:भाई ने भोपाल में मुखाग्नि दी, दिल्ली AIIMS की टीम ने दोबारा पोस्टमॉर्टम किया शादी में रिश्तेदारों ने कहा था-घर की जज ट्विशा होगी:सोशल मीडिया पर सामने आया वेडिंग ट्रेलर, समर्थ से मजाक करती दिखीं ट्विशा ने तेलुगु-शॉर्ट फिल्में की, मल्टीनेशनल एड भी शूट किए:मिस पुणे बनने से डेथ तक; जानिए कैसी थी ट्विशा शर्मा की ग्लैमरस लाइफ भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ने लगाई फांसी:आखिरी कॉल मेजर भाई को, बोली- अब बर्दाश्त नहीं होता, मुझे ले चलिए भैया

नीतीश कुमार को कौन कंट्रोल कर रहा, क्या ‘नजरबंद’ हैं:सांसद-नेता को मिलने नहीं दिया जा रहा, 7 सर्कुलर के अंदर क्या-क्या हो रहा

‘मुझे नीतीश कुमार से मिलने नहीं ‎दिया जा रहा है। दो महीने से ‎उनसे मिलने की कोशिश में हूं। मैंने ‎मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय ‎मांगा। उन्होंने 2 मिनट में समय दे‎ दिया। मैं उनसे मिला।’ JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने यह बातें अपने लोगों के बीच बैठकी में कही। इसका वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नीतीश कुमार कुछ लोगों की गिरफ्त में हैं। क्या वह नजरबंद हैं, उन्हें कोई दूसरा कंट्रोल कर रहा है। JDU को नीतीश नहीं तो कौन चला रहा है, जानेंगे, बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः क्या नीतीश कुमार नजरबंद हैं? जवाबः बिल्कुल नहीं। नजरबंदी एक कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को सरकार या सुरक्षा एजेंसियां उसके घर में कैद कर लेती है और बाहरी दुनिया से उसका संपर्क काट दिया जाता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। समय-समय पर पार्टी दफ्तर भी जा रहे हैं। कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। जैसे… सवाल-2ः …तो फिर इसकी चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः विपक्षी दलों विशेषकर RJD अक्सर राजनीतिक बयानबाजी करती है कि नीतीश कुमार को ‘बंधक’ बना लिया गया है या वे कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में हैं। ताजा चर्चा JDU सांसद के बयान के बाद शुरू हुई है। हाल की 3 घटनाओं को जानिए… घटना-1ः JDU सांसद का सामने आया वीडियो 12 जुलाई को झंझारपुर से JDU सांसद रामप्रीत मंडल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें वह अपने लोगों के बीच बैठकी में यह कहते सुने गए कि मैं पिछले 2 महीने से नीतीश कुमार से मिलने का प्रयास कर रहा हूं, लेकिन मुझे मिलने नहीं दिया जा रहा है।’ घटना-2ः नीतीश के आसपास घेराबंदी है पूर्व सांसद आनंद मोहन ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा- ‘नीतीश कुमार अचेता अवस्था में हैं। उनको मुखौटा बनाकर चंडाल चौकड़ी अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रही है। चंडाल चौकड़ी ने नीतीश कुमार को जेड प्लस सिक्योरिटी दिलाकर उनके आसपास घेराबंदी कर दी है। वह उसके जरिए जो चाहते हैं करते हैं। नीतीश कुमार के आसपास का घेरा तय करता है कि वह किससे मिलेंगे और किससे नहीं मिलेंगे। किस नेता की बात उनक तक पहुंचानी है, किसकी बात नहीं पहुंचानी है। यह सब कुछ लोग तय करते हैं।’ घटना-3ः RCP को हंगामे के बाद मिली एंट्री 27 जून की सुबह पूर्व केंद्रीय मंत्री और नीतीश कुमार के साथी रह चुके RCP सिंह उनसे मिलने पहुंचे। अंदर जाने से रोक दिया गया। कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार के आवास के बाहर JDU नेता संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संजय गांधी और ललन सराफ ही नीतीश कुमार से मिलने नहीं दे रहे हैं। 20 मिनट तक चले शोरगुल के बाद RCP सिंह को अंदर बुलाया गया। थोड़ी देर कार्यकर्ताओं के साथ ही मिले और फिर निकल गए। बता दें, RCP सिंह बीते 6 महीने से लगातार JDU में एंट्री करने के प्रयासरत हैं। उनकी बात नीतीश कुमार से नहीं हो पा रही है। अंत में बात नहीं बनते देख RCP सिंह अपने समर्थकों और मीडिया को बुलाकर सीधे नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। सवाल-3ः तो क्या नीतीश कुमार तय नहीं करते किससे मिलना है, किससे नहीं? जवाबः सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब पहले की तरह नहीं रह गए हैं। बीमारी संबंधित दिक्कतें हैं। नीतीश कुमार के करीबी नेताओं का एक ग्रुप है, जो सब चीजें तय करता है। वह किससे मिलेंगे, किससे नहीं। हालांकि, नीतीश कुमार अपने मन से भी बहुत सारे कार्य करते हैं। सवाल-4ः फिर JDU को चला कौन रहा है? जवाबः सीधा जवाब है-पार्टी तो नीतीश कुमार ही चला रहे हैं। वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हालांकि, हाल में हुई 2 बड़ी घटनाओं ने संकेत दिया है कि पार्टी अब कोई और चला रहा है। 1. थोड़ी सी बहस हुई, बाहर कर दिए गए छोटू सिंह 8 जुलाई को बिहार JDU की प्रदेश कार्यकारिणी की लिस्ट आई। जिसमें अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को प्रदेश महासचिव पद से हटा दिया गया। इससे नाराज छोटू सिंह 10 जुलाई को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर पहुंचे। उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। कहा- बोलिएगा तो हमलोग पार्टी छोड़कर चले जाएंगे। इस पर संजय झा ने कहा-माहौल मत बनाइए। जाइए। 2. संगठन में कई पुराने नेता किनारे किए गए 8 जुलाई को JDU ने बिहार प्रदेश कमेटी की घोषणा की। जिसमें 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव व 74 सचिव बनाए। पिछली कमेटी में पदाधिकारी रहे कई नेताओं को बिल्कुल किनारे कर दिया गया। कुछ का डिमोशन हुआ।

