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गहलोत बोले- शराब माफियाओं के दबाव में जोधपुर-कमिश्नर का ट्रांसफर:पूर्व सीएम ने लिखा- यह दुर्भाग्यपूर्ण, सिस्टम पर माफिया पूरी तरह हावी

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा- शराब माफियाओं के दबाव में जोधपुर पुलिस कमिश्नर का ट्रांसफर करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सिस्टम पर माफिया पूरी तरह हावी है। सोशल मीडिया एक्स पर गहलोत ने गुरुवार को पोस्ट शेयर करते हुए यह लिखा। दरअसल, एक दिन पहले जारी हुई लिस्ट में 18 आईपीएस के ट्रांसफर किए गए थे। इसमें जोधपुर कमिश्नर शरत कविराज का नाम भी शामिल था। कविराज ने 26 फरवरी को पदभार संभाला था। 3 दिन पहले 14 जुलाई को उनका तबादला आईजी क्राइम के पद पर हो गया। करीब 4 महीने तक उन्होंने शहर कमिश्नर की कमान संभाली। कविराज की जगह जयपुर में महानिरीक्षक (आईजीपी) हेड क्वार्टर रहे अंशुमान भाेमिया जोधपुर में अब नए कमिश्नर होंगे। गहलोत ने लिखा- कमिश्नर का कुछ ​महीनों में ट्रांसफर होना दुर्भाग्यपूर्ण पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- हमारी कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में शांति बनाए रखने, युवाओं को नशे से बचाने और अपराधों पर लगाम कसने के उद्देश्य से रात 8 बजे के बाद शराब बिक्री पर सख्त पाबंदी का निर्णय लिया था। इसके बहुत सकारात्मक परिणाम भी सामने आए थे। जोधपुर में इसी नियम की सख्ती से पालना सुनिश्चित करवाने वाले पुलिस कमिश्नर का महज कुछ महीनों में शराब माफिया के दबाव में अचानक तबादला कर देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में शांति बनाए रखने, युवाओं को नशे से बचाने… pic.twitter.com/0pBAxEd92Z— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 16, 2026 पूर्व सीएम ने सरकार पर उठाए सवाल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- 8 बजे शराब की दुकान बंद करने के आदेश को लागू नहीं करना प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। क्या अब प्रदेश में नीतियां जनता के हित में नहीं, बल्कि माफियाओं के मुनाफे और दबाव में तय होंगी?
ये खबर भी पढ़ें… जोधपुर में चार महीने बाद ही बदले कमिश्नर:अब अंशुमन भोमिया को सौंपी कमान, ग्रामीण में पत्नी की जगह पति को बनाया SP प्रदेश में 18 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर की लिस्ट मंगलवार देर रात जारी की गई। इन आदेशों में जोधपुर के कमिश्नर भी बदल दिए गए। जोधपुर के वर्तमान कमिश्नर शरत कविराज का तबादला जयपुर कर दिया गया। वहीं अंशुमन भोमिया अब जोधपुर के कमिश्नर होंगे। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

जयपुर के डॉक्टर से 62 लाख ठगे,2 आरोपी गिरफ्तार:शेयर बाजार में मुनाफे का झांसा दिया; फर्जी कंपनी बनाकर 50 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की

