मंडी में सुमन, पालमपुर में राधा मेयर चुनी गईं:धर्मशाला में हंगामा, महापौर चुनाव टला; सोलन में भाजपा को लग सकता है झटका

हिमाचल प्रदेश के मंडी और पालमपुर नगर निगम को आज (सोमवार) नए मेयर व डिप्टी मेयर मिल गए हैं। मंडी नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की सुमन ठाकुर मेयर और जितेंद्र शर्मा डिप्टी मेयर चुने गए। सुमन ठाकुर लगातार पांच बार पार्षद जीतकर आईं हैं। वहीं पालमपुर कांग्रेस की राधा सूद महापौर और नीलम मलिक को उप महापौर चुना गया। दोनों को स्थानीय विधायक आशीष बुटेल का करीबी माना जाता है। पालमपुर के नगर निगम के कुल 15 वार्डों में से 11 पर कांग्रेस ने कब्जा किया है। इससे यहां कांग्रेस ने पहली की मीटिंग में सर्वसम्मति से मेयर व डिप्टी मेयर चुन लिए है। राज्य के दोनों नगर निगम की कमान दो महिलाओं मिली है। हालांकि दोनों जगह मेयर पद अनरिजर्व था। दोनों जगह शपथ ग्रहण के बाद सर्वसम्मति से चुनाव संपन्न हो गए।
बहुमत के बावजूद सोलन-धर्मशाला में चुनाव लटका वहीं धर्मशाला और सोलन में कोरम पूरा नहीं होने के कारण चुनाव टल गए। चुनावी नतीजों के मुताबिक- धर्मशाला और सोलन में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। बावजूद इसके चुनाव नहीं हो सके। धर्मशाला में एक जुलाई को मेयर व डिप्टी मेयर चुनाव धर्मशाला में नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सियासी ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस के पांच और एक निर्दलीय पार्षद द्वारा सदन से वॉकआउट करने के बाद जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका। इससे मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव एक जुलाई तक टल गए। अगली मीटिंग में मेयर व डिप्टी मेयर चुनाव के लिए साधारण बहुमत यानी 9 वोट की जरूरत होगी, इसे देखते हुए भाजपा की जीत तय मानी जा रही है। सोलन में 2 जुलाई को चुना जाएगा मेयर सोलन में भी भाजपा के पास बहुमत के बावजूद आज मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो सका। यहां पर भी कांग्रेस समर्थित और एक निर्दलीय पार्षदों ने शपथ ग्रहण करने के बाद सदन से वॉकआउट किया। अब सोलन में दो जुलाई को मेयर का चुनाव होगा। सोलन में पलट सकती है बाजी दिलचस्प यह है कि सोलन में भाजपा के दो नवनिर्वाचित पार्षदों पर अतिक्रमण के आरोप है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह आरोप सही साबित पाए। अब मामला डिविजनल कमिश्नर के पास है। ऐसे में यदि दो जुलाई से पहले डिविजनल कमिश्नर का फैसला बीजेपी के दो पार्षदों के खिलाफ आता है तो सोलन नगर निगम की बाजी पलट सकती है

जसपाल राणा के 50वें जन्मदिन पर मां की मौत:बेटे के जाने के 16 दिन बाद ली अंतिम सांस, उन्हें कैंसर था

