लाइसेंस सस्पेंड हुआ तो बहाली से पहले रिफ्रेशर ट्रेनिंग जरूरी

सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस बहाली की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब किसी चालक का लाइसेंस निलंबित होने पर सिर्फ निलंबन अवधि पूरी होने से लाइसेंस अपने आप सक्रिय नहीं होगा। लाइसेंस दोबारा चालू कराने के लिए चालक को परिवहन विभाग से मान्यता प्राप्त संस्थान में अनिवार्य रिफ्रेशर ट्रेनिंग कोर्स करना होगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ही लाइसेंस बहाल होगा। नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ दंड देना नहीं है। चालकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। परिवहन विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण से चालकों को यातायात नियमों की बेहतर जानकारी मिलेगी। आगे नियमों का पालन ज्यादा जिम्मेदारी से होगा। रिफ्रेशर कोर्स में सड़क सुरक्षा के नियम, सुरक्षित ड्राइविंग, ट्रैफिक संकेतों का पालन, दुर्घटना से बचाव के उपाय, आपातकाल में सही व्यवहार, मोटर वाहन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र जारी होगा। यह प्रमाण-पत्र जिला परिवहन कार्यालय में जमा कराने के बाद ही लाइसेंस फिर से सक्रिय किया जाएगा। परिवहन विभाग ने चालकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें। तय गति सीमा में वाहन चलाएं। शराब पीकर वाहन चलाने से बचें। सड़क सुरक्षा के सभी नियम मानें। विभाग ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को दंडित करना नहीं है। सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति विकसित करना है। इन मामलों में लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई परिवहन विभाग के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाना, ओवरस्पीड, खतरनाक ड्राइविंग, बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन तथा अन्य गंभीर मामलों में पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई के तहत ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जाता है। पहले तीन माह की निलंबन अवधि पूरी होने पर लाइसेंस स्वतः सक्रिय हो जाता था, लेकिन अब यह सुविधा समाप्त कर दी गई है। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, बिना प्रशिक्षण नहीं मिलेगा लाइसेंस जिला परिवहन अधिकारी अभिजीत सिंह का कहना है कि लगातार यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था से वाहन चालकों में अनुशासन बढ़ेगा, नियमों के प्रति जागरूकता आएगी और सड़क हादसों में कमी लाने में मदद मिलेगी। नई गाइडलाइन के अनुसार निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद भी लाइसेंस तब तक निष्क्रिय रहेगा, जब तक चालक रिफ्रेशर प्रशिक्षण पूरा कर उसका प्रमाण-पत्र जमा नहीं करा देता। इसके बाद ही विभाग लाइसेंस को पुनः सक्रिय करेगा।

बहरावंडा खुर्द में 20 मिनट तक हुई बारिश, उमस से मिली राहत

क्षेत्र में बुधवार को करीब 20 मिनट बारिश हुई। भीषण उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिली। दोपहर बाद मौसम बदला। आसमान में काले बादल छाए। तेज हवा चली। बारिश शुरू हुई। पूरे क्षेत्र का मौसम सुहावना हो गया। सड़कों पर पानी बहने लगा। तापमान में गिरावट दर्ज हुई। कई दिनों से गर्मी और उमस से लोग परेशान थे। बारिश के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। बच्चे घरों से बाहर निकले। बारिश का आनंद लिया। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी मौसम खुशनुमा रहा। लोगों के चेहरों पर खुशी दिखी। बारिश से किसानों में सबसे ज्यादा खुशी रही। किसान गिरधर जाट, पुष्पेंद्र चौधरी, चेतन जाट ने कहा कि यह वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभदायक होगी। खेतों में बोई सोयाबीन, बाजरा, मक्का, उड़द को नमी मिली। बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद है। जिन किसानों ने अभी बुवाई नहीं की है, उनके लिए भी बारिश अनुकूल मानी जा रही है। खेतों में नमी बढ़ी। कृषि कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। बारिश करीब 20 मिनट ही हुई। इस दौरान अच्छी वर्षा हुई। खेतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता बनी। ग्रामीणों ने इसे मौसम के लिहाज से राहत भरा बताया। मौसम साफ हुआ। ठंडी हवाएं चलती रहीं। शाम तक वातावरण सुहावना बना रहा।