जयपुर के डॉक्टर से 62 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है और 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने शेयर मार्केट और IPO में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे का लालच देकर रुपए ठगे थे। गिरोह ने फर्जी कंपनी बनाकर देशभर में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की और उस रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया। गिरफ्तार आरोपी देवेंद्र शर्मा और निखिल लूथरा टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं और मूल रूप से दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी के नाम पर वॉट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए लोगों को निवेश के लिए फंसाते थे। देशभर में इस नेटवर्क के खिलाफ 250 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। जयपुर के डॉक्टर से की थी 61.77 लाख की ठगी ADG साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया- जयपुर निवासी डॉ. निखिल मेहता ने 23 जनवरी 2025 को साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि ‘विकासा कैपिटल’ नाम के फर्जी निवेश पोर्टल के जरिए IPO और अमेरिकी-भारतीय शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया। आरोपियों ने वॉट्सएप और टेलीग्राम के जरिए से फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली एप इंस्टॉल करवाई। आरोपियों ने शुरुआत में मामूली मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता। इसके बाद विभिन्न निवेश योजनाओं के नाम पर 61.77 लाख रुपए अलग-अलग फर्मों के खातों में जमा करा लिए। जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो विदेशी नियामक संस्था द्वारा खाता ब्लॉक होने का झूठा संदेश दिखाकर निकासी रोक दी गई। साइबर ठगी के लिए किया जाता था कंपनी का यूज ADG साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया- पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि उनकी कंपनी का इस्तेमाल साइबर ठगी से मिले रुपयों को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। जांच में सामने आया कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों को लेकर अब तक करीब 50 करोड़ रुपए की 40 शिकायतें और 10 से ज्यादा आपराधिक मामले विभिन्न राज्यों में दर्ज है। वहीं, साइबर क्राइम पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ 250 से ज्यादा शिकायतें और देशभर में 50 से ज्यादा FIR दर्ज है। पुलिस का अनुमान है कि ठगी की वास्तविक रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी वीके सिंह ने बताया- साइबर क्राइम थाना पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर रही है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जाएगी।

राजस्थान में 15 हजार से ज्यादा महिलाओं की हाईरिस्क प्रेग्नेंसी:स्वास्थ्य विभाग ने की दो दिन में एक लाख से अधिक गर्भवतियों के रिकॉर्ड की जांच

राजस्थान में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले दो दिन में ही एक लाख छह हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड की जांच की गई। इनमें से 15 हजार 504 महिलाओं को हाईरिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिन्हित कर उनके मामलों की विशेष समीक्षा की गई। चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देशन में चल रहे पांच दिवसीय अभियान का उद्देश्य ऐसी गर्भवती महिलाओं की पहचान करना है, जिन्हें प्रसव के दौरान अधिक खतरा हो सकता है। विभाग का फोकस इन महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर इलाज और सुरक्षित संस्थागत प्रसव करने पर है। चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़ ने बताया- अभियान के दौरान 6 हजार 794 गर्भवती महिलाओं का रियल टाइम सत्यापन और साक्षात्कार कर यह भी परखा गया कि उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सही तरीके से मिल रहा है या नहीं। उन्होंने बताया- प्रदेशभर में 3 हजार 808 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण भी किया गया। जहां प्रसव पूर्व जांच (ANC), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, रिकॉर्ड संधारण और उपचार व्यवस्था की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। जिन स्थानों पर कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए हैं। महिलाओं की मैपिंग-ट्रैकिंग की जा रही स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभियान के तहत हाईरिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की अलग से मैपिंग और ट्रैकिंग की जा रही है। विशेष रूप से गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में पहुंच चुकी महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रसव के समय किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके। सभी निरीक्षणों और समीक्षा का विवरण उसी दिन सुपरविजन पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। जिला, ब्लॉक और सेक्टर स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएंगी, ताकि किसी भी हाईरिस्क गर्भवती महिला को समय पर उपचार और सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल सके।

बिरजू हत्याकांड के 8 आरोपी बरी:शेखावाटी के चर्चित मर्डर केस में 14 साल बाद आया फैसला, 3 गैंगस्टर पर निर्णय सुरक्षित

चूरू के रतनगढ़ स्थित एडीजे कोर्ट ने शेखावाटी के बहुचर्चित बिरजू ठेकेदार हत्याकांड में गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। साल 2012 में हुए इस चर्चित हत्याकांड में गैंगस्टर अनिल उर्फ पांडिया, कपिल और महेश उर्फ पपिया के खिलाफ अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। करीब 14 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस निर्णय ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है। आठ आरोपियों को मिली राहत अदालत ने महिपाल बलारां, मनोहर उर्फ मनोज नेहरा, श्रवण निवाई सहित कुल आठ आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपियों की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन आरोपियों के खिलाफ फैसला अभी आना बाकी है। 2012 में हुई थी सनसनीखेज हत्या बिरजू ठेकेदार की 14 नवंबर 2012 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय वह दारिया मर्डर केस में सीबीआई का मोस्ट वांटेड आरोपी था और उस पर पांच लाख रुपए का इनाम घोषित था। फरारी के दौरान हुई उसकी हत्या ने पूरे शेखावाटी क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और मामला लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। तीन आरोपियों पर टिकीं निगाहें करीब 14 साल तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें गैंगस्टर अनिल उर्फ पांडिया, कपिल और महेश उर्फ पपिया के खिलाफ सुरक्षित रखे गए निर्णय पर हैं। अदालत इन तीनों आरोपियों के संबंध में अपना फैसला बाद में सुनाएगी।