उत्तराखंड के दिग्गज निशानेबाज और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत कोच जसपाल राणा के निधन के 16 दिन बाद उनकी मां श्यामा राणा का भी रविवार शाम निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थीं और दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती थीं। जसपाल राणा का 12 जून को जर्मनी के म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया था। परिवार ने उनकी गंभीर बीमारी को देखते हुए उन्हें जसपाल राणा के निधन की जानकारी नहीं दी थी। वे अंतिम समय तक बेटे से मिलने की इच्छा जताती रहीं। 28 जून को जसपाल राणा का 50वां जन्मदिन था और उसी दिन शाम करीब आठ बजे उनकी मां ने भी अंतिम सांस ली। कुछ ही दिनों में मां-बेटे के निधन से परिवार गहरे सदमे में है। पारिवारिक मित्र मयंक मारवाह ने बताया कि श्यामा राणा के निधन की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य और करीबी दिल्ली पहुंच गए। 12 जून को हुआ था निधन, 16 को अंतिम संस्कार जसपाल राणा का 12 जून को निधन हो गया था। 49 वर्षीय राणा म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटते समय फ्लाइट में तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 13 जून को उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंदा स्थित मझोन गांव स्थित आवास लाया गया था, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर अपने कोच को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हो गई थीं। सीएम पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सीएम हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में 23 पदक जीतने वाले जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में गिने जाते थे। इसके बाद 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके 21 वर्षीय बेटे युवराज राणा ने मुखाग्नि दी। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराया। उनका पार्थिव शरीर देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से चार्टर्ड विमान के जरिए वाराणसी पहुंचाया गया था। श्रद्धांजलि सभा के बाद पार्थिव देह को राजघाट ले जाया गया और वहां से नाव के जरिए गंगा मार्ग से मणिकर्णिका घाट पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह और नीरज सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने कंधा दिया। घाट पर गंगा स्नान के बाद वैदिक रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। तस्वीरें देखिए- गुरु को अंतिम विदाई देते वक्त भावुक हो गई थीं मनु भाकर ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर 15 जून को अपने कोच जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने देहरादून पहुंची थीं। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करते ही वह भावुक हो गईं और जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा से लिपटकर रो पड़ीं। मनु भाकर के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जसपाल राणा की अहम भूमिका रही। जूनियर स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक उन्होंने मनु का लगातार मार्गदर्शन किया। पेरिस ओलिंपिक में मनु के दो पदक जीतने के पीछे भी जसपाल राणा की कोचिंग और अनुभव को बड़ी वजह माना जाता है। पिता ITBP में रहे, बचपन में राणा को थमाई पिस्टल जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी में हुआ था। हालांकि मूल रूप से वह टिहरी के रहने वाले थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, यानी ITBP में तैनात थे। बाद में वे उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। शूटिंग के प्रति उनका विशेष लगाव था और उन्होंने ही बेटे को महज 10 साल की उम्र में पिस्टल पकड़ा दी थी। परिवार में खेल का माहौल इतना मजबूत था कि उनकी बहन सुषमा सिंह और भाई सुभाष राणा भी राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज बने। कम उम्र से ही जसपाल का अधिकांश समय शूटिंग रेंज में बीतने लगा और यहीं से उस सफर की शुरुआत हुई जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया। राहुल गांधी से शूटिंग रेंज में शुरू हुई दोस्ती जसपाल राणा का रिश्ता सिर्फ खेल जगत तक सीमित नहीं था। उनकी राहुल गांधी के साथ साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ ही व्यक्तिगत रिश्ते थे। कुछ परिवारिक सूत्रों की मानें तो राणा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पहली मुलाकात भी शूटिंग रेंज में हुई थी। निशानेबाजी के साझा शौक ने दोनों को करीब लाया और बाद में राजनीति में आने के बाद भी यह रिश्ता बना रहा। 2012 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद जसपाल राणा पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे। राहुल गांधी के साथ उनकी कई मुलाकातें और सार्वजनिक कार्यक्रम चर्चा में रहे। उनके निधन पर राहुल गांधी ने भी शोक व्यक्त करते हुए भारतीय शूटिंग में उनके योगदान को याद किया। बीजेपी से कांग्रेस तक, पिता अलग दल में रहे खेल के बाद जसपाल राणा राजनीति में भी सक्रिय हुए। 2009 में वे बीजेपी के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे, हालांकि जीत नहीं सके। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा बीजेपी में सक्रिय थे, जबकि जसपाल कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे। पिता-पुत्र की अलग-अलग राजनीतिक राह उस दौर में उत्तराखंड की चर्चित राजनीतिक कहानियों में शामिल रही। राजनाथ सिंह परिवार से भी जुड़ा था रिश्ता जसपाल राणा की बहन सुषमा सिंह की शादी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा विधायक पंकज सिंह से हुई है। इस रिश्ते के चलते उनका परिवार देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों से भी जुड़ा रहा। खेल, राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने वाले जसपाल राणा अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसमें मेडल, रिकॉर्ड, शिष्य और प्रेरणा की लंबी श्रृंखला शामिल है। ———————————- ये खबर भी पढें… 49 की उम्र में थमा चैंपियन शूटर राणा का सफर:18 में अर्जुन अवॉर्ड तो 21 में मिला पद्मश्री, काशी में आखिरी इच्छा हुई पूरी उत्तराखंड में जन्मे दिग्गज शूटर, पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्डी जसपाल राणा (49) को शनिवार शाम वाराणसी में अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे युवराज (21) ने मुखाग्नि दी। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराया। (पढ़ें पूरी खबर)

