सिस्टम शहर ले डूबेगा:प्री- मानसून में फेल, शहर डूबा, वाहन धंसे, गोपालपुरा बाईपास पर टैंकर पलटा-ट्रैक्टर धंसा, खातीपुरा में ड्रेनेज के लिए खोदे गड्ढे में कटाव

राजधानी में हर साल जून अंत तक मानसून दस्तक दे देता है। यह जेडीए, निगम, जिला प्रशासन सबको पता है। इसके बावजूद हर साल इसी दौरान शहरभर की सड़कें खुदी मिलती हैं। कहीं ड्रेनेज लाइन डाली जा रही होती है तो कहीं सीवर प्रोजेक्ट अधूरा होता है। गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है। नतीजा- पहली तेज बारिश में सड़कें धंस जाती हैं, कॉलोनियां डूब जाती हैं और कई हादसे सामने आते हैं। गुरुवार को प्री-मानसून की पहली तेज बारिश ने यही सच फिर सामने रख दिया। एक घंटे में 50 मिमी (करीब 2 इंच) पानी बरसा, जिसने मानसून की तैयारियों की पोल खोल दी। अधूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट, सीवर लाइन के कटाव और मिट्टी से भरे गड्ढे लोगों के लिए खतरा बन गए। कहीं पूरा ट्रैक्टर समा गया तो कहीं टैंकर धंस गया। पुराने पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। भास्कर सवाल… मानसून से पहले काम पूरे क्यों नहीं होते?
जून में बारिश सामान्य बात है। इसके बावजूद शहर में मानसून से ठीक पहले या उसी दौरान ड्रेनेज, सीवर और सड़क खुदाई के काम चलते रहते हैं। बारिश होते ही मिट्टी बैठती है, कटाव होता है और सड़कें धंस जाती हैं। {गोपालपुरा बाईपास पर यही हुआ। 10 दिन पहले सड़क पर गड्ढा हुआ तो मिट्टी डालकर काम पूरा मान लिया गया। गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश में मिट्टी बैठ गई और वहां से गुजर रहा सीवर टैंकर धंसकर पलट गया।
सवाल- गड्ढा पहले से चिह्नित था, फिर भी नहीं सुधारा, हमेशा हादसे का इंतजार क्यों रहता है? खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन का कटाव, 20 फीट चौड़ा गड्ढा बना
खातीपुरा-झोटवाड़ा में ड्रेनेज लाइन के लिए बॉक्स डाले जा रहे थे। खातीपुरा के पास सड़क खोदी गई थी। तेज बारिश के बाद इसमें पानी भर गया और 20 फीट चौड़ा कटाव हो गया। सूचना पर जेडीए टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी से मिट्टी डालकर कटाव भरा। इस प्रोजेक्ट का अभी करीब 100 मीटर का काम बाकी है।
सवाल- मानसून से पहले प्रोजेक्ट पूरे क्यों नहीं किए जाते, डेडलाइन की मॉनिटरिंग क्यों नहीं होती? सीकर रोड पर 40 करोड़ का ड्रेनेज फेल
तेज बारिश से सीकर रोड पर जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। यहां हाल ही में 40 करोड़ रुपए खर्च कर नया ड्रेनेज सिस्टम डाला गया है।
सवाल- प्री-मानसून की तेज बारिश का पानी ही नहीं निकला, तो मानसून में क्या होगा? SMS में ट्रॉमा लीक, ECG रूम दूसरी जगह शिफ्ट… माइनर ओटी भी टपक रही एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी की माइनर ओटी व ईसीजी रूम में पानी भर गया। दोनों जगह छत टपक रही है। ईसीजी को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग ट्रॉमा की छत पर काम कर रहा है। एसएमएस ट्रॉमा के नोडल अधिकारी डॉ. राजेन्द्र मांडिया का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए ईसीजी रूम को एक्स-रे रूम के पास स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास शिफ्ट किया है।

हर चौथे दिन 20 से 25 हजार रुपए का ई-चालान:दूसरे की नंबर प्लेट लगाकर जयपुर में दौड़ता रहा डंपर, असली मालिक पर 10 लाख रुपए के चालान

हरियाणा के चरखी दादरी में बैठे डंपर मालिक सुशील कुमार के मोबाइल पर पिछले एक साल से हर हफ्ते 20 से 25 हजार रुपए के ई-चालान आ रहे थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि उनका डंपर कभी जयपुर आया ही नहीं। जांच में सामने आया कि शिवदासपुरा क्षेत्र में बजरी परिवहन में लगा एक डंपर उनके वाहन की नंबर प्लेट लगाकर दौड़ रहा था। इस बीच चालान बढ़ते-बढ़ते 10 लाख रुपए से अधिक हो गए। परिवहन विभाग ने असली डंपर की आरसी सस्पेंड कर दी, जिससे उसकी फिटनेस भी अटक गई। सुशील कुमार ने पहला चालान आने पर ही शिवदासपुरा थाने में शिकायत दी थी, लेकिन फर्जी नंबर प्लेट वाला डंपर पकड़ में नहीं आया। चालान लगातार बढ़ने पर उन्होंने दोबारा मामला दर्ज कराया। पुलिस जांच में सामने आया है कि एचआर-84-3083 नंबर प्लेट लगा डंपर टोल प्लाजा से भी गुजरता रहा है। अब पुलिस फास्टैग के जरिए उसके असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच अधिकारी एएसआई दयाराम गुर्जर ने बताया कि संबंधित टोल प्लाजा को अलर्ट कर निगरानी बढ़ा दी गई है।

नशे की तस्करी भी ऑनलाइन:महज 26 हजार रुपए में यूएस से आपके घर तक तीन दिन में कुकीज-गमी के रूप में पहुंचेंगी जानलेवा ड्रग्स

अब कारोबार, पढ़ाई, शॉपिंग ही नहीं नशे की तस्करी भी ऑनलाइन हो गई है। पैडलर्स के पकड़े जाने के डर से अब ड्रग्स का कारोबार भी डिजिटल होता जा रहा है। अब युवा सस्ता नशा करने के लिए ऑनलाइन नशीली दवाएं मंगवा रहे हैं। इंटरनेट की डार्क और एन्क्रिप्टेड दुनिया में अब सीधे मोबाइल ही पैडलर्स बन गए हैं। ड्रग्स तस्कर अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए युवाओं तक ड्रग्स पहुंचा रहे हैं। टेलीग्राम पर एक ऐसा ही बड़ा इंटरनेशनल ड्रग नेटवर्क चल रहा है। एक चैनल/ग्रुप के जरिए प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाइयों से लेकर विदेशों से तस्करी कर लाए गए घातक सिंथेटिक ड्रग्स की खुली मंडी चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बना ड्रग चैनल्स से संपर्क किया तो माफिया ने दे दिया ड्रग्स का मेन्यू कार्ड भास्कर रिपोर्टर ने अपना नाम और नंबर छिपाकर बात की, ड्रग्स माफिया ने मेनू कार्ड की तरह ड्रग्स की लिस्ट शेयर कर दी। तस्कर ने दावा किया कि वह महज 26 हजार रुपए में भारत की किसी भी जगह पर तीन दिन में ड्रग्स पहुंचा देगा। कुकीज और गमी के पैकेटों में छिपाकर प्रतिबंधित पेनकिलर्स, मैजिक मशरूम और वेप्स भेजे जा रहे हैं। उन्होंने ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम और कोडीन के फोटो भी भेजे। तस्कर ने बिटकॉइन एप पर भुगतान करने को कहा। थोक में ड्रग्स लो तो डिस्काउंट, रीसेल ऑफर भी दे रहे तस्कर
इस नेटवर्क को अलग-अलग देशों से तीन लोग संचालित करते हैं। वह पहचान छिपाकर इस नेटवर्क को चला रहे हैं। वे अपने टेलीग्राम वाले ग्रुप में ग्राहकों को बाकायदा पूरे स्टॉक का ‘मेन्यू कार्ड’ भेज रहे हैं। थोक में माल खरीदने पर डिस्काउंट और रीसेल का ऑफर भी दिया जा रहा है। तस्करी के लिए प्रायोरिटी कूरियर बॉक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। टेलीग्राम से ऑर्डर होता है और विदेश से कुरिअर होता है। तस्कर इसके लिए ‘अज्ञात पार्सल’ या ‘डॉक्यूमेंट्स’ लिखकर डिलीवरी करवा रहे हैं।