अजब बिजली विभाग के गजब कारनामे! बिना मीटर लगाए थमा दिया ₹1638 का बिल, ‘मिठाई-पानी’ न देने पर उपभोक्ता को बनाया प्रताड़ित!

​गोविन्दगढ़/अलवर : राजस्थान में भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच अलवर जिले के गोविन्दगढ़ से जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) की एक ऐसी अंधेरगर्दी सामने आई है, जिसे सुनकर आप भी अपना सिर पकड़ लेंगे। मामला गोविन्दगढ़ के ग्राम मुंडपूरीखुर्द का है, जहां विभाग ने एक उपभोक्ता को बिना मीटर लगाए और बिना एक यूनिट बिजली की सप्लाई दिए ही ₹1638 का तगड़ा बिल थमा दिया है!

फीस जमा, पर मीटर गायब; चक्कर काट-काटकर उपभोक्ता परेशान
​शिकायत पत्र के अनुसार, स्थानीय निवासी प्रकाश सैनी (पुत्र तुलसी राम सैनी) ने बीते समय 14 मई 2026 को घरेलू बिजली के नए कनेक्शन के लिए बकायदा आवेदन किया था। नियम के मुताबिक उसी तारीख को डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के जरिए पूरी फीस भी जमा कर दी गई थी। लेकिन दो महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित के घर पर मीटर का एक पुर्जा तक नहीं पहुंचा।

‘मिठाई-पानी’ का खेल: पैसे नहीं तो काम नहीं!
​शिकायत में बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित का कहना है कि 14 मई से लेकर अब तक उसने बिजली दफ्तर के अनगिनत चक्कर काटे, लेकिन हर बार काम करने के एवज में ‘मिठाई-पानी’ (रिश्वत) की मांग की गई। जब उपभोक्ता ने ईमानदारी दिखाते हुए रिश्वत देने से मना कर दिया, तो उसे ‘आज-कल’ का बहाना बनाकर महीनों तक दौड़ाया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

​हद हो गई! न तार जुड़ा, न मीटर लगा… पर आ गया ₹1638 का बिल
​विभागीय लापरवाही और तानाशाही की पराकाष्ठा तब देखने को मिली, जब विभाग ने मीटर तो नहीं लगाया, लेकिन पीड़ित के हाथ में ₹1638 का बिजली बिल थमा दिया। सवाल यह उठता है कि जब परिसर में न तो मीटर लगा है और न ही बिजली चालू हुई है, तो यह ₹1638 का आंकड़ा किस ‘जादुई’ मीटर से रीड़ किया गया? क्या यह सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका डालने और वित्तीय अनियमितता का बड़ा सबूत नहीं है?

मुख्यमंत्री और विधायक तक पहुंचा मामला, कार्रवाई की मांग
​इस खुली लूट और उत्पीड़न से तंग आकर पीड़ित उपभोक्ता ने अब माननीय मुख्यमंत्री महोदय और क्षेत्रीय विधायक को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में मांग की गई है कि:
– ​इस फर्जी और अवैध रूप से जारी किए गए ₹1638 के बिल को तुरंत निरस्त किया जाए।
​- ‘मिठाई-पानी’ के नाम पर रिश्वत मांगने वाले गोविन्दगढ़ कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच बिठाकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
– ​पीड़ित के घर अविलंब नया मीटर स्थापित कर बिजली चालू की जाए।

सवाल:
क्या सरकार की नाक के नीचे चल रहे इस ‘मिठाई-पानी’ के खेल पर उच्चाधिकारी संज्ञान लेंगे? या फिर एक आम उपभोक्ता इसी तरह सरकारी दफ्तरों और फर्जी बिलों के बोझ तले पिसता रहेगा?

रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले भगवान जगन्नाथ:रथ को खींचने के लिए उमडे़ भक्त; महामंत्र की धुन पर झूमते रहे श्रद्धालु

कोटा में गुरुवार को महाप्रभु जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकले। शहर के विभिन्न इलाकों में श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्राएं निकाली गईं। इनमें पूरा शहर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। वहीं इस्कॉन की ओर से गुमानपुरा स्थित शीतला माता मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली गई। वृंदावन से मंगाए गए फूलों से सजा रथ इस रथयात्रा का मुख्य आकर्षण वृंदावन से मंगाए गए विशेष सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित रथ रहा। रथ में बलभद्र और सुभद्रा संग साक्षात प्रभु जगन्नाथ विराजित थे। इनके दर्शन पाने के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालु उमड़ पड़े। रथ की भव्यता और भगवान के विग्रह की अनुपम छटा देखते ही बन रही थी। यात्रा के दौरान आए भक्तों की टोली मृदंग, झांझ और मंजीरों की थाप पर दिव्य हरिनाम संकीर्तन करते हुए चल रही थी। रथ को खींचने की मची होड़ महामंत्र की धुन पर झूमते-गाते श्रद्धालुओं ने माहौल को भक्तिमय कर दिया। जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ा, शहरवासियों और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों द्वारा पलक-पावड़े बिछाकर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर महाप्रभु का अभिनंदन किया गया। भक्तों ने भगवान की आरती उतारी। कोटा शहर में कई अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक संगठनों द्वारा पारंपरिक रूप से जगन्नाथ रथयात्राएं निकाली गईं। मान्यता है कि रथयात्रा के दिन भगवान के रथ की डोरी खींचने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी श्रद्धा भाव के साथ लोगों में रथ खींचने की होड़ लगी रही।
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जैसलमेर-दिल्ली एक्सप्रेस अब दिल्ली कैंट पर नहीं रुकेगी:स्टेशन अपग्रेडेशन के चलते 12 अक्टूबर तक बदला शेड्यूल, अन्य ट्रेनें भी होंगी प्रभावित

जैसलमेर से दिल्ली जाने वाले रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर चल रहे मेजर अपग्रेडेशन कार्य के कारण उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने जैसलमेर-दिल्ली रेलसेवा के संचालन में बदलाव किया है। अब गाड़ी संख्या 14088 जैसलमेर-दिल्ली एक्सप्रेस दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकेगी। यह व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है और 12 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। प्लेटफॉर्म पर निर्माण कार्य के कारण लिया गया ब्लॉक मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि दिल्ली कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। इसके लिए ब्लॉक लिया गया है, जिससे रेल संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित रहेगा। इस दौरान दिल्ली कैंट उतरने वाले यात्रियों को अन्य नजदीकी रेलवे स्टेशनों का उपयोग करना होगा। राजस्थान की कई ट्रेनें भी होंगी प्रभावित दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का असर केवल जैसलमेर-दिल्ली एक्सप्रेस पर ही नहीं पड़ेगा। जोधपुर और बीकानेर मंडल से आने-जाने वाली कई अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनें भी इस अवधि में प्रभावित रहेंगी। रेलवे प्रशासन समय-समय पर इनके संचालन में आवश्यक बदलाव करेगा। यात्रा से पहले शेड्यूल जरूर जांचें रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेनों की समय-सारणी, स्टॉपेज और बदले हुए रूट की जानकारी रेलवे पूछताछ सेवा या आधिकारिक रेलवे ऐप के माध्यम से जरूर जांच लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

गर्भ में बेटी होने का झूठा डर-दिखाकर कराते थे गर्भपात:मरीज बनकर दलाल तक पहुंची PCPNDT टीम, जांच करवाने के लिए हरियाणा ले गया था आरोपी