पूल पार्टी में युवक की मौत, VIDEO:4 फीट गहरे पूल में ऊंचाई से छलांग लगाई, सिर फ्लोर से टकराने से जान गई

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग के एक रिसॉर्ट में स्विमिंग पूल में सिर के बल छलांग लगाने से युवक की मौत हो गई। हादसे का वीडियो सामने आया है। मृतक की पहचान श्रीनिक मिलिंद टाकले के रूप में हुई है। वह कोल्हापुर जिले का रहने वाला था। वीडियो में वह करीब 8 से 10 फीट ऊंचाई से स्विमिंग पूल में सिर के बल छलांग लगाता नजर आ रहा है। इसके बाद उनका सिर पूल के फ्लोर से टकरा जाता है। गंभीर चोट लगने से श्रीनिक की मौत हो जाती है। घटना की 3 तस्वीरें… स्विमिंग पूल की गहराई करीब 4 फीट थी पुलिस के मुताबिक, जिस स्विमिंग पूल में श्रीनिक ने छलांग लगाई थी, उसकी गहराई करीब 4 फीट थी। हादसे के बाद उनके दोस्त उन्हें तुरंत मालवन ग्रामीण अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। श्रीनिक 20 जून को अपने 9 दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने मालवन के वायरी इलाके स्थित एक रिसॉर्ट गया था। इसी दौरान स्विमिंग पूल में हादसा हो गया। हादसे से कुछ देर पहले रिकॉर्ड किए गए वीडियो में श्रीनिक टाकले अपने दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल के किनारे डांस करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… सिया के इशारे पर चेतन ने केतन को धक्का दिया:पुलिस का दावा- केतन गिरते वक्त सिया को पकड़ न पाए, इसलिए बहाने से बैठ गई पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस ने कई खुलासे किए है। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहगढ़ किले पर सिया गोयल ने पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठकर चेतन चौधरी को इशारा दिया। इसके बाद पीछे चल रहे चेतन ने केतन को खाई में धक्का दे दिया। पूरी खबर पढ़ें

हिमाचल में भारी बारिश की चेतावनी:विजिबिलिटी गिरेगी, सतर्क रहने की एडवाइजरी; 5 दिन बाद आ सकता है मानसून