पीटीईटी-2026 का परिणाम घोषित:944 बीएड कॉलेजों में नया सत्र जुलाई से, ऑनलाइन काउंसलिंग अगले सप्ताह

राज्य के 944 बीएड कॉलेजों में नया शैक्षणिक सत्र जुलाई से शुरू होगा। पीटीईटी-2026 का परिणाम गुरुवार को घोषित कर दिया गया है। परीक्षा की नोडल एजेंसी वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय ने रिजल्ट जारी करते हुए बताया कि प्रदेशभर में बीएड की करीब 1.07 लाख सीटों पर प्रवेश ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से दिए जाएंगे। काउंसलिंग का विस्तृत कार्यक्रम अगले सप्ताह जारी होने की संभावना है। पीटीईटी की मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को निर्धारित शुल्क जमा कर ऑनलाइन विकल्प भरने होंगे, जिसके बाद सीट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्यभर के निजी और सरकारी बीएड कॉलेजों में प्रवेश इसी प्रक्रिया के जरिए होंगे। मेरिट सूची में कार्तिक कुमार गर्ग (भरतपुर) और जयप्रकाश बिस्सू (चूरू) ने संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया है। दोनों को 600 में से 509 अंक मिले हैं। दूसरे स्थान पर मनोज नागदा (उदयपुर) रहे, जिन्हें 508 अंक मिले, जबकि तीसरे स्थान पर युवराज (नागौर) रहे, जिन्हें 507 अंक प्राप्त हुए। गौरतलब है कि पीटीईटी-2026 परीक्षा 14 जून को आयोजित हुई थी, जिसमें प्रदेशभर से 1 लाख 7 हजार 500 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। अब सभी सफल अभ्यर्थियों की निगाहें काउंसलिंग कार्यक्रम और कॉलेज आवंटन प्रक्रिया पर टिकी हैं।

पंजाब में 3 ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ेगा भारी:मौके पर नहीं भरा जा सकेगा चालान, कोर्ट जाना होगा, जेल भी हो सकती है

पंजाब में सड़क पर रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और अंडरएज ड्राइविंग पर सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी। पंजाब सरकार ने ट्रैफिक नियम तोड़ने के इन तीन मामलों को नॉन कंपाउंडेबल कैटेगरी में शामिल कर दिया है। इन कैटेगरी में अगर अब आपका चालान होता है तो उसका भुगतान न तो आप मौके पर कर सकेंगे और न ही RTO दफ्तर में जाकर चालान का भुगतान होगा। इन मामलों में फंसे लोगों को कोर्ट के चक्कर काटने होंगे और मजिस्ट्रेट के सामने ही चालान का फैसला होगा। खास बात यह है कि कोर्ट में चालान की सुनवाई के दौरान अगर मामला ज्यादा गंभीर हुआ तो कोर्ट ड्राइवर को एक्ट के अनुसार कानूनी सजा भी सुना सकता है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की हरी झंडी के बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के सचिव वरुण रूजम (IAS) ने इस आदेश को पूरे राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सचिव ने अपने आदेशों में कहा है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद के ऐसे चालानों का फैसला पुलिस और आरटीओ अपने स्तर पर न करवाएं। सरकार ने यह नोटिफिकेशन 17 जून को जारी किया और अब आरटीओ व पुलिस को भेजा है। इन 3 मामलों पर पहले क्या व्यवस्था थी और अब क्या हुआ है, पढ़िए… सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बेहद सख्त फैसला, जानिए.. किन-किन धाराओं के तहत बदला नियम; कितनी होगी सजा, जानिए…

90 करोड़ का श्मशान घाट, ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया:अंतिम संस्कार में लगेंगे 5 हजार, पटना-मुंगेर में 1 रुपए में मिलेगी 17 एकड़ जमीन