राजस्थान की पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (PCPNDT) टीम ने भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के शातिर दलाल को हरियाणा के डबवाली से गिरफ्तार किया है। आरोपी राकेश कुमार लंबे समय से राजस्थान और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोपी पहले भी साल 2019 में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत गिरफ्तार हो चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया- पीसीपीएनडीटी टीम पिछले छह महीनों से आरोपी राकेश कुमार की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही थी। पुख्ता खुफिया सूचना मिलने के बाद टीम ने एक सुनियोजित रणनीति तैयार की और डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई। आरोपी योजना के तहत एक गर्भवती महिला को डिकॉय ग्राहक (फर्जी मरीज) बनाकर आरोपी दलाल राकेश से संपर्क कराया गया। आरोपी ने भ्रूण लिंग परीक्षण कराने के एवज में 36,500 रुपए की मांग की। सौदा तय होने के बाद आरोपी महिला को जांच करवाने के लिए हरियाणा के डबवाली स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गया, जहां पहले से तैयार बैठी राजस्थान की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। रंगे हाथों गिरफ्तारी और अस्पताल की भूमिका की जांच डॉ. जोगाराम ने बताया- अस्पताल में सोनोग्राफी और अन्य जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही आरोपी ने कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताकर महिला को बाहर भेजा, पहले से घात लगाए बैठी पीसीपीएनडीटी टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने अस्पताल से सोनोग्राफी रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जब्त किए हैं। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे नेटवर्क में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और इससे जुड़े अन्य लोगों की गहनता से जांच कर रहे हैं। बेटी होने की झूठी सूचना देकर कराते थे गर्भपात प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई मामलों में लोगों को झूठी जानकारी देकर गुमराह करता था। आरोपी कथित रूप से गर्भ में बेटी होने की गलत सूचना देकर लोगों को गर्भपात के लिए उकसाता था और इस अवैध धंधे से मोटी रकम वसूलता था। एनएचएम निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया- आरोपी हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर सहित राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से गर्भवती महिलाओं को फुसलाकर हरियाणा ले जाता था और वहां अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करवाता था। 2019 में भी पकड़ा गया था आरोपी आरोपी राकेश कुमार साल 2019 में भी पीसीपीएनडीटी टीम के हत्थे चढ़ चुका था। उस समय संगरिया में उसका अल्ट्रासाउंड सेंटर सीज किया गया था। कुछ साल शांत रहने के बाद वह पिछले दो-तीन सालों से फिर से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया था, जिसे इस बार टीम ने दोबारा दबोच लिया। डिकॉय ऑपरेशन का नेतृत्व बीकानेर के संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र चौधरी ने किया, जिसमें पीबीआई थाना पुलिस और पीसीपीएनडीटी समन्वयकों की टीम शामिल रही।

इंपैक्ट फीचर:भारत का उभरता हुआ उच्च तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षण संस्थान; शेखावटी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स, सीकर (राजस्थान)

