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स्कूलों में आधे टीचर, नई हॉस्पिटल बिल्डिंगों में टपकती छत:घटिया निर्माण वाले फर्म होंगे ब्लैकलिस्ट, MLA बोले-योजनाएं जमीन पर दिखनी चाहिए

चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट में ‘दिशा’ की बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की कई कमियां उजागर हुईं। पहली ही बारिश में नए अस्पतालों की छत टपकने, सरकारी स्कूलों में केवल 50% शिक्षक होने और 78 नए स्कूल भवन खाली पड़े रहने जैसे मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से जवाब मांगे। सांसद सीपी जोशी ने घटिया निर्माण करने वाली फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए, जबकि विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि योजनाएं कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। बैठक में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि करोड़ों रुपए से बने कई अस्पतालों की नई इमारतों में पहली ही बारिश में छत टपकने लगी। उन्होंने घटिया निर्माण करने वाली फर्म पर कार्रवाई की मांग की। इस पर सांसद सीपी जोशी ने ऐसी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। अस्पतालों में उपयोग नहीं हो रहीं एलईडी स्क्रीन को सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए लगाने का सुझाव भी दिया गया। स्कूलों में शिक्षक कम, भवन खाली और जर्जर बैठक में सामने आया कि जिले के सरकारी स्कूलों में जरूरत के मुकाबले केवल करीब 50% शिक्षक कार्यरत हैं। 17 पीएमश्री स्कूल भी स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। जिले की 481 में से 399 स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड और आरओ की सुविधा है, लेकिन शिक्षकों की कमी से इनका पूरा लाभ नहीं मिल रहा। 72 स्कूलों को नई बिल्डिंग की जरूरत है, जबकि 78 नए स्कूल भवन खाली पड़े हैं। इन्हें पंचायतों को सौंपकर लाइब्रेरी या सामुदायिक उपयोग में लेने का सुझाव दिया गया। जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और खेल मैदानों पर अतिक्रमण रोकने की भी मांग उठी। राशन घोटाला और 20 करोड़ के सड़क कार्य भी चर्चा में बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गेहूं घोटाले पर सांसद सीपी जोशी ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। विधायक आक्या ने बताया कि डामर की कीमतें बढ़ने से करीब 20 करोड़ रुपए के सड़क निर्माण कार्य रुके हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद डामर महंगा होने से ठेकेदारों ने काम रोक दिया है। बैठक में बस्सी उप जिला अस्पताल सहित कई लंबित परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन और जल्द फंड जारी कराने पर भी चर्चा हुई।

राजस्थान दिनभर, 10 बड़ी खबरें:जेल में 2 हत्यारों की शादी; लड़की की सगाई को लेकर विवाद, 3 की हत्या; बारिश के लिए अनोखी शादी