पटना में अब अंतिम संस्कार के लिए VVIP व्यवस्था शुरू हो गई है। गंगा किनारे स्थित बांस घाट श्मशान को अत्याधुनिक बना दिया गया है। यहां एक साथ 18 शवों को जलाने की व्यवस्था है। अंतिम यात्रा में आए लोगों के बैठने के लिए 2 AC वेटिंग हॉल हैं। 90 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किए गए श्मशान को सरकार ने संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को मुफ्त दिया है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार फ्री में नहीं होगा। इसके लिए 3500 से 5000 रुपए तक खर्च करने होंगे। जबकि दीघा, गुलबी और खाजकला के सरकारी घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए 300 रुपए की रसीद कटती है। यही नहीं, इस संस्था को बिहार सरकार पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में 1-1 रुपए की लीज पर 17 एकड़ जमीन देने जा रही है। बांस घाट श्मशान क्यों खास है? यहां क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? पटना के दीघा श्मशान में क्या होगा? मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को क्यों 15 एकड़ जमीन मिलने वाली है? पढ़िए रिपोर्ट..। 4.5 एकड़ में फैले श्मशान में एक साथ जलेंगी 18 चिताएं पटना का बांसघाट श्मशान 4.5 एकड़ में फैला है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसे 89.40 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया है। यहां पहले मौजूद श्मशान 1.24 एकड़ में फैला था। यहां एक साथ 18 चिताएं जलाने की व्यवस्था की गई है। शव जलाने के लिए हैं ये तीन तरह की व्यवस्थाएं… इलेक्ट्रिक शवदाह गृह: शव जलाने के लिए चार इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं। इसमें 15 से 20 मिनट में शव जलकर राख हो जाता है। ये लकड़ी के मुकाबले 90 फीसदी कम प्रदूषण फैलाते हैं। वुड क्रीमेसन ओवन: 6 वुड क्रीमेसन ओवन हैं। इसे बिहार की कंपनी ने तैयार किया हैं। इसमें शव जलाने में कम लकड़ी लगती है। शव 20-25 मिनट में राख हो जाता है। धुंए को बाहर निकालने के लिए चिमनी लगाई गई है। पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल: 8 पारंपरिक अंत्येष्टि स्थल भी हैं। यहां शव को पारंपरिक तरीके से चिता पर रखकर जलाया जाता है। शव जलाने में खर्च होंगे 5 हजार रुपए श्मशान में शव जलाने की न्यूनतम फीस 3500 रुपए है। डोम, पंडित और दूसरे खर्च जोड़ दें तो यह कम से कम 5000 रुपए तक पहुंच जाता है। अगर शव को लकड़ी से जलाना है तो अलग से लकड़ी खरीदनी होगी। यह श्मशान परिसर में मिल जाएगी। शवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां मोर्चरी रूम है। इसमें मोर्चरी फ्रीजर की व्यवस्था की गई है। वहीं, बच्चों के शव के लिए भी एक अलग से 30/30 का एरिया डेवलप किया जा रहा है, ताकि लोग गंगा में जाकर शव को प्रवाहित न करें। अंतिम संस्कार की सामग्री के लिए हैं चार दुकान श्मशान घाट में द्वार से अंदर इंटर करते ही बाएं साइड में 4 दुकानें बनाई गई हैं। यहां कपड़ा, डीप गप्स क्लोथ, लेस गप्स क्लोथ, एकरंगा क्लोथ, राम नाम पट्टी, धोती, घी, चंदन की लकड़ी, देवदार, अगरबत्ती, कपूर, गुलाब जल, पंचमेवा, साड़ी, चूना, माचिस, जौ, हवन सामग्री सहित अन्य जरूरी सामान मिल जाएंगे। 42 फीट ऊंचे हैं मोक्ष और बैकुंठ द्वार आकर्षण का मुख्य केंद्र श्मशान घाट के दो द्वार हैं। इसमें से एक मोक्ष द्वार और दूसरा बैकुंठ द्वार है। दोनों की ऊंचाई 42 फीट है। एक एंट्री और दूसरा निकास पॉइंट है। दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिन्ह स्थापित किया गया है। इन्हें जालंधर के कारीगर ने तैयार किया है। अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए बनाए गए तालाब अस्थियों को विसर्जित करने और स्नान करने के लिए दो तालाब बनाए गए हैं। इनमें दो किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से सीधे गंगा नदी के पानी लाया जाता है। इससे गंगा भी प्रदूषित नहीं होती और लोग गंगा में अस्थी विसर्जन भी कर पाते हैं। एक तालाब 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर का है। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं। दो तालाबों के बीच शिव की प्रतिमा स्थापित दो तालाबों के बीच 12 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को तमिलनाडु के आदियोगी के तर्ज पर तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए जालंधर से कारीगर आए थे। इसे फाइबर मटेरियल से बनाया गया है। इस 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ स्थापित प्रतिमा में शिव की जटाओं से गंगा निकलती दिखाई देंगी और साथ ही आसपास लाइटिंग भी की गई है। वहीं, आगे की तरफ रास्तों पर ग्रीन एरिया को डेवलप गया है। श्मशान घाट की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग इस श्मशान घाट के दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है, जहां इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक की जीवन यात्रा और कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नरक के मार्ग को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। वहीं, शांति मिलने के लिए स्लोगन को भी लिखा गया है। इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी को उकेरी गई है। राजा हरिश्चंद्र की कहानी यहां आए शोकाकुल लोगों को किसी भी परिस्थिति में सच्चाई और कर्तव्यों के पालन के लिए प्रेरित करेगी। चहारदीवारी में ओम लिखे आकर्षक स्टील फ्रेम लगाये जा रहे इस पूरे परिसर के पीछे वाले एरिया में जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का इलाका है, जहां से रोज हजारों की संख्या में गाड़ियां गुजरती है। जलते शव खुले में दिखायी नहीं दे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परिसर की दीवारों पर त्रिशूल बना आकर्षक फ्रेम लगाए गए हैं, जिसे मोक्ष धाम और वैकुंठ धाम नाम दिया गया है। यह एक HPL (हाई प्रेशर लैमिनेट) शीट है। इस व्यू कटर को गुजरात से मंगाया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन स्लॉट कर सकते बुक शवदाह गृह में ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। इससे परिजनों को लंबी कतारों और अफरातफरी से मुक्ति मिलेगी। लोग इसके लिए स्लॉट भी बुक कर सकते हैं। इसके लिए पटना नगर निगम के वेबसाइट पर जाकर टिकट आईडी जेनरेट करना होगा। व्हाट्सएप चैटबोट 9264447449 के माध्यम से भी बुकिंग कर सकते हैं। वहीं, पिकअप सर्विस के लिए मुक्ति रथ भी बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। हेल्प डेस्क की टीम लोगों को रजिस्टर करने में मदद भी करेगी। हालांकि, अभी तक दाह संस्कार की तरह तय नहीं की गई है। बिहार में बनाए जा रहे 40 अत्याधुनिक शवदाह गृह बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह बनाए जा रहे हैं। इसमें से 20 शवदाह गृह का निर्माण पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में आधुनिक शवदाह गृहों का निर्माण हो चुका है। इन तैयार किए गए 20 शवदाह गृहों के सौंदर्यीकरण का काम अंतिम चरण में है, जिसके बाद इन्हें जल्द ही चालू कर दिया जाएगा। ये शवदाह गृह में इलेक्ट्रिकल और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध होगी। पटना के दीघा में बनेगा बिहार का पहला LPG बेस्ड शवदाह गृह पटना के दीघा में बिहार का पहला LPG गैस आधारित शवदाह गृह बनेगा। पटना नगर निगम और ईशा फाउंडेशन के ईशा आउटरीच के बीच इस परियोजना को लेकर कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट पर साइन किया गया है। बिहार सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 2.11 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपए में 33 साल के लिए लीज पर दी है। यहां 4 एलपीजी फर्नेस लगाए जाएंगे। मेयर सीता साहू ने कहा कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह आज के समय की जरूरत है। इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक विधियों के बाद एलपीजी आधारित दाह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग किया जाएगा। मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में मिलेगी 15.01 एकड़ जमीन सम्राट सरकार मुंगेर के तारापुर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपए में 99 साल के लिए 15.01 एकड़ जमीन लीज पर देगी। तारापुर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का क्षेत्र है। वह तारापुर के विधायक हैं। ईशा फाउंडेशन को जमीन सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए मिलेगी।

बिहार के पैसे से मालामाल हो रहे दक्षिण के राज्य?:बैंकों ने भेजे ₹2.44 लाख करोड़, ज्यादा से ज्यादा पैसा बिहारियों को क्यों देना चाह रही सरकार