केरलम- डॉक्टर की सैलरी ₹20 हजार, इतनी ही सफाईकर्मी की:जरूरत से 10 गुना ज्यादा डॉक्टर; इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बोला- 66% डॉक्टर की हालत बंधुआ मजदूरों जैसी

केरलम का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर देश में सबसे मजबूत माना जाता है, लेकिन वहां डॉक्टरों को दिक्कत हो रही है। निजी अस्पतालों में एक एमबीबीएस जूनियर डॉक्टर 12 से 24 घंटे की ड्यूटी के बदले महज ₹20 हजार कमा पा रहा है। यह वेतन सफाईकर्मी के बराबर है। दरअसल, केरलम हर साल 7 हजार से ज्यादा डॉक्टर तैयार कर रहा है, जबकि जरूरत 600 से 700 की है। हेल्थकेयर में इसे ‘ओवरफ्लडिंग’ कहते हैं। राज्य में इतने डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में एडजस्ट करने की व्यवस्था ढह चुकी है। इसलिए कई जूनियर डॉक्टर या तो बेरोजगार हैं या निजी अस्पतालों में सफाईकर्मियों के बराबर वेतन पर नौकरी कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सर्वे में बताया था कि केरलम के 82% डॉक्टरों को गलत वेतन मिल रहा है। 81% डॉक्टर बंधुआ मजदूरी जैसी स्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उनकी पढ़ाई में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। मंत्री बोले- निजी अस्पतालों को कुछ नहीं कह सकते इस सर्वे पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन का कहना है कि निजी अस्पताल स्वायत्त संस्थाएं हैं, इसलिए इनके आंतरिक वेतन ढांचे पर दखल नहीं दे सकते। दो केस से पूरा मामला समझिए… केस-1ः 24 घंटे काम, पर वेतन बहुत कम भास्कर ने इस संबंध में तिरुवनंतपुरम की 26 वर्षीय डॉ. श्री लक्ष्मी से बात की। उन्होंने बताया कि सरकारी कॉलेज में सीट न मिलने पर प्राइवेट सेल्फ-फाइनेंस कॉलेज से 1 करोड़ से अधिक खर्च कर एमबीबीएस किया। डिग्री के बाद एक प्राइवेट अस्पताल में 2 साल जूनियर डॉक्टर के रूप में काम किया। उस समय हर दिन 12 से 24 घंटे काम करने के बदले सिर्फ 20,000 रु. महीना मिलता था। मानसिक और शारीरिक शोषण से तंग आकर नौकरी छोड़ दी। विडंबना देखिए कि मेरे इस्तीफे के तुरंत बाद उस कम वेतन वाली नौकरी के लिए भी सैकड़ों डॉक्टरों की कतार लग गई। केस-2ः सरकारी नौकरी है, पर वेतन नहीं कोच्चि की 28 साल की डॉ. देविका कहती हैं कि नीट में बेहतरीन स्कोर के दम पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिली। एमबीबीएस के बाद 4 साल पीजी की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हुई। स्पेशलाइजेशन के बिना करियर टिकना मुश्किल है, इसलिए मैंने सरकार के फैमिली हेल्थ सेंटर में 56 हजार रु. की ‘अस्थायी’ नौकरी जॉइन की। यहां मरीजों की भीड़ ज्यादा है, लेकिन निजी अस्पतालों जैसा शोषण नहीं है। पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिल पा रहा। इसलिए मैंने यूरोप या गल्फ देशों में नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… 500 आवेदन के बाद भी नहीं मिली नौकरी:कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन की डिग्री के साथ ग्रेजुएट, अब रैपिडो से कर रहा कमाई कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी न मिले तो हारकर बैठ जाने के बजाय नए जॉब के अवसर तलाशने में ही समझदारी है। ये बात इस रैपिडो राइडर की कहानी से समझी जा सकती है। इसकी कहानी एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर की। इस यूजर का नाम नीरज है। पूरी खबर पढ़ें…

चंडीगढ़ में कबाड़ी से कार-बाइक कटाई तो एक्शन होगा:₹5 लाख तक जुर्माना, FIR-जेल भी संभव; नए नियम लागू, ज्यादा गाड़ी वालों पर नजर

चंडीगढ़ में अब अपनी पुरानी कार या बाइक को किसी भी लोकल कबाड़ी के पास कटवाना गैरकानूनी होगा। शहर में प्रदूषण कम करने और पुराने वाहनों के वैज्ञानिक निपटारे के लिए चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (CPCC) ने केंद्र सरकार के ‘पर्यावरण (संरक्षण) (एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स) नियम, 2025’ को सख्ती से लागू कर दिया है। अब तय समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों को केवल सरकार से मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) में ही स्क्रैप कराया जा सकेगा। अपनी मर्जी से किसी कबाड़ी, गैराज या अनधिकृत स्क्रैप कारोबारी के पास वाहन कटवाने पर 5 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा FIR व जेल भी हो सकती है। CPCC की ओर से यह आदेश सोमवार (12 जुलाई) से लागू हो गए हैं। नियम से क्या-क्या बदला? 6 पॉइंट में समझिए अवैध रूप से गाड़ी काटी तो क्या होगी सजा?
बिना लाइसेंस वाहन काटना या स्क्रैप करना गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में 1 लाख से 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन या चोरी के वाहनों की स्क्रैपिंग पर आपराधिक मामला दर्ज होने और जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी को आदेश पर कोई आपत्ति है तो वह CPCC कार्यालय में अपना पक्ष रख सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर साल 51 हजार से अधिक नए वाहन रजिस्टर हो रहे हैं। यानी औसतन हर दिन 100 से ज्यादा नए वाहन शहर की सड़कों पर उतर रहे हैं। शहर में पंजीकृत वाहनों की संख्या 14.27 लाख से अधिक हो चुकी है, जो करीब 15 लाख आबादी के बराबर है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक चंडीगढ़ में हर साल अनुमानित 10 हजार से 15 हजार वाहन ‘एंड-ऑफ-लाइफ’ (ELV) यानी कबाड़ होने की श्रेणी में आ जाते हैं। स्क्रैपिंग के आंकड़े भी जानिए
केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक मंजूरशुदा RVSF में हर महीने 170 से 220 सरकारी और निजी वाहन स्क्रैपिंग के लिए पहुंच रहे हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक पिछले करीब ढाई साल में 8,646 वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं। व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी लागू करने वाले छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ अग्रणी राज्यों/यूटी में शामिल रहा है। *********** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ के 2 सरकारी अस्पतालों में इवनिंग OPD: ऑफिस से छुट्‌टी लेने की जरूरत नहीं, घर आकर डॉक्टर से मिल सकेंगे चंडीगढ़ के दो सरकारी अस्पतालों में जल्द ही इवनिंग ओपीडी शुरू करने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह सुविधा सीएचसी-22 और सीएचसी-45 में शुरू की जाएगी। इसके लिए प्रशासन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती कर रहा है। इवनिंग ओपीडी में शाम के समय दो घंटे तक सभी तरह के मरीजों को देखा जाएगा। मरीजों को इसके लिए पर्ची बनवानी होगी, जिसके लिए फीस भी ली जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)