हिमाचल प्रदेश के कई भागों में बीती रात और आज सुबह भारी बारिश हुई। मंडी के मारुतिदेवी में सबसे ज्यादा 63.6 मिमी, बिलासपुर के बरमाणा में 51.4 मिमी, घागस में 50.0 मिमी और शिमला के शिलारू में 33.6 मिमी बारिश हुई। इस बीच मौसम विभाग ने आज दोपहर 12 बजे तक फिर से भारी बारिश की चेतावनी दी। ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, शिमला, सोलन व सिरमौर जिला में तेज बारिश के साथ आंधी व तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल स्पीति जिला में यलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है। खराब मौसम के दौरान नदी नालों और लैंडस्लाइड संभावित क्षैत्रों में नहीं जाने की एडवाइरी जारी की गई है। इसी तरह, कई जगह विजिबिलिटी कम होगी। इससे वाहन चालकों को गाड़ी चलाने में परेशानी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य अगले छह दिन बारिश जारी रहेगी। खासकर एक जुलाई से चार जुलाई तक प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भारी बारिश के आसार हैं। 2 व 3 जुलाई को तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट 2 और 3 जुलाई को किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर प्रदेश के अन्य सभी जिलों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं 4 जुलाई को भी प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में तेज बारिश होने का पूर्वानुमान है। राज्य में रुक-रुक कर रही बारिश के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना बना हुआ है। इससे देशभर से पहाड़ों पर पहुंच रहे टूरिस्ट सुहावने मौसम का आनंद उठा रहे हैं। हालांकि मैदानी इलाकों में उमस भरी गर्म है। 5 दिन बाद पहुंच सकता है मानसून हिमाचल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने का इंतजार बढ़ता जा रहा है। मानसून तय समय से करीब एक सप्ताह पीछे चल रहा है। हालांकि, अभी तक मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून पहुंचने की कोई संभावित तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले पांच से छह दिन में मानसून राज्य के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर सकता है। अभी इन जगह अटका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अरब सागर के कुछ हिस्सों से लेकर गुजरात के सूरत, मध्य प्रदेश के इंदौर, झारखंड के डाल्टनगंज, बिहार के मोतीहारी और नेपाल सीमा तक पहुंच चुका है। इसके आगे बढ़ने की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। देश में दो जुलाई को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से मानसून के अगले दो-तीन दिनों में आगे बढ़ने की संभावना है। यदि मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ा तो हिमाचल में भी जल्द इसकी एंट्री हो सकती है।

राम मंदिर चोरी- चंपत राय से पुलिस की पूछताछ:अयोध्या के वकील बोले- आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे; सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ की गई। उनके बयान दर्ज किए गए। इसके बाद चंपत राय दिल्ली चले गए। इस बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वकील अनूप अवस्थी की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कोर्ट ने पूछा कि इतनी जल्दी क्या है। छुट्टियों के बाद ही मामला सुना जाएगा। इधर, पुलिस सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे जेल में बंद 8 आरोपियों के खाते खंगालने के लिए SBI की अयोध्या धाम ब्रांच पहुंची। 7 आरोपियों के खाते इसी ब्रांच में हैं। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट लिए। अब यह जांच की जाएगी कि मंदिर में नौकरी के बाद से उनके खातों में कितना पैसा आया। पुलिस ने बैंक के 2 कर्मचारियों को भी नोटिस दिया है। सोमवार को सभी 8 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस आरोपियों की रिमांड मांग सकती है। हालांकि, इससे पहले ही अयोध्या के वकीलों ने बड़ी बैठक की। इसमें फैसला लिया कि चढ़ावा चोरी के आरोपियों का केस कोई भी वकील नहीं लड़ेगा। साथ ही, चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के अयोध्या छोड़ने की मांग की। नहीं छोड़ने पर आंदोलन की चेतावनी दी। बैंक में पुलिस जांच की 2 तस्वीरें- SIT ने 23 जून को रिपोर्ट सौंपी, 2 दिन बाद गिरफ्तारी राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

इस्तीफे के तीसरे दिन चंपत राय दिल्ली गए:संघ राम मंदिर चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट बना रहा; नए सिरे से बनेगा ट्रस्ट