23 जून को बिहार के बैंकों ने नया सीडी रेशियो (कर्ज-जमा अनुपात) जारी कर दिया। बिहार का सीडी रेशियो 60.21% हो गया है। मतलब साफ है कि बिहार में जमा राशि का 60% लोन ही बिहार के लोगों को दिया जा रहा है। बाकी के 40% रुपए को दक्षिण भारत के राज्यों में भेज दिया जा रहा है। बैंकों की इस रिपोर्ट पर सरकार भड़क गई और तुरंत ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज देने का आदेश दिया। सम्राट सरकार ज्यादा से ज्यादा बिहारियों को कर्ज क्यों देना चाह रही है, क्या बिहार के पैसे से साउथ के राज्य हो रहे मालामाल, समझेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… सवाल-1ः बिहार सरकार बैंकों को बिहारियों को ज्यादा कर्ज देने की हिदायत क्यों दे रही? जवाबः 23 जून को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में डिप्टी CM और वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा- ‘बैंकों ने लोन देने के मामले में अपना परफॉर्मेंस 6 महीने के अंदर नहीं सुधारा तो उनकी शाखाओं से सरकार की जमा राशि वापस निकाल ली जाएगी। साथ ही उन्हें दी सुरक्षा भी विड्रॉ कर लिया जाएगा।’ उन्होंने बैंकों को चेतावनी दी कि जिनका सीडी रेशियो यानी कर्ज देने का अनुपात 50 प्रतिशत से कम होगा, उसमें सरकार अपना पैसा नहीं जमा करेगी। डिप्टी CM ने यह हिदायत तब दी जब बैठक में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार का सीडी रेशियो यानी कर्ज-जमा अनुपात 2025-26 में 60.21% है। इसका मतलब है कि बिहार के बैंकों में अगर 100 जमा हुए तो उसमें से केवल 60.21 रुपए ही लोन के रूप में स्थानीय लोगों या उद्योगों को दिए गए। मतलब 40 रुपए बैंकों ने बिहार के बाहर भेज दिए। अब इसे आंकड़ों से समझिए… 31 मार्च 2026 के अंत तक बिहार की बैंक शाखाओं में 6 लाख 15 हजार 428 करोड़ रुपये जमा थे। इसमें से लोन के तौर पर 3 लाख 70 हजार 563 करोड़ रुपए दिए गए। इनमें लगभग 17 हजार करोड़ रुपए वे भी शामिल हैं, जो या तो नाबार्ड की ओर से रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत बिहार सरकार को दिए गए या दूसरे राज्यों के बैंकों ने बिहार में निवेश के लिए दिए। मतलब कि बैंकों ने बिहारियों के जमा किए पैसों में से 2 लाख 44 हजार 865 करोड़ रुपए दूसरे राज्यों में भेज दिए हैं। अगर बिहार का पैसा, बिहार में रहता तब 3 फायदे होते सवाल-2: …तो क्या UP-बिहार के पैसे से दक्षिण और गुजरात-महाराष्ट्र का विकास हो रहा है? जवाबः तकनीकी और वित्तीय रूप से, हां। बैंकिंग प्रणाली के काम करने के तरीके के आधार पर इसे समझा जा सकता है। फंड का ट्रांसफर: बैंकों के पास जो पैसा जमा होता है, वह एक केंद्रीय पूल में जाता है। चूंकि तमिलनाडु (126%), तेलंगाना (128%), और आंध्र प्रदेश (155%) का सीडी रेशियो 100% से कहीं अधिक है, इसका सीधा मतलब है कि इन राज्यों के बैंकों ने वहां जमा राशि से ज्यादा लोन बांट रखा है। और यह पैसा कम सीडी रेशियो वाले राज्यों UP-बिहार और झारखंड के हो सकते हैं। जिन राज्यों (जैसे बिहार) में जमा राशि ज्यादा है और लोन कम उठ रहा है, बैंक उस ‘अतिरिक्त पैसे’ को उन राज्यों में ट्रांसफर कर देते हैं जहां लोन की मांग बहुत ज्यादा है (जैसे दक्षिण भारत के औद्योगिक राज्य)। औद्योगिक राज्यों को फायदा: तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य अत्यधिक औद्योगिक हैं। वहां बड़े-बड़े कॉर्पोरेट, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और विनिर्माण इकाइयां हैं, जो हजारों करोड़ रुपये का लोन लेती हैं। परिणाम यह होता है कि बिहार के छोटे जमाकर्ताओं के पैसे से दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े उद्योगों को लोन मिलता है। इससे उन राज्यों का विकास तेजी से होता है और बिहार सिर्फ एक “डिपॉजिट सेंटर” बनकर रह जाता है। आर्थिक प्रभाव: इस व्यवस्था के कारण बिहार के जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल दक्षिण भारत के राज्यों में उद्योगों, इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार को लोन देने के लिए किया जाता है, जिससे वहां रोजगार और विकास को गति मिलती है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया था। उन्होंने यही आरोप लगाया था कि राज्य के लोगों का पैसा राज्य के लोगों को रोजगार या दूसरे काम के लिए नहीं मिल पाता है, लेकिन उसी पैसे से दूसरे राज्य में लोन बांटा जाता है। इससे बिहार पिछड़ रहा है। बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाए रिटायर्ड बैंक अधिकारी राजीव कुमार दास कहते हैं, ‘बिहार में सीडी रेशियो बढ़ाया जाना चाहिए। परंतु इसके लिए यहां निवेश योग्य परियोजनाओं की संख्या और आकार भी बढ़नी चाहिए। बड़ी परियोजनाओं के लिए कॉरपोरेट स्तर पर फाइनेंसिंग की रणनीति तय होती है। दक्षिण भारत के राज्य इसी में बाजी मार ले जाते हैं। बैंकों को 3% कैश रिजर्व रेशियो और 18% एसएलआर के तौर पर रखना होता है। इन सबके बाद बची हुई राशि ट्रेजरी ऑक्शन के तौर पर एक बैंक दूसरे बैंक को देते हैं। इसके जरिए राशि पाने वाले बैंक अपनी मर्जी से फाइनेंस करते हैं।’ सवाल-3: बिहार के लोगों को बैंक लोन क्यों नहीं देते? जवाबः बैंकों के लोन नहीं देने के 3 बड़े कारण हैं… लोन डूबने का खतराः बैंकों का मानना है कि बिहार में लोन रिकवरी (ऋण वापसी) की दर खराब है। RBI और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में कृषि और MSME सेक्टर में NPA (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) की दर 7.57% से 7.72% के बीच है। जो राष्ट्रीय औसत 2.15% से 2.8% से करीब 3 गुना अधिक है। इस कारण बैंक लोन देने से कतराते हैं। औद्योगिक पिछड़ेपन और बड़े उद्योगों की कमी: लोन की सबसे ज्यादा मांग बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आती है। बिहार में बड़े उद्योगों की कमी के कारण ‘क्रेडिट अवशोषण क्षमता’ कम है। दस्तावेज और कोलेटरल (जमानत) की कमी: बिहार में एक बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है। बैंकों की ओर से मांगे जाने वाले दस्तावेज (जैसे आईटीआर, पक्का लैंड टाइटल) न होने के कारण लोन रिजेक्ट हो जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोगों का कोई क्रेडिट इतिहास नहीं होता, जिससे बैंक उन्हें लोन देने में कतराते हैं। जमीन के दस्तावेजों का विवाद: बिहार में लोन के बदले बंधक रखने के लिए जमीन के कागजात अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। दाखिल-खारिज और म्यूटेशन की समस्याओं के कारण बैंक लोन रिजेक्ट कर देते हैं। जागरूकता का अभाव: आम लोगों में बैंकों की लोन प्रक्रियाओं और सरकारी योजनाओं (जैसे मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया) की सही जानकारी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने की समझ की कमी होती है। सवाल-4: सरकार कितना सीडी रेशियो बेहतर मानती है? जवाबः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के मुताबिक, किसी भी राज्य या क्षेत्र के लिए 60% या उससे अधिक का सीडी रेशियो एक स्वस्थ या न्यूनतम स्वीकार्य स्तर माना जाता है। आदर्श स्थिति: आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, आदर्श सीडी रेशियो 70% से 80% के बीच होना चाहिए। 60% से कम: यह दर्शाता है कि बैंक स्थानीय स्तर पर ऋण देने में रुचि नहीं ले रहे हैं या वहां आर्थिक गतिविधियां सुस्त हैं। डॉ. डी. सुभाष राव समिति ने सिफारिश की थी कि जिन राज्यों का सीडी रेशियो 60% से कम है, वहां बैंकों को विशेष जिला स्तरीय योजनाएं बनाकर लोन बढ़ाना चाहिए। 100% से अधिक: यह अत्यधिक आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है, लेकिन बैंकों के लिए यह जोखिम भरा भी हो सकता है क्योंकि वे अपनी जमा पूंजी से अधिक लोन दे रहे होते हैं (इसके लिए वे बाहरी फंड या आरबीआई से रीफाइनेंस पर निर्भर होते हैं)। सवाल-5: क्या विकास का पैमाना ज्यादा लोन लेना ही है? लोन राज्य के विकास को कैसे प्रभावित करते हैं? जवाबः केवल लोन लेना ही विकास का एकमात्र पैमाना नहीं है, लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था में बिना लोन के तीव्र विकास असंभव है। लोन (क्रेडिट) को किसी भी अर्थव्यवस्था की “लाइफलाइन” कहा जाता है। यह राज्य के विकास को इस तरह प्रभावित करता है… पूंजी निर्माण: जब उद्योगों, स्टार्टअप्स और किसानों को लोन मिलता है, तो वे नई फैक्ट्रियां लगाते हैं, तकनीक खरीदते हैं और उत्पादन बढ़ाते हैं। इससे राज्य की GSDP बढ़ती है। रोजगार के अवसर: लोन के जरिए जब नए व्यवसाय शुरू होते हैं या पुराने व्यवसायों का विस्तार होता है, तो स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होता है। क्रय शक्ति में वृद्धि: रिटेल लोन (जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन) से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे बाजार में मांग पैदा होती है और अर्थव्यवस्था चक्र गतिशील रहता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों को मिलने वाले लोन से सड़कें, बिजली घर, और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे तैयार होते हैं, जो दीर्घकालिक विकास की नींव रखते हैं।