नमस्कार, आज की सबसे बड़ी खबर बीकानेर जिले से है। यहां लड़की की सगाई को लेकर हुए विवाद में पिता-पुत्र समेत 3 लोगों की हत्या कर दी गई। चलिए सिलसिलेवार पढ़ते हैं, राजस्थान दिनभर में क्या कुछ खास रहा… पहले टॉप 5 खबरें
1. हाईकोर्ट बोला- 5 दिन में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख बताएं
प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर आज भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि 5 दिन में (सोमवार तक) चुनाव की तारीख बताएं। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयुक्त से कहा- आप क्यों चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करें। पूरी खबर पढ़ें 2. लड़की की सगाई को लेकर विवाद, 3 की हत्या
बीकानेर जिले के सुरजनवाली गांव में लड़की के रिश्ते को लेकर हुई कहासुनी में पिता-पुत्र समेत 3 की हत्या कर दी। झगड़ने वाले दोनों पक्ष रिश्तेदार है। चाकू से एक-दूसरे पर हमला किया गया। तीनों के पेट में वार किए गए। ज्यादा खून बह जाने से मौत हुई है। पूरी खबर पढ़ें 3. सिजेरियन के बाद एक और महिला की तबीयत बिगड़ी
कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक बार और महिला की तबीयत बिगड़ी गई। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद महिला के टांके बार-बार खुलते रहे, जिसके कारण बच्चेदानी निकालनी पड़ी। अब यूरिन बंद होने जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें 4. व्यापारी के बेटे के सिर में गोली मारकर हत्या
अलवर के नौगांवा इलाके में टेंट व्यापारी के 16 साल के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। एक गोली सिर के आर-पार हो गई, जबकि दूसरी गोली जबड़े में फंस गई। लड़के का शव अलवर शहर से करीब 45 किमी दूर एक फार्म हाउस की दीवार के पास पहाड़ी पर मिला। पूरी खबर पढ़ें 5. राजस्थान में पहली बार जेल में 2 हत्यारों की शादी
जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक-युवती 22 जुलाई को फेरे लेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसकी अनुमति दे दी है। राजस्थान के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी ओपन जेल परिसर के भीतर 2 दोषियों की शादी होगी। पूरी खबर पढ़ें अब 3 अहम खबरें
6. डेडबॉडी को लेकर ASP पर भड़कीं सांसद संजना जाटव
डीग जिले के चौकीपुरा गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद हंगामा हो गया। परिवार ने पीट-पीटकर हत्या का आरोप लगाया। मांगें नहीं मानने पर सांसद संजना जाटव ने डेडबॉडी को IG ऑफिस ले जाने की कोशिश की। ASP ने रोका तो सांसद भड़क गईं। पूरी खबर पढ़ें 7. डॉक्टर बोला- मैं अनपढ़ तो हूं, मुझे हॉस्पिटल से बाहर निकालो
झुंझुनूं के बीडीके हॉस्पिटल में डॉक्टर ने एक्स-रे देखने के बाद भी मरीज के फ्रैक्चर नहीं बताया और दवाइयां देकर भेज दिया। बाद में एक कंपाउंडर ने सीने में फ्रैक्चर बताया। परिजन दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचे तो बहस हो गई। इस दौरान डॉक्टर ने कहा- मैं तो अनपढ़ हूं, मुझे हॉस्पिटल से बाहर निकालो। पूरी खबर पढ़ें 8. 95 किलो चांदी के रथ पर निकले भगवान जगन्नाथ
उदयपुर शहर में राजस्थान की सबसे बड़ी और देश में तीसरी बड़ी जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई। जगदीश मंदिर से भगवान जगन्नाथ 95 किलो चांदी के रथ पर माता लक्ष्मी और दानीरायजी के साथ विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान भगवान को 21 बंदूकों की सलामी दी गई। पूरी खबर पढ़ें खबर जो हटकर है
9. बारिश के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी करवाई
बांसवाड़ा जिले में अच्छी बारिश के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी करवाई गई। इसके लिए पहले पूरे शहर में निमंत्रण पत्रिकाएं बांटी गईं और गुलाल-मेहंदी की रस्में निभाई गईं। मेंढक-मेंढकी को दूल्हा-दुल्हन की तरह कपड़े-गहने पहनाए गए और ​वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फेरे करवाए गए। पूरी खबर पढ़ें कल क्या होगा खास
10. राजस्थान के कई रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे मोदी
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को राजस्थान के जैसलमेर समेत कई रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे।

सब्जी का ठेला लगाकर जयपुर में कलाकारों ने बेचा पेपर!:सोनम वांगचुक के समर्थन में बुलंद की आवाज, लाइव पेंटिंग से दिया संदेश