पुलिस महकमे में फेरबदल; 9 सीआई जिले में आएंगे, 6 का यहां से तबादला

चूरू | बीकानेर रेंज आईजी ओमप्रकाश ने बुधवार को रेंज में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 24 सीआई के तबादला आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार चूरू को 9 नए सीआई मिले हैं, जबकि यहां तैनात छह सीआई का अन्य जिलों में तबादला हुआ है। जल्द ही 9 सीआई चूरू एसपी ऑफिस में जॉइनिंग रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके बाद सर्किलों या थाने सौपेंगे। सूची के अनुसार सीआई सुभाष कच्छावा, कैलाशचंद्र अपने प्रार्थना पत्र और जगदीश सिंह गोदारा, हनुमानाराम प्रशासनिक आधार पर हनुमानगढ़ से चूरू आएंगे। सीआई राजेंद्र सिंह, बजरंगलाल, अजय कुमार प्रार्थना पत्र व कृष्ण कुमार प्रशासनिक आधार पर श्रीगंगानगर से चूरू आ रहे हैं। सीआई धीरेंद्र सिंह शेखावत प्रशासनिक आधार पर बीकानेर से चूरू आएंगे।
जिले के आठ एसएचओ के पद हुए रिक्त : जिले में पांच थानों में एसएचओ के पद बुधवार की सूची के बाद हुए हैं। इससे पहले भानीपुरा एसएचओ अरविंद कुमार, बीदासर एसएचओ दिलीप सिंह व सांडवा एसएचओ चौथमल का दूसरी रेंज में तबादला हो गया। जिले से 6 सीआई को बीकानेर, हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर भेजा है। हमीरवास एसएचओ राय सिंह, सुजानगढ़ सदर एसएचओ पुष्पेंद्र झाझड़िया प्रार्थना पत्र व सरदारशहर एसएचओ मदनलाल विश्नोई, चूरू डीएसटी प्रभारी जयप्रकाश झाझड़िया का प्रशासनिक आधार पर चूरू से हनुमानगढ़ तबादला किया है। सिद्धमुख एसएचओ इमरान खान का श्रीगंगानगर व राजलदेसर एसएचओ सुरेंद्र बारुपाल का प्रार्थना पत्र के आधार पर बीकानेर तबादला हुआ है।

डॉक्टर बोले-हम उनके कलेजे पर कटर नहीं चला पाएंगे:मोर्चरी के जिस टेबल पर हर दिन अनजान शवों की चीरफाड़ करते थे, वहां लेटे थे गुरु

प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल की मोर्चरी ने अपने इतिहास में कई भयानक और वीभत्स मंजर देखे हैं, लेकिन सोमवार का दिन यहां के डॉक्टरों के लिए सबसे कठिन और रूह कंपा देने वाला रहा। रोजाना अनजान शवों का पोस्टमार्टम करने वाले फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों के सामने जब उनके अपने मार्गदर्शक, गुरु और विभागाध्यक्ष डॉ. नंदलाल डिसानिया का शव आया, तो पूरी मोर्चरी चीखों और आंसुओं में डूब गई। जूनियर से लेकर सीनियर डॉक्टरों ने एक सुर में कह दिया-‘आज हमसे मत कराइए… हम अपने गुरु के कलेजे पर कटर या छुरी नहीं चला पाएंगे।’ जाते-जाते नई मोर्चरी और प्रदेश की पहली आधुनिक लैब दिला गए ‘डॉ. डिसानिया की खुदकुशी से पूरा मेडिकल कॉलेज स्तब्ध था लेकिन सबसे बड़ी परीक्षा फॉरेंसिक विभाग की थी…। सीनियर प्रोफेसर डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया, ‘जब मोर्चरी में पोस्टमार्टम करने को कोई भी डॉक्टर तैयार नहीं था। एक बार विचार आया कि पोस्टमार्टम किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में ट्रांसफर कर दें। फिर दिल पर पत्थर रखकर साथियों को समझाया।’ इसके बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। इसमें डॉ. दीपाली पाठक, डॉ. प्रियंका शर्मा, डॉ. ज्ञानप्रकाश गौड़ और डॉ. श्वेता गोयल थीं। डॉ. दीपाली ने बताया कि ‘हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने ही एचओडी पर हमें कटर और छुरी चलानी पड़ेगी। पहली बार हमारे हाथ कांप रहे थे। नम आंखें लिए बोर्ड के डॉक्टरों ने कहा कि पोस्टमार्टम टेबल पर सामने मरीज नहीं, उनके एचओडी थे। ऐसे में हाथ कांप गए। 1 करोड़ की लैब उनकी अंतिम देन…उन्होंने प्रयासों से 1 करोड़ से प्रदेश की पहली ‘पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब’ तैयार करवाई थी। संबंधित खबर पेज 4 पर