रिपोर्टर ने एनकाउंटर का क्राइम सीन रिक्रिएट किया:भरत तिवारी ने पिस्टल फेंकी, थानेदार ने धक्का मारा, STF ने 30 सेकेंड में मारीं 3 गोलियां

“दाहिना हाथ कंधे पर रखा। बाएं हाथ से सीना ठोकने लगा। बोला- बहुत अच्छा..तुम पढ़े लिखे हो, इसलिए मुझे विश्वास था ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ..। 10 कदम ऐसे ही आगे बढ़ा, अचानक अपनी कमर से तेज धक्का मारकर गिरा दिया। जमीन पर गिरते ही 30 सेकेंड में 3 गोलियां मार दीं। पहली गोली लगते ही भरत बोला- धोखा देकर गोली मार दी..। इसके बाद पुलिस की गाड़ियां भरत को लेकर चली गईं। फिर हमारा भरत लौटकर नहीं आया..। पुलिस वालों ने उसका मर्डर कर दिया..।” यह खुलासा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हुआ है। हमारी पड़ताल के दौरान भरत के करीबी दोस्त राजू ने एनकाउंटर की पूरी कहानी बताई। हमारी टीम भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू को मुठभेड़ वाली जगह पर लेकर पहुंची। हमने दोनों के साथ उस दिन हुए एनकाउंटर का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। 17 जून को सुबह 9.32 बजे जब पुलिस ने भरत को गोली मारी थी तो ये दोनों वहां से 20 मीटर दूर खड़े थे। एनकाउंटर वाले दिन क्या-क्या हुआ? भरत ने पिस्टल किसके कहने पर फेंकी? उस पर किसने गोलियां चलाईं? भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए सभी सवालों के जवाब… भरत के भाई के साथ रिपोर्टर ने सीन रिक्रिएट किया भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना से 120 किलोमीटर दूर भोजपुर (आरा) के बेलौटी गांव पहुंची। सुबह के करीब 10 बजे थे। हमें जानकारी मिली थी की एनकाउंटर वाले दिन भरत के दोस्त राजू और भाई पप्पू ने सबसे नजदीक से पूरी घटना को देखा था। हम उन दोनों से मिले। उस दिन क्या हुआ था इसे लेकर हमारी उनसे बात हुई। इसके बाद हम दोनों को लेकर एनकाउंटर वाली जगह पर पहुंचे। हमने दोनों के साथ 17 जून को हुई मुठभेड़ का पूरा सीन रिएक्रिएट किया। हम भरत तिवारी के घर से लगभग 2 किलोमीटर दूर एनकाउंटर वाले स्पॉट पर खड़े थे। आसपास खेत थे। पास ही ईंटें पड़ी थीं। जिस कच्ची सड़क पर हम खड़े थे वो उबड़-खाबड़ थी। भरत के भाई पप्पू के साथ हम एनकाउंटर वाली जगह पर खड़े थे। पप्पू ठीक उस जगह खड़ा था, जहां 17 जून को भरत खड़ा था। हम उसके ठीक सामने थे। पप्पू ने बताया कि 17 जून को वो यहां से करीब 20 मीटर दूर खेत में बनी झोपड़ी के पास खड़ा था। यहां से थोड़ी दूर पर चंदन और उसका भाई था। पुलिस ने आसपास का इलाका पहले ही खाली करवा दिया था, ताकी कोई घटना का वीडियो ना बना पाए। पुलिस पूरी प्लानिंग के साथ तैयार थी। उसने स्पॉट दिखाते हुए कहा कि भरत ने इसी जगह पिस्टल फेंकी थी। जिसे एक पुलिस वाले ने उठाया लिया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी के पास खड़ी STF ने उसपर गोलियां चला दीं। पुलिस ने 3 गोली मारी तो लगा सब खत्म हो गया पप्पू ने बताया कि सुबह जब भरत घर से निकला तो मैं भी खेत की तरफ गया था। कुछ देर बाद मैं ईंट के पास आकर खड़े हो गया। घटना के समय उस दिन मैं यहीं खड़ा था, जो लाल रंग का घर आपको दिख रहा है, उसके पास ही नीले वाले घर के सामने और लोग खड़े थे। मेरे साथ चंदन और उनके भाई भी थे। चंदन मुझसे आगे चला गया। उसने इशारा करते हुए बताया कि उसी दौरान भरत की मां और बहन इस रास्ते से दौड़ते हुए इधर आ रही थीं। पहले से यहां महिला पुलिस भी खड़ी थीं। वो भरत की मां और बहन को यहां से मारकर भगाने लगीं। दोनों को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया। जिनके लिए भरत लड़ाई लड़ रहे थे, उन्हें जबरन घर से भगा दिया गया। पुलिस ने ऐसा धमकाया कि लोग घर छोड़कर भाग गए। हम लोगों को भी यहां से भगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन थोड़ा पीछे जाकर हम वापस आ गए। हम लोग उधर नहीं जा पाए और यहीं रुक गए। इसके बाद पुलिस उन्हें पकड़कर आगे ले गई। तभी हमने लगातार तीन गोलियों की आवाज सुनीं। पप्पू ने आगे बताया कि गोली की आवाज सुनते ही लगा अब सब खत्म हो गया। हमको लग गया कि भरत को मार डाला गया। उस समय सभी अलग-अलग बातें कह रहे थे। कोई कह रहा था कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, तो कोई कह रहा था कि मार दिया गया। गोली की आवाज आई तो सभी पुलिस वाले भरत को घेरकर खड़े हुए थे। फिर एक गाड़ी आगे आई, उसमें उठाकर लादा जाने लगा। और देखते ही देखते भरत को लेकर पुलिस वाले लेकर चले गए। सबसे नजदीकी रास्ते से अस्पताल जल्दी पहुंचा जा सकता था, लेकिन उन्होंने लंबे रूट को चुना। उन लोगों ने इसलिए ऐसा किए ताकि उनका इलाज समय से नहीं हो पाए। 10 मिनट के रास्ते में 20 से 25 मिनट का समय लगाया गया। घटना के बाद पूरा माहौल शांत हो गया, किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि भरत अब लौटकर नहीं आएगा। हम लोगों की आंखों के सामने ही पुलिस वालों ने धोखे से भरत की जान ले ली। पप्पू से बातचीत के बाद हम भरत के करीबी दोस्त राजू से मिले। वो एनकाउंटर वाली जगह से थोड़ी दूर पर हमारे साथ खड़ा था। आसपास के घरों की ओर इशारा करते हुए बताया कि यहां सब जगह STF के जवान घुसे हुए थे। भरत जब पुलिस के कहने पर वहां गया तो उसके बहकावे में लेकर पिस्टल फिंकवाई गई। झूठा वादा किया गया कि हम तुम्हारी मांग मान लेंगे। मैं वहां से करीब 20 मीटर दूर खड़ा था। उसने इशारों से बताया कि भरत ने जैसे ही पिस्टल फेंकी। थानेदार आया उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, बहुत अच्छा। तुम अच्छे लड़के हो। करीब 10 मीटर आगे जाने के बाद थानेदार ने कमर से धक्का देकर उसे गिरा दिया। इसके बाद 30 सेकेंड में भरत के 3 गोलियां मारी गईं। रिपोर्टर – आप भरत के काफी करीबी रहे हैं, हर समय साथ रहते थे?