राजस्थान की धरती से शुरू हुई एक शैक्षणिक क्रांति, जो आज तकनीकी, मेडिकल और रोजगारोन्मुख शिक्षा का राष्ट्रीय मॉडल बनती जा रही है। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आज केवल डिग्री ही सफलता का पैमाना नहीं रही, बल्कि रोजगार, कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ऐसे दौर में कुछ संस्थान केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि भविष्य का निर्माण करते हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित शेखावटी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। आज SGI केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक बहु-विषयक शैक्षणिक इकोसिस्टम बन चुका है, जहां आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्लेसमेंट और व्यक्तित्व विकास को एक ही परिसर में समाहित किया गया है। संस्थान के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में इसने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, सरकारी सेवाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक सपना जिसने बदल दी हजारों युवाओं की दिशा हर बड़ी संस्था की शुरुआत एक विचार से होती है। SGI की कहानी भी एक ऐसे ही संकल्प से शुरू हुई। संस्थान की स्थापना इंजीनियर रणजीत सिंह ने उस समय की, जब अधिकांश युवा इंजीनियरिंग के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों या विदेशों की ओर बढ़ना चाहते थे। कम्प्यूटर साइंस इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने अलग राह चुनी। उनका विश्वास था कि यदि गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो, तो प्रतिभाशाली युवाओं को अपने सपनों के लिए महानगरों या विदेशों की ओर पलायन नहीं करना पड़े। इसी सोच के साथ 6 मई 2001 को कम्प्यूटर एवं प्रोफेशनल एजुकेशन से शुरुआत हुई। प्रारंभ में BBA, BCA, MBA और MCA जैसे रोजगारोन्मुख कार्यक्रम संचालित किए गए। समय के साथ यह प्रयास राजस्थान के अग्रणी तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षण समूहों में विकसित हो गया। लगभग 90 एकड़ में फैला हरित एवं आवासीय परिसर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए तैयार किया गया है। एक ही परिसर में 50 से अधिक रोजगारोन्मुख कार्यक्रम बहु-विषयक शिक्षा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए SGI एक ही परिसर में 50+ Professional एवं Career-Oriented Programmes संचालित करता है। इनमें— Engineering, Artificial Intelligence Machine Learning, Data Science, Agriculture, BCA, MCA, BBA, MBA, Commerce, Science, Arts, Pharmacy, Nursing,Paramedical,Veterinary Science, Ayurveda, BNYS, Homeopathy, Clinical Psychology, Hotel Management, Teacher Education, Law, Polytechnic, ITI सहित अनेक Degree एवं Diploma Programmes शामिल हैं। Degree भी… Government Job की तैयारी भी आज लाखों युवाओं का सपना IAS, RAS, SSC, Banking, Railway, Defence, Police, Patwari, REET, RPSC, CET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए SGI ने ऐसा शैक्षणिक मॉडल विकसित किया है, जिसमें विद्यार्थी नियमित Graduation के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्थित तैयारी भी कर सकते हैं। संस्थान के विद्यार्थियों ने REET, RPSC, RAS, SSC, CET, Police, Patwari तथा Teacher Recruitment सहित अनेक सरकारी सेवाओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। विशेष रूप से CET में लगभग 60% चयन तथा अनेक बैचों के विद्यार्थियों का विभिन्न सरकारी विभागों में चयन संस्थान की उपलब्धियों को दर्शाता है। यहां डिग्री के साथ Placements की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। इसी विज़न के साथ SGI ने शिक्षा, कौशल विकास और Industry Connect का ऐसा सशक्त मॉडल विकसित किया है, जिसने इसे Academic Excellence के साथ-साथ Placement Excellence की भी पहचान दिलाई है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास, Communication Skills, Resume Building, Mock Interviews, Corporate Grooming, Internships और Career Development Programmes के माध्यम से विद्यार्थियों को पहले दिन से ही Industry Ready बनाया जाता है। इसी सुदृढ़ तैयारी का परिणाम है कि प्रत्येक वर्ष SGI परिसर में विभिन्न विभागों के लिए दो भव्य Mega Placement Drives आयोजित किए जाते हैं। देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ SGI पहुँचती हैं और Engineering, Information Technology, Agriculture, Management, Pharmacy, Healthcare, Education तथा अन्य Professional Domains के विद्यार्थियों को उत्कृष्ट करियर अवसर प्रदान करती हैं। यह केवल Placement Drive नहीं… यह वर्षों की Academic Excellence पर उद्योग जगत के विश्वास का प्रमाण है। पिछले 25 वर्षों में SGI का 40,000 से अधिक Alumni Network देश और विदेश के विभिन्न उद्योगों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉर्पोरेट संगठनों, स्टार्टअप्स तथा सरकारी सेवाओं में अपनी सफलता की नई पहचान बना चुका है। आज SGI का कोई न कोई विद्यार्थी भारत के लगभग हर प्रमुख सेक्टर में अपनी प्रतिभा का योगदान दे रहा है। इस गौरवशाली यात्रा के पीछे है संस्थान के Chairman रणजीत सिंह की दूरदर्शी सोच—एक ऐसा विज़न जिसने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे रोजगार, कौशल, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा। यही कारण है कि आज Shekhawati Group of Institutions, Sikar केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं… बल्कि हजारों परिवारों के विश्वास, लाखों सपनों और सफल करियर की पहचान बन चुका है। SGI Sikar… जहाँ Academic Excellence से शुरू होती है यात्रा, और Placement Excellence पर बनती है सफलता की नई कहानी। Key Highlights देश-विदेश की प्रतिष्ठित Multinational Companies, Hospitals, Research Organisations, Educational Institutions तथा Government Departments में कार्यरत हजारों Alumni संस्थान की गुणवत्ता के सशक्त प्रमाण हैं। सम्मान जो गुणवत्ता की गवाही देते हैं SGI की शैक्षणिक उत्कृष्टता को समय-समय पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष इंजीनियर रणजीत सिंह को उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा के लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया गया। संस्थान को Hindustan Times, Bikaner Technical University, Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र तथा भारत सरकार के केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा भी विभिन्न अवसरों पर सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान संस्थान की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्कृष्ट शिक्षा के प्रमाण हैं। Learn Today. Lead Tomorrow. Admissions Open | Session 2026–27

बारिश के लिए मेंढक बना दूल्हा, मेंढकी ने पहना लहंगा:ढोल नगाड़ों पर बाजार में निकली बारात; हल्दी-मेहंदी और विदाई भी हुई

प्रदेश में अच्छी बारिश के लिए बांसवाड़ा में मेंढक-मेंढ़की की शादी करवाई गई। मेंढक को दूल्हे की तरह कपडे पहनाए गए। वहीं मेंढ़की को लहंगा पहनाया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाजार में बारात निकाली गई। इससे पहले शहर के लोगों को शादी के कार्ड भी बांटे गए और विवाह में शामिल होने का न्योता दिया गया। वैदिक परंपरा की तरह हल्दी और मेहंदी की रस्म भी निभाई गई। प्रदेश में अच्छी बारिश की कामना की बांसवाड़ा के क्रांतिकारी तरुण मंच और डेगली माता चौक क्षेत्र के लोगों ने ये शादी करवाई। ​आयोजन से जुड़े क्रांतिकारी तरुण मंच के पदाधिकारी अशोक मधहोश ने बताया- राजस्थान में बरसात नहीं आ रही है, जिससे किसान चिंतित हैं और हर समाज का हर वर्ग परेशान है। खेतों में फसलें सूख रही हैं और पानी पीने की भी समस्या आ रही है। किसान ने महंगा बीज बोया है, लेकिन पानी नहीं आ रहा। इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है कि पानी की बहुत आवश्यकता है। ऐसे में सालों पुरानी मेंढक मेंढकी के विवाह की परंपरा को आयोजित किया गया। तस्वीरों में देखें बारात… अच्छी बारिश की मान्यता; शादी के कार्ड भी बांटे मधहोश ने बताया- डेगली माता चौक पर मेंढक-मेंढकी का शुभ विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया। मान्यता है कि ऐसा करने से बरसात अच्छी होती है। इस साल भी हमारी यही भावना है कि अच्छी बरसात हो और सबका मंगल ही मंगल हो। शादी से पहले बाकायदा पूरे शहर में निमंत्रण पत्रिकाएं बांटी गईं थी। लोगों को इस मांगलिक समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया था। दूल्हा-दुल्हन जैसे तैयार किया मधहोश ने बताया- ​विवाह की रस्में पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ डेगली माता चौक पर शुभ मुहूर्त में संपन्न कराई गईं। आम शादियों की तरह ही मेंढक और मेंढकी को दूल्हा-दुल्हन की तरह कपड़े पहनाए गए, उन्हें जेवर पहनाए गए तथा गुलाल और हल्दी-मेहंदी जैसी सभी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। समारोह के अंत में उपस्थित लोगों को मिठाई बांटकर शुभकामनाएं दी गईं। इस अनूठे विवाह को देखने के लिए शहरभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मेंढकी की विदाई भी की ढोल-नगाड़ों की धुन पर बारात निकाली गई। बारात डेगली माता चौक से शुरू होकर गणेश मंदिर और आजाद चौक होते हुए वापस आयोजन स्थल पर पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मेंढक-मेंढकी के सात फेरे करवाए गए, जिसके बाद मेंढकी की विदाई की रस्म भी पूरी की गई।