आधा-अधूरा बजट मिला:शेरगढ़ किले के विकास कार्यों के लिए चौथी बार में भी फर्म नहीं आई, 3 ऐतिहासिक बावड़-कुंडों की डीपीआर तक के लिए कोई नहीं आया

पर्यटन के लिहाज से ‘आइकॉनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ में शामिल शेरगढ़ किला (बारां) की आभा लौटाने के लिए कोई फर्म नहीं आ रही। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग इस काम के टेंडर कर करके थक गया। अक्टूबर 2025 के बाद से 4 बार निविदा आमंत्रित की जा चुकी। जैसे ही इसको खोला जाता है किसी फर्म का नाम नहीं दिखता। एक बार फिर विभाग ने रिकॉर्ड पांचवीं बार निविदा आमंत्रित की है। ऐतिहासिक शीतला माता कुंड (वल्लभनगर), मेडतानी बावड़ी (झुंझुनूं) और सुंदर विलास कुंड (नाथद्वारा) की डीपीआर के लिए भी 5 बार टेंडर निकाले जा चुके, लेकिन किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे हालात क्यों उपजे? पड़ताल में आया कि विभाग में पहले से जो कामकाज चल रहे हैं, उनके लिए ही बजट का भारी टोटा है। जो काम चल रहे हैं, उनके लिए बजट नहीं आ रहा। ऐसे में काम रेंग रहे हैं या रुक चुके हैं। अब विभाग जब नए कार्यों की निविदा जारी कर रहा है तो उनके लिए कोई फर्म दिलचस्पी नहीं दिखा रही। अफसर-इंजीनियर फर्मों को दिलासा देकर निविदा में भाग लेने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात के आगे ये सब फीका पड़ रहा है। फर्में जारी कार्यों के पेमेंट मांग रही है, इसका संबंधित अफसर-इंजीनियरों के पास कोई जवाब नहीं। वहीं उच्चाधिकारी केवल मीटिंग-मीटिंग खेल रहे हैं। हाल देख 10 से ज्यादा स्मारकों की सालभर पहले की घोषणाओं पर जीर्णोद्धार कार्यों की निविदा ही नहीं लगाई जा रही। बजट घोषणाओं का हाल…2024-25 और 2025-26में सरकार ने 32 ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के जीर्णोद्धार और विकास की घोषणाएं की थीं। 45.5 करोड़ के बजट के बाद उम्मीद थी कि इनकी रौनक जागेगी। इनमें से केवल 4 के लिए ही आधा-अधूरा बजट मिल पाया। उधर काम आगे बढ़ाने के लिए बजट नहीं मिल पाया। फर्में विभाग पर दबाव बना रही हैं तो विभाग ऊपर सरकार का मुंह ताक रहा है। 16 स्मारकों में बिना बजट काम शुरू किया, अब डांवाडोल…
विभाग ने 16 पर काम शुरू करा दिए, लेकिन अब वो या तो रेंग रहे हैं या फिर रुक गए हैं। इनमें मांजी की बावड़ी-आमेर, रैवासा बावड़ी-खाटूश्यामजी मार्ग, हाड़ी रानी की बावड़ी-स.माधोपुर, शोरती की बावड़ी-खंडार पाली घाट, खिलचीपुर की बावड़ी-स.माधोपुर, बाईजी की बावड़ी, गोगुंदा, छोटा गोपालपुरा की बावड़ी-नाथद्वारा, मूसी महारानी की छतरी-अलवर जैसे स्मारक हैं। 4 के लिए ही बजट मिला, वह भी आधा
करणी माता मंदिर (उदयपुर), वीर हनुमान मंदिर (सामोद), खेड़ापती बालाजी मंदिर (माधोपुराजपुरा) और वैर किला एवं सफेद महल के लिए ही बजट मिला है। इनमें भी केवल खेड़ापती को छोड़कर किसी के लिए पूरा बजट आवंटित नहीं हुआ। काम चल रहे हैं। हां, बजट रहेगा तो स्पीड रहेगी। कुछ में है, कुछ में मांगा हुआ है। बजट आ जाएगा। शेरगढ़ किले की लोकेशन आदि के चलते फर्म नहीं आई होगी, फिर से टेंडर लगाए हैं।
-आशीष गर्ग, एक्सईएन, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग

पांचना विवाद भड़का:30 स्थानों पर हाईवे जाम, वाहनों के पहिए थमे… हजारों लोग रास्तों में फंसे; किसानों ने कहा…48 घंटे में पानी नहीं तो आंदोलन

20 साल बाद करौली और सवाई माधोपुर के लिए उम्मीद लेकर खत्म हुआ ‘पांचना जल विवाद’ फिर उबल उठा है। एक ओर कमांड क्षेत्र के किसान नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने पर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर टिप्पणी से आहत गुर्जर समाज ने आंदोलन शुरू कर दिया है। दोनों पक्षों ने नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य मार्गों पर 30 स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए जाम लगा दिया है। बुधवार को राजस्थान रोडवेज और निजी बसों के पहिए थम गए। करीब 20 हजार से अधिक यात्री रास्तों में फंसे रहे। मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सके। कमांड क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि समझौते का पालन नहीं हुआ, जबकि दूसरी ओर गुर्जर समाज कथित अभद्र टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज है। बुधवार देर रात तक पुलिस-प्रशासन से बातचीत जारी रही लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 6 जुलाई को जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, डॉ. किरोड़ी मीणा, करौली और सवाई माधोपुर जिला प्रशासन, सचिव कृष्ण कुणाल तथा दोनों पक्षों की समितियों के बीच लिखित सहमति बनी थी। दिन में …बांध पर तकनीकी सुधार हुआ; देर रात…वार्ता का नतीजा नहीं निकला दोषियों को गिरफ्तार करो, आमजन को परेशान मत करो…: बैंसला गुर्जर नेता विजय बैंसला ने कहा कि समाज के लोगों और महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं। कमांड क्षेत्र की नहरों में टेस्टिंग के लिए पानी छोड़ा गया था और यदि कोई तकनीकी गड़बड़ी आई है तो प्रशासन उसे ठीक भी कर रहा है। ऐसे में जाम लगाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि अभद्र टिप्पणी करने वालों को गिरफ्तार किया जाए तथा 24 घंटे में जाम खत्म हो, अन्यथा पूरे देश में आंदोलन करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर नियंत्रण की भी मांग की। तकनीकी खामी थी तो पानी क्यों छोड़ा गया, रोकना था कटकड़ मोड़ पर जाम पर बैठे किसानों का कहना है कि कमांड क्षेत्र की नहरों में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि तय समय में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो आंदोलन पूरे राजस्थान में करेंगे। किसानों का तर्क है कि अगर कमांड क्षेत्र में नहरों से पानी छोड़ने में तकनीकी परेशानी आई थी, तो शासन व प्रशासन को पांचना लिफ्ट से बांध का पानी छोड़ने की प्रक्रिया को रोकना चाहिए था। इधर, पांचना संघर्ष समिति के सदस्य अशोक सिंह धावाई ने कहा कि यह समझौता 39 गांवों के किसानों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया था। समझौते के तुरंत बाद एक नेता विशेष के समर्थकों द्वारा उनकी दिवंगत माता के बारे में सोशल मीडिया पर अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त होने से पानी का प्रवाह कम भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने की टेस्टिंग के दौरान बांध के गेटों के संचालन के लिए बनी ऑपरेटिंग रोड क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण गेट पूरी क्षमता से नहीं खुल सके और पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ। जानकारी के अनुसार 6 जुलाई की रात को ही मथुरा और देवली से तकनीकी टीम बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया। पूरी रात काम चलता रहा और 7 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे दोबारा गेटों का संचालन शुरू किया गया। पानी धीरे-धीरे आगे बढ़ा और 8 जुलाई की शाम तक कमांड क्षेत्र के अंतिम छोर तक पहुंच पाया।