राजू – जी शुरू से लेकर गोली लगने तक मैंने साथ नहीं छोड़ा, बागेश्वर धाम तक साथ गया था। रिपोर्टर – एनकाउंटर की स्थिति बनी कैसे?
राजू – एनकाउंटर नहीं, उन लोगों का प्लान ही था मार देने का। रिपोर्टर – क्या हुआ था बताइए?
राजू – एक दिन पहले STF के जवानों ने इलाकों को घेर लिया था। रिपोर्टर – एक दिन पहले क्यों घेर लिया?
राजू – प्लान था, इसलिए यहां हर एक घर में वह छिपे हुए थे। रिपोर्टर – इसके पीछे भरत को मार देने की पूरी प्लानिंग थी?
राजू – घटना के दिन सबने घेर रखा था, माइक से ऐलान किया जाने लगा। रिपोर्टर – माइक पर क्या बोल रहे थे, आप लोगों ने सुना?
राजू – भगा रहे थे, लेकिन मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख सुन रहा था। रिपोर्टर – क्या बोल रहे थे, भरत के लिए संदेश था क्या?
राजू – हां, बोल रहे थे, आत्मसमर्पण कर दो, कुछ नहीं होगा। रिपोर्टर – अचानक फायरिंग कैसे होने लगी?
राजू – पुलिस वाले फायरिंग करने लगे तो भरत ने भी एक हवाई फायरिंग की। भरत को मारने में SDPO ने की थी बड़ी साजिश राजू ने बताया पूरी प्लानिंग SDPO की थी। वह मौके पर पहुंचा और भरत को अपने जाल में फंसा लिया। उसने पहले से प्लानिंग कर रखी थी। उसने पहले कॉल किया फिर भरत को अपनी बातों में फंसाया। रिपोर्टर – उसने भरत को कैसे फंसा लिया?
राजू – SDPO पहुंचा और आश्वासन दिया कि मांगें पूरी की जाएंगी। ऐसे और कई दावे करने लगा। रिपोर्टर – किस आधार पर दावा कर रहा था?
राजू – झूठे दावाें पर भरत बोला – मांग पूरा करने का आश्वासन है, इसलिए मैं सरेंडर कर रहा हूं। रिपोर्टर – फिर क्या हुआ?
राजू – पहले बोले, हथियार ले लीजिए, पुलिस बोली – नहीं, फेंक दो। उसने हथियार फेंक दिया। तुरंत एक पुलिस वाले ने पिस्टल उठा ली। थानेदार ने बड़ी चालाकी से भरत को गोली मरवाई राजू बोला- हम लोगों को लगा कि भरत ने पिस्टल फेंक दी है, अब पुलिस गिरफ्तार कर लेगी, लेकिन अचानक पूरी कहानी बदल गई। थानेदार राजेश मालाकर भरत के पास पहुंचा। दाहिना हाथ भरत के कंधे पर रखा और बाएं हाथ से सीने को ठोकते हुए बोला – बहुत अच्छा किए, तुम पढ़े-लिखे हो। मुझे पहले से पता था तुम ऐसा ही करोगे। चलो हमारे साथ, तुमको अपने साथ ले चलूंगा। वह कंधे पर हाथ रखकर महज 10 कदम आगे बढ़ा ही था, अचानक अपनी कमर से भरत की कमर में तेज धक्का मारकर पीछे हट गया। जैसे ही भरत गिरा, STF के जवान ने गोली चला दी। भरत ने कहा, धोखे से गोली मार दी। फिर ताबड़तोड़ 2 गोली और मारी गई। थोड़ी देर पुलिस वाले घेर कर खड़े हो गए, फिर गाड़ी में लाद दिया। गाड़ी में लेकर इधर-उधर घूमते रहे, गांव से बाहर निकलने का लंबा रूट पकड़ा। जब रिपोर्टर ने सवाल किया आपने ऐसा होते अपनी आंखों से देखा? राजू ने बताया हां, सबसे करीब से मैंने ही देखा था मैं, मेरा एक दोस्त और भरत का भाई चंदन सब साथ में खड़े पर थे। हम लोगों ने तीनों गोलियां चलते हुए देखीं इसकी आवाज भी सुनी। राजू ने बताया कि सबसे करीब घटना को देखने वालाें में उसके साथ भरत का छोटा भाई चंदन भी था। चंदन को ढूंढते हुए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम भरत के घर पहुंची। चंदन ने दावा किया कि भरत को मारने की कहानी पहले से ही लिखी गई थी। पुलिस वालों ने धोखा देकर भइया को मार डाला, मैं 20 मीटर की दूरी से सब देख रहा था। रिपोर्टर – कितने दिनों से भारत तिवारी ने हथियार रखा था?
चंदन – हम लोगों को पता नहीं था, लेकिन जब वीडियो सामने आया तब पता चला। रिपोर्टर – आप लोगों को पता नहीं था इसके बारे में क्या?
चंदन – वह घर में कुछ नहीं बताते थे, बहुत पूछते थे वो कुछ नहीं बताते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यो होता था?
चंदन – वह गांव वालों के लिए लड़ते थे, उनके फोन में कुछ न कुछ बड़ा राज है। रिपोर्टर – फोन कहां है?
चंदन – फोन तो प्रशासन के पास है। रिपोर्टर – कभी बताया नहीं, वीडियो के बारे में?
चंदन – एक लाइव में यह बोला था कि अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मेरा फोन मेरे परिवार वालों को सौंपा जाए। रिपोर्टर – वह ऐसा क्यों बोल रहे थे?
चंदन – उन्हें पहले ही जानकारी हो गई थी कि ये लोग उन्हें मार देंगे। रिपोर्टर – उनको कैसे पता था कि उनका एनकाउंटर किया जाएगा? वीडियो में पहले से बोल रहे थे?
चंदन – अब यह उन्हें ही पता था। मोबाइल में था बड़ा राज, इसलिए जान ले ली भरत के भाई चंदन का कहना है कि मोबाइल में कोई बहुत बड़ा राज था जिससे पुलिस काफी बेचैन हो गई थी। इसी राज के लिए प्लानिंग के तहत उनही हत्या कर दी गई होगी। रिपोर्टर – प्रशासन से क्या दुश्मनी थी?
चंदन – कुछ न कुछ तो थी, तभी हथियार उठाया। वह बार-बार वीडियो में बोलते थे, मार दिया जाएगा। रिपोर्टर – उनका वीडियो किसने बनाया था?
चंदन – वह खुद अपना वीडियो बनाते थे। किसी को साथ नहीं रखते थे। रिपोर्टर – ऐसा क्यों, कोई खतरा था क्या?