जयपुर में गुरुवार को कलाकारों ने सोनम वांगचुक के समर्थन में अनोखा प्रदर्शन किया। मालवीय नगर स्थित करी लीफ कैफे में आयोजित ‘रंगों से समर्थन’ लाइव पेंटिंग सेशन में 25 से अधिक कलाकारों ने कैनवास और पेपर पर चित्र बनाकर सोनम वांगचुक के आंदोलन के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान कलाकारों ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को अपनी कलाकृतियों के केंद्र में रखा। कार्यक्रम में हर कलाकार ने अपने अलग अंदाज में सोनम वांगचुक के व्यक्तित्व, उनके संघर्ष और शिक्षा सुधार की मांग को चित्रों में उकेरा। किसी ने उन्हें युवाओं की उम्मीद के रूप में दर्शाया तो किसी ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग को प्रतीकात्मक रूप से रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में युवा, कला प्रेमी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग पहुंचे और कलाकारों के कार्यों को करीब से देखा। कलाकार में आलू, प्याज की तरह पेपर बिकते हुए दिखाया कार्यक्रम का सबसे चर्चित एक कलाकार की व्यंग्यात्मक प्रस्तुति रही। कलाकार ने सब्जी विक्रेता का रूप धारण कर आलू, टमाटर, मिर्च और प्याज के साथ सरकारी भर्ती परीक्षाओं के ‘पेपर बेचने’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। हाथ में माइक लेकर विभिन्न सरकारी भर्तियों के नाम पुकारते हुए पेपर की बोली लगाती नजर आई। इस अनोखी प्रस्तुति के माध्यम से कलाकार ने राज्य में सामने आए पेपर लीक प्रकरणों और भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष किया, जिसे देखने वालों ने खूब सराहा। कई कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स में भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखा। चित्रों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी नहीं होगी तो लाखों युवाओं के सपने प्रभावित होंगे। कलाकारों का मानना था कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद स्थापित करने का सशक्त जरिया भी है। आयोजक विनीता ने बताया- इस आयोजन का उद्देश्य सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण आंदोलन और शिक्षा सुधार की मांग के प्रति एकजुटता व्यक्त करना है। सोनम वांगचुक लगातार पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। उनके समर्थन में कलाकारों ने यह तय किया कि वे रंगों के माध्यम से उनकी आवाज को समाज तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और ऐसे समय में समाज के हर वर्ग को अपनी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। कलाकारों ने भी अपनी कला को आंदोलन का माध्यम बनाते हुए यह संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पूरे समाज को साथ आना होगा।

टेक महिंद्रा का मुनाफा 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़:पहली तिमाही में रेवेन्यू 17.6% बढ़ा, कंपनी की टोटल इनकम ₹15,605 करोड़ रही

टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 28% बढ़कर ₹1,465 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q1FY26) में कंपनी को ₹1,140 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (16 जुलाई) को कंपनी ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए हैं। नतीजों के पहले टेक महिंद्रा का शेयर 1.13% बढ़कर 1,515 रुपए पर बंद हुआ। बीते एक साल में शेयर 6% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.48 लाख करोड़ रुपए है। रेवेन्यू 17.67% बढ़कर ₹15,711 करोड़ रहा टेक महिंद्रा के ऑपरेशन से रेवेन्यू में सालाना आधार पर 17.67% की बढ़ोतरी हुई है। FY27 की पहली तिमाही में ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹15,711 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही यानी FY26 की पहली तिमाही में रेवेन्यू ₹13,351 करोड़ रहा था। पहली तिमाही में कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार (YoY) पर 15% बढ़कर 15,605 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 13,569 करोड़ रुपए थी। कॉन्सोलिडेटेड यानी पूरी कंपनी की रिपोर्ट कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। ये खबर भी पढ़ें… विप्रो को पहली तिमाही में ₹3,352 करोड़ का मुनाफा: रेवेन्यू 10% बढ़ा, कंपनी ने ₹2 डिविडेंड का ऐलान किया; एट्रिशन रेट 13.9% रहा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का पहली तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 0.6% बढ़कर 3,352 करोड़ रुपए रहा। पूरी खबर पढ़ें…

बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका:ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा

म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।

कब्रिस्तान में हार्ट अटैक से व्यक्ति की मौत:पौधों में पानी देने गया था, घरवालों को जमीन पर पड़ा मिला

पाली शहर में कब्रिस्तान में इबादत करने और पौधों को पानी देने गए व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजनों के पहुंचने पर बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े मिले। तुरंत टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रोज की तरह इबादत करने गए थे भाई अख्तर हुसैन ने बताया, जंगीवाड़ा निवासी मोहम्मद रमजान (52) पुत्र हब्बास खान पेशे से ड्राइवर थे। गुरुवार सुबह वे अपनी वैन से बच्चों को स्कूल छोड़कर लौटे। इसके बाद रोज की तरह रामलीला मैदान के पास स्थित कुरैशी समाज के कब्रिस्तान में फातिया (इबादत) करने और वहां लगे पौधों में पानी देने पहुंचे। अचानक गिरे, लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया इबादत के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे कब्रिस्तान में ही गिर पड़े। वे पहुंचे तो रमजान बेहोशी की हालत में पड़े थे। लोगों की मदद से बेहोशी की बिना देर किए टैक्सी से पाली के बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक से मौत हो बताया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों को खुलासा हो होगा। — हार्ट से मौत की ये खबरें भी पढ़ें … 1. पाली में चलती बस में ड्राइवर की मौत का VIDEO:इंदौर से जोधपुर जा रही थी लग्जरी स्लीपर, हार्ट-अटैक की आशंका पाली में एक चलती बस में 36 साल के ड्राइवर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। यह घटना बस में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पूरी खबर पढ़िए 2. SMS ​हॉस्पिटल के डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत:महाराष्ट्र में सेमिनार के दौरान सीने में उठा दर्द; तीन दिन पहले महिला की सर्जरी की थी सीनियर जनरल सर्जन डॉ. बी.एल. यादव की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। वे महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में सर्जन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गए थे। पूरी खबर पढ़िए

50 लाख में स्कूल लेक्चरर का पेपर खरीदने वाला गिरफ्तार:7 लाख लेकर पेपर पढ़ाया; सीनियर टीचर का पेपर 29 अभ्यर्थियों तक पहुंचाया

स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में एसओजी ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 50 लाख में लीक पेपर खरीदकर अभ्यर्थियों को पढ़ाया था। सरकारी नौकरी भी दिलवाई थी। एसओजी ने आरोपी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ (45) निवासी पापड़िया की ढाणी, जयपुर को गुरुवार को चौमूं से गिरफ्तार किया है। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- एसओजी थाने में दर्ज केस की जांच में सामने आया था कि पेपर लीक गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह ने तत्कालीन RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से करीब 60 लाख रुपए में प्रश्नपत्र हासिल किए थे। इसके बाद कृषि विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल और शारीरिक शिक्षा सब्जेक्ट के सॉल्व पेपर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। 50 लाख में खरीदा पेपर, 7 लाख लेकर कराया चयन जांच में खुलासा हुआ कि विनोद रेवाड़ ने करीब 50 लाख रुपए में 4 सब्जेक्ट के सॉल्व प्रश्नपत्र खरीदे। इसके बाद कृषि विज्ञान विषय के अभ्यर्थी अशोक कुमार यादव को 7 लाख रुपए में प्रश्नपत्र पढ़ाया। परिणामस्वरूप अशोक कुमार यादव का चयन स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) के पद पर हुआ। वो वर्तमान में सीकर जिले के श्रीमाधोपुर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (देवराला) में कार्यरत था। 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। इस मामले में उसने 8 अभ्यर्थियों से करीब 10-10 लाख रुपए लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। आरोपी को साल 2025 में ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। 29 अभ्यर्थियों से वसूले 57 लाख रुपए वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 के मामले में भी जांच में सामने आया कि विनोद रेवाड़ ने 29 अभ्यर्थियों से करीब 57 लाख रुपए लेकर उन्हें परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र पढ़ाया। इस मामले में आरोपी अरुण शर्मा उर्फ राजेश शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली 13 जुलाई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने विनोद रेवाड़ की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 16 जुलाई को SOG की विशेष टीम ने चौमूं के बराला हॉस्पिटल के पास से बुधवार को गिरफ्तार किया। । 20 जुलाई तक रिमांड पर आरोपी को न्यायालय में पेश कर 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। SOG उससे पेपर लीक नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और अवैध लेनदेन के संबंध में पूछताछ कर रही है।

8 साल के बच्चे को टीचर ने बुरी तरह पीटा:बेहोश हुआ तो घरवालों को बुलाया, गणित की कॉपी घर भूल गया था स्टूडेंट

बाड़मेर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में टीचर ने मैथ की कॉपी नहीं लाने पर चौथी क्लास के स्टूडेंट को डंडे से बुरी तरह पीटा। जिससे बच्चा बेहाश हो गया। यह देख स्कूल स्टाफ घबरा गया। एक टीचर ने स्टूडेंट के परिजनों को सूचना दी। परिजन स्कूल पहुंचे और बच्चे को हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। मामला चौहटन के टीपीएस पब्लिक स्कूल का गुरुवार सुबह 10 बजे का है। डॉ. रतनाराम चौधरी ने बताया – हॉस्पिटल में बच्चे को करीब 10.30 बजे लाया गया था। तुरंत इलाज के बाद हालत में सुधार आ गया था। करीब आधे घंटे तक ओपीडी में निगरानी में रखा गया। मारपीट से नीले निशान (नील) पाए गए। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी। वहीं स्कूल संचालक का कहना है कि मामले में टीचर की गलती होगी तो उसे स्कूल से निकाल देंगे।
कॉपी भूलने पर टीचर ने डंडे से पीटा बच्चे के पिता ने बताया – मेरा 8 साल का बेटा प्राइवेट टीपीएस पब्लिक स्कूल में चौथी क्लास में पढ़ता है। गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे बस से स्कूल गया था। करीब 10 बजे क्लास में गणित के टीचर गणपत ने कॉपी मांगी। बच्चे ने बताया कि वह गणित की कॉपी घर पर भूल गया है। कल लेकर आएगा। इस पर टीचर ने डंडे से उसकी पिटाई कर दी। जिससे उसे चक्कर आने लगे और बच्चा अचेत हो गया। इसके बाद स्कूल के अन्य टीचर जसवंत ने हमें फोन करके तबीयत बिगड़ने की सूचना दी। सूचना मिलने पर हम स्कूल पहुंचे तो बेटे की तबीयत खराब थी। पूछने पर उसने बताया कि गणित की कॉपी घर पर छूटने पर शिक्षक ने डंडे से पीटा। इसके बाद हम उसे चौहटन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज कराया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे का का बयान लिया। स्कूल संचालक जगदीश विश्नोई ने बताया- बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था, जिस पर टीचर ने उसे डंडे से मारा। मैं फिलहाल बाहर हूं। वापस लौटने पर पूरे मामले की जांच करेंगे और यदि टीचर की गलती पाई गई तो उसे स्कूल से हटा दिया जाएगा।

जांच समिति ने माना- मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति अनुसूचित:1950 से लेकर अब तक के सरकारी रिकॉर्ड से पुष्टि; वैध प्रमाण पत्र लगाया था

नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति ने जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को वैध माना है। समिति ने कहा कि राज्यमंत्री बागरी के परिवार के राजपूत होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। समिति के मुताबिक, शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके उलट 1950 से लेकर अब तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज उनके परिवार के अनुसूचित जाति से संबंधित होने की पुष्टि करते हैं। समिति ने कहा- आजादी के बाद के शुरुआती राजस्व रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण सबूत हैं। इनमें राज्यमंत्री के परिवार की जाति बागरी दर्ज है। ऐसे रिकॉर्ड में बाद में बदलाव की संभावना कम मानी जाती है इसलिए इन्हें विशेष महत्व दिया गया। कांग्रेस नेता ने लगाई थी याचिका दरअसल, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 24 अप्रैल को याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने फैसला राज्यस्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति पर छोड़ा था। कोर्ट ने समिति को 60 दिन में निर्णय लेने को कहा था लेकिन इसने 14 जुलाई को ही अंतिम फैसला दे दिया। समिति के अध्यक्ष गुलशन बामरा, सचिव सत्येंद्र सिंह जबकि सदस्य- विषय विशेषज्ञ मातादीन कनेरिया और सुधीर श्रीवास्तव थे। परिवार के दूसरे दस्तावेजों से भी बागरी होने की पुष्टि समिति ने राजस्व अभिलेख, खसरा-खतौनी, परिवार की वंशावली, स्कूल रिकॉर्ड, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज, पूर्व में जारी जाति प्रमाणपत्र, परिवार के सदस्यों के अभिलेख और संबंधित विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड जांचे। सभी में परिवार की जाति बागरी ही दर्ज मिली। किसी भी दस्तावेज में परिवार को राजपूत नहीं बताया गया। राजस्व अधिकारी, जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी और अन्य विभागों से रिपोर्ट भी ली गई। सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद फैसला किया गया। शिकायतकर्ता न्यायिक मंच पर चुनौती देने स्वतंत्र समिति ने अपने अंतिम निष्कर्ष में कहा- उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र वैध है। इसे निरस्त करने का कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं मिला इसलिए शिकायत को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि शिकायतकर्ता इस निष्कर्ष से असहमत हैं तो वे सक्षम न्यायिक मंच पर इसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। शिकायतकर्ता बोले- 6 महीने में पूर्व मंत्री हो जाएंगी कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा- छानबीन समिति ने देखभाल समिति का काम किया है। इस समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी की देखभाल बहुत अच्छे से की है। संवैधानिक दस्तावेजों और तथ्यों को दरकिनार कर दिया गया। ये खबर भी पढ़ें… मंत्री प्रतिमा बोलीं- अपराधियों जैसे सलूक से दुखी हूं मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सुनवाई की। मंत्री ने वंशावली से संबंधित दस्तावेज समिति को देते हुए कहा- मैं बागरी समाज से हूं, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल है। मेरी जाति साबित करने के लिए गांव में मुनादी कराई गई, अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। मैं इससे दुखी हूं। पढे़ं पूरी खबर…

बेटी का मर्डर करने वाले को 10 साल की जेल:पढ़ाई नहीं करने पर मुक्कों से मार-मार कर ली थी जान, 13 गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

आबूरोड के गांधीनगर क्षेत्र स्थित प्रेम नगर में 11वीं कक्षा की छात्रा मोमिना की हत्या के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। छात्रा की मौत का मामला अप्रैल 2024 में सामने आया था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। 5 अप्रैल 2024 को छात्रा के चाचा अकरम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके भाई फतेह मोहम्मद ने फोन कर उसे घर बुलाया। मौके पर पहुंचने पर उसकी भतीजी मोमिना घर के फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। पूछताछ में सामने आया कि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता ने बेटी के साथ मारपीट की थी। आरोप था कि फतेह मोहम्मद ने लकड़ी, थप्पड़ों और मुक्कों से मोमिना की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसे गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आबूरोड अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 11वीं की परीक्षा शुरू होने वाली थी जांच में सामने आया था कि मोमिना की 11वीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली थी। परिवार के अनुसार पिता पढ़ाई को लेकर उस पर लगातार दबाव बना रहा था। घटना से पहले भी दो दिनों तक उसके साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई थी। मोमिना ने इससे पहले 10वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह आबूरोड के अर्बुद स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा थी। चाचा की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था हत्या का मामला घटना के बाद मोमिना के चाचा अकरम की शिकायत पर आबूरोड सिटी थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी पिता फतेह मोहम्मद को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। 13 गवाहों और 30 दस्तावेजों के आधार पर हुई सुनवाई मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए, 30 दस्तावेज और दो आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फतेह मोहम्मद को दोषी माना। अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा अपर सत्र न्यायालय संख्या-1 ने आरोपी फतेह मोहम्मद को 10 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत का यह फैसला करीब दो वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। — इस घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- पढ़ाई नहीं करने पर पिता ने बेटी को मार डाला: परीक्षा के 2 दिन पहले से कर रहा था मारपीट; बेहोश हुई तो हॉस्पिटल लेकर पहुंचे घरवाले पिता ने 11वीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी को पीट-पीटकर मार डाला। परीक्षा की तैयारी नहीं करने से पिता नाराज था। बेटी को लकड़ी और मुक्का से इतना मारा कि उसे अंदरूनी चोटें आईं। (पूरी खबर पढ़ें)