सवाई माधोपुर के 18 में से 13 बांधों में पानी:5 पूरी तरह खाली; मानसरोवर बांध में सबसे ज्यादा 22.9 गेज पानी

सवाई माधोपुर में मानसून की दस्तक के साथ जिले के अधिकांश बांध पानी से भरे हुए हैं। पिछले साल अच्छी बारिश होने के कारण इस बार भी बांधों की स्थिति बेहतर बनी हुई है। जिले में जल संसाधन (सिंचाई) विभाग के अधीन 18 बांध हैं, जिनमें से 13 में अभी भी पानी मौजूद है, जबकि केवल 5 बांध पूरी तरह खाली हो चुके हैं। अब मानसून की बारिश शुरू होने के साथ इन बांधों में जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। मानसरोवर बांध में सबसे ज्यादा पानी
जिले के सभी बांधों में मानसरोवर बांध में सबसे ज्यादा पानी है। इसकी भराव क्षमता 31 गेज मीटर है और फिलहाल इसमें 22.9 गेज मीटर पानी मौजूद है। देवपुरा बांध की भराव क्षमता 24 गेज मीटर है, जिसमें 14.5 गेज मीटर पानी है। मोरा सागर बांध की क्षमता 18.50 गेज मीटर है और इसमें 12.3 गेज मीटर पानी बना हुआ है। ढील बांध की भराव क्षमता 16 गेज मीटर है, जिसमें 11.7 गेज मीटर पानी है। वहीं सूरवाल बांध की क्षमता 15 गेज मीटर है और इसमें 10.6 गेज मीटर पानी मौजूद है। इन बांधों में भी बना हुआ है जल भंडार
खंडार उपखंड स्थित गिलाई सागर बांध की भराव क्षमता 20 गेज मीटर है, जिसमें 6.1 गेज मीटर पानी है। नागोलाव बांध की क्षमता 10 गेज मीटर है और इसमें 4.8 गेज मीटर पानी है। गंडाल बांध की भराव क्षमता 9 गेज मीटर है, जिसमें 3.1 गेज मीटर पानी दर्ज किया गया है। भगवतगढ़ बांध की क्षमता 8 गेज मीटर है और इसमें 3 गेज मीटर पानी है। भूलनवाला बांध की भराव क्षमता 8.30 गेज मीटर है, जिसमें भी 3 गेज मीटर पानी मौजूद है। मुई बांध की क्षमता 6 गेज मीटर है और इसमें 2.6 गेज मीटर पानी है। आकोदिया बांध की भराव क्षमता 10 गेज मीटर है, जिसमें फिलहाल 2.2 गेज मीटर पानी बना हुआ है। 5 बांध पूरी तरह खाली, बारिश से भरने की उम्मीद
जिले के पांचोलास, नागतलाई, बनियावाला, मोतीसागर और नया तालाब लिवाली पूरी तरह खाली हो चुके हैं। इन पांचों बांधों में फिलहाल पानी नहीं बचा है। अब मानसून की अच्छी बारिश से इन बांधों के भी भरने की उम्मीद जताई जा रही है।

बागवानी के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ी:अब फलों से हर साल 10 लाख की कमाई, नवाचार के लिए सरकार करेगी सम्मानित

खेती के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। दिल्ली से गांव लौटकर 10 बीघा में बागवानी करने की शुरुआत की। खेत में अलग-अलग वैरायटी के पौधों से ट्रायल किया। क्लाइमेट में सेट होने वाले पौधों की संख्या बढ़ाई। आम-अमरूद समेत फलों से सालाना 10 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हो रही है। म्हारे देश की खेती में आज बात सवाई माधोपुर के किसान की… बैंक की नौकरी से लिया VRS किसान रामसिंह मीणा (62) सवाई माधोपुर के गंभीरा गांव के रहने वाले हैं। ग्रेजुएशन के बाद 1984 में बैंक की नौकरी से करियर शुरुआत की। साल 2018 में दिल्ली में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में ब्रांच मैनेजर के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। इसके बाद गांव लौटकर खेती शुरू की। बड़ा बेटा प्रेम सिंह (38) साल 2014 बैच का IAS अधिकारी है और वर्तमान में दिल्ली में ADM है। दूसरा बेटा पुष्पेंद्र सिंह (32) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। तीसरा बेटा भूपेंद्र सिंह (30) खेती का काम संभालता है। सपना पूरा करने के लिए छोड़ी नौकरी किसान रामसिंह मीणा बताते हैं- जिम्मेदारियों के कारण नौकरी करनी पड़ी, लेकिन सपना था कि एक दिन गांव लौटकर खेती करेंगे। जिम्मेदारियों का बोझ कम होने पर नौकरी छोड़ दी और खेती में नवाचार के साथ नई शुरुआत की। पारंपरिक खेती की बजाय बागवानी को अपनाया। लखनऊ से मंगवाए ग्राफ्टिंग पौधे साल 2018 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ के मलिहाबाद से आम के ग्राफ्टिंग पौधे मंगवाए, जबकि अमरूद की उन्नत किस्म के पौधे प्रमाणित नर्सरी से खरीदे। पौधों की खरीद, खेत की तैयारी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर करीब 4 लाख रुपए का निवेश किया। प्रॉपर देखभाल के लिए 10 बीघा खेत में ही रहने के लिए घर बनाया और व्यवस्थित ढंग से बागवानी की शुरुआत की। पौधे लगाने से पहले आम के लिए करीब दो फीट और अमरूद के लिए एक फीट गहरे गड्ढे तैयार किए, ताकि जड़ें अच्छी तरह फैल सकें और पौधों की बढ़वार बेहतर हो। आम-अमरूद के लगाए पौधे रामसिंह मीणा बताते हैं- खेत में अमरूद की पिंक ताइवान किस्म के 400 और वीएनआर-एन 70 के 280 पौधे लगाए। हापुस और लंगड़ा किस्म सहित 80 पौधे आम के लगाए। इसके अलावा चीकू, पपीता, बेलपत्र, सेब, जामुन, मौसमी, संतरा, नाशपाती, अंजीर, लीची, माल्टा और आंवला सहित कई अन्य फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। कुछ फलों के पौधे फिलहाल कम संख्या में लगाए गए हैं, ताकि सवाई माधोपुर की मिट्टी और जलवायु में पौधों की सक्सेस रेट पता चल सके। सफल रहने वाली फसलों का भविष्य में बड़े स्तर पर विस्तार करने का प्लान है। फिलहाल आम और अमरूद की सभी वैरायटी में कोई दिक्कत नहीं है। साल 2021 से फ्रूटिंग हो रही है। फंगस से बचाव का तरीका रामसिंह मीणा बताते हैं- पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए केमिकल खाद की जगह गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करते हैं। प्रत्येक पौधे में करीब तीन किलो गोबर की खाद के साथ एक किलो वर्मी कम्पोस्ट डाला जाता है। अमरूद लगाने के लिए जुलाई और आम के लिए अगस्त सबसे उपयुक्त महीना रहता है। फलदार पौधों को उत्पादन देने लायक बनने में करीब तीन साल लगते हैं। इस दौरान नियमित सिंचाई और देखभाल जरूरी होती है। चूना और नीला थोथा बराबर मात्रा में मिलाकर उसका लेप जमीन से करीब एक फीट तक तने पर लगाते हैं, जिससे जड़ों और तने में फंगस नहीं लगता। पौधे भी लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं। बागवानी से हर साल 10 लाख रुपए तक की आय किसान रामसिंह मीणा के अनुसार, बागवानी से आय लगातार बढ़ रही है। आम के बगीचे से हर साल करीब 3 लाख रुपए की आमदनी होती है। अमरूद और अन्य फलदार पौधों से करीब 7 लाख रुपए तक की सालाना कमाई हो रही है। वे बताते हैं- किसान को बिना ट्रायल के बड़ा निवेश करने के बजाय पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए। सफल होने पर उसका विस्तार करें तो खेती ज्यादा लाभदायक और टिकाऊ बन सकती है। खेती में नवाचार पर राज्य स्तरीय सम्मान खेती में नवाचार, जैविक खेती को बढ़ावा देने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी उपयोग के कारण रामसिंह मीणा का चयन राजस्थान सरकार की आत्मा योजना 2024-25 के तहत कैफेटेरिया ए-7 श्रेणी के राज्य स्तरीय कृषक सम्मान के लिए किया गया है। सम्मान के साथ उन्हें 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। रामसिंह मीणा का कहना है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाए, बाजार की मांग को समझे और धैर्य के साथ काम करे तो खेती भी सम्मान और अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है। … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… खेती छोड़ शुरू की नर्सरी, हर साल 20-लाख की कमाई:पानी की कमी से परेशान किसान ने बदला रास्ता, 30 वैरायटी के पौधे बेच रहे सरकारी बागवान रहे ताऊ से पेड़-पौधों और गार्डनिंग का हुनर सीखा। कम जमीन और पानी के संकट के कारण खेती के बजाय नर्सरी का रास्ता चुना। पूरी खबर पढ़िए

पिता बोले-बेटी हत्या करना चाहती है:दावा-5 लाख की सुपारी दी, 55 तोला सोना लेकर भागी थी

बांसवाड़ा जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र में एक पिता ने अपनी ही बेटी पर हत्या की सुपारी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि उसकी बेटी ने एक महिला के साथ मिलकर उसकी हत्या के लिए 5 लाख रुपए की सुपारी दी थी। इतना ही नहीं, बेटी पर घर से करीब 55 तोला सोना लेकर फरार होने का भी आरोप लगाया गया है। मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) को परिवाद देने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला 25 मई की घटना से जुड़ा है। कार ड्राइवर ने बताया- आपकी हत्या की सुपारी मिली है गढ़ी निवासी अजीज पुत्र सिद्धिक शेख ने रिपोर्ट में बताया – 25 मई की सुबह वह हिम्मतनगर जाने के लिए गढ़ी बस स्टैंड पर खड़ा था। इसी दौरान बांसवाड़ा निवासी कार ड्राइवर सिकंदर ने हिम्मतनगर छोड़ने की बात कहकर उसे कार में बैठा लिया। हिम्मतनगर पहुंचने पर ड्राइवर ने बताया कि गढ़ी निवासी महिला नीता भाटिया और उसकी बेटी आशमा ने उसकी हत्या के लिए 5 लाख रुपए की सुपारी दी है। ‘हत्या नहीं करूंगा, फोटो भेजकर कह दूंगा काम हो गया’ रिपोर्ट के अनुसार ड्राइवर सिकंदर ने अजीज से कहा कि वह उसकी हत्या नहीं करेगा, लेकिन सुपारी की रकम लेने के लिए उसकी फोटो खींचकर दोनों महिलाओं को भेज देगा और कह देगा कि ‘काम हो गया’। आरोप है कि नीता भाटिया ने ड्राइवर से कहा था कि शव पर कार चढ़ाकर सिर कुचलने की फोटो भेजना, तभी पैसे मिलेंगे। ड्राइवर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और अजीज को वापस परतापुर लाकर बेड़वा बस स्टैंड पर छोड़ दिया। पिता का दावा- बेटी ने कबूला, रोक-टोक से थी परेशान अजीज ने बताया कि घर लौटकर उसने बेटी आशमा से इस बारे में पूछताछ की, लेकिन शुरुआत में उसने आरोपों से इनकार किया। पुलिस में शिकायत की बात कहने पर आशमा ने कथित तौर पर कहा कि वह अपनी मर्जी से जीवन जीना चाहती थी और पिता की रोक-टोक से परेशान थी। पीड़ित का आरोप है कि नीता भाटिया ने आशमा को हत्या के लिए उकसाया और दोनों ने मिलकर सुपारी देने की योजना बनाई। 55 तोला सोना गायब मिला, कार्रवाई नहीं होने पर एसपी से लगाई गुहार रिपोर्ट में अजीज ने दावा किया कि हत्या की साजिश के लिए उसकी बेटी ने घर में रखा करीब 55 तोला सोना भी नीता भाटिया को दे दिया। जब उसने घर में जांच की तो आभूषण गायब मिले। उसका आरोप है कि 11 जून को गढ़ी थाने में शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक को परिवाद दिया, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच की जिम्मेदारी थानाधिकारी रमेश मीणा को सौंपी गई है। थानाधिकारी बोले- रिपोर्ट और परिवाद में अलग-अलग तथ्य गढ़ी थानाधिकारी रमेशचंद्र मीणा ने बताया – पीड़ित ने पहले थाने में रिपोर्ट दी थी। बाद में कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को परिवाद दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट और परिवाद में कुछ तथ्य अलग-अलग हैं। मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

सिया-चेतन ने क्राइम पेट्रोल देख हत्या का तरीका सीखा:केतन मर्डर में केस में अलग-अलग बयान दे रहे, अब दोनों का पॉलीग्राफ टेस्ट होगा

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। पुलिस ने अब पॉलीग्राफ टेस्ट यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद दोनों के बयान मिलाए जाएंगे। सिया ने टेस्ट की परमिशन दे दी है। वहीं, पुलिस सूत्रों के हवाले से जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी और सिया ने वारदात से पहले टीवी सीरियल ‘क्राइम पेट्रोल’ के कई एपिसोड देखकर समझने की कोशिश की थी कि हत्या के बाद जांच एजेंसियों को कैसे चकमा दिया जा सकता है। 18 जून को लोहगढ़ किले से गिरकर 25 साल के केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। पुलिस का मानना है कि केतन, सिया और चेतन के रिश्ते में बाधा बन रहा था, इसलिए उसकी हत्या की साजिश रची गई। सिया के साथ क्राइम सीन रीक्रिएशन पुणे पुलिस ने गुरुवार को सिया गोयल के घर से घटना के दिन पहने गए कपड़े और कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। पुलिस सिया को लेकर पुणे के लुल्लानगर इलाके में ले गई। यहां स्थित एक पहाड़ी पर सिया और चेतन ने केतन अग्रवाल को गिराने की रिहर्सल की थी। रिहर्सल वाली जगह का पंचनामा बनाने के बाद पुलिस सिया को उसके घर भी लेकर गई। वहां 30 मिनट घर की तलाशी ली थी। सगाई से प्री-वेडिंग फंक्शन तक सिया-केतन की 2 तस्वीरें… 31 मई को आइडिया, 18 जून को मर्डर 31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा: 11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या की प्लान सूझा। 5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया: सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया। 14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया: सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई। 18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया: 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया। ——————- ये खबर भी पढ़ें… सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…

11 साल तक स्कूल नहीं आने वाली टीचर की पोस्टिंग:डायरेक्टरेट ने मांगी 3 दिन में रिपोर्ट, DEO पर कार्रवाई की तैयारी

बीकानेर में करीब 11 साल तक स्कूल से अनुपस्थित रहने के बाद महिला शिक्षक को दोबारा पोस्टिंग देने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पहले से जांच के दायरे में चल रहे इस मामले में अब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। निदेशालय ने मामले को गंभीर मानते हुए बीकानेर संभाग के संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) से तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट और दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा है। शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप शिकायतकर्ता संजीव यादव निवासी उदयरामसर ने आरोप लगाया है कि संबंधित अध्यापिका पिछले 11 वर्षों से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थी। नियमों के अनुसार इतने लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या सेवामुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। आरोप- कार्रवाई के बजाय शहर के स्कूल में कर दी पोस्टिंग शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई करने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण ने संबंधित अध्यापिका को राहत देते हुए बीकानेर शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में पदस्थापित कर दिया। इस फैसले को लेकर पहले भी शिकायतें हुई थीं और जांच चल रही है। शासन सचिवालय के निर्देश पर फिर शुरू हुई जांच मामले की शिकायत शासन सचिवालय, जयपुर तक पहुंचने के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने संज्ञान लिया। इसके बाद बीकानेर संभाग के संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश जारी किए गए। इससे पहले भी इस मामले में जांच हो चुकी है, लेकिन अब नए सिरे से कार्रवाई शुरू की गई है। 3 दिन में रिपोर्ट और कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण कर तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजी जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भी रिपोर्ट के साथ भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पठानकोट में बची देहरादून के 55 श्रद्धालुओं की जान, VIDEO:अंडरपास के पानी में फंसी टूरिस्ट बस; देहरादून से जा रहे थे वैष्णो देवी

जालंधर-जम्मू नेश्नल हाईवे-44 पर सुजानपुर में बीती देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। बता दें, पठानकोट में भारी बारिश के चलते जम्मू नेशनल हाईवे पर बने रेलवे अंडरपास (पुल नंबर-3) के नीचे अचानक जलभराव हो गया। इसी दौरान देहरादून से माता वैष्णो देवी की ओर जा रही श्रद्धालुओं से भरी एक टूरिस्ट बस इस गहरे पानी के बीचों-बीच जाकर फंस गई। बस में 13 बच्चों सहित 55 यात्री सवार थे, जो पानी बढ़ता देख बेहद घबरा गए। घटना की सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF), पुलिस और क्षेत्र के युवाओं ने तत्परता दिखाते हुए एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कड़ी मशक्कत के बाद सभी 55 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। महिला श्रद्धालु ऋितिका ने बताया कि वे देहरादून से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में बस अचानक पानी में फंस गई। उन्होंने कहा कि पुलिस और एसएसएफ के जवानों ने देवदूत बनकर उनकी जान बचाई और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। रात 1:53 बजे मिली सूचना; महज 6 मिनट में पहुंची एसएसएफ
बस में फंसे यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क साधा और रात ठीक 1:53 बजे बस के पानी में फंसने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स की टीम ने मुस्तैदी दिखाई और महज 6 मिनट के भीतर, रात 1:59 बजे मौके पर पहुंच गई। इसके साथ ही सुजानपुर थाना प्रभारी अरुण शर्मा भी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। एसएसएफ की टीम में तैनात सिपाही रमनदीप सिंह, आदेश कुमार, लखबीर चंद और रोहित कुमार ने स्थानीय लोगों व युवाओं के साथ मिलकर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और एक-एक कर सभी घबराए हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अंधेरा और तेज बारिश बनी मुसीबत; ड्राइवर नहीं भांप पाया पानी की गहराई
थाना प्रभारी अरुण शर्मा ने बताया कि इस पुल के नीचे अक्सर बरसात के दिनों में पानी भर जाता है। इसी वजह से नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा ट्रैफिक को ‘वन-साइड’किया गया था। रात के घने अंधेरे और मूसलाधार बारिश के कारण देहरादून से आ रही टूरिस्ट बस के ड्राइवर विनीत गुप्ता को पुल के नीचे जमा पानी की गहराई का बिल्कुल अंदाजा नहीं लगा। जैसे ही उसने बस को पुल के नीचे से पार निकालने का प्रयास किया, पानी अत्यधिक होने की वजह से इंजन में पानी घुस गया और बस बीच में ही बंद हो गई। हाइड्रा मशीन से निकाली बस
अधिकारियों के मुताबिक यात्रियों के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद, मौके पर हाइड्रा मशीन बुलाई गई और पानी में फंसी टूरिस्ट बस को भी खींचकर बाहर निकाला गया। आधी रात को संकट में फंसी जिंदगियों के लिए देवदूत बनकर पहुंची सड़क सुरक्षा फोर्स और सुजानपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई की यात्रियों ने दिल से सराहना की। प्रशासन ने भी अपील की है कि बरसाती मौसम में अंडरपास या पुलों के नीचे पानी भरा होने पर वाहन चालक सावधानी बरतें।

राजस्थान में सिरसा रोडवेज बस रोक कार सवारों का हंगामा:बूथ पर खड़ी करते वक्त पीछे से टकराई गाड़ी, ड्राइवर-कंडक्टर में बहस; रोड जाम