चंदन – हां, वह जानते थे कि आज नहीं तो कल कुछ गड़बड़ होने वाली है। रिपोर्टर – वह गांव की लड़ाई लड़ रहे थे, तो क्या सिर्फ लड़ाई लड़ने की वजह से उनके साथ ऐसा हुआ, या इससे पहले भी कुछ हुआ था?
चंदन – नहीं, सिर्फ यह लड़ाई नहीं है, उनके हाथ कुछ ऐसे सबूत लगे थे, जिसके लिए प्रशासन बेचैन था। रिपोर्टर – कौन सा ऐसा सबूत था जो प्रशासन के खिलाफ था?
चंदन – कुछ न कुछ सिस्टम के खिलाफ रहा होगा। सारा राज उनके मोबाइल से खुलेगा। हथियार फेंक दिया, फिर क्यों गोली मारी गई। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था?
चंदन – मैं बिल्कुल पास था, प्रशासन के लोग चारों तरफ से घेर चुके थे। रिपोर्टर – पुलिस ने कितनी देर तक घेरा था?
चंदन – एक से डेढ़ घंटे तक ड्रामा कर रही थी। पुलिस चाहती तो आसानी से उन्हें पकड़ लेती। कहानी पहले से तैयार थी, घर से धोखे से ले गए भास्कर की इन्वेंस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि पुलिस के कुछ अधिकारी बिना वर्दी के भरत के घर प्लानिंग के साथ पहुंचे थे। चंदन ने बताया कि प्रशासन चाहता तो आराम से उन्हें पकड़ सकता था, लेकिन प्लान तो कुछ और ही थी। चंदन ने बताया- उस दिन सुबह करीब 8 बजे पुलिस के कुछ लोग आए और बोले, चलिए उस जगह को दिखाइए, क्या मामला है, क्या मांग है? भाई ने घर से बाइक निकाली। लगभग 10 मिनट में बाइक से वह घटनास्थल पर पहुंच गए। तब तक पुलिस उन्हें चारों तरफ से घेर चुकी थी। हम लोग भी पहुंच गए। पुलिस सबको भगा रही थी, लेकिन हम लोग 20 मीटर की दूरी पर खड़े हो गए। रिपोर्टर – जो लोग बुलाने गए थे, वह कौन थे?
चंदन – एक पुलिस वाला आया था, उसके कंधे पर सिंगल स्टार था, लेकिन बैच नहीं लगा था। रिपोर्टर – क्या वह पुलिस वालों के साथ गए थे?
चंदन – नहीं, पुलिस वाले एक साइड से गए, वह दूसरी साइड से गए। तब तक पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया। रिपोर्टर – हथियार फेंकने के बाद एनकाउंटर किया गया या कुछ देर रोककर?
चंदन – नहीं, हथियार फेंकने के बाद SHO राजेश मालाकार ने उनके कंधे पर हाथ रखा। थोड़ी दूर आगे ले जाते हुए बोले, भरत, तुमसे यही उम्मीद थी। हथ रखे हुए करीब 10 मीटर आगे ले गए, अचानक धक्का दिया और फिर पीछे हो गए। फिर उन्हें भून दिया गया। गोली लगने के 10 मिनट बाद तक पुलिस उन्हें घेरकर खड़ी रही। रिपोर्टर – सबसे पहले किस अस्पताल में ले गए?
चंदन – पहले शाहपुर ले गए? रिपोर्टर – आखिर ऐसा क्यों?
चंदन – उन्हें मारना था, वे चाहते थे कि ब्लड लॉस हो। उस समय तीन फायर की आवाज आई थी। रिपोर्टर – आप लोग पास नहीं गए?
चंदन – पुलिस वाले पास नहीं जाने दे रहे थे। रिपोर्टर – इलाज में देरी तो नहीं हुई?
चंदन – समय पर इलाज मिलता, तो शायद वह बच जाते। रिपोर्टर – मोबाइल मिला कि नहीं?
चंदन – मोबाइल में बहुत राज है, लेकिन पुलिस कह रही कि गायब हो गया है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम उस परिवार को ढूंढने का प्रयास की जिसका घर गोली कांड से महज 20 मीटर की दूरी पर है। काफी तलाश के बाद मंटूचंद्र से हमारी मुलाकात हुई। मंटूचंद्र ने बताया कि पुलिस का पूरा प्लान भरत को गोली मारने का था, इसलिए घटना का अंजाम देने से पहले हम लोगों को परिवार सहित बंदूक दिखाकर भगा दिया। मंटूचंद्र की बीमार बूढ़ी मां चल नहीं सकती है उसे गोद में उठाकर परिवार वाले भागे। रिपोर्टर – उस दिन क्या हुआ था? आपका घर तो जहां गोली लगी वहां से एकदम सटा हुआ है?
मंटूचंद्र – पास में ही थे, लेकिन हम लोगों को यहां से बंदूक दिखाकर खेत में भगा दिया गया। रिपोर्टर – गांव को खाली कराने में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – बातचीत चल रही थी, उसके बाद पुलिस वालों ने सबको यहां से दूर भगा दिया। ज्यादा समय नहीं लगा, घरों को खाली कराने में। पूरा गांव कुछ ही समय में खाली हो गया। गांव में यहां बहुत लोग नहीं थे। रिपोर्टर – अच्छा, कितने पुलिस वाले आए थे?
मंटूचंद्र – बहुत पुलिस वाले थे, लगभग 100 के आसपास। रिपोर्टर – बातचीत में कितना समय लगा?
मंटूचंद्र – लगभग आधा घंटा लगा होगा, किसी को जानकारी नहीं थी कि यह सब होगा। रिपोर्टर – फिर बंदूक फेंक दी थी या अपने हाथ में पकड़े हुए थे?
मंटूचंद्र – जब एनकाउंटर हुआ तो बंदूक फेंक दी थी, बंदूक फेंकने के बाद ही एनकाउंटर हुआ है। रिपोर्टर – आप देखे थे बंदूक फेकते हुए?
मंटूचंद्र – हां, अगर बंदूक हाथ में लिए रहते और मार दिया होता, तो कोई कुछ नहीं बोलता। रिपोर्टर – हवाई फायर तो किया था ना?
मंटूचंद्र – हां, हवाई फायर किया उसी समय मार देते तो कोई बात नहीं थी। पिस्टल फेकने के बाद क्यों मारा। रिपोर्टर – आप लोगों को तो दिखाई दे रहा होगा कि क्या-क्या हो रहा है?
मंटूचंद्र – हम लोग इधर थे, वहां पर वो पकड़ा गया था। यहां प्रशासन लगी थी, सबने घेरा बना लिया था। उधर से इधर आने नहीं दे रहे थे। रिपोर्टर – भरत ने जब बंदूक फेंक दी, तो कितनी देर बाद एनकाउंटर की आवाज सुनाई दी?
मंटूचंद्र – 30 सेकंड के अंदर 3 फायर हुए और उसके बाद पूरा माहौल शांत हो गया, भरत को लेकर चले गए। रिपोर्टर – गोली लगने के कितनी देर बाद पुलिस उन्हें ले गई? मंटूचंद्र – पुलिस चारों ओर से घेर रखी थी। फायर के बाद एक गाड़ी तेजी से आई और फिर उठाकर लेकर चली गई। हम लोगों को लग गया कि जान से मार दिया। सब लोगों ने देखा है, पहले उन्हें धक्का मारकर गिराया गया, फिर मारा गया है।

शिमला में भारी बारिश, ढली में तीन गाड़ियां दबी:घरों में घुसा पानी, सड़कें-रास्ते पानी के तालाब में तब्दील, चंबा में ऑरेंज अलर्ट

हिमाचल प्रदेश की राजधानी में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और भारी बारिश हुई। तेज बारिश के बाद शहर की सड़कें और रास्ते पानी से भर गए। ढली में तेज बारिश के बाद नाले में मलबा आने से तीन गाड़ियां दब गई। ढली में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया। इस दौरान स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को घर लौटते वक्त परेशानी झेलनी पड़ी। शिमला में शाम 4 बजे ही अंधेरा सा छा गया। मानसून की दस्तक से पहले भारी बारिश ने शहर में पानी निकासी के नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। जल निकासी नहीं होने की वजह से शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन जारी कर रात 10 बजे तक चंबा, शिमला, कुल्लू, मंडी और सिरमौर बारिश के साथ आंधी-तूफान का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। हालांकि, सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए रहे। मगर अब ज्यादातर भागों में मौसम खराब बना हुआ है।
राज्य में अगले 7 दिन बारिश के आसार IMD के अनुसार- राज्य में अगले सात दिन तक बारिश के आसार है। 26 से 30 जून तक कुछेक भागों में ही हल्की बारिश हो सकती है। मगर 30 जून की रात को वेस्टर्न डिस्टरबेंस ज्यादा स्ट्रांग होगा। इससे अगले 48 घंटे यानी एक व दो जुलाई को पहाड़ों पर भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान कुछेक क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती है। इसे देखते हुए टूरिस्ट समेत लोकल लोगों को भी सावधानी बरतने, नदी-नालों और लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। चंबा का पारा 8.8 डिग्री गिरा राज्य के कई भागों में बारिश और आसमान में हल्के बादल छाने के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना हो गया है। अधिकांश शहरों का पारा सामान्य से नीचे गिर गया है। चंबा का अधिकतम तापमान सामान्य से 8.8 डिग्री की गिरावट के बाद 28.3 डिग्री सेल्सियस रह गया है। कांगड़ा का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 32.9 डिग्री, मनाली का 1.7 डिग्री कम होने के बाद 25.2 डिग्री और सोलन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री नीचे लुढ़कने के बाद 29.0 डिग्री सेल्सियस रह गया है। अगले एक सप्ताह के दौरान भी ज्यादातर जगह तापमान सामान्य से कम रहेगा। मानसून की एंट्री के संकेत नहीं प्रदेश में मानसून की एंट्री पहले ही 5 दिन लेट हो गई है। अगले 4-5 दिनों के दौरान भी मानसून की दस्तक के कम आसार हैं। हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है। इससे पहले भी कई बार जुलाई के पहले व दूसरे सप्ताह में मानसून दस्तक देता रहा है। राज्य में सबसे देरी से 10 जुलाई 2010 को मानसून आया था। जून में सामान्य से 31% कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार- राज्य में जून महीने में अब तक सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में 1 से 26 जून के बीच सामान्य तौर पर 79.8 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार अभी तक केवल 55.3 मिलीमीटर बादल बरसे हैं।

बड़नगर में पटाखों से किया था वैन में ब्लास्ट:'फिर आ गए' क्यों लिखा, विस्फोट का मकसद क्या; ATS और फोरेंसिक टीम ढूंढ रही सुराग

उज्जैन में मुहर्रम के जुलूस के दौरान वैन को क्रेन से लटकाकर विस्फोट करने का वीडियो देखने के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। जिले की बड़नगर पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर वैन और क्रेन को जब्त कर लिया है। आरोपियों का कहना है कि 8 हजार के पटाखे खरीदकर वैन में ब्लास्ट किया गया था। उज्जैन, उन्हेल, नागदा और महिदपुर पहले से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए जांच में स्थानीय पुलिस के साथ एटीएस, यानी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड भी शामिल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां अब तीन बड़े सवालों के जवाब ढूंढ रही हैं- 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाकर उड़ाई थी वैन दरअसल, 23 जून की रात बड़नगर के अडान मोहल्ले से मोहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। इसमें टाटा मैजिक गाड़ी को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाया गया था। इसकी छत पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहरा रहे थे। वैन पर ‘ले, फिर आ गए’ लिखा था। जुलूस में शामिल कुछ लोगों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर भी यही मैसेज लिखा था। कुछ देर बाद वैन में विस्फोट कर दिया गया। इसका वीडियो भी सामने आया है। मामले में शोएब पिता गब्बू, जाहिद पिता भूरा खां और तपसील उर्फ तस्लीम को अरेस्ट किया गया है। वहीं, क्रेन के मालिक पर भी केस किया गया है। पहले देखिए, 5 तस्वीरें… जाहिद-तपसील ने लहराए थे झंडे पुलिस के मुताबिक, शोएब ने अडान अखाड़े के बैनर तले मुहर्रम का जुलूस निकाला था। उसी ने कबाड़ में रखी गाड़ी को क्रेन पर लटकवाया था। विस्फोट के समय जाहिद और तपसील गाड़ी की छत पर मौजूद थे। वे ही झंडे लहराते दिखाई दिए थे। ब्लास्ट के पहले दोनों नीचे उतर आए थे। पुलिस को आरोपियों ने करीब 8 हजार रुपए के पटाखे खरीदने का बिल भी दिया है, जिसकी तस्दीक की जा रही है। 2500 रुपए किराए पर ली गई थी क्रेन क्रेन मालिक गोपाल राठौर ने पुलिस को बताया कि अडान अखाड़े के सदस्यों ने पुष्प वर्षा के लिए क्रेन किराए पर लेने की बात कही थी। 2500 रुपए किराया तय होने के बाद ड्राइवर समेत क्रेन भेज दी थी। राठौर का कहना है कि उन्हें वाहन में विस्फोट करने की कोई जानकारी नहीं थी। शुक्रवार को उज्जैन की फोरेंसिक टीम और बम निरोधक दस्ता (BDS) बड़नगर पहुंचकर वैन से सेंपल इकट्‌ठा करेंगे। भीड़भाड़ वाले इलाके में किया गया ब्लास्ट एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बड़नगर के जय स्तंभ चौक पर भीड़भाड़ वाले इलाके में ये विस्फोट किया गया था। ब्लास्ट के बाद गाड़ी के पार्ट्स, कांच और दूसरी चीजें नीचे गिरीं। इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा पैदा हुआ। कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करनदीप सिंह क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) के साथ बड़नगर पहुंचे और संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला। उन्होंने कहा- प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गाड़ी में रॉकेट और सुतली बम लगाए गए थे। इसके कांच बंद होने के कारण गैस बनने से विस्फोट जैसी स्थिति बनी। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोहर्रम के जुलूस में हमले का प्रदर्शन, VIDEO उज्जैन के पास बड़नगर में मोहर्रम के जुलूस के दौरान एक वैन में किए गए विस्फोट का वीडियो सामने आया है। घटना 23 जून की रात की बताई जा रही है। बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले जुलूस में वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया। वैन पर दो युवक खड़े होकर लाल झंडे लहराते रहे। पढ़ें पूरी खबर…