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद महासचिव चंपत राय रविवार शाम अयोध्या से दिल्ली रवाना हो गए। वे दोपहर तीन बजे तक राम मंदिर में ही थे। सूत्रों का कहना है कि चंपत राय अब 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में शामिल हो सकते हैं। उसी दिन उनके इस्तीफे पर विचार होना है। चंपत राय ने शुक्रवार को इस्तीफा दिया था। इधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी चढ़ावा चोरी के मामले पर नजर बनाए है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के निर्देश पर पूर्वी यूपी के क्ष्रेत्र प्रचारक अनिल कुमार अयोध्या पहुंचे हैं। वे साधु-संतों, महंतों और मंदिर से जुड़े लोगों से मिलकर लगातार बात कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर ट्रस्ट में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। PM मोदी के विदेश से लौटने के बाद ट्रस्ट के दोबारा गठन पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इसमें अयोध्या के संतों और समाज के कई वर्गों को जिम्मेदारी देने पर मंथन चल रहा है। मोहन भागवत को रिपोर्ट सौंपेंगे क्षेत्र प्रचारक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार अयोध्या में शनिवार (27 जून) से डेरा डाले हैं। उन्होंने शनिवार देर शाम राम मंदिर में 2 घंटे गुजारे। रामलला के दर्शन किए, साथ ही मंदिर के प्रमुख सेवादारों से बात भी की। इसके अलावा, अयोध्या के प्रमुख महंतों से चढ़ावा चोरी को लेकर बात की। अयोध्या में लक्ष्मण किलाधीश महंत मैथिलीरमण शरण, हनुमत निवास के महंत डॉ. मिथिलेशनंदिनी शरण, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास और सरयू आरती के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास से मिलकर उनकी राय ली। वे अभी अयोध्या में सोमवार को भी संतों-महंतों से बात करेंगे। इसके बाद अपनी रिपोर्ट बनाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत को सौंपेंगे। इससे पहले RSS की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैयाजी जोशी (सुरेश जोशी) अयोध्या में एक रात रुके थे। यहां मंदिर से जुड़े संतों-महंतों से बात की थी। वह अपनी रिपोर्ट RSS प्रमुख को दे चुके हैं। राम मंदिर के RMO अर्जुन देव भी SIT की रडार पर 1600 कैमरों की निगरानी का जिम्मा अर्जुन देव पर था राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में अब नया नाम सामने आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम जन्मभूमि में तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया है। चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम में लगे CCTV कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी अर्जुन देव के पास थी। इसके अलावा, राम जन्मभूमि में लगे करीब 1600 कैमरों की निगरानी भी अर्जुन देव के पास थी। अब निगरानी तंत्र में उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में उनकी 17 साल से अयोध्या में लगातार तैनाती और ट्रस्ट के कामों में सक्रिय दखल का भी उल्लेख किया गया है। RMO अर्जुन रामलला जब टेंट में थे, तब भी CCTV का काम देखते थे। SIT के सामने अकड़ में पेश हुए अर्जुन देव काउंटिंग रूम में रामलला के चढ़ावे की गिनती CCTV कैमरों की मॉनिटरिंग में होती थी। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद चढ़ावा चोरी कैसे हुई। निगरानी क्यों नहीं रखी गई। इसी आधार पर SIT ने अपनी शुरुआती 3 दिनों की जांच के दौरान अर्जुन देव से भी पूछताछ की थी। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर अर्जुन देव SIT के सामने पहुंचे, ऐंठकर कुर्सी पर बैठे। उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि वे अपने वकील के माध्यम से जवाब देंगे। बताया जा रहा है कि इस पर जांच अधिकारियों ने उन्हें फटकार लगाते हुए पद की गरिमा और मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी। ट्रांसफर कई बार हुआ, लेकिन हर बार रुकवा लिया अर्जुन देव साल 2009 से लगातार अयोध्या में तैनात हैं। इस दौरान कई बार उनके ट्रांसफर के आदेश जारी हुए, लेकिन हर बार उनका ट्रांसफर रुक गया। हाल ही में लखनऊ के लिए जारी ट्रांसफर आदेश भी निरस्त कर दिया गया था। अर्जुन देव के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से करीबी संबंध रहे हैं। इन्हीं संबंधों के चलते उनके तबादले बार-बार रुकते रहे। SIT ये भी पता लगा रही है कि आखिरी ट्रांसफर कौन रुकवा रहा था। बार-बार ट्रांसफर क्यों रोका गया। एक ही जिले में इतनी लंबी तैनाती का मतलब क्या था। ट्रस्ट के कामों में सक्रिय भूमिका पर भी सवाल उठे अर्जुन देव की निगरानी CCTV निगरानी के अलावा मंदिर परिसर के कंट्रोल रूम से पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच वायरलेस संचार को बनाए रखना, ड्यूटी पर तैनात जवानों से संपर्क रखना, वीआईपी मूवमेंट और आपात स्थिति में तत्काल सूचना का आदान-प्रदान कराना भी था। सूत्रों के मुताबिक, SIT की जांच में पता चला कि अर्जुन देव केवल वायरलेस और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं थे। जांच में सामने आया है कि वे VIP दर्शन व्यवस्था में ट्रस्ट की कई प्रशासनिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। इसी कारण उनकी कार्यशैली और अधिकार क्षेत्र से बाहर की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दो साल पहले अर्जुन देव ने शंकराचार्य को दर्शन से रोक दिया था करीब दो साल पहले अर्जुन देव उस समय भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और उनके सुरक्षाकर्मियों को रामलला के दर्शन के दौरान रोक दिया था। क्योंकि शंकराचार्य राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इसलिए वे अपने पद और मर्यादा के अनुसार अपने सहयोगियों, सुरक्षा कर्मियों के साथ दर्शन करना चाह रहे थे। बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने सीमित लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी थी। इस घटना के बाद शंकराचार्य नाराज होकर बिना दर्शन किए लौट गए थे। उस समय भी उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठे थे। ——————————- ये खबर भी पढ़िए… राममंदिर चढ़ावा चोरी-8 आरोपियों के घर पुलिस की एकसाथ छापेमारी: टिन्नू के घर अलमारी-बक्से खंगाले; अनुकल्प के यहां डायरी मिली राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल में बंद 8 आरोपियों के घरों पर रविवार सुबह 7 बजे पुलिस की 8 टीमों ने एक साथ छापेमारी की। इस दौरान 3 आरोपियों के घर पर ताला लगा था। पुलिस ने पड़ोसियों से सवाल-जवाब किए। चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर ताला लगा मिला। आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर पर भी छापेमारी हुई। पढ़ें पूरी खबर…