सिरसा रोडवेज की एक बस को राजस्थान में रोक लिया गया और लोग रोडवेज कर्मियों से उलझ गए। कुछ युवकों ने मिलकर रोड जाम कर लिया और बस को आगे जाने से रोक दिया। उन सभी ने रोडवेज ड्राइवर व कंडक्टर से काफी देर तक बहस की और करीब आधा घंटा तक ये हंगामा चला। कार सवार युवकों ने क्षतिग्रस्त कार ठीक करवाने को पैसे मांगे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक कर्मियों से बहस करते दिख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मामला राजस्थान के रावतसर बस स्टैंड का है। जहां रोडवेज ड्राइवर बस को बूथ पर लगा रहा था। उसी वक्त एक कार आई और बूथ पर लगाते समय बस के पीछे से गुजरने लगी। कार बस से टकराने के बाद क्षतिग्रस्त हो गई। इसी बात पर कार सवार युवक गुस्सा गए। जैसे ही ड्राइवर बस लेकर बस स्टैंड से बाहर आया, तो युवकों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बस को वहीं रूकवा लिया और अन्य साथी व लोग बुला लिए। पुलिस ने रोड जाम खुलवाया इस दौरान कई देर तक रोड जमा रहा और हंगामा बढ़ता देख वहां से गुजर रही दूसरी रोडवेज बस को भी ड्राइवर ने रोक लिया। रोडवेज कर्मचारी मामला सुलझाने को वहां पर पहुंचे, परंतु कोई मानने को तैयार नहीं था। कुछ देर बाद राजस्थान पुलिस मौके पर पहुंची और उन्होंने भी प्रदर्शनकारी लोगों के समर्थन में उनसे कहा कि बस और ड्राइवर का नंबर नोट कर लो। अगर शिकायत करनी है तो थाने में दे देना, उस पर कार्रवाई करेंगे। सीसीटीवी में पता चल जाएगा, बस को न रोके। आखिर पुलिस ने रोड जाम खुलवाया और दोनों पक्ष शांत कराए। बस में सवार यात्री भी परेशान रहे झगड़ा बढ़ते देख बस स्टैंड के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। इस पर लोगों ने कार सवार युवकों को समझाने का प्रयास किया और ये भी कहा कि आपकी गलती है। बावजूद इसके वे नहीं माने। दोनों युवक बार-बार गाड़ी के काम का खर्च मांग रहे थे। रोडवेज ड्राइवर व कंडक्टर ने भी उनकी गलती बताई, पर वे विश्वास नहीं कर रहे थे। इसके चलते बस में सवार यात्री भी परेशान रहे। दरअसल, कार सवार युवक बोले, बस का कंडक्टर वहां पर नहीं था और ड्राइवर ही अकेले बस को बूथ पर बैक साइड से लगा रहा था। अगर कंडक्टर होता तो ये हादसा नहीं होता। वहीं, रोडवेज कर्मचारी बोले, बस स्टैंड के अंदर बूथ पर ये गाड़ी भिड़ी थी। उस समय कुछ नहीं कहा। अब पीछे से गाड़ी लेकर आए और आगे लगाकर बस को रूकवा लिया। ड्राइवर को नीचे उतारने की कोशिश प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बस के ड्राइवर को पकड़कर नीचे उतारने की कोशिश की और उनके बीच काफी तू-तड़ाक हुई। इससे विवाद बढ़ सकता था। विभाग के अनुसार, यह रोडवेज बस डबवाली बस स्टैंड से राजस्थान के पोकरण के लिएरावतसर रूट पर चलती है। डबवाली से इसकी दूरी करीब 6-7 से घंटे की है। यह बस रूटीन में पोकरण चलती है। मंगलवार से ये बस पोकरण गई हुई थी। वहां से आते समय ये मामला हुआ है। यहां आने पर बुधवार को इस बारे में कर्मियों ने यूनियन को भी अवगत करवा दिया है। यूनियन ने इसकी निंदा की है। कार लेकर बस स्टैंड में घुसे युवक- यूनियन मामले में रोडवेज यूनियन से जिला प्रधान पृथ्वी सिंह का कहना है कि यह झगड़ा रावतसर में रोडवेज कर्मियों के साथ हुआ है। कुछ युवक कार लेकर बस स्टैंड के अंदर घुसे हुए थे। जब बस बूथ पर लगाई जा रही थी तो युवक भी कार लेकर बस के पीछे से और बूथ के आगे से निकालने की कोशिश करने लगे। तभी बस से कार टकरा गई और आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गई। ड्राइवर का कोई दोष नहीं है। युवक कार को बस स्टैंड के अंदर लेकर गया हुआ था, जोकि बस स्टैंड के अंदर कार ले जाने पर रोक है। इसके बावजूद वे कार अदंर लेकर गए हुए थे। उनको किसी ने अदंर जाने से नहीं रोका। इस बारे में ड्राइवर व कंडक्टर से बातचीत कर अगला कदम उठाया जाएगा। लिखित शिकायत पर करेंगे कार्रवाई- जीएम रोडवेज जीएम कुलदीप जांगड़ा ने बताया कि इस तरह कई बार झगड़े होते हैं। रोडवेज बस आमजन को सुविधा देने के लिए हैं और लोग बेवजह इस तरह की हरकतें करते हैं। इस बारे में रोडवेज बस कर्मियों से बातचीत की जाएगी। यदि उनकी ओर से कोई लिखित शिकायत दी जाएगी, तो उस पर कार्रवाई करेंगे। राजस्थान के स्टाफ से भी बात करेंगे।

दौसा में एक्सप्रेस-वे पर बस-ट्रेलर अग्निकांड,DNA से मृतकों की पहचान:6 शव परिजनों को सौंपे, दो बॉडी पहले सुपुर्द कर दी थी, 8 लोगों की हुई थी मौत

दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस और ट्रेलर की भिड़ंत के बाद हुए भीषण अग्निकांड में जिंदा जलकर जान गंवाने वाले छह लोगों के शवों की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद गुरुवार शाम पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए गए। हादसे में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें छह यात्री आग में जिंदा जल गए थे, जबकि दो अन्य की सिर में चोट लगने से मौत हुई थी। इन मृतकों के लिए भेजे गए थे DNA सैंपल हादसे में भूमि भौर निवासी बजरंग नगर (इंदौर), प्रियंका पांडे निवासी बड़वाह, दीपक तंवर निवासी बड़वाह (जिला खरगौन, मध्य प्रदेश) और निर्मला गुप्ता निवासी अन्नपूर्णा नगर (इंदौर) के शवों के डीएनए सैंपल बुधवार शाम जांच के लिए भेजे गए थे। जयपुर से रिपोर्ट आने के बाद शवों की पहचान हुई और पोस्टमॉर्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। ड्राइवर और एक अन्य मृतक की रिपोर्ट भी आई देवेंद्र सिंह निवासी रामपुरा कलां, सिद्धगंज (मध्य प्रदेश) तथा बस चालक रामअवतार के डीएनए सैंपल गुरुवार सुबह जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों शवों का भी पोस्टमॉर्टम कराया गया और परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। दो शव पहले ही परिजनों को सौंप दिए गए थे सिर में चोट लगने से जान गंवाने वाले बस परिचालक कुलदीप का पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं धर्मसिंह निवासी भूतेड़ी, जिला झाबुआ (मध्य प्रदेश) का शव बुधवार शाम को ही परिजनों के हवाले कर दिया गया था। 22 घायलों को भी पहुंचाया गया था अस्पताल मंगलवार देर रात हुए इस भीषण हादसे के बाद पुलिस ने आठों मृतकों के शव और 22 घायलों को एंबुलेंस के जरिए दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया था। आग में शव बुरी तरह झुलस जाने से उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी थी, जिसके बाद डीएनए जांच कराई गई। रिपोर्ट आने के बाद सभी शवों की शिनाख्त कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। — ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे दौसा बस-अग्निकांड: ‘मेरी आंखों के सामने पत्नी जल गई साहब’:किसी ने मदद नहीं की; पैसेंजर बोलीं- मालूम नहीं पति कहां गिरे, लोग सीटों में फंसे थे बस में लोगों का मांस तक जल गया, हड्डियां बची:पैर पकड़कर पति को ढूंढने की गुहार लगाती रही पत्नी; देखिए दौसा बस अग्निकांड की तस्वीरें

पेंशन के लिए तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर पहुंचीं माताजी:जलदाय मंत्री ने 'अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया'; किसान से 'आतंकी' जैसा सुलूक

नमस्कार, जालोर में पेंशन के लिए 82 साल की माताजी को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी। टोंक में शिक्षा मंत्री ने जलदाय मंत्री की तारीफ अनोखे शब्दों में की और बाड़मेर में किसान को उसी की जमीन से बाहर निकलने की हुक्म दे दिया गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पेंशन के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी जी ने जो बात इश्क के लिए कही थी, वही बात सरकारी स्कीम से जोड़कर भी कही जा सकती है। जैसे- ये पेंशन नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे, एक आग का रस्ता है और रेंग कर जाना है। बात मजाक की नहीं, जालोर की कोकू देवी पर बीती है। उनकी उम्र 80 पार। आंखों से दिखता नहीं। हालत ये कि खड़े होकर चल नहीं सकतीं। बैठकर रेंग सकती हैं। 5 साल पहले उनकी 1000 रुपए की पेंशन बंद हो गई। फिंगर प्रिंट नहीं मिल रहे थे। जमीन पर हाथ रखकर सरकने की स्थिति के कारण रेखाएं घिस गई। कई बार गुहार लगाई, लेकिन काम नहीं बना। थक-हार कर कोकू देवी भीषण गर्मी में दोपहर को तपती सड़क पर हथेलियां टिकाकर रेंगती हुईं कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। प्रेमचंद वाली ‘बूढी काकी’ भी यह दृश्य देखती तो उनकी भूख मर जाती। कलेक्टर साहब को पता चला तो चेंबर से बाहर आए और खड़े रहकर कोकू देवी का काम कराया। 2. जलदाय मंत्री ने अच्छे-अच्छों को पानी पिलाया जलदाय मंत्री कन्हैया लाल ने दो महीने पहले जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था- हालात इतने नाजुक हैं कि भ्रष्ट अफसरों की जांच करने लगे तो मेरा पूरा विभाग ही खाली हो जाएगा। जलदाय मंत्री होने के नाते उन्हें पता है कि कौन कितने पानी में है। उन्होंने भ्रष्ट अफसरों को सख्त चेतावनी भी दी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी ने जलदाय मंत्री की तारीफ कुछ अलग अंदाज में की। टोंक में समाज की एक सभा के दौरान दिलावर बोले- ये कन्हैया लाल कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। इन्होंने अच्छे अच्छों को पानी पिलाया है। चाहे कोई दादा हो, परदादा हो। या कोई नेता हो। सबको अच्छा पानी पिलाया है। इनके सामने कोई टिकता नहीं। अब मंत्रीजी का तो काम ही है पानी पिलाना। पानी पिलाते रहना चाहिए और अपनी ही आस्तीनों को झाड़ते रहना चाहिए। इससे इर्द-गिर्द भ्रष्टाचार नहीं पनपता। 3. चलते-चलते.. पूर्व मंत्रीजी ने एक सभा में कहा था- एक दिन आएगा जब कलेक्टर का बेटा कहेगा कि बड़ा होकर मैं किसान बनूंगा। 100 प्रतिशत सही बात है। संभव है कि आने वाले समय में कलेक्टर का बेटा ही किसान बने। मंत्री का बेटा किसान बने। विधायक का बेटा किसान बने। अफसर का बेटा किसान बने। किसान बनकर सब्सिडी लेने में आसानी रहती है। बड़े प्रोजेक्ट मिल जाते हैं। खेत पैसा उगाने के कारखाने बन जाते हैं। सरकारी स्कीम में जल्दी नंबर आ जाता है। और भी हजार फायदे हैं। किसान का बेटा अगर किसान बनेगा तो उसे यूरिया के कट्‌टे के लिए लाठी खानी पड़ेगी। कृषि कनेक्शन के लिए चप्पल घिसनी पड़ेगी। फसल के मुआवजे के लिए गिरदावरों-पटवारियों को घूस खिलानी पड़ेगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए कर्ज लेना पड़ेगा। बाड़मेर के बीसूकलां गांव में सीताराम की ढाणी है। किसान गोरख दान अपने खेत पर पहुंचा तो खाकी वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों ने दूर से ही उसे हड़काया। बोले- अरे ओ, बाहर निकलो यहां से। कई सुरक्षाकर्मी गोरख दान को घेरने पहुंच गए। जैसे वह बॉर्डर लांघ कर घुस आया हो। प्राइवेट कंपनी गोरख दान के खेत को काम में ले रही थी लेकिन मुआवजा नहीं दे रही थी। गोरख दान खेत का मालिक होने के बावजूद हाथ जोड़कर बोला- साहब, मैं आपसे यही निवेदन करने आया हूं कि आप मेरे खेत में काम मत करवाओ। इनपुट सहयोग- भरत सांखला (जालोर), महावीर बैरवा (टोंक), विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।

देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल है विक्रम-1, जल्द लॉन्चिंग संभव:स्काईरूट फाउंडर पवन बोले- अंतरिक्ष तक तेजी से पहुंचने वाला AI-6जी, स्पेस इकोनॉमी में आगे होगा

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ अब लॉन्च के लिए तैयार है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त तक की लॉन्च विंडो घोषित की है। यह भारत की प्राइवेट स्पेस क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा है। इसकी सफलता से छोटे उपग्रहों को जरूरत के मुताबिक और ज्यादा तेजी से अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा। इससे खेती, संचार, नेविगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी सेवाएं और मजबूत होंगी। अगर विक्रम-1 सफल रहता है तो भारत निजी क्षेत्र के दम पर ऑर्बिट तक पहुंचने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। विक्रम-1 की लॉन्चिंग से पहले स्काईरूट एयरोस्पेस के फाउंडर पवन कुमार चंदाना ने भास्कर से बातचीत की। उन्हीं के शब्दों में पढ़ें पूरा इंटरव्यू… लेकिन उससे पहले देखें विक्रम-1 की झलक… स्पेस से पूरी हो रहीं रोजमर्रा की जरूरतें अगर आप फोन पर मैप्स चलाते हैं या डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो उसके पीछे भी अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट काम कर रहे होते हैं। मैप्स आपकी सटीक लोकेशन सैटेलाइट से मिले नेविगेशन सिग्नल के आधार पर बताते हैं, जबकि यूपीआई जैसी सेवाएं इंटरनेट और संचार नेटवर्क पर चलती हैं, जिन्हें दूरदराज के इलाकों में सैटेलाइट भी मजबूती देते हैं। सैटेलाइट बढ़ेंगे तो हर क्षेत्र में सुविधाएं भी बढ़ेंगी अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट नेटवर्क के साथ लॉन्च की मांग भी कई गुना बढ़ेगी। अभी भारत में ज्यादातर सैटेलाइट इसरो लॉन्च करता है। लेकिन आने वाले सालों में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ध्यान देगा। स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां छोटे सैटेलाइट को बार-बार और जरूरत के मुताबिक कक्षा में पहुंचाने का काम करेंगी। इससे मौसम, इंटरनेट, खेती, आपदा प्रबंधन और संचार जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा तेज और सटीक हो सकेंगी। स्पेसएक्स से अलग, ‘कैब मॉडल’ पर स्काईरूट स्काईरूट की तुलना स्पेसएक्स से होती है, लेकिन दोनों का मॉडल अलग है। इसे ट्रेन और कैब से समझ सकते हैं। ट्रेन तय समय पर तय स्टेशन तक ही ले जाती है। लेकिन अगर आपको किसी खास समय पर किसी खास जगह पहुंचना हो, तो कैब बेहतर विकल्प है। स्पेस में भी यही फर्क है। स्पेसएक्स का रॉकेट ट्रेन की तरह तय कक्षा में सैटेलाइट छोड़ता है, जबकि विक्रम-1 ‘कैब’ की तरह जरूरत के मुताबिक मनचाही कक्षा में सैटेलाइट पहुंचा सकेगा। अब ऐसे ‘ऑन-डिमांड लॉन्च’ की मांग तेजी से बढ़ेगी। भारत स्पेसएक्स वाले मोड पर, अब तेजी से सीखने की जरूरत भारत आज उसी दौर में है, जहां करीब 15-20 साल पहले अमेरिका था। उस समय स्पेसएक्स और रॉकेट लैब जैसी कंपनियों ने लगातार परीक्षण कर अपनी लॉन्च क्षमता विकसित की थी। रॉकेट साइंस में सबसे बड़ा सबक है कि तकनीक सिर्फ जमीन पर नहीं, उड़ान के दौरान सीखने से विकसित होती है। इसलिए बार-बार टेस्ट, तेजी से सुधार और फिर लॉन्च का सिलसिला ही आगे बढ़ने का रास्ता है। इसरो बड़े मिशन करेगा, निजी कंपनियां बढ़ाएंगी लॉन्च की रफ्तार भारत का स्पेस मॉडल अब बदल रहा है। इसरो ने छह दशक में जो तकनीकी आधार तैयार किया है, अब वही निजी कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। आने वाले समय में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ज्यादा ध्यान देगा, जबकि स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां लगातार और कम लागत में सैटेलाइट लॉन्च करने का काम संभालेंगी। यही मॉडल दुनिया के विकसित स्पेस देशों में अपनाया जाता है। समस्या सैटेलाइट बनाने की नहीं, समय पर लॉन्च कराने की है दुनिया में छोटे सैटेलाइट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अंतरिक्ष तक पहुंचाने की क्षमता उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। यही वजह है कि कई ऑपरेटरों को लॉन्च के लिए महीनों, कई बार सालों तक इंतजार करना पड़ता है। स्काईरूट का फोकस इसी समस्या को हल करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तय समय में लॉन्च उपलब्ध कराया जा सके। आने वाले समय में स्पेस सामान्य सुविधा बन जाएगा अगले 10-15 साल में अंतरिक्ष लोगों को किसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सामान्य सुविधा के रूप में दिखाई देगा। समुद्र में मछुआरों की कनेक्टिविटी, बाढ़ की समय रहते चेतावनी, बेहतर मौसम पूर्वानुमान, एआई के लिए डेटा और गांवों तक इंटरनेट (6जी) जैसी कई सेवाएं सामान्य होंगी, लेकिन इनके पीछे अंतरिक्ष में काम कर रहे सैटेलाइट होंगे। बदलती स्पेस टेक्नोलॉजी का नया चेहरा हैं छोटे सैटेलाइट स्काईरूट और फाउंडर से जुड़ी खास बातें… स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट स्पेस कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट बना रही है। यह भारत की पहली निजी कंपनी है जिसने सफलतापूर्वक एक रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किया। स्काईरूट की स्थापना 2018 में हैदराबाद में हुई थी। फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नगा भारत डाका हैं। दोनों पहले ISRO में वैज्ञानिक और इंजीनियर रह चुके हैं। 18 नवंबर 2022 को स्काईरूट ने विक्रम-S का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन का नाम ‘प्रारंभ’ था। यह भारत के प्राइवेट स्पेस जोन के इतिहास का पहला सफल रॉकेट लॉन्च था। कंपनी विक्रम-1 के अलावा विक्रम-2 और विक्रम-3 ऑर्बिटल बना रही है। इनका नाम विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। भास्कर नॉलेज… दुनिया में प्राइवेट स्पेस क्षेत्र की शुरुआत को नई ऊंचाई स्पेस X जैसी कंपनियों ने दी। भारत में 2020 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला गया, जिसके बाद स्काईरूट, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल और बेलास्ट्रिक्स एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप तेजी से उभरे। इससे भारत ग्लोबल न्यू स्पेस इकोनॉमी में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।