प्लॉट की रजिस्ट्री पर 45 हजार तक खर्च बढ़ेगा:डीएलसी की नई दरें तय: 5 से 40 प्रतिशत का ट्रेंड टूटा, सिर्फ 2 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी

शहर सहित जिले में आवासीय और व्यावसायिक जमीनों की नई डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी (डीएलसी) दरें लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार के आदेश पर कलेक्टर गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई की बैठक में नई दरों को हरी झंडी दे दी गई है। इससे पहले दरें साल 2024 में बढ़ाई गई थीं। बदलाव में राहत की बात यह है कि इस बार 5 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी का ट्रेंड तोड़ते हुए महज 2 से 15% का इजाफा किया गया है। यह प्रति वर्गमीटर 500 से लेकर अधिकतम 5,000 रुपए तक है। फिलहाल डीआईजी स्टांप रागिनी डामोर की टीम कुछ क्षेत्रों की दरों में आंशिक संशोधन कर रही है। इस खाके को इसी सप्ताह अंतिम रूप देकर अगले सप्ताह से बढ़ी हुई डीएलसी दरें लागू कर दी जाएंगी। भुवाणा क्षेत्र और सवीना कृषि मंडी क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों की डीएलसी दरों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ग्रामीण अंचल में कोटड़ा में सबसे कम, वाड़ा-ढीकली में सर्वाधिक बढ़ोतरी की गई है। झाड़ोल और फलासिया में हाईवे से 100 मीटर तक की दूरी पर दरें 10% और 100 मीटर से अधिक दूरी के अंदरूनी इलाकों के लिए 5% बढ़ाई गई हैं। बैठक में शहर विधायक ताराचंद जैन, गोगुंदा विधायक प्रतापलाल भील, मावली विधायक पुष्करलाल डांगी, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी आदि मौजूद थे। भास्कर एक्सप्लेनर जानिए दरों का नया गणित और आपकी जेब पर असर 70 वार्ड… जहां 60-100 फीट सड़क नहीं, वहां दर नहीं बढ़ाई
कलेक्टर अग्रवाल के निर्देश पर शहरवासियों को राहत देने के लिए सड़कों की चौड़ाई और व्यावसायिक गतिविधियों के आधार पर दरों को संतुलित किया गया है। जहां 60 से 100 फीट चौड़ी सड़कें नहीं हैं, वहां की वृद्धि दर शून्य (0%) तय की गई है। वॉलसिटी के 17 वार्डों में डीएलसी दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वार्ड संख्या 5, 12, 13, 15, 34 और 49 से 60 तक आवासीय व व्यावसायिक दोनों श्रेणियों की दरें पहले जैसी ही रहेंगी। वहीं, शेष 53 वार्डों में केवल व्यावसायिक (कॉमर्शियल) डीएलसी दरों में 10% की बढ़ोतरी की गई है। वार्ड 1 से 4, 6 से 11, 14, 16 से 33, 35 से 48 और 61 से 70 तक आवासीय दरों में बदलाव नहीं होगा। पैराफेरी-हाईवे बेल्ट… 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी