बागवानी के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ी:अब फलों से हर साल 10 लाख की कमाई, नवाचार के लिए सरकार करेगी सम्मानित
खेती के लिए बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। दिल्ली से गांव लौटकर 10 बीघा में बागवानी करने की शुरुआत की। खेत में अलग-अलग वैरायटी के पौधों से ट्रायल किया। क्लाइमेट में सेट होने वाले पौधों की संख्या बढ़ाई। आम-अमरूद समेत फलों से सालाना 10 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हो रही है। म्हारे देश की खेती में आज बात सवाई माधोपुर के किसान की… बैंक की नौकरी से लिया VRS किसान रामसिंह मीणा (62) सवाई माधोपुर के गंभीरा गांव के रहने वाले हैं। ग्रेजुएशन के बाद 1984 में बैंक की नौकरी से करियर शुरुआत की। साल 2018 में दिल्ली में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में ब्रांच मैनेजर के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। इसके बाद गांव लौटकर खेती शुरू की। बड़ा बेटा प्रेम सिंह (38) साल 2014 बैच का IAS अधिकारी है और वर्तमान में दिल्ली में ADM है। दूसरा बेटा पुष्पेंद्र सिंह (32) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। तीसरा बेटा भूपेंद्र सिंह (30) खेती का काम संभालता है। सपना पूरा करने के लिए छोड़ी नौकरी किसान रामसिंह मीणा बताते हैं- जिम्मेदारियों के कारण नौकरी करनी पड़ी, लेकिन सपना था कि एक दिन गांव लौटकर खेती करेंगे। जिम्मेदारियों का बोझ कम होने पर नौकरी छोड़ दी और खेती में नवाचार के साथ नई शुरुआत की। पारंपरिक खेती की बजाय बागवानी को अपनाया। लखनऊ से मंगवाए ग्राफ्टिंग पौधे साल 2018 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ के मलिहाबाद से आम के ग्राफ्टिंग पौधे मंगवाए, जबकि अमरूद की उन्नत किस्म के पौधे प्रमाणित नर्सरी से खरीदे। पौधों की खरीद, खेत की तैयारी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर करीब 4 लाख रुपए का निवेश किया। प्रॉपर देखभाल के लिए 10 बीघा खेत में ही रहने के लिए घर बनाया और व्यवस्थित ढंग से बागवानी की शुरुआत की। पौधे लगाने से पहले आम के लिए करीब दो फीट और अमरूद के लिए एक फीट गहरे गड्ढे तैयार किए, ताकि जड़ें अच्छी तरह फैल सकें और पौधों की बढ़वार बेहतर हो। आम-अमरूद के लगाए पौधे रामसिंह मीणा बताते हैं- खेत में अमरूद की पिंक ताइवान किस्म के 400 और वीएनआर-एन 70 के 280 पौधे लगाए। हापुस और लंगड़ा किस्म सहित 80 पौधे आम के लगाए। इसके अलावा चीकू, पपीता, बेलपत्र, सेब, जामुन, मौसमी, संतरा, नाशपाती, अंजीर, लीची, माल्टा और आंवला सहित कई अन्य फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। कुछ फलों के पौधे फिलहाल कम संख्या में लगाए गए हैं, ताकि सवाई माधोपुर की मिट्टी और जलवायु में पौधों की सक्सेस रेट पता चल सके। सफल रहने वाली फसलों का भविष्य में बड़े स्तर पर विस्तार करने का प्लान है। फिलहाल आम और अमरूद की सभी वैरायटी में कोई दिक्कत नहीं है। साल 2021 से फ्रूटिंग हो रही है। फंगस से बचाव का तरीका रामसिंह मीणा बताते हैं- पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए केमिकल खाद की जगह गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करते हैं। प्रत्येक पौधे में करीब तीन किलो गोबर की खाद के साथ एक किलो वर्मी कम्पोस्ट डाला जाता है। अमरूद लगाने के लिए जुलाई और आम के लिए अगस्त सबसे उपयुक्त महीना रहता है। फलदार पौधों को उत्पादन देने लायक बनने में करीब तीन साल लगते हैं। इस दौरान नियमित सिंचाई और देखभाल जरूरी होती है। चूना और नीला थोथा बराबर मात्रा में मिलाकर उसका लेप जमीन से करीब एक फीट तक तने पर लगाते हैं, जिससे जड़ों और तने में फंगस नहीं लगता। पौधे भी लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं। बागवानी से हर साल 10 लाख रुपए तक की आय किसान रामसिंह मीणा के अनुसार, बागवानी से आय लगातार बढ़ रही है। आम के बगीचे से हर साल करीब 3 लाख रुपए की आमदनी होती है। अमरूद और अन्य फलदार पौधों से करीब 7 लाख रुपए तक की सालाना कमाई हो रही है। वे बताते हैं- किसान को बिना ट्रायल के बड़ा निवेश करने के बजाय पहले छोटे स्तर पर प्रयोग करना चाहिए। सफल होने पर उसका विस्तार करें तो खेती ज्यादा लाभदायक और टिकाऊ बन सकती है। खेती में नवाचार पर राज्य स्तरीय सम्मान खेती में नवाचार, जैविक खेती को बढ़ावा देने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी उपयोग के कारण रामसिंह मीणा का चयन राजस्थान सरकार की आत्मा योजना 2024-25 के तहत कैफेटेरिया ए-7 श्रेणी के राज्य स्तरीय कृषक सम्मान के लिए किया गया है। सम्मान के साथ उन्हें 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। रामसिंह मीणा का कहना है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाए, बाजार की मांग को समझे और धैर्य के साथ काम करे तो खेती भी सम्मान और अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है। … खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… खेती छोड़ शुरू की नर्सरी, हर साल 20-लाख की कमाई:पानी की कमी से परेशान किसान ने बदला रास्ता, 30 वैरायटी के पौधे बेच रहे सरकारी बागवान रहे ताऊ से पेड़-पौधों और गार्डनिंग का हुनर सीखा। कम जमीन और पानी के संकट के कारण खेती के बजाय नर्सरी का रास्ता चुना। पूरी खबर पढ़िए