बंगाल- आज विधानसभा में पेश हो सकता है UCC बिल:भाजपा ने सरकार बनने के 6 महीने के अंदर लागू करने का वादा किया था

पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर सकती है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने का वादा किया था। 9 मई को नई सरकार का गठन हुआ था। इस विधेयक के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करने का प्रस्ताव है। इससे पहले मई में असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित किया गया था। इसी के साथ असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात ऐसा कर चुके हैं। UCC से जुड़े सवाल-जवाब… सवाल: क्या UCC सभी धर्मों पर लागू होगा? जवाब: प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है। हालांकि संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों को विशेष छूट मिल सकती है। सवाल: क्या धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे? जवाब: UCC मुख्य रूप से नागरिक मामलों से जुड़ा है। धार्मिक पूजा-पद्धति या आस्था से जुड़े मामलों पर इसका सीधा असर नहीं माना जाता। सवाल: क्या यह कानून लागू होते ही प्रभावी हो जाएगा? जवाब: विधेयक विधानसभा से पारित होने, राज्यपाल की मंजूरी और अधिसूचना के बाद ही लागू होगा। अब तक दो राज्यों में UCC बिल पारित, एक में लागू जनवरी 2025: उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में UCC विधेयक पेश हुआ। 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने UCC विधेयक को मंजूरी दी। क्रियान्वयन समिति ने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली सरकार को सौंपी। 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली। इस तरह उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। मार्च 2026: गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य बना गुजरात विधानसभा में मार्च 2026 में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कराया गया था। गुजरात UCC बिल पास करने वाला देश का दूसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया था। विधानसभा में बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया था। बिल बहुमत से पास हो गया। मई 2026: असम UCC बिल पास करने वाला तीसरा राज्य बना असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 27 मई को पेश किया गया था। यह बिल सदन से पारित भी हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही ‘पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों’ को भी इससे छूट दी जाएगी। आजाद भारत से पहले गोवा में UCC